<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ आर्थिक आज़ादी]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/aarthik-aajaadii</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/aarthik-aajaadii" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 30 Mar 2023 18:19:55 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[भारत में कितने SHG कहां ? ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/shg-count-across-states-in-india</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uJM7Zvmrh3HtIcYhT4br.JPG"><p dir="ltr">दुनिया में ऐसे लोगों की ज़रूरत सबसे ज़्यादा रहती है जो खुद के साथ सबकी सोचें. इनकी संख्या भले ही कम हो, लेकिन उनके इरादे और काम इतने बड़े है कि वो मिसाल बन जाते है. ऐसी ही मिसाल है, स्वयं सहायता समूह.</p><p dir="ltr">हमारे देश में इस वक्त 82,76,129 स्वयं सहायता&nbsp;समूह है , जो कि देश के हर कोने में आर्थिक आज़ादी और फाइनेंशियल लिटेरिसी का परचम लहरा रहे है. कश्मीर से कन्याकुमारी और अरुणाचल से गुजरात तक एक भी ऐसा राज्य नहीं है जहां SHG महिलाएं दिन रात मेहनत नहीं कर रही. ये कहना गलत नहीं है कि इन महिलाओं ने आज एक ऐसी उम्मीद कि किरण जलाई है जिसमें भारत को बदलने की ताकत है.&nbsp;</p><p dir="ltr">इस वक्त देश में सबसे ज़्यादा SHGs बिहार (10,54,925) में है. SHG&nbsp; की संख्या के हिसाब से दूसरा और तीसरा नंबर आता है, बंगाल (10,51,407) और आंध्र प्रदेश (8,53,122) का. मध्यप्रदेश (4,31,962), राजस्थान (2,53 219), उत्तर प्रदेश (6,97,068), में भी SHGs की संख्या लाखों में है. कुल 8,95,18,109 महिलाएं स्वयं सहायता से जुडी हैं। &nbsp;सबसे अधिक 1,22,00,889 महिलाएं बिहार राज्य में हैं.</p><p dir="ltr">हालांकि इन राज्यों के SHG का प्रतिशत यहाँ की आबादी के मुकाबले काफी कम है. जैसे यू .पी. (आबादी के हिसाब से सबसे बड़ा राज्य ) में SHG का अनुपात आबादी का 0.28% प्रतिशत है.&nbsp; म. प्र.की आबादी का 0.5 % और राजस्थान की आबादी का 0.3 %. ग्रामीण महिलाओं के जनसंख्या के अनुपात को भी अलग करके देखा जाए तब भी यह प्रतिशत काफी कम है. SHG&nbsp; की संख्या के हिसाब से सबसे बड़े राज्य बिहार में SHG का प्रतिशत 0.6 % है जो की&nbsp; बाकि सभी राज्यों से कुछ ही ज़्यादा है. और जब बिहार, मध्यप्रदेश या राजस्थान की ग्रामीण पृष्ठभूमि देखें तो यह निम्न स्तर पर है. लद्दाख, गोवा, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल, और हरियाणा में तो संख्या की स्थिति और भी खराब है.</p><p dir="ltr">ग्रामीण महिला जनसंख्या और SHG से जुड़ने में इस बड़े अंतर की कई वजह है. भारत में स्वयं सहायता समूहों की संख्या के पीछे कई कारण है उनमें से आर्थिक विकास, सरकार की नीतियां, सामाजिक स्थिति और मान्यताएं . ऐसा हर राज्य जहां SHG की संख्या 5 लाख से ऊपर है, वहां सामाजिक भागीदारी और चेतना ज़्यादा है.</p><p dir="ltr">बिहार राज्य सरकार ने SHG के लिए बिहार रूरल लिवेलीहुड्स प्रमोशन सोसाइटी (BRLPS), या&nbsp; 'जीविका' जैसी पहल की. यह महिलाओं को SHG से जोड़ कर अपना काम शुरू करने के लिए आर्थिक और तकनीकी मदद करती है.</p><p dir="ltr">इसी तरह बंगाल में भी सरकार ने 'आनंदधारा स्कीम' और 'बांग्ला स्वनिर्भर&nbsp; कर्मसंस्थान प्रकल्प' जैसे कार्यक्रम चलाए जो की महिलाओं को आर्थिक, तकनिकी, और भी कई तरह की ट्रेनिंग देतीं है.