<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ Bill &amp; Melinda Gates Foundation]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/bill-melinda-gates-foundation</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/bill-melinda-gates-foundation" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 09 Jun 2023 14:07:37 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[वर्ल्ड बैंक के साथ NRLM के लक्ष्य हो रहे पूरे ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/world-bank-assisted-projects-help-nrlm-achieve-the-target-of-rural-empowerment</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/c4v3KtcmgEgi7N93HM4y.jpg"><p>ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) ने विश्व बैंक (World Bank) और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (Bill & Melinda Gates Foundation) के साथ <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/rural-ministry-plans-to-increase-shg-to-10-crore-by-2024"> ग्रामीण विकास पर दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया </a>- 'इवॉल्विंग इंडिया: री-इमेजिनिंग रूरल डेवलपमेंट फॉर शेयर्ड प्रॉस्पेरिटी' (‘Evolving India: Re-imagining Rural Development for Shared Prosperity’). विश्व बैंक एक लम्बे अरसे से भारतीय ग्रामीण विकास मंत्रालय का सहयोगी बना रहा है. वर्ल्ड बैंक ने भारत का, निवेश, साझेदारी विकास, डाटा इकट्ठा करने और अहम मुद्दों पर समझ बढ़ाने में केंद्र और राज्य सरकारों का समर्थन किया है. </p>
<p>विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर अगस्टे तानो कौमे (World Bank Country Director, India Shri Auguste Tano Koume) ने कहा कि भारत सरकार और विश्व बैंक के बीच साझेदारी से भारत के कई राज्यों में बड़े पैमाने पर बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि उभरता हुआ भारत ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका के अवसरों की खोज में है. ग्रामीण परिवेश में आजीविका की खोज NRLM द्वारा गठित स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) से जुड़कर पूरी हो रही हैं. </p>
<p>वर्ल्ड बैंक ने भारत के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका परियोजना (NRLP), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) समेत बिहार ग्रामीण आजीविका परियोजना (BRLP), आंध्र प्रदेश ग्रामीण समावेशी विकास परियोजना (APRIGP), और तमिलनाडु ग्रामीण परिवर्तन परियोजना (TNRTP) जैसे प्रोजेक्ट्स का समर्थन किया है. विश्व बैंक द्वारा समर्थित इन प्रोजेक्ट्स का लक्ष्य  भारत में ग्रामीण समुदायों की आजीविका अवसरों को बढ़ाना है. वर्ल्ड बैंक के द्वारा चलाये जा रहे प्रोजेक्ट्स के ज़रिये स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को क्षमता निर्माण, बैंक लिंकेज, कौशल विकास, समेत मैनेजमेंट ट्रेनिंग भी दी जा रही है.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 09 Jun 2023 14:07:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/world-bank-assisted-projects-help-nrlm-achieve-the-target-of-rural-empowerment]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/c4v3KtcmgEgi7N93HM4y.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/c4v3KtcmgEgi7N93HM4y.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SHG मुहिम में 1 करोड़ परिवार होंगे शामिल ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/rural-ministry-plans-to-increase-shg-to-10-crore-by-2024</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zabyGfTIL9yH1xZzTFsj.jpg"><p><strong>ग्रामीण महिलाएं </strong>(rural women)<strong> आर्थिक क्रांति</strong> (financial revolution) की अगुवाई कर रही हैं. ये ताकत उन्हें <strong>स्वयं सहायता समूह</strong> (Self Help Group) से मिली. इनकी सफलता को देखते हुए, सरकार और महिलाओं को समूह (SHG) से जोड़ने की प्लानिंग कर रही है. <strong>राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन</strong> (NRLM) को <strong>ग्रामीण विकास मंत्रालय</strong> (Ministry of Rural Development) ने, ग्रामीण परिवारों के <strong>आर्थिक बदलाव और समृद्धि </strong>हासिल करने का सबसे कारगर ज़रिया माना. इस मिशन से आ रहे बदलावों और प्रगति को देखते हुए सरकार की अगली कोशिश इस दायरे को बढ़ाने की होगी. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/uTqxUKXpQNcSyDiFv6Sc.jpg" alt="10 crore SHG"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Jagran</em></span></p>
