<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ बिहार]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/bihaar</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/bihaar" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Wed, 07 Jan 2026 22:27:20 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[डिप्टी सीएम का बड़ा बयान, कहा, "बिहार की तरक्की बिना महिला शक्ति के नामुमकिन!" ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/women-news-india/development-of-bihar-is-incomplete-without-women-power-says-deputy-cm-of-bihar-vijay-kumar-sinha-10979964</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/01/07/deputy-cm-vijay-kumar-sinha-2026-01-07-22-26-36.png"><h2 data-start="251" data-end="307"><strong data-start="254" data-end="305">पटना में उपमुख्यमंत्री का महिला सशक्तिकरण संदेश</strong></h2>
<p data-start="308" data-end="552">बिहार के उपमुख्यमंत्री <strong data-start="331" data-end="352">विजय कुमार सिन्हा</strong> ने मंगलवार को रवींद्र भवन में आयोजित समारोह में जोर देकर कहा कि <em data-start="417" data-end="483">&ldquo;भारत और <a href="https://ravivarvichar.in/tags/bihaar">बिहार</a> की विकास की तस्वीर महिला शक्ति के बिना अधूरी है.&rdquo;</em> यह बयान राज्य सरकार के नए मंत्रियों के सम्मान समारोह के दौरान आया.&nbsp;</p>
<p data-start="308" data-end="552">सिन्हा ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों की सराहना की और कहा,&nbsp;<em data-start="640" data-end="789">&ldquo;सरकार लगातार महिलाओं को सशक्त बनाने की कोशिश कर रही है और इसके परिणाम अब साफ़ नजर आने लगे हैं. महिलाओं की भागीदारी हर योजना की सफलता की कुंजी है.&rdquo;</em></p>
<h2 data-start="798" data-end="832"><strong data-start="801" data-end="830">विधानसभा स्पीकर का समर्थन</strong></h2>
<p data-start="833" data-end="1082">विधानसभा <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/om-birla-addressed-the-shg-women-of-kota-in-his-tiffin-with-didi-program-3979671">स्पीकर</a> <strong data-start="849" data-end="864">प्रेम कुमार</strong> ने भी महिलाओं के समाज में योगदान को रेखांकित किया. उन्होंने कहा:</p>
<blockquote>
<p data-start="833" data-end="1082"><em data-start="932" data-end="1080">&ldquo;महिला शक्ति सिर्फ एक विचार नहीं, बल्कि समाज की ताकत, परिवार की नींव और विकास की प्रेरणा है. यही बिहार को मजबूत, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाती है.&rdquo;</em></p>
</blockquote>
<p data-start="1084" data-end="1209">साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाओं को अधिक निर्णय‑निर्माण और नेतृत्व के पदों में शामिल करना राज्य की प्रगति के लिए अनिवार्य है.</p>
<h2 data-start="1216" data-end="1281"><strong data-start="1219" data-end="1279">राजनीतिक दृष्टिकोण: महिलाओं ने चुनावों में भी दिखाई ताकत</strong></h2>
<p data-start="1282" data-end="1607">राज्यसभा सदस्य और बिहार <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/raksha-khadse-is-the-new-union-minister-of-state-for-youth-affairs-and-sports-in-the-new-government-formed-4761116">बीजेपी</a> महिला मोर्चा की राज्य अध्यक्ष <strong data-start="1343" data-end="1362">धर्मशीला गुप्ता</strong> ने महिलाओं के <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/odisha-government-schemes-and-steps-to-economically-empower-women-1511092">राजनीतिक योगदान</a> पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा:</p>
<blockquote>
<p data-start="1282" data-end="1607"><em data-start="1425" data-end="1605">&ldquo;बिहार की महिलाएं हमेशा साबित कर चुकी हैं कि वे सिर्फ उन्हीं को चुनेंगी जिन्होंने उनका सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित की. इन्हीं कारणों से विधानसभा चुनाव में एनडीए को बहुमत दिलाया.&rdquo;</em></p>
</blockquote>
<p data-start="1609" data-end="1736">यह बयान यह स्पष्ट करता है कि महिलाओं का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव बिहार की <a href="https://ravivarvichar.in/photovideo/indian-women-politicians-through-the-lens-of-bollywood-1514218">राजनीति</a> और विकास रणनीति में अहम भूमिका निभाता है.</p>
<h2 data-start="1743" data-end="1781"><strong data-start="1746" data-end="1779">समारोह में प्रमुख उपस्थितियां</strong></h2>
<p data-start="1782" data-end="1847">इस समारोह में कई मंत्री और विधायक उपस्थित रहे, जिनमें शामिल थे:</p>
<ul data-start="1848" data-end="2021">
<li data-start="1848" data-end="1901">
<p data-start="1850" data-end="1901"><strong data-start="1850" data-end="1899">नारायण प्रसाद, श्रेयसी सिंह, अरुण शंकर प्रसाद</strong></p>
</li>
<li data-start="1902" data-end="1948">
<p data-start="1904" data-end="1948"><strong data-start="1904" data-end="1946">गायत्री देवी, संजय गुप्ता, छोटी कुमारी</strong></p>
</li>
<li data-start="1949" data-end="2021">
<p data-start="1951" data-end="2021"><strong data-start="1951" data-end="2019">एमएलसी निवेदिता सिंह, किरण गाई, चंद्रमुखी देवी, अमृता भूषण राठौर</strong></p>
</li>
</ul>
<p data-start="2023" data-end="2144">कार्यक्रम संयोजक <strong data-start="2040" data-end="2050">सजल झा</strong> ने सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह <a href="https://ravivarvichar.in/tags/mhilaa-sshktikrnn">महिला सशक्तिकरण</a> की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.</p>
<h2 data-start="2151" data-end="2189"><strong data-start="2154" data-end="2187">महिला शक्ति और बिहार का विकास</strong></h2>
<p data-start="165" data-end="492">इस अवसर ने सरकार की <strong data-start="185" data-end="207">स्पष्ट प्रतिबद्धता</strong> को उजागर किया कि बिहार के विकास में <strong data-start="244" data-end="302">महिलाओं की भागीदारी को हर स्तर पर प्राथमिकता दी जाएगी.</strong> उपमुख्यमंत्री के अनुसार, सिर्फ़ योजनाएं बनाने भर से काम नहीं चलेगा; महिलाओं को <strong data-start="382" data-end="452">सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय रूप से शामिल करना</strong> ही राज्य की समग्र प्रगति की कुंजी है.</p>
