<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ आर्थिक क्रांति]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/aarthik-kraanti</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/aarthik-kraanti" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 15 Jul 2023 16:40:44 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[ऑनलाइन माइक्रोफाइनेंस से बढ़ा फाइनेंशियल इन्क्लूशन ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/importance-of-microcredits-in-rural-india</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/fIL7XiYrvkGACYDfy6Er.jpg"><p><iframe width="661" height="371" src="https://www.youtube.com/embed/wl7pQZlfeTU" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p dir="ltr"><span>इंटरनेट की मदद से तरह-तरह की सेवाएं उन कोनों तक पहुंच रही हैं जहां ऑफलाइन तरीके कारगर साबित होते नहीं दिखाई दिए. ऑनलाइन माइक्रोफाइनेंस भी उन्हीं सेवाओं में से एक है जो ग्राहकों तक बचत खाते, लोन, बीमा, पैसे ट्रांसफर जैसी बैंकिंग सेवाओं को उस तबके तक पंहुचा रहा है जिनके पास गरीबी की वजह से पारंपरिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच नहीं थी.</span></p>
<p dir="ltr"><span>माइक्रोफाइनेंस की मदद से देशभर में स्वयं सहायता समूह आर्थिक क्रांति ला रहे हैं. ऑनलाइन मोड में माइक्रोफाइनेंस उपलब्ध होने की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों के उद्यमियों और कम आय वाले व्यवसायों की वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बड़ी है. AMA रिसर्च द्वारा प्रकाशित "ग्लोबल ऑनलाइन माइक्रोफाइनेंस मार्केट आउटलुक टू 2028" रिपोर्ट में बताया गया कि ऑनलाइन माइक्रोफाइनेंस के बारे में कम आय वाले समूहों के बीच बढ़ती जागरूकता की वजह से इसके बाजार में बढ़ोतरी हो रही है. वित्तीय समावेशन या फाइनेंशियल इन्क्लूशन को बढ़ाकर,  उद्यमियों को ज़रूरी वित्तीय संसाधनों तक पहुंचने में सक्षम बनाता है।</span></p>
<p></p>
<div itemprop="video" class="structured_video_wl7pQZlfeTU" itemscope="" itemtype="https://schema.org/VideoObject"><meta itemprop="uploadDate" content="2023-07-15T11:04:27+05:30"><meta itemprop="name" content="Microfinance in Rural India । Importance of Microcredits । CEOs of Microfinance institutions">
<div itemprop="interactionStatistic" itemtype="https://schema.org/InteractionCounter" itemscope=""><meta itemprop="interactionType" itemtype="https://schema.org/WatchAction"></div>
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</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Sat, 15 Jul 2023 16:40:44 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/importance-of-microcredits-in-rural-india]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/fIL7XiYrvkGACYDfy6Er.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/fIL7XiYrvkGACYDfy6Er.jpg"/></item><item><title><![CDATA[7 सुरों के साथ SHG की बात ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/world-music-day-songs-bind-shg-women-together</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/JLV8yxUCIag5W0RGiAYy.jpg"><p>संगीत (music) की भाषा को शब्दों और व्याकरण की ज़रुरत नहीं होती. ये सरहदें लांघकर भी भावना को दूसरों तक पहुंचा सकता है. संगीत हज़ारों सालों से मानव सभ्यता का एक अहम हिस्सा रहा है. मनमोहक धुनों, गीतों, और रागों का सांस्कृतिक, भावनात्मक और सामाजिक महत्व है. संगीत ख़ुशी को बढ़ाता है, दुःख को बांटता है, और उत्साह की लहर को नई ऊर्जा देता है. भारत में स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) के अपने गीत हैं, जो डोर बन कर इन समूहों को एक साथ बांधे रखते है. देशभर में स्वयं सहायता समूह (SHG) आर्थिक क्रांति (financial revolution) ला रहे है, महिलाओं को आत्मनिर्भरता की ओर लेकर जा रहे हैं. </p>
