<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ बैंक सखी]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/baink-skhii</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/baink-skhii" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 26 Aug 2023 17:21:28 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[भ्रष्टाचार बन रहा SHG महिलाओं की सफलता की अड़चन ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/sharminda/uttar-pradesh-need-to-probe-corruption-in-nrlm</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/3ewHGU6N5BbbPGwpAEur.jpg"><p>महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने व्यवसायों को शुरू कर प्रगति के रास्ते पर अग्रसर हो रहीं हैं. ग्रामीण इलाकों की अगर बात करें तो केंद्र और राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए मिशंस की पूरी ज़िम्मेदारी भी एसएचजी महिलाओं ने उठाई. चाहे <strong>स्वछता मिशन </strong>हो या फिर गावों को <strong>डिजिटल मिशन</strong> (Digital Mission) से जोड़ना, SHG महिलाओं ने सारे काम बखूबी संभाले. लेकिन फिर भी महिलाओं को भ्रष्टाचार की वजह से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.</p>
<h2>स्वच्छ भारत मिशन के कामों को संभाल रहीं SHG महिलाएं&nbsp;</h2>
<p><strong>उत्तर प्रदेश</strong> (Uttar Pradesh) के <strong>रायबरेली</strong> (Raibareli) में भी स्वयं सहायता समूह की <strong>महिलाओं </strong>को<strong> रोजगार दिलाने</strong> और <strong>आर्थिक रूप से सशक्त</strong> बनाने के लिए राज्य सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण मिशन विभाग को जिम्मेदारी दी. सरकार द्वारा शुरू किए गए&nbsp;<strong>स्वच्छ भारत मिशन</strong> (Swacch Bharat Mission) के अंतर्गत बने सामुदायिक शौचालय को संभालने का काम भी सेल्फ हेल्प ग्रुप्स की महिलाओं को दिया गया.&nbsp;</p>
<p><img alt="shg" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/564x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/IBRkv3y8Qqq3wAjb5KFK.jpg" style="width: 564px;" class="center"></p>
<p class="center"><em><span style="font-size: 8pt;">Image Credits : Ruralvoice</span></em></p>
<h2>NRLM में हो रही लापरवाही&nbsp;</h2>
<p><a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/national-rural-livelihood-mission-changing-lives-of-shg-women">नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन</a> (NRLM) में चल रही लापरवाही के कारण ग्राम पंचायतों में फर्जीवाड़ा और दिन प्रतिदिन भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा हैं. इसके लिए भी सरकार ने एसएचजी महिलाओं को ड्रोन बनाने और उसका संचालन करने की जिम्मेदारी दी. <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/rajeevika-bringing-economic-empowerment-to-shg-women">मनरेगा</a>&nbsp;(MNREGA) के अंतर्गत हो रहे कामों को संभालने और <strong>आंगनबाड़ी का पोषाहार </strong>पिक अप और डिलीवरी करने का काम भी SHGs को मिला. &nbsp;</p>
<p>कई समूहों में काम कर रहीं महिलाओं को सही समय पर भुगतान नहीं मिला, तो कहीं उन्हें लोन ही नहीं दिया जा रहा. सरकार ने <strong>डिजिटल इंडिया</strong> (Digital India) के सपने को साकार करने के लिए समूह की महिलाओं को <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-will-make-and-operate-drone">बैंक सखी </a>(Bank Sakhi) बनाया, पर मानदेय के लिए उन्हें कई परेशानियों से जूझना पड़ा.</p>
