<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ Atmanirbhar BHarat]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/atmanirbhar-bharat</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/atmanirbhar-bharat" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 10 Jun 2023 16:02:42 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[क्रोशिया से बनी डॉल में नॉर्थ-ईस्ट ट्राइब्स की झलक ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/sushma-linggi-makes-crochetted-dolls-looking-like-tribes-from-north-east-india</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/rNuTjZ96vlHVtP4pk0Wp.jpg"><p>क्या आप जानते है नॉर्थ ईस्ट भारत (North-East India) में कितनी ट्राइब्स हैं ? इसी बारे में लोगों को बताने के लिए अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) की इलेक्ट्रिकल इंजीनियर ने डॉल बनाना शुरू किया. उन्होंने अपने क्रोशिया (crochet) के हुनर को अपने समुदायों के बारे में बताने के लिए इस्तेमाल किया. इदु-मिशमी जनजाति (Idu-Mishmi tribe) से ताल्लुक रखने वाली सुषमा लिंग्गी (Sushma Linggi) दिबांग घाटी के रोइंग की रहने वाली हैं. बिजली विभाग, अरुणाचल प्रदेश में असिस्टेंट इंजीनियर (Assistant Engineer) के पद पर करियर की शुरुआत की. काम के बीच थोड़ा वक़्त मिलता तो बुनाई और कढ़ाई कर लिया करती. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/PSpKC7ZgtRjM8LV0vN03.jpeg" alt="crochetted dolls north east tribes"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: North East Today</em></span></p>
<p>एक बार इंटरनेट ब्राउज़ करते समय, उन्होंने क्रोशिया से बनी गुड़िया देखी. वह तुरंत उस जैसी गुड़िया बनाने लगी. लेकिन वो उस जैसी गुड़िया बना नहीं पाई. उन्होंने इंटरनेट का सहारा लेने का सोचा. सुषमा ने ऑनलाइन ट्यूटोरियल वीडियो देखकर इन गुड़ियों को बनाना सीखा. सुषमा अपनी मां को पारंपरिक मेखला (थुवे) और बीडिंग ज्वैलरी (लेकेपो) बनाते हुए देखा करती थी. उनकी मां अभी भी पारंपरिक कला का इस्तेमाल कर हैंडबैग बनाकर उन्हें बेचती हैं. उनकी मां की कृतियों ने उन्हें इन गुड़ियों को आदिवासी स्पर्श देने के लिए प्रेरित किया. सुषमा ने कुछ जनजातियों की गुड़िया बनाई है और ज़्यादा से ज़्यादा जनजातियों को कवर करने का लक्ष्य रखती है.</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/GAT6QLcboTDynuR3XdqJ.jpg" alt="crochetted dolls north east tribes"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: North East Today</em></span></p>
<p>“हमारे हैंडीक्राफ्ट (handicraft) राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनमोल हिस्सा है. मैं अपनी संस्कृति को बाकी दुनिया के साथ साझा करना चाहती हूं. अगर इन गुड़ियों को बनाने से हमारे कल्चर (culture) को दुनिया तक पहुंचाने में थोड़ी भी मदद मिल सकती है तो मैं इन्हें बनाना जारी रखूंगी", सुषमा (Sushma) ने कहा.</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/EwPyUne3x6grEJ2vTnkz.jpg" alt="crochetted dolls north east tribes"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: North East Today</em></span></p>
<p>शौक के तौर पर उन्होंने 2018 में इन डॉल्स को बनाना शुरू किया. लोग उनकी डॉल्स को खरीदने की इच्छा दिखाने लगे. इससे प्रेरित होकर, आखिरकार जुलाई 2019 में डॉल्स को बेचना शुरू किया. सुषमा बताती है कि आकार और काम की डीटेल के हिसाब से एक गुड़िया बनाने में उन्हें लगभग 4 घंटे से 4 दिन लगते हैं.</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/NQ4mHa2VvACkhnyH3T2C.jpg" alt="crochetted dolls north east tribes"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: North East Today</em></span></p>
<p>भारत 80 % से ज़्यादा खिलौनों का आयात (import) चीन से करता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा 'आत्मनिर्भर भारत' (Atmanirbhar Bharat) पहल की शुरुआत ने स्थानीय किसानों, उद्यमियों आदि को आशा की किरण दी है. उनका कहना है कि अगर स्थानीय आर्टिस्ट (local artists) को बढ़ावा मिलेगा तो आयात में कमी आ सकती है. साथ ही, प्लास्टिक (plastic) की जगह मुलायम धागे या ऊन से बने खिलौने कार्बन फुटप्रिंट (carbon footprint) कम करने में मदद करेंगे. ये खिलौने बच्चों को भी कोई नुक्सान नहीं पहुंचाते. खेल-खेल में बच्चों को उनकी संस्कृति के बारे में भी पता चल जाता है. उनके जैसी दिखने वाली गुड़िया से बच्चे ज़्यादा लगाव महसूस करते हैं. </p>