<p><em>बन गया सखियों का संगठन</em><br><em>मज़बूत बने ये वादा करो...</em></p>
<p>ये बोल उत्साह भरते हैं, आगे बढ़ने का जज़्बा देते हैं, और महिलाओं को साथ बांधने का काम करते हैं. ये गीत महज़ शब्द नहीं, ये महिलाओं के चुनौतियों को पार कर आत्मनिर्भर बनने के सफर में ईंधन का काम करता है. <br><em> </em><br><em>ध्यान लगाके ज़रा कान लगाके </em><br><em>अपने समूह के 13 सूत्र हैं... </em></p>
<p>इन गीतों (songs) से आपको समूह के नियमों का पता चल जायेगा. समय पर आना, बचत करना, एक दूसरे का साथ देना, और सामूहिक कल्याण के लिए काम करना- ये गीत इन सभी बातों पर ध्यान लाते हैं.  </p>
<p><em>एकसाथ बैठकर बात करने आओ </em><br><em>गरीबी हटाने का रास्ता बनाओ... </em></p>
<p>ये बोल आजीविका मिशन (Ajeevika Mission) के लक्ष्यों को सुरों में बांधते हैं और आर्थिक आज़ादी (Financial freedom) हासिल करने के सपने को ध्यान में रखते हुए काम करने के लिए मनोबल बढ़ाते हैं. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Wed, 21 Jun 2023 12:44:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/world-music-day-songs-bind-shg-women-together]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/JLV8yxUCIag5W0RGiAYy.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/JLV8yxUCIag5W0RGiAYy.jpg"/></item><item><title><![CDATA[राजनीति के मोहरे बने SHG ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/odisha-shgs-became-political-scapegoat</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/J5MV7oZi7dL8jnJUBoIP.jpg"><p>महिला सशक्तिकरण की दिशा में ख़ुदको साबित करने के लिए हर राज्य अपने स्वयं सहायता समूह की बढ़ती संख्या का सहारा लेते रहे हैं. ऐसा ही कुछ ओडिशा ने भी किया. ओडिशा सरकार ने खुद को महिला-शक्ति के एकमात्र संरक्षक के रूप में बाज़ार में उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ी. मिशन शक्ति कार्यक्रम के तहत कई महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) बनाकर उन्हें ऋण दिया गया. जब भी किसी मंच पर महिला सशक्तिकरण का विषय उठाया जाता है, तो सरकार अपनी पीठ थपथपाने का कोई मौका नहीं छोड़ती.</p><p>कई जगह ये SHG महिला सशक्तिकरण का साधन नहीं पर ठेकेदारों के हाथों बली का बकरा बनकर रह गए हैं. नबरंगपुर शहर में इच्छाबतिगुड़ा सिनेमा हॉल के पास एक शौचालय बनाने के लिए माँ ब्राह्मणीदेई स्वयं सहायता समूह को वर्क ऑर्डर दिया गया था. SHG के अध्यक्ष और सचिव को दिसंबर 2021 में 3 लाख रुपये का वर्क ऑर्डर मिला था. हालांकि, काम अभी भी अधूरा है और शौचालय कब पूरा होगा किसी को नहीं पता. बताया जा रहा है कि कांट्रेक्टर का कमीशन तय न होने की वजह से काम लटका हुआ है. महिलाओं को निर्माण का अनुभव न होने की वजह से वे काम पूरा करने के लिए दूसरे ठेकेदारों को शामिल करती हैं, जिसकी वजह से काम पूरा होने में देरी होती है. कार्य सही ढंग से या समय पर न होने की स्थिति में, ठेकेदार तो बच निकलते हैं, पर समूह की महिलाएं हर हाल में काम पूरा करने पर मजबूर हो जाती हैं क्योंकि सरकार से वर्क ऑर्डर इन्हें मिला होता है.