<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ BPL कार्ड]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/bpl-kaardd</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/bpl-kaardd" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sun, 26 Mar 2023 11:30:37 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[सावित्रीबाई फुले योजना बनी SHG की फेवरेट स्कीम ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/savitri-bai-phule-yojna-in-mp-helped-shgs</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zypxD9jyjFgzb9XjUWER.jpeg"><p>हमारे देश की महिलाओं ने ये साबित कर के दिखाया है की उन्हें रोक पाना किसी के बस की बात नहीं है. अगर सरकार और समाज साथ है तो वो कितने मुकाम हासिल कर सकती है, इसका कोई अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता. हमारे देश की राज्य सरकारों में ऐसे बहुत से कदम उठाए है जो महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते है. लेकिन फिर भी हमारे देश में कुछ ऐसी जातियां है जिन्हे हम और आप से बहुत कम सुविधाएं मिली है. </p>
<p>संरक्षण, सुरक्षा और आरक्षण के नाम पर हमेशा से ही झूठे वादे दिए गए. जब पुरे समाज कि हालात ऐसे है तो महिलाओं को कितनी ज़्यादा परेशानियों से गुज़ारना पड़ता होगा. आर्थिक सामाजिक शारीरिक हर तरह से उनका शोषण होता है . सरकारें अनुसूचित जातियों खासकर महिलाओं के लिए कोशिशें कर रहीं है जिससे यह मुख्यधारा में आ सकें और अपनी स्थिति में हर तरह का सुधार ला सकें.</p>
<p>ऐसा ही एक प्रयास मध्य प्रदेश सरकार ने 'सावित्रीबाई फुले स्वसहायता समूह विकास योजना' के साथ किया, जिसमे मप्र की अनुसूचित जाति महिलाओं को जोड़ा गया. खासतौर पर उन महिलाओं को जिनके पास खुद का काम शुरू करने के लिए साधनों की कमी थी. BPL कार्ड धारक इन महिलाओं के स्वसहायता समूह तैयार किये गए. इन महिलाओं के लिए आर्थिक आज़ादी के मंत्र को लेकर यह योजना शुरू की गई. सिर्फ ये ही नहीं, जितनी भी महिलाएं इन समूहों के साथ जुडी हुई है उन सबको प्रशिक्षण भी दिया गया .</p>
<p>सरकार ने इन स्वसहायता समूहों वो को कई बैंको के द्वारा 20 करोड़ का क़र्ज़ (प्रति महिला 2 लाख का बैंक क़र्ज़ और 10 हज़ार का अनुदान) दिलवाया ताकि ये महिलाएं अपने काम जैसे, लघु-कुटीर उद्योग, पशुपालन, हथकरघा एवं हस्तशिल्प शुरू कर पाए. रविवार विचार का भी मानना है की अगर सही साथ हो तो महिलाएं अपनी सामाजिक और आर्थिक परिस्तिथियों को सुधार सकेंगी. और ऐसी ही सहायता उन्हें अपने पैरो पर खड़ा देखने के लिए हर मुमकिन काम करेगा. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sun, 26 Mar 2023 11:30:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/savitri-bai-phule-yojna-in-mp-helped-shgs]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zypxD9jyjFgzb9XjUWER.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/zypxD9jyjFgzb9XjUWER.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[मज़दूरी छोड़ बन गई बिज़नेस वुमन ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-women-run-a-food-processing-enterprise</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Sgt3xPUqenbMYIA2Ij10.jpeg"><p><br><iframe style="width: 1154px; height: 647px;" src="https://www.youtube.com/embed/Wc8k1s53s4c" width="1154" height="647" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>जिस BPL कार्ड को बनवाने के लिए परिवार ताकत झोंक देते हैं. पंचायतों के चक्कर काटते रहते हैं. लोग इस कार्ड से सरकार मिलने वाली मुफ्त की सुविधाओं को लेने से नहीं चूकते ,वही BPL कार्ड धार जिले के छोटे से गांव खंडवा की रहने वाली गंगा दीदी ने पंचायत को वापस लौटा दिया. खुद के पैरों पर खड़े होकर वह आत्मनिर्भर बनी. अपनी मेहनत और प्रयासों को आजीविका मिशन ने पंख लगा दिए. गंगा दीदी आज जिले की मैनेजमेंट गुरु बन चुकी है."लगातार पांच साल मेहनत की. जब कमाई बढ़ी तो हिसाब लगाने बैठ गई. पति को भी साथ बिठा लिया. मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा, जब लगातार कमाई एक जैसी बढ़िया होने लगी. हमने सोचा मेहनत का फल मिला. ज़िंदगी सुधर गई. एक दिन पंचायत ऑफिस गए और बीपीएल कार्ड जमा करा आए. " लगातार मेहनत करने वाली धार जिले के पिछड़े गांव छोटा खंडवा की गंगा बाई ने कही. गंगा बाई कहती है - " यदि सोच लो तो हम अपनी ज़िंदगी को अच्छे से जी सकते हैं. मुझे गर्व है कि प्रशासन और आजीविका मिशन के सहयोग से मैं लखपति समूह में शामिल हो गई."</p>
