<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ आत्मनिर्भरता]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/aatmnirbhrtaa</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/aatmnirbhrtaa" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 25 Aug 2023 17:45:06 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA['ODOP वॉल' से मिलेगा कलाकारों की सफ़लता को सहारा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/the-one-district-one-product-program-launched-odop-wall-with-day-nrlm-to-support-artisans</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/RYFpkDWtgaBLmgLPF5X7.webp"><p style="text-align: justify;">भारत ने दुनियाभर में अपनी कलाओं के लिए पहचान बनाई है. इन कलाकारों को बढ़ावा देने के लिए अनोखी पहल की गई. यह पहल <strong>भारतीय शिल्प कौशल</strong> की <strong>समृद्ध विरासत </strong>को पहचान दिलाने और <strong>आत्मनिर्भरता</strong> को बढ़ावा देने की दिशा में अहम प्रगति है. <strong>एक जिला एक उत्पाद</strong> (<span>One District One Product (ODOP) Program) </span>कार्यक्रम ने <strong>दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन</strong> (<span>Deendayal Antyodaya Yojana &ndash; National Rural Livelihoods Mission</span>) के साथ हाथ मिलाया है. यह साझेदारी <strong>'ओडीओपी वॉल' लॉन्च </strong>करने के लिए की गई.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">यह पहल<strong> ग्रामीण कारीगरों </strong>(rural artisans) और<strong> महिला उद्यमियों</strong> (women entrepreneurs) की सफलता में चार चांद लगाएगी. इसकी मदद से वह दुनिया के सामने अपने <strong>शिल्प कौशल</strong> (<span>craftsmanship</span>) का प्रदर्शन कर सकेंगे. &nbsp;</p>
<p><img alt="ODOP Wall " src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/500x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/jW1smZNWvCWYRjFnIrfd.jpg" style="width: 500px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: ANI</em></span></p>
<h2 style="text-align: justify;">'ODOP Wall' दुनिया के सामने करेगी भारतीय शिल्प को प्रदर्शित</h2>
<p style="text-align: justify;"><strong>'ओडीओपी वॉल' </strong>लॉन्च (ODOP Wall Launch) कार्यक्रम दुनिया के सामने <strong>भारतीय शिल्प</strong> को प्रदर्शित करने के <strong>प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी</strong> (<span>Prime Minister Narendra Modi</span>) के सपने को साकार करेगा. <strong>ओडीओपी कार्यक्रम </strong>और <strong>डीएवाई-एनआरएलएम</strong> (DAY-NRLM) के बीच इस सहयोग का लक्ष्य <strong>आत्मनिर्भरता</strong> (promoting self-reliance) को बढ़ावा देना है. <strong>वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट कार्यक्रम</strong>, <strong>डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ़ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड</strong> (DPIIT) <strong>मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री </strong>(Ministry of Commerce &amp; Industry) के तहत अनोखी पहल है. &nbsp;</p>
<p><img alt="ODOP Wall " src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/530x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/umsuGc6d9rXRz6UQ975T.jpg" style="width: 530px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Adda 24/7</em></span></p>
<h2 style="text-align: justify;">सांस्कृतिक महत्व वाले उत्पादों को मिलेगी पहचान&nbsp;</h2>
