<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ अनूपपुर]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/anuuppur</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/anuuppur" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Mon, 22 May 2023 17:45:00 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[महिला सशक्त तो देश में बरकत ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/women-empowerment-will-lead-to-empowerment-of-india-9-years-of-modi-government-led-towards-women-development</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/z5QUSnFFwO9RgiTxEsat.jpg"><p dir="ltr">"<em>जब भी मैं हवाईजहाज देखती थी, हमेशा सोचती थी, की एक दिन मैं भी इसे उडाऊंगी.</em>" यह कहा, ग्यारवी क्लास में पढ़ रहीं कली ने, जिसे बड़ा होकर पायलट बनना है. Science (विज्ञान) की इस छात्रा के सपने जितने बड़े है, उतनी ही लगन और चमक दिखती है इसकी आंखों में. दूसरी तरफ एक और बेटी जिसका नाम अंशिका है, वो भी स्कूल जाती है और बड़ी होकर डॉक्टर बनाने का सपना देखती है. अंशिका की माँ ने बहुत छोटी उम्र में पढ़ाई छोड़ दी थी, लेकिन वो अपनी बेटी को हर वो सुख देना चाहती है जिसकी वो हक़दार है. अंशिका और कली दोनों की कहानियां, किसी को भी काम करने के लिए प्रेरित कर दे. यह दोनों Pardada Pardadi Educational Society की छात्राएं हैं जो गरीब परिवार की बेटियों को पढ़ाती है. उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव अनूपपुर में रहती है ये दोनों बेटियां. प्रधानमंत्री की महिला और बेटियों के लिए बनाई गयी योजनाओं की कामियाबी को दर्शाती है इन बच्चों की कहानी. </p>
<p dir="ltr">भारत सरकार जब से इस देश में कार्यरत है, उन्होंने महिला साक्षरता और सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकता बनाया है. चाहे वो 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना' हो, 'प्रधानमंत्री आवास योजना' हो, या, 'प्रधानमंत्री जन-धन योजना', हर योजना ने 9 सालों में सिर्फ महिला सशक्तिकरण और कल्याण का परचम लहराया है. माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों के दाखिले का प्रतिशत 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 79.46 प्रतिशत हो गया. प्रधानमंत्री की वित्तीय सलाहकार परिषद की सदस्य शमिका रवि कहती हैं- "<em>देश के स्कूलों में लड़कियों का प्रदर्शन लड़को से काफी बेहतर रहता है.</em>" राजनीतिक विश्लेषक और शोधकर्ता डॉ मनीषा प्रियम का मत है- "<em>शिक्षा नीति के लक्ष्य तभी पूरे होते हैं जब सरकारें लड़कियों, महिलाओं और सुविधाहीन सामाजिक वर्गों पर विशेष ध्यान देती हैं.</em>"  </p>
<p dir="ltr">अपोलो अस्पताल की संयुक्त प्रबंध निदेशक डॉ संगीता रेड्डी कहती हैं कि- " <em>मुझे सबसे ज्यादा इस बात का गर्व है जागरूकता बढ़ने से माध्यमिक शिक्षा में जहां पहले 76 प्रतिशत लड़कियों के नाम लिखे थे, वह अब बढ़कर 84 प्रतिशत हो गए हैं.</em>" सरकार महिलाओं को self help group से जोड़ने पर बहुत ज़ोर देती है. इन समूहों का हिस्सा बनकर लाखों महिलाओं की ज़िन्दगी बदल चुकी है. उत्तर प्रदेश की महिलाऐं समूह से जुड़कर नौकरी कर रही है जिनसे उन्हें अपने परिवार को चलाने में काफी आसानी हो रही है. छात्रा कली की मां ने बताया- "<em>मैं SHG से जुडी हुई हूं. इसी कारण मुझे शौचालय की साफ-सफाई का काम मिला. आज मैं छह हजार रुपये कमा लेती हूं.</em>" SHG की सदस्य रानी सिंह कहती हैं- "<em>फायदा हो रहा है और इसीलिए हमने कुछ जानवर खरीद लिए है. अच्छी खासी कमाई भी हो रही है.</em>"</p>
<p dir="ltr"><img style="width: 522px; height: 348px;" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/M6ezWgHKRtEpSkuwwhOa.jpg" alt="SHG Women in India"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Effectiveness Consortium on Women's Groups </em></span></p>