<p data-start="494" data-end="757">महिलाओं की भागीदारी न केवल <strong data-start="521" data-end="540">सामाजिक स्थिरता</strong> सुनिश्चित करती है, बल्कि <strong data-start="566" data-end="583">आर्थिक प्रगति</strong> में भी एक निर्णायक भूमिका निभाती है. जब महिलाएं शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार और स्थानीय प्रशासन में बराबर भाग लेंगी, तो परिवार और समाज दोनों में समग्र विकास की रफ्तार बढ़ेगी.</p>
<p data-start="759" data-end="1070">सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं और जागरूकता अभियानों को लागू कर, महिलाओं को <strong data-start="834" data-end="863">आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने</strong> पर विशेष जोर दिया जा रहा है. इसमें वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण कार्यक्रम, रोजगार के अवसर और सुरक्षा उपाय शामिल हैं, ताकि महिलाएं केवल लाभार्थी न बनें बल्कि <strong data-start="1018" data-end="1056">निर्णय निर्माता और बदलाव के प्रेरक</strong> भी बन सकें.</p>
<p data-start="1072" data-end="1431">उपमुख्यमंत्री का यह बयान स्पष्ट रूप से संकेत करता है कि बिहार में महिला सशक्तिकरण <strong data-start="1154" data-end="1184">केवल आदर्श या नारा नहीं है</strong>, बल्कि यह राज्य की <strong data-start="1204" data-end="1250">दीर्घकालिक विकास रणनीति और सामाजिक स्थिरता</strong> के लिए अनिवार्य आवश्यकता है. इससे यह संदेश भी जाता है कि बिहार सरकार महिलाओं को <strong data-start="1331" data-end="1413">सिर्फ सहायक भूमिका में नहीं, बल्कि विकास के हर मोर्चे पर नेतृत्व की भूमिका में</strong> देखना चाहती है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Wed, 07 Jan 2026 22:27:20 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/women-news-india/development-of-bihar-is-incomplete-without-women-power-says-deputy-cm-of-bihar-vijay-kumar-sinha-10979964]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/01/07/deputy-cm-vijay-kumar-sinha-2026-01-07-22-26-36.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/01/07/deputy-cm-vijay-kumar-sinha-2026-01-07-22-26-36.png"/></item><item><title><![CDATA[सीता देवी : घरेलू महिला से इलेक्ट्रीशियन बनने का सफर ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/sita-devi-rise-as-bihars-female-electrician</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/XjpoPHCzy2HSPRbkKbar.jpg"><p dir="ltr"><span>महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी निपुणता साबित कर रही हैं, फिर वो चाहे परिवार की जिम्मेदारी संभालना हो या नौकरी या व्यवसाय में परचम लहराना हो. ऐसी ही एक अनोखी कहानी हैं, <strong>बिहार (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-chakhaji-model-brings-water-in-the-fields-with-the-help-of-solar-energy">Bihar</a>)</strong> की महिला,<strong> सीता देवी (Sita Devi)</strong> की, जो घर की सामान्य गृहिणी की भूमिका से निकलकर अपनी दमदार प्रतिभा के साथ एक इलेक्ट्रीशियन के रूप में अपनी पहचान बनाई. वह घर के खाने को बनाने के साथ-साथ खराब पंखे, बल्ब आदि को भी ठीक करने का काम भी स्वयं संभाल रही हैं. उनके इस साहसिक कदम ने दिखाया हैं की, महिला शक्ति का असीमी विकास हो रहा हैं.</span></p>
<p dir="ltr"><span>सीता देवी की इस सफलता के पीछे उनके साहस, आत्मविश्वास और परिश्रम की महत्वपूर्ण भूमिका हैं. सीता <strong>महिला सशक्तिकरण (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/earthworks-innovative-founder-surya-dinkar-bringing-change-in-the-life-of-shg-women">Women Empowerment</a>)</strong> का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जो महिलाओं को प्रेरित कर रही हैं, की कैसे वह स्वयं को सिमित ना करके अपने सपने और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए, किसी भी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का सहारा लेकर आगे बढ़ सकती हैं.&nbsp;</span></p>
<h2><span>सीता देवी महिला इलेक्ट्रीशियन&nbsp;</span></h2>
<p dir="ltr"><span><strong>गया (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-chakhaji-model-brings-water-in-the-fields-with-the-help-of-solar-energy">Gaya</a>)</strong> जिले की प्रसिद्ध इलेक्ट्रीशियन सीता देवी शादी के बाद साधारण गृहिणी का जीवन जी रहीं थीं. वह अपने पति जीतेन्द्र मिस्त्री के साथ घर और बच्चों को संभाल रही थीं. हालांकि, जीतेन्द्र की स्वास्थ्य समस्याएं उन्हें काम में असहाय बना रही थीं. इस मज़बूरी में सीता ने खुद को इलेक्ट्रीशियन बनाने के प्रशिक्षण लेना शुरू किया और वह पंखे, लाइट, ग्राइंडर आदि जैसे उपकरणों को ठीक करने में माहिर हो गईं. दुकान में ख़राब उपकरण को ठीक कराने के लिए ग्राहक उनके पास आने लगे. इसी दौरान उनके बच्चे भी उनके साथ दुकान जाने लगे और उनका हांथ बटाने लगे.&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>जिले की एकलौती महिला मिस्त्री सीता के हुनर की सराहना बहुत से लोगों ने की, जिसमे मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी शामिल हैं. 2010 में <strong>नितीश कुमार (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-chakhaji-model-brings-water-in-the-fields-with-the-help-of-solar-energy">CM Nitish Kumar</a>)&nbsp;</strong>ने सीता देवी को प्रमाण पत्र के साथ 50 हजार रूपए की राशि देकर, उन्हें सम्मानित भी किया था.</span></p>
<p dir="ltr"><span>सीता देवी के इस साहसिक कदम ने महिलाओं के सम्मान, समर्थन और सार्थकता को एक नई दिशा दी हैं. उन्होंने साबित किया हैं कि महिलाएं सिर्फ घर की जिम्मेदारियों के साथ समाप्त नहीं होती, बल्कि उनमे अनेक क्षमताएं होती हैं, जरुरत हैं तो बस उनको खोजने, विकसित करने और खुद को समृद्ध करने की.&nbsp;</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Sat, 22 Jul 2023 16:05:07 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/sita-devi-rise-as-bihars-female-electrician]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/XjpoPHCzy2HSPRbkKbar.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/XjpoPHCzy2HSPRbkKbar.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SHG महिलाओं के लिए बनेंगे सामुदायिक भवन ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/community-houses-will-be-built-in-bihar-muzaffarpur-for-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/dmnL1mQwwfzYklpj8gDE.jpg"><p><span><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/balco-company-under-chattisa-initiative-on-world-chocolate-day-started-the-production-of-blueberry-and-cranberry-chocolate-with-shg-women">स्वयं सहायता समूह</a> (SHG) <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/self-help-groups-influencing-politics-in-india">भारत की इकोनॉमी</a> में बदलाव का एक अभिन्न हिस्सा बनते जा रहे है. ग्रामीण विकास और पंचायती राज के केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी ठान लिया है की भारत में महिलाओं को सशक्त बनाकर उनके द्वारा देश का नतृत्व किया जाए. चाहे केंद्र की सरकार हो या राज्य की, महिलाओं के हालातों को बदलने के लिए भरसक प्रयास किये जा रहे है और इसीलिए सरकार उन्हें Self Help Group से जुड़ने के लिए&nbsp; प्रोत्साहित भी करती है.</span><b></b></p>
