<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ बुरहानपुर]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/burhaanpur</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/burhaanpur" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 05 Sep 2023 12:33:55 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[लाडली सेना और समूह को बनाया जाए मजबूत ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/ladali-sena-and-shg-women-can-contribute-in-tax-recovery</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TN0y0LJWgK4aOz7ecap5.jpg"><h1 style="text-align: justify;"><strong>गांव के विकास में महिलाएं रोल मॉडल&nbsp;</strong></h1>
<p style="text-align: justify;"><strong>संभाग (Divsion) </strong>में&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/role-of-women-in-water-sanitation-and-hygiene"> जल </a><strong>जीवन परियोजना</strong> के सभी अधिकारियों की बैठक में जानकारी ली. <strong>कमिश्नर (Commissinor) माल सिंह (Malsingh) </strong>ने <strong>कार्यपालन यंत्रियों</strong> और <strong>जल विकास निगम</strong> के जिला प्रबंधकों निर्देश दिए- <em>"किसी भी गांव में जल सप्लाई रुकनी नहीं चाहिए. हमें एक दिन पानी नहीं मिले तो परेशान हो जाते हैं. कई गांव की शिकायते हैं, उन्हें 15-15 &nbsp;दिन पीने&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-conserving-rivers"> पानी </a>नहीं मिल पाता. अब यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. लाडली बहना सेना और&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-earning-through-green-nursery-in-burhanpur"> स्वयं सहायता समूह </a>की महिलाएं किसी भी घर और गांव के विकास का आधार है. इन सभी सदस्यों को कोई भी ग्रामीण टेक्स देने में मना नहीं करेगा. उनको काम के साथ आर्थिक मजबूती मिलेगी. समूह की सदस्यों को बेहतर ट्रेनिंग दी जाए."</em></p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>बंद योजनाओं को करें शुरू&nbsp;</strong></h2>
<p style="text-align: justify;"><strong>जल जीवन मिशन </strong>के तहत संचालित परियोजनाओं की संभागीय समीक्षा बैठक में कमिश्नर सिंह ने निर्देश दिए -<em>"आधे-अधूरे काम, बंद पड़ी और नई योजनाओं तेज़ी से पूरा करें.अधिकारी खुद काम की वास्तविक स्थिति जाकर देखें. सभी कलेक्टर्स के संपर्क में रहें. मुझे रिपोर्ट करें."</em> इस बैठक में &nbsp;आलीराजपुर जिले के कार्यपालन यंत्री एसआर मेढ़ा द्वारा परियोजना की आधी-अधूरी जानकारी देने पर कमिश्नर ने नाराज़ी जताई. साथ ही नोटिस जारी करने के निर्देश दिए.&nbsp;</p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>डीएम बुरहानपुर को पीएम से मिला था अवार्ड&nbsp;</strong></h3>
<p style="text-align: justify;"><strong>कमिश्नर (Commissinor) &nbsp;सिंह</strong> ने नल-जल योजना और हर गांव में पीने के पानी की सप्लाई को ख़ास फोकस किया. प्रदेश में इसी संभाग के <strong>बुरहानपुर (Burhanpur)</strong> जिला 100 &nbsp;प्रतिशत नल जल सफलता के लिए पूरे देश में अव्वल रहा था. इसके अलावा <strong>नीमच (Neemuch) </strong>जिले का गांव <strong>धनेरियाकला</strong> भी <strong>नल जल योजना (NalJal Yojana)</strong> के लिए मिसाल बन चुका है. <a href="https://ravivarvichar.in/photovideo/burhanpur-collector-bhavya-mittal-awarded-pm-award-for-excellence">बुरहानपुर</a><strong>&nbsp;(Burhanpur) कलेक्टर (DM) भव्या मित्तल (Bhvya Mittal)</strong> को इस उपलब्धि के लिए <strong>प्रधानमंत्री</strong> <strong>(PM)</strong> <strong>नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) </strong>से सम्मान मिल चुका है.</p>
<p><img alt="bhavya" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/501x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/HLEfgsJWh8XVFp8JT8mm.jpg" style="width: 501px;" class="center"></p>
<p dir="ltr" class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>बुरहानपुर कलेक्टर भव्या मित्तल को मिला था पीएम से अवार्ड (Image Credits: ravivar Vichar)</em></span>&nbsp; &nbsp; &nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Tue, 05 Sep 2023 12:33:55 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/ladali-sena-and-shg-women-can-contribute-in-tax-recovery]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TN0y0LJWgK4aOz7ecap5.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TN0y0LJWgK4aOz7ecap5.jpg"/></item><item><title><![CDATA[महिलाओं को नर्सरी से मिली आर्थिक छांव ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-earning-through-green-nursery-in-burhanpur</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/YsOuXfIFDcV6FF4Rj10O.jpg"><h1><strong>बंजर ज़िंदगी से हरी-भरी हुई ज़िंदगी&nbsp;</strong></h1>
<p style="text-align: justify;"><strong><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-made-biggest-eco-friendly-rakhi-in-burhanpur">बुरहानपुर</a> (Burhanpur) </strong>जिले के <strong>बसाड़</strong> <strong>(Basad)</strong> गांव में रहने वाली महिलाओं की कहानी आज आदर्श है. कभी घर के कामकाज में ज़िंदगी के साथ समझौता करने वाली ये महिलाएं आज लाखों का कारोबार कर रहीं.&nbsp;<strong>स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) </strong>से जुड़ने के बाद इनकी बंज़र ज़िंदगी धीरे- धीरे हरी-भरी हो गई. <strong>ओम साईं राम समूह (SHG)&nbsp;</strong>की <strong>अध्यक्ष रजनी ठाकुर</strong> कहती है- "<em>आजीविका मिशन (Ajeevika Mission) ने हमारा समूह बनवाया. 50 हजार रुपए के लोन से शुरुआत की. <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/government-initiatives-boost-women-empowerment-through-plantation-campaigns">नर्सरी</a> में बीज लगा कर पौधे तैयार किए. तीन साल में कई तरह के पौधे बेच कर लगभग नौ लाख रुपए का कारोबार किया."</em><br>इस नर्सरी को हॉर्टिकल्चर विभाग ने बीज दिए. इससे समूह को मदद मिली.<br>इसी समूह से जुड़ी उषा वर्मा, कल्पना धोपे और प्रमिला वर्मा सक्रीय तरीके से काम कर रही. प्रमिला वर्मा बताती हैं-<em> "हमने तीन साल में पौधे कई संस्थाओं को बेचे इसके अलावा हमें मनरेगा योजना से भी नियमित पैसा मिल जाता है. हम &nbsp;लोग छह से साथ हजार रुपए महीने काम लेते हैं."</em></p>