<p><img alt="nrlm shg women" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/390x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/3EPzlpE3RVdiIh3heOlz.jpg" style="width: 390px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;">Image Credits : nrlm.gov.in</span></p>
<h3>मिशन के अधिकारी कर रहे मनमानी&nbsp;</h3>
<p><strong>Self Help Groups की महिलाएं</strong> जो <strong>बिजली सखी</strong> (Bijli Sakhi) का काम देख रहीं हैं. उन्हें भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. मिशन के अंतर्गत काम कर रहे जिला प्रबंधक या अधिकारी मनमाने तरीके से काम कर, मिशन में काम कर रही <strong>एसएचजी महिलाओं का शोषण </strong>कर रहें हैं.&nbsp;</p>
<p>सरकार को एसएचजी महिलाओं के हित में काम करने के लिए <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-ready-to-become-micro-agripreneurs-with-upsrlm">NRLM&nbsp;में हो रहें भ्रष्टाचार</a>&nbsp;को जड़ से खत्म करना होगा. महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार को जिम्मेदार अधिकारियों पर नज़र रखनी होगी. तभी सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाएं महिलाओं के जीवन में बदलाव ला पाएंगी.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Sat, 26 Aug 2023 17:21:28 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/sharminda/uttar-pradesh-need-to-probe-corruption-in-nrlm]]></guid><category><![CDATA[शर्मिन्दा]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/3ewHGU6N5BbbPGwpAEur.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/3ewHGU6N5BbbPGwpAEur.jpg"/></item><item><title><![CDATA[उज्जवला योजना सवारेगी ग्रामीण महिलाओं की ज़िन्दगी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shgs-bringing-change-into-women-lives</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8JHt12JU7YLqYzLwyYzH.png"><p><span>ऐसा कहाँ जाता है ' चेंज इस द ओनली कॉन्स्टेंट ', किसी भी चेंज या बदलाव को लाने के लिए कोई एजेंट या भूमिका की ज़रुरत होती है. इस तरह महिलाओं की ज़िन्दगी में बदलाव तभी संभव है जब महिलाएं इस बदलाव के लिए खुद कदम उठाये. ऐसी ही एक कहानी है <strong>देवास (Dewas) जिले के गांव बागली (Bagli) की, जहां स्वयं सहायता समूह (Swayam Sahayata Samuh) की महिलाएं खुद के साथ गांव में भी बदलाव </strong>ला रही है। </span></p>
<p><span>सुशीला दीदी के नेतृत्व में यहां <strong>स्वयं सहायता समूह (Self Help Group, SHG) </strong>2021 में शुरू हुआ, जिसमे 12 महिलाएं काम कर रही है. उन्हीं में से एक महिला है सीमा बड़ोदिया, जिनकी ज़िन्दगी में समूह से जुड़ने के बाद बहुत से बदलाव आये. पहले वह ज़्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी, पर समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बारहवीं तक की पढ़ाई की. सीमा जहाँ पहले घूंघट में रहकर सिर्फ घर के काम संभालती थी और उन्हें घर से बाहर निकलने तक की आज़ादी तक नहीं थी. आज वही घर के साथ - साथ समूह के सारे काम बखूबी संभाल रही है. समूह में जुड़ने के बाद सीमा की ज़िन्दगी में काफी बदलाव हुआ पहले उन्हें परिवार से सहयोग नहीं मिल रहा था आज उन्हें वही परिवार हर काम के लिए सपोर्ट कर रहा है.  </span></p>
<h2><span><strong>प्रधान मंत्री मोदी (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/dhoni-and-sakshi-visited-tribal-shg-handicraft-stalls">PM Modi</a>)</strong> द्वारा शुरू की गई <strong><a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/sabka-saath-sabka-vikas-leading-india-on-the-path-of-progress">उज्ज्वला गैस योजना</a></strong></span></h2>