<p style="text-align: justify;"><strong>ODOP</strong> और <strong>DAY-NRLM के साझा प्रयासों</strong> से जिलों में <strong>यूनिक उत्पादों</strong> की पहचान की गई. ये उत्पाद न केवल <strong>शिल्प कौशल </strong>का उदाहरण पेश करते हैं, बल्कि अपने <strong>मूल स्थान </strong>(place of origin) की<strong> संस्कृति </strong>को भी दर्शाते हैं. <strong><a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/national-handloom-day-shg-conserving-handloom-and-handicrafts">हैंडलूम</a> से लेकर हेंडीक्राफ्ट </strong>और यहां तक ​​कि <strong>स्थानीय कृषि उत्पाद</strong> भी इस पहल का हिस्सा हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">स्वदेशी शिल्प की बिक्री को मिलेगा बढ़ावा&nbsp;</h3>
<p style="text-align: justify;">इस <strong>साझेदारी</strong> का <strong>मुख्य लक्ष्य उपभोक्ताओं को एम्पोरिया</strong> की ओर ले जाना है, जिससे <strong>SARAS </strong><span>(Sale of Articles of Rural Artisans Society)&nbsp;</span>उत्पादों की बिक्री बढ़े.&nbsp;<strong><a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/women-who-are-making-rural-india-economic-self-reliant"> ग्रामीण </a>स्वयं सहायता समूहों </strong>(Rural Self help Groups) और <em>महिला <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/flipkart-crafted-by-bharat-independence-day-sale-honors-indian-handicrafts-and-handlooms">कारीगरों</a></em> (women artisans) द्वारा बनाए गए उत्पादों को बढ़ावा देकर, यह पहल <strong>वंचित समुदायों के <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/dhoni-and-sakshi-visited-tribal-shg-handicraft-stalls">सशक्तिकरण</a></strong> और <strong>महिलाओं की आर्थिक आज़ादी</strong> (financial freedom) को गति देगी.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Fri, 25 Aug 2023 17:45:06 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/the-one-district-one-product-program-launched-odop-wall-with-day-nrlm-to-support-artisans]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/RYFpkDWtgaBLmgLPF5X7.webp" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/RYFpkDWtgaBLmgLPF5X7.webp"/></item><item><title><![CDATA[SHG की बाग़ प्रिंट साड़ी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-women-of-dhar-mp-manufacture-bagh-print-saris</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/eFQorHOcwGhCp0cRfrqW.jpg"><p><iframe style="width: 758px; height: 425px;" src="https://www.youtube.com/embed/HzAV511Anv0" width="758" height="425" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>धार जिले के बाग़ प्रिंट के नाम से प्रसिद्ध कपड़े को देश -विदेश में पहचान दिलाने वाली महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की नई सोच बना ली. बाग़ नगर में प्रिंट होने वाली प्रिंट बाग़ प्रिंट के नाम से पहचान बना चुकी है. विदेशों तक अपनी पहुंच और पसंद बन जाने वाली बाग प्रिंट का शुरुआती इतिहास के कोई ठोस प्रमाण तो नहीं हैं,लेकिन यहां के क्षेत्र की गुफाओं पर अंकित शैल चित्र लगभग एक हजार साल पुराने हैं.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Wed, 19 Apr 2023 15:41:52 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-women-of-dhar-mp-manufacture-bagh-print-saris]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/eFQorHOcwGhCp0cRfrqW.