<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ Ahilya Bai Holkar]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/ahilya-bai-holkar</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/ahilya-bai-holkar" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 22 Aug 2025 13:15:34 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[Women Empowerment का पर्याय रहीं मां अहिल्या देवी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/point-of-view/maa-ahilya-devi-was-synonymous-with-women-empowerment-showed-foresight-towards-employment-and-women-9687970</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2025/08/22/rv-2025-08-22-12-48-54.jpg"><p>1700 वीं ईस्वीं में जब सती प्रथा जैसी कुरुति थी. पर्दा प्रथा और महिलाओं पर दमन की घटनाएं आम थीं, उस दौर में इंदौर (Indore) और मालवा (Malwa) में होल्कर (Holkar) घराने की अहिल्या बाई ने अपने शासनकाल में महिलाओं के सम्मान और उत्थान के लिए वह कर दिखाया जिससे वह अहिल्या बाई (<a href="https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/ahilyabai-holkar-brave-maratha-queen-who-championed-women-empowerment">Ahilya Bai Holkar</a>) से लोकमाता बन गई.यही कारण है कि 300 साल बाद भी देवी अहिल्या बाई को पूरी श्रद्धा के साथ याद किया जाता है.इंदौर,खरगोन और महेश्वर में खास आयोजन होते हैं.यहां तक कि मध्य प्रदेश सरकार की केबिनेट भी हाल ही में इंदौर के राजवाड़ा परिसर में आयोजित हुई. इसके पहले भी महेश्वर मुख्यालय पर भी केबिनेट की बैठक कर यह दर्शाया गया कि हमारे इतिहास में निष्पक्ष और जरूरतमंदों की मदद के लिए सदैव अहिल्या बाई तैयार रहती थीं.उसी सिद्धांत में सरकार की सोच निहित है. &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</p>
<h2>महिलाओं के सपने में भरे रंग</h2>
<p>इंदौर (Indore) मुख्यालय होने के बावजूद शिवभक्त अहिल्या बाई(Ahilya Bai) ने नर्मदा (Narmda) किनारे महेश्वर (Maheshvar) को अपनी राजधानी बनाया. अहिल्या बाई (Ahilya Bai) ने इलाके में रोजगार देने खासकर महिलाओं को आगे बढ़ाने के मकसद से गुजरात से कुछ बुनकर परिवारों को यहां लाकर बसाया. सूती धागे से तैयार साड़ियों को विशेष तरह से बुनकर तैयार करने में जुट गए. धीरे-धीरे स्थानीय लोगों को काम मिलने लगा. महिलाएं भी इस काम में जुट गईं. अहिल्या बाई (Ahilya Bai) की यही दूर दृष्टि और महिलाओं सशक्तिकरण (Women Empowerment) की पहली शुरुआत थी. अहिल्या बाई (Ahilya Bai) ने तीन सौ साल पहले उनके सपनों में रंग भरे.</p>
<h2>महिला बुनकर बना रही आधुनिक साड़ियां &nbsp;</h2>
<p>समय के साथ महेश्वर (Maheshvar) में बुनकरों की संख्या बढ़ती चली गई. आजीविका मिशन (<a href="https://ravivarvichar.in/stories-of-women/giving-a-befitting-reply-to-naxalites-with-the-strings-of-love-women-in-bijapur-chhattisgarh-have-learned-to-live-with-confidence-9628048">Ajeevika Mission</a>) के तहत स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) के गठन और सदस्यों ने भी इस इलाके में महेश्वरी साड़ियों को बनाने का काम अपनाया. मिशन के DPM Govind Mandloi बताते हैं- "महेश्वर ब्लॉक में इस समय 13 सौ समूह काम कर रहे. इसमें ढाई सौ परिवार परिवार साड़ियां को तैयार कर रहे. यही उनकी आजीविका का साधन बन गया."</p>
<figure class="image"><img alt="IMG-20250822-WA0023" src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/580x348/filters:format(webp)/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/2025/08/22/img-20250822-wa0023-2025-08-22-12-52-03.jpg" style="width: 501px;" height="376">