<p><span>सरकार महिलाओं की ज़िन्दगी में बदलाव लाने तथा उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए बहुत सी योजनाएं ला रही है. उन्ही में से <strong><a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-bringing-new-opportunities-to-shg-women">ऊर्जा देवी</a> (Urja Devi)</strong> और<a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-bringing-new-opportunities-to-shg-women"><strong> बैंक सखी</strong> </a><strong> (Bank Sakhi)</strong> जैसी योजनाएं है. महिलाओं को धुएं से निजात दिलाने के लिए <strong>प्रधान मंत्री मोदी (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/dhoni-and-sakshi-visited-tribal-shg-handicraft-stalls">PM Modi</a>)</strong> द्वारा शुरू की गई <strong><a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/sabka-saath-sabka-vikas-leading-india-on-the-path-of-progress">उज्ज्वला गैस योजना</a> (Ujjwala Gas Yojana)</strong>, ऊर्जा देवी के नाम से शुरू हुई यह योजना स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के जीवन में ख़ुशी की लहर बन कर आयी है. समूह के माध्यम से अब लोगों को गांव में ही सही दाम और सही समय पर <strong>गैस सिलिंडर</strong> मिल जाते है. जिससे अब महिलाओं गाँव से बाहर जाकर पेड़ नहीं काटने पड़ते. इससे पर्यावरण की भी रक्षा होती है और साथ ही महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है.</span></p>
<p><span> इसी योजना के तहत सीमा बडोडिया को चुना गया. पहले उन्हें एक महीने में <strong>सात सिलिंडर</strong> उपलब्ध कराये जाते थे. इस तरह उन्हें हर सिलेंडर पर कमीशन मिलता था. आगे बढ़ते हुए आज सीमा एक हफ्ते में चालीस सिलेंडर की सप्लाई अपने गाँव में कर रही है. सीमा, अब ऊर्जा देवी के साथ साथ बैंक सखी का भी है. <strong>बैंक सखी</strong> एक ऐसा कार्यक्रम है जहां<strong> ग्रामीण क्षेत्र के लोग जो बैंक नहीं जा पाते है या बैंक की सुविधा उन तक नहीं पहुँचती वहाँ उन्हें घर पर ही छोटे बैंक ट्रांसेक्शन हो जाते है.</strong> आज इस समूह की महिलाएं अपने अलग - अलग समूह बना रही है और इस तरह गांव के विकास के लिए काम कर रही है . इस तरह के उदहारण छोटे बदलाव के साथ समाज और देश में महिला भागीदारी को बढ़ा रहे है.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Sat, 15 Jul 2023 16:32:15 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shgs-bringing-change-into-women-lives]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8JHt12JU7YLqYzLwyYzH.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8JHt12JU7YLqYzLwyYzH.png"/></item><item><title><![CDATA[फाइनेंसियल लिट्रेसी से महिलाओं को अवसर की शुरुआत ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-bringing-new-opportunities-to-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1rozRTs7i52UYk7fXs4G.jpg"><p><strong>जेंडर इक्वालिटी (Gender Equality), जेंडर पेरिटी (Gender Parity), जेंडर एम्पावरमेंट (Gender Empowerment) </strong>कि बातें तो सभी करते है पर इनके इम्प्लीमेंटेशन में कहीं ना कहीं कमी रह ही जाती हैं. इस तरह<strong> जेंडर फाइनेंस गैप (Gender Finance Gap) </strong>भी विश्व स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन उस पर काम कितना हो रहा है, यह सोचने का विषय है.<strong> महिलाएं जहां साइंस एंड टेक्नोलॉजी (Science and Technology), मेडिसिन (Medicine) </strong>जैसे क्षेत्रों में आगे तो बढ़ रही, लेकिन कामयाबी के यह रास्ते आज भी उनके लिए आसान नहीं है, जहां कई सेक्टर्स में समान अवसर नहीं मिलते तो अधिकतर क्षेत्रों में समान वेतन भी उन्हें नहीं मिल रहे.</p>