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/eFQorHOcwGhCp0cRfrqW.jpg"/></item><item><title><![CDATA[रुपये पैसे संभालने में महिलाएं खराब नहीं होती ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/women-are-good-at-managing-financial-matters</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/D3VtcypJY1Aq1nMRq2hS.jpg"><p>कुछ लोग गणित में अच्छे होते है कुछ लोग इंग्लिश में, ऐसे ही कुछ लोग वित्तीय मामलों से निपटने में अच्छे या बुरे हो सकते हैं. इसमें जेंडर का कोई रोल नहीं है. लेकिन दुनियाभर की सामाजिक व्यवस्था में ऐसा माना गया है कि महिलाएं आर्थिक विषयों को समझने में कमज़ोर होती हैं. पितृसत्तात्मकता को मज़बूत करने के लिए ही यह धारणा बना दी गई कि पैसे संभालने में महिलाएं खराब होती हैं. यह मिथक इसलिए भी मौजूद है क्योंकि महिलाओं को गणित में कमज़ोर माना जाता है और संख्याओं से निपटने के लिए उन्हें पैसे के मामलों को संभालना मुश्किल लगता है. वैसे भी वित्तीय और आर्थिक मामले ; फैक्ट और फिगर से संबंधित हैं जबकि ऐसा माना गया है कि महिलाएं इमोशन से ज़्यादा काम लेती हैं. </p>
<p>लोग अक्सर इस तथ्य की ओर इशारा करते हैं कि कम महिलाएं वित्त सेक्टर में काम कर रही हैं. यह भी एक तथ्य है कि कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने वाली कई महिलाएं भी स्वीकार करती हैं कि उनके व्यक्तिगत आर्थिक मसलों और मामलों को उनके जीवन में पुरुषों द्वारा नियंत्रित किया जाता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि महिलाएं पैसों के मामलों को हैंडल नहीं कर सकतीं. कई मामलों में, महिलाएं अपने पति के लिए वित्तीय मुद्दों को सिर्फ इसलिए छोड़ देती हैं क्योंकि उनकी ज़िन्दगी में वैसे ही इतने काम होते हैं, जैसे घर, बच्चों, और पारिवारिक ज़िम्मेदारियां. कई मामलों में, महिलाएं अपने परिवार में केवल पुरुषों को ही वित्त संभालते हुए देखकर बड़ी हुई हैं और इसलिए इसमें शामिल न होना उन्हें कुछ अजीब नहीं लगता. </p>
<p>सच तो यह है कि महिलाएं पैसे को बहुत अच्छे से हैंडल कर सकती हैं. एक अच्छा उदाहरण जिसे कई लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं, वह यह कि आम तौर पर महिलाएं ही परिवार का मासिक बजट संभालती हैं. इसका अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि पूरे दिन के खर्चों को संभालने के लिए पर्याप्त रुपये पैसे हैं, आपात स्थिति के लिए रुपये अलग रखना, और यहां तक कि बच्चे की शिक्षा या विवाह जैसे भविष्य के खर्चों के लिए बचत करना. अगर महिलाएं पैसे के मामलों में इतनी ख़राब होतीं तो क्या वे यह सब कर पातीं? सच्चाई यह है कि परिवार के बजट को मैनेज करना इसलिए महत्वपूर्ण नहीं माना जाता है क्योंकि यह घर के काम में शामिल होता है जिसे कभी कोई महत्व नहीं मिला क्योंकि इसे एक महिला विषय माना जाता है.</p>
<p>एक अन्य उदाहरण माइक्रोलेंडिंग में शामिल महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों का है. SHG भारतीय आर्थिक क्रांति और आत्मनिर्भरता का बड़ा कारगर अस्त्र है जिसे पूरी तरह महिलाएं और वह भी ग्रामीण महिलाएं संभाल रही हैं.  बुक कीपिंग, अकाउंट मैनेजमेंट, ब्याज, सब कुछ समूह में महिलाएं बखूबी संभालती हैं. इन महिलाओं की आर्थिक समझ का प्रमाण है 14 लाख करोड़ का वित्तीय फ्लो जो भारत में इन महिलाओं ने किया. साथ ही SHG महिलाएं अपना ऋण समय पर चुकाती हैं. स्वयं सहायता समूह का कुल एन पी ए लगभग 1.9 % है.  यह भी देखा गया है कि महिलाएं लाभ कमाने के अवसरों की पहचान करने में बहुत अच्छी होती हैं जिसके लिए उन्हें इन सूक्ष्म ऋणों की आवश्यकता होती है.</p>