<p>किसी समय पहले मजदूरी और फिर सब्जी बेचने वाली गंगा बाई आज धार जिले में हर काम  को रोजगार के नए अवसर में बदलने की सोच रखती है.<br>कई समूह और इससे जुड़ी  महिलाएं गंगा बाई से धंधे का हुनर सीखने और सलाह लेने पहुंच रही हैं.वह अपना कारोबार तो कर ही रही लेकिन दो सौ लोगों के लिए भी रोजगार के रास्ते खोल दिए. गंगा दीदी को इलाके में चिप्स वाली दीदी के नाम से भी पहचान मिल गई. यह क्षेत्र का सबसे  बड़ा कारोबार बन सकता है.</p>
<p>कुछ साल पहले तक मजदूरी करने वाली गंगा दीदी ने नवदुर्गा स्वसहायता समूह का गठन किया. गंगा दीदी अपने संघर्ष की कहानी कहते हुए बताती हैं -" शुरू में समूह की सभी महिलाओं ने पच्चीस रुपए हर सप्ताह बचत शुरू किए. यह रकम भी बहुत ज्यादा थी. समूह से लोन लेकर सब्जी बेचना शुरू की.हमें बैंक से पचास हजार का लोन मिल गया. किराने का सामान भी रखने लगे. पति भी मजदूरी के बाद विक्रम चौधरी ने भी साथ दिया. फिर हमने मुड़ कर पीछे नहीं देखा." </p>
<p>जिला प्रशासन और जिला पंचायत अधिकारियों के लिए गंगा दीदी आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई है. फेडरेशन और एक संगठन ने आलू चिप्स का कारखाना खंडवा गांव में खोलने की योजना बनाई. जिला पंचायत के अधिकारियों के साथ फेडरशन के अधिकारी आए. समूह की महिलाओं को योजना और कमाई का ये जरिया समझाया ,लेकिन नतीजा ज़ीरो. अधिकारी पहली बार में निराश लौट गए. गांव की ममता ने बताया- " मेरे  शिव शक्ति समूह के सदस्य भी बैठक में शामिल हुए थे. सभी को लगा कि बाहर वालों का कारखाना है. पैसा न डूब जाए. इस बैठक के बाद गंगा दीदी ने समझाया कि पंचायत की परियोजना प्रबंधक अपर्णा पांडेय पर भरोसा  करो. और गंगा दीदी की बात पर सब जुड़ते चले गए. </p>
<p>मिसाल बन चुकी गंगा दीदी कहती हैं - " वह समाज में बदलाव चाहती थी. इसलिए हिम्मत नहीं हारी. किराने की दुकान जब पति ने संभाली तो लगा कुछ और करना चाहिए. बस इसी सोच को लेकर मैं सैनेटरी नैपकिन बना कर बेच लगी.गांव में पिछड़ी सोच को ख़त्म कर युवतियों और महिलाओं को कपड़े की जगह नैपकिन का महत्व बताती हूं."</p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 16 Mar 2023 18:07:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-women-run-a-food-processing-enterprise]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Sgt3xPUqenbMYIA2Ij10.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Sgt3xPUqenbMYIA2Ij10.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[डाला आलू निकला सोना ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-making-potatoe-chips-and-sanitary-napkin</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Sgt3xPUqenbMYIA2Ij10.jpeg"><p>जिस BPL कार्ड को बनवाने के लिए परिवार ताकत झोंक देते हैं. पंचायतों के चक्कर काटते रहते हैं. लोग इस कार्ड से सरकार मिलने वाली मुफ्त की सुविधाओं को लेने से नहीं चूकते ,वही BPL कार्ड धार जिले के छोटे से गांव खंडवा की रहने वाली गंगा दीदी ने पंचायत को वापस लौटा दिया. खुद के पैरों पर खड़े होकर वह आत्मनिर्भर बनी. अपनी मेहनत और प्रयासों को आजीविका मिशन ने पंख लगा दिए. गंगा दीदी आज जिले की मैनेजमेंट गुरु बन चुकी है.</p>