<figcaption>साड़ी शो रूम पर साड़ी बताते हुए संचालक आशीष (Image Credits: Ravivar)</figcaption>
</figure>
<p>महेश्वर (Maheshvar) &nbsp;के ही हेंडलूम (Handloom) और आश्रय साड़ी शो रूम के संचालक अखिलेश केशवरे बताते हैं- "यहां कई पीढ़ियां बदल गई, लेकिन लोकमाता का नाम आज भी आस्था के साथ लिया जाता है. नगर और आसपास लगभग पांच &nbsp;हजार बुनकर साड़ियां निर्माण में जुटे हुए हैं. यह देवी अहिल्या बाई की देन है."</p>
<h2>8 हजार लूम और पांच हजार बुनकर&nbsp;</h2>
<p>देवी अहिल्या बाई होल्कर(Ahilya Bai Holkar) ने जो नींव रखी उसका विस्तार देश की सीमा से बाहर विदेशों तक पहुंच गया. आशीष केशवरे कहते हैं- "नगर में इस समय आठ हजार से ज्यादा हैंडलूम हैं और पांच हजार से ज्यादा बुनकर काम कर रहे.हमें ख़ुशी है कि नगर में बुनकरों को बड़ा रोजगार मिल रहा."</p>
<p>&nbsp;</p>
<figure class="image"><img alt="IMG-20250822-WA0024" src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/580x348/filters:format(webp)/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/2025/08/22/img-20250822-wa0024-2025-08-22-12-54-46.jpg" style="width: 492px;" height="492">
<figcaption>image credits: AI</figcaption>
</figure>
<p>हेंडलूम पर साड़ी बनाने वाली पूजा पंवार कहती हैं- " मेरे परिवार के कई सदस्य इस बुनकर और साड़ी बनाने में जुटे हुए हैं. ज़िंदगी में आर्थिक स्थिति मजबूत हो गई.हम साड़ियां और दूसरे कपड़े भी डिमांड पर बनाते हैं."&nbsp;</p>
<figure class="image"><img alt="IMG_20250822_123239" src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/580x348/filters:format(webp)/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/2025/08/22/img_20250822_123239-2025-08-22-12-53-47.jpg" style="width: 500px;" height="499">
<figcaption>हेंडलूम पर साड़ी बनाती हुई बुनकर पूजा (Image Credits: Ravivar)</figcaption>
</figure>
<p>देश विदेश की एक्सिबिशन में महेश्वरी साड़ियों का दबदबा बना हुआ है. इन <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-earning-their-livelihood-by-making-maheshwari-sarees">Maheshvari Sarees</a> की खासियत में किले के कंगूरे और संस्कृति को उकेरा जाता है. 800 रुपए से लगा कर 8 हजार रुपए तक की कॉटन और सिल्क की साड़ियां तैयार की जा रहीं हैं.</p>
<figure class="image"><img alt="bhavya mittal collector of Khargon" src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/580x348/filters:format(webp)/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/2025/08/22/bhavya-mittal-collector-of-khargon-2025-08-22-12-58-20.jpg" style="width: 237px;" height="308">
<figcaption>Bhavya Mittal Collector Khargone</figcaption>
</figure>
<p>&nbsp;<br>तीन सौ साल बाद भी महेश्वर(Maheshvar) की कारीगरी बनी हुई है. Khargone कलेक्टर भव्या मित्तल कहती हैं- "महेश्वर में बुनकर बेहद मेहनती हैं. लगातार जिला प्रशासन ट्रेनिंग, नए पैटर्न की डिज़ाइन और प्रशासन ऐसे बुनकरों को प्रोत्साहन दे रहा. यही वजह कारोबार लगातार निखार रहा है. <a href="https://ravivarvichar.in/women-news-india/collectors-office-decorated-with-handcrafts-shg-women-organised-an-exhibition-in-jaipur-collectors-office-9638965">Self Help Group</a> की महिलाओं को नई पहचान मिली.