<p>समाज को लिंग के लेंस से देखने के बजाय क्षमताओं के लेंस से देखना ज़रूरी है. इस आर्थिक आज़ादी और सशक्तिकरण के चश्में के लेंस को साफ़ किया SHG ने. वित्तीय समझ और आर्थिक क्षमताओं को समाज में आइना भी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने दिखाया है.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रोहन शर्मा</dc:creator><pubDate>Thu, 13 Apr 2023 13:24:45 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/women-are-good-at-managing-financial-matters]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/D3VtcypJY1Aq1nMRq2hS.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/D3VtcypJY1Aq1nMRq2hS.jpg"/></item><item><title><![CDATA[रामनवमी प्रसंगवश: रामराज्य में स्वयं सहायता समूह की परिकल्पना ! ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/imagining-self-help-groups-in-the-tmes-of-ram-rajya</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2mquG7k5iO9AGdkbPWjj.jpg"><p>भगवान श्री राम ने हमारे जीवन में सदाचार और धर्म का प्रचार किया. उनके सदगुणों की महिमा से ही आध्यात्मिक और समृद्धि का स्वरुप हमारे सामने आता है.&nbsp;यदि उस काल में सहायता समूह के रूप में परिकल्पना करें तो वह अत्यंत करुणामय, प्रेमपूर्ण, निष्ठावान और सदगुणों से भरपूर होता. वे समूह के हर सदस्य को संदेश देते और उन्हें उनकी जरूरतों के अनुसार मार्गदर्शन देते.&nbsp;भगवान राम को सहायता समूह बनाने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि वे स्वयं सर्वशक्तिमान हैं और सभी चीजें संभव हैं. बावजूद अगर वे एक समूह बनाना चाहते तो वे अपने समूह में निम्नलिखित गुणों का संचार करते:</p><p><strong>सहयोग:</strong> भगवान राम अपने समूह के सदस्यों के साथ एक टीम बनाएंगे जो एक दूसरे का सहयोग करेगी. वे समूह के सदस्यों के समस्याओं का समाधान करने में मदद करेंगे और सभी को एक साथ काम करने में मदद करेंगे.</p><p><strong>संवेदना:</strong> भगवान राम संवेदनाओं के प्रतीक माने जाते हैं. वे भावुक हैं. दयालु हैं. वे अपने समूह के सदस्यों के प्रति संवेदनाओं के लिए सदैव प्रेरित करेंगे.</p><p><strong>समर्पण:</strong> भगवान राम को त्याग और समर्पण का ही आधार माना. पूरी रामायण इन्हीं भावनाओं और पर केंद्रित है. वे पूरे राज्य में इस भाव को प्रचारित करते कि सदैव दूसरों को मान और उनके लिए सेवा-समर्पण का भाव ही सब को प्रसन्न रखता है. इस तरह समूह वे बनाते.</p><p><strong>प्रकृति और पर्यावरण:</strong> भगवान राम ने प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण का हमेशा संदेश दिया. घने पेड़ों और जड़ी बूटियों का उपयोग किया गया. ये समूह होते. जहां इनकी सुरक्षा का हमेशा ध्यान रखा जाता. औषधीय पौधे और उपचार इन जंगलों के माध्यम से ही होते थे.&nbsp;</p><blockquote><p><em>यूं भगवान राम के राज्य की कल्पना हमारे सनातन में सबसे आदर्श मानी गई. संत तुलसीदास ने रामायण की एक चौपाई का बड़ा खूबसूरत वर्णन किया. आइए देखते है इस चौपाई को -</em><br><em><strong></strong></em></p><p><em><strong>"दैहिक दैविक भौतिक ताप। &nbsp;&nbsp;</strong></em><br><em><strong>राम राज नहिं काहुहिं व्यापा।।"</strong></em></p><p><em>इस चौपाई में रामराज्य और उस दौर के जीवन को पूरी तरह समझ सकते हैं. आखिर क्यों अयोध्यावासी खुश थे. तुलसीदास व्याख्या करते हैं -" दैहिक यानि देह-शरीर और तापा का अर्थ ताप या कष्ट से है. इसी तरह दैविक का मतलब देवता - ईश्वर,और भौतिक के मायने यहां सांसारिक जीवन से हुआ. इस चौपाई की अगली लाइन का मतलब राम के राज्य में किसी को भी न शारीरिक न देवीय प्रकोप और न ही सांसारिक कष्ट था. सांसारिक कष्ट का मतलब आपसी मन-मुटाव और सुख-सुविधाओं का आभाव से रहा.यानि समूह गठन की जरूरत नहीं थी.