<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ BMC]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/bmc</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/bmc" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 22 Jul 2023 12:42:21 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[मुंबई में कोली फूड ट्रक लगाएंगी SHG महिलाएं ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/bmc-is-giving-food-trucks-to-koliwada-shg-women-for-selling-traditional-koli-food</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Jq5ghfRwzBKstX8pJFiQ.jpg"><p><span>'मुंबई', अपने खाने और बारिश के लिए फेमस. बारिश में नरीमन पॉइंट, गेटवे ऑफ़ इंडिया, या चर्चगेट पर&nbsp; खड़े होकर, स्ट्रीट फ़ूड खाने का जो मज़ा है वो और कही नहीं. बस इसीलिए <strong>बृहन्मुम्बई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/women-gets-financial-help-from-bmc-maharashtra-to-start-their-business">BMC</a>) ने कोलाबा, कफ परेड, नरीमन प्वाइंट, चर्चगेट और गेटवे ऑफ इंडिया के ए-वार्ड में फ़ूड ट्रक्स इनस्टॉल करने का फैसला किया</strong> है. मुंबई का ए-वॉर्ड VIP माना जाता है क्यूंकि यहाँ सारे मंत्रालय, विधान भवन, गेटवे ऑफ इंडिया, एशियाटिक लाइब्रेरी, किला क्षेत्र, हॉर्निमन सर्कल, मरीन लाइन्स, कोलाबा और कफ परेड, सभी प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल हैं.</span><b></b></p>
<h2><span>कोलीवाड़ा SHG महिलाएं ए- वॉर्ड में चलाएंगी फ़ूड ट्रक</span></h2>
<p dir="ltr"><span>यह परियोजना <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/mumbai-dabbawala-brand-will-now-collaborate-with-shg-women-for-cooking-home-like-food">मुंबई शहर</a><strong>&nbsp;में कोलीवाड़ा </strong>के सुधार का हिस्सा है. नागरिक अधिकारियों के अनुसार- "<strong>स्थानीय कोली स्वयं सहायता समूह</strong> (SHG) की महिलाओं को तीन ट्रक आवंटित किए जाएंगे जो मुंबईकरों और पर्यटकों के लिए सुरमई, झींगा, केकड़े और जावला, बोम्बिल और तिखल्याके साथ कई <strong>पारंपरिक कोली व्यंजन</strong> तैयार करेंगे." <strong>ट्रकों को बधवार पार्क के पास खड़ा किया जाएगा</strong>. एक अधिकारी ने कहा, ''<em>हमें जिला योजना एवं विकास परिषद (DPDC)से इस&nbsp; काम के लिए बजट मिला है.</em>"&nbsp;&nbsp;</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span>यह ट्रक्स <strong><a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/sheela-powel-with-her-shg-shalom-ooty-is-keeping-the-traditional-embroidery-alive-in-india" rel="dofollow">Self Help Group</a> की महिलाएं</strong> संभालेंगी.<strong> ए-वॉर्ड </strong>में अपने ट्रक्स लगाने से इन महिलाओं की आमदनी तेज़ी से बढ़ाएगी और वे आत्मनिर्भर बन कर अपने परिवार को संभल पाएंगी. यह कार्य <a href="https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/sakshi-kochhar-becomes-youngest-girl-to-become-a-commercial-pilot-in-india">मुंबई</a> के और भी इलाकों में किया जाना चाहिए, ताकि तेज़ी से बदलाव आए.&nbsp;</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sat, 22 Jul 2023 12:42:21 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/bmc-is-giving-food-trucks-to-koliwada-shg-women-for-selling-traditional-koli-food]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Jq5ghfRwzBKstX8pJFiQ.