इसके अलावा नगर में निजी हेंडलूम और शो रूम &nbsp;महेश्वर आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है.हमारा प्रयास हैं मां अहिल्या बाई की इस पहचान को और सशक्त बनाएं."</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Fri, 22 Aug 2025 13:15:34 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/point-of-view/maa-ahilya-devi-was-synonymous-with-women-empowerment-showed-foresight-towards-employment-and-women-9687970]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2025/08/22/rv-2025-08-22-12-48-54.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2025/08/22/rv-2025-08-22-12-48-54.jpg"/></item><item><title><![CDATA[कुरीतियों के खिलाफ जंग लड़ने वाली अहिल्या बाई होलकर ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/ahilyabai-holkar-brave-maratha-queen-who-championed-women-empowerment</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/H3SDXk0i0L87NAfDaI88.jpg"><p>इतिहास के पन्नों पर <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/jaipur-maharani-gayatri-devi-wife">रानियों</a> (Queens in history) का नाम राजा की पत्नी होने की वजह से लिखा जाता. लेकिन, पितृसत्ता (patriarchy) के उस दौर में रानी अहिल्या बाई (Ahilya Bai Holkar) वो नाम है, जिन्होंने समाज की बेड़ियों को तोड़, इतिहास में अपनी अलग जगह बनाई. मालवा की रानी अहिल्या बाई होल्कर सबसे सफ़ल और प्रसिद्ध मराठों (successful maratha queen) में से एक रहीं. वह <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/janki-the-sugar-queen">नारीवादी</a> शासक (feminist ruler Ahilyabai), दूरदर्शी नेता, बहादुर योद्धा और बुद्धिमान विद्वान थी. मल्हार राव (Malhar Rao) और खंडेराव (Khanderao) की मृत्यु के बाद अहिल्या बाई ने 11 दिसंबर, 1767 से इंदौर का शासन संभाला.</p>
<h2>अहिल्या बाई ने शिक्षा, अर्थव्यवस्था, और सामाजिक कल्याण को दी थी प्राथमिकता&nbsp;</h2>
<p>उन्हें इंदौर (Indore ruler) को छोटे से गांव से समृद्ध, सुंदर और शांतिपूर्ण शहर बनाने का श्रेय मिला. उन्होंने मालवा (Malwa) में किले और सड़के बनाने, त्योहार आयोजित करने, मंदिरों को दान देने, और धर्मशाला और आश्रयों की स्थापना करने में अहम भूमिका निभाई. इसके अलावा, वह एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थी, जिन्होंने गरीबों और तीर्थयात्रियों के लिए मुफ्त रसोई की शुरुआत की. उन्होंने इस बात का ख्याल रखा कि उनके शासन में कोई भी भूखा न सोये. जिस समय लड़कियों (Ahilyabai promoted girl education) को पढ़ाया नहीं जाता, उस समय खुद शिक्षा हासिल कर उन्होंने महिलाओं को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया.&nbsp;</p>
<h3>टैक्स को बनाया था सामाजिक सशक्तिकरण का ज़रिया&nbsp;</h3>
<p>प्रसिद्द जाम गेट (Jam Gate) पर गणपत राव नाम का कोई व्यक्ति, वहां से गुजरने वाले यात्रियों, घुड़सवारों और गाड़ियों से टोल वसूला करता था. टैक्स इकट्ठा कर जब वह रानी अहिल्या बाई को देने गया तो रानी ने पैसे लेने से इनकार कर दिया और गणपत को आदेश दिया कि उस राशि को एक द्वार बनाने में खर्च करे जहां यात्री आराम कर सकें.</p>
<blockquote>
<p>अहिल्या बाई की शासन व्यवस्था पर बात करते हुए स्वामी अवधेशानंदगिरि (Swami Avadheshanandgiri) बताते है,<em> ''अहिल्या बाई के शासन से हम सीख सकते हैं कि कर या टैक्स कैसे इकट्ठा किया जाना चाहिए. कर न तो मजबूरी से वसूला जाना चाहिए, न ज़बरदस्ती से, और न ही डर से, &nbsp;बल्कि उसी तरह वसूलना चाहिए जैसे मधुमक्खी फूलों से रस इकट्ठा करती है.&rdquo;</em></p>