लेकिन सामाजिक जीवन और एकजुटता के कई उदाहरण हम प्रसंग में पढ़तें हैं. &nbsp;</em></p></blockquote><p>त्रेता युग यानि रामराज्य में उल्लेख है कि हर व्यक्ति अपने-अपने काम में जुटा रहता. वर्तमान में सरकारें और ग्लोबल जी 20 मीट में भी अध्यात्म-समृद्धि के साथ पर्यावरण को प्रमुख मिशन माना. रामराज्य में आर्थिक मजबूती, सम्मान और महिलाओं को हमेशा स्वतंत्रता मिली. यदि उस दौर में स्वयं सहायता समूह के नज़र से सोचें तो किस तरह होते.आइए उन्हें देखते हैं.&nbsp;</p><p><strong>फूलों का उत्पादन:</strong> हम प्रसंगों में सुनते हैं कि राजा के महलों के साथ शिव मंदिरों को रोज फूलों से सजाया जाता था. इससे जाहिर है कि क्विंटलों फूलों का उपयोग होता था. फूलों के उत्पादन के लिए समूह होते. यह भी रोजगार का बड़ा आधार होता. &nbsp;&nbsp;</p><p><strong>शृंगार:</strong> राजघरानों में रानियों और ऐसी ही बड़े घरों की महिलाओं को रोज श्रृंगार किया जाता था. इस काम के लिए कई दासियां और महिलाएं जुटी रहती थीं. इस काम के लिए प्राकृतिक रंग और लेप के उपयोग किए जाते थे. वर्तमान दौर में इसका प्रचलन बढ़ा. ये ब्यूटी पार्लर की शक्ल में दिखाई देते हैं. महिलाओं के सौंदर्य और श्रृंगार का ज़िक्र कई जगह मिलता है. उस दौर में भी समूह होते तो नई पीढ़ी को इस कला में तैयार किया जाता.&nbsp;</p><p><strong>बुनकर: </strong>रामराज्य के दृश्यों में पहनावे को बड़े सादगी और आकर्षक तरीके से दिखाया जाता है. सिलाई मशीनों की जगह महिलाएं उस समय के संसाधन का उपयोग कर वस्त्र तैयार करती होंगीं. ये भी समूह होते जिन्हें हम आज बुटीक और बड़े बड़े सिलाई सेंटर के साथ शो रूम के रूप में देख रहे. यहां महिलाएं संचालित कर रहीं हैं.&nbsp;</p><p>ऐसे कई उदाहरण हैं जो आज भी रामराज्य के कामकाजों का आधुनिक सकारात्मक रूपांतरण है. बदलती सोच में एक बार फिर महिलाओं के आत्मनिर्भरता, आर्थिक आज़ादी और स्वाभिमान के लिए पूरे देश में महिलाओं के समूह का गठन हो रहा. रविवार विचार का उद्देश्य भी ऐसे SHG के कार्यों को समाज के सामने लाना है.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 30 Mar 2023 16:24:04 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/imagining-self-help-groups-in-the-tmes-of-ram-rajya]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2mquG7k5iO9AGdkbPWjj.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2mquG7k5iO9AGdkbPWjj.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मज़दूरी छोड़ बन गई बिज़नेस वुमन ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-women-run-a-food-processing-enterprise</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Sgt3xPUqenbMYIA2Ij10.jpeg"><p><br><iframe style="width: 1154px; height: 647px;" src="https://www.youtube.com/embed/Wc8k1s53s4c" width="1154" height="647" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>जिस BPL कार्ड को बनवाने के लिए परिवार ताकत झोंक देते हैं. पंचायतों के चक्कर काटते रहते हैं. लोग इस कार्ड से सरकार मिलने वाली मुफ्त की सुविधाओं को लेने से नहीं चूकते ,वही BPL कार्ड धार जिले के छोटे से गांव खंडवा की रहने वाली गंगा दीदी ने पंचायत को वापस लौटा दिया. खुद के पैरों पर खड़े होकर वह आत्मनिर्भर बनी. अपनी मेहनत और प्रयासों को आजीविका मिशन ने पंख लगा दिए. गंगा दीदी आज जिले की मैनेजमेंट गुरु बन चुकी है."लगातार पांच साल मेहनत की. जब कमाई बढ़ी तो हिसाब लगाने बैठ गई. पति को भी साथ बिठा लिया. मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा, जब लगातार कमाई एक जैसी बढ़िया होने लगी. हमने सोचा मेहनत का फल मिला. ज़िंदगी सुधर गई. एक दिन पंचायत ऑफिस गए और बीपीएल कार्ड जमा करा आए. " लगातार मेहनत करने वाली धार जिले के पिछड़े गांव छोटा खंडवा की गंगा बाई ने कही. गंगा बाई कहती है - " यदि सोच लो तो हम अपनी ज़िंदगी को अच्छे से जी सकते हैं. मुझे गर्व है कि प्रशासन और आजीविका मिशन के सहयोग से मैं लखपति समूह में शामिल हो गई."</p>