<p>जेंडर डायनामिक्स जहां समय के साथ थोड़े बहुत बदलते रहते हैं वही फाइनेंशियल संस्थानों (Financial Institutions) में जेंडर इक्वालिटी कैटेलिस्ट (Catalyst) या बैरोमीटर (Barometer) अभी भी निचले स्तर पर है. <strong>यह जेंडर बेस्ड फाइनेंस गैप तभी खत्म हो सकता हैं जब महिलाओं को वित्तीय सेवाएं (Financial Services) जैसे बचत, लोन (Loan), बिमा (Insurance),और वित्तीय संस्थानों के बारे में पूरा ज्ञान हो और उनकी भागीदारी इनमें बढ़ाई जाए .  </strong><br><br>फाइनेंशियल संस्थानों में महिलाओं के बिज़नेस जो की मुख्यतः SME (स्मॉल मीडियम इंटरप्राइजेज) होते है उन्हें बिज़नेस की कम समझ और स्मॉल बिज़नेस नेटवर्क होने के कारण, वह फाइनेंशियल सेवाओं का  पूरा फायदा नहीं उठा पाती.  इसी वजह से वह अपने बिज़नेस को आगे नहीं ले जा पा रही है. महिला उघमों को पुरुषों के मुकाबले बैंक खाते (Bank Account) रखने और फाइनेंशियल इंस्टीटूशन्स से लोन लेने में कम दरों में ब्याज की सुविधा प्रदान की जाती है लेकिन महिलाओं के पास पर्याप्त फाइनेंशियल ज्ञान ना होने के कारण वह इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पाती. यही वजह है कि महिला उद्यमियों को आज भी वर्किंग कैपिटल (Working Capital) का पूरा उपयोग और बिज़नेस लोन (Business Loan) लेने जैसे कामों में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. फाइनेंस के मसलों से दूरी धीरे धीरे डर और हिचक के रूप में सामने आती है, जिस वजह से फॉर्मल फैनेसियल इंस्टीटूशन्स (Formal Financial Institutions)तक उनकी पहुँच कम होती है.<br><br>महिलाओं के बिज़नेस में निवेश करने के पॉजिटिव प्रभाव हो सकते हैं, जैसे महिलाओं के लिए नई नौकरियों के रास्ते खुलेंगे, जेंडर इनक्वॉलिटी कम होगी और महिलाओं का ओवरऑल डेवलॅपमेंट होगा.<strong> भारत में सरकार ने  महिला उघमों को बढ़ावा देने के लिए स्वयं सहायता समूहों को CLF लोन लेने की सुविधा  प्रदान करती है, जिससे आज भारत दुनिया में सबसे बड़ा SHG बैंक लिंकेज मॉडल बन गया है, जिसमें 11  मिलियन से अधिक SHG बैंकिंग सेवाओं से जुड़े है. लोन की सुविधा मिलने से स्वयं सहायता समूहो में अलग अलग कार्य हो रहे हैं जैसे सिलाई, मशरुम कि खेती, अगरत्ती बनाना आदि. </strong>समूह की महिलाएं जो घर से बाहर भी नहीं निकलती थी आज वही महिलाएं बैंक सखी (Bank Sakhi), ऊर्जा देवी (Urja Devi) जैसे कार्य संभाल रही हैं. लोन की मदद से आज समूह की महिलाओं  ने अपने ही घर में सिलाई सेंटर शुरू कर लिया हैं. जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में भी बदलाव आ रहा हैं.    <span class="im"><br><br>जेंडर फाइनेंस गैप के खत्म करने के लिए कई  उपाय किये जा सकते है जैसे महिला स्वामित्य वाले SME (Small Medium Enterprises) की जरूरतों को पूरा करने वाले<strong> इनोवेटिव सेवाओं और उत्पादों को ला कर, सही प्रशिक्षण देकर, वरिष्ठ बैंकिंग भूमिकाओं और बोर्ड में महिलाओं को शामिल कर , व्यवसाय में महिलाओं के लिए एक सहायक नेटवर्क बनाने के लिए फाइनेंसियल तथा नॉन फाइनेंसियल संस्थानों के साथ सहयोग कर. </strong>इन उपायों  को लागु करके हम G20 और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्था महिलाओं के जेंडर एम्पावरमेंट को आगे बढ़ाकर और अधिक इंक्लूसिव इकोनॉमिक विकास प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है.</span></p>