<h2><span>बिहार में होगा SHG महिलाओं के लिए सामुदायिक भवन का निर्माण</span></h2>
<p dir="ltr"><span>SHG महिलाओं को हर सुख सुविधा मिले इसके लिए सरकार आए दिन नयी परियोजनाएं लाती है, जिसमें एक कड़ी बनकर जुड़ा है मुज़फ्फरपुर बिहार का यह प्लान. इस प्रोविंस में सरकार ने SHGs के लिए सामुदायिक भवन बनवाने की पहल <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-chakhaji-model-brings-water-in-the-fields-with-the-help-of-solar-energy">बिहार रूरल लाइवलीहुड प्रमोशन समिति</a> (BRLPC) की ओर से शुरू हो गई है.</span><b></b><span></span></p>
<p dir="ltr"><span>ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त सचिव अरविंद मंडल ने बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र भी लिखा. भवन निर्माण के लिए&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/kuldeep-singh-dhaliwal-started-solid-waste-management-in-punjab-with-the-help-of-shg-women"> मनरेगा </a>से मॉडल एस्टीमेट तैयार किया गया है. बताया गया है कि गतिविधियों के सफल संचालन के लिए ग्राम संगठनों, क्लस्टर लेवल असोसिएशंस, काम कर रहे है. बिहार में SHG महिलाओं को बहुत बड़े स्तर पर आगे बढ़ने की पहल की जा रही है. यह कार्य हर राज्य सरकार को करने के लिए आगे बढ़ाना चाहिए. महिलाओं को जब सशक्त कर जाएगा तभी देश की तरक्की होगी.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Thu, 20 Jul 2023 12:43:27 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/community-houses-will-be-built-in-bihar-muzaffarpur-for-shg-women]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/dmnL1mQwwfzYklpj8gDE.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/dmnL1mQwwfzYklpj8gDE.jpg"/></item><item><title><![CDATA[चखाजी मॉडल ने सौर ऊर्जा से खेतों तक पहुंचाया पानी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-chakhaji-model-brings-water-in-the-fields-with-the-help-of-solar-energy</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Jv0VFRuaZw1FhPUPPo43.jpg"><p><span><strong>बिहार (Bihar)</strong> एक ऐसा राज्य जो अपने संघर्ष, संतुलन, स्वाभिमान और साहस के लिए जाना जाता है. इसी परंपरा को <strong>प्रेम सिंचाई विकास समिति (Prem Sichai Vikas Samiti) </strong>नाम के महिला किसान समूह ने आगे बढ़ाया. यह समिति बिहार के <strong>समस्तीपुर (Samastipur) </strong>जिले के <strong>चंदौली (Chandauli) </strong>पंचायत की है, जिसका नेतृत्व तीन पदाधिकारियों की एक टीम करती है, जिसकी अध्यक्ष इंदु देवी, सचिव विभा कुमारी और बुककीपर रिंकू देवी है. इस समूह के सदस्य मुख्य रूप से खेती किसानी के काम से जुड़े हुए है. सबकुछ अच्छा चल रहा था की इस समूह की महिलाओं को एक चुनौती का सामना करना पड़ा, वह थी पानी की कमी. उनकी कड़ी मेहनत और कोशिशों के बाद भी, फसलें कम पानी के कारण पनप नहीं पा रही थी. धीरे धीरे रुपये - पैसे का संकट गहराहने लगा. तब इन महिलाओं के सतह आया <strong>अगा खान ग्रामीण सहायता कार्यक्रम (Aga Khan Rural Support Programme) </strong>जिसके समर्थन और साझेदारी से <strong>प्रेम सिंचाई विकास समिति नामक स्वयं सहायता समूह (Self Help Group)</strong> बना. <strong>AKRSP</strong> के प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम के अंतर्गत महिलाओं को<strong> सोलर बेस्ड ग्रुप इरीगेशन (GI) स्कीम (Solar Based Group Irrigation Scheme) </strong>से परिचित कराया गया, साथ ही उनकी फसलों के लिए लगातार पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उनके खेतों में <strong>सोलर पंप (Solar Pump) </strong>लगाया गया. </span><br><br><span>इन सब कोशिशों के बावजूद एक और मुश्किल सामने आ गयी, महिलाओं को परियोजना के लिए 13,000 रूपए का निवेश करने की ज़रुरत थी. खेती - किसानी करने वाली महिलाओं के लिए यह बहुत बड़ी राशि थी. अपने पति और परिवार को रुपये देने के लिए मनाना नामुमकिन था. क्योंकि पुरे गाँव का मानना था कि सिचाई पंप चलाना महिलाओं का काम नहीं है.</span><br><br><span><strong>लेकिन महिलाओं के पास थी समूह की ताक़त और इसीलिए उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, हिम्मत से राह निकल ही जाती है और ऐसा ही यहां हुआ. 2018 में AKRSP के समर्थन और मार्गदर्शन से उन्होंने सोलर इरीगेशन इंटरवेंशन (Solar Irrigation Intervention) शुरू किया. </strong>इस परियोजना में 5 HP का सौर पंप, 300 फीट का बोरवेल, पम्पहाउस और भूमिगत पाइपलाइन चैनल, जो लगभग 30 - 35 एकड़ भूमि को कवर करता था उसको लगाया गया. नए सौर पंप के साथ न केवल कृषि भूमि बल्कि आसपास के क्षेत्रों में लगभग 95 - 100 किसानों को सिंचाई की सुविधा मिली. निरंतर जल आपूर्ति के साथ अब किसान साल भर फसल उगा सकते है और पहले कम विकल्पों से आगे बढ़कर अपनी पसंद से काम कर सकते है. आलू और मक्के, जिन्हे पानी की कमी के कारण उगाना असंभव था वह अब खेतो में लहलहा रहे हैं.</span><br><br><span>प्रेम समूह की सफलता के बारे में बात फैल गई और जल्द ही अन्य किसानों ने उनसे 90 रूपए प्रति घंटे के हिसाब से पानी खरीदना शुरू कर दिया, जिससे उनकी सालाना आय 1.3 लाख हुई. जो की उनकी <strong>वित्तीय स्वतंत्रता (Financial Independence)</strong> दिलाने में बहुत बड़ा योगदान था. <strong>सोलर इरीगेशन प्रोजेक्ट (Solar Irrigation Project)</strong> का प्रभाव खेतों से आगे तक बढ़ा लगातार पानी की आपूर्ति से जुड़े परिवारों की आहार संबंधी आदतें बदलने लगीं सब्जियों के बढ़ते उत्पादन से उन्हें पौष्टिक आहार मिला, जिससे उनके स्वास्थय में सुधार हुआ. 130 से अधिक समूहों को यहीं काम करके सफलता मिली, जिससे बिहार में 5000 से अधिक किसानों का लाभ हुआ. यह मॉडल <strong>चखाजी मॉडल (Chakhaji Model) </strong>के नाम से जाना जाता है. इस मॉडल की मदद से महिला किसान सशक्त हुई, कृषि उत्पादन और उनकी आय में भी वृद्धि हुई. AKRSP की इस सौर पहल ने गति पकड़ी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों, विशेषकर महिलाओं के जीवन में बदलाव आया. <strong>पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (Public Private Partnership) </strong>और <strong>बिहार रूरल लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जीविका) (Bihar Rural Livelihood Promotion Society)</strong> जैसे ऑर्गेनाइजेशंस के समर्थन से, सिंचाई सेवाओं का विस्तार एक वास्तविकता बन गयी.