<p><img alt="basad nursery" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/499x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/uArmR90OGn8wPyG0eAp5.jpg" style="width: 499px;" class="center"></p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;बसाड़ में मेहनत से तैयार नर्सरी (Image Credits: Ravivar Vichar)</span></em></p>
<h2><strong>महाराष्ट्र में पौधों की बढ़ी डिमांड</strong></h2>
<p style="text-align: justify;">इस समूह को खुशियों का ठिकाना तब नहीं रहा जब अपने जिले के अलावा महाराष्ट्र से भी डिमांड आई. समूह की कल्पना धोपे ने बताया- <em>"हम छायादार और फलदार पौधे खुद तैयार करते हैं. ये पौधे 15 से 40 &nbsp;रुपए नाग के हिसाब से बिक जाते हैं. अभी रावेर, नवगांव सहित कई जिलों से डिमांड मिली. जिले की सरकारी संस्थाओं में भी हमने सप्लाई किया."&nbsp;</em><br>इस <strong>नर्सरी</strong> <strong>(Nursery)</strong> में लगातार मेहनत से कई तरह के पौधे तैयार किए. इनमें &nbsp;नीम, करंज, अमलातस, गुलमोहर, <em>शीशम और फलदार पौधों में आम, मौसंबी, जाम, नींबू शामिल हैं. </em><strong>आजीविका मिशन (Ajeevika Mission) </strong>की <strong>जिला परियोजना प्रबंधक (DPM)</strong> <strong>संतमति</strong> <strong>खलखो </strong>कहती हैं- <em>"जिले में बसाड़ की महिलाओं ने समूह से जुड़ कर योजनाओं का उपयोग किया. मेहनत की. इसका परिणाम है कि ये महिलाएं मनरेगा से भी कमा रहीं और नर्सरी के <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/anuppur-nursery-by-shg-women">पौधों</a> का &nbsp;कारोबार का भी लाभ मिलेगा."</em></p>
<p><img alt="basad nursery" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/500x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Hedtdtai9Qa6w4aAnEz8.jpg" style="width: 500px;" class="center"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; बसाड़ में समूह द्वारा तैयार किए पौधे &nbsp;(Image Credits: Ravivar Vichar) &nbsp;</em></span></p>
<h3><strong>मेहनत और नवाचार का लाभ</strong></h3>
<p style="text-align: justify;"><strong>बुरहानपुर</strong> <strong>(Burhanpur) </strong>की&nbsp;<strong>कलेक्टर (DM) भव्या मित्तल (Bhavya Mitta</strong>l) कहती हैं -<em> "महिलाएं मेहनत के साथ नवाचार का लाभ ले रहीं. बैंकिंग,नर्सरी, बनाना फाइबर्स आर्टिकल्स और मशरूम की<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/siddhivinayak-samuh-shg-women-mapping-path-of-nursery-to-prosperity"> खेती </a>&nbsp;में समूह की महिलाओं को ट्रेनिंग दी. आज ये महिलाएं आत्मनिर्भर हैं. सम्मान की ज़िन्दगी जी रहीं."&nbsp;</em> &nbsp;&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Mon, 04 Sep 2023 17:34:03 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-earning-through-green-nursery-in-burhanpur]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/YsOuXfIFDcV6FF4Rj10O.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/YsOuXfIFDcV6FF4Rj10O.jpg"/></item><item><title><![CDATA[यूनिफॉर्म बांटने में मिशन करेगा निगरानी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/ajeevika-mission-will-monitor-the-distribution-of-school-uniforms</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FuDvsc753sq9ACaqg6XF.jpg"><h1><strong>यूनिफॉर्म बांटने में मिशन करेगा निगरानी&nbsp;</strong></h1>
<p><strong>मध्य प्रदेश (MP) </strong>के स्कूलों में बंटने वाली <a href="https://ravivarvichar.in/photovideo/dhulet-shg-selling-soyabean-at-mandi-school-uniform-stitching">यूनिफॉर्म</a><strong>&nbsp;(Uniform) </strong>अब <strong>आजीविका मिशन (Ajeevika Mission)</strong>&nbsp;के अफसरों की निगरानी में बटेंगी. <strong>कैबिनेट</strong> बैठक में यह बड़ा फैसला लिया.<strong> शिक्षा विभाग</strong> <strong>(Eduction Department) </strong>और&nbsp;<strong>आजीविका मिशन (Ajeevika Mission)&nbsp;</strong> प्रबंधन का मानना है कि बच्चों को दी जाने वाली <strong>यूनिफॉर्म (Uniform)</strong> समय के साथ बिना अनियमितता के वितरित हो सकेगी. अभी <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/fatima-from-kargil-started-her-business-with-the-help-of-shgs">प्रदेश</a> के जिलों से <strong>स्वयं सहायता समूह (Self Help Group)</strong> द्वारा बंटने वाली <strong>ड्रेस</strong> व्यवस्था को लेकर शिकायतें मिल रहीं थी. &nbsp;</p>
<h2><strong>सिलाई भुगतान एसएचजी को नहीं बल्कि मिशन के खाते में &nbsp;</strong></h2>
<p>यह सारा मामला <strong>स्वयं सहायता समूह (Self Help Group)</strong> को सिलाई के बदले मिलने वाले भुगतान से जुड़ा है.&nbsp;शासन द्वारा प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के नियमित विद्यार्थियों को <strong>गणवेश</strong> दिया जाता है. यह गणवेश बच्चों तक <strong>स्वयं सहायता</strong> <strong>समूह (Self Help Group)</strong> के जरिए पहुंचता है. <strong>समूह (SHG)</strong> को इसके लिए शासन सीधे राशि उनके खातों में जमा की जाती है.अब ऐसा नहीं होगा. शासन अब यह पैसा समूह को स्वयं सहायता समूह न पहुंचा कर राज्य के <strong>आजीविका मिशन (Ajeevika Mission) </strong>को दी जाएगी. ये निर्णय <strong>यूनिफॉर्म&nbsp; (Uniform) </strong>वितरण में होने वाली गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए लिया. शिकायतें मिलती थी कि कई बच्चे&nbsp;<strong>यूनिफॉर्म</strong> से वंचित रह गए और उनके नाम के <strong>ड्रेस</strong> और सिलाई का भुगतान समूह को हो गया.</p>
<p>&nbsp;&nbsp;</p>
<p><img alt="uniform pic" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/555x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/acuh7kzyhWe7MyFzYjp7.jpg" style="width: 555px;"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;">समूह द्वारा &nbsp;तैयार यूनिफॉर्म (Image Credit: Ravivar Vichar)</span></p>
<h3><strong>गुणवत्ता रिपोर्ट के बाद होगा पूरा पेमेंट&nbsp;</strong></h3>