<div class="yj6qo ajU"></div>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Tue, 04 Jul 2023 17:42:27 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-bringing-new-opportunities-to-shg-women]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1rozRTs7i52UYk7fXs4G.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1rozRTs7i52UYk7fXs4G.jpg"/></item><item><title><![CDATA[बंगाल में SHG महिलाएं चलाएंगी 'Door Bank' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/west-bengal-government-going-to-start-door-bank-with-the-help-of-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yV5tBJdoBZEnr3A0WkzV.jpg"><p dir="ltr">बैंकिंग सेवा आज हर व्यक्ति की बुनियादी ज़रूरतों में से बन गयी है. ऐसे में देश की सरकार लोगों को बैंकिंग और फाइनेंस से जुड़े कार्यो को समझाने के लिए नए प्रोजेक्ट्स लाती रहती है. '<strong>बैंक सखी</strong>' (Banking Correspondent) इन सेवाओं को ग्रामीण लोगों तक पहुंचाने का एक बहुत अच्छा ज़रिया है. <strong>SHG महिलाएं</strong> इस कार्य को बख़ूबी निभा भी रही है. इसी कड़ी को आगे बढ़ाने के लिए हाल ही में <strong>बंगाल सरकार </strong>(West Bengal Government) ने राज्य के हर व्यक्ति को बैंक सेवाओं से जोड़ने का निर्णय लिया. पंचायत विभाग प्रदेश के 3 हजार ग्राम पंचायत क्षेत्रों में 'Door Bank' सेवा शुरू करने जा रहा है. इस पहल का उद्देश्य गावों के हर व्यक्ति को बिना किसी परेशानी के बैंकिंग से जोड़ना होगा. </p>
<p dir="ltr">यह कार्य पूरा करने के लिए self help group की महिलाओं को लगाया जा रहा है. वे Business Correspondence Sakhi या (Digi Pay Sakhi) के रूप में काम करेंगी. इनकी पहचान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अगले महीने से कार्य शुरू करने की कोशिश की जा रही है. <strong>स्वयं सहायता समूह की महिलाएं</strong>  इन गावों में काउंटर्स खोलेंगी और ग्राहकों को पैसे निकालने और जमा करने में मदद करेंगी. यह महिलाएं इस काम से 8 से 12 हज़ार रुपये तक कमा पाएंगी. सरकार ने तय किया है कि यह महिलाएं किसी न किसी <strong>SHG की सदस्य</strong> होना ज़रूरी है. West Bengal State Rural Livelihood Mission (WBRLM) उन महिलाओं को प्राथमिकता देगा जो पहले से कंप्यूटर और स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करना जानती है. सरकार का मकसद ज्यादा से ज्यादा गांवों को इस सुविधा के दायरे में लाना है. गांव वालों के साथ यह पहला SHG महिलाओं के लिए भी काफी मददगार साबित होगी. उनकी आजीविका बढ़ाने और मज़बूत करने का यह एक बहुत अच्छा तरीका है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Mon, 29 May 2023 13:09:52 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/west-bengal-government-going-to-start-door-bank-with-the-help-of-shg-women]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yV5tBJdoBZEnr3A0WkzV.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yV5tBJdoBZEnr3A0WkzV.jpg"/></item><item><title><![CDATA["दुनिया में बैंक सखी जैसा कुछ नही"- प्रियंका चोपड़ा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/priyanka-chopra-appreciates-bank-sakhis</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zsPJMXaFuMAuWrjQmSLd.jpg"><p>2016 में प्रियंका चोपड़ा यूनिसेफ की ग्लोबल गुडविल एम्बेसेडर बनी और उसके बाद से ही दुनिया भर में महिला सुरक्षा, आर्थिक आज़ादी और बच्चों के भविष्य निर्माण पर भी काम किये है. प्रियंका, यूनिसेफ के कौशल विकास अभियान से भी जुडी हुई है. महिला अधिकारों की बात वह हमेशा से करती आयी लेकिन गुडविल एम्बेसेडर बनने के बाद उन्होंने इस काम को और तेज़ी से किया.  </p>
<p>महिला सशक्तिकरण के लिए किये गए प्रयासों का चेहरा भी अगर कोई सशक्त महिला बने तो बात ही कुछ और होगी और ये काम प्रियंका बखूबी निभा रहीं है. प्रियंका न केवल भारत बल्कि दुनिया में जाना-पहचाना चेहरा है. इस तरह की आवाज़ अगर भारतीय महिलाओं के अचीवमेंट्स की बात करे, तो वह दूर-दूर पहुंचेगी. प्रियंका ने अपने भारत दौरे पर यही किया जब वो SHG के महत्वपूर्ण अंग, बैंक सखी कार्यक्रम को दुनिया के सामने ले आयीं.  </p>