</blockquote>
<h3>टेक्सटाइल इंडस्ट्री, महिला सशक्तिकरण, वन संरक्षण पर दिया ध्यान&nbsp;</h3>
<p>महेश्वर (Maheswar) में टेक्सटाइल इंडस्ट्री (Textile Industry) की शुरुआत कर महिलाओं को रोजगार का अवसर दिया. उन्होंने वन संरक्षण (Forest Conservation) करने के साथ कला, संस्कृति और साहित्य को भी प्राथमिकता दी. अपने <a href="https://ravivarvichar.in/photovideo/rani-durgavati-the-great-warrior-queen-of-india">शासन</a> के एक साल में ही अहिल्या बाई ने मैदान में सेनाओं का नेतृत्व किया और मालवा को लूटने आये दुश्मनों से बचाया.</p>
<h3>राजमाता अहिल्या बाई कहलाई 'द फिलोस्फर क्वीन'</h3>
<p>ब्रिटिश इतिहासकार जॉन कीए (British historian John Keay) ने उन्हें 'द फिलोस्फर क्वीन' (The Philosopher Queen) का टाइटल देते हुए कहा, <em>"मालवा की शासक उग्र रानी और कुशल शासक होने के साथ एक समझदार राजनीतिज्ञ भी थीं. जब मराठा पेशवा अंग्रेजों और उनकी योजनाओं को समझ न सके, &nbsp;तब उन्होंने पेशवा को आगाह किया था."</em></p>
<p>वह अपने पति की मृत्यु के बाद सती हो सकती थी. या हिम्मत भी हार सकती थी. पड़ोसी क्षेत्र को उस समय की 16 करोड़ की विरासत पर कब्ज़ा करने दे सकती थी. लेकिन अपनी हिम्मत और सूझ-बूझ से उन्होंने अपने राज्य को सशक्त बनाया और दुनिया को दिखाया कि <a href="https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/indias-first-female-photojournalist-homai-vyarawalla-who-captured-historical-events">महिलाएं</a> पुरुषों से कमतर नहीं हैं .</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sat, 12 Aug 2023 16:09:46 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/ahilyabai-holkar-brave-maratha-queen-who-championed-women-empowerment]]></guid><category><![CDATA[हम में है हीरो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/H3SDXk0i0L87NAfDaI88.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/H3SDXk0i0L87NAfDaI88.jpg"/></item><item><title><![CDATA[आज की अहिल्या: एसडीम विशाखा देशमुख ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/sdm-vishakha-deshmukh-helps-homeless-children-get-shelter</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/L4YPG6Mv0JkrrloOPHCm.jpg"><p><em>होल्कर स्टेट की शासिका देवी अहिल्या बाई होल्कर (Ahilya Bai Holkar) के काम और निर्णय इतिहास में दर्ज हैं. मंदिरों का जीर्णोद्धार हो या गांव में कुएं-बावड़ी बनाना हो,रियासत के कई इलाकों में आज भी निशानियां बरक़रार है.शिव उपासक अहिल्या की सोच लगभग ढाई सौ साल पहले दूरदर्शी दिखाई देती है,जिन्होंने महिलाओं को सम्मान दिया. रोजगार के कई अवसर तैयार किए. रविवार विचार ने ऐसी महिलाओं को मिलवाया जिनके कामकाज और जूनून से जनहित में अपनी सेवाएं दे रहीं हैं. सही मायने में 'आज की अहिल्या' यही है. इस सीरीज़ में एक और ऐसी आज की अहिल्या से मिलवाते हैं.     </em></p>
<h3>काम के जूनून ने बना दिया यूनिक ऑफिसर </h3>
<p>मूसलादार बारिश और पानी से भर चुके डोम में खड़े 15 हजार चुनाव कर्मचारियों के बीच में एक प्रिग्नेंट लेडी उसी आत्मविश्वास से कर्मचारियों को गाइड करती रही. बिना खुद के स्वास्थ्य की परवाह किए बगैर..... सबसे संवेदनशील माने जाने वाले नगर निगम इंदौर के चुनाव पूरी ईमानदारी से ड्यूटी निभा रही और कोई नहीं बल्कि इंदौर की एसडीएम विशाखा देशमुख (SDM Vishakha Deshmukh) थी. उनके काम की शैली और आत्मविश्वास को देख हर अधिकारी कर्मचारी दंग था.जब कई कर्मचारी ऐसी संवेदनशील कामों से पीछा छुड़ाता है. ड्यूटी कैंसिल करवाने में ताकत लगवाता है उससे उलट एसडीएम विशाखा ने चुनाव संपन्न कराए. सतत मॉनिटरिंग की.</p>
