<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/bil-endd-melinddaa-getts-phaaunddeshn</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/bil-endd-melinddaa-getts-phaaunddeshn" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 11 Apr 2023 18:09:13 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[सेफ मदरहुड को बढ़ावा दे रहे SHG ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/shgs-can-contribute-in-promoting-safe-motherhood</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/D3GBsTyvZV16I5t2dVnB.jpg"><p>भारत में स्वयं सहायता समूह की शुरुआत 1991 में  माइक्रोफाइनेंस से सीधे जुड़ाव के साथ हुई थी. तब से SHG की संख्या बढ़ती जा रही है. स्वयं सहायता समूह की शुरुआत आर्थिक सशक्तिकरण के लक्ष्य को पाने से हुई. इस SHG मॉडल को 'जीविका' कहा गया, जिसमें स्वास्थ्य को बढ़ावा देने का काम शुरुआत में शामिल नहीं था. निम्न आय वाले समुदायों में SHG ने माताओं और बच्चों की स्वास्थ्य पर काम शुरू किय. <br> इसमें सर्कार के साथ गैर सरकारी संघठन भी साथ आये.  जैसे बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) ने परिवर्तन परियोजना को फंड किया, जिसे गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल (पीसीआई) द्वारा शुरू किया गया .  </p>
<p>परिवर्तन परियोजना ने सामुदायिक स्वास्थ्य, प्रजनन स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण संदेशों को सिखाने के लक्ष्य से गांव के भीतर महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (SHG) को संगठित किया. परियोजना के पहले चार वर्षों में, बिहार के 8 जिलों के 64 ब्लॉकों में 26,514 समूहों के माध्यम से लगभग 400,000 महिलाओं तक पहुंचा गया. हेल्थ ट्रेनर्स इन स्वयं सहायता समूहों का नेतृत्व करते हैं जिन्हें 'सहेली' कहा जाता है. ये सहेलियां बिहार सरकार (जीविका) की निगरानी में काम करती हैं. हेल्थ ट्रेनर्स समूह के सदस्यों को लीडरशिप स्किल विकसित करने में मदद करतीं हैं और महिलाओं को स्तनपान, स्वच्छता, पोषण, सामाजिक समर्थन, और सुरक्षित मातृत्व पर ट्रेनिंग देते हैं.</p>
<p>माधोपुर नौरंगिया की सहेली रानी कुमारी, माताओं को अपनी और अपने बच्चों की देखभाल करना सिखाकर महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती हैं. लेकिन शुरुआत में उन्हें गांव में विरोध का सामना करना पड़ा. परिवहन तक सीमित पहुंच और अविश्वास के माहौल की वजह से गांव की गर्भवती महिलाओं ने पास के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अपनी डिलीवरी कराने से इनकार कर दिया.</p>
<p>रानी गांव की एक गर्भवती महिला जमीला के बारे में बताती है जिन्होंने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने पर कड़ी आपत्ति जताई थी और अस्पताल के बजाय घर पर जन्म देने की ज़िद की. धीरे-धीरे उन्हें सुरक्षित मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य के बारे में समझाया गया, ट्रेनिंग लेने के बाद वे पूरी तरह समझ गई कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं पारंपरिक चिकित्सा से बेहतर है. आज, जमीला महिला स्वयं सहायता समूह की सचिव है और अपने गांव में गर्भवती महिलाओं की देखभाल कर यह सुनिश्चित करती हैं कि हर प्रसव स्वास्थ्य केंद्र में ही हो. </p>
<p>माधोपुर नौरंगिया में चार बच्चों की मां निशा उनके पति की साथ रज़ाइयां और गद्दे बेचने का काम करती है. निशा ने भी शुरू में स्वयं सहायता समूह में बचत का विरोध किया. परिवर्तन स्टाफ ने यह समझाया कि बचत से कैसे आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के साथ-साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुनिश्चित करने में भी मदद मिलती है. समय के साथ, निशा ने जल्द ही बचत की शक्ति को समझ लिया और समूह में मिली सीख को अपनी ज़िंदगी में अपनाया. निशा ने बचत कर 25,000 रुपये का लोन लिया. इस लोन से अपने पति के साथ रजाई और गद्दे के व्यवसाय को बढ़ाया और समय पर रीपेमेंट कर दिया. </p>
