<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ Arabian Sea]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/arabian-sea</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/arabian-sea" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Wed, 24 Apr 2024 17:30:39 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[Arabian Sea की यात्रा के साथ सेना के All-Women Crew ने लिखी नई कहानी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/all-women-crew-of-indian-armed-forces-wrote-a-new-story-with-the-journey-to-the-arabian-sea-4508756</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/isaUYbE7TUKkHyzHLAqm.png"><p style="text-align: justify;">भारतीय सशस्त्र बलों (Indian Armed Forces) में महिलाओं की भागीदारी ने ना केवल देश की सुरक्षा में उनकी उपस्थिति को मजबूत किया है, बल्कि समाज में लैंगिक समानता के प्रति एक नई सोच को भी प्रेरित किया है. चाहे वह वायुसेना (Indian Air Force) की उड़ान भरती महिला पायलट हों, या नौसेना (Indian Navy) की जहाजों पर तैनात महिला अधिकारी, या थल सेना (Indian Army) में साहसिक कार्य करती महिला सैनिक, इन सभी ने समान जिम्मेदारियों के साथ अपने कार्यों को बखूबी निभाया है.</p>
<p style="text-align: justify;">इन महिला सैनिकों की दृढ़ता और समर्पण ने ना सिर्फ उन्हें आगे बढ़ने में मदद की है, बल्कि यह भी दिखाया है कि सशक्तिकरण और प्रेरणा किसी भी क्षेत्र में महिलाओं को सफलता की नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती हैं. आज इन्हीं महिलाओं ने मिलकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. लगभग चार सप्ताह के कठिन नौकायन अभियान (Sailing Expedition) को पूरा करते हुए, तीनों सेवाओं की महिला दल ने अरब सागर (The Arabian Sea) में कठिन परिस्थितियों का सामना किया, जो कि सितंबर में होने वाली वैश्विक जलयात्रा प्रतियोगिता की तैयारी का एक हिस्सा था.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/captain-geetika-kaul-becomes-the-first-woman-medical-officer-of-the-indian-army-2018299">Siachen में Capt. Geetika Kaul बनी Army की पहली महिला Medical Officer</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">मुंबई से लक्षद्वीप का सफर तय कर अपने कौशल का किया प्रदर्शन</h2>
<p style="text-align: justify;">भारतीय सशस्त्र बलों (Indian Armed Forces) की 12 महिला अधिकारियों ने हाल ही में एक ऐतिहासिक नौकायन अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसे 'त्रि-सेवा सर्व-महिला विश्वव्यापी नौकायन अभियान 2024' का नाम दिया गया है. यह अभियान मुंबई (Mumbai) से <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/female-voters-of-lakshadweep-demand-attention-towards-basic-issues-4502593">लक्षद्वीप</a> (Lakshadweep) तक और वापसी की यात्रा थी, जिसमें महिलाओं ने सागर की विशालता को जीतते हुए अपनी दृढ़ता और सहयोग की भावना का परिचय दिया.</p>
<p style="text-align: justify;">दल ने आर्मी एडवेंचर विंग (Army Adventure Wing) और कॉलेज ऑफ मिलिट्री इंजीनियरिंग के आर्मी एक्वा नोडल सेंटर (Army Aqua Nodal Centre of the College of Military Engineering) के बैनर तले यह यात्रा शुरू की. इस अभियान की शुरुआत 23 मार्च 2024 को मुंबई के मार्वे से हुई और 17 अप्रैल 2024 को समाप्त हुई, जिस दौरान ये महिला अधिकारी चार चरणों में सागर की चुनौतियों का सामना करती गईं. इनमें से हर एक ने अपनी नौकायन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अनेक प्रशिक्षण यात्राओं में भाग लिया था.</p>
<h2 style="text-align: justify;">महिलाओं के साहस को मिली एक नई पहचान&nbsp;</h2>
<p style="text-align: justify;">इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ना केवल समुद्री यात्रा के कौशल को परखना था, बल्कि यह भी दिखाना था कि महिलाएं किसी भी चुनौती को पार कर सकती हैं. उनकी यात्रा ने भौतिक और मानसिक दृढ़ता का परिचय तो दिया ही, साथ ही यह भी दिखाया कि कैसे सामूहिक प्रयास और टीमवर्क से बड़ी सफलताएं हासिल की जा सकती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">इस अभियान की सफलता ने ना सिर्फ इन महिला अधिकारियों के लिए नए द्वार खोले हैं, बल्कि यह भारतीय समुद्री विरासत में एक अहम मील का पत्थर भी साबित हुई है. इसने महिलाओं की साहसिकता