<p>"लगातार पांच साल मेहनत की. जब कमाई बढ़ी तो हिसाब लगाने बैठ गई. पति को भी साथ बिठा लिया. मेरी तो ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं रहा ,जब लगातार कमाई एक जैसी बढ़िया होने लगी. हमने सोचा मेहनत का फल मिला. ज़िंदगी सुधर गई. एक दिन पंचायत ऑफिस गए और बीपीएल कार्ड जमा करा आए. " लगातार मेहनत करने वाली धार जिले के पिछड़े गांव छोटा खंडवा की गंगा बाई ने कही. गंगा बाई कहती है - " यदि सोच लो तो हम अपनी ज़िंदगी को अच्छे से जी सकते हैं. मुझे गर्व है कि प्रशासन और आजीविका मिशन के सहयोग से मैं लखपति समूह में शामिल हो गई. "</p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/hWdYKBGZljUVS3gYJXaD.jpeg" alt="AAloo chips made by SHG women"></p>
<p>फोटो क्रेडिट: प्रीति गुप्ता, धार</p>
<p>किसी समय पहले मजदूरी और फिर सब्जी बेचने वाली गंगा बाई आज धार जिले में हर काम  को रोजगार के नए अवसर में बदलने की सोच रखती है. कई समूह और इससे जुड़ी  महिलाएं गंगा बाई से धंधे का हुनर सीखने और सलाह लेने पहुंच रही हैं.वह अपना कारोबार तो कर ही रही लेकिन दो सौ लोगों के लिए भी रोजगार के रास्ते खोल दिए. गंगा दीदी को इलाके में चिप्स वाली दीदी के नाम से भी पहचान मिल गई. यह क्षेत्र का सबसे  बड़ा कारोबार बन सकता है.</p>
<p>कुछ साल पहले तक मजदूरी करने वाली गंगा दीदी ने नवदुर्गा स्वसहायता समूह का गठन किया. गंगा दीदी अपने संघर्ष की कहानी कहते हुए बताती हैं -" शुरू में समूह की सभी महिलाओं ने पच्चीस रुपए हर सप्ताह बचत शुरू किए. यह रकम भी बहुत ज्यादा थी. समूह से लोन लेकर सब्जी बेचना शुरू की.हमें बैंक से पचास हजार का लोन मिल गया. किराने का सामान भी रखने लगे. पति भी मजदूरी के बाद विक्रम चौधरी ने भी साथ दिया. फिर हमने मुड़ कर पीछे नहीं देखा." </p>
<p>जिला प्रशासन और जिला पंचायत अधिकारियों के लिए गंगा दीदी आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई है. फेडरेशन और एक संगठन ने आलू चिप्स का कारखाना खंडवा गांव में खोलने की योजना बनाई. जिला पंचायत के अधिकारियों के साथ फेडरशन के अधिकारी आए. समूह की महिलाओं को योजना और कमाई का ये जरिया समझाया ,लेकिन नतीजा ज़ीरो. अधिकारी पहली बार में निराश लौट गए. गांव की ममता ने बताया- " मेरे  शिव शक्ति समूह के सदस्य भी बैठक में शामिल हुए थे. सभी को लगा कि बाहर वालों का कारखाना है. पैसा न डूब जाए. इस बैठक के बाद गंगा दीदी ने समझाया कि पंचायत की परियोजना प्रबंधक अपर्णा पांडेय पर भरोसा  करो. और गंगा दीदी की बात पर सब जुड़ते चले गए. </p>
<p>ट्रेनर आशीष वर्मा ने बताया कि- " इस गांव की समूह की दीदियां बहुत मेहनती हैं. लगातार काम कर रहीं हैं. यह फेडरेशन फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट और जिला पंचायत आजीविका मिशन के प्रयास से इसकी शुरुआत हुई. अभी ट्रेनिंग लगातार दी जा रही है. जिला पंचायत की आजीविका मिशन की जिला प्रबंधक अपर्णा पांडेय कहती हैं - " यह बहुत बड़ी उपलब्धि है.21 समूह की 105 दीदियों को ट्रेनिंग दी जा रही. जिसमें दो सौ रुपए रोज मिल रहे हैं. ट्रेगिंग के दौरान ही चिप्स खरीदी के ऑर्डर मिलने लगे हैं. " </p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/rcb723RiHzATyJ2cj0Ap.jpeg" alt="AAloo chips made by SHG women"></p>
<p>फोटो क्रेडिट: प्रीति गुप्ता, धार</p>
<p>मिसाल बन चुकी गंगा दीदी कहती हैं - "वह समाज में बदलाव चाहती थी. इसलिए हिम्मत नहीं हारी. किराने की दुकान जब पति ने संभाली तो लगा कुछ और करना चाहिए. बस इसी सोच को लेकर मैं सैनेटरी नैपकिन बना कर बेच लगी.गांव में पिछड़ी सोच को ख़त्म कर युवतियों और महिलाओं को कपड़े की जगह नैपकिन का महत्व बताती हूं. "</p>
<p>इस गांव के ग्राम संगठन "वरदान आजीविका महिला संकुल स्तरीय संगठन" से जुड़ी दीदियां आलू चिप्स ट्रेनिंग के अलावा रानू दीदी, ममता शेखर सिलाई , प्रेम दीदी अगरबत्ती बना कर आत्मनिर्भर हुईं. समूह से जुड़ी गंगा दीदी आगे बताती हैं - " अभी ट्रेनिंग में ही उनको चिप्स के ऑर्डर मिलाना शुरू हो गए. वह दस हजार रुपए महीना कमा लेती है. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 16 Mar 2023 17:48:23 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-making-potatoe-chips-and-sanitary-napkin]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Sgt3xPUqenbMYIA2Ij10.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Sgt3xPUqenbMYIA2Ij10.jpeg"/></item></channel></rss>