<p>यूनिसेफ एंबेसेडर प्रियंका चोपड़ा ने भारत के अपने दौरे में महिला सुरक्षा के साथ उनकी वित्तीय स्थिरता और आर्थिक आज़ादी पर बात की. अपनी बात रखते हुए उन्होंने बताया की भारत में हर किसी के पास बैंक अकाउंट हो इसके लिए 'प्रधानमंत्री जन धन योजना' चलाई गई है. इस तरह बैंक अकाउंट भारत के हर कोने तक पहुंच गए है. लेकिन जिस तरह कुछ इलाको में इंफ्रास्ट्रचर की समस्याएं आज भी मौजूद है, इसलिए इन इलाकों के लिए बैंक कॉरेस्पोंडेंट या बैंक सखी बनाई गई है. इसमें SHG महिलाओं की भूमिका सबसे अहम है. इन बैंक सखियों के पास एक छोटा डिवाइस होता है साथ ही तीस से पचास हज़ार नकद होते है. उस डिवाइस में फिंगरप्रिंट से लॉगिन करके जिसका अकाउंट है उसका भी बायोमेट्रिक लॉगिन होता है. इस तरह उनके घरों तक पैसा पहुंच जाता है. इस तकनीक के करण महिलाओं को अब दूर एटीएम तक जाना नहीं पड़ता. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/z3CqBZXRsfElpd1typQ9.jpg" alt="Priynka chopra"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar Vichar</em></span></p>
<p>यह सब संभव हुआ है बैंक सखी कार्यक्रम से जिसका बीड़ा SHG महिलाओं ने उठा रखा है. बैंक सखी बनने के बाद इन SHG महिलाओं में आत्मविश्वास तो आया ही है साथ ही इस ज़िम्मेदारी के साथ वो अपना रोज़मर्रा का काम भी आसानी से कर पा रही है. मदद को घर तक पहुँचाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. प्रियंका ने अपनी बात ये कह के ख़तम की, "इस तरह का बैंक सखी प्रयास बहुत ही इनोवेटिव है, और इस तरह का कार्यक्रम पूरी दुनिया में आज तक नहीं देखा गया."</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Fri, 24 Mar 2023 17:30:52 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/priyanka-chopra-appreciates-bank-sakhis]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zsPJMXaFuMAuWrjQmSLd.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zsPJMXaFuMAuWrjQmSLd.jpg"/></item><item><title><![CDATA[ससुराल ने ठुकराया, आज 'बैंक सखी' बन संवार रही है ठीकरी को ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/bank-sakhi-helps-95-shgs-get-bank-loans</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/5n15ODzGWtWWGYCfRvpS.jpeg"><p>फर्श पर कई महिलाओं के बीच घिरी हुई, पूजा यादव. महिलाओं की ऐसी भीड़ रोज लग जाती है. पूजा इन महिलाओं के कहते खोल रही, तो किसी के आधारकार्ड बना रही. बड़वानी जिले के ठीकरी ब्लॉक में आजीविका मिशन सेंटर पर रोज़ ये नज़ारा दिखता है. जिले में पूजा सफलता के ऐसे रिकॉर्ड बना दिए कि खुद दूसरों के लिए आदर्श बन गई. जिले में अपने काम के बलबूते पर नंबर वन पायदान पर है. आज केवल बारहवीं पास पूजा आज करोड़ों रुपए का हिसाब चुटकियों में कर देती है. लेकिन पूजा को सफलता का ये मुकाम यूहीं नहीं मिला.इस सफर की शुरुआत बहुत कड़वी है.&nbsp;</p><p>अपने लेपटॉप पर काम में व्यस्त पूजा कहती है -"आज मैं आठ घंटे से ज्यादा समय ग्रामीण महिलाओं से घिरी रहती हूं. कभी-कभी खुद पर विश्वास नहीं होता. हर लड़की की तरह मेरे भी सपने थे. शादी अच्छे घर हो. मेरा भी अच्छा परिवार हो. ससुराल वाले मुझे प्यार करे. मेरी शादी भी हुई ,लेकिन मेरे सपने चकनाचूर हो गए. मुझे ससुराल वालों ने नकार दिया. मुझे भगा दिया. ज़िंदगी में अलग-थलग पड़ गई.जीवन में उदासी के अलावा कुछ नहीं बचा</p><blockquote><p>ठीकरी तहसील के ही छोटे से गांव सेगवाल की रहने वाली पूजा अपनी पढ़ाई बारहवीं तक कर पाई. परिवार के लोग भी बहुत परेशान थे.पूजा ने कुछ दिन बाद चुप्पी तोड़ी. पूजा आगे बताती &nbsp;है - <em>"मैंने खुद को साबित</em></p><p><em>&nbsp;करने की ठान ली.