<p dir="ltr">India Sanitation Coalition और Rothschild and Company, India की चेयरपर्सन नैना लाल किदवई ने कहा- "<em>जो सबसे खास चीज हमने हासिल की है वह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए हुई है, जिसमें लगभग चार लाख ग्रामीण महिलाओं के SHGs को प्रशिक्षण के जरिए मदद की गई. इस मिशन ने गरीब और वंचित समुदायों की 8.7 करोड़ महिलाओं के 81 लाख self help group तैयार किये गए. SHG का यह अभियान को देश को बदलने में बहुत अहम भूमिका निभाएगा. हमारे SHGs जितने मजबूत होंगे उतना ही माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं के लिए उन्हें कर्ज देना आसान हो जाएगा क्योंकि माइक्रोफाइनेंस ज्यादातर SHGs के जरिए ही दिया जाता है.</em>"            </p>
<p dir="ltr">डॉ संगीता रेड्डी कहती हैं- "<em>SHG आंदोलन से महिला सदस्यों की संख्या बढ़ रही है और उनको मजबूत नेतृत्व भी मिल रहा है. प्रधानमंत्री का बहुत मशहूर बयान है कि भारत केवल महिला विकास पर नहीं बल्कि महिलाओं की अगुवाई में विकास पर ध्यान दे रहा है.</em>" एक महिला जो कि प्रधानमंत्री आवास योजना के कारण आज एक घर में रह रही है बताती है- "<em>SHG वालों की तरफ महिलाएं आई और मेरा नाम योजना के तहत लिख कर ले गयी. तब हमें यह मकान मिला. टॉयलेट भी सरकार की तरफ से बना.</em>" सरकार ने पहले कुछ सालों में ही 10 करोड़ शौचालय बनवाए और इसके बाद data सामने आया कि औरतों के ऊपर होने वाले क्राइम में बहुत भारी बदलाव और गिरावट आई. SUGAR कॉस्मेटिक्स की सह-संस्थापक (Co-Founder) विनीता सिंह कहती हैं कि- "<em>यह पक्का है कि अगले 10 साल में महिला नेतृत्व एक्सप्लोड होने वाला है. मेरी जैसी कई इंटरप्रेन्योर 10 साल पहले सोच नहीं सकती थीं कि अपना खुद का बिजनेस बनाकर बड़ा करें.</em>" भारत देश में प्रधानमंत्री द्वारा शुरू कि गयी सारी योजनाएं महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है. यह सच है कि अभी बहुत बदलाव की गुंजाईश है, लेकिन जिस गति से महिलाएं सशक्तिकरण की और बढ़ रही है, वह बहुत सराहनीय है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Mon, 22 May 2023 17:45:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/women-empowerment-will-lead-to-empowerment-of-india-9-years-of-modi-government-led-towards-women-development]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/z5QUSnFFwO9RgiTxEsat.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/z5QUSnFFwO9RgiTxEsat.jpg"/></item><item><title><![CDATA[ऐसी हरियाली लहलहाई, जिंदगी मुस्कुराई ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/anuppur-nursery-by-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/moUSmC6Jgc7cpMWmHjqV.jpg"><p><em>नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक के पास कटकोना से भी हरियाली की ऐसी धार निकली है जिसने पुरे इलाके को हरियाली से आच्छादित कर दिया है. यही कमाल होता है संघठन और सामूहिक प्रयास का जिसने SHG सदस्यों के सपनों को नए पंख दिए है. इस जनजातीय जिले में हुई SHG की यह शुरुआत महिलाओं के जाग्रति का काम करेगी.</em></p>
<p>अनूपपुर जिले के गांव कटकोना में बिछी जाजम पर बड़ी गहमागहमी दिख रही हैं. वहां जुटी हर महिला अपनी बात सामने लाना चाह रही है. सबके पास अपने-अपने सुझाव और वे अपना सुझाव सबसे पहले बताने को आतुर. महिला सदस्यों के बीच बैठी रेवंती तिवारी सब को चुप कराने की कोशिश करती रही.बार-बार कहती रही चुप हो जाओ. सबको मौका मिलेगा. शुरू में कोई मानने को तैयार नहीं.आखिर महिलाओं ने बात मानी लेकिन आंखों में चमक और कुछ नया करने का जज्बा सबके चेहरे पर पढ़ा जा सकता था.<br><br>कटकोना , कोतमा विकासखंड का यह छोटा सा आदिवासी बहुल गांव जहां की महिलाएं सुर्खियों में है. SHG का ही असर है कि दो साल में नर्सरी तैयार की अब बढ़ते हुए पौधों और हरियाली के साथ घरेलू महिलाओं की जिंदगी अब लहलहा रही है. समूह की अध्यक्ष रेमंती तिवारी ने बताया- " वैसे शुरुआत 2013 में की,  नाम रखा वैष्णों आजीविका स्व सहायता समूह, आदिवासी बहुल क्षेत्र और निरक्षर महिलाओं ने अपनी किस्मत में मजदूरी करना ही नियति मान लिया था. यहां तक कि कई महिलाएं तो समूह की सदस्य बनने को भी तैयार नहीं थी. लगातार समझाइश और आजीविका मिशन,SHG का महत्व उन्हें समझाया गया.