<p>सुषमा उनके क्षेत्र में चल रहे स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups-SHG) की महिलाओं को यह कला सिखाना चाहती हैं, ताकि राज्य के कल्चर को दर्शाने वाली ऐसी डॉल्स ज़्यादा से ज़्यादा बन सके और महिलाओं को इसके ज़रिये आमदनी के अवसर भी मिले. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sat, 10 Jun 2023 16:02:42 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/sushma-linggi-makes-crochetted-dolls-looking-like-tribes-from-north-east-india]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/rNuTjZ96vlHVtP4pk0Wp.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/rNuTjZ96vlHVtP4pk0Wp.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SHG को मिला फ्लिपकार्ट और सिंपली देसी का साथ ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/flipkart-and-simplydesi-host-orientation-workshop-for-over-1000-rural-women-artisans-and-shgs-in-nagpur</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/5LgSOzJ2a81YCYFeevOX.jpg"><p>भारत का ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस फ्लिपकार्ट (E- Commerce Marketplace Flipkart) लोकल कलाकारों को देश विदेश में पहुंच दे रहा है. फ्लिपकार्ट ने नागपुर, महाराष्ट्र में फ्लिपकार्ट समर्थ पार्टनर सिंपली देसी (Simplydesi) के साथ मिलकर एक ओरिएंटेशन वर्कशॉप (Orientation workshop) का आयोजन किया. इस कार्यशाला का लक्ष्य स्थानीय कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups-SHG) को कौशल विकास के बारे में बताना और ज्ञान साझा करना था, जो उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए  फ्लिपकार्ट मार्केटप्लेस का फायदा उठाने में सक्षम बनाएगा. इस कार्यक्रम में  मधुबाला, सह-संस्थापक, सिंपलीदेसी, श्री दीनानाथ ठाकुर, अध्यक्ष, सहरकर भारती, श्री स्वप्निल जोशी, टेलीविजन कलाकार और श्री रजनीश कुमार, एसवीपी और चीफ कॉर्पोरेट ऑफिसर, फ्लिपकार्ट मौजूद रहे.</p>
<p>फ्लिपकार्ट मार्केटप्लेस के फायदें बताने के साथ, वर्कशॉप में कई अहम पहलुओं को शामिल किया गया, जिसमें प्रोडक्ट लिस्टिंग और प्रभावी ढंग से ऑनलाइन बिज़नेस करने के तरीकों पर बात हुई. वर्कशॉप में 1000 से ज़्यादा ग्रामीण महिला कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने भाग लिया. आज तक, फ्लिपकार्ट ने राज्य के 50,000 से अधिक विक्रेताओं और फ्लिपकार्ट समर्थ कार्यक्रम के तहत 100 से ज़्यादा विक्रेताओं को ट्रेनिंग (training) दी है. उन्हें नेशनल मार्केट तक पहुंच दी है, जिसमें राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (National Urban Livelihood Mission) से जुड़े कारीगर और गैर सरकारी संगठन शामिल थे. इस पहल से लोकल कारीगरों और ग्रामीण महिलाओं के नेतृत्व वाले बिज़नेस (business) को मदद मिली है, जो अपने व्यवसायों की पहुंच बढ़ाने के लिए ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस का लाभ लेना चाहते थे.</p>
<p>फ्लिपकार्ट समर्थ का उद्देश्य 28 राज्यों में लाखों कारीगरों, बुनकरों और छोटे व्यपारियों को सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक आज़ादी (financial freedom) हासिल करने के अवसर प्रदान करना है. यह प्रोजेक्ट समाज के वंचित वर्गों और सहायक संगठनों की मदद करने के लिए काम करता है. 2019 में लॉन्च होने के बाद से, फ्लिपकार्ट समर्थ ने लाखों उद्यमियों के लिए भारतीय बाजार में पहुंचाया है. आज यह कार्यक्रम देश भर में 15 लाख से ज़्यादा लोगों को रोज़गार दे रहा है. समर्थ ने अकेले पिछले वर्ष की तुलना में अपने विक्रेता संख्या को 300% बढ़ाया है और समर्थ लाभार्थियों को अपने व्यवसाय को 300% तक बढ़ाने में मदद की है. </p>
<p>यह पूरे भारत में राज्य और केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और संस्थाओं जैसे ग्रामीण विकास मंत्रालय; एमएसएमई (MSME) उत्तर प्रदेश विभाग; उद्योग विभाग झारखंड, उत्तराखंड; वाणिज्य विभाग, असम का उद्योग; तमिलनाडु एमएसएमई विभाग; और जम्मू और कश्मीर व्यापार संवर्धन संगठन के साथ मिलकर काम कर रहा है. अधिक एमएसएमई को ई-कॉमर्स के दायरे में लाने वाली फ्लिपकार्ट की लगातार कोशिशों को भारत सरकार के "आत्मनिर्भर भारत" (Atmanirbhar BHarat) विजन के साथ जोड़ा गया है. फ्लिपकार्ट का उद्देश्य अपने प्लेटफॉर्म पर देश भर में 450 मिलियन से अधिक ग्राहकों तक पहुंच प्रदान करके स्थानीय विक्रेता समुदायों की आजीविका को बढ़ाना है. </p>
<p>इंटरनेट (Internet) के इस दौर में यदि ई-कॉमर्स  को नहीं समझा और इसे इस्तेमाल न किया गया तो विकास नामुमकिन हो जाता है. और भी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को लोकल आर्टिस्ट, छोटे व्यपारियों, और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए आगे आना होगा. स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ट्रेनिंग देकर प्रोडक्ट बनाने, मैनेजमेंट करने, लोजिस्टिक्स संभालने, और सामान को ग्राहक तक पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है.   </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Tue, 16 May 2023 17:54:20 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/flipkart-and-simplydesi-host-orientation-workshop-for-over-1000-rural-women-artisans-and-shgs-in-nagpur]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/5LgSOzJ2a81YCYFeevOX.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/5LgSOzJ2a81YCYFeevOX.jpg"/></item></channel></rss>