&nbsp;</p><p dir="ltr">इस तरह मध्यप्रदेश की सरकार ने भी काफी योजनाएं चलाई जिससे मध्य प्रदेश में SHGs की संख्या में बढ़ोतरी आई . मध्यप्रदेश में आज तक़रीबन 4,31,962 SHG काम कर रहे है और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है.&nbsp; इसका कारण मध्यप्रदेश सरकार का बैंकों द्वारा कम ब्याज दर रखवाना और कई तरह के प्रोत्साहन महिला स्वयं सहायता समूहों को दिए जाना है. साथ ही उन्हें दी जाने वाली सहायता सीमा 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2100 करोड़ रुपये कर दी गयी है. इस से SHG महिलाओं को भारी ब्याज के जाल से छुटकारा पाने में बहुत मदद मिली. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने SHG को अपने आत्मनिर्भर म प्र 2023 के विज़न में सबसे ऊपर रखा है. सरकार, बैंक, और कॉर्पोरेट के इस तरह के प्रयास SHG की संख्या और स्वरुप को लगातार बढ़ाने में मददगार साबित होंगे.</p><p><br data-mce-bogus="1"></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Thu, 30 Mar 2023 18:19:55 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/shg-count-across-states-in-india]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uJM7Zvmrh3HtIcYhT4br.JPG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uJM7Zvmrh3HtIcYhT4br.JPG"/></item><item><title><![CDATA[जंगल जंगल बात चली है, पता चला है... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-contributes-in-nature-conservation</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/otoimf3sstUJy34ai3tG.jpg"><p>बंजर इलाका और गर्म हवाएं, बस ऐसा ही कुछ हाल था पुंजापुरा पहाड़ी का. देवास जिले के गांव पानकुआं के लोग बस अपनी पहाड़ी और इलाके का हाल देख खून के आंसू बहाते थे. फिर पिछले 3 साल में बदलाव की हवाएं चली और  नज़ारा कुछ ऐसा बदला कि बंजर पहाड़ी पर अब घने जंगल है और ठंडी हवाएं गांव वालों को राहत दे रही है . बड़ी बात यह की पुंजापुरा पहाड़ी अब "जंगल बैंक" साबित हो रही है. यह कमाल कर दिखाया SHG महिलाओं ने. अब यहां के ग्रामवासी विशेषकर SHG महिलाएं इस "जंगल बैंक " को संवारने और बढ़ाने में दिन-रात एक कर रहीं हैं.    </p>
<p>सिर्फ जंगल ही नहीं यहां पनपी घास भी दोहरा फायदा करा रही है. इस घास से SHG महिलाओं के पशुधन की दूध मात्रा बढ़ गई है. और चारे के लिए भी अब उन्हें दूर नही जाना पड़ता. </p>
<p>SHG महिलाओं ने अपने प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए बांस के पेड़ लगाना शुरू किए .अब जहां तक नज़र जाती है वहां तक बांस ही बांस के घने पेड़ वाला जंगल नज़र आता है. प्राकृतिक खूबसूरती से इस इलाके को नई पहचान मिल रही है.  बांस के इस जंगल ने स्वसहायता समूह SHG की उम्मीदें भी बढ़ गई.  विकास महिला स्वसहायता समूह की अध्यक्ष किरण सौलंकी बताती हैं -" हमारे इंतज़ार के दिन ख़त्म हुए. तीन साल की कड़ी मेहनत से बांस के ये पौधे अब बड़े होंगे है . यह हमारे समूह के लिए कमाई का जरिया बन जायेंगे. समूह की महिलाओं को अभी आठ हजार रुपए महीने मिलता है.कुछ ही दिनों में बांस की कटाई शुरू हो जाएगी. हमें इसका सीधा फायदा मिलेगा."</p>