<p>अपनी प्रिग्नेंसी के आखरी टाइम तक लगातार ड्यूटी देने वाली एसडीम विशाखा देशमुख कहती है -" मेरा फोकस हमेशा क्लियर रहता है. यदि मन मजबूत है तो कोई आपको हरा नहीं सकता. मैंने पूर्व कलेक्टर मनीष सिंह के मार्गदर्शन में चुनाव करवाए. डीएम मनीष सिंह ने मुझे लगातार हौसला दिया. उनसे मिले हौसले ने मेरी हिम्मत और बढ़ा दी. मैं इस चुनौती को भी जीना चाहती थी. शांति पूर्वक चुनाव और फिर बेटी का जन्म दोहरी ख़ुशी का अहसास दे गया."</p>
<p>2018 बैच की विशाखा देशमुख का डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन और फिर सर्विस में मिली सफलताओं ने मिसालें पेश कर दी.काम के प्रति जूनून और लोगों की मदद की भावना ने उनको अलग पहचान दे दी. अपने छोटे से कार्यकाल में उन्होंने गुना,धार और इंदौर जिलों में अपनी सेवाएं दी. गुना में एक सरकारी योजना को विशाखा ने सार्थक बना दिया.अनाथ और निर्धन पन्नी बीनने वाले बच्चों को न केवल रहने की जगह दिलाई ,बल्कि उनके चेहरे पर स्थाई मुस्कान उपहार में दे आई. इंदौर जिले में भी उनके काम का अंदाज़ ही उन्हें अलग बना रहा. उनके एसडीएम कैबिन के दरवाज़े हर उस परेशान व्यक्ति के लिए खुले हैं, जिसके पास किसी प्रभावी व्यक्ति की रिकमंड नहीं.       </p>
<p>गुना में पदस्थ समय को याद करती हुईं कहती हैं - " मेरे लिए नया जिला था. डिप्टी कलेक्टर के पद के साथ मुझे जिला परियोजना समन्वयक (DPC) इंचार्ज भी थी. शासन की योजना हमें मिली. सामान्य वर्ग के बच्चों के लिए भी हॉस्टल खोला जाना था. ये वो बच्चे चिन्हित करने थे जो असहाय हों,निर्धन हों,अनाथ हों और ऐसे बच्चे जो कूड़े-करकट के ढेर से पन्नी बीन कर अपनी जिंदगी चला रहे हों.और इन बच्चों को ढूंढना बड़ी चुनौती था. मैं खुद निकल पड़ी बच्चों की तलाश में. मैंने ठान लिया था कि इस योजना को सौगात में बदलना है. आखिर सफलता मिली. कूड़े के ढेर में पन्नी बीनते दो मासूम से मैं खुद मिली. और इस मिशन की शुरुआत हुई. धीरे-धीरे मेरी उम्मीद से ज्यादा ऐसे बच्चे मिले. दूसरी परेशानी ऐसी बिल्डिंग तलाशना था जहां से स्कूल पास हो और सुरक्षित हॉस्टल बना सकें.आखिर बहुत मेहनत के बाद हमने बिल्डिंग भी चिन्हित की.एक्स्ट्रा फंड के लिए वरिष्ठ ऑफिसर्स से मिली. और एक या दो नहीं बल्कि 40 से ज्यादा मासूमों की चहल-पहल से हॉस्टल का नज़ारा ही बदल गया. ये पल मेरे लिए यादगार हो गए. " </p>
<p>कोरोना काल में भी जनहित में खास मोर्चों पर ड्यूटी ली.धार जिला मुख्यालय पर कोरोना की पहली लहर में कंटेंटमेंट एरिया मॉनटरिंग और लोगों तक मदद पहुंचा पहली प्राथमिकता थी. आयुष विभाग के साथ त्रिकटु चूर्ण और दूसरी दवाइयों को घर-घर पहुंचाने में भी डिप्टी कलेक्टर विशाखा धार जिले में चर्चित रहीं. विशाखा का इस कठिन दौर में ही अगला ट्रांसफर इंदौर हो गया. विशाखा आगे बताती हैं - "यहां कोरोना की दूसरी और जानलेवा लहर में संक्रमण की चपेट में आए लोगों को दम तोड़ते देखा,बावजूद अस्पतालों में मॉनटरिंग और परिजनों को मदद पहुंचाने में मैं अपना डर भूल गई. कई लोगों की मदद करने में जो सुकून मिला वह शब्दों में बता नहीं सकती."</p>
<p><br>डिप्टी कलेक्टर जैसे पद पर पहुंचने का श्रेय वे अपने पिता विनोद देशमुख को देती हैं,जिन्होंने अहसास दिलाया कि समाज में कुछ करना है तो प्रशासनिक ऑफिसर बनो. विशाखा कहती हैं - " इतनी मेहनत की,कि फिर पलट कर नहीं देखा.मेरे पिता ने जहां मुझे दिशा दी वहीं मेरी मां नलिनी देशमुख हर वक़्त ऊर्जा बन कर मेरे साथ खड़ी रही."      </p>