<p>अब 75 प्रतिशत राशि का भुगतान क्रियाशील समूहों को दिया जाएगा. इन समूहों के काम को देखने के लिए <strong>स्कूल शिक्षा विभाग</strong> और आजीविका मिशन की संयुक्त समिति गठित कर निगरानी की जाएगी. <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-earning-their-livelihood-by-making-maheshwari-sarees">आजीविका</a><strong>&nbsp;मिशन (Ajeevika Mission) </strong> <strong>बुरहानपुर (Burhanpur) </strong>की <strong>जिला परियोजना प्रबंधक (DPM)</strong> संतमति खोलखो बताती है- <em>&nbsp;'समिति द्वारा गणवेश की गुणवत्ता की रिपोर्ट सही आने पर ही बचा हुआ &nbsp;25&nbsp; प्रतिशत भुगतान किया जाएगा."</em> इस बार ख़ास सतर्कता बरती जा रही. <strong>देवास (Dewas)</strong> जिले के <strong>आजीविका मिशन&nbsp; (Ajeevika Mission)</strong> की <strong>जिला परियोजना प्रबंधक</strong> <strong>(DPM)</strong> <strong>शीला शुक्ला</strong> कहती है- <em>अधिकांश समूह जिन्हें जवाबदारी दी, वे महिलाएं मेहनत से सिलाई कर रहीं. जिले में यूनिफॉर्म का वितरण सही हो इसलिए पूरी तरह मॉनिटरिंग की जा रही."&nbsp; &nbsp; &nbsp;</em>&nbsp;&nbsp;</p>
<p>गणवेश वितरित करने की प्रक्रिया साल 2018 से <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/har-ghar-tiranga-campaign-in-madhya-pradesh">स्वयं सहायता समूहों</a> सौंपी है. <strong>शिक्षा विभाग</strong> द्वारा सीधे समूह को राशि से दी जाती है और आजीविका मिशन के अमले को सिर्फ निगरानी करने के लिए बोला जाता था, लेकिन इस नई व्यवस्था में &nbsp;बदलाव के बाद अब राज्य और जिला स्तरीय <strong>आजीविका मिशन (Ajeevika Mission) </strong>की जवाबदारी बढ़ जाएगी.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Sat, 19 Aug 2023 10:42:09 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/ajeevika-mission-will-monitor-the-distribution-of-school-uniforms]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FuDvsc753sq9ACaqg6XF.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FuDvsc753sq9ACaqg6XF.jpg"/></item><item><title><![CDATA[कंट्रोल दुकानों पर अब महिलाओं का कंट्रोल ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-to-manage-ration-control-shops-in-burahanpur</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/pmVBV2zMmS13Vutsuw6F.jpg"><h1><strong>कंट्रोल दुकानों पर अब महिलाओं का कंट्रोल&nbsp;</strong></h1>
<p><strong>बुरहानपुर (Burhanpur)</strong> जिले में खेती और<strong> केले के रेशों</strong> <strong>(Bnana Fibers) </strong>से आइटम बनाने के अलावा यहां की महिलाओं ने एक नई चुनौती ले ली. अब ये महिलाएं कंट्रोल की दुकानों को कंट्रोल करेंगी. जिले की ऐसी 45 <strong>राशन दुकानों (Control Shop) </strong>को<strong> स्वयं सहायता</strong> <strong>समूह (Self Help Group)</strong> की सदस्य संभालेंगी. जिला प्रशासन ने <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-made-clay-and-paper-source-of-income">समूह</a> की&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/tribal-women-of-shg-saving-the-ancient-adivasi-dhokra-art"> महिलाओं </a>को और अधिक आत्मनिर्भर बनाने के लिए ये दुकानें तय की हैं.इनमें से चार समूह ने काम शुरू भी कर दिया.&nbsp;</p>
<h2><strong>गांव वालों का रखेंगे ध्यान&nbsp;</strong></h2>
<p><strong>खकनार</strong> <strong>(Khaknar)</strong> ब्लॉक के <strong>डोईफोड़िया</strong> गांव की दुकान रही रही <strong>शीतला स्वयं सहायता समूह (SHG)</strong> की <strong>अध्यक्ष &nbsp;सरला महाजन</strong> और <strong>सचिव</strong> <strong>दीपिका</strong> कहती है- <em>"हम अभी तक दूसरे रोजगार से कमा रहे थे. हमें दुकान चलाने का मौका मिला. हम इसे अच्छे से चलाएंगे. गांव वालों की सुविधा का हम ध्यान रखेंगे.हम बहुत खुश हैं कि हमें नए रोजगार से जोड़ा."</em></p>
<p>उधर बुरहानपुर ब्लॉक के बसाड़ गांव के<strong> संतोषी स्वयं सहायता समूह (SHG)</strong>की <strong>अध्यक्ष</strong> <strong>अनीता</strong> और <strong>सचिव रमा </strong>बताती है- "<em>हमें जैसे ही पता चला कि राशन की दुकान चलने का मौका हमें मिलेगा, समूह की सभी सदस्य बहुत खुश हैं. हमारी कमाई बढ़ेगी."</em> फ़िलहाल चार दुकानों के लिए प्रस्ताव बना कर स्वीकृति ली.ये <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/meera-tamangs-makaibari-tea-estate-has-a-beautiful-homestay">समूह</a> सिंधखेड़ा में सरस्वती समूह और चाकबारा में जय जगदंबा समूह दुकान संचालित करने लगा. &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</p>
<h3><strong>एक समूह एक दुकान</strong>&nbsp;</h3>
<p>जिले के <strong>बुरहानपुर (Burhanpur) </strong>और <strong>खकनार</strong> ब्लॉक में इन दुकानों को चिन्हित किया. <strong>आजीविका मिशन (Ajiveeka Mission) </strong>की <strong>जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) संतमति खलखो</strong> ने बताया- <em>" जिले में समितियों ने जिन दुकानों को वापस प्रशासन को हेंडओवर किया, उन दुकानों को अब समूह के महिलाएं चलाएंगी. जिले में 45 दुकानों के लिए यह प्रक्रिया तय की गई गई. 45 समूहों की सूची बनाई गई.शुरुआत में चार समूहों के नाम भेज दिए.दुकानें देने के लिए सभी नियमों का पालन किया जा रहा है."&nbsp; </em>समूह की अध्यक्ष और सचिव को दसवीं पास होना जरुरी है. साथ ही समूह कम से कम एक साल पहले गठित होना चाहिए.&nbsp;</p>
<h3><strong>मोनोपॉली होगी ख़त्म</strong></h3>
<p><a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-gave-bolbala-a-new-identity-of-milking-village">जिले</a> के ऐसे कई गांव थे जहां सहकारी सोसाइटी के पास एक से अधिक राशन की दुकानें थी. प्रशासन ने अब एक समिति एक दुकान नियम लागू कर दुकानों को वापस ले लिया. जिले में खकनार विकासखंड के गांव चांदनी, बोरसल, वारोली, डवालीखुर्द, सोनूद, नावथा, हैदरपुर, नावरा, मजगांव, बड़सिंगी, पिपरी रैयत, पाचोरी, मोहनगढ़, झिरमिटी, धार बेलथड़, बिजोरी, चिड़ियामाल, नागझिरी, आमगांव, ताजनापुर, सांडसकला और बुरहानपुर विकासखंड के गांव मंगरूल, असीरगढ़, उताम्बी, सुक्ता, गंभीरपुरा, मालवीर, जम्बूपानी, टिटगांवकला, बड़गांव, सेलगांव, मोरदड़, धामनगांव, वारोली, खडकोद, अड़गांव, मोरदनखुर्द, हरदा, टेमनिया, इटारिया, महलगुराड़ा आदि गांव में यह व्यवस्था होगी.</p>
<h3><strong>फाइनेंशियल लिट्रेसी बढ़ेगी </strong></h3>
