<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ बाल विवाह]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/baal-vivaah</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/baal-vivaah" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 17 Mar 2026 16:04:01 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[बांस की टोकरी ने कैसे बदल दी सिंगपुर स्कूल की पूरी कहानी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/stories-of-women/khammam-bai-singpur-school-education-donation-11220764</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/03/17/khammam-bai-singpur-school-donation-2026-03-17-15-55-46.png"><p data-start="294" data-end="691" style="text-align: justify;">धमतरी: जब इरादे मजबूत हों तो हालात कभी रुकावट नहीं बनते. इसी बात को सच कर दिखाया है सिंगपुर गांव की आदिवासी महिला खम्मन बाई कमार ने। खुद पढ़ाई का अवसर न मिलने के बावजूद उन्होंने गांव के बच्चों के लिए शिक्षा का रास्ता आसान बनाने की ठानी. अपनी मेहनत की कमाई से स्कूल को जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना उनके जीवन का मकसद बन चुका है.उनकी इस पहल ने पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश दिया है.</p>
<h2 data-start="294" data-end="691" style="text-align: justify;">किस स्कूल के लिए कर रही हैं खम्मन बाई प्रयास?</h2>
<p data-start="698" data-end="1155" style="text-align: justify;">धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक में स्थित सिंगपुर गांव घने जंगलों के बीच बसा है. यह गांव जिला मुख्यालय से करीब 65 किलोमीटर और ब्लॉक से लगभग 30 किलोमीटर दूर है. यहां पहुंचने के लिए कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता है. गांव में एक ही सरकारी स्कूल है, जहां 12वीं तक पढ़ाई होती है। इसके बाद छात्रों को आगे की पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ता है. इसी स्कूल को बेहतर बनाने के लिए खम्मन बाई लगातार योगदान दे रही हैं.</p>
<h2 data-start="698" data-end="1155" style="text-align: justify;">शिक्षा को लेकर एक अलग सोच</h2>
<p style="text-align: justify;">खम्मन बाई कमार खुद अनपढ़ हैं, लेकिन उनका सपना है कि सिंगपुर गांव के बच्चे पढ़-लिख सकें और शिक्षित बनें. उनके इस प्रयास ने न सिर्फ गांव के लोगों को प्रेरित किया है, बल्कि जिला प्रशासन की भी सराहना हासिल की है. महुआ बीनना, बांस की टोकरी बनाकर बेचना और जंगल से तेंदूपत्ता लाना&mdash;इन सारी मेहनतों के बावजूद, खम्मन बाई अपनी कमाई का एक हिस्सा स्कूल में जरूरी सामान दान करने में लगाती हैं. उनका मकसद बेहद सरल लेकिन शक्तिशाली है: बच्चों और आने वाली पीढ़ी को <a href="https://ravivarvichar.in/women-news-india/punjab-budget-2026-women-allowance-education-health-11188662">शिक्षा</a>&nbsp;का अवसर देना. खम्मन बाई कहती हैं,</p>
<blockquote>
<p><strong><em>&nbsp;"मैं चाहती हूं कि लोग शिक्षा के महत्व को समझें, इसलिए अपनी मेहनत से स्कूल में सामान दान करती हूं, ताकि गांव की अगली पीढ़ी पढ़ाई-लिखाई करके अपना भविष्य खुद बना सके."</em></strong></p>
</blockquote>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
<figure class="image"><img alt="महुआ बीनकर और बांस की टोकरी बनाकर बच्चों के लिए स्कूल में संसाधन जुटाती खम्मन बाई" src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/580x348/filters:format(webp)/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/2026/03/17/bamboo-basket-mahua-khammam-bai-2026-03-17-15-57-47.png" style="width: 1280px;">
<figcaption>महुआ बीनकर और बांस की टोकरी बनाकर बच्चों के लिए स्कूल में संसाधन जुटाती खम्मन बाई Photograph: (etv bharat)</figcaption>
</figure>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
<h2 style="text-align: justify;">मदद करना अब बन गया जीवन का हिस्सा</h2>