&nbsp;</p><p>स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न व्यावसायिक पहलों को शुरू करने के लिए मिलने वाली राशि को अन्य परियोजनाओं में लगाया जा रहा है.&nbsp;इसके अलावा ब्याज मुक्त ऋणों के उपयोग में कई अनियमितताओं और कमियों को भी देखा गया. महिलाओं द्वारा लोन के मिले पैसों का इस्तेमाल शादी और अन्य व्यक्तिगत ज़रूरतों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है. कुछ SHG लोन के मिले पैसों को लोगों को उधार देकर &nbsp;ब्याज वसूल रहे हैं. कई महिला SHG ने आरोप लगाया कि बीजू जनता दल पार्टी ऋण और वर्क ऑर्डर प्रदान करने में भेदभाव कर रही है. पहचान और पहुंच के आधार पर लोन और वर्क ऑर्डर दिए जा रहे हैं. इसने कथित तौर पर कई स्वयं सहायता समूहों के बीच दरार पैदा कर दी और सरकार से SHG की दूरी बढ़ती जा रही है.</p><p>स्वयं सहायता समूह देशभर में आर्थिक क्रांति और महिलाओं की आर्थिक आज़ादी की वजह बने हैं. इस तरह के भ्रष्टाचार से महिलाएं समूह छोड़ने पर मजबूर होंगी और नए सदस्य समूह से जुड़ने के लिए हतोत्साहित. महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने वाली इस क्रांति को भ्रष्टाचार से बचाये रखना होगा.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Wed, 19 Apr 2023 12:12:22 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/odisha-shgs-became-political-scapegoat]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/J5MV7oZi7dL8jnJUBoIP.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/J5MV7oZi7dL8jnJUBoIP.jpg"/></item><item><title><![CDATA[माइक्रोफाइनेंस: आर्थिक आज़ादी की चाबी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/microfinance-is-the-key-to-womens-financial-freedom</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xnN3FmJq6snQfAsCzoXG.jpg"><p dir="ltr">आर्थिक आज़ादी, महिलाओं के मिलने वाले अवसरों के दरवाज़े खोलती हैं. ख़ुद के फैसले लेना, परिवार को बेहतर भविष्य दे पाना, अपनी ज़रूरतों को पूरा करना, पारिवारिक और सामाजिक फैसले ले पाना.  ये सब तभी मुमकिन है जब आर्थिक आज़ादी मिले. इस आज़ादी को पाने का एक ज़रिया हैं रोज़गार. महिलाओं की आर्थिक आज़ादी से केवल इनके घर को ही नहीं बल्कि पूरे देश की इकॉनमी को फायदा मिलता है. ज़रा सोचिये, ये आधी आबादी अगर पैसे कमाना शुरू करदे तो सकल घरेलु उत्पाद (GDP) में कितना योगदान मिलेगा. माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशन महिलाओं को अपना रोज़गार शुरू करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं . इनसे छोटा उधार लेकर महिलाएं अपना बिज़नेस शुरू करती हैं. काम बढ़ने पर और भी महिलाएं इस से जुड़ती हैं. </p>
<p dir="ltr">स्वयं सहायता समूह इस माइक्रो क्रेडिट के सबसे बड़े ग्राहक हैं. माइक्रोफाइनेंस से अनगिनत महलाओं और समुदायों को आर्थिक स्थिरता, पूंजी तक पहुंच और आर्थिक आज़ादी हासिल करने में मदद मिली. पूरी दुनिया की सफलता संयुक्त राष्ट्र (UN) के 17 सतत विकास लक्ष्य (SDGs) पर टिकी है. हालांकि, जब तक महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होंगी, तब तक इन SDGs को हासिल करना  मुश्किल है. SDG के लक्ष्य 5 का गोल ऐसे समाज बनाना है जहां सभी को अपने सपनों और आर्थिक आज़ादी हासिल करने के समान अवसर हों. महिलाओं को इसे हासिल करने में मदद करने का एक तरीका उन्हें फाइनेंशियल रिसोर्सेस तक पहुंच देना है, जो पहले के समय में भेदभाव की वजह से हासिल करना मुश्किल था.</p>