<p><strong>बुरहानपुर</strong> <strong>(Burhanpur) कलेक्टर (DM) भव्या मित्तल</strong> <strong>(Bhavya Mittal)</strong> कहती हैं- "यह भी बहुत बड़ा नवाचार है. महिलाओं में आत्मविश्वास आएगा. समूह की सदस्यों को रोजगार के नए अवसर दिए. गांव में अब एक समिति या एक समूह एक दुकान कॉन्सेप्ट पर यह व्यवस्था की गई. महिलाएं अब व्यवसाय के साथ वित्तीय प्रबंधन भी सीख रहीं.सभी को लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा. इस पूरी प्रक्रिया से महिलाओं में फाइनेंशियल लिट्रेसी बढ़ेगी."&nbsp;</p>
<p><img alt="CONTROL SHOP" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/216x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/A3ZfYrJTnRYQQliUQPaU.jpg" style="width: 216px;"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>बुरहानपुर कलेक्टर भव्या मित्तल ग्रामीण महिला को प्रोत्साहित करते हुए</em><em> (Ravivar Vichar)&nbsp; &nbsp; &nbsp;</em></span> &nbsp; &nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Wed, 02 Aug 2023 10:58:01 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-to-manage-ration-control-shops-in-burahanpur]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/pmVBV2zMmS13Vutsuw6F.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/pmVBV2zMmS13Vutsuw6F.jpg"/></item><item><title><![CDATA[आज की अहिल्या बाई : भव्या मित्तल ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/meet-our-modern-day-ahilyabai-holkar-burhanpur-collector-bhavya-mittal</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9vMpiDjsb1P83Hw6VGY2.jpg"><p><iframe style="width: 719px; height: 403px;" src="https://www.youtube.com/embed/9V12M1gq-lE" width="719" height="403" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>मप्र के सबसे दूरस्थ महाराष्ट्र सीमा से लगे बुरहानपुर जिले के लिए शासन ने लेडी ऑफिसर IAS भव्या मित्तल को चुना. सतपुड़ा के घने जंगलों में माफियाओं का कब्ज़ा और कई आदिवासी इलाकों में पीने के पानी की जद्दोजहद जैसी चुनौतियों ने कलेक्टर का पदभार संभाला. कुछ माह में ही सैकड़ों हैक्टेयर इलाके में घने जंगलों का सफाया और लकड़ी माफियाओं के खौफ ने घुसना मुश्किल कर दिया. माफियाओं ने हमले इतने तेज़ किए कि वन विभाग के हाथ पैर फूल गए.आखिर हालात बिगड़ते देख डीएम भव्या मित्तल ने मोर्चा संभाला.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Wed, 31 May 2023 18:46:40 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/meet-our-modern-day-ahilyabai-holkar-burhanpur-collector-bhavya-mittal]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9vMpiDjsb1P83Hw6VGY2.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9vMpiDjsb1P83Hw6VGY2.jpg"/></item><item><title><![CDATA[आज की 'अहिल्या बाई होल्कर' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/ias-bhavya-mittal-fights-with-mafia-to-become-present-day-ahilyabai</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9vMpiDjsb1P83Hw6VGY2.jpg"><p>देश में &nbsp;मुग़ल कालीन हुकूमत और अंग्रेजों की गुलामी के पहले देश की कई रियासतों का दौर रहा. इस दौर में के राजा-महाराजा हुए. पर जिन्हें उंगलियों पर गिना जा सके ऐसे चर्चित और प्रजा में प्रिय कम ही हुए. खासकर महिला शासक. इनमें कुछ ऐसे शासक भी हुए जो अपने अंदाज़ और प्रजा के भले के लिए जीवन जीते रहे.उनमें से एक हैं मालवा प्रांत के होल्कर राजघराने की महिला शासक देवी अहिल्या बाई होल्कर. &nbsp;</p><p>केवल 29 साल में विधवा और अपने ससुर मल्हारराव की मौत के बाद राजपाट संभाला. अहिल्या बाई ने वो मुकाम हासिल किया जो आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है. उनके निर्णय और धैर्यता मिसाल बन गई. मालवा प्रांत &nbsp;में होल्कर राज की शासक अहिल्या बाई ने इंदौर के अलावा डेढ़ सौ किमी दूर नर्मदा किनारे महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया. गिने-चुने राजाओं में अहिल्या बाई होल्कर के दौर को आज भी आदर्श काल माना जाता है.अहिल्या बाई ने चाहे पर्यावरण हो ,धार्मिक कामकाज या कोई जरूरतमंद की मदद करना जैसे फैसले किताबों में पढ़ाए जा रहें हैं.&nbsp;<br>&nbsp;<br>हर साल की तरह इस साल भी 31 मई को उनकी याद में जयंती मालवा और निमाड़ में गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा. उनके लिए गए निर्णय साल 1795 से अब तक 228 सालों बाद भी प्रासंगिक है. आजादी के 75 सालों में भी कई ऐसी महिला अधिकारी हुईं जिनकी कार्यशैली और अंदाज़ साबित करता है कि उनमें प्रशासनिक क्षमता किसी से कम नहीं है. इनके निर्णय आमजन को लाभ पहुंचा रहे हैं. गौरव सप्ताह और देवी अहिल्या बाई होल्कर की जयंती को लेकर रविवार विचार ने ऐसे कुछ महिला प्रशासनिक अधिकारियों के विचार जाने. उनकी कार्यशैली को समझा. प्रशासनिक चुनौतियों और पारिवारिक जवाबदारियों के बीच ऐसी ही " आज की अहिल्या देवी होल्कर " (Devi Ahilya Bai Holkar) से मिलवाते हैं. जिनके निर्णय और काम का तरीका उन्हें चर्चा में रखता है.&nbsp;रविवार विचार इस साल यह गौरव दिवस ऐसी ही कई लेडी ऑफिसर के कामकाज को समर्पित करता है,जिनसे हम मिलवाते रहेंगे.&nbsp;</p><h2>जंगल के खातिर माफियों से जंग&nbsp;</h2><p>मप्र (Madhya Pradesh) के सबसे दूरस्थ महाराष्ट्र (Maharashtra) सीमा से लगे बुरहानपुर (Burhanpur) जिले के लिए शासन ने लेडी ऑफिसर आईएएस (IAS) भव्या मित्तल (Bhavya Mittal) को चुना. सतपुड़ा के घने जंगलों में माफियाओं का कब्ज़ा और कई आदिवासी इलाकों में पीने के पानी की जद्दोजहद जैसी चुनौतियों ने कलेक्टर (DM) का पदभार संभाला. कुछ माह में ही सैकड़ों हैक्टेयर इलाके में घने जंगलों का सफाया और लकड़ी माफियाओं के खौफ ने घुसना मुश्किल कर दिया. माफियाओं ने हमले इतने तेज़ किए कि वन विभाग के हाथ पैर फूल गए.आखिर हालात बिगड़ते देख डीएम भव्या मित्तल ने मोर्चा संभाला.</p><p>भव्या मित्तल बताती हैं - " लगातार धमकियों और माफियाओं के बढ़ते आतंक को सहन करना बर्दाश्त के बाहर हो गया.माफियाओं ने वन विभाग के कर्मचारियों, पुलिस के साथियों पर हमले शुरू कर दिए. बाहरी लोग वनवासियों को उकसाने लगे. जंगल की खूबसूरती खत्म सी होने लगी. मैंने खुद ने वहां डेरा डाला. घेराबंदी की. काफी समझाइश के बाद भी नहीं माने तो कई सख्त एक्शन लिए. कई सरकारी योजनाओं का लाभ देना बंद करवाया.