</span><br><br><span><strong>प्रेम सिंचाई विकास समिति और उनकी सोलर इरीगेशन यात्रा की कहानी एक ऐसा उदाहरण ही जिसमें  कैसे किसी उद्देश्य को पाने के लिए महिला किसान एकजुट होकर चुनौतियों को पार कर सकती है और अपने जीवन को न ही केवल बदल सकती हैं बल्कि अपने समुदाय के समग्र विकास और समृद्धि में भी योगदान कर सकती हैं.</strong></span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Thu, 29 Jun 2023 18:08:28 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-chakhaji-model-brings-water-in-the-fields-with-the-help-of-solar-energy]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Jv0VFRuaZw1FhPUPPo43.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Jv0VFRuaZw1FhPUPPo43.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मातृत्व के आगे हारी मुश्किलें ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/sangeeta-bharti-of-bihar-joins-an-shg-to-change-her-daughters-future</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ChV7NqlCAobfo0kJG8Mw.jpg"><p dir="ltr">एक महिला का सबसे कोमल रूप होता है उसका<strong> 'मातृत्व'</strong>. जब बात उसके बच्चों की आती है, तो वह कुछ भी सहन करने को तैयार रहती है. वो सिर्फ यह चाहती है की उसके बच्चे हमेशा खुश रहें. इसके लिए वह किसी भी तरह के संघर्ष से पीछे नहीं हटती. कुछ ऐसी ही कहानी <strong>बिहार के गया जिले </strong>के <strong>पसेवा गांव की संगीता भारती</strong> की, जो मां के रूप में अपने <strong>पांच बेटियों</strong> को खुद के संघर्ष से आगे बढ़ने का हौंसला दे रही है. पति के जाने के बाद संगीता और उसकी पांच बेटियां अकेली पड़ गयी. ना पैसा था, ना ही नौकरी. संगीता ने फैसला कर लिया था कि वो अपनी बेटियों को इस तरह भूखे पेट सोते हुए नहीं दे सकती. </p>
<p dir="ltr">संघर्ष के इस दौर में उसने खेतों और भवन निर्माण में मजदूरी की, घरों में बर्तन मांजने के काम किए और किसी तरह परिवार चलाया और बेटियों को शिक्षित करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ी. वे बताती है- "हम बेहद गरीबी में अपना जीवन जी रहे थी, तभी 2017 में JEEVIKA<strong> स्वयं सहायता समूह</strong> (SHG) से जुड़ने का मौका मिला. मैं समूह की बैठक में भाग लेने लगीं और साथ में बचत करने लगी. बाद में ग्राम संगठन में चर्चा के दौरान एक दिन <strong>JEEVIKA self help group</strong> की दीदियों ने मुझे <strong>सतत जीविकोपार्जन योजना </strong>के माध्यम से स्वरोजगार से जोड़ा."</p>
<p dir="ltr">अब वह सतत जीविकोपार्जन योजना के माध्यम से किराना दुकान चला अपनी आत्मनिर्भरता की और कदम बढ़ा रहीं हैं. वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत हैं. योजना से प्राप्त पूंजी में क्रमिक वृद्धि करते हुए संगीता भारती निर्धनता से आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ी हैं. कई बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें मिशन स्वावलंबन के तहत प्रमाण पत्र दिया गया है. संगीता ने साबित कर दिया की महिला अगर ठान ले तो उसे कोई परेशानी नहीं हरा सकती. देश की हर महिला के लिए मिसाल हैं संगीता की कहानी, जिसने हार नहीं मानी और अपनी बेटियों के भविष्य को सुधारने के लिए हर संभव प्रयास करतीं रही.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sun, 28 May 2023 11:00:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/sangeeta-bharti-of-bihar-joins-an-shg-to-change-her-daughters-future]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ChV7NqlCAobfo0kJG8Mw.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ChV7NqlCAobfo0kJG8Mw.jpg"/></item><item><title><![CDATA[खेती से पद्मश्री तक का सफ़र साइकल से ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/kisan-chachi-from-bihar-helped-village-women-become-financially-independent</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/68MakxFhPuZNT1tMYpeE.jpg"><p>“मुझे थोड़ी देर के लिए भी खाली बैठना पसंद नहीं है. डॉक्टर ने अभी साइकिल चलाने से मना कर दिया है, लेकिन दूसरी महिलाओं के साथ मिलकर अचार बनाने का काम मैं आज भी करती हूं.” किसान चाची के इस न थकने वाले अंदाज़ और हमेशा कुछ करते रहने के नज़रिये ने उन्हें पद्मश्री दिलाया. 66 वर्षीय राजकुमारी देवी बिहार के मुजफ्फरपुर ज़िले के सरैया प्रखंड के आनंदपुर गांव की रहनेवाली है. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/4KFhjbIsEeZ302YpeMlr.jpg" alt="your story kisan chachi"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Your Story</em></span></p>
<p>देखा तो टीचर बनने का सपना था, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए पति के साथ खेती में मदद करने लगी. धीरे-धीरे वे जैविक तरीकों से खेती करने लगी जिससे उत्पादन बढ़ते गया और उनके हालात सुधरने लगे. आस-पास के किसान उनसे सलाह लेने आते और उनके तरीके सीखते. बाज़ार न मिलने पर, रखे-रखे फ़सल ख़राब होने लगती है. राजकुमारी ने ऐसे समय में उस फसल से दूसरे प्रोडक्ट्स बनाने का सोचा. अचार बनाना तो आता था, लेकिन बड़े पैमाने पर उसे बेचने की समझ नहीं थी. कुछ नया करने के लिए, नया सीखना पड़ता है. यही सोच कर उन्होंने विज्ञान केंद्र से फ़ूड प्रॉसेसिंग की ट्रेनिंग ली और घर से काम शुरू किया. अचार बनाने के साथ, साइकिल चलाना भी सीखा. अचार के छोटे पैकेट साइकिल से जाकर बेचना शुरू किया. उनके स्वाद को लोगों ने ख़ूब पसंद किया और साइकिल चाची नाम से पहचान बनी. </p>
<p>उन्होंने जो कुछ सीखा, उसे आस-पास की महिलाओं को भी समझाया. उनका मानना था कि खेती करने में महिलाएं पुरुषों का साथ देती हैं. जिसके बदले पैसे न मिलने की वजह से उनकी मेहनत की क़द्र नहीं होती. इसीलिए,वे महिलाओं को खुदका प्रोडक्ट बनाने और उसे बेचने के लिए प्रेरित करती हैं. उन्होंने महिलाओं को मशरूम उगाने और इससे प्रोडक्ट्स बनाने के लिए जागरूक किया. चावल उगाने के साथ, उसके पोहे और पापड़ बनाने की सलाह दी. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/KUO1UoUFeXG7tROy6anw.jpeg" alt="kisan chachi news 18"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image credits: News18</em></span></p>
<p>घर से बाहर निकलते ही अवसर ख़ुद-ब-ख़ुद उन्हें मिलते चले गए. वे महिला समूहों से जुड़ी और मेलों में अपने अचार और मुरब्बे को बेचा. साल 2006 में उन्हें ‘किसान श्री सम्मान’ मिला था, जिसके साथ राजकुमारी देवी को 'किसान चाची' का टैग दिया गया. आज उनके बनाये अचार और मुरब्बे, देश-विदेश में पसंद किए जा रहे हैं.  किसान चाची के 20 से ज़्यादा प्रकार के अचार पटना खादी मॉल, दिल्ली के प्रगति मैदान और विस्कोमान सहकारिता विभाग के अलावा कई जगह बिक रहे हैं.  </p>