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Jq5ghfRwzBKstX8pJFiQ.jpg"/></item><item><title><![CDATA[बेटियां संवारेगी धरती मां को ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/on-the-occasion-of-world-environment-day-here-is-the-list-of-5-most-influential-women-in-india-who-are-working-for-protecting-environment</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tLmMOhRQWiGQAYicFwHz.jpg"><p dir="ltr">सुबह उठकर पंछियों की मीठी आवाज़, ठंडी और साफ़ हवा, बड़े और घने पेड़, और साफ पर्यावरण- ऐसी ही थी हमारी धरती, आज से कुछ दशक पहले. विकास बढ़ता गया, लोगों के लिए सुविधाएं होती गयी, लेकिन यह सब किस कीमत पर? कीमत बना हमारा पर्यावरण! सुविधाएं और विकास गलत नहीं है, लेकिन जब यह धरती के गले को रोंध कर किया जाए तो जवाबदेह कौन होगा? हर व्यक्ति अपनी रहने की ज़मीन को बढ़ाने के लिए पेड़ काट रहा है. अगर उस व्यक्ति से कहा जाएगा तो उसका जवाब होगा, "मेरे अकेले के पेड़ बचाने से क्या होगा, पूरी दुनिया में यह हो रहा है, मैं पेड़ ना भी काटूं, तब भी फर्क तो नहीं पड़ जाएगा." यही सोच है दुनिया में रहने वाले ज़्यादातर लोगों की, और इसीलिए बदलाव और भी मुश्किल हो रहा है. </p>
<p dir="ltr">हम भले ऐसा सोचते हो, लेकिन इस धरती की सुरक्षा के लिए कुछ फाइटर्स हमेशा तैयार है. वे भी अकेले है, और अकेले ही अपने मिशंस पर निकले है, क्यूंकि वे अच्छे से जानते है, <em>"बूँद बूँद से ही सागर बनता है.</em>" यह है भारत की कुछ महिलाएं, जिन्होंने ठान रखा है- '<em>जिसनें हमें इतने वक़्त से संभाल रखा है, जो हमें रहने के लिए, खाने के लिए, खुश रहने के लिए, हर चीज़ दे रही है, आज जब उसे ज़रूरत है, तो हमें ही आगे आना है!</em>'</p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/8iwppbXZXTUByAJEqAGL.jpg" alt="Vandana Shiva"></p>
<p dir="ltr"><em><span style="font-size: 8pt;">Image Credits: Youth Ki Awaaz</span></em></p>
<p dir="ltr">सबसे पहला नाम है, <strong>वंदना शिवा</strong>. यह ‘<strong>रिसर्च फाउंडेशन फ़ॉर साइंस, टेक्नोलॉजी, ऐंड नैचुरल रिसोर्स पॉलिसी</strong>’ की निदेशक हैं. देहरादून में स्थित यह संस्था जंगलों की रक्षा, जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण संबंधित मामलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए काम करता है. वंदना ‘<strong>ईको-फ़ेमिनिस्ट</strong>’ हैं. उनका मानना है, पर्यावरण की सुरक्षा कृषि व्यवस्थाओं में महिलाओं को आगे लाकर की जा सकती है. साल 1987 में वंदना ने अपने <strong>NGO ‘नवदान्य’</strong> की स्थापना की, जो जैविक खेती, जैविक विविधता संरक्षण, और किसानों के अधिकारों पर काम करता है. नवदान्य अब तक चावल के लगभग <strong>2000 प्रकारों</strong> के संरक्षण में कामयाब हुआ है और भारत के 22 राज्यों में 122 ‘बीज बैंक’ स्थापित कर चुका है. अपने योगदान के लिए वंदना शिवा को 1993 में ‘राइट लाइवलीहुड’ पुरस्कार से नवाज़ा जा चुका है. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/K8lU7RSvWTPGO2sVwYbD.jpeg" alt="Sunita Naraian"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: India Today</em></span></p>
<p dir="ltr">अगला नाम है, <strong>सुनीता नारायण</strong>. यह ‘<strong>सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट</strong>’ (CSE) की निदेशक होने के साथ ‘डाउन टू अर्थ’ मासिक पत्रिका की संपादक भी हैं. उनका काम ख़ासतौर पर पर्यावरण और मानव विकास के पर केंद्रित है. 1989 में CSE संस्थापक अनिल अग्रवाल के साथ उन्होंने ‘<strong>टुवर्ड्स ग्रीन विलेजेस</strong>’ नाम का शोधपत्र लिखा, जो ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण पर प्रकाश डालता है. 2012 में उन्होंने भारत की सातवीं पर्यावरण रिपोर्ट ‘<strong>एक्सक्रीटा मैटर्स</strong>’ लिखी, जो हमारे शहरों में पानी की कमी और प्रदूषण को समझाती है. सुनीता के हिसाब से शहरीकरण का मतलब सिर्फ़ बड़ी बड़ी इमारतें खड़ी करना नहीं बल्कि पर्यावरण के बारे में जागरूकता फैलाना भी है. साल 2005 में सुनीता नारायण को 'पद्मश्री' से सम्मानित किया गया था और 2016 में <strong>टाइम पत्रिका</strong> ने उन्हें साल के <strong>100 सबसे इन्फ्लुएंशियल व्यक्तियों की लिस्ट</strong> में भी शामिल किया.</p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Ytyv16XllFXV202Iitjq.jpg" alt="anumita roy chowdhury"></p>
<p dir="ltr"><em><span style="font-size: 8pt;">Image Credits: Mint</span></em></p>