<p>माधोपुर नौरंगिया में महिलाओं की अपनी और अपने नवजात बच्चों की बेहतर देखभाल करने की समझ में काफी बदलाव आया है. एक दूसरे से सीखकर महिलाएं अपने ज्ञान को बांट रही हैं और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दे रही हैं.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Tue, 11 Apr 2023 18:09:13 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/shgs-can-contribute-in-promoting-safe-motherhood]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/D3GBsTyvZV16I5t2dVnB.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/D3GBsTyvZV16I5t2dVnB.jpg"/></item><item><title><![CDATA[सेवाभाव से भरा ‘SEWA’ संस्थान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/sewa-organization-working-for-poor-from-a-century</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yHPaRbzFM7w5nRv4QuDc.jpg"><p dir="ltr">मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर , लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया,  मजरूह सुल्तानपुरी का ये शेर वैसे तो कई लोगों और संस्थाओं पर फिट बैठता है.  लेकिन हमारे देश में एक ऐसा एसोसिएशन है जिसके लिए यह शेर सबसे सही है.  सेल्फ एम्पलॉईड वीमेन  एसोसिएशन (SEWA) एक ऐसा कारवां है जिसकी शुरुआत भी एक छोटे से कदम के साथ हुई थी. जो की आज पुरे देश में आपने कामों के लिए जानी जाती है.  </p>
<p><strong> </strong></p>
<p dir="ltr">गुजरात की अनसूया साराभाई देश के लिए तो कुछ करना ही चाहती थी लेकिन उसमें भी वो भारतीय महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया.   महात्मा गांधी से सलाह और प्रेरणा ले कर उन्होंने साल 1920 में इसकी स्थापना की.  वैसे तो यह अहमदाबाद में टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन (TLA) से शुरू हुआ था, लेकिन इस आर्गेनाईजेशन के पास कोई एम्प्लॉयर न होने के कारण इन्हे 1972 तक ट्रेड यूनियन का दर्जा नहीं दिया गया. 1974 में सेवा ने गरीब महिलाओं को छोटे लोन देने से अपने 'SEWA ' बैंक शुरु किया और इस पहल को 'अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन' (डब्ल्यू एल ओ )   ने 'माइक्रोफाइनेंस आंदोलन' का नाम दिया. इस समुदाय का सदस्य बनने के लिए महिलाओं को मात्रा 10 रुपये का वार्षिक शुल्क देना होता था. इस सामुदायिक प्रयास को भारत का शुरूआती SHG बोले तो गलत नहीं होगा.  </p>
<p><strong><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/xTCOEnderD0Jy4rEvXCN.jpg" alt="Elaben Bhatt"></strong></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: The Hindu </em></span></p>
<p dir="ltr">इलाबेन भट्ट, ने इस प्रयास को नयी ऊचाईयां दी और स्थापना का श्रेय भी उनको जाता है.  उन्हें टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन की महिला विंग का अध्यक्ष बनाया गया और सेवा संस्था को उन्होंने देश का सबसे बड़ा लेबर यूनियन बना दिया. उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण, रेमन मेग्सेसे अवार्ड, इंटरनेशनल लाइवलीहुड अवार्ड व इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार जैसे खिताबों से नवाज़ा गया.</p>
<p><strong> </strong></p>
<p dir="ltr">100 साल से भी ज़्यादा समय से SEWA समुदाय देश के 18 राज्यों में लगातार काम कर रहा है. सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि एशिया के अन्य देश , दक्षिण अफ्रीका और लैटिन अमेरिका तक भी इसकी पहुंच है. इस संस्थान ने अब तक 18 हजार बेघर महिलाओं को रहने की सुविधा प्रदान की, करीब 900 स्लम विस्तारों का सेटलमेंट कराकर गंदी बस्ती में परिवारों को रहने के लिए फ्लैट व घर मुहैया हो चुके है.  बहुत सी महिलाओं को खुद का काम शुरू करने के लिए कर्जा भी दिया गया है. ऐसे न जाने कितने प्रयास और उपलब्धियां आज SEWA के हिस्से में है    </p>
<p><strong> </strong></p>
<p dir="ltr">अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, एचएसबीसी, युनाइटेड स्टेट एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, बैंक ऑफ अमेरिका, जॉर्जिया तकनीकी संस्थान, मिलेनियम एलायंस, ऑक फाउंडेशन, एशियन कॉलिशन हाउसिंग राइट, अर्बललैब शिकागो जैसी कितनी ही संस्थाओं SEWA को मदद करती है. </p>
<p><strong><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/erFXCglw7cojLOnIn3JI.jpg" alt="SEWA organisation "></strong></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits:SEWA Organisation</em></span></p>
