<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ चेन्नई]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/cennii</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/cennii" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 12 Aug 2023 15:10:52 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[AVSAR स्कीम से मिल रही SHG महिलाओं को आर्थिक उड़ान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/avsar-scheme-providing-platforms-in-airports-to-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8qAg4r94TMe787ITeOvd.jpg"><p>स्वयं सहायता समूह भारत के सबसे शक्तिशाली चैनल है, जो ग्रामीण और शहरी महिलाओं को आजीविका देने के लिए बनाये गए है. <strong>Self Help Groups महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ स्वावलंबी बनाने </strong>का महत्वपूर्ण जरिया हैं. सरकार भी सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को बढ़ावा देने के लिए नई-नई योजनाएं और प्रयास कर रही है. समूह के तहत उत्कृष्ट उत्पादन, स्थानीय कला और शिल्प को बढ़ावा दिया जा रहा, जिनकी आज काफी डिमांड है. SHGs को अगर जरुरत हैं, तो बस अपने उत्पादन को प्रदर्शित करने और बेचने के लिए स्थान की.&nbsp;</p>
<h2>SHGs के प्रोडक्ट्स को मिलेगी ग्लोबल पहचान&nbsp;</h2>
<p>महिला SHGs की इन्हीं जरूरतों को पूरा करने के लिए <strong>प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (<a href="https://ravivarvichar.in/photovideo/an-empowered-woman-can-empower-the-country-pm-narendra-modi">PM Narendra Modi</a>)</strong> के दृष्टिकोण के अनुरूप <strong>" <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/connecting-homes-to-gangas-blessing">एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया</a> " (AAI)</strong> ने हवाई अड्डों पर self help groups के लिए स्थान अलॉट किया गया है. जहां <strong>SHG महिलाओं, कारीगरों और शिल्पकारों के प्रोडक्ट्स को विकसित</strong> करने और उसकी &nbsp; मार्केटिंग के लिए, एयरपोर्ट पर ही जगह अलॉट की गई है. जिससे स्थानीय कला को ग्लोबल पहचान बनाने में मदद मिलेगी.&nbsp;</p>
<h3>SHGs को पंद्रह दिनों के लिए मिलेगी जगह&nbsp;</h3>
<p><strong>"<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/connecting-homes-to-gangas-blessing">अवसर</a> " (Airports As Venue For Skilled Artists Of The Region, AVSAR)</strong> योजना के अंतर्गत, हर AAI ऑपरेटेड एयरपोर्ट पर 100-200 वर्ग फीट का क्षेत्र निर्धारित किया गया है. यह जगह SHGs को 15 दिन के लिए दी जाएगी. जहां वह अपने प्रोडक्ट्स को <strong>राष्ट्रीय और अंतर-राष्ट्रीय यात्रियों</strong> के सामने प्रदर्शित करेंगी. Self help group को नए बाजार और ग्राहकों के साथ मिलने का मौका मिलेगा, इससे उनके प्रोडक्ट्स की डिमांड भी बढ़ेगी.&nbsp;</p>
<p><img alt="avsar pib" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/409x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/lJ6Y9xLgIzLzCwnz6BaK.jpeg" style="width: 409px;"></p>
<p><em>Image Credits : Rising Kashmir</em></p>
<p>कई एयरपोर्ट्स पर पहले से ही, ऐसे आउटलेट्स बने हुए है, जैसे <strong>चेन्नई (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/sushila-viswanathan-the-hidden-support-behind-anand-viswanathan">Chennai</a>), अगरतला (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/sushila-viswanathan-the-hidden-support-behind-anand-viswanathan">Agartala</a>), देहरादून (Dehradun), कुशीनगर (Kushinagar), और अमृतसर (Amritsar)</strong>, जहां स्थानीय SHG महिलाएं देशी प्रोडक्ट्स जैसे पैकेज्ड पापड़, अचार, बांस के बने बैग/बॉटल/लैंप सेट आदि हवाई यात्रियों को प्रदर्शित कर बेच रहीं है.&nbsp;</p>
<p>राज्य सरकार की मदद से, अब और भी एयरपोर्ट्स, <strong>रांची (Ranchi), कोलकाता (Kolkata), इंदौर (<a href="https://ravivarvichar.in/photovideo/indores-ladli-behna-sena-is-fighting-crimes-against-women">Indore</a>), भोपाल (Bhopal), मदुरई (Madurai), सूरत (Surat), भुवनेश्वर (Bhubaneswar), रायपुर (Raipur)</strong> के SHGs को जगह अलॉट करने का काम शुरू किया जायेगा.</p>
<p><img alt="shg" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/394x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/yutzrc4a4wwjqIwfq1ax.png" style="width: 394px;"></p>
<p><em>Image Credits : IAS Gyan</em></p>
<h3>महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर&nbsp;</h3>
<p>एएआई की यह पहल SHGs के लिए सकारात्मक कदम है, जो समूह की महिलाओं को आर्थिक वृद्धि देने के साथ सशक्त बनाएगा और उनके उत्पादों को ग्लोबल पहचान दिलाने में मदद करेगा. जिससे महिलाओं को नई पहचान के साथ उन्हें और विकसित होने का मौका मिलेगा. इससे <strong>SHG women</strong> के जीवन में सुधार होगा और उन्हें व्यापारिक और सांस्कृतिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा.&nbsp;</p>