<p>मुश्किलों के आगे घुटने टेक देना आसान होता है, लेकिन कुछ नया सीख अपनी तक़दीर बदलने के लिए होंसला और मेहनत चाहिए. राजकुमारी देवी ने बदलते समय के साथ ख़ुद को ढाला, नई सोच के साथ कुछ नया किया, और अपने साथ दूसरों को भी आर्थिक आज़ादी की राह पर चलने में मदद की.   </p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sun, 07 May 2023 11:30:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/kisan-chachi-from-bihar-helped-village-women-become-financially-independent]]></guid><category><![CDATA[हम में है हीरो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/68MakxFhPuZNT1tMYpeE.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/68MakxFhPuZNT1tMYpeE.jpg"/></item><item><title><![CDATA[देश में बढ़ते बाल विवाह के केसेस ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/cases-of-child-marriage-increasing-in-india</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/jEjNulOeqKqSagLFuKm1.jpg"><p><iframe src="https://www.youtube.com/embed/FWRW3EpJ3R8" width="560" height="314" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>ग्रामीण इलाकों में  चोरी-छुपे अभी भी बच्चियों के विवाह हो रहे हैं.आंकड़ों पर नज़र डालें तो यूपी, बिहार, वेस्ट बंगाल और त्रिपुरा में बाल विवाह सबसे अधिक दर्ज किए गए. अभी भी देश में 15 लाख बाल विवाह सालाना होने की शिकायतें मिल रहीं हैं. इसका विषम प्रभाव यह पड़ा कि 1 करोड़ 11 लाख अस्सी हजार नाबालिग बच्चियां 2021 तक प्रेग्नेंट हो गईं.इस साल भी राजस्थान,मप्र,छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में शासन ने अलर्ट जारी किया. पुलिस महकमा ,महिला एवं बाल विकास, सामाजिक संघठन सहित कई लोगों को इस बाल विवाह रोको अभियान से जोड़ा गया है. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">Rohan</dc:creator><pubDate>Sat, 22 Apr 2023 16:32:32 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/cases-of-child-marriage-increasing-in-india]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/jEjNulOeqKqSagLFuKm1.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/jEjNulOeqKqSagLFuKm1.jpg"/></item><item><title><![CDATA[जीविका-वायर्स बना महिला उद्यमिता की पहचान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/jwires-becomes-the-first-pvt-ltd-company-in-the-state-owned-by-rural-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/P0wigxHgxfTdILHvkaHu.jpg"><p>स्वयं सहायता समूहों के ज़रिये ग्रामीण महिलाओं को आजीविका से जोड़ने वाली गतिविधियों में सम्मिलित कर सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किये जा रहे हैं. बिहार में गया जिले के डोभी प्रखंड में स्थित जीविका वीमेन इनिशिएटिव रिन्युएबल एनर्जी एंड सॉल्यूशन (जे-वायर्स) इसी लक्ष्य को पाने की दिशा में एक अनोखा प्रयास है. महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2020 में जे-वायर्स को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में शुरू किया गया और ये प्रदेश में इस प्रकार की पहली कंपनी बन गई. </p>
<p>जे-वायर्स एक निर्माता, व्यापारी,असेंबलर,और सिस्टम इंटीग्रेटर कंपनी है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सौर उत्पाद की फील्ड में काम करती है. इसमें शेयर होल्डर 60 स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं हैं. इनमें 25 जीविका दीदियां ट्रेनिंग के बाद तकनीकी सहायक बन एलईडी बल्ब असेम्बली का काम करती हैं. जे-वायर्स के संचालन के लिए 15 कर्मियों को रखा गया. जीविका वीमेन इनिशिएटिव रिन्युएबल एनर्जी एंड सॉल्यूशन द्वारा सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की लिए भी काम करती है. महिलाओं के जे-वायर्स ब्रांड के तहत बने एलईडी बल्ब बेहतर गुणवत्ता वाले होने के साथ कम बजट में मिलते हैं.</p>
<p>बिहार में जे-वायर्स की 5 जिलों (गया, नवादा, औरंगाबाद, पश्चिम चंपारण और भोजपुर) के 57 प्रखंडों में 341 सौर दुकानें चलाई जा रही हैं.  341 सौर दुकानों में 192 में एयरटेल पेमेंट बैंक सीएसपी (ई-सेवाएं) की सुविधा भी मौजूद है. जीविका दीदियों को इन सौर दुकानों से रोज़गार का एक साधन मिला. महिला उद्यमिता को बढ़ावा देते हुए इस साल सौर दुकानों की संख्या 650 तक करने का लक्ष्य रखा गया. जीविका दीदियों को जे-वायर्स के ज़रिये उद्यमिता विकास को बढ़ावा मिलने के साथ सौर दुकानों से स्वरोजगार का अवसर भी मिलेगा. महिलाओं के लिए पारंपरिक माने जाने वाले रोज़गार जैसे सिलाई, खाना पकाना, कशीदाकारी के परे कुछ अलग सीखने का मौका मिलेगा. ये दीदियां साबित कर रही हैं कि अवसर मिलने पर महिलाएं हर फील्ड में अपनी जगह बना सकती हैं.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Wed, 12 Apr 2023 16:33:49 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/jwires-becomes-the-first-pvt-ltd-company-in-the-state-owned-by-rural-women]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/P0wigxHgxfTdILHvkaHu.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/P0wigxHgxfTdILHvkaHu.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मीरा बनी मर्दानी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/meera-with-200-shg-women-destroyed-liquor-distillery</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aH1Iohb8fmtoZe599JYn.jpg"><p>अबला समझ कर महिला को आज तक बहुत दबाया गया है. उनके साथ ज़ोर ज़बरदस्ती से ना जाने कितने गलत काम भी किये गए. और इन सब अनहोनियों का सबसे बड़ा कारण कहीं न कहीं शराब बनी हैं. देश दुनिया में महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार और ज़ुल्म में शराब भी एक कारण है. भारत में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहुत से कानून बनते रहे हैं. शराब के मामले में भी सरकार आए दिन कुछ न कुछ नया करती रहती हैं. भारत में गुजरात के बाद बिहार को 'ड्राई स्टेट' बना दिया गया . </p>
<p>भले ही बिहार और गुजरात में शराब खुलेआम नहीं बिक रही हो, लेकिन ये बात किसी से छुपी नहीं हैं की शराब का कला धंधा दोनों ही राज्यों में दिन दुगना रात चौगुना बढ़ रहा हैं. काला बाज़ारी के बढ़ते हुए इस जंजाल में ना जाने कितने मासूम लोग फास जाते हैं. शुरुआत किसी एक से होती हैं, और शिकार उससे जुड़ा हर व्यक्ति हो जाता हैं. जहरीली शराब इस शराबबंदी का खतरनाक पक्ष हैं. इन 'सो कॉल्ड ड्राई स्टेट्स' में जहरीली शराब कई मौतों का कारण बनी हैं.</p>
