<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ भाजपा]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/bhaajpaa</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/bhaajpaa" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Mon, 06 May 2024 16:00:10 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[चुनाव के पहले दो चरणों में सिर्फ 8% महिला उम्मीदवारों ने लड़ा चुनाव ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/only-8-percent-women-candidates-contested-in-the-first-two-phases-of-the-loksabha-elections-2024-4544430</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uTfG7W8tJPeCMWXXTMHA.png"><p>लोकसभा चुनाव 2024 (LokSabha Elections 2024) के पहले दो चरणों में कुल 2,823 उम्मीदवारों में से केवल आठ प्रतिशत महिलाएं थी, राजनीतिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह लैंगिक पूर्वाग्रह (gender bias) को दर्शाता है और महिला सशक्तिकरण (women empowerment) को कमज़ोर करता है.</p>
<h2>क्या पार्टियां कर रहीं Women Reservation Bill का इंतज़ार?</h2>
<p>चुनाव के पहले चरण में 135 महिला उम्मीदवार थीं और दूसरे चरण में 100, जिससे पहले दो चरणों की कुल संख्या 235 हो गई. 19 अप्रैल 2024 को हुए पहले चरण के चुनाव में मैदान में कुल उम्मीदवारों की संख्या 1,625 थी. 26 अप्रैल को हुए दूसरे चरण में 1,198 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा. पहले चरण में 135 महिला उम्मीदवारों में से, तमिलनाडु की हिस्सेदारी सबसे अधिक 76 थी. हालांकि, यह आंकड़ा राज्य के कुल उम्मीदवारों का सिर्फ 8 % था.</p>
<p>दूसरे चरण में केरल में महिला उम्मीदवारों की संख्या सबसे अधिक 24 थी. पार्टीवार, कांग्रेस (Congress (I)) ने दोनों चरणों में 44 महिलाओं को और भाजपा (BJP) ने 69 महिलाओं को मैदान में उतारा. इस लैंगिक असंतुलन (Gender Bias) ने इस सवाल को जन्म दिया है कि पार्टियाँ सक्रिय रूप से महिलाओं को मैदान में उतारने के बजाय महिला आरक्षण अधिनियम (Women Reservation Bill) के लागू होने का इंतज़ार क्यों कर रही है?</p>
<p>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/more-than-40-lakh-shg-women-took-oath-to-participate-in-2024-lok-sabha-elections-4492983">40 लाख से अधिक SHG महिलाओं ने 2024 लोकसभा चुनाव में भागीदारी की शपथ ली</a></p>
<p>राजनीतिक दलों को महिलाओं की उम्मीदवारी को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए और अधिक महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारना चाहिए. साथ ही पार्टी संरचनाओं के भीतर महिलाओं के लिए सीट आरक्षण होना चाहिए, जैसा कि यूके की लेबर पार्टी में देखा गया है. भारत के मतदाताओं में लगभग आधी महिलाएं हैं, फिर भी राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं को कम प्रतिनिधित्व मिलता है. राजनीति में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने वाली नीतियों की आवश्यकता है.</p>
<p>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/the-share-of-women-voters-in-the-2024-elections-is-the-highest-in-the-last-two-decades-4468751">2024 चुनाव - पिछले दो दशकों में women voters की हिस्सेदारी सबसे अधिक!</a></p>
<h2>घोषणापत्र में महिला आरक्षण के वादे...</h2>
<p>बीजू जनता दल (बीजेडी BJD) एकमात्र ऐसी पार्टी है जो नीति के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत टिकट देती है. लेकिन सिर्फ सीटें आरक्षित करना पर्याप्त नहीं है, हमें एक सांस्कृतिक बदलाव की जरूरत है जहां महिलाओं को नेता और निर्णय लेने वालों के रूप में देखा जाए.</p>