<p data-start="105" data-end="750" style="text-align: justify;">सिंगपुर कमारपारा में रहने वाली 50 वर्षीय खम्मन बाई कमार न सिर्फ अपने जनजाति के पारंपरिक कामों में जुटी हैं, बल्कि बच्चों की शिक्षा के लिए भी प्रेरक उदाहरण हैं. झोपड़ी जैसे घर में रहने के बावजूद, दो पुत्र और एक बेटी की मां खम्मन बाई ने अपने जीवन में शिक्षा को प्राथमिकता दी. पति के 2008 में देहांत के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने घर को संभालते हुए गांव के स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया. इसके लिए वे अपनी मेहनत की कमाई से स्कूल में नए-नए सामान खरीदती हैं, ताकि बच्चों को बेहतर संसाधन मिल सकें. यह उनकी जीवनशैली का एक अहम हिस्सा बन चुका है, और उनकी यह पहल पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन रही है.</p>
<h2 data-start="105" data-end="750" style="text-align: justify;">बच्चों के चेहरे पर आई मुस्कान</h2>
<p style="text-align: justify;">स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी विद्यालय में खम्मन बाई कमार की पहल से बच्चों को नया कंप्यूटर मिला है. अब स्कूली बच्चे कंप्यूटर पर पढ़ाई कर हाई एजुकेशन की बेसिक जानकारी सीख रहे हैं. बच्चों और शिक्षकों का मानना है कि यह कदम गांव की शिक्षा में नई क्रांति लेकर आएगा। खम्मन बाई बताती हैं, "मैं पढ़ी-लिखी नहीं हूं, लेकिन मेरा मकसद है कि मेरा स्कूल और गांव के लोग शिक्षा के प्रति जागरूक हों. 2 साल बाद मैं फिर एक बड़ा गिफ्ट दूंगी, लेकिन वह मैं अभी नहीं बताऊंगी."</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
<figure class="image"><img alt="खम्मन बाई ने सिंगपुर स्कूल में बच्चों के लिए कंप्यूटर दान किया" src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/580x348/filters:format(webp)/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/2026/03/17/school-computer-donation-2026-03-17-15-59-45.png" style="width: 1280px;">
<figcaption>खम्मन बाई ने सिंगपुर स्कूल में बच्चों के लिए कंप्यूटर दान किया Photograph: (etv bharat)</figcaption>
</figure>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
<h2 style="text-align: justify;">आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने की कोशिश</h2>
<p style="text-align: justify;">खम्मन बाई कमार ने कई वर्षों से अपने गांव के स्कूलों में बच्चों के लिए जरूरी सामान दान किया है. उन्होंने बाल्टी, किताबें, टीवी और कंप्यूटर जैसी चीजें स्कूल में उपलब्ध कराई हैं. खुद पढ़ी-लिखी न होने के बावजूद, और <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-woman-turned-to-her-pain-of-child-marriage-into-success-life-through-business-in-dewas-4735130">बाल विवाह</a> का अनुभव होने के बावजूद, उनका उद्देश्य गांव के बच्चों को शिक्षित और जागरूक बनाना है, ताकि आने वाली पीढ़ी पढ़ाई और सीखने के महत्व को समझ सके. वर्तमान में वे महुआ बीनने, तेंदूपत्ता और टोकरी बनाने का काम करती हैं और अपनी मेहनत की कमाई का हर बचा-पचा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करती हैं. खम्मन बाई कहती हैं कि बच्चों को पढ़ते हुए देखकर उन्हें बहुत खुशी मिलती है, और गांव के लोग उन्हें सम्मान से &ldquo;स्कूल में सामान दान देने वाली खम्मन बाई कमार&rdquo; के रूप में जानते हैं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">गांव में कॉलेज की मांग</h2>
<p data-start="2735" data-end="3057" style="text-align: justify;">खम्मन बाई की सबसे बड़ी इच्छा है कि उनके गांव में ही कॉलेज खुले, ताकि खासकर लड़कियों को दूर जाकर पढ़ाई न करनी पड़े. उनका कहना है कि लड़कियों के लिए बाहर जाना मुश्किल होता है, इसलिए गांव में ही उच्च शिक्षा की सुविधा होना जरूरी है. उन्होंने सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की अपील की है.</p>
<h2 data-start="2735" data-end="3057" style="text-align: justify;">प्रशासन ने की सराहना</h2>