<p>वन विभाग की कोशिशों और सहयोग से ही पुंजापुरा तालाब के किनारे बांस के पौधे रोपे गए . डिप्टी रेंजर मूलचंद भार्गव कहते हैं- "यह खास तरह के बांस वैसे नार्थ-ईस्ट इलाके में पाए जाते हैं. यह नमी और ठंडे प्रदेशों में पनपते हैं. यह मालवा इलाके में नया प्रयोग है. वन समिति और स्वसहायता समूह की महिलाओं ने ताकत झोंकी और तीन साल में जंगल खड़ा कर दिया."</p>
<p>विकास समूह की सदस्य रेखा तंवर कहती हैं -" मेरी जिंदगी तो मजदूरी और गरीबी में निकल रही थी. बंजर पहाड़ी पर जब पौधे लगाए ,तो सोचा नहीं था कि ये जंगल जिंदगी को पटरी पर ला देंगे. मेरे मवेशी एक या डेढ़ लीटर से ज्यादा दूध नहीं देते थे. जंगल से घास मिलने लगा. अब मवेशी चार लीटर से ज्यादा दूध देने लगे. धंधे में फायदा हुआ तो गाय ,भैंस और खरीद ली. बच्चे स्कूल जाने लगे."</p>
<p>इस जंगल की देख-रख करने वाले  जय लक्ष्मी समूह की सचिव कहती हैं -"हमारे पास काम नहीं था. यह बंजर पहाड़ी पर जब बांस लगाए  तब भी भरोसा नहीं था कि यह हमारे सपनों को हकीकत में बदल देगा. हमको अभी मुफ्त में घास मिल रही. मवेशी तंदरुस्त हो गए."    </p>
<p>अध्यक्ष सपना निगम भी बहुत खुश है. वह बताती है -" मेरे मवेशी ही नहीं बल्कि समूह के सभी सदस्यों को ये फायदा हुआ. जब बांस काट के बिकेंगे तब हमारी कमाई और बढ़ जाएगी." इस इलाके में साढ़े बारह हजार से ज्यादा बांस के पेड़ लहलहा रहें हैं. रेंजर नाहर सिंह भूरिया कहते हैं -" ये जंगल खड़ा करना हमारे लिए बड़ी चुनौती था. गांव की वन समिति के अलावा दो स्वसहायता समूह की दीदियों से यह अनुबंध किया. अभी आठ हजार रुपए महीने दे रहे है." </p>
<p>जिला पंचायत की परियोजना प्रबंधक शीला शुक्ला कहती हैं -"जिले के दो स्वसहायता समूह की बाइस महिलाओं को सीधा लाभ मिला. ये बांस  कटाई और बेचने से बड़ी कमाई कर सकेंगी. अभी घास मुफ्त में मिल रही है. गरीबी झेल रही महिलाओं और ग्रामीणों के जीवन स्तर सुधारने के लिए ये जंगल वरदान साबित हुआ." जिले के सहायक परियोजना प्रबंधक रामसिंह ने बताया -"तीन साल पहले 2022 में 25 हजार घास  के पुले महिलाओं को मिले, जबकि 2022 तक बत्तीस हजार पुलों को काटा. लगभग बीस हजार पुले विभाग के पास स्टॉक में हैं. ये बीस हैक्टेयर जमीन पर जबरदस्त ग्रोथ ले रहें हैं.</p>
<p>प्रकृति को सहेजना संभालने के साथ संसाधनों से कमाई करने की यह अनूठी कहानी है. आर्थिक आज़ादी की तरफ बढ़ते कदमों के साथ SHG महिलाएं जीवन के अलग अलग क्षेत्रों में अपने निशान छोड़ रही हैं और देश समाज के लिए कितना कुछ कर रही है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Tue, 21 Mar 2023 14:04:23 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-contributes-in-nature-conservation]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/otoimf3sstUJy34ai3tG.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/otoimf3sstUJy34ai3tG.jpg"/></item><item><title><![CDATA[जो भी करेगा गलत काम, भरना पड़ेगा उसको दाम ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-take-action-against-illegal-liquor-shops</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/l4pSB3wPdT0QqDp2g9lY.jpeg"><p>एक महिला शादी करके अपने परिवार को छोड़कर किसी और के घर सिर्फ़ अपने अरमानों के साथ जाती है. वो चाहती है  इस नयी जगह को अपना बना ले और वहां सुरक्षित रहे. लेकिन कभी कभी उसकी इतनी छोटी सी उम्मीद भी पूरी नहीं होती और वो ना जाने कितने अपराधों का शिकार बन जाती है. </p>