<p>देश के दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलों - भाजपा और कांग्रेस - ने अपने घोषणापत्रों में महिला केंद्रित पहलों को सूचीबद्ध किया है. भाजपा के घोषणापत्र में महिलाओं को सम्मान और सशक्त बनाने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण अधिनियम) को लागू करने, महिला स्वयं सहायता समूहों (Women Self Help Groups SHG) को उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने के लिए सेवा क्षेत्र में एकीकृत करने का वादा किया है. कांग्रेस ने महिला सशक्तिकरण के लिए सुधारों का वादा किया है, जिसमें महिला आरक्षण अधिनियम को तत्काल लागू करना भी शामिल है.</p>
<p>महिला आरक्षण अधिनियम के पारित होने के बाद भी राजनीतिक परिदृश्य में अधिक लैंगिक समावेशिता (Gender Inclusion) की दिशा में कोई सार्थक बदलाव नहीं हुआ है. जहां पार्टियां महिलाओं को सशक्त बनाने के बारे में मुखर हैं, वहीं महिला उम्मीदवारों की कमी राजनीतिक प्रणालियों के भीतर लैंगिक पूर्वाग्रह के गहरे मुद्दे को दर्शाती है.</p>
<p>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/women-dominance-increased-in-cg-impact-will-be-reflecte-in-elections-4440817">छत्तीसगढ़ में बढ़ा महिलाओं का दबदबा, दिखेगा चुनाव में असर</a></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">किरण मुरिया</dc:creator><pubDate>Mon, 06 May 2024 16:00:10 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/only-8-percent-women-candidates-contested-in-the-first-two-phases-of-the-loksabha-elections-2024-4544430]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uTfG7W8tJPeCMWXXTMHA.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uTfG7W8tJPeCMWXXTMHA.png"/></item><item><title><![CDATA[गुलाबी रंग का बजट ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/state-budget-2023-mp</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vn6BIloU0gTcVJT8NIbu.jpg"><p><strong><br></strong>इस साल के आखिर में चुनाव है और अभी से मौसम न केवल चुनावी बल्क़ि होली के कारण गुलाबी भी है.  इसीलिए सरकार ने भी बजट रंगीन तैयार किया है ख़ासतौर पर महिलाओं के लिए. अब उनकी अहमियत प्रदेश राजनीति में भी ख़ास हो गयी है, क्योंकि पिछले चुनाव में 2 % का स्विंग महिलाओं ने बीजेपी की तरफ किया.  इस चुनाव में यह स्विंग और बढ़ने की उम्मीद बीजेपी को हैं.  इस विधानसभा टर्म के  अपने आखरी बजट में भाजपा सरकार ने महिलाओं के लिए योजनाओं की बिछात बिछा दी.इस बिछात का रंग पूरी तरह से "गुलाबी" है. </p>
<p dir="ltr">सरकार के इस बजट में लेडी फरफ्यूम की खुशबू है.आप समझ ही गए कि सरकार ने इस बार बजट की रुपरेखा की बुनियाद और विशेषज्ञों  से ली राय में प्रदेश की हर उम्र की महिलाएं और युवतियां शामिल हैं. मतलब साफ है कि पिछले विधानसभा चुनाव में चाहे कांटे की टक्कर रही हो,हाथ से सत्ता फिसल गई हो लेकिन प्रदेश की मां,बहने और भांजियां मामा मुख्यमंत्री शिवराज पर मेहरबान रही. चुनावी नतीजे और आंकड़ों में दो प्रतिशत अधिक वोट सिर्फ महिला वोटर से ही भाजपा को मिले.भाजपा के थिंक टैंकर्स और राजनितिक पंडितों ने ही इस दो प्रतिशत अधिक  वोट और महिला वोटरों को ध्यान में रख बजट तैयार किया. मामा शिवराज ने बहनों और महिलाओं के इस वोट कर्ज उतारने के साथ अगली बार चुनावी वोट के लिए करवाने करने की कवायद भी शुरू कर दी. यदि हम इस आखरी बजट का विश्लेषण करें तो बजट का एक तिहाई हिस्सा तो महिलाओं की योजना के लिए बुक कर दिया.खास बात यह है कि इस समय  वोटरों की संख्या  5 करोड़ 39 लाख 85 हजार 876  हो गए . इसमें 13 लाख 39 हजार नए मतदाता के नाम जुड़ गए .  इसमें पुरुष के मुकाबले महिला वोटर ज्यादा है. करीब 75 हजार से ज्यादा इनकी संख्या है. एमपी के 41 जिलों में महिलाओं का आंकड़ा ज्यादा है. प्रदेश के 52 में से 41 जिलो में महिला वोटरों के नाम ज्यादा जुड़े हैं. यानि महिला वोटरों का आंकड़ा 7.07 लाख बढ़ा है. </p>