<p>देशभर में <strong>नौ करोड़ से ज़्यादा ग्रामीण परिवेश की महिलाएं</strong> स्वयं सहायता समूहों (Self Help Group) से जुड़ी हैं. इनके <strong>आर्थिक बदलाव</strong> को देखते हुए, सरकार <strong>2024 से पहले इस संख्या को दस करोड़ (10 Crore) तक पहुंचाना</strong> चाहती है. जिसके बाद स्वयं सहायता समूहों के ज़रिये <strong>दस करोड़ ग्रामीण परिवार</strong> इस योजना का लाभ ले सकेंगे. इसी लक्ष्य के साथ<strong> 'देश की समृद्धि में गांवों की भागीदारी' </strong>बढ़ाने पर <strong>नई दिल्ली </strong>में <strong>दो दिन का सम्मेलन</strong> शुरू किया गया. <strong>विश्व बैंक</strong> (World Bank) और <strong>बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन</strong> (Bill & Melinda Gates Foundation) के सहयोग से सम्मलेन का  आयोजन किया गया. इवेंट का शुभारंभ <strong>केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह</strong> (Giriraj Singh) ने किया. </p>
<p>ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की <strong>आजीविका में 19% और बचत में 28% की बढ़ोतरी </strong>हुई है. मंत्रालय और कार्यक्रम से जुड़े <strong>अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े.</strong> गिरिराज सिंह ने उन्हें दस करोड़ पात्र महिलाओं को 2024 से पहले, स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का लक्ष्य दिया. देश की समृद्धि में गांवों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए नै नीतियां बनाई जायेंगी. </p>
<p>केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि समूह की महिलाओं से देश की अर्थव्यवस्था को पांच ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी. आने वाले दिनों में, महिला स्वयं सहायता समूह भारत में बदलाव का अहम ज़रिया बनेंगी.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 08 Jun 2023 17:46:16 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/rural-ministry-plans-to-increase-shg-to-10-crore-by-2024]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zabyGfTIL9yH1xZzTFsj.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zabyGfTIL9yH1xZzTFsj.jpg"/></item><item><title><![CDATA[जेंडर इक्वलिटी प्रोग्राम हर राज्य की ज़रुरत ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/gender-equality-project-of-bill-and-melinda-gates-foundation-support-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/QEfw9EljZ6zkYQvKxdze.jpg"><p>जब महिलाएं और लड़कियां अपने स्वयं के स्वास्थ्य (health) और भलाई को प्राथमिकता देती हैं, खुद पैसे कमाती हैं, और समाज की लीडर बनती हैं, तो फायदा पूरे समाज का होता है. यही फायदा पहुंचाने के लक्ष्य से बिल एन्ड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (Bill & Melinda Gates Foundation) ने जेंडर इक्वलिटी (Gender Equality) या लैंगिक समानता प्रोग्राम शुरू किया. फाउंडेशन का लैंगिक समानता डिवीज़न (Gender Equality) ऐसी बाधाओं को पहचानने और दूर करने में मदद करता है जिससे महिलाएं और लड़कियां अपने शारीरिक, आर्थिक, पारिवारिक, या सामाजिक फैसले खुद नहीं ले पाती. लैंगिक समानता प्रोग्राम लैंगिक-समान दुनिया की ओर प्रगति में तेजी लाने के लिए काम करता है. </p>