<p>घरेलु अपराध की करीब 6900 शिकायतें 2022 में दर्ज की गयी, ये तो वो शिकायते है जो सामने आई. कितनी ही महिलाएं अपने घर में चुपचाप इस हैवानियत को झेलती है. कुछ महिलाएं ही इस हालात को समाज और प्रशासन के सामने ला पाती है.</p>
<p>शराब घरेलु हिंसा का एक बहुत बड़ा कारण है. आए दिन हमें ये खबरे सुनने मिल जाती है, और हम इन बातो को सुन के अनसुना कर देते है. बस ये ही तो अंतर है हम में और SHG की महिलाओं में. जो की न सिर्फ आर्थिक आज़ादी के लिए लड़ रहीं है बल्कि सामाजिक बदलाव लाने में भी काम कर रही हैं. </p>
<p>जैसे ओडिशा के खुरदा जिले के सरणाई गांव में SHG की कुछ महिलाओं ने सामाजिक और आर्थिक परेशानियां बढ़ते देख, शराब की एक गैरकानूनी दूकान को तोड़ दी. इन SHG महिलाओं ने पहले प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन लंबे इंतज़ार के बाद भी प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए. परेशान होकर उन्होंने खुद कुछ करने की ठानी और बातचीत की सारी कोशिशें नाकामयाब होने के बाद, सारी SHG महिलाओं ने सामाजिक बुराई की प्रतीक उस दुकान को तहसनहस कर दिया. </p>
<p>महिलाओं ने बताया - "ये गैरकानूनी दूकान 3 लोग मिल के चला रहे थे. हमने लगातार शिकायतों की लेकिन ना तो पुलिस न ही किसी अधिकारी ने कुछ किया. "उस दुकान और अहाते में मौजूद असामाजिक तत्वों की वजह से गांव की महिलाओं का घर से निकलना मुश्किल हो गया था. </p>
<p>कहानी चाहे महिला सशक्तीकरण की हो, पढाई लिखाई को बढ़ावा देने की हो, सामाजिक बुराइयों को ख़त्म करने की हो SHG दीदियां कभी पीछे नहीं रहती. SHG महिलाएं घरेलू हिंसा, छेड़छाड़, दहेज जैसे सामाजिक अपराध और कुरीतियों से लड़ने में बहुत कारगार भूमिका निभा सकती है. SHG महिलाओं को अब यह मंत्र अपनाना चाहिए की जो भी करेगा गलत काम, भरना पड़ेगा उसको दाम.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sun, 19 Mar 2023 14:00:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-take-action-against-illegal-liquor-shops]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/l4pSB3wPdT0QqDp2g9lY.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/l4pSB3wPdT0QqDp2g9lY.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[स्मृति ईरानी ने SHG को मीडियम एन्टेर्प्रिसेस में बदलने पर दिया ज़ोर ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/wcd-minister-smriti-irani-emphasizes-on-transitioning-womens-small-enterprises-into-mid-sized-companies</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yE4ON49F3rlTiFuYsMhD.PNG"><p>केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, जब यह बताती है कि सिर्फ़ 40% महिलायें अपनी कंपनियों में टॉप पोसिशन पर जाना चाहती हैं, तो वो चर्चा का विषय उन 40% महिलायें पर नही बल्कि उस 60% पर ले जाती हैं जो सामाजिक, पारिवारिक, या लैंगिक कारणों की वजह से आगे बढ़ने की कोशिश तो दूर, उसके बारे में सोचने से भी हिचकिचाती हैं. सरकार ने तो स्वसहायता समूहों (SHG) के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को अपने बजट में पहले पन्ने पर जगह दी है. अब बारी इस मौके को भुनाने की. </p>