<p dir="ltr">इन फाइनेंशियल रिसोर्सेस तक पहुंच होने पर महिलाओं की सामाजिक-राजनैतिक स्थिति में सुधार आता है. वे स्वास्थ्य, पोषण और साक्षरता पर खर्च कर अपने लिविंग स्टैंडर्ड को सुधारती हैं. स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाओं ने ख़ासकर ग्रामीण महिलाओं ने मइक्रोक्रेडिट की मदद से रोज़गार शुरू किया. इससे उनकी सामाजिक और राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ उनके आर्थिक अवसरों में सुधार आया. इसके अलावा, वित्तीय समावेशन (फाइनेंशियल इन्क्लूजन) ने कई महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं, सरकारी योजनाओ, और बीमा स्कीमों से जोड़ा. </p>
<p dir="ltr">सरकार, नाबार्ड, जीविका मिशन, बैंकों और माइक्रोफाइनेंस संस्थानों ने कई महिलाओं को वित्तीय शिक्षा (फाइनेंशियल लिट्रेसी), आसान लोन और पूंजी तक आसान पहुंच दिलाई. माइक्रोफाइनेंस संस्थान (एमएफआई) आमतौर पर महिलाओं को उधार देने की अधिक संभावना रखते हैं क्योंकि उनके पास पुरुषों की तुलना में बेहतर पुनर्भुगतान (रीपेमेंट) इतिहास होता है, जो इन कंपनियों के लिए क्रेडिट जोखिम को कम करने में मदद करता है. माइक्रोफाइनेंस आर्थिक प्रणाली का एक अहम हिस्सा है, जो कम आमदनी वाले परिवारों को लोन, बीमा और फाइनेंशियल लिट्रेसी जैसी सेवाएं देते हैं. इन संस्थानों के साथ से स्वयं सहायता समूह आज देश भर में आर्थिक क्रांति ला रहे हैं. <strong id="docs-internal-guid-04690da9-7fff-1dcf-7dfc-b589f67c4809"></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sat, 01 Apr 2023 16:41:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/microfinance-is-the-key-to-womens-financial-freedom]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xnN3FmJq6snQfAsCzoXG.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xnN3FmJq6snQfAsCzoXG.jpg"/></item><item><title><![CDATA[महिलाओं की आर्थिक क्रांति का पहला नाम NRLM ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/day-nrlm-leading-a-women-led-financial-revolution</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/7IzqEEaWj3sjpVcdZsUr.jpg"><p dir="ltr">आर्थिक रूप से कमज़ोर या कमाई का कोई रास्ता नहीं होना , ये वह कारण है जिससे भारत के करोड़ों लोगों को ग्रामीण और शहरी इलाकों में शोषित जिंदगी गुज़ारने पर मजबूर होने पड़ता है . इसी शोषण से उनकी आर्थिक, सामजिक, शारीरिक और भावनात्मक स्थिति काफ़ी ख़राब हो जाती है. भारत में करीब 23 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे हैं. शहरी इलाकों में 8.81% और ग्रामीण इलाकों में गरीबी अनुपात 32.75% है. सेंट्रल गवर्नमेंट ने साल 2021 में दीनदयाल अंत्योदय योजना को स्टार्ट किया. </p>
<p dir="ltr">ग्रामीण इलाकों में DAY-NRLM या 'दीनदयाल अंत्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' की शुरुआत 2011 में हुई जिसकी निगरानी ग्रामीण विकास मंत्रालय करता है. इसी तरह शहरों में गरीबी पर पूर्णविराम लगाने के लिए DAY-NULM यानी दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन 2013 में शुरू हुआ. इसे आजीविका मिशन के नाम से भी जाना जाता है.   </p>
<p dir="ltr">NRLM का मुख्य गोल ग्रामीण गरीब परिवारों को स्वसहायता समूहों (SHG) में संगठित करना है. कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट), क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग), वित्तीय समावेशन(फाइनेंशियल इन्क्लुशन) और मार्किट तक पहुंच में सहायता देकर उनके आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है. आपको बता दें कि ये NRLM सामाजिक पूंजी (सोशल केपिटल ) बनाने और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने पर भी फोकस करता है. आज देशभर के 70 लाख SHG में लगभग 8 करोड़ महिलाएं शामिल हैं. इन स्वसहायता समूहों ने ग्रामीण गरीबों खासकर महिलाओं को स्थिर रोज़गार दिया ताकि वे आत्मनिर्भर बन खुद पैसे कमा सके.  </p>