<p data-start="104" data-end="567" style="text-align: justify;">धमतरी के <a href="https://ravivarvichar.in/women-news-india/collectors-office-decorated-with-handcrafts-shg-women-organised-an-exhibition-in-jaipur-collectors-office-9638965">कलेक्टर</a>&nbsp;अबिनाश मिश्रा ने खम्मन बाई कमार के योगदान की सराहना की है और इसे महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण बताया. पढ़ी-लिखी न होने के बावजूद, खम्मन बाई ने बच्चों के लिए स्मार्ट टीवी, कंप्यूटर और लाइब्रेरी के लिए किताबें दान की हैं. ट्राइबल हॉस्टल में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई है. कमार जनजाति को आम तौर पर पिछड़ा माना जाता है, लेकिन खम्मन बाई ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहल से यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी बदलाव लाया जा सकता है.</p>
<p data-start="569" data-end="976" style="text-align: justify;">सिंगपुर गांव में आईटीआई और कॉलेज खोलने का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया है और जल्द ही यहां उच्च शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध होंगे. कलेक्टर मिश्रा ने बताया कि गांव शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर है और यहां हाई एजुकेशन की सुविधा कम है, इसलिए इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि जो महिलाएं शिक्षा और समाज में नवाचार कर रही हैं, उन्हें <a href="https://ravivarvichar.in/tags/jilaa-prshaasn">जिला प्रशासन</a> की तरफ से पूरे समर्थन और शुभकामनाएं मिलती रहेंगी.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 17 Mar 2026 16:04:01 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/stories-of-women/khammam-bai-singpur-school-education-donation-11220764]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/03/17/khammam-bai-singpur-school-donation-2026-03-17-15-55-46.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/03/17/khammam-bai-singpur-school-donation-2026-03-17-15-55-46.png"/></item><item><title><![CDATA[बाल विवाह बनाम अक्षय तृतीया ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/cases-of-chilc-marriage-rise-on-akshay-tritiya</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xB8tUDN0fKqRtEcFMJGE.jpg"><p>अक्षय तृतीया यानि क्षेत्रीय बोली में आखातीज. बिना मुहूर्त का अबूझ मुहूर्त. विवाह के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त इसे ही मानते हैं. जब विवाह के लिए कोई मुहूर्त न निकले तो आखातीज का मुहूर्त सबसे बढ़िया. और यही कारण हमारे देश में इस दिन विवाह के आयोजन लाखों की संख्या में होते हैं. यहां तक कि सरकार की कन्यादान योजनाओं को भी इस तारीख में कर दिया जाता है. मान्यता है कि इस दिन किये गए विवाह सफल होते हैं. मान्यता यह भी है कि श्रीकृष्ण का वरदान है कि इस दिन पूजा पाठ करने से सभी पापों से मुक्ति हो जाती है. इसी दिन सामूहिक आयोजन की आड़ में बाल विवाह भी हो जाते हैं. अधिकांश शिकायतें इसी दिन सामने आती हैं.लगातार बदलते माहौल और नाबालिगों के साथ बेटियों की शिक्षा और उनको आत्मनिर्भ बनाने पर जोर दिया जा रहा है,ऐसी स्थिति में सरकारें भी काफी हद चेत गईं. साल 2006 में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनयम बना. निगरानी होने लगी. बावजूद बाल विवाह के आंकड़े चिंताजनक है. इससे यह साबित होता है कि कानून ही नहीं समाज में काउंसलिंग की ज्यादा जरूरत है. </p>