<p>जाति प्रमाण-पत्रों को बनवाना हो या किसानों के जमीनों नपती हो ,एसडीएम विशाखा देशमुख ने सख्त आदेश दे दिए कि कोई भी परेशान और जरूरतमंद ऑफिस के चक्कर न लगाए.पति पुनीत आईपीएस ऑफिसर हैं और बेटी इशना है. विशाखा का मानना है कि -" महिलाओं को उनकी क्षमता दिखाने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए. महिला सशक्तिकरण (women empowerment ) जैसी सोच की शुरुआत हर घर और हर पुरुष की मानसिकता से हो. हर जरूरतमंद की निष्पक्ष मदद के साथ संवेदनशीलता और धैर्यता ही किसी अधिकारी को सफल बनती है.होल्कर स्टेट की शासिका देवी अहिल्या बाई इसीलिए सफल और इतिहास में दर्ज है."</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Mon, 05 Jun 2023 17:13:05 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/sdm-vishakha-deshmukh-helps-homeless-children-get-shelter]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/L4YPG6Mv0JkrrloOPHCm.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/L4YPG6Mv0JkrrloOPHCm.jpg"/></item><item><title><![CDATA[आज की अहिल्या: व्हील चेयर नहीं " व्हील ऑफ़ फॉर्चून " ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/assistant-regional-transport-officer-archana-mishra-inspires-many-with-her-courage</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/d9JsJKSyIOf8lquv0ySC.jpg"><p><em>होल्कर स्टेट (Holkar state) की रानी अहिल्या बाई होल्कर (Ahilya Bai Holkar) के कई किस्से इतिहास में दर्ज हैं. उनके जीने का अंदाज़ और धैर्यता हम सब को जीना सिखाता है. उनकी जयंती पर जगह-जगह आयोजन हो रहे है. अहिल्या बाई के कार्यकाल को ढाई सौ साल बीत गए ,लेकिन आज भी उनके आदर्शों पर महिलाएं चल रहीं है . ये महिलाएं संवेदनशील है और समाज के लिए बहुत कुछ कर गुज़र रहीं है. यही 'आज की अहिल्या' हैं. रविवार विचार की इस सीरीज़ में मिलवा रहे ऐसी महिला अफसर से , जिसने कर्मों से दूसरों की ज़िंदगी को संवार दिया.  </em></p>
<p>ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) की भी एक यूज़ लिमिट होती है. लिमिट ख़त्म होते ही उसे रिन्यू कराना होता है,वर्ना कोई काम का नहीं. यहां तक कि परमिट भी ख़त्म हो जाते हैं. और जब बात ज़िंदगी की लिमिट ख़त्म होने की हो तो आप सोच सकते हैं क्या बीतेगी ! ठीक ऐसा लगा कि ज़िंदगी की लिमिट ख़त्म हो रही और सांसों के रिन्यूअल के चांस ख़त्म हो रहे हैं. हंसती-खेलती ज़िंदगी में ऐसा हादसा हुआ कि पलभर में शरीर को स्थाई तौर पर ठहरा दिया. ऐसे हालातों में अच्छे अच्छों का ईश्वर से भरोसा उठने लगता है ऐसे में एक महिला ने ज़िंदगी की किस्मत के पन्ने खोले और खुद ने आत्मविश्वास की स्याही से दस्तख़त कर दिए. ये हैं आत्मविश्वास का दूसरा नाम है अर्चना मिश्रा (Archana Mishra). इंदौर की असिटेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (Assistant Regional Transport Officer).इनकी कहानी कोई फ़िल्मी कहानी से कम नहीं. पर न ये कहानी है न फ़िल्म की काल्पनिक स्क्रिप्ट. ये ज़िंदगी कि हकीकत बताती वह कहानी है जो हजारों लोगों के लिए प्रेरणा है. ये हैं 'आज की अहिल्या' अर्चना मिश्रा. कई युवाओं और निराश लोगों की आइडल हैं, जो जरा सी मोच में बिस्तर पकड़ लेते हैं या लाइफ से हार मान जाते हैं.</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/cKKq90C5MrHarby9PbxM.jpg" alt="Archana Mishra"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar vichar</em></span></p>