<p>किसी समय पहले मजदूरी और फिर सब्जी बेचने वाली गंगा बाई आज धार जिले में हर काम  को रोजगार के नए अवसर में बदलने की सोच रखती है.<br>कई समूह और इससे जुड़ी  महिलाएं गंगा बाई से धंधे का हुनर सीखने और सलाह लेने पहुंच रही हैं.वह अपना कारोबार तो कर ही रही लेकिन दो सौ लोगों के लिए भी रोजगार के रास्ते खोल दिए. गंगा दीदी को इलाके में चिप्स वाली दीदी के नाम से भी पहचान मिल गई. यह क्षेत्र का सबसे  बड़ा कारोबार बन सकता है.</p>
<p>कुछ साल पहले तक मजदूरी करने वाली गंगा दीदी ने नवदुर्गा स्वसहायता समूह का गठन किया. गंगा दीदी अपने संघर्ष की कहानी कहते हुए बताती हैं -" शुरू में समूह की सभी महिलाओं ने पच्चीस रुपए हर सप्ताह बचत शुरू किए. यह रकम भी बहुत ज्यादा थी. समूह से लोन लेकर सब्जी बेचना शुरू की.हमें बैंक से पचास हजार का लोन मिल गया. किराने का सामान भी रखने लगे. पति भी मजदूरी के बाद विक्रम चौधरी ने भी साथ दिया. फिर हमने मुड़ कर पीछे नहीं देखा." </p>
<p>जिला प्रशासन और जिला पंचायत अधिकारियों के लिए गंगा दीदी आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई है. फेडरेशन और एक संगठन ने आलू चिप्स का कारखाना खंडवा गांव में खोलने की योजना बनाई. जिला पंचायत के अधिकारियों के साथ फेडरशन के अधिकारी आए. समूह की महिलाओं को योजना और कमाई का ये जरिया समझाया ,लेकिन नतीजा ज़ीरो. अधिकारी पहली बार में निराश लौट गए. गांव की ममता ने बताया- " मेरे  शिव शक्ति समूह के सदस्य भी बैठक में शामिल हुए थे. सभी को लगा कि बाहर वालों का कारखाना है. पैसा न डूब जाए. इस बैठक के बाद गंगा दीदी ने समझाया कि पंचायत की परियोजना प्रबंधक अपर्णा पांडेय पर भरोसा  करो. और गंगा दीदी की बात पर सब जुड़ते चले गए. </p>
<p>मिसाल बन चुकी गंगा दीदी कहती हैं - " वह समाज में बदलाव चाहती थी. इसलिए हिम्मत नहीं हारी. किराने की दुकान जब पति ने संभाली तो लगा कुछ और करना चाहिए. बस इसी सोच को लेकर मैं सैनेटरी नैपकिन बना कर बेच लगी.गांव में पिछड़ी सोच को ख़त्म कर युवतियों और महिलाओं को कपड़े की जगह नैपकिन का महत्व बताती हूं."</p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 16 Mar 2023 18:07:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-women-run-a-food-processing-enterprise]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Sgt3xPUqenbMYIA2Ij10.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Sgt3xPUqenbMYIA2Ij10.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[डाला आलू निकला सोना ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-making-potatoe-chips-and-sanitary-napkin</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Sgt3xPUqenbMYIA2Ij10.jpeg"><p>जिस BPL कार्ड को बनवाने के लिए परिवार ताकत झोंक देते हैं. पंचायतों के चक्कर काटते रहते हैं. लोग इस कार्ड से सरकार मिलने वाली मुफ्त की सुविधाओं को लेने से नहीं चूकते ,वही BPL कार्ड धार जिले के छोटे से गांव खंडवा की रहने वाली गंगा दीदी ने पंचायत को वापस लौटा दिया. खुद के पैरों पर खड़े होकर वह आत्मनिर्भर बनी. अपनी मेहनत और प्रयासों को आजीविका मिशन ने पंख लगा दिए. गंगा दीदी आज जिले की मैनेजमेंट गुरु बन चुकी है.</p>