<p>कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन इंडस्ट्री (CII) पार्ट्नर्शिप समिट में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने महिलाओं को सामाजिक बदलाव का कोर माना. देशभर में बढ़ती आर्थिक क्रांति की अगुवाई आज उस तबके की महिलायें कर रही हैं जिनकी क्षमताओं पर समाज ने सवाल उठाए. ये 9 करोड़ महिलायें देशभर के 80 लाख स्वसहयता समूहों की सदस्य हैं. ये वही महिलायें हैं जिनसे कभी पैसों और ख़र्चों को लेकर राय नही ली गई. आज यही महिलायें 30-32 बिलियन रुपयों का क्रेडिट संभाल रही हैं. समय पर लोन का भुगतान कर NPA दर 2% से भी कम पर मेंटैन कर रहीं हैं जो कि पुरुषों की तुलना में काफ़ी बेहतर है. </p>
<p>SHG की क्षमताओं और उनके होते विकास को देखते हुए स्मृति ईरानी ने महिलाओं के लघु उद्योग को मध्य स्तरीय कंपनियों में परिवर्तित करने पर ज़ोर दिया. ये महिलायें देश के GDP में योगदान देने के लिए और कार्यबल का हिस्सा बन हर क्षेत्र में टॉप पोसिशन पर पहुंचने में सक्षम हैं. अकाउंट मैनेजमेंट हो या डिजिटल साक्षरता, ये महिलायें सबकुछ कर सकती हैं जिसका सबूत उन्होंने कोरोना माहमारी के समय दिया. आंगनवाड़ी हो या आशा कार्यकर्ता, स्वसहायता समूह की सदस्य हो या स्वास्थ्य्कर्मी, सभी ने लॉक्डाउन के समय डेटा और ओबसर्वेशन डिजीटली देकर सरकार की मदद की. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/4Al7B5LLKnQMhoPlB8eS.jpg" alt="CII summit 2023"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: CII</em></span></p>
<p>कोरोना माहमारी के बाद दोबारा अपने पैरों पर खड़ी होती दुनिया में इन महिलाओं के कौशल का उपयोग अभी तक हुए नुकसान से उभरने के लिए किया जा सकता है. इन महिलाओं को ट्रेनिंग और आर्थिक सहायता देकर इनके समूहों को कंपनी बनने में मदद मिल सकती है . देशभर में चल रही आर्थिक क्रांति को इससे गति मिल सकेगी. रविवार विचार का मानना है कि CII जैसे उद्योग के महा संघ स्वसहयता समूहों के मुद्दों पर प्रकाश डालेंगे तो ये भी इस्टैब्लिशड उद्योगों से सीखकर अपने काम को नई ऊंचाई दे सकेंगे. बड़ी इंडस्ट्री से मिले सहयोग से महिलाओं की आर्थिक आज़ादी की क्रांति को मज़बूती मिल पाएगी .</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 17 Mar 2023 12:47:06 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/wcd-minister-smriti-irani-emphasizes-on-transitioning-womens-small-enterprises-into-mid-sized-companies]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yE4ON49F3rlTiFuYsMhD.PNG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yE4ON49F3rlTiFuYsMhD.PNG"/></item><item><title><![CDATA[आरंभ से आज... SHG के साथ NABARD ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/nabard-supporting-shg</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6uwPWfDEe6waipgrx61j.jpg"><p>2023 SHGs के लिए सबसे महत्वपूर्ण साल है. जहां 2023 के बजट में और G 20 के कोर एजेंडा में सरकार SHG के सशक्तिकरण पर ज़ोर दे रही है वही इस महिला आर्थिक आज़ादी की क्रांति को शुरू हुए 30 साल हो गए हैं. किसी भी सामाजिक और आर्थिक क्रांति के लिए 30 साल का वक़्त भले ही छोटा है लेकिन इन 30 सालों में 81 लाख SHGs देशभर में बनाए गए हैं जिनमें से 84% महिला सदस्य हैं. ग्रामीण विकास के उद्देश्य से शुरू हुआ ये सफर आज ग्रामीण अंचल की महिलाओं के सशक्तिकरण का सबसे कारगर माध्यम बन चूका है.</p>
