<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ अगरबत्ती]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/agrbttii</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/agrbttii" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sun, 02 Jul 2023 14:30:38 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[अगरबत्तियों के सुगंध से महकी SHG महिलाओं की ज़िन्दगी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/ujjain-shg-making-incense-sticks</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/mQI1H9Q0Sj7kIjN2XsMi.jpeg"><p><span><strong>भारत की सामाजिक और धार्मिक रीतियों में सुगंध का अपना अलग महत्व है. किसी भी पूजा,अनुष्ठान, समारोह या आयोजन में इस सुगंध को लेकर आती है अगरबत्ती (Incense Sticks)</strong>. हमारी भौतिकता (Materialism) और आध्यात्मिकता (Spirituality) के बीच में ब्रिज का काम करती है अगरबत्ती, जिनकी महक से पवित्र वातावरण बनता हैं. अगरबत्तियाँ आध्यात्मिक उपयोग  के साथ योग, ध्यान या सिर्फ अच्छे माहौल में भी काम ली जाती है .</span><br><span></span></p>
<p><span>अब ऐसी सात्विक महकदार और खुशनुमा चीज़ से देश की महिलाओं को कैसे अलग रखा जा सकता था. इसलिए महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (Swayam Sahayata Samuh) की मदद से ऐसी ही एक पहल उज्जैन (Ujjain) जिले में स्थित कुंगारा (Kungara) में की गयी. <strong>यहां के धनलक्ष्मी स्वयं सहायता समूह (Dhanlaxmi Swayam Sahayata Samuh) में, सहायक मार्गदर्शक संतोष अलावा और अध्यक्ष उषा दीदी के नेतृत्व में अगरबत्तियाँ बनाने का काम शुरू हुआ. इस समूह में अगरबत्तियाँ विभिन्न सुगंधों वाले पदार्थ  जैसे चंदन, गुलाब , मोगरा, पाइनएप्पल आदि से बनाई जाती हैं. इस समूह की शुरआत 2021 में हुई. समूह में १२ महिलाएं हैं जो अलग अलग कार्यभार संभाल रही है. कुछ महिलाएं अगरबत्ती प्रोडक्शन (Production) में, कुछ मार्केटिंग (Marketing), पैकेजिंग (Packaging) तथा कुछ डिस्ट्रीब्यूशन (Distribution) में अपनी पूरी लगन से काम कर रही है और महिला सशक्तिकरण (Gender Empowerment) का उदाहरण पेश कर रही है.</strong></span><br><br><span>Self Help Group (SHG) में जुड़ने से पहले महिलाएं बेरोजगार थी साथ ही उनकी और परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी. आज वही महिलाएं सिर्फ कमा रही है और अपने परिवार की स्थिति में सुधार भी कर रही है. SHG में जुड़ने के बाद ही यह महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बानी बल्क़ि उनमें आत्मविश्वास भी आया, क्योंकि एक वक़्त वह था जब यह महिलाएं घर से निकलने, बैंक जाने और लोगो से बातें करने की सोच भी नहीं सकती थी. आज वही महिलाएं अपने स्वयं सहायत समूह के सारे काम, हिसाब, खरीदी, बेचने जैसे काम खुद कर रही है. <strong>अगरबत्ती बनाने में लगने वाले हर सामान जैसे फूल, एसेन्स, मटेरियल लाना हो या पैकेजिंग का सामान लाना, सारा काम Self Help Group की महिलाएं अपने बलबूते पर कर रही है. </strong>अलग अलग संकुल में अगरबत्तियों का डिस्ट्रीब्यूशन भी खुद ही संभाल रही है.  आज वो न केवल अपने घर के ख़र्चों को संभाल रहीं है बल्कि परिवार के लिए टेलीविज़न, फ्रिज, बाइक आदि भी खरीद रही हैं.  </span><br><br><strong>यह समूह उदाहरण है की कैसे सफल ,सशक्त और सेल्फ डिपेंडेंट महिला, परिवार समाज और देश की स्थिति को बदलने में बड़ा योगदान कर सकती हैं या यूँ कहें की कैसे धनलक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और आत्मबल की सुगंध हर जगह फैला रही है . </strong></p>