<p dir="ltr">तीसरा नाम है, <strong>अनुमिता रॉय चौधरी</strong>. CSE के Research and Advocacy Department की निदेशक अनुमिता का कार्य मैंतनबल विकास और शहरीकरण पर केंद्रित है. साल 1996 में ‘<strong>राइट टू क्लीन एयर</strong>’ अभियान के नेतृत्व में उनकी अहम भूमिका रही है, जिसका लक्ष्य दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाने की ओर है. इसी अभियान के चलते आज दिल्ली के सभी सार्वजनिक वाहन डीज़ल की जगह कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) पर चलते हैं. अनुमिता हवा को प्रदूषण-मुक्त करने की कई सरकारी योजनाओं में शामिल रहीं हैं. वायुमंडल सुरक्षा पर <strong>राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सभाओं</strong> में एक सदस्य और सलाहकार के रूप में उनका योगदान मूल्यवान रहा. साल 2017 में अमेरिका के <strong>कैलिफोर्निया की सरकार</strong> की तरफ़ से उन्हें ‘हेगेन स्मिट क्लीन एयर अवॉर्ड’ से नवाज़ा गया. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/lS2XBUyp0WHLW2tzX8lN.jpg" alt="Sumaira Abdul Ali"></p>
<p dir="ltr"><em><span style="font-size: 8pt;">Image Credits:Feminism In India</span></em></p>
<p dir="ltr">चौथा नाम है, <strong>सुमायरा अब्दुल अली</strong>. वे <strong>‘आवाज़ फाउंडेशन’ की संस्थाप</strong>क है, जो ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर काम करता है. इस क्षेत्र में उनके कोशिशों और सफलताओं की वजह से उनका नाम ‘<strong>भारत की ध्वनि मंत्री</strong>’ पड़ गया है. साल 2003 में उन्होंने मुंबई में साइलेंस ज़ोन के निर्माण के लिए मुंबई उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दर्ज की थी. साल 2009 में ही न्यायालय ने बृहनमुंबई महानगरपालिका (BMC) को अस्पतालों, धार्मिक स्थलों, और शैक्षणिक संस्थाओं से सौ मीटर की दूरी पर 2237 इलाकों को ‘साइलेंस ज़ोन’ घोषित करने का आदेश दिया. साल 2007 में अपनी संस्था के साथ उन्होंने एक और याचिका पेश की जिसमें उन्होंने ध्वनि प्रदूषण के नियम लागू करने और <strong>मुंबई शहर का ध्वनि नक्शा </strong>बनवाने की भी मांग की. साल 2016 में न्यायालय ने इन सभी मांगों की पूर्ति का आदेश दिया. साथ ही मुंबई के अलावा महाराष्ट्र के सभी <strong>शहरों में साउंड स्टडीज़ और मैपिंग</strong> को अगले 25 वर्षों तक सरकारी विकास योजना में शामिल करने का भी आदेश दिया. सुमायरा को अपने काम के लिए 'मदर टेरेसा पुरस्कार' मिला है.</p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/JfPCr13Ygiu6W78XV4vn.jpg" alt="Krithi Karanth "></p>
<p dir="ltr"><em><span style="font-size: 8pt;">Image Credits: Adda 247</span></em></p>
<p dir="ltr">लास्ट बट नॉट लीस्ट,अगला नाम है, <strong>डॉ. कृति करंथ</strong>. कृति <strong>अमेरिका के ड्यूक यूनिवर्सिटी से एनवायर्नमेंटल साइंस एंड पॉलिसी में PhD</strong> हैं. वे 20 साल से भारत में वन्य जीवन संरक्षण पर शोध कर रहीं हैं, और बेंगलुरु में स्थित ‘सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ स्टडीज़’ की निदेशक हैं. डॉ. कृति ने एक्सटिंक्शन, मैन-फारेस्ट रिलेशनशिप, और इफेक्ट्स ऑफ़ फारेस्ट टूरिज्म पर बहुत सी रिसर्च की है. वे वन्य जीवन पर <strong>90 निबंध और एक बाल पुस्तक</strong> लिख चुकीं हैं. वे लगभग 120 वैज्ञानिकों को <strong>वाइल्डलाइफ स्टडीज़</strong> पर प्रशिक्षित कर रही हैं. साल 2019 में उन्हें अपने कार्य के लिए ‘विमेन इन डिस्कवरी’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.</p>