<p>भारत में SHG को अनूठा स्वरूप मिला और यह मुहीम विश्व की सबसे बड़ी माइक्रोफाइनेंस प्रोग्राम के तौर पर पूरी दुनिया में छा गई. कैसे हुई इस सफर की शुरुआत ?  कैसे हासिल किया भारत ने यह मुकाम ? यह तो बहुत लंबी दास्तान हो जाएगी लेकिन SHG क्रांति को भारत में खड़ा करने में NABARD ne महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.  </p>
<p>1982 का वो साल जब 'नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चरल एंड रूरल डेवलपमेंट' उर्फ़ NABARD को स्थापित किया गया. NABARD  का उद्देश्य था ग्रामीण इलाकों की आर्थिक स्थिति में बदलाव लाना. इस मिशन को मद्देनज़र रखते हुए वर्ष 1992 में NABARD ने 'सेल्फ हेल्प ग्रुप-बैंक लिंकेज प्रोग्राम' की शुरआत की. इस 'SHG - BPL' मॉडल का मुख्य लक्ष्य गांवों और कस्बों को आर्थिक रूप से मज़बूत करने के लिए SHGs को बैंको से जोड़ना है. </p>
<p>500 SHGs से शुरू हुआ यह सफ़र देखते ही देखते 81 लाख SHGs में तब्दील हो गया. जिसने देश के 10 लाख घरों को समर्थ और सक्षम बनाया. इस माइक्रोफाइनेंस प्रोजेक्ट की सफलता के पीछे का राज़ जानने के लिए कई सारे रिसर्च पेपर्स और थीसिस लिखे गए.  रिसर्च से पता चला की  'SHG - BPL' प्रोग्राम अपने 'कॉस्ट-इफेक्टिव मैकेनिज्म' के कारण आसानी से गरीब से गरीब तबके के लोगों तक आर्थिक सेवाएं उपलब्ध करवा पाता है. इतना ही नहीं माइक्रोफाइनेंस की दुनिया में आया यह बदलाव NABARD और अनेक संघठनो के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है.</p>
<p>कई NGOs ने 'सेल्फ हेल्प ग्रुप प्रमोटिंग इंस्टीटूशन' (SHPI) की भूमिका निभाते हुए SHGs को बैंको से जोड़ने में मदद की. NGOs की इस पहल से प्रेरित होकर NABARD ने भी 'सेल्फ हेल्प ग्रुप प्रमोटिंग इंस्टीटूशनस ' (SHPI) बनाना शुरू कर दिये.  SHPI से जुड़ने  के लिए  NABARD ने  ग्रामीण वित्तीय संस्थानों, फार्मर क्लब , इंडिविजुअल रूरल वालंटियर्स को 'प्रोत्साहन अनुदान सहायता' देना शुरू किया. SHGs के साथ मिलकर काम कर रहे बैंको को  100% पुनर्वृत्ति भी दी गयी. </p>
<p>स्वसहायता समूह बनाने के बाद SHG सदस्यों के लिए ट्रेनिंग वर्कशॉप्स, सेमिनार्स आयोजित किये गए. समूह की महिला सदस्यों को रोज़गार दिलवाने के लिए उन्हें नाबार्ड माइक्रो एंटरप्राइज डेवलपमेंट प्रोग्राम और लाइवलीहुड - एंटरप्राइज डेवलपमेंट प्रोग्राम्स से जोड़ा गया. SHGs में समय - समय पर  उभरने वाली मुश्किलों को सुलझाने के लिए नाबार्ड ने  ग्रुप सेविंग्स , जॉइंट लायबिलिटी ग्रुप्स का गठन , केश क्रेडिट का सैंक्शन जैसे बदलाव जारी किये. </p>
<p>कोरोना काल में SHGs का काम रुके नहीं इसलिए 'इ-शक्ति ' प्लेटफार्म का भी गठन किया गया. वही SHGs ने भी मास्क्स और सांइटिज़ेर्स बनाकर NABARD के पिछले ३० सालों की मेहनत को सरकार और समाज के सामने प्रस्तुत किया. उस विषम काल में SHG और NABARD की महत्ता को देश दुनिया ने न केवल समझा बल्कि कोरोना काल के बाद SHG को प्रोत्साहित भी किया.</p>
<p>आज SHG को आगे बढ़ाने का श्रेय सरकार के साथ NABARD जैसे संस्थानों को जाता है. SHG क्रांति की रीड की हड्डी बैंक लिंकेज प्रोग्रम की शुरुआत जहां NABARD ने करी वहीं कैटालिटिक केपिटल फंड भी मुहैया कराएं. इस तरह महिला को देश , समाज  और घर पर भी स्थान दिलाने वाले SHG आंदोलन के प्रारंभ से लेकर आज प्रणेता के रूप में NABARD मौजूद है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 17 Feb 2023 16:38:22 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/nabard-supporting-shg]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6uwPWfDEe6waipgrx61j.