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</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Sun, 02 Jul 2023 14:30:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/ujjain-shg-making-incense-sticks]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/mQI1H9Q0Sj7kIjN2XsMi.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/mQI1H9Q0Sj7kIjN2XsMi.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[महकती रहे ज़िंदगी... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-making-agarbatti-in-madhya-pradesh</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/S1kD4X2zOdSNgfstCnMI.jpeg"><p>सब समूह दीदियां सोच में थी, किया क्या जाए? रास्ते थे कभी पापड़, खिलौने, नर्सरी और भी न जाने क्या-क्या. लेकिन कहीं बात नहीं बन पा रही थी. किसी में कुछ खामी तो किसी में कुछ कमी. थोड़े समय बाद सबने सबकुछ भगवान् भरोसे छोड़ दिया. एक दिन जिला पंचायत के अधिकारी गांव में आए. कई तरह के रोजगार के लिए प्लान सुझाए. और भगवान ने अधिकारियों के जरिये राह दिखाई या यूं कहें सुंघाई. बात आकर जमी अगरबत्ती बनाने पर. समूह तो पहले से बना ही लिया था बस अब उसका महकना बाक़ी था. उसे पूरा किया अगरबत्ती बनाने के काम ने.  </p>
<p>इस से पहले गांव की महिलाओं का पूरा समय घर में या मजदूरी में बीत रहा था. इस बीच इन महिलाओं अगरबत्ती बनाने और कमाई करने का इरादा हुआ. लेकिन महिलाएं सोच में पड़ गई ,अगरबत्ती कैसे बनाते हैं. कच्चा माल कहां से आएगा. अभी तक केवल दुकानों से अगरबत्ती खरीदने और देव स्थान पर लगाने तक की समझ थी. यह काम कठिन लग रहा था. ऐसे में कई सवालों की झड़ी महिलाओं ने अधिकारियों के सामने लगा दी.इन अधिकारियों ने ट्रेनिंग दिलवाने की बात कही. कच्चा सामान खरीने में मदद और अगरबत्ती बनाने की मशीन दिलवाने की भी बात कही. फिर क्या था, कड़ी मेहनत और पसीना बहा कर एक साल के भीतर इस गांव का नज़ारा बदल गया. न केवल देव स्थान बल्कि इन घरेलु महिलाओं की ज़िंदगी भी अगरबत्ती की खुशबू से महक रही है. यह दिलचस्प कहानी है मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के लखनगुवां गांव की. </p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/sa2nnRtMQRF7CHN1Kekw.jpeg" alt="AHG making agarbatti "></p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">अगरबत्तियां  पैक करती समूह की महिलाएं (Image Credits: Ravivar Vichar)</span></em></p>
<p>लखनगुवां गांव की बबिता पाठक कहती हैं - "मैं शादी के बाद घरेलु महिला बन कर रह गई. कुछ रास्ता सूझ नहीं रहा था. घर में पैसे की जरूरत थी. बारह महिलाओं के साथ मिलकर विंध्यवासिनी स्वसहायता समूह बनाया. SHG से छोटा-मोटा लेनदेन करना सीखे ,पर कुछ नहीं हुआ. "एक दिन जिला पंचायत के आजीविका मिशन के अधिकारी आए और फिर हुई नई शुरुआत. बबिता आगे बताती है -" हमारी कई साथियों के पति इस तरह के काम में साथ देने को तैयार नहीं थे. वे मजदूरी करने के लिए दबाव बनाते रहे. लेकिन हमने अपनी ज़िद से ट्रेनिंग ले ली. फिर बाद में मशीन भी आ गई. कच्चा माल छतरपुर सहित दूसरी जगह से मंगवाया.हम धीरे-धीरे हम सब महिलाएं अगरबत्ती बनाना सीख गए." गांव में  सूना पड़ा रहने वाला घर अब गृह उद्योग के नाम से नई पहचान बना चुका है.      </p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/L7dQazpN6BfIH7cZKISb.jpeg" alt="AHG making agarbatti "></p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">अगरबत्ती बनाती महिलाएं (Image Credits: Ravivar Vichar)</span></em></p>
<p>कभी संघर्ष करने वाली बबिता पूरे आत्मविश्वास से खुश हो कर आगे बताई है -" हमारे संघर्ष के दिन ख़त्म हुए. हम सभी दीदियां हर महीने पांच हजार रुपए कमा लेती है. हमारे समूह की कई दीदी मजदूरी कर जैसे-तैसे घर चलाती थी ,अब वे भी अब स्वाभिमान से जी रहीं हैं. " लखनगुवां में SHG की ये महिलाएं खुद के पैरो पर खड़ी हो गई. कारोबार में सफलता के आसमान में रोज नई  ऊंचाइयां छू रही है.समूह द्वारा तैयार ये अगरबत्ती की खुशबू गांव -गांव फ़ैल रही है.लोग बड़ी आस्था से समूह से अगरबत्तियां खरीद रहे हैं.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Sat, 04 Mar 2023 12:48:55 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-making-agarbatti-in-madhya-pradesh]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/S1kD4X2zOdSNgfstCnMI.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/S1kD4X2zOdSNgfstCnMI.jpeg"/></item></channel></rss>