<p>महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और निर्णय लेने की शक्ति को आगे बढ़ाना, नेतृत्व की भूमिकाओं तक महिलाओं की पहुंच बढ़ाना, महिलाओं के स्वास्थ्य और शारीरिक स्वायत्तता में सुधार और सुरक्षा करना, सकारात्मक सामाजिक मानदंडों (positive social standard) का समर्थन करना और विस्तार करना, और लगातार लैंगिक असमानताओं (Gender Inequalities) को दूर करने के लिए डेटा इकट्ठा करना इस प्रोजेक्ट के कुछ मुख्य उद्देश्य हैं.</p>
<p>भारतीय राज्य बिहार में, बिल एन्ड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने देश का पहला जिला-स्तरीय लिंग डैशबोर्ड बनाने में मदद की है. इससे अर्थव्यवस्था में महिलाओं और लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने में सहायता मिलेगी. डैशबोर्ड महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की बाधाओं को कम करेगा. सरकार को ज़रूरी डेटा तक पहुंच देगा. महिलाओं की सुरक्षा, नौकरियों तक पहुंच, और आर्थिक सशक्तिकरण (Financial Empowerment) की बाधाओं की पहचान करने में मदद मिल सकेगी. केन्या और इथियोपिया में भी इस तरह के प्रोग्राम शुरू किये जा रहे हैं. नाइजीरिया और युगांडा में भी लैंगिक समानता के प्रोजेक्ट्स बदलाव लाकर कई महिलाओं और लड़कियों को बेहतर कल की उम्मीद दे रहे हैं. </p>
<p>महिलाओं  जीवन के हर चरण में महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य में सुधार करना - बच्चों की उत्तरजीविता दर में वृद्धि के साथ शुरू करना. समाज में लैंगिक समानता लाने के लिए कुछ लक्ष्य रखे गए हैं, जैसे- महिलाओं के आर्थिक अवसर और निर्णय लेने की शक्ति को बढ़ाना, लैंगिक समानता से जुड़े सकारात्मक सामाजिक मानदंडों को मजबूत करना, फीमेल लीडरशिप (Female Leadership) को बढ़ाना, और ऐसा डेटा इकट्ठा करना जिससे समुदाय की ज़रूरतों को पूरा करने वाली योजनएं बनाई जा सके. </p>
<p>आज भारत के हर राज्य में लैंगिक असमानता की, कहीं कम तो कहीं गंभीर परेशानी है. बिल एन्ड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के जेंडर इक्वलिटी प्रोग्राम की ज़रुरत हर राज्य में हैं. ये प्रोग्राम उन जगहों के समुदायों के साथ मिलकर डायरेक्ट काम करते हैं जहां बदलाव की ज़रुरत है. ऐसे में समुदाय की भागीदारी होने की वजह से बदलाव जल्दी नज़र आने लगता है और प्रोजेक्ट बंद हो जाने के बाद भी समुदाय की लीडरशिप बनी रहती है.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Fri, 12 May 2023 17:24:11 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/gender-equality-project-of-bill-and-melinda-gates-foundation-support-women]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/QEfw9EljZ6zkYQvKxdze.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/QEfw9EljZ6zkYQvKxdze.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मोबाइल दीदी बोल रहीं है , फोन तो उठाओ ! ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/digital-technology-can-reach-women-through-selfhep-groups</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/fJwmHWd1x2vHLAZqPbg3.jpg"><p>भारत में डिजिटल क्रांति की शुरुआत हो चुकी है. लेकिन भारत में डिजिटल लिट्रेसी को लेकर जेंडर डिवाइड अभी भी बड़ा है. खासकर ग्रामीण भारत में महिलाओं की डिजिटल डिवाइस तक पहुंच बहुत सिमित है. अगर है भी तो वह उतना समय नहीं दे पाती.  </p>
<p>इन सबको लेकर ही बीबीसी मीडिया एक्शन ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से महिलाओं को डिजिटल दुनिया तक पहुंचाने की पहल करी. इस पहल में चैतन्य वाइस (Chaitanya WISE) और प्रदान (PRADAN) ने बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (Bill & Melinda Gates Foundation) ने साथ दिया.</p>
<p>भारत में, पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की मोबाइल इंटरनेट उपयोग करने की संभावना 41% कम है. इस तरह डिजिटल और टेक्नोलॉजी के फायदे उन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. 8.5 करोड़ से अधिक महिला सदस्यों के साथ, सेल्फ हेल्प ग्रुप (Self Help Group) बड़े पैमाने पर महिलाओं तक डिजिटल क्रांति को पहुंचा सकते हैं.      </p>