<p>यह सारी महिलाएं पर्यावरण और आम जीवन को जोड़कर जो कार्य कर रहीं  है, वह सराहनीय है. यह महिलाएं साबित कर रहीं है कि व्यक्ति काम अकेला ही शुरू करता है, उसके साथ पूरा समाज अपने आप जुड़ता जाता है. अगर बात करें <strong>स्वयं सहायता समूह </strong>(SHG) महिलाओं की, वे भी बहुत समय से ऐसे उत्पाद, और प्रक्रियाएं तैयार कर रहीं है, जो पर्यावरण के लिए बिल्कुल नुक्सान दायक नहीं है. चाहे self help group की महिलाएं हो, या इन मुकामों पर पहुंची महिलाएं, वे जानती है अगर पर्यावरण सुरक्षित है तो हम भी खुशहाल है, और अगर पर्यावरण प्रदूषित है तो हमारा कोई अस्तित्व ही नहीं रहेगा. आज '<strong>वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे</strong>' पर हर व्यक्ति को यह प्रण लेना चाहिए कि अपनी धरती को हर तरह से बचाएंगे, और अपनी आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित रखेंगे.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Mon, 05 Jun 2023 13:06:45 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/on-the-occasion-of-world-environment-day-here-is-the-list-of-5-most-influential-women-in-india-who-are-working-for-protecting-environment]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tLmMOhRQWiGQAYicFwHz.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tLmMOhRQWiGQAYicFwHz.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SHG महिलाओं को शेयर मार्केट ट्रेडिंग सिखाएगी BMC ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/bmc-to-teach-share-market-trading-to-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/wcEjGC7JFlNulxRZgadj.jpg"><p>2023 में भी जब शेयर बाज़ार या पैसों से जुड़े मसलों की तरफ़ देखते है तो सिर्फ़ पुरुष नज़र आते है. सीडीएसएल (सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज, इंडिया) के एक सर्वे ने भी बताया कि पुरुष निवेशकों का भारत में शेयर बाज़ार पर दबदबा है. जबकि ऐसे बाज़ार को निवेश का ज़रिया मानने वाली महिलाओं का प्रतिशत आज भी 25 फ़ीसदी से भी कम है. और इन 25 फ़ीसदी में भी ग्रामीण महिलाएं 1% भी नहीं है. इसकी सबसे बड़ी वजह आर्थिक आज़ादी का न होना और उसके साथ फाइनेंशियल लिटरेसी की कमी है. बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) ने इस कमी को दूर करने का फैसला लिया. BMC महिलाओं को फाइनेंशियल लिटरेसी के ज़रिये अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाएगी. उन्हें शेयर बाज़ार में अपना पैसा निवेश करने के साथ आर्थिक मसलों पर कोर्स महिलाओं की आज़ादी की तरफ़ बड़ा कदम होगा </p><p>शेयर बाज़ार में आपके प्रवेश की शुरुआत शेयर मार्केट की 'क- ख-ग' से होगी और बताया जायेगा कि इसमें निवेश कैसे कर सकते हैं,  शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव के समय क्या करें,  शुरुआत में कितना पैसा निवेश करें, निवेश का उचित समय क्या है, शेयर को कब बेचना सही है और इसमें निवेश कर कैसे अपनी पूँजी को बढ़ाया जा सकता है.  </p><p>कंप्यूटर चलाना सिखाया जायेगा और साथ ही टेक्निकल बातें भी बताएंगे. BMC ने आगे की राह खोलते हुए विदेश जाकर पढ़ने की चाह रखने वाली लड़कियों को लोन और दूसरी आर्थिक सहायता देने का फैसला किया. अभी उन्हें पैसे और जानकारी के अभाव में अपने सपनों को क़ैद करना पड़ रहा है.    </p><p>फाइनेंशियल लिटरेसी की ओर बढ़ता क़दम महिलाओं को आर्थिक आज़ादी की तरफ़ ले जायेगा. रविवार का यह मानना है कि BMC द्वारा की गई पहल यदि बड़े पैमाने पर RBI और बैंकों द्वारा भी ली जाएं तो SHG की महिलाओं को बड़े पैमाने पर लाभ मिल सकेगा. स्वसहायता समूह माइक्रो फाइनेंस पर निर्भर है. फाइनेंशियल लिटरेसी की ट्रेनिंग, शेयर ट्रेडिंग की समझ उन्हें ऊंचाई पर ले जा सकेगी. सरकार और कई संस्थान महिलाओं की आर्थिक आज़ादी पर काम कर रहें हैं पर सभी को एकजुट आकर एक दिशा में काम करने की ज़रुरत है. स्वसहायता समूहों की आर्थिक आज़ादी के इस सफ़र को अभी कई और मोड़ तय करने बाकी हैं.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 16 Feb 2023 13:44:58 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/bmc-to-teach-share-market-trading-to-shg-women]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/wcEjGC7JFlNulxRZgadj.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/wcEjGC7JFlNulxRZgadj.jpg"/></item></channel></rss>