<p>"लगातार पांच साल मेहनत की. जब कमाई बढ़ी तो हिसाब लगाने बैठ गई. पति को भी साथ बिठा लिया. मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा ,जब लगातार कमाई एक जैसी बढ़िया होने लगी. हमने सोचा मेहनत का फल मिला. ज़िंदगी सुधर गई. एक दिन पंचायत ऑफिस गए और बीपीएल कार्ड जमा करा आए. " लगातार मेहनत करने वाली धार जिले के पिछड़े गांव छोटा खंडवा की गंगा बाई ने कही. गंगा बाई कहती है - " यदि सोच लो तो हम अपनी ज़िंदगी को अच्छे से जी सकते हैं. मुझे गर्व है कि प्रशासन और आजीविका मिशन के सहयोग से मैं लखपति समूह में शामिल हो गई. "</p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/hWdYKBGZljUVS3gYJXaD.jpeg" alt="AAloo chips made by SHG women"></p>
<p>फोटो क्रेडिट: प्रीति गुप्ता, धार</p>
<p>किसी समय पहले मजदूरी और फिर सब्जी बेचने वाली गंगा बाई आज धार जिले में हर काम  को रोजगार के नए अवसर में बदलने की सोच रखती है. कई समूह और इससे जुड़ी  महिलाएं गंगा बाई से धंधे का हुनर सीखने और सलाह लेने पहुंच रही हैं.वह अपना कारोबार तो कर ही रही लेकिन दो सौ लोगों के लिए भी रोजगार के रास्ते खोल दिए. गंगा दीदी को इलाके में चिप्स वाली दीदी के नाम से भी पहचान मिल गई. यह क्षेत्र का सबसे  बड़ा कारोबार बन सकता है.</p>
<p>कुछ साल पहले तक मजदूरी करने वाली गंगा दीदी ने नवदुर्गा स्वसहायता समूह का गठन किया. गंगा दीदी अपने संघर्ष की कहानी कहते हुए बताती हैं -" शुरू में समूह की सभी महिलाओं ने पच्चीस रुपए हर सप्ताह बचत शुरू किए. यह रकम भी बहुत ज्यादा थी. समूह से लोन लेकर सब्जी बेचना शुरू की.हमें बैंक से पचास हजार का लोन मिल गया. किराने का सामान भी रखने लगे. पति भी मजदूरी के बाद विक्रम चौधरी ने भी साथ दिया. फिर हमने मुड़ कर पीछे नहीं देखा." </p>
<p>जिला प्रशासन और जिला पंचायत अधिकारियों के लिए गंगा दीदी आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई है. फेडरेशन और एक संगठन ने आलू चिप्स का कारखाना खंडवा गांव में खोलने की योजना बनाई. जिला पंचायत के अधिकारियों के साथ फेडरशन के अधिकारी आए. समूह की महिलाओं को योजना और कमाई का ये जरिया समझाया ,लेकिन नतीजा ज़ीरो. अधिकारी पहली बार में निराश लौट गए. गांव की ममता ने बताया- " मेरे  शिव शक्ति समूह के सदस्य भी बैठक में शामिल हुए थे. सभी को लगा कि बाहर वालों का कारखाना है. पैसा न डूब जाए. इस बैठक के बाद गंगा दीदी ने समझाया कि पंचायत की परियोजना प्रबंधक अपर्णा पांडेय पर भरोसा  करो. और गंगा दीदी की बात पर सब जुड़ते चले गए. </p>
<p>ट्रेनर आशीष वर्मा ने बताया कि- " इस गांव की समूह की दीदियां बहुत मेहनती हैं. लगातार काम कर रहीं हैं. यह फेडरेशन फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट और जिला पंचायत आजीविका मिशन के प्रयास से इसकी शुरुआत हुई. अभी ट्रेनिंग लगातार दी जा रही है. जिला पंचायत की आजीविका मिशन की जिला प्रबंधक अपर्णा पांडेय कहती हैं - " यह बहुत बड़ी उपलब्धि है.21 समूह की 105 दीदियों को ट्रेनिंग दी जा रही. जिसमें दो सौ रुपए रोज मिल रहे हैं. ट्रेगिंग के दौरान ही चिप्स खरीदी के ऑर्डर मिलने लगे हैं. " </p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/rcb723RiHzATyJ2cj0Ap.jpeg" alt="AAloo chips made by SHG women"></p>
<p>फोटो क्रेडिट: प्रीति गुप्ता, धार</p>
<p>मिसाल बन चुकी गंगा दीदी कहती हैं - "वह समाज में बदलाव चाहती थी. इसलिए हिम्मत नहीं हारी. किराने की दुकान जब पति ने संभाली तो लगा कुछ और करना चाहिए. बस इसी सोच को लेकर मैं सैनेटरी नैपकिन बना कर बेच लगी.गांव में पिछड़ी सोच को ख़त्म कर युवतियों और महिलाओं को कपड़े की जगह नैपकिन का महत्व बताती हूं. "</p>