<p>फोन तो उठाओ ! ऐसा ही एक प्रोजेक्ट है जिसमें डिजिटल साक्षरता को ऑडियो वीडियो के माध्यम से SHG की मीटिंग में सिखाया जाता है. साथ ही इसमें समूहों को प्रशिक्षण और डेमो दिए जाते हैं. स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए डिजिटल कौशल प्रशिक्षण वो शुरुआत है जिससे उनके सशक्तिकरण की राह मजबूत होगी. फोन तो उठाओ ! जैसे प्रोजेक्ट, महिलाओं में मोबाइल फोन के उपयोग और उसको अपने पास रखने को ज़रूरी बताता है. साथ ही इस तर्क का मुकाबला भी करता है कि महिलाओं को मोबाइल फोन (विशेष रूप से स्मार्टफोन) की आवश्यकता नहीं है और यह महिलाओं के समय की बर्बादी है.  </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/qdrzMHU6d85MshADfDC4.jpg" alt="digital divide"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits:Telegraph India</em></span></p>
<p>मोबाइल सखी वह पहला कदम था जिसके ज़रिये टेक्नोलॉजी को पहुंचाया गया स्वयं सहायता समूहों तक. मोबाइल सखी वो भरोसेमंद साथी बनी जो महिलाओं के उनके अपने घरों और जाने पहचाने माहौल में ट्रेनिंग दे रही है. समुदाय की महिलाओं के रूप में, मोबाइल सखियां वो  रोल मॉडल बनी जो प्रासंगिक तौर पर सुलभ मार्गदर्शन और सहायता प्रदान करने में सक्षम है. इस से SHG सदस्यों को आसानी होती है. साथ ही स्थानीय भाषा में सीखना आसान होता है.  </p>
<p>एक काल्पनिक चरित्र, 'खुशी दीदी' बनाया गया जो की डिजिटल तकनीकों का उपयोग Self Help Group की महिलाओं को समझा सके. रोचक अंदाज़ वाला यह काल्पनिक चरित्र, बहुत पसंद किया गया. 'खुशी' को एक स्वयं सहायता समूह सदस्य के रूप में डिजाइन किया गया, जो डिजिटल रूप से साक्षर है और अन्य सदस्यों को मोबाइल फोन का उपयोग करने के लाभों के बारे में सिखा रही है. इसके रिजल्ट को देखते हुए एक दूसरा काल्पनिक चरित्र विकसित किया गया, 'कमला दीदी', जो SHG में एक अनुभवी किसान और कृषि प्रशिक्षक है .</p>
<p>डिजिटल तकनीक के आसपास की बातचीत में अक्सर अंग्रेजी शब्द शामिल होते हैं. इस प्रोजेक्ट में ऐसी शब्दावली का उपयोग किया गया जिसे कम साक्षर, कम आय वाली महिलाएं आसानी से समझें. जैसे वॉयस सर्च को 'बोलकर खोज' के रूप में बेहतर समझाया गया. टेक्नोलॉजी की बहुत कम महिलओं तक पहुंच ने तकनीक के फायदों को सीमित कर दिया. ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां कम साक्षरता या इंटरनेट-सक्षम डिवाइस तक पहुंच की कमी है. डिजिटल सामग्री को व्हाट्सएप चैटबॉट के माध्यम से साझा किया गया और इनबाउंड इंटरएक्टिव वॉयस रिस्पॉन्स सर्विस (आईवीआर) भी उपयोग में लाया गया. इन्हे मोबाइल सखियां, गरीब और ग्रामीण महिलाओं को ऑडियो वीडियो की तरह उन स्वयं सहायता समूह महिलाओं तक पहुंचा सकी, जिनके पास स्मार्टफोन नहीं है या डेटा का खर्च नहीं उठा सकते और जहां मोबाइल इंटरनेट कनेक्टिविटी खराब है.  विश्लेषण से पता चला कि मोबाइल सखियों द्वारा चैटबॉट वीडियो और आईवीआर ऑडियो सामग्री को लगभग समान मात्रा में चलाया गया  जिससे पता चलता है कि दोनों ही महत्वपूर्ण है. कार्यक्रम के डिजाइन यह सुनिश्चित किया गया की आखिरी महिला तक बात और टेक्नोलॉजी (Technology) पहुंचे.  </p>
<p>तकनीक तक पहुंचने के लिए एक बड़ी लड़ाई सामाजिक और व्यावहारिक भी थी. डिजिटल सुरक्षा और धोखाधड़ी ऐसी बाधाएं थी जिन्हें पार करना ज़रूरी था. टेक्नोलॉजी को हर महिला तक पहुंचने के लिए ट्रस्ट बिल्डिंग की गयी और डिजिटल स्पेस में SHG महिलाओं को लाया गया. टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए सशक्तिकरण के साथ आर्थिक आज़ादी के द्वार भी खोले जा सकते हैं. देश दुनिया की रफ़्तार से बराबरी करने में तकनीक की स्पीड से चलना और उसे समझना ज़रूरी है.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रोहन शर्मा</dc:creator><pubDate>Thu, 11 May 2023 17:10:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/digital-technology-can-reach-women-through-selfhep-groups]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/fJwmHWd1x2vHLAZqPbg3.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/fJwmHWd1x2vHLAZqPbg3.jpg"/></item></channel></rss>