<p>बचपन से होनाहर अर्चना ने एमएससी केमिस्ट्री में टॉप किया. एक मित्र के सुझाव पर कॉम्पिटेटिव एग्जाम की तैयारी शुरू की. उनका चयन एक बार नहीं बल्कि दो बार पीएससी में हुआ. आरटीओ विभाग में बड़े पद पर पहुंचीं. एक बार और पीएससी के लिए धुन सवार थी. डिप्टी कलेक्टर बनने की तैयारी के बीच एक रोड एक्सीडेंट में अर्चना हमेशा के लिए व्हील चेयर पर आ गई. लगा जैसे ज़िंदगी थम गई. दो साल यूहीं गुजरे और फिर हिम्मत, ज़ज़्बे के साथ आत्मविश्वास से ज़िंदगी की गाड़ी को नई रफ़्तार दी.अर्चना मिश्रा कहती हैं - "साल 2012 में एक रोड एक्सीडेंट में मेरी स्पाइन डैमेज हो गई. काफी इलाज कराया. पर यह कड़वा सच समझ आ गया कि मेरी आगे की ज़िंदगी व्हील चेयर पर ही होगी. मैं चल नहीं पाऊंगी. मेरे परिजनों का उदास होना सहज था. मेरे पिता हों या कोई और सदस्य, मुझे इस हालत में देख भावुक हो जाते.खूबसूरत ज़िंदगी के पर कट गए. मेरा ईश्वर से भरोसा उठ गया. प्रतिष्ठित जॉब, पति, सुंदर बेटी और परिवार के बावजूद खुद को असहाय महसूस करती रही. फिर एक दिन लगा यह सब नहीं चलेगा. मैंने आंसुओं को समेटा. 'कर्म के सिद्धांत' जैसी कई किताबें पढ़ी.मेरी सोच और जीने का अंदाज़ बदल गया.</p>
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<p>ज़िंदगी की नई शुरुआत का मकसद तय कर लिया. समाज और खासकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की ठान ली.अर्चना आगे बताती हैं - " <em>मुझे लगा कि लोक परिवहन में महिलाओं की भागीदारी कम है. मैंने अभी तक 300 महिलाओं को ड्राइविंग सिखवाई. 30 से 35 साल के बीच की इन महिलाओं से मिली. इन महिलाओं की अपनी परेशानी थी. किसी के पति ने तलाक दे दिया तो कोई मायके में आश्रित है. ऐसी कुछ महिलाओं को मैंने ई-रिक्शा दिलवाए. आज वे आत्मनिर्भर हैं. मुझे बहुत ख़ुशी है कि इन में से ही एक युवती ड्राइविंग स्कूल खोलने जा रही है. "</em></p>
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<p>अपनी दिव्यांगता को भुला कर अर्चना मिश्रा का पूरा समय दूसरों की मदद में बीत रहा है. ई-रिक्शा संचालक युवती बताती है कि रिक्शे कीमत एक लाख अस्सी हजार थी. मेरी आर्थिक हालत इतनी कमजोर थी कि मार्जिन मनी भी नहीं भर सकती थी. अर्चना मिश्रा ने जनसहयोग से हर महिला के 25-25 हजार रुपए मार्जिन मनी जमा करवाई.ऐसी निर्धन महिलाओं को सिर्फ दस हजार रुपए ही देना पड़े. लगभग 20 महिलाएं इंदौर की सड़कों पर रिक्शा चला कर अपना घर चला रहीं हैं.</p>
<p>ज़िंदगी में हर जरूरतमंद व्यक्ति कि मदद के लिए तैयार अर्चना आगे बताती है - " <em>कर्म के सिद्धांत किताब के बाद लगने लगा कि सृष्टि बहुत सुंदर है. आत्मनिर्भर बन चुकी महिलाओं के चेहरे की ख़ुशी देख ईशवर पर भरोसा और बढ़ गया. परिवार में पति विवेक मिश्रा और दूसरे परिजनों के सपोर्ट ने मुझे नई ज़िंदगी दी. मेरी व्हील चेयर मेरी मज़बूरी नहीं लगती बल्कि ये "व्हील ऑफ़ फॉर्च्यून " है ,जिसके बल पर मैं लोगों के लिए जीना सीख गई. कोई भी दुःख ज़िंदगी की खूबसूरती को कम नहीं कर सकता. और देवी अहिल्या बाई होल्कर का जीवन भी यही सिखाता है."</em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 01 Jun 2023 17:46:25 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/assistant-regional-transport-officer-archana-mishra-inspires-many-with-her-courage]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/d9JsJKSyIOf8lquv0ySC.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/d9JsJKSyIOf8lquv0ySC.jpg"/></item></channel></rss>