कई को जिला बदर कर दिया. इस कदम पर मेरा बहुत विरोध हुआ. मैंने परवाह न की. पुलिस,वन और दूसरी सुरक्षा एजेंसी को निर्देश दिए. देखते ही देखते "ऑपरेशन खदेड़ना" शुरू किया. धीरे-धीरे हालात सामान्य हुए. जब लकड़ी माफियों को खदेड़ दिया. वनवासियों को प्रशासन की बात समझ आई. उनको वापस पीडीएस सहित दूसरी रोकी गई योजनाओं का लाभ देने लगे. यहां तक कि तालाब निर्माण और प्लांटेशन का काम भी उनको ही दे दिया. उनको आत्मनिर्भर बनाने में प्रशासन ने साथ दिया. वे अब खुश हैं. यह जंग सिर्फ पर्यावरण और जंगल बचने की थी."</p><p>भव्या मित्तल ने नल जल योजना (Nal Jal Yojna) में देश का पहला जिला बना कर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से अवार्ड लिया. बेमौसम तूफान और बारिश में केले की फसल उत्पादक किसानों के साथ सहानुभूति रख खेतों में पहुंच गई.&nbsp;<br><br>आजीविका मिशन योजना में हजारों महिलाओं को प्रोत्साहित किया और आत्मनिर्भर बना दिया. इसके पहले नीमच में पदस्थ रह कर कोरोना काल में खुद ने जान जोखिम में डाल कर कंटेनमेंट एरिया में लोगों की मदद की. नीमच जिले की भरबड़िया पंचायत को कुपोषण मुक्त बनाने में खास भूमिका निभा कर भी भव्या मित्तल दिल्ली तक सुर्ख़ियों में आई थी. भव्या मित्तल भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में टॉप 50 में शामिल थीं. &nbsp;&nbsp;</p><p>कलेक्टर भव्या मित्तल का कहना है - "<em>अहिल्या बाई होल्कर समाज की आदर्श रहीं. परिवार में एक छोटी सी बेटी को भी उतना ही प्यार देना, पारिवारिक दायित्व निभाना और कड़े प्रशासनिक निर्णय लेना चुनौतीपूर्ण हैं. इनमें तालमेल बैठाना ही समाज की सेवा है. मेरा मकसद समाज के जरूरतमंद लोगों को मदद करना है.बुरहानपुर को और हैरिटेज प्लेस और पॉवर हेंडलूम में अधिक पहचान दिलाने के प्रयास चल रहे हैं</em>."&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Mon, 29 May 2023 18:21:52 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/ias-bhavya-mittal-fights-with-mafia-to-become-present-day-ahilyabai]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9vMpiDjsb1P83Hw6VGY2.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9vMpiDjsb1P83Hw6VGY2.jpg"/></item><item><title><![CDATA[हर घर पानी : कलेक्टर को पीएम अवार्ड फॉर एक्सीलेंस ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/burhanpur-collector-awarded-pm-excellence-award</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/qc8598KaOHwgLZPk05x5.jpg"><p>मध्य प्रदेश का सबसे दूरस्थ समझे जाने वाला बुरहानपुर एक बार फिर सुर्ख़ियों में है. सही प्रशासनिक प्रबंधन, समन्वय, और यहां की महिलाओं की कड़ी मेहनत ने जिले को एक और तमगा दिलवा दिया. हर घर जल पहुंचा कर परिवारों की प्यास बुझाने में सफल इस जिले की कलेक्टर भव्या मित्तल को सिविल सर्विस डे पर दिल्ली में  'प्रधानमंत्री अवार्ड फॉर एक्सीलेंस' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया.इस उपलब्धि के बाद स्वयं सहायता समूह की महिलाएं जश्न मन रहीं हैं.<br>  <br>जिले की लगभग 1700 महिलाओं ने अलग-अलग समूह में जुड़ कर यह कमाल कर दिखाया. नल जल योजना और जल जीवन मिशन के तहत यह सफलता मिली. आजीविका मिशन की जिला परियोजना प्रबंधक संतमति खलखो कहती हैं- "पिछले दस महीने में समूह की महिलाओं ने 80 लाख से अधिक रुपए का राजस्व कमा कर पंचायतों को सौंपा. कुल वसूली की बीस प्रतिशत राशि समूह सदस्यों को मिली. जहां गांव के हर घर में पानी पहुंचा वहीं स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक लाभ भी हुआ."</p>
<p>इसके पहले जिले के बुरहानपुर और खकनार ब्लॉक के कई ऐसे गांव थे जहां महिलाओं को पीने के पानी के लिए रातभर मशक्क्त करना पड़ती थी. पंचायत के कर्मचारी पूरा पैसा वसूल नहीं पाते जिससे नल-जल योजना ठप पड़ गई.अब इन्हीं महिलाओं में प्लंबर और टेक्नीशियन की ट्रेनिंग लेकर नया हूनर भी तैयार कर लिया.पिछले कुछ माह से सुर्ख़ियों में आए इस जिले की कलेक्टर भव्या मित्तल को यही वजह पीएम नरेंद्र मोदी ने सम्मानित किया.    </p>
<p>जिले में जल जीवन मिशन पर पूरी तरह मॉनिटरिंग की जा रही है. पीएचई विभाग के कोर्डिनेटर राजेश ठाकुर कहते हैं- " शुरू में यह काम बहुत चुनौतीपूर्ण था.167 पंचायतों के 254 गांवों में पेयजल वितरित किया जा रहा है.दरियापुर गांव के जयश्री कृष्णा समूह की अध्यक्ष रीना पाटिल कहती हैं- "हमारे गांव में पंद्रह सौ नल कनेक्शन हैं. पानी की व्यवस्था के बावजूद पूरा गांव परेशान था.हमने कमान संभाली और पेयजल व्यवस्था पटरी पर आ गई.ख़ुशी के जल शक्ति मंत्रालय ने दिल्ली में सम्मानित किया." बहादरपुर गांव के प्रगति स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष दीपिका सोनी हो या दापोरा गांव के स्वर्णलता स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष आशा महाजन,सचिव संगीता चौधरी सभी ने अपने-अपने इलाके में रिकॉर्ड वसूली की और योजना को साकार कर दिया.</p>
<p>बुरहानपुर जिले ने जल जीवन मिशन और नल-जल योजना को लेकर प्रदेश और देश में सुर्ख़ियों में है.इस अवार्ड के पहले पूर्व कलेक्टर प्रवीण सिंह को भी राष्ट्रपति अवार्ड मिल चुका है.इस जिले की पेयजल व्यवस्था और SHG महिलाओं का ज़िक्र पीएम नरेंद्र मोदी अपनी मन की बात कार्यक्रम में कर चुके हैं. "प्रधानमंत्री एक्सीलेंस अवार्ड" लेने के बाद कलेक्टर भव्या मित्तल कहती हैं- " इसका अवार्ड का श्रेय उन 'टेक्स सखी' ग्रामीण महिलाओं को जाता जिन्होंने हर मौसम चाहे कड़ी धूप हो,सर्दी हो या बारिश में वसूली की और पूरे गांव के हर घर तक पानी पहुंचाया. यह मेरे और जिले के लिए गर्व की बात है." जिले में टेक्स सखी जहां बेहतर काम कर रहीं हैं वहीं कई समूह की महिलाएं दूसरे कामों से जुड़ कर भी आर्थिक रूप से मजबूत हुईं हैं.</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/toDLADXWJrCrkshGPkGt.JPG" alt="pm excellence"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>(रविवार विचार की स्टोरी क्लिप)</em></span></p>