<p>महिलाओं ने बहुत सहन करा, लेकिन जब बात हद से आगे बढ़ जाए, तो लड़की हो या औरत, तो उसे महिषासुर मर्दिनी का रूप लेना पड़ता है. मीरा ने बिहार में भी यहीं रूप लिया, उसने यह बात साबित कर दी की आज महिलाएं किसी से कम या कमज़ोर नहीं है. ग्रामीण महिलाओं को एकजुट कर जब मीरा सड़क पर उतरी तो देखते ही देखते उन्होनें अवैध शराब की दर्जनों भट्टियां तबाह कर दीं. </p>
<p>अपने इलाके में पूर्ण शराब बंदी लागू होने से पहले ही मीरा ने गांव की महिलाओं को इकठ्ठा करके 200 से ज़्यादा SHG तैयार किये,  जो अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ़ आवाज़ उठा रहे थे. बात सिर्फ़ भट्टियां तबाह करने तक ही सीमित नहीं है. जो लोग इन अवैध भट्टियों को चला रहे थे, उनकी भी अच्छी खासी खबर ली गई. मीरा का डर इस कदर लोगों में मन में बैठ गया की बहुत से लोगो ने तो शराब को हाथ तक लगाना बंद कर दिया. </p>
<p>वर्ष 1996 से वर्ष 2002 तक नेट्रोडेम जमालपुर से फील्ड वर्कर के रूप में जुड़कर मीरा ने अलग-अलग गांव में 200 से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन किया. अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण समिति के जिला स्तरीय कमेटी के सदस्य के रूप में कार्य कर चुकी मीरा फिलहाल आंगनवाड़ी सेविका हैं. भले ही अब वे सेविका के रूप में दुनिया के सामने हैं , लेकिन उन्होनें आज तक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम बंद नहीं किया. कोसी त्रासदी के दौरान मीरा ने सहरसा जाकर कैंप में रह रही महिलाओं को बांस से बनने वाली चीज़ों के बारे में बताया और स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया. </p>
<p>मीरा के सामाजिक कार्य को देखते हुए बिहार वैलेंट्री एसोसिएशन पटना ने उन्हें वर्ष 2008 में सम्मानित भी किया. वहीं वर्ष 2006 में दिल्ली में आयोजित महिला उनमुखी कार्यशाला में बिहार का एकमात्र महिला प्रतिनिधि प्रतिनिधि के रूप में भाग लेने का अवसर मिला. मीरा ने ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की समस्या को प्रमुखता से सामने रखा और इसके लिए मीरा ने गांव में महिलाओं के हित के लिए अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ खुलकर आगे आईं. आंगनवाड़ी सेविका के रूप में कार्य कर रही मीरा हमेशा महिलाओं के हित की रक्षा को लेकर आज भी अपनी आवाज को बुलंद कर रही है. </p>
<p>वर्ष 2003 से 2007 तक कैथलिक चर्च बरियारपुर से जुड़कर मीरा ने क्षेत्र में 250 स्वयं सहायता समूह बना कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा. वहीं गंगा दियारा क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिविर का आयोजन कराया जिसमें महिलाओं को सत्तू, बेसन, मसाला, अगरबत्ती, पापड़ आदि बनाने का प्रशिक्षण दिलाकर काम से जोड़ा.</p>
<p>मीरा देवी ने बिहार में ऐसे कितने ही स्वयं सहायता समूह शुरू करवाए जिनमें आज महिलाएं अपनी रोज़ी रोटी कमा रही है और अपने परिवार को मदद भी कर रही है. मीरा देवी ने जो काम किया उसकी जितनी सरहाना की जाए कम है. सिर्फ़ बिहार में ही क्यों, अगर पुरे देश की महिलाएं अपने स्वयं सहायता समूह तैयार करे और ऐसे गैरकानूनी धंधो को बंद करवा दे, तो देश को सुधरने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 04 Apr 2023 16:29:55 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/meera-with-200-shg-women-destroyed-liquor-distillery]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aH1Iohb8fmtoZe599JYn.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aH1Iohb8fmtoZe599JYn.jpg"/></item><item><title><![CDATA[ट्रांसजेंडर्स को मिली SHG से नई राह ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/transgenders-form-shg-to-get-dignified-livelihood</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/o9l1RFiJbYahAFDotrot.jpg"><p dir="ltr">अपनी रोज़मर्रा कि ज़िन्दगी और काम करने कि जगह महिलाओं के संघर्ष को कौन नहीं जानता.&nbsp; महिलाओं की मुश्किलें और संघर्षों के बारे में तो फिर भी हमें पता चलता रहता है.&nbsp; लेकिन समाज का एक ऐसा हिस्सा जिसकी चुनौतियां सबसे ज़्यादा हैं लेकिन उनके बारें में कहीं ज़िक्र नहीं होता. यह हैं थर्ड जेंडर, समाज में अपने अधिकारों और समान अवसर की लड़ाई के साथ रोज़गार तलाशना लगभग नामुमकिन सा काम हैं. अगर रोज़गार मिल भी जाए तो शोषण और उत्पीड़न की नई कहानी शुरू होती है. इन मुश्किलों के बीच स्वयं सहायता समूह, ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए आशा की किरण बन के उभरे हैं. अपनों के बीच स्वाभिमान और प्रतिष्ठा के साथ काम करने का अवसर, हज़ारों स्वयं सहायता समूह (SHG) आज भारत में ट्रांसजेंडर समुदाय को दे रहे हैं.&nbsp;&nbsp;</p><p dir="ltr">तेलंगाना के करीमनगर में नगरपालिका क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन मिशन (MEPMA) के तहत छह सदस्यों के साथ एक ट्रांसजेंडर स्वयं सहायता समूह बनाया. उनके पहचान पत्रों के अलावा बैंक खाते खुलवाकर पासबुक भी बनाये गए.&nbsp; ग्रुप बनने के बाद 32 और ट्रांसजेंडर्स ने अधिकारियों के पास अपना नाम दर्ज कराया. व्यावसायिक प्रशिक्षण के अलावा स्वरोजगार के लिए 50 हज़ार रुपयों का लोन भी दिया गया. आज बिहार में 10 लाख से भी ज़्यादा स्वयं सहायता समूह हैं. राज्य में SHG की सफलता को देखते हुए बिहार में रह रहे 40,000 से ज़्यादा ट्रांसजेंडर लोगों के लिए कौशल प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत की. ये कदम उन्हें रोज़गार के अवसर देने और मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लिया गया.&nbsp;</p><p dir="ltr">हाल ही में ओडिशा सरकार ने भुवनेश्वर में 20 हज़ार महिला और ट्रांसजेंडर स्वयं सहायता समूहों को साइकिल दी. ये महिलाएं और ट्रांसजेंडर्स आहार किचन संभाल रहे हैं, जल साथी बन वाटर मैनेजमेंट कर रहे हैं, और वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट की देख रेख भी कर रहे हैं. इस मदद से इन्हें काम की आसानी होगी और कार्यबल में हिस्सेदारी बढ़ेगी.&nbsp;</p><p dir="ltr">ओडिशा के कटक में बाढ़, खुले में शौच, पर्याप्त जगह की कमी और कम सीवर कवरेज जैसी कई चुनौतियां थी, जिन्होंने सुरक्षित स्वच्छता समाधानों की उपलब्धि को बाधित किया. कटक नगर निगम (सीएमसी) ने कचरे के उपचार के लिए एक सेप्टेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसईटीपी) की शुरुआत की. ट्रांसजेंडरों को स्वयं सहायता समूह बनाकर इन्हे एसईटीपी की देखभाल का काम दिया गया जिसे वे बखूबी संभाल रहे हैं.&nbsp;&nbsp;&nbsp;</p><p dir="ltr">पॉन्डिचरी में शीतल ने अपने जैसे ट्रांसजेंडर्स के लिए सहोदरन कम्युनिटी ओरिएंटेड हेल्थ डेवलपमेंट की शुरुआत की. उन्होंने LGBTQ (एल जी बी टी क्यू ) समूहों के लिए काम किया और आगे चलकर राज्य में ट्रांसजेंडर फेडरेशन शुरू किया. आज, ट्रांसजेंडर फेडरेशन में 15 स्वयं सहायता समूह हैं, जो समुदाय में ट्रांसजेंडरों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए काम करते हैं. इन कमजोर समूहों को स्वास्थ्य और शिक्षा सम्बंधित मदद और परामर्श भी दिया जाता है.