तीन साल पहले गणगौर महिला स्वसहायता समूह बनाया. ग्राम संगठन से जुड़ी. सबसे बड़ी दिक्क्त थी नई टेक्नोलॉजी नहीं आती थी. लेपटॉप ऑपरेट करना सीखा. देखते ही देखते सब आसान लगने लगा.अब तक मैं 95 समूहों कि सैकड़ों दीदियों को दो करोड़ अस्सी लाख रुपए के लोन दिलवा चुकी हूं. ये जरूरतमंद महिलाएं अपने रोजगार से जुड़ गई.आजीविका मिशन से &nbsp;मेरी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई."&nbsp;</em></p><p>पूजा ने जिन महिलाओं को लोन दिलवाए वे महिलाएं किराना,जनरल स्टोर, आटा चक्की, सिलाई मशीने और मवेशी पालन का कारोबार कर रहीं हैं. सेगवाल की लक्ष्मी बाई कहती हैं -<em>" लोन मिल गया तो दूध डेयरी खोल ली. मजदूरी और दूसरे काम में भी घर नहीं चल पाता था." एक दूसरी दीदी सुनीता धनगढ़ बताती हैं -" गांव मदरानिया में ही लोन से छह भैसें खरीदी. दूध बेच कर कमाई शुरू कर दी. अब मैं &nbsp;मजदूरी पर नहीं जाती.ये लोन हमें पूजा दीदी ने दिलवाए. हम लोग कभी बैंक गए ही नहीं."</em></p></blockquote><p>ब्लॉक प्रबंधक श्रद्धा शर्मा कहती हैं - "<em>यहां दीदियां बहुत मेहनती हैं. सभी क्षेत्र में ये दीदियां काम कर रहीं हैं. इन सभी को लगातार प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती है. सहायक ब्लॉक प्रबंधक सूरज जमरे हर सेंटर का नियमित दौरा करती है."&nbsp;</em>जिले में चर्चित हुए यहां के ग्राम संगठन को लेकर जिला पंचायत के परियोजना प्रबंधक योगेश तिवारी ने बताया- "ठीकरी ब्लॉक में सभी सहायता समूह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. मजदूरी &nbsp;से अब ये दीदियां खुद के पैरों पर खड़ी हो रही हैं.पूजा सबसे सफल बैंक सखी कि पहचान बना चुकी है।"&nbsp;</p><p>आदिवासी जिले में मजदूरी को अपनी किस्मत मान लेने वाली ये दीदियां खुद अब अपनी किस्मत बदलने को बेताब हैं. पूजा और परिवार को ख़ुशी है कि तलाक जैसी घटना को भूल कर वह अब ग्रेजुएशन कर रही है.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 23 Mar 2023 14:42:46 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/bank-sakhi-helps-95-shgs-get-bank-loans]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/5n15ODzGWtWWGYCfRvpS.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/5n15ODzGWtWWGYCfRvpS.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[काम होगा 100 पर्सेंट जब हम बनेंगे बैंक एजेंट ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/bank-sakhi</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4Ncfg2btYEXFxSf3NzW9.jpg"><p dir="ltr">"बड़ी परेशानी है... बैंक का काम करने इतनी दूर जाना पड़ता है.  एक तो पहले ही बैंक का कामकाज इतना मुश्किल, ऊपर से ये दूरी." मीना  पसीना पोंछते हुए SHG की मीटिंग में पहुंची. वहां जब दीदियों को उसने आपबीती सुनाई तो एक दीदी बोल पड़ी, "सही कहा, बैंकों की परेशानी तो है...  क्यों न अपन ही बैंकिंग कॉरेसपॉंडेंट एजेंट (BCA) बन जाएं ?" </p>
<p dir="ltr">"ये क्या है ?"</p>
<p dir="ltr">"इसका तो नाम ही इतना मुश्किल है, काम कैसा होगा ?" </p>
<p dir="ltr">"कैसे बनेंगे हम ये एजेंट-वेजेंट?" </p>
<p dir="ltr">सारे सवाल मीटिंग हॉल में गूंज उठे. मीना ने तुरंत NRLM वाली मैडम को फ़ोन लगाया और सवालों की बौछार कर दी. </p>
<p dir="ltr">मीना  ने सब समझकर दीदियों को बताया- "हम SHG सदस्य भी बैंकिंग कॉरेसपॉंडेंट एजेंट बन कर अपने गांवों में बैंकिंग सेवाएं दे सकते है जिसे कहते हैं मोबाइल बैंकिंग यानि चलता फिरता बैंक. अब हमें बैंक जाने की ज़रूरत नहीं है बैंक खुद हमारे घर आएगा. मैडम ने बताया ओडिसा में अब तक पांच बैंकों के लिए शहर भर में 1262 BCA काम कर रहे हैं और पिछले साल उन्होंने मिलकर 230 करोड़ रुपये का लेनदेन करवाया. अपने मध्यप्रदेश में ही 728 स्वसहायता समूह की महिलाएं BCA बनीं और झारखंड में 1051 महिलाएं. हां, काम समझना शायद थोड़ा मुश्किल है, पर अपन यूट्यूब का सहारा भी तो ले सकते हैं" अपनी बात रखते हुए मीना  ने मोबाइल खोला. </p>