<p><a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-from-burhanpur-manages-water-tax">https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-from-burhanpur-manages-water-tax</a> </p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Sat, 29 Apr 2023 18:07:22 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/burhanpur-collector-awarded-pm-excellence-award]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/qc8598KaOHwgLZPk05x5.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/qc8598KaOHwgLZPk05x5.jpg"/></item><item><title><![CDATA[यहां रेशा रेशा है काम का.... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-made-handicrafts-by-banana-fiber</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/gPAQ2NXwlmKrXcc6lyNO.jpeg"><p>खेतों में मजदूरी करते-करते बरसों गुजार देने वाली प्रियंका कुशवाह अब घर से कमान संभाल रही है. प्रियंका कहती है-"मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि जिन खेतों में केले तोड़ कर उसके तने काट कर सूखने के लिए फेंक देते थे,वही हमारे स्वाभिमान की ज़िन्दगी का हिस्सा हो जाएंगे. हम गांव  महिलाएं इन केले के तनों से निकाले गए रेशों से क्रॉफ्ट के आईटम बना रहे हैं. इन रेशों ने हमारी ज़िंदगी बदल दी. " बुरहानपुर जिले के जयसिंगपुरा की महिलाओं की मेहनत और हाथों का कमाल आज मिसाल बन गया. उनके हाथों से बनी सुंदर और नायब चीज़ें पर्यटकों को लुभा रही है. रेशे से तैयार प्रोडक्ट की पहचान दूर-दूर तक बन रही है. </p>
<p>दरअसल तीन साल पहले तक बुरहानपुर जिले के केले किसान फसल लेने के बाद अगली फसल लेने के लिए ये सूखे तने काट कर फेंक देते थे. इसका कोई उपयोग नहीं किया. सरकार की ' एक जिला एक उत्पाद ' योजना का लाभ ले कर शहर के युवक मेहुल श्रॉफ ने लोन लेकर  केले के तनों से रेशे निकालने की मशीन लगाई. इसी से महिला समूह के आत्मनिर्भर बनने के रस्ते खुल गए. जिले में केले की बंपर पैदावार के बाद यहां केले के पेड़ के तने आसानी से मिल जाते हैं. इन्हीं से रेशे निकाल सुखाए जाते हैं. </p>
<p>पुरातत्व और संस्कृति विभाग की तरफ से भेजे गए टेक्सटाइल विभाग से जुड़े ट्रेनर धर्मेंद्र पाटिल कहते हैं -"इन महिलाओं को समूह में ट्रेंड किया गया. केले के रेशे से इन महिलाओं को रस्सी ,देव सथल की सफाई उपयोगी झाड़ू ,बास्केट्स,केप सहित अन्य आइटम बनाना सिखाए. अब ये पूरी तरह ट्रेंड हैं. "आजीविका मिशन की परियोजना प्रबंधक कृष्णा रावत कहतीं हैं -" ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और मजदूरी से मुक्त करने में प्रशासन काफी हद तक सफल रहा. जो महिलाएं कारखाने में रेशा लेकर  वही काम करना नहीं चाहती ,उन्हें घर पर ही प्रोडक्ट बनाने की सुविधा दी गई. इसमें ग्रामीण महिलाओं के  अलावा नेपानगर की स्वसहायता समूह की शहरी रोजगार योजना अंतर्गत इस रोजगार से जोड़ा गया है. "फाइबर क्राफ्ट्स से लगभग शहरी और ग्रामीण इलाके की सौ से अधिक महिलाएं अलग-अलग तीस समूहों में जुड़ कर अब मजदूरी से दूर इस कारोबार से जुड़ आत्मनिर्भर हो गईं.     </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/glBzlfSTCNvaqXGpjBj7.jpeg" alt="SHG"></p>
<p>नेपानगर की सरला सचिन कहती हैं -" मैं बेरोजगार थी.इस बीच प्रशासन की मदद से मैंने रेशे से आईटम बनाना सीख लिया. अधिकारी हमें मार्केटिंग भी सीखा रहे हैं. मुझे ख़ुशी है कि अब खुद इन तैयार आइटम से पैसा कमा लेती हूं. " इस कारोबार से जुडी रंजना पंवार भी गर्व से बताती है - " घर कि जरूरतें पहले पूरी नहीं हो पाती थी. अब वह इस कला से पैसा कमा रहीं हैं. उनके ग्रुप में तीस महिलाएं हैं. " प्रियंका और उनके ही परिवार की नर्मदा बाई कहती हैं -"  हम लोग अब बास्केट्स ,केप,चटाई ,योग मेट आदि बना लेती है.इन्हें बाहर से आने वाले टूरिस्ट बहुत लेते हैं."</p>
<p>कलेक्टर भव्या मित्तल कहती हैं -" जिले में केले की पैदावार देश में खास जगह रखती है. किसान अभी तक केले के पेड़ और फसल लेने के बाद काट कर फेंक देते थे, लेकिन इसे रॉ मटेरियल बनाकर इससे फाइबर्स निकाल उनका उपयोग किया. इससे जिले की महिलाओं को नई पहचान मिली. टूरिज़्म डिपार्टमेंट से भी कोर्डिनेट किया गया है ,यह विभाग जिला टूरिज़्म काउंसिल को आर्थिक सपोर्ट भी कर रहा है. जिससे ये आईटम प्रदेश और राष्ट्रीय प्रदर्शनी में भी और प्रभावी ढंग से शामिल किए जा सके. प्रयास किए जा रहें हैं कि इस वेस्ट मटेरियल से बनाए गए आकर्षक प्रोडक्ट को विदेशी धरती पर भी पहचान मिले. "     <br>        </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/fHAxccNmEuV9gDlZWP2J.jpeg" alt="SHG"></p>
<p>जिला प्रशासन और कलेक्टर भव्या मित्तल खुद इस प्रोडक्ट के लिए लगातार समूह कि महिलाओं को प्रोत्साहित कर ट्रेनिंग दिलवा रही हैं. जिला प्रशासन के सहयोग और महिलाओं के प्रयासों से अब तक शाहजहां के लाल ताजमहल और मुमताज सहित कई कहानियों को अपने इतिहास में समेटे बुरहानपुर शहर की मेहनती महिलाएं फाइबर्स क्रॉफ्ट निर्माता के रूप में नया इतिहास रच देगीं.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 23 Mar 2023 17:11:32 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-made-handicrafts-by-banana-fiber]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/gPAQ2NXwlmKrXcc6lyNO.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/gPAQ2NXwlmKrXcc6lyNO.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[बुरहानपुर की टेक्स सखियां... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-women-of-burhanpur-become-jal-sakhis</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tS0WTFo8bg3EyhXO1y4t.jpeg"><p><iframe style="width: 1285px; height: 720px;" src="https://www.youtube.com/embed/nn0zgIETSLc" width="1285" height="720" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>स्वसहायता समूह की ये दीदियां अपने गांव में पीने के पानी की कमान संभाले हुए है. और इसकी ख़ास वजह 'टेक्स सखी' बन कर जल कर की समय से वसूली करना.यहां की महिलाओं के काम का अंदाज़ राज्य और केंद्र सरकारों में चर्चा में बना हुआ है. यहां के नल जल व्यवस्था और कर वसूली को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज़िक्र किया तो कोई समूह का दिल्ली में सम्मान हो रहा. </p>
<p>आखिर बुरहानपुर जिला और यहां के समूह की दीदियों ने क्या कमाल किया आइए उनसे ही सुनते हैं. दरियापुर गांव के जय श्री कृष्णा समूह की अध्यक्ष रीना पाटिल बताती है -<em>"गांव में नल होते हुए भी पानी नसीब में न था. पंद्रह सौ नल कनेक्शन हैं. पंचायत कर्मचारियों ने हाथ खड़े कर दिए. जब हम ग्यारह दीदियों के समूह ने काम संभाला तो विरोध हुआ. हमने एक न सुनी. साढ़े तीन लाख रुपए से ज्यादा का कलेक्शन कर लिया. मुझे जल शक्ति मंत्रालय ने दिल्ली बुलाकर सम्मानित किया. अब गांव के पुरुष भी साथ देने लगे."       </em></p>