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6uwPWfDEe6waipgrx61j.jpg"/></item><item><title><![CDATA[G20 के W20 फोरम पर SHG फोकस मे ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/g20-focuses-on-shg</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/liCFNUDT27gplNPtXtGc.jpg"><p dir="ltr">भारत को G20 की प्रेसिडेंसी मिलना वैसे ही गर्व और सामरिक महत्व का मसला है . उसके साथ भारत ने G20 का एजेंडा महिला सशक्तिकरण सेट किया. इसी के तहत W20 की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाती है. W20 महिला नेताओं का वो समूह है जो G20 देशों में लैंगिक समानता और महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है. वैसे तो W20,G20 का ही आधिकारिक हिस्सा है लेकिन इसकी अपनी अलग महत्ता भी है.  इसको G20 के साथ जुड़ने के लिए एक मंच के रूप में स्थापित किया गया है. W20 नागरिक समाज संगठनों, शिक्षाविदों, निजी क्षेत्र और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों से बना है. यह G20 के साथ मिलकर काम करता है जो दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों के जीवन को सुधारता है.  </p>
<p dir="ltr">W20 के तहत  ही 11 -12 फरवरी 2023 को आगरा में G20 EMPOWER मीट हुई.  इस के एजेंडे का केंद्र रहा भारतीय महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण.13 सदस्य देशों और 7 अतिथि देशों के करीब 150 प्रतिनिधियों ने भागीदारी दर्ज की. G20 ने एक ऐसा मंच दिया जहां लैंगिक समानता पर काम कर रहे देशों को एक जगह लाकर, उनके विचारों और रणनीतियों को ठोस परिणामों में बदला जा सके. इस मीट का फोकस वूमेन लीडरशिप, जेंडर डिजिटल डिवाइड, एजुकेशन एंड स्किल डेवलपमेंट रहा. </p>
<p dir="ltr">भारत में करीब 140 लाख एमएसएमई और कृषि व्यवसाय को महिलाएं चला रही हैं. मैकिन्से की एक रिपोर्ट का कहना हैं कि भारत अपने GDP में 18% तक की बढ़त कर सकता है यदि देश में महिला कार्यबल की भागीदारी भी शामिल हो सके. महिलाओं की फाइनेंशियल लिटरेसी पर फोकस कर उन्हें कार्यबल में शामिल करने की पहल भारत सरकार ने की. भारत के लिए SDG 5: लैंगिक समानता हासिल करने के लिए, भारत सरकार ने स्टैंड-अप इंडिया, पीएम मुद्रा योजना, बेटी बचाओ बेटी पढाओ,पोषण अभियान आदि शुरू किये. इन सभी योजनाओं को जो मज़बूत कड़ी जोड़ती हैं वो हैं SHG जिसने महिलाओं के अपना रोज़गार शुरू करने के अवसर बढ़ाये.  </p>
<p dir="ltr">जिन मध्यमवर्गीय परिवारों में महिलाओं से बैंक और पैसों के मसलों में राय तक नहीं ली जाती, वहीं SHG से बचत सीख कर और कम ब्याज दरों पर लोन लेकर, महिलाओं ने अपना रोज़गार शुरू किया. आपको बतादें कि भारत में 81 लाख स्वसहायता समूहों में 84% महिला सदस्य हैं, इनमे लगभग 90 % SC/ST महिलाएं हैं.  भारत में इन समूहों ने महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को सुधारा. लैंगिक समानता का लक्ष्य लेकर सरकार के द्वारा बनाई गई योजनाओं को SHG ने सहारा दिया है.  </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/eA8HfnthkJLvTt0KDYIH.jpeg" alt="W20"></p>
<p dir="ltr">जनजातीय केंद्रीय मंत्री, अर्जुन मुंडा ने दुनिया भर में महिलाओं के आर्थिक विकास पर ज़ोर देते हुए कहा कि फाइनेंशियल इन्क्लुशन को महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण का उपकरण माना जाए. SHG भी फाइनेंशियल इन्क्लुशन की दिशा में काम कर रहें हैं. SHG ने अनुसूचित जाति/जनजाति की महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की है जिसने उनका सामाजिक उत्थान हो पाया.   </p>