और उनके योगदान को एक नई पहचान दी है, साथ ही समाज में लैंगिक समानता और विविधता को बढ़ावा दिया है. यह अभियान सिर्फ एक यात्रा नहीं थी, बल्कि एक उदाहरण भी है कि कैसे महिलाएं किसी भी क्षेत्र में उच्च स्थान प्राप्त कर सकती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/meet-himachal-first-women-to-become-army-commanding-officer-sapna-rana-3811518" rel="dofollow">मिलिए हिमाचल की पहली महिला Army Commanding Officer से :सपना राणा</a></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विधि जैन</dc:creator><pubDate>Wed, 24 Apr 2024 17:30:39 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/all-women-crew-of-indian-armed-forces-wrote-a-new-story-with-the-journey-to-the-arabian-sea-4508756]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/isaUYbE7TUKkHyzHLAqm.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/isaUYbE7TUKkHyzHLAqm.png"/></item><item><title><![CDATA['मैंग्रोव गर्ल्स' सफारी गाइड बन कर रही संरक्षण ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/mangrove-girls-from-maharashtra-saving-mangroves</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/U11dt9XCNpRj0nwOSMKG.jpg"><p>आयशा उनकी नाव में बैठे यात्रियों को नीले अरेबियन सागर (Arabian sea) को पार करते हुए, अपने तटीय गांव की और ले जाती है. आयेशा घुले महाराष्ट्र (Maharashtra) में गांव वेंगुर्ला के मछुआरों के कोली समुदाय से है. मछुआरों (fishermen) के समुदाय में माना जाता है कि एक महिला नाव नहीं चला सकती. इस रूढ़िवादी सोच को चुनौती देते हुए वे मैंग्रोव सफारी गाइड (Mangrove Safari Guide) बनी. आयशा सहित नौ कोली महिलाओं ने नाव चलाने को आजीविका कमाने का ज़रिया बनाया.</p>
<p>गांव वालों ने खाड़ी में खड़ी उनकी नावों को कई बार काटा, जिस वजह से नाव समुद्र में बह जाती. जब भी पर्यटक उनका पता पूछते, तो उन्हें कह दिया जाता कि यहां कोई मैंग्रोव पर्यटन नहीं होता है. लेकिन, गांव वालों के विरोध से हार मानने की बजाय वे डटी रहीं. जैसे-जैसे मैंग्रोव संरक्षण (Mangrove Conservation) और पर्यटन के बारे में समुदाय की जागरूकता बढ़ी, उन्हीं लोगों ने साथ देना शुरू कर दिया. </p>
<p>अपने काम को बढ़ने में सरकारी योजना ने उनकी मदद की. महाराष्ट्र सरकार ने 2012 में  संरक्षण और आजीविका कार्यक्रमों के लिए एक विशेष इकाई, मैंग्रोव सेल के तहत इस पर्यटन पहल की शुरुआत की. फिर, 2017 में गणतंत्र दिवस पर, वेंगुर्ला के एक स्वयं सहायता समूह, स्वामिनी महिला बचत गत ने मैंग्रोव सफारी शुरू की. मांडवी खाड़ी में. पिछले कुछ सालो में, राज्य भर में कई महिलाओं को इस सरकारी योजना से लाभ हुआ है.</p>
<p>वेंगुर्ला की राधिका लोन आइसक्रीम की दुकान चलाती है, मछली बेचती है और मैंग्रोव सफारी करवाती है. इन महिलाओं को 'मैंग्रोव गर्ल्स' (Mangrove girls) के नाम से जाना जाता है. इन गाइडों ने मैंग्रोव प्रजातियों के मुश्किल वैज्ञानिक नाम भी सीखे है, जैसे एविसेनिया मरीना, एविसेनिया ऑफिसिनैलिस, ब्रुगुएरा सिलिंड्रिका और सोनेरटिया अल्बा. सरकार की ये पहल आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देता है, जिसमें समूह 90% सब्सिडी का हकदार होता है, जबकि एक व्यक्ति या एक एकड़ से अधिक निजी मैंग्रोव वाला भूमि मालिक 75% सब्सिडी का हकदार है.</p>
<p>कोली समुदाय मैंग्रोव संरक्षण की ज़रुरत को जानते है. लेकिन सरकार, वन विभाग और दूसरे संगठनों को इन्हें बचाने के लिए पर्यटकों और अन्य लोगों को शामिल करना होगा. ज़रुरत से ज़्यादा वृक्षारोपण या मैंग्रोव वनों की अधिक कटाई नुकसानदायक साबित हो सकती है. इस संतुलन को बनाये रखने से मरीन बायोडायवर्सिटी को बचाया जा सकता है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Fri, 07 Jul 2023 11:59:41 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/mangrove-girls-from-maharashtra-saving-mangroves]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/U11dt9XCNpRj0nwOSMKG.