<p>बहादरपुर गांव की प्रगति सहायता समूह की अध्यक्ष दीपिका सोनी कहती हैं- <em>"हमारे गांव में लगभग ढाई हजार नल कनेक्शन हैं. कई सालों से घरों में टाइम पर पानी मिला ही नहीं. पानी के लिए कभी खेत तो कभी इधर -उधर भटकते.  उधर अधिकतर महिलाएं खेतों में मजदूरी करती हैं. जो पानी की व्यवस्था जुटाने में मजदूरी पर नहीं जा पाती. पंचायत टेक्स वसूल नहीं कर पाई. प्रशासन ने हमें ये काम दिया."</em></p>
<p>इस गांव में अब रोज़ पानी मिलता है. और अब तक एक साल में पांच लाख की वसूली कर चुकीं हैं.इस समूह में दस दीदियां हैं.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 23 Mar 2023 15:38:59 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-women-of-burhanpur-become-jal-sakhis]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tS0WTFo8bg3EyhXO1y4t.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tS0WTFo8bg3EyhXO1y4t.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर वॉटर मैनेजमेंट संभाल रहीं महिलाओं को बताया मिसाल ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/pm-modi-praised-women-shg-handling-water-tax-in-burhanpur</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6SZgn5jrJKzkSjDVIOQO.jpg"><p><iframe style="width: 1198px; height: 672px;" src="https://www.youtube.com/embed/piTqr7XDPyA" width="1141" height="640" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>पिछले दो दिन से  बुरहानपुर जिले के बीहड़ गांव खातला की रहने वाली मंजू बाई अपनी साथियों के साथ फुले नहीं समा रही. मंजू बाई कहती हैं -" हम पानी की बूंद-बूंद इकठ्ठा करने के लिए जद्दोजहद करते थे. समूह में महिलाएं एक साथ जुटी और और हर घर की प्यास बुझा दी. इस प्रबंधन को लेकर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को मिसाल बताया.मैं बहुत खुश हूं." एक दिन पहले पीएम मोदी के ट्वीट ने गांव और इन वाली ग्रामीण महिलाओं को सुर्ख़ियों में ला दिया. कुछ दिन पहले ही हमने मप्र के उत्तर पश्चिम छोर पर बसे  नीमच के धनेरिया कलां  गांव की महिलाओं और उनके जल प्रबंधन की स्टोरी को बताया था. अब प्रदेश के दक्षिण पश्चिम छोर के बीहड़ गांव खातला (खड़की) चलते हैं. इन जांबाज़ महिलाओं के काम पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की नज़र पड़ गई. फिर क्या था, मोदी ने अपने अंदाज़ में इस गांव और महिलाओं के काम की सराहना की.जल शक्ति मंत्रालय के मंत्री प्रह्लाद पटेल के ट्वीट को पीएम मोदी ने रीट्वीट कर इसे और चर्चा में ला दिया.  </p>
<p>बुरहानपुर से लगभग सौ किमी दूर गांव खातला की कोई साढ़े तीन सौ-चार सौ की आबादी और करीब सवा सौ घर. मंजू बाई कहती हैं -" मेरे गांव की महिलाएं रोज ज़िंदगी की कठिन परीक्षा से गुजरती.  पीने के पानी के लिए गांव में सिर्फ एक कुआं.  प्यास बुझने का नाम नहीं लेती. महिलाएं दूर-दूर खेत से पानी लातीं .सूरज माथे पर चढ़ जाता. बच्चे रोज स्कूल जाने में लेट हो जाते. मजदूरी के लिए लेट जाने पर उधर मजदूरी के पैसे काट लिए जाते."</p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Wed, 22 Mar 2023 11:20:33 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/pm-modi-praised-women-shg-handling-water-tax-in-burhanpur]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6SZgn5jrJKzkSjDVIOQO.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6SZgn5jrJKzkSjDVIOQO.jpg"/></item><item><title><![CDATA[केले के चिप्स बने फायदे का सौदा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-wome-selling-banana-chips</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Rx5Q4lX7hmVMvfV3s9Jw.jpeg"><p>जिस महिला को कभी रेलवे स्टेशन जाना नसीब न था न रेल से कोई लंबी यात्रा की. इस महिला के हाथ से बने केले के चिप्स ने ऐसी धूम मचाई कि रेल के मुसाफिर की जुबान पर भी स्वाद चढ़ गया.यही चिप्स अब रेल सफर का साथी बन गया.  वही महिला अब शान से रेलवे प्लेटफॉर्म पर घंटों बिताती है. इस अलग स्वाद का नतीजा था कि रेलवे विभाग ने इस महिला को रेलवे स्टेशन पर दुकान देकर केले के चिप्स बेचने की सुविधा दे दी.यह दिलचस्प कहानी बुरहानपुर की है. हम आपको  शहर के इस किरदार और महिलाओं के समूह से मिलवाते हैं, जिन्होंने आजीविका मिशन के सहयोग से खुद को साबित कर दिया कि यदि मदद और हौसला मिले तो महिलाएं परिवार के लिए कुछ भी कर सकती हैं.</p>
<p>बुरहानपुर के लालबाग चिनचाला की रहने वाली पिंकी सुरकैया कहती है -" कुछ साल पहले तक हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. पति के छोटे मोटे कामकाज में मदद करती थी. साथ में उसके साथ की महिलाएं भी मजदूरी के लिए जाती थीं. अलग काम के लिए कोई पूंजी भी न थी. तीन साल पहले जिला पंचायत की एक बैठक में केले चिप्स बनाने की सलाह मिली. और उस सलाह ने ज़िन्दगी को संवार दिया. "<br>जिला पंचायत बुरहानपुर की आजीविका मिशन की परियोजना प्रबंधक कृष्णा रावत ने बताया कि जिले की जरूरतमंद महिलाओं को समूह बनवाने में मदद कर उन्हें रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है. इसी प्रक्रिया में लालबाग क्षेत्र की खेत मजदूर महिलाओं से भी संपर्क किया. तीन साल पहले राधा बाई अध्यक्ष बनी और चाचा नेहरू महिला स्वसहायता समूह बनाया. कोरोना काल के बाद इसी समूह की कुछ महिलाओं ने केले के चिप्स का धंधा शुरू किया. और कुछ ने बकरी पालन ,भैंस पालन सहित केले के खेतों में काम शुरू किया. इस समूह में राधा बाई ,सरस्वती बाई ,रेखा बाई ,ज्योति बाई ,लक्ष्मी बाई ,उजाला बाई,संगीता बाई भी जुड़े हैं.  </p>
<p>समूह कि पिंकी आगे बताती है कि -" लगभग चार माह पहले रेलवे ने कैंप लगवाया. इस कैंप में हमने केले से बने चिप्स भी परोसे . इस केले के चिप्स का अच्छे से प्रदर्शन किया. फिर क्या था ,रेलवे के अधिकारियों ने चिप्स प्रमोशन के लिए प्लेटफॉर्म पर स्टॉल लगाने की विशेष अनुमति दे दी.अब लोकल लोगों के साथ रेल के यात्री भी चिप्स के पैकेट खरीद रहे हैं. देखते ही देखते कमाई बढ़ रही है."</p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/xB8xEMavgODQ795ytDLU.jpeg" alt="burhanpur banana chips stall"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>फोटो क्रेडिट : समीर महाजन ,बुरहानपुर</em></span></p>