<p dir="ltr">तकरीबन 9,00,000 उम्मीदवारों को ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट दिया जायेगा. 60 हजार स्ट्रीट वेंडर और बेघर लोगों को परमानेंट घर बनाने के लिए आर्थिक राशि मिलेगी. करीब 16,00,000 स्ट्रीट वेंडर का पहचान सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा. सेंट्रल गवर्नमेंट ने 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया. स्किल ट्रेनिंग की सहायता से रोजगार पाने के लिए शहरों में निवास करने वाले और इस योजना के लिए पात्रता रखने वाले लोगों को ₹15,000 दिए जाते हैं ताकि वह इन्वेस्टमेंट कर सके.</p>
<p dir="ltr">आज देश के कोने-कोने में स्वसहायता समूह आर्थिक क्रांति को नई उचाइयां दे रहे हैं. कस्बों और गांवों की महिलाएं समूह से जुड़ने के लिए नए अवसर तलाश रही हैं ताकि वो आर्थिक आज़ादी को पा सकें और आर्थिक क्रांति का हिस्सा बनें. इन समूहों से जुड़ने के लिए अपने जिले में आजीविका मिशन के अधिकारियों से मिल रही हैं. यहीं उन्हें समूह बनाने और कमाई का रास्ता दिखाया जाता है. ख़ास बात यह है कि इन नए समूहों के गठन में पुराने समूह के सदस्य मदद कर रहे हैं. जो आगे चल कर ग्राम संगठन का रूप ले लेते हैं.  <strong id="docs-internal-guid-0148f09e-7fff-29e9-447e-938e6a250298"><br></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 23 Mar 2023 13:36:14 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/day-nrlm-leading-a-women-led-financial-revolution]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/7IzqEEaWj3sjpVcdZsUr.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/7IzqEEaWj3sjpVcdZsUr.jpg"/></item><item><title><![CDATA[महिलाओं की आर्थिक क्रांति का सहयोगी बना HDFC का SLI ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/hdfc-sustainable-livelihood-initiative-gives-financial-literacy-training-to-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/CfhoGINlCEo9LvoNZllk.JPG"><p dir="ltr">आज पूरे भारत में महिलाओं की फाइनेंशियल लिट्रेसी की सुगबुगाहट है. महिलाओं की आर्थिक आज़ादी की पहली सीढ़ी ही फाइनेंशियल लिट्रेसी है. सरकार, बैंकों और संस्थाओं ने इसके लिए कदम उठाये और SHG का सहारा बनी. बैंकिंग इंस्टीट्यूशन इसको आगे बढ़ा सकते है. HDFC बैंक का नाम आपने सुना होगा. ये बैंक अपने सस्टेनेबल लाइवलीहुड इनिशिएटिव (SLI) डिपार्टमेंट के तहत कई महिलाओं को आर्थिक आज़ादी के लक्ष्य तक पहुंचने में मदद कर रहा है.    </p>
<p dir="ltr">ये सस्टेनेबल लाइवलीहुड इनिशिएटिव (SLI) बिना बैंक वाले इलाकों में रह रही महिलाओं तक पहुंचता है. व्यावसायिक प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता (फाइनेंशियल ट्रेनिंग), बीमा और क्रेडिट सुविधाएं देकर ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को आर्थिक क्रांति से जोड़ा. ये महिलाएं आसान क्रेडिट पाकर साहूकारों से बचीं और अपना रोज़गार शुरू किया. पैसो की समझ, व्यवसाय का मैनेजमेंट, और बचत के गुण ट्रेनिंग में सीख अपना पैसा खुद कमाया और संभाला. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/AKb9wLoowlULyzP3cmMW.jpg" alt="HDFC CSR"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: HDFC</em></span></p>