&nbsp;</p><p dir="ltr">ट्रांसजेंडर SHG सदस्यों के लिए अपने कौशल विकसित करने और रोज़गार के अवसरों तक पहुंचने के अवसर पैदा करने में सफल रहे हैं. कई समूहों ने सिलाई, ब्यूटी पार्लर और क्राफ्ट इकाइयां स्थापित की. SHG ने सदस्यों को आर्थिक आज़ादी हासिल करने में मदद की, जिससे उनके प्रति हो रहे भेदभाव और दुर्व्यवहार को कम करने में मदद मिली. SHG की जागरूकता फैलाकर कई और ट्रांसजेंडरों को स्वयं सहायता समूहों में संगठित करने की ज़रुरत है क्योकि आर्थिक आज़ादी उन्हें समाज में सामान दर्जा और बेहतर ज़िन्दगी पा लेने में मदद कर सकते हैं.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Fri, 31 Mar 2023 12:46:45 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/transgenders-form-shg-to-get-dignified-livelihood]]></guid><category><![CDATA[आधी आबादी]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/o9l1RFiJbYahAFDotrot.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/o9l1RFiJbYahAFDotrot.jpg"/></item><item><title><![CDATA[गेट्स फाउंडेशन की सुज़न बर्न्स मिलीं बिहार की SHG दीदियों से ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/susan-byrnes-of-gates-foundation-appreciates-shgs-of-bihar</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/LzmLOJpWeG3Zq58VUSRr.jpg"><p dir="ltr"><iframe style="width: 1103px; height: 618px;" src="https://www.youtube.com/embed/4SyIkAdbiMQ" width="1103" height="618" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p dir="ltr">उम्मीद से भरपूर कहानियों की खोज सुज़न बर्न्स को बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ले आई.  सुज़न, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन में मुख्य संचार अधिकारी (चीफ़ कम्युनिकेशन ऑफिसर) के पद पर काम कर रही हैं और दुनियाभर में महिला सशक्तिकरण की सशक्त आवाज़ है. अपने इस कार्यकाल में वो विश्व की सभी बड़े प्लेटफॉर्म्स से महिला आज़ादी की बात कर चुकी है साथ ही इस मुद्दे को हर देश की नेताओं तक भी पंहुचा चुकी है. सुज़न के भरतीय पार्टनर सेंटर फॉर केटलाइज़िंग चेंज (सी3) उन्हें मुज़फ़्फ़रपुर में महिला पंचायत नेताओं और जीविका स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों से मिलाने ले गए. </p>
<p dir="ltr">सुज़न वहां साझा शक्ति केंद्र पहुंची. ये एक ऐसा सेंटर है जो लैंगिक समानता के मुद्दों को समझने में मदद करता है और हिंसा, भेदभाव और  सुरक्षा की मुद्दों परकाम करता है. सरकार द्वारा समर्थित, ये स्वयं सहायता समूह अब राज्य भर में करीब लाखों महिलाओं तक पहुंच रहे हैं. सुज़न ने बताया ये आंकड़ा उनके होम टाउन वाशिंगटन की आबादी से लगभग दोगुनी है. </p>
<p dir="ltr">मीनापुर, बिहार में सुज़न पूनम देवी से मिली, जो लड़कियों को आगे पढ़ने में मदद करती है. अगर उसके समुदाय की कोई लड़की उच्च शिक्षा जारी रखने में रुचि दिखाती है, तो पूनम उसके माता-पिता को मनाने का काम करती है. उनके पास सफलता का एक मजबूत रिकॉर्ड है - न केवल स्कूल में नामांकन बढ़ाने में बल्कि समुदाय में महिलाओं के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करने में भी वो काम कर रही है. </p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Wed, 29 Mar 2023 16:13:23 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/susan-byrnes-of-gates-foundation-appreciates-shgs-of-bihar]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/LzmLOJpWeG3Zq58VUSRr.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/LzmLOJpWeG3Zq58VUSRr.jpg"/></item><item><title><![CDATA[सुज़न को किया बिहार के SHG ने इम्प्रेस ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/duniyadari/susan-from-bill-melinda-gates-foundation-visited-shg-women-in-bihar</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uabbc4YzLKExRePKxrNj.jpg"><p dir="ltr">उम्मीद से भरपूर कहानियां हर जगह हैं.  हम सब इन कहानियों की तलाश में रहते हैं क्योकि ये हमे मुसीबतों से लड़ने का होंसला देती हैं.  ऐसी ही कहानियों की खोज सुज़न बर्न्स को बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ले आई.  सुज़न, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन में मुख्य संचार अधिकारी ( चीफ़ कम्युनिकेशन ऑफिसर) के पद पर काम कर रही हैं और दुनियाभर में महिला सशक्तिकरण की सशक्त आवाज़ है. अपने इस कार्यकाल में वो विश्व की सभी बड़े प्लेटफॉर्म्स से महिला आज़ादी की बात कर चुकी है साथ ही इस मुद्दे को हर देश की नेताओं तक भी पंहुचा चुकी है. सुज़न के भरतीय पार्टनर सेंटर फॉर केटलाइज़िंग चेंज (सी3) उन्हें मुज़फ़्फ़रपुर में महिला पंचायत नेताओं और जीविका स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों से मिलाने ले गए. </p>
<p dir="ltr">सुज़न वहां साझा शक्ति केंद्र पहुंची. ये एक ऐसा सेंटर है जो लैंगिक समानता के मुद्दों को समझने में मदद करता है और हिंसा, भेदभाव और  सुरक्षा की मुद्दों परकाम करता है. सरकार द्वारा समर्थित, ये स्वयं सहायता समूह अब राज्य भर में करीब लाखों महिलाओं तक पहुंच रहे हैं. सुज़न ने बताया ये आंकड़ा उनके होम टाउन वाशिंगटन की आबादी से लगभग दोगुनी है. </p>
<p dir="ltr">मीनापुर, बिहार में सुज़न पूनम देवी से मिली, जो लड़कियों को आगे पढ़ने में मदद करती है. अगर उसके समुदाय की कोई लड़की उच्च शिक्षा जारी रखने में रुचि दिखाती है, तो पूनम उसके माता-पिता को मनाने का काम करती है. उनके पास सफलता का एक मजबूत रिकॉर्ड है - न केवल स्कूल में नामांकन बढ़ाने में बल्कि समुदाय में महिलाओं के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करने में भी वो काम कर रही है. </p>