<p dir="ltr">यूट्यूब से पता चला, "सिर्फ हमारे यहां ही नहीं बल्कि और बहुत सारे ग्रामीण इलाकों में आज भी बैंक की सुविधा नहीं है. जहां बैंक हैं भी वहां लोगों को, खासकर महिलाओं को पैसे निकालने, जमा करने, चेक डालने की बेसिक समझ भी नहीं है. ये बैंकिंग कॉरेसपॉंडेंट एजेंट वाला मॉडल भारत में फाइनेंशियल इन्क्लुशन का सबसे बेहतर तरीका माना गया है, तो क्यों न इन परेशानियों को हम BCA या अपनी भाषा में बोले तो बैंक सखी बनकर हल करें? महिलाओं को यदि बैंक सखी या BCA बनाया गया तो उससे न केवल उनकी पैसों की समझ बढ़ेगी बल्कि दूसरी महिलाएं भी बिना झिझक उनसे बैंक के लेन-देन को समझ पाएंगी. मध्य प्रदेश में 728 SHG दीदियों को ट्रेनिंग देकर SRLM ने उन्हें बैंक सखी बनाया है. अगर ये कर सकती हैं तो हम क्यों नहीं ?"  मोबाइल से नज़र उठाते ही मीना  ने बोला. </p>
<p dir="ltr"> <img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/0zGyc1xLBc0BVYZFmA0y.png" alt="bank sakhi"></p>
<p dir="ltr">(<em>Image Credits: Google Images)</em></p>
<p dir="ltr">ये सब सुनते ही दीदियों के माथे के शल कम होने लगे. "हां, फिर तो अपन ही PF अकाउंट, बैंक की स्कीम, पेंशन प्लान वगैरह के बारे में  गांव में सबको समझा पाएंगे." एक दीदी ने बोला. </p>
<p dir="ltr">"और फिर तो फाइनेंशियल लिट्रेसी चारो तरफ फैल जाएगी." </p>
<p dir="ltr">"हां, अपन तो चलते फिरते बैंक बन जायेंगे"</p>
<p dir="ltr">"सही बात है, बुज़ुर्गों को पेंशन के बारे में बताएंगे, माओं को सुकन्या समृद्धि योजना जैसी स्कीमों के बारे में, और युवाओं को SIP जैसे प्लानों के बारे में. " सारी दीदियां एक के बाद एक बोल पड़ी. </p>
<p dir="ltr">SHG महिलाएं आज क्या कुछ नहीं कर रही- खेती से लेकर होटल चलाने तक, प्रोडक्ट बेचने से लेकर सिलाई करने तक वो हर काम कर रही हैं और अब तो बैंक सखी बन वो बैंकों और महिलाओ की बीच की दूरी भी कम करेंगी. दूसरी महिलाओं के लिए रोल मॉडल बन बैंक सखी हर महीने लगभग  ६७६२ रुपये कमा रही हैं और करीब 64% बैंक सखियां हर महीने 5 हज़ार से ज़्यादा कमा लेती हैं. ग्रामीण विकास मंत्रालय की तरफ से ग्रामीण स्व-रोजगार प्रशिक्षण संस्थान से पहले दीदियों को 6-8 दिन का कोर्स करवाया जायेगा. उन्हें सर्टिफिकेट भी मिलेगा. इस ट्रेनिंग में हमें बैंकिंग एप्लीकेशन जैसे डीजी-पे का इस्तेमाल करना, फॉर्म भरना, बायोमेट्रिक डिवाइसेस से आधार लिंक करना, लेन-देन करना, सब शुरू से सिखाया जायेगा. जब अच्छी ट्रेनिंग होगी तो भला कहां कुछ मुश्किल लगेगा.  </p>
<p dir="ltr">मुझे लगता है बिना देरी किये हमे तुरंत ट्रेनिंग के लिए आवेदन दे देना चाहिए. फिर देखना बैंक सखी बन हम पूरे गाँव को कैसे बैंक और उसकी स्कीमों से लिंक करवाते हैं और नए खाते खुलवाते हैं. फिर...  हर हाथ में ATM कार्ड होगा और हर महिला अपने पैसों का हिसाब खुद रखेगी. </p>
<p style="width: 541px; height: 348px;"><em><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/j0sgRlph6CjHBZrT8xGi.jpg" alt="bank sakhi"></em><br><em>(Image Credits: Google Images)</em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Thu, 23 Feb 2023 18:37:15 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/bank-sakhi]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4Ncfg2btYEXFxSf3NzW9.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/4Ncfg2btYEXFxSf3NzW9.jpg"/></item></channel></rss>