<p dir="ltr">भाजपा की सरकार ने सबसे बड़ा फोकस महिलाओं के सबसे बड़े समूह स्वसहायता यानि सेल्फ हेल्प ग्रुप पर किया. 47 लाख महिलाओं के चार लाख समूह पूरे प्रदेश के हर हिस्से में आर्थिक बदलाव और संपन्नता की सीढ़ियां चढ़ रहीं हैं.यही वजह सरकार ने इस बजट में 5 हजार करोड़ 84 लाख रुपए समूहों के लिए रिजर्व कर दिए. उधर लाडली बहना योजना में सरकार 8 हजार करोड़ रुपए  भी देकर बहनों पर मेहरबान हो गई. SHG भाजपा के लिए कई मौकों पर बैसाखी बन खड़ी हो जाती है. सीएम की सभा में भीड़ जुटाना हो या आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल अंतरराटष्ट्रीय पटल रखना हो,सभी जगह गुलाबी साड़ी पहने हुए दीदियां दिखाई दे जाती हैं.सरकार को भरोसा है कि स्वसहायता समूह की महिलाएं ही "लाड़ली बहना" में ब्रिज का काम कर देंगी.सरकार की सक्रियता इतनी अधिक दिखाई दे रही है कि 5 मार्च को मुहर और लिस्ट  बनने का काम शुरू. फाइनल लिस्ट मई में आ जाएगी. जून में ऐसी लाडलियों के खाते में रुपए भी जमा हो जाएंगे.               </p>
<p dir="ltr">प्रदेश में चुनाव के लिए चाहे अभी छह महीने  बाकी है. आम जनता फ़िलहाल अपने काम में व्यस्त हैं ,लेकिन इस विधान सभा चुनाव के आखरी बजट में भाजपा की सरकार ने वोटर्स को अलग-अलग अंदाज़ में लुभाने का प्रयास किया.विपक्षी पार्टी चाहे कितना भी इस बजट का विरोध करे ,लेकिन महिलाओं की भावुकता और और उनके लाडली लक्ष्मी के बाद अब बहना जैसे शब्दों के नाम से प्रस्तावित योजनाओं ने नींद उड़ा दी. और अभी तक कोई ठोस काउंटर नज़र नहीं आया. हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने लाडली बहना के खाते डेढ़ हजार रुपए प्रति माह देने का काउंटर खेला. फ़िलहाल भाजपा ने ऐसे खातों में एक हजार रुपए जमा करने का प्लान किया है. </p>
<p dir="ltr">प्रदेश सरकार और रास्तों पर भी अपनी वोटर फेंसिंग करने का प्रयास करती नज़र आ रही है. इस बजट में महिलाओं पर मेहरबानी का दूसरा बड़ा कारण प्रदेश की वोटर लिस्ट पर भाजपाइयों की पैनी नज़र. प्रदेश के आदिवासी बहूल जिले में पुरुष वोटर की तुलना में महिला वोटर्स की संख्या ज्यादा है. मंडला ,डिंडौरी,अलीराजपुर ,झाबुआ जैसे जिले की 18 विधानसभा  में ये संख्या अधिक है. इस कारण पिछले साल की तुलना में  बजट में महिलाओं के हक़ की राशि  22 प्रतिशत अधिक रखी गई है.</p>
<p dir="ltr">राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि महिलाओं के मनोविज्ञान और घर में प्रभाव का असर इस बजट पर दिखा. चुनावी बजट पर सरकार और आईएएस अफसरों का मैराथन मंथन साफ दिखाई दे रहा है. यदि राजनीतिक पंडितों की बात मानें तो समूह की 47 लाख महिलाएं और खासकर ग्रामीण महिलाएं किसी भी पार्टी को सत्ता का ताज़ पहना सकती है. इस ताकत को ही दोनों प्रमुख पार्टियां भाजपा और कांग्रेस अच्छे से समझ चुकीं हैं.इसलिए सारा दांव इन महिला वोटर्स पर लगाने में  कोई पीछे हटने को तैयार नहीं है. लगातार सत्ता में काबिज़ भाजपा की एंटीइम्बेंसी का गुलाबी रंग में रंगा यह बजट बड़ा तोड़ भी बन सकता है.उधर कांग्रेस अगले टर्म के लिए नया ट्रम्प कार्ड ढूंढ रही है.  बहरहाल छह महीने में जगह -जगह महिलाओं और उनकी पूछ-परख के नज़ारे देखने को जरूर मिलेंगे.    </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/qthpa8E8g7JvCRgXr7oO.jpg" alt="MP budget 2023"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>mage Credits: Google Image</em></span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Fri, 03 Mar 2023 15:24:19 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/state-budget-2023-mp]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vn6BIloU0gTcVJT8NIbu.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vn6BIloU0gTcVJT8NIbu.jpg"/></item></channel></rss>