<p>यही नहीं अब इस मिशन में पिंकी के साथ उनके पति भगवान सुरकैया भी मदद कर रहें हैं. वह सुबह आठ बजे से शाम बजे तक रेलवे स्टेशन पर चिप्स बेचते हैं. पिंकी गर्व से बताती है -" उसके बनाए चिप्स ढाई सौ रुपए किलो बिकते हैं.कच्चे केले वे लोकल मंडी से लाते हैं.वह पांच सौ रुपए लगभग रोज कमा लेती है. शाम को रोज खुद हाथ से चिप्स बनाते हैं."</p>
<p>कलेक्टर भव्या मित्तल कहती हैं -" जिले में केले की भरपूर पैदावार है. यह मुख्य फसलों में है. समूह का लगातार हौसला बढ़ाया गया.  प्रयास सफल हुए,रेलवे स्टेशन पर केले के चिप्स बेचने का अवसर मिसाल बन गया. जिले में दूसरे समूहों को भी रोजगार के लिए जोड़ा जा रहा है." </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Fri, 10 Mar 2023 17:22:40 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-wome-selling-banana-chips]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Rx5Q4lX7hmVMvfV3s9Jw.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Rx5Q4lX7hmVMvfV3s9Jw.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[प्रधानमंत्री जी के ट्वीट से बनी मिसाल ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/modi-applauds-shg-women-for-setting-example-on-water-management</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ObDzv3zD6LNhVErC9V8P.jpeg"><p>पिछले दो दिन से बुरहानपुर जिले के बीहड़ गांव खातला की रहने वाली मंजू बाई अपनी साथियों के साथ फुले नहीं समा रही. मंजू बाई कहती हैं -" हम पानी की बूंद-बूंद इकठ्ठा करने के लिए जद्दोजहद &nbsp;करते थे. समूह में महिलाएं &nbsp;एक साथ जुटी और और हर घर की प्यास बुझा दी. इस प्रबंधन को लेकर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को मिसाल बताया.मैं बहुत खुश हूं. " एक दिन पहले पीएम मोदी के ट्वीट ने गांव और इन&nbsp; ग्रामीण महिलाओं को सुर्ख़ियों में ला दिया. कुछ दिन पहले ही हमने मप्र के उत्तर पश्चिम छोर पर बसे नीमच के धनेरिया कलां गांव की महिलाओं और उनके जल प्रबंधन की स्टोरी को बताया था. अब प्रदेश के दक्षिण पश्चिम छोर के बीहड़ गांव खातला (खड़की) चलते हैं. इन जांबाज़ महिलाओं के काम पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की नज़र पड़ गई. फिर क्या था, मोदी ने अपने अंदाज़ में इस गांव और महिलाओं के काम की सराहना की.जल शक्ति मंत्रालय के मंत्री प्रह्लाद पटेल के ट्वीट को पीएम मोदी ने रीट्वीट कर इसे और चर्चा में ला दिया. &nbsp;</p><blockquote class="twitter-tweet"><p dir="ltr" lang="hi">बुरहानपुर में नारी शक्ति का यह प्रयास देशभर के लिए एक मिसाल है। <a href="https://t.co/MWGGoOZTbc" data-mce-href="https://t.co/MWGGoOZTbc">https://t.co/MWGGoOZTbc</a></p>— Narendra Modi (@narendramodi) <a href="https://twitter.com/narendramodi/status/1632214887706546177?ref_src=twsrc%5Etfw" data-mce-href="https://twitter.com/narendramodi/status/1632214887706546177?ref_src=twsrc%5Etfw">March 5, 2023</a></blockquote><p>बुरहानपुर से लगभग सौ किमी दूर गांव खातला की कोई साढ़े तीन सौ -चार सौ की आबादी और करीब सवा सौ घर. मंजू बाई कहती हैं -" मेरे गांव की महिलाएं रोज ज़िंदगी की कठिन परीक्षा से गुजरती . पीने के पानी के लिए गांव में सिर्फ एक कुआं. प्यास बुझने का नाम नहीं लेती. महिलाएं दूर -दूर खेत से पानी लात. सूरज माथे पर चढ़ जाता. बच्चे रोज स्कूल जाने में लेट हो जाते. मजदूरी के लिए लेट जाने पर उधर मजदूरी के पैसे काट लिए जाते."</p><p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/TNVOExy36gOofY7RrXfi.jpeg" alt="burhanpur" data-mce-src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/TNVOExy36gOofY7RrXfi.jpeg"></p><p><em><span style="font-size: 8pt;" data-mce-style="font-size: 8pt;">फोटो क्रेडिट : समीर महाजन ,बुरहानपुर</span></em></p><p>ग्रामीण विशेष कर महिलाएं रोज ही परेशानियों से जूझते. जिला पंचायत ने हमें नई राह दिखाई.कल्याणी स्वसहायता समूह बनाया. 15 महिलाओं ने नल-जल योजना की कमान संभाली. देखते ही देखते समूह ने एक लाख 60 हजार रुपए इकट्ठे कर लिए.अब यह गांव "पानीदार" हो गया. मंजू आगे बताती है -" पानी समय पर मिलने से पूरे दिन के काम ठीक हो गए. समूह सदस्यों को स्कूल में खाना बनाने का काम भी मिल गया. जो एक और जरिया कमाई का है. "&nbsp;</p><p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/pThwcGJhkQuD0vLr7jkn.jpeg" alt="burhanpur" data-mce-src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/pThwcGJhkQuD0vLr7jkn.jpeg"></p><p><em><span style="font-size: 8pt;" data-mce-style="font-size: 8pt;">फोटो क्रेडिट : समीर महाजन ,बुरहानपुर</span></em></p><p>आजीविका मिशन की परियोजना प्रबंधक कृष्णा रावत कहती हैं -" जिले में महिला समूह लगातार तैयार किए जा रहे हैं. रोजगार के नए रस्ते खुल रहे हैं. "कलेक्टर भव्या मित्तल कहती हैं -" जिले की जनजातीय महिलाओं ने साबित कर दिया कि अवसर मिले तो वे किसी भी गांव कि तक़दीर बदल सकती है. ऐसे दूसरे समूह को भी रोजगार दिलवाने के लिए ट्रेनिंग लगातार दिलवाई जा रही है. पीएम मोदी कि सराहना से जिले कि समूह से जुडी महिलाओं का हौसला बढ़ा है. "</p><p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/uRIJUecbLmjBIwsalshB.jpeg" alt="burhanpur" data-mce-src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/uRIJUecbLmjBIwsalshB.jpeg"></p><p><em><span style="font-size: 8pt;" data-mce-style="font-size: 8pt;">फोटो क्रेडिट : समीर महाजन ,बुरहानपुर</span></em></p><p>क्षेत्रीय सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल इसे बड़ी उपलब्धि मान रहे. वे कहते हैं -" स्वच्छ सुजल मिशन के काम पर जिले में मुहर लग गई. मंत्रालय और प्रधान मंत्री मोदी सराहना कर हमारे निमाड़ की शान बढ़ा दी. "</p><p><br data-mce-bogus="1"></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Tue, 07 Mar 2023 19:37:27 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/modi-applauds-shg-women-for-setting-example-on-water-management]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ObDzv3zD6LNhVErC9V8P.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ObDzv3zD6LNhVErC9V8P.jpeg"/></item></channel></rss>