धीरे-धीरे महिलाएं तैयार हुई. अध्यक्ष आगे कहती है- यह वही महिलाएं है, जो पहले साप्ताहिक बैठक में बचत राशि 20 रुपए देकर चुपचाप चली जाती थी. संकोच और अपने आप को विचारों से कमजोर मान यह महिलाएं कुछ भी कहने को तैयार नहीं होती थी" . आज बढ़ती आय और कमाई के जरिए ने इनकी जिंदगी में नए रंग भर दिए. इस वक्त इनके पास डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा की बचत राशि है. सबने मिलकर इन नौ वर्षों में कई काम किए.इस से समूह सदस्यों का लगातार हौसला बढ़ता गया. अब सब सदस्य,  मीटिंग में समय से पहले तो आ ही जाती हैं और नए-नए आइडिया भी उनके पास होते हैं.<br><br>समूह की मेहनत को देख अनूपपुर जिला प्रशासन ने गांव में ही ढाई एकड़ जमीन शासकीय उद्यान परिसर में दे दी. इन महिलाओं ने यहीं पर नर्सरी तैयार की. दो साल में विभिन्न तरह के पौधे तैयार कर लिए. आम, जामुन, कटहल से लेकर मुनगा (सुरजना) नींबू, जामफल के पौधे लोग यहां खरीदने  आते हैं. समूह सचिव कसिया तिवारी बताती हैं- "उनके पौधे 15 से 35 रुपए और अधिक कीमत में भी जनपद और कुछ पंचायतों ने खरीदे.यह SHG की महिलाएं सिर्फ नर्सरी पर निर्भर नहीं रही. सदस्य साथी कोई साग-भाजी तो कोई किराना दुकान गांव में ही चलाने लगा. यहां तक कि कुछ साथी ने सिलाई का धंधा भी शुरू कर दिया".<br><br>इस समूह में शामिल ज्योति महारा, पार्वती महारा, चंद्रवती महारा, गायत्री पांडे, उषा तिवारी, जलेबिया साहू, निधि तिवारी, नीरा महारा, शांति,उर्मिला जैसी महिलाएं बड़े गर्व से बताती है-"हमारी मेहनत लगातार रंग ला रही है. समूह ने आंगनबाड़ियों, स्कूलों में पौष्टिक गुड़-मूंगफली की चिक्की सप्लाई करने का काम भी लिया. खुद के द्वारा तैयार यह चिक्की बच्चों को बहुत पसंद आई."<br><br><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/nEEB0YrX2OEO7Y424Sf8.jpg" alt="accounting SHG"></p>
<p><em>(हर रविवार SHG की एकाउंटिंग करती महिलाएं)  </em> </p>
<p>यह सफर यहीं नहीं थमा. सफलता की नई-नई सीढ़ियों को लगातार चढ़ रही हैं. समूह सदस्यों की बढ़ती योग्यता को देख 13 स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए 16 सौ 52 गणवेश भी तैयार कर के दी है.जिससे अलग कमाई हुई.</p>
<p>लगातार बढ़ती आमदनी से समूह की सदस्यों के सपनों को नए पंख लग गए.समूह की निधि तिवारी ने बताया "हमने भोपाल से चूड़ियों का समान मंगाकर लाख के कंगन बनाने का विचार किया." उन्होंने महसूस किया कि महिलाओं की पहली पसंद कंगन होती है. और सुहाग की यह सबसे महत्वपूर्ण निशानी उनके लिए कमाई का जरिया बन सकती है.उन्होंने काम शुरू किया और कंगन बनाए. जगह-जगह जनरल स्टोर और कंगन स्टोर पर वैष्णों आजीविका स्वयं सहायता समूह के कंगन ग्राहकों को पसंद आने लगे. यहां की महिलाएं ये ही खरीदने लगी. रेमंती और कसिया को खुशी है कि 9 साल की मेहनत अब कमाई का जरिया बन गई. खेती में सुधार और उससे भी अधिक कमाई बढ़ने से यह सदस्य अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा रहे हैं.<br><br>अध्यक्ष और सचिव ने अब तक दुर्गा ग्राम संगठन में 22 स्व सहायता समूह तैयार कर दिए.रफ्तार यही रही तो पूरा आदिवासी इलाका  SHG से पहचान बनाने में पीछे नहीं रहेगा. प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक का अनूपपुर जिला ही है. मां नर्मदा जीवनदायनी है.जैसे मां नर्मदा पूरे प्रदेश की  प्यास बुझाती है...ऐसे ही इस इलाके में मेहनतकश SHG आत्म सम्मान और निर्भरता का नया प्रवाह कायम करेंगे...ये सुखद संकेत नर्मदा नदी के प्रवाह की तरह देखने को मिलने लगे है.</p>
<p><iframe src="https://www.youtube.com/embed/WHpAuz0Bbd8" width="560" height="314" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Sat, 18 Feb 2023 11:11:47 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/anuppur-nursery-by-shg-women]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/moUSmC6Jgc7cpMWmHjqV.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/moUSmC6Jgc7cpMWmHjqV.jpg"/></item></channel></rss>