<p dir="ltr">नूनमती, असम की अनिमा सिल अपने गांव में कढ़ाई का एक छोटा सा व्यवसाय चला रही थीं. HDFC बैंक ने उन्हें अपने बिज़नेस को बढ़ाने और पैसों का हिसाब किताब करने की ट्रेनिंग दी और स्वसहायता समूह बनाकर कई महिलाओं को उनसे जोड़ा. अब अनिमा सिर्फ खेती पर निर्भर नहीं है . वे अपने परिवार की ज़रूरतों को पूरा कर पा रही है. ऐसे ही राउरकेला, ओडिशा की सरोजिनी प्रधान ने अपने पति के गुज़र जाने के बाद परिवार को सहारा देने के लिए रोज़गार तलाशा. उन्हें आर्टिफिशल आभूषण बनाने आते थे. SLI की मदद से उन्होंने लोन लेकर आभूषण बनाने का सामान खरीदा और छोटी दुकानों पर बेचना शुरू किया. अब वो अपने पैरों पर खड़ी है और दूसरी महिलाओं के लिए उम्मीद भरा उदाहरण है. </p>
<p dir="ltr">कर्नाटक के शिवपुत्र पूरी तरह से 6 एकड़ ज़मीन की खेती पर निर्भर थे. कम बारिश की वजह से बोरवेल पूरी तरह सूख गया और उम्मीद टूट गई. असफल होकर उन्होंने हैदराबाद जाकर मज़दूरी करने की ठान ली. अपनी किस्मत आज़माते हुए उन्होंने SLI की एक योजना से जुड़ने का सोचा. उनकी भूमि के एक क्रॉस सेक्शन को बांध बनाने के लिए चुना गया और एक वर्मीकम्पोस्टिंग पिट बनाने के लिए सहायता भी मिली. उन्होंने वर्मीकम्पोस्ट की मदद से अपनी उपज में 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ की बढ़ोतरी की. इससे उन्होंने 4 लाख रुपय कमाए. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/ipmsL5NEOdpiz0y1xtgJ.jpg" alt="HDFC CSR"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: HDFC</em></span></p>
<p dir="ltr">SLI ने ज़मीनी स्तर पर काम कर कोने-कोने में फाइनेंशियल लिट्रेसी पहुंचाने के लिए कई अवार्ड जीते जैसे- पोर्टर पुरस्कार 2017, गोल्डन पीकॉक अवार्ड 2018, ET BFSI अवार्ड्स 2018 और राष्ट्रीय सीएसआर पुरस्कार 2019, एशियामनी बेस्ट बैंक अवार्ड्स 2022. 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अभी तक 1 करोड़ 48 लाख लोगों को SLI से जोड़ा गया. ऐसी बेहतर की तरफ ले जाती बदलाव की कहानियां हर राज्य में मिल जाएंगी. HDFC SLI की ये पहल लोगों की सिर्फ़ मदद नहीं करती पर उन्हें आत्मनिर्भर बना कर अपनी मदद खुद कर पाने के क़ाबिल बनती है. इसी तरह अगर समाज के प्रतिष्ठित संस्थान महिलाओं की सहायता करेंगे तो आर्थिक क्रांति को देशभर के हर कोने और हर तबके की महिला तक पहुंचाया जा सकता है.   </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Tue, 21 Mar 2023 17:23:21 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/hdfc-sustainable-livelihood-initiative-gives-financial-literacy-training-to-shg-women]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/CfhoGINlCEo9LvoNZllk.JPG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/CfhoGINlCEo9LvoNZllk.JPG"/></item><item><title><![CDATA[SHG की मुश्किलें जिन्हें सुलझाना है ज़रूरी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/issues-of-shg-need-to-be-resolved</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9THitQodEkWuuoBIriqm.jpeg"><p>स्वसहायता समूह (SHG) भारत का ऐसा माइक्रोफाइनेंस मॉडल हैं जिसका पूरी दुनिया के आर्थिक और सामाजिक संस्थानों ने लोहा माना. SHG क्रांति के बीज तो 80 के दशक में पड़ चुके थे और 90 का दशक आते आते  ग़ैर-सरकारी संगठनों (NGO) भी इस आर्थिक आंदोलन से पूरी तरह जुड़ गए. आज ये NGO, SHG के सबसे बड़े प्रमोटर (SHPI) बन गए. SHG भारत में स्वरोज़गार और गरीबी हटाने का एक बड़ा साधन बने. SHG ने ग्रामीण महिलाओं को अपना रोज़गार शुरू करने का ज़रिया बनाया और इसके साथ उन्होंने आर्थिक आज़ादी हासिल की. लेकिन इन बदलाव की कहानियों के बीच कुछ ऐसी महिलाएं भी हैं जिनमें SHG से जुड़ने को लेकर झिझक है या SHG से जुड़ने के कुछ समय बाद ही वो उससे अलग हो जाती हैं.</p>