<p dir="ltr">ये भारत भर की उन 8 करोड़ महिलाओं में से केवल दो हैं जिन्होंने इन स्वयं सहायता समूहों में भाग लेकर समाज में बदलाव के पहल की. इन समूहों से जुड़कर इन महिलाओ को पहचान, एक दुसरे का साथ और हिम्मत मिली. सुज़न इन महिलाओं और स्वयं सहायता समूह के कॉन्सेप्ट से काफ़ी प्राभावित हुई. </p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Wed, 29 Mar 2023 12:29:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/duniyadari/susan-from-bill-melinda-gates-foundation-visited-shg-women-in-bihar]]></guid><category><![CDATA[दुनियादारी]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uabbc4YzLKExRePKxrNj.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uabbc4YzLKExRePKxrNj.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SHG दीदियों ने स्नेचर्स को सिखाया सबक ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-taught-a-lesson-to-bag-snatchers-in-aurangabad-bihar</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vapqGZd8HLTW5PjyZ2Cz.JPG"><p dir="ltr">स्वसहायता समूह की दीदियों की मेहनत और उनके हुनर की कहानियां तो बहुत सुनी होंगी. पर आज उनकी बहादुरी की कहानी भी सुन लीजिये. सीएम गंगटी की रहने वाली शिलांती देवी और रेणु देवी स्वसहायता समूह चलाती हैं. दोनों ने गोह में पंजाब नेशनल बैंक से समूह के 40 हज़ार रुपए निकाले. वे रुपए एक थैले में रखकर लौटने लगीं. तभी रास्ते में दो महिलाओं ने उनका थैला काट लिया. चोरी की भनक लगते ही शिलांती और रेणु आरोपी महिलाओं से भिड़ गईं और उन्हें जमकर सबक सिखाया. उन्हें सड़क पर पटक दिया और फिर लोगों की मदद से उन्हें पुलिस के हवाले किया. मामला गोह थाना एरिया का है.</p><p dir="ltr">मौके पर मौजूद आसपास के लोगों ने दोनों SHG दीदियों का साथ दिया और दोनो स्नैचर्स को पकड़ लिया. मौके पर पुलिस के पहुंचने पर लोगों ने दोनों स्नैचर्स को पुलिस को सौंप दिया. पकड़ी गई दोनो स्नैचर्स रामपति बाई और अर्चना सलोदिया मध्य प्रदेश के रामगढ़ जिले से हैं. आरोपी महिलाएं घुमंतु जाति से हैं जिनके गिरोह ने गोह के पास डेरा डाला हुआ है. FIR दर्ज कर दोनों महिलाओं से पूछताछ जारी है. पूछताछ से चोरी, छिनैती, पॉकेटमारी और लूट की कई घटनाओं का खुलासा होने की संभावना है. पूछताछ के बाद दोनो को जेल भेज दिया जाएगा. चाहे बात मेहनत की हो, सूझ-बूझ की हो या फिर बहादुरी की, स्वसहायता समूह की दीदियां हर परिस्थिति में अपना कमाल दिखाती हैं.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 17 Mar 2023 17:56:30 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-taught-a-lesson-to-bag-snatchers-in-aurangabad-bihar]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vapqGZd8HLTW5PjyZ2Cz.JPG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vapqGZd8HLTW5PjyZ2Cz.JPG"/></item><item><title><![CDATA[काम करत करत हमरा सब याद भगैलेछ ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-in-bihar</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/HpCb2SDMJ5MSMNHVEW2a.jpeg"><p>“बाबूजी का आर्थिक स्थिति अच्छा नहीं था, ऊ बड़ी मोसकिल से हम भाई बहन को दसवीं तक पढाये. हमारा आगे पढ़ने का बहुत मन था पर बाबूजी के पास पैसा नहीं होने के कारण हम मन मार के घर दुआर संभालने  लगे. एक दिन एक जीविका दीदी हमारे चोरौत गांव आयीं और बोलीं की हमको भी जीविका समूह से जुड़ना चाहिए. पहले तो बाबूजी को यकीन नहीं हुआ, ऊ सोचे ई औरत हम लोग को मूरख बना रही है, हमको ठगने आई है. हमको ऊ दीदी का बात में दम लग रहा था पर हिम्मत नहीं हो रहा था कि बाऊजी से कैसे बोलें क्योंकि बाऊजी तो उन पर बहुत भड़के हुए थे. पड़ोस के गौतम भैया हमारे बगले में खड़े थे, हम उनको इशारा किए कि ए भैया बाबू जी के तनिक समझा दिऔ. भैया बाऊजी से बोले, चच्चा तनिक रुक जाऊ, हमरा कनिक बात करे दिया. भैया उनसे घंटा दू घंटा बात किए. हम भी उनके बगले मैं बैठकर पूरा बात बड़ी ध्यान से सुने. फिर हम दूनों को भरोसा हो गया की ऊ कोई फर्जी औरत नहीं है बल्कि असली है और जीविका समूह पूरे बिहार में बहुत अच्छा काम कर रहा है. भैया बाबूजी को समझाए-बुझाए कि हमको भी इस समूह से जुड़ना चाहिए. बाबूजी भैया को बहुत मानते हैं, बोले गौतम तुम कह रहे हो तो सब ठीके होगा. उस दिन रक्षाबंधन था, रक्षाबंधन पर भैया की तरफ से ई एक बड़का तोहफा था हमारे लिए.आज हम जीविका समूह के कारण ही अपने पैर पर खड़ा हैं आउर बाबूजी का भी बोझ कम कर पा रहे हैं.” यह बात बिहार के सीतामणि जिले के गांव चोरौत की अनुपम बड़े फक्र से बताती हैं.वह बिहार कि प्रचलित मैथली भाषा में अपनी बात सहज कहती है। उसे हिंदी से ज्यादा अच्छी मैथली आती और उत्साह में वह एक सांस में ये सब कहती है।     </p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/t69fHdQ80hySBChNvrvr.jpeg" alt="bihar"></p>
<p><em>समूह की मीटिंग करते हुए  (Image Credits: Ravivar Vichar)</em></p>
<p>आज अनुपम को लोग जीविका दीदी के नाम से सिर्फ उसके गांव  में ही नहीं जानते बल्कि दूर दराज के गांवों  में भी पहचानने लगे हैं.अनुपम कहती हैं “शुरू- शुरू में तो हमको बहुत शरम आता था. लोग बड़ा अचरज से देखते थे कि ई औरत झोला लेकर रोज़ रोज़ कहां जाती है. समूह बनाना इतना आसान नहीं था. लोग भरोसे नहीं करते थे. बड़ा मोसकिल से एक महीना में अपना जीवका समूह बनाने के लिए दस औरतों को जुटा पाए. हम रोज़ सबेरे घर का कामकाज जल्दी निपटाकर निकल जाते थे. दुआर-दुआर घूमते थे, औरत लोगों को समझाते थे. ऊ पहले तो हां  कहती थी, पर बाद में पलटी मार देती थी. शुरू में तो बहुत दिक्कत आया, लगा कि ई काम हमसे नहीं हो पायेगा, पर हम हिम्मत नहीं हारे. भिड़े रहे तब जाके हमारा ‘महालक्ष्मी जीविका समूह’ बन पाया.’ अनुपम आज कई जीविका समूहों की क्लस्टर मैनेजर यानि सीएम हैं.</p>
<p>केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को गरीबी रेखा से ऊपर लाने के लिए,उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए गांव - गांव  में जीविका समूह चलाये जा रहे हैं. इसका उद्देश्य गांवों  की गरीब महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से मज़बूत बनाना है. जीविका योजना की शुरुआत बिहार में 2007 में विश्व बैंक की मदद से हुई और 2009 आते आते पूरे बिहार में इस योजना को लागू कर दिया गया. </p>
<p>अनुपम कहती हैं कि इस “जीविका” से ही मेरे साथ साथ बहुत सी महिलाओं की ज़िन्दगी बदली है. वो औरतें जो पहले कभी अपने घर की चौखट लांघ कर बाहर तक नहीं निकली वो आज खुद बैंक, बाज़ार और समूह के कार्यालय जाती हैं. सैकड़ों लोगों के बीच अपनी बात रखती हैं, बैठक करवाती हैं. जिनके पास एक धुर जमीन नहीं थी आज वो महिलाएं “जीविका” से कम ब्याज पर कर्ज लेकर पक्के घर बना रही हैं. ये महिलाएं अगरबत्ती, सिलाई, कढा़ई और मिथिला पेंटिंग के ज़रिये महीने के 3000 रुपये तक कमा लेती हैं. </p>
<p>अनुपम के समूह की एक दीदी कहती है कि “हम ज्यादा पढ़ा लिखा नईखे, पर काम करत करत सब याद हो गल बा कि एक समूह में 10 महिला रहेली,10 समूह जोड़कर एक ग्राम संगठन बनेला, और 20 ग्राम संगठन के जोड़के एक क्लस्टर बनेला.</p>
<p><img style="width: 262px; height: 348px;" src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/CQKPxCreOFkKe9CMZmgC.jpeg" alt="bihar shg"></p>
<p><em>समूह की मीटिंग करते हुए  (Image Credits: Ravivar Vichar)</em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">आशीष रंजन</dc:creator><pubDate>Sat, 25 Feb 2023 15:46:15 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-in-bihar]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/HpCb2SDMJ5MSMNHVEW2a.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/HpCb2SDMJ5MSMNHVEW2a.jpeg"/></item></channel></rss>