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/U11dt9XCNpRj0nwOSMKG.jpg"/></item><item><title><![CDATA[भविष्य की need बनेगी 'seaweed' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/gabriella-dcruz-the-seaweed-warrior-creating-awareness-about-the-importance-of-seaweed-with-her-company-the-good-ocean</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/QfLT2IuRSr4ErSMnm9aT.jpg"><p dir="ltr">"चलो गोवा चलते है." कोई कह दे, तो मन ख़ुश हो जाता है. और हो भी क्यों ना ? इतनी सुन्दर जगह जो है! घूमने के लिए, मस्ती के लिए, आराम करने ले लिए, खाने पिने के लिए, चाहे जो करना हो, गोवा से बेहतर राज्य मिलना मुश्किल है. हर जगह सिर्फ चहल पहल और मौज. लेकिन हर वक़्त की मस्ती वाले समुद्र तट (Beach) और पार्टियों से दूर, गोवा में, एक शांत खाड़ी है जहां Zuari River और Arabian Sea मिलते हैं. बस समंदर के पानी की शांति और कुछ नहीं ! यहीं आपको अक्सर गोवा की Seaweed Warrior Gabriella D'cruz अपने मिशन पर तैनात मिल जाएंगी. Oxford University से biodiversity conservation में मास्टर्स कर चुकी गैब्रिएला डी'क्रूज़ को  "जीवन बदलने और Seaweed का उपयोग करके महासागरों को पुनर्जीवित करने" के लिए BBC Global Youth Campion Award भी मिल चूका है. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/qbOMGZNtKObQZLZ8hzsl.jpg" alt="Gabriella Dcruz"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Conde Nast Traveller India</em></span></p>
<p dir="ltr">गेब्रिएला के इस मिशन की शुरुआत तब हुई जब वे तमिलनाडु के एक छोटे से तटीय समुदाय का दौरा करने गयी थी. वह गांव अपनी आजीविका के लिए समुद्री शैवाल (Seaweed) पर निर्भर था. भारतीनगर (चेन्नई से 350 किमी) में, स्थानीय महिलाएं Seaweed इकट्ठा करने के लिए नेट बैग और रबर चप्पल के साथ दिन में लगभग सात से दस घंटे 30 फीट तक समुद्र में गोता लगाती हैं और इसे खाद्य और फार्मा कंपनियों को बेचतीं हैं. तब से ही, डिक्रूज ने द गुड ओशन को शुरू करने और भारत में 'खाद्य केंद्रित समुद्री शैवाल मूल्य श्रृंखला' (Edible Concentrated Seaweed Value Chain) के निर्माण में अपना सारा ध्यान दिया. डी'क्रूज़ का मानना ​​है कि यह सीवीड भारत के लिए अमूल्य खजाना साबित होंगे. </p>
<p dir="ltr">निशा डिसूजा द्वारा चलायी जाने वाली गोवा स्थित एक Conservation Consulting Company 'EcoNiche' (ईकोनीश) की मदद से डिक्रूज देश के पहले दो Indian Seaweed farms को स्थापित कर चुकी है- यानी ऐसे फार्म (Farm) जो Seaweed की स्थानीय किस्मों की खेती करते हैं. Seaweed भोजन के आधार हैं, समुद्र में अन्य प्रजातियों के लिए प्रजनन का आधार हैं,महत्वपूर्ण मात्रा में कार्बन को एब्सॉर्ब कर समुद्र के acidification को कम करते हैं और nutrient scrubber के रूप में काम करते हैं. जापान में टॉप क्वालिटी Seaweed का एक छोटा डिब्बा 12,960 yen  (8,500 रुपये प्रति पॉप) तक आता है. Global Beauty Industry ने भी अपने उच्च एंटीऑक्सिडेंट, अमीनो एसिड और विटामिन सी के लिए इसका बहुत मात्रा में उपयोग किया जाता है.</p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/jxMgkertouBKLe34pkVz.jpg" alt="Gabriella Dcruz"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;">Image Credits: Girl Power Goa</span>  </p>
<p dir="ltr">भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल इस क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की थी. गेब्रिएला चाहती है की seaweed को संरक्षण मिले और इसकी लिए एक कानून भी बने. यहाँ, पोषक समुद्री पौधे का उपयोग मुख्य रूप से दवा उद्योग और खाद्य उत्पादों में, जिलेटिन के विकल्प के रूप में किया जाता है. गोवा में लगभग 145 किस्म के सीवीड पाए जाते है. एंटीऑक्सिडेंट और आयोडीन से भरपूर एक अत्यधिक पौष्टिक उत्पाद, समुद्री शैवाल भारत की बढ़ती कुपोषण समस्या से निपटने में मदद कर सकेगा. गेब्रिएला की कंपनी "The Good Ocean" देश में Seaweed को बढ़ावा देने के लिए  पुरे देश में बहुत प्रजाति कर रही है. देश की महिलाएं भी उनकी इस कार्य में बहुत मदद कर सकती है. ऐसी महिआलें जो समुद्री तात से अपनी आजीविका  बनती है, वे अगर गेब्रिएला डी-क्रूज़ के साथ मिलकर काम करें तो वे अपने जीवन को बहुत जल्द परिवर्तित कर सकेंगी.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Thu, 18 May 2023 15:50:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/gabriella-dcruz-the-seaweed-warrior-creating-awareness-about-the-importance-of-seaweed-with-her-company-the-good-ocean]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/QfLT2IuRSr4ErSMnm9aT.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/QfLT2IuRSr4ErSMnm9aT.jpg"/></item></channel></rss>