<p>SHG में हर दिन जुड़ती महिलाओं की संख्या के बीच उन आंकड़ों पर ध्यान देने की भी ज़रुरत है जो बताते हैं कि अभी भी SHG कुछ महिलाओं का विश्वास नहीं जीत पाएं. महिलाओं का SHG से अलग हो जाने का बड़ा कारण उनका दूसरे गांव शिफ्ट कर जाना है. शादी हो जाने के कारण या पति की नौकरी, काम-धंधे में गांव बदलना या नौकरी की तलाश ग्रामीण महिलाओं को कस्बों व शहर की ओर खींच लाई. जिसकी वजह से SHG से उनका साथ छूटा. SHPI कुछ दिनों के लिए दूर जाने वाली SHG सदस्यों को छूट देने के लिए बैंकरों को समझाये और ई-बैंकिंग को बढ़ावा दे ताकि आसानी से उपस्थित न होने पर भी वो लोन का भुगतान कर सकेें.</p>
<p>कुछ महिलाएं बतातीं है कि वे SHG में शामिल नहीं हो पाई क्योंकि मौजूदा SHG सदस्य अपने फायदे को बांटना नहीं चाहती. समूह की लीडर्स कई बार अपने झुकावों, मान्यताओं, पूर्वाग्रह,  विचारों की वजह से नए सदस्यों को नहीं जोड़ती. ईमानदारी से सदस्यों में मुनाफ़े का बंटवारा न होने, बचत में पक्षपात करने, और बहीखातों का सही मैनेजमेंट न होने के कारण समूह में तनाव पैदा होता है. SHPI को लीडर्स और सभी सदस्यों के साथ बातचीत का नेटवर्क बनाना ज़रूरी है, ताकि सभी को अपनी बात कहने और संदेह दूर करने का प्लैटफॉर्म मिल सके. स्वसहायता समूहों के साथ सीधे काम करने वाली सरकारी और ग़ैर सरकारी संस्थाओं को एकसाथ आकर समूह की महिलाओं के भ्रम दूर करने होंगे। रविवार विचार भी ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां सम्बंधित संस्थाओं को साथ लाकर स्वसहायता समूह की महिलाओं की शंकाओं का समाधान किया जाता है।  </p>
<p>कई महिलाएं अपने SHG  बनाकर बचत और व्यवसाय की शुरुआत करना चाहती हैं पर उन्हें नहीं पता किससे संपर्क करना है, या SHG में शामिल होने के लिए किस प्रक्रिया का पालन करना होगा. SHPI और सरकारी संस्थानों को बड़े पैमाने पर ऐसे इलाकों में जागरूकता अभियान चलाने की ज़रुरत है जहां महिलाएं कठिन ज़िन्दगी गुज़ार रहीं हैं. फाइनेंशियल अवेयरनेस प्रोग्राम यहां बहुत मददगार साबित हो सकते है.</p>
<p>अशिक्षा के कारण पैसों के लेन देन का सही हिसाब न रख पाने की वजह से बचत या लोन का फ़ायदा नज़र नहीं आता. फाइनेंशियल लिट्रेसी की ट्रेनिंग में ये मुद्दे सिखाये जाने चाहिए. SHG फेडरेशन SHG की पुस्तकों के रखरखाव के लिए बुक कीपर रखे जो समय समय पर उनका ऑडिट करे. ये प्रैक्टिस उनमे पारदर्शिता लाकर एक दूसरे के लिए विश्वास बढ़ाएगी.</p>
<p>मार्केटिंग,पैकेजिंग, सोशल मीडिया,और डिस्ट्रीब्यूशन चैनल की समझ न होने के कारण समूह अपने उत्पादों को एक दायरे के बाहर नहीं ले जा पाते. उन्हें इस दिशा में SHPI और सरकार से मिली ट्रैनिंग से राज्य, देश, यहां तक कि विदेश में प्रोडक्ट बेचने में मदद मिलेगी.</p>
<p>SHG आज पूरे देश में आर्थिक क्रांति ला रहें है, यदि उनकी समस्याओं पर ग़ौर कर उन्हें समाधान बताया जाये तो SHG महिलाओं की आर्थिक आज़ादी को और आगे ले जा पाएंगे. इसके लिए इस दिशा में काम कर रहें सरकारी और ग़ैर सरकारी संस्थानों को एक साथ आने की ज़रुरत है। और यही पहल कर रहा है रविवार …</p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/7OX5sOurpZMec44avcaa.jpeg" alt="shg"></p>
<p><em>(Image Credits: Google images)</em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Sat, 18 Feb 2023 18:42:24 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/issues-of-shg-need-to-be-resolved]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9THitQodEkWuuoBIriqm.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9THitQodEkWuuoBIriqm.jpeg"/></item></channel></rss>