<p>इस गांव के ग्राम संगठन "वरदान आजीविका महिला संकुल स्तरीय संगठन" से जुड़ी दीदियां आलू चिप्स ट्रेनिंग के अलावा रानू दीदी, ममता शेखर सिलाई , प्रेम दीदी अगरबत्ती बना कर आत्मनिर्भर हुईं. समूह से जुड़ी गंगा दीदी आगे बताती हैं - " अभी ट्रेनिंग में ही उनको चिप्स के ऑर्डर मिलाना शुरू हो गए. वह दस हजार रुपए महीना कमा लेती है. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 16 Mar 2023 17:48:23 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-making-potatoe-chips-and-sanitary-napkin]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Sgt3xPUqenbMYIA2Ij10.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Sgt3xPUqenbMYIA2Ij10.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[SHG के पावर की चर्चा पोस्ट बजट वेबिनार में ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/post-budget-webinar-discussed-shgs-contribution</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/nHMFNik70FUApLXyok7J.PNG"><p dir="ltr">हाल ही में केंद्र सरकार ने 2023 -24 का बजट पेश किया था जिसे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाला माना जा रहा है. पोस्ट-बजट वेबिनार में केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री गिरिराज सिंह, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्री महेंद्रभाई मुंजपारा शामिल हुए. प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पोस्ट बजट वेबिनार कर महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर चर्चा की. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/rP0GfeGAcyZowkCWyWm0.jpeg" alt="webinar"></p>
<p dir="ltr">चर्चा में पीएम मोदी ने कहा देश की ये आधी आबादी के सहयोग से देश के विकास में मदद होगी. शक्ति समूह से देश के आर्थिक विकास को गति मिलेगी.  पिछले 9  सालों में 7 करोड़ महिलाएं स्वसहायता समूह में शामिल हुईं और देश की इकॉनमी में योगदान देकर SHG की एहमियत और सामर्थ्य पर प्रकाश डाला. स्टार्टअप की दुनिया जैसी यूनिकॉर्न अब SHG में भी बनेंगे. बीते 9 सालों में SHG महिलाओं ने सवा 6 लाख करोड़ का लोन लिया और NPA भी बहुत कम रहा.   </p>
<p dir="ltr">SHG की करोड़ों महिलाएं खेती, उत्पादन, जागरूकता फैलाना, जल प्रबंधन जैसे कई अलग-अलग क्षेत्रों में ग्राउंड रिसोर्स पर्सन बन काम कर रही हैं. ये महिलाएं बैंक सखी, कृषि सखी, और पशु सखी बन दूर दराज़ के इलाकों और गांवों में भी पहुंच रही हैं जहां सरकार या मीडिया की पहुंच सीमित है. ग्रामीण SHG के ज़रिये ये महिलाएं तकनीक, ट्रेनिंग, आर्थिक आज़ादी और आत्मनिर्भरता को गांवों में लेकर आई. </p>
<p dir="ltr">UN द्वारा घोषित 'ईयर ऑफ़ मिलेट' में SHG महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनके सहयोग से मिलेट अब खेतों और थालियों में वापिस लौट रहे हैं. SHG से जुड़ी 1 करोड़ आदिवासी महिलाओं ने 'श्री अन्न' को उगाने के अनुभव और तकनीकी ट्रेनिंग की सहायता लेकर मिलेट के उत्पाद में बढ़ोतरी करवाई. पीएम मोदी ने हर तबके की महिलाओं को आर्थिक आज़ादी देने वाले सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) को भारत के रिमोट इलाकों तक पहुंचाने पर ज़ोर डाला. सबके साथ और सांझे प्रयास से सबका विकास संभव हो सकेगा.</p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 10 Mar 2023 15:07:40 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/post-budget-webinar-discussed-shgs-contribution]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/nHMFNik70FUApLXyok7J.PNG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/nHMFNik70FUApLXyok7J.PNG"/></item></channel></rss>