<p dir="ltr">जब यह संस्था शुरू की गयी थी तब इसका सीधा सा उद्देश्य था हमारे देश की महिलाओं को सशक्त करना और इस कार्य में ये इलाबेन की ये सोच सफल भी हुई. इतने समय बाद भी यह संस्था पुरे देश में काम कर रही है, उम्मीद है की आगे भी हमे इसकी उपलब्धियां दिखती रहेंगी. </p>
<p dir="ltr">यह संस्थान आज के स्वयं सहायता समूहों के लिए एक बड़ी मिसाल बन सकती है. इलाबेन ने भी जब इसकी शुरुआत की होगी तब उन्हें नहीं  पता होगा की क्या उनकी ये सोच सफल रहेगी ? लेकिन फिर भी उन्होंने 'SEWA ' संस्थान को इस मुकाम तक पहुंचाया. </p>
<p><strong> </strong></p>
<p dir="ltr">आज के समय में जहां हर काम को आसानी से किया जा सकता है, स्वयं सहायता समूहों के लिए कोई भी मुकाम हासिल करनामुमकिन है. आज की महिलाएं किसी से कम नहीं, ये बहुत बार साबित कर चुकी है, और अगर वो 'SEWA ' आर्गेनाईजेशन जैसी सोच लेकर अपने स्वयंसहायता समूह को आगे बढ़ाएंगी तो देश की हर महिला को सशक्त बनाने से कोई नहो रोक सकता.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Fri, 31 Mar 2023 14:38:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/sewa-organization-working-for-poor-from-a-century]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yHPaRbzFM7w5nRv4QuDc.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yHPaRbzFM7w5nRv4QuDc.jpg"/></item><item><title><![CDATA[सुज़न को किया बिहार के SHG ने इम्प्रेस ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/duniyadari/susan-from-bill-melinda-gates-foundation-visited-shg-women-in-bihar</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uabbc4YzLKExRePKxrNj.jpg"><p dir="ltr">उम्मीद से भरपूर कहानियां हर जगह हैं.  हम सब इन कहानियों की तलाश में रहते हैं क्योकि ये हमे मुसीबतों से लड़ने का होंसला देती हैं.  ऐसी ही कहानियों की खोज सुज़न बर्न्स को बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ले आई.  सुज़न, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन में मुख्य संचार अधिकारी ( चीफ़ कम्युनिकेशन ऑफिसर) के पद पर काम कर रही हैं और दुनियाभर में महिला सशक्तिकरण की सशक्त आवाज़ है. अपने इस कार्यकाल में वो विश्व की सभी बड़े प्लेटफॉर्म्स से महिला आज़ादी की बात कर चुकी है साथ ही इस मुद्दे को हर देश की नेताओं तक भी पंहुचा चुकी है. सुज़न के भरतीय पार्टनर सेंटर फॉर केटलाइज़िंग चेंज (सी3) उन्हें मुज़फ़्फ़रपुर में महिला पंचायत नेताओं और जीविका स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों से मिलाने ले गए. </p>
<p dir="ltr">सुज़न वहां साझा शक्ति केंद्र पहुंची. ये एक ऐसा सेंटर है जो लैंगिक समानता के मुद्दों को समझने में मदद करता है और हिंसा, भेदभाव और  सुरक्षा की मुद्दों परकाम करता है. सरकार द्वारा समर्थित, ये स्वयं सहायता समूह अब राज्य भर में करीब लाखों महिलाओं तक पहुंच रहे हैं. सुज़न ने बताया ये आंकड़ा उनके होम टाउन वाशिंगटन की आबादी से लगभग दोगुनी है. </p>
<p dir="ltr">मीनापुर, बिहार में सुज़न पूनम देवी से मिली, जो लड़कियों को आगे पढ़ने में मदद करती है. अगर उसके समुदाय की कोई लड़की उच्च शिक्षा जारी रखने में रुचि दिखाती है, तो पूनम उसके माता-पिता को मनाने का काम करती है. उनके पास सफलता का एक मजबूत रिकॉर्ड है - न केवल स्कूल में नामांकन बढ़ाने में बल्कि समुदाय में महिलाओं के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करने में भी वो काम कर रही है. </p>
<p dir="ltr">ये भारत भर की उन 8 करोड़ महिलाओं में से केवल दो हैं जिन्होंने इन स्वयं सहायता समूहों में भाग लेकर समाज में बदलाव के पहल की. इन समूहों से जुड़कर इन महिलाओ को पहचान, एक दुसरे का साथ और हिम्मत मिली. सुज़न इन महिलाओं और स्वयं सहायता समूह के कॉन्सेप्ट से काफ़ी प्राभावित हुई. </p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Wed, 29 Mar 2023 12:29:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/duniyadari/susan-from-bill-melinda-gates-foundation-visited-shg-women-in-bihar]]></guid><category><![CDATA[दुनियादारी]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uabbc4YzLKExRePKxrNj.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/uabbc4YzLKExRePKxrNj.jpg"/></item></channel></rss>