<p dir="ltr">स्वसहायता समूहों ने महिलाओं के कौशल और उनके शुरू किये व्यवसायों को बढ़ावा देने में मदद की. प्रधान मंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) जैसी वित्तीय सहायता देने वाली योजनाओं ने महिलाओं के व्यवसायों की चुनौतियों में से एक को संबोधित किया जिससे उन्हें - आसानी से कम ब्याज दर पर आवश्यकता-आधारित उधार मिल सका. तब से, 4600 लाख से अधिक बैंक खाते खोले गए, जिनमें से 56% महिलाओं के हैं. 2015 और 2022 के बीच, पीएमजेडीवाई खातों में औसत जमा राशि 1,279 रुपये से तीन गुना बढ़कर 3,761 रुपये हो गई. ऐसा कहा जा सकता है कि जन धन और स्वसहायता समूहों ने एक दुसरे का फ़ायदा किया . G20 ने इसी बात पर ज़ोर दिया. </p>
<p dir="ltr">इसी तरह, उद्यम सखी पोर्टल ने महिला उद्यमियों को सरकारी योजनाओं, नीतियों और गतिविधियों के बारे में जानकारी देकर, SHG को बढ़ने में मदद की. वहीं, आजीविका मार्ट के नेटवर्क को SHG उत्पादों ने फैलाया. SHG से मिली आर्थिक आज़ादी ने न केवल महिलाओं की ज़रूरतें पूरी की पर समाज ने भी उनकी अहमियत को पहचाना. ग्रामीण परिवेश की करीब 82,31,670 महिलाएं आज स्वसहायता समूहों से जुड़ी. जिस महिला ने कभी घर के पैसों के मसलों में अपनी बात नहीं रखी थी, उन्होंने अपने  समूह शुरू कर अपने पति का बोझ बांटा. SHG ने महिलाओं को एकजुट किया और साथ मिल कर उन्होंने घरेलु हिंसा, जुआ-शराब की लत, औरतों के ख़िलाफ़ होते जुर्म जैसे मुद्दों पर जमकर आवाज़ उठाई. सरकार के आजीविका मिशन से जुड़कर अन्य सरकारी योजनाओं का ज्ञान ओर ट्रेनिंग फ़ायदेमंद साबित हुई.  </p>
<p dir="ltr">समूह से जुड़कर विकसित हुई सोच का इस्तेमाल महिलाओ ने अपने बच्चों और परिवार के लिए सही निर्णय लेने में किया. उन्होंने शिक्षा के महत्त्व को समझा और अपने बेटा-बेटी को सामान शिक्षा देने का संकल्प लिया. बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान को इन्होने ओर ऊंचे मक़ाम पर पहुंचाया. शिक्षा के अभाव से SHG चलाने में परेशानी महसूस करने के बाद उन्होंने अपनी बेटियों को स्कूल पहुंचाया. SHG महिलाओं ने पोषण अभियान को भी नई ऊचाइयों पर पहुंचाया. पोषण अभियान के तहत अपने खेतों में फल ओर सब्ज़ियां लगाकर बच्चों को पोषण से भरपूर भोजन दिया ओर साथ ही उन फलों ओर सब्ज़ियों को बेचकर कमाई का ज़रिया भी बनाया.  </p>
<p dir="ltr">यह गर्व की बात है कि आज भारत को 20 देशों की अगुआई करने का मौका मिला. G20  में भारत ने महिला सशक्तिकरण जैसे ज़रूरी मुद्दे को उठाया जिसका कहीं न कहीं विकासशील देशों पर गहरा असर पड़ेगा. विकासशील देश हो या विकसित देश, महिलाओं की आर्थिक आज़ादी आज भी अधूरी है. G20 वो प्लेटफार्म है जो इस मुद्दे को सरहदों पार पूरे विश्व में ले जा सकेगा. <strong id="docs-internal-guid-d91295e0-7fff-6fad-3d54-6defad387bf1"></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 17 Feb 2023 16:34:57 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/g20-focuses-on-shg]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/liCFNUDT27gplNPtXtGc.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/liCFNUDT27gplNPtXtGc.jpg"/></item></channel></rss>