<p>अभी भी यदि आंकड़ों पर नज़र डालें तो यूपी, बिहार, वेस्ट बंगाल और त्रिपुरा में बाल विवाह सबसे अधिक दर्ज किए गए. मप्र स्टेट में यदि 2021 तक जारी हुए आंकड़ों में बाल विवाह रोकने पर 10 प्रतिशत की कमी आई. लेकिन अभी भी देश में 15 लाख बाल विवाह सालाना होने की शिकायतें मिल रहीं हैं. इसका विषम प्रभाव यह पड़ा कि 1 करोड़ 11 लाख अस्सी हजार नाबालिग बच्चियां 2021 तक प्रेग्नेंट हो गईं. इससे ज्यादा दुखद यह है कि हर साल 22 हजार निर्दोष बेटियां प्रिग्नेंसी में दम तोड़ देती है. इससे साफ है कि सरकार की योजनाओं पर अभी रूढ़ियों में जकड़ी परम्पराएं भारी पड़ रहीं हैं.कुछ परिवार की डाली है कि उनके समाज में लड़की की यदि जल्दी शादी न की गई तो बाद में लड़के नहीं मिलते. दूसरा कारण गांव में गलत अफवाहों और लड़की के बदनाम होने से डरते हैं. यही वजह कानून की जानकारी और कार्रवाई के डर के बावजूद चुपके से शादी कर देते हैं. बैतूल की 17 साल की रजनी (बदला हुआ नाम) कहती है-" मेरी बिल्कुल शादी का मन नहीं था. घर वालों ने ज़िद पकड़ ली. मैंने अपनी सहेली की मदद ली. और 1098 नंबर पर शिकायत करवा दी. मैं अब आगे पढ़ रही हूं."        </p>
<p>ग्रामीण इलाकों में  चोरी-छुपे अभी भी बच्चियों के विवाह हो रहे हैं. ये ही सरकारी अमले के लिए ये केस ही चुनौती बन जाते हैं. खरगोन जिले की महिला एवं बाल विकास विभाग की सहायक संचालक मोनिका बघेल कहती हैं -" पिछले वर्ष 15 साल की लड़की की शादी की सूचना मिली. पास ही के तीर्थ गांव के एक मंदिर में हम पहुंचे. बाराती आधी-अधूरी शादी के बीच दुल्हन के भेष में तैयार की बच्ची को लेकर भाग गए. हमने पुलिस की मदद से विवाह को शून्य घोषित करवाया."<br>एक दूसरे इलाके के प्रकरण में  एक लड़की को हल्दी लगे हाथों से मंडप में से उठाया और और स्कूल लेजाकर किताबें थमाई. प्रिग्नेंट हुई एक बच्ची को देर से पता चला. कोर्ट ने निर्धारित समय निकल जाने और गर्भ में बच्चे की जान को खतरा बता कर अबॉर्शन से मना कर दिया. 16 साल की बच्ची की जान बड़ी मुश्किल से बची.            </p>
<p>इस साल भी राजस्थान,मप्र,छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में शासन ने अलर्ट जारी किया. पुलिस महकमा ,महिला एवं बाल विकास, सामाजिक संघठन सहित कई लोगों को इस बाल विवाह रोको अभियान से जोड़ा गया है. गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. जयश्री श्रीधर का कहना है कि 18 साल से काम उम्र में बाल विवाह करना किसी भी लड़की के जीवन के लिए खतरनाक हो सकता है. उसका शारीरिक विकास पूरी तरह नहीं होता. न ही वह प्रिग्नेंट होने की स्थिति में रहती है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Mon, 24 Apr 2023 10:51:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/cases-of-chilc-marriage-rise-on-akshay-tritiya]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xB8tUDN0fKqRtEcFMJGE.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xB8tUDN0fKqRtEcFMJGE.jpg"/></item><item><title><![CDATA[देश में बढ़ते बाल विवाह के केसेस ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/cases-of-child-marriage-increasing-in-india</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/jEjNulOeqKqSagLFuKm1.jpg"><p><iframe src="https://www.youtube.com/embed/FWRW3EpJ3R8" width="560" height="314" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>ग्रामीण इलाकों में  चोरी-छुपे अभी भी बच्चियों के विवाह हो रहे हैं.आंकड़ों पर नज़र डालें तो यूपी, बिहार, वेस्ट बंगाल और त्रिपुरा में बाल विवाह सबसे अधिक दर्ज किए गए. अभी भी देश में 15 लाख बाल विवाह सालाना होने की शिकायतें मिल रहीं हैं. इसका विषम प्रभाव यह पड़ा कि 1 करोड़ 11 लाख अस्सी हजार नाबालिग बच्चियां 2021 तक प्रेग्नेंट हो गईं.इस साल भी राजस्थान,मप्र,छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में शासन ने अलर्ट जारी किया. पुलिस महकमा ,महिला एवं बाल विकास, सामाजिक संघठन सहित कई लोगों को इस बाल विवाह रोको अभियान से जोड़ा गया है. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">Rohan</dc:creator><pubDate>Sat, 22 Apr 2023 16:32:32 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/cases-of-child-marriage-increasing-in-india]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/jEjNulOeqKqSagLFuKm1.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/jEjNulOeqKqSagLFuKm1.jpg"/></item></channel></rss>