<p>SHGs, देश के ऑर्गेनाइज़्ड सेक्टर के विकास में अहम् भूमिका निभा रहे है. सरकार भी इन समूहों को आत्मनिर्भर &nbsp;बनाने में निरंतर समर्थन कर, उनके नये उद्योगों और व्यापारिक अवसरों को पहचान दिलाने में सहायता देने &nbsp;के लिए नई-नई योजनएं बना रहीं है.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Sat, 12 Aug 2023 15:10:52 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/avsar-scheme-providing-platforms-in-airports-to-shg-women]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8qAg4r94TMe787ITeOvd.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8qAg4r94TMe787ITeOvd.jpg"/></item><item><title><![CDATA[बास्केटबॉल कोर्ट की ऊंची छलांग से आसमान छूती अनीता पॉलदुरई ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/anita-pauldurai-touching-the-skies-of-basketball</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/RFPmE6CGdk3WNTDQ5uuU.jpg"><h2><span>बास्केटबॉल खिलाड़ी अनीता पॉलदुरई को किया गया पद्मश्री से सम्मानित&nbsp;</span></h2>
<p dir="ltr"><span>किसी की भी ज़बान पर जब भारतीय महिला बास्केटबॉल खिलाड़ी का नाम आता है, तो बात बिना अनीता पॉलदुरई का जिक्र किये खत्म ही नहीं हो सकती.&nbsp;<strong>अनीता पॉलदुरई (Anitha Pauldurai) भारतीय महिला राष्ट्रीय बास्केटबॉल टीम (<a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/women-empowering-themselves-through-running">Women National Basketball Team</a>) की पूर्व कप्तान</strong> रहीं. उन्होंने 18 वर्षों तक भारतीय टीम के लिए खेला. अनीता नौ एशियाई गेम्स में खेलने वाली पहली और एकमात्र महिला हैं. वह <strong>बास्केटबॉल परिसंघ (ABC)</strong> चैंपियनशिप में लगातार राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व कर रहीं हैं. 26 जनवरी 2021 के दिन अनीता को <strong>पद्मश्री (Padmashree Award)</strong> से सम्मानित किया गया. लेकिन उन्हें उनके अठारह साल के करियर में उन्हें <strong>अर्जुन पुरष्कार (Arjun Award)</strong> नहीं दिया गया, जो की खिलाड़ियों में भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान माना जाता है.&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>अनीता <strong>तमिलनाडु (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-will-sell-thier-products-in-poomalai-centre-inaugurated-by-tamil-nadu-cm">Tamil Nadu</a>)</strong> के <strong>चेन्नई (<a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/women-empowering-themselves-through-running">Chennai</a>)</strong> शहर की रहने वाली हैं. उन्होंने 11 साल की उम्र से ही बास्केटबॉल खेलना शुरू किया. अनीता के खेल का&nbsp; सफर की शुरुआत बॉलीबाल से हुई, फिर उन्होंने एथलेटिक्स में कल्पना की उड़ान भरी और आखिरकार अंत में बास्केटबॉल को चुना. उन्होंने अपने खेल के करियर की शुरआत चेन्नई के राईजिंग स्टार क्लब से की. अनीता ने क्लब की तरफ से खेलकर अपनी पहचान बनाई और इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय नेशनल टीम में शामिल कर लिया गया. उन्होंने<strong> राष्ट्रीय चैंपियनशिप (National Championship)</strong> में 30 से अधिक पदक जीते हैं.&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>अपने करियर के दौरान उन्होंने भारत के लिए कई उपलब्धियां हासिल की,&nbsp; 2001 में जब भारतीय बास्केटबॉल टीम बनाई गई, तब&nbsp; उन्हें टीम में शामिल किया गया. 19 साल की उम्र में वह टीम का कप्तान बनी और भारत की सबसे काम उम्र की कप्तान बनने का गौरव प्राप्त किया. साल 2009 <strong>वियतनाम</strong> <strong>(Vietnam)</strong> में, एशियाई इंडोर खेलों में,उन्होंने भारतीय टीम का नेतृत्व कर रजत पदक जीता. साल 2011 श्रीलंका में दक्षिण एशियाई बीच खेलों गेम्स में, उन्होंने देश को स्वर्ण पदक दिलाया.&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>गर्भावस्था और प्रसव के कारण, साल 2015 में वह गेम्स से दूर रहीं, लेकिन उन्होंने प्रेरणादायक स्टार खिलाड़ी के रूप में 2017 में फिर वापसी की और भारत को&nbsp;<strong>डिवीज़न B FIBA महिला एशिया कप (Women Asia Cup)</strong>&nbsp; में विजय के लिए बढ़त दिलाई. इसके बाद उन्होंने संन्यास ले लिया और भारतीय अंडर-16 टीम की कोच बनी. अनीता के मार्गदर्शन में, टीम ने साल 2017 में&nbsp; <strong>FIBA UNDER 16 महिला एशियाई चैंपियनशिप (Women Asia Championship)</strong> के डिवीज़न B का ख़िताब अपने नाम किया.&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>पद्मश्री पुरष्कार अनीता के जीवन में, उनके खेल के सफर को महत्वपूर्ण उपलब्धियों को समर्थन करता है और उनके योगदान को देश की तरफ से सम्मानित करता है. अनीता बास्केटबॉल गेम को बढ़ाने और इसकी समस्यायों के बारे में भी खुलकर बात रखती हैं. उनके अनुभवों से पता चलता हैं कि लड़कियों को समान अवसर मिलने चाहिए, उन्हें आज़ादी और सुरक्षा का माहौल मिलना जरूरी हैं. अनीता को साल 2018 में तमिलनाडु सरकार <strong>(Tamilnadu Government)</strong> ने <strong>लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (<a href="https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/jyoti-yaraji-indias-fastest-women-hurdler">Lifetime Achievement Award</a>)</strong> से सम्मानित किया था.&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>अनीता ने अपने खेल के जज़्बे के साथ, ऐसे खेल में करियर बनाया, जिसे हमारे देश के कई हिस्सों में स्कूल लेवल तक का खेल समझा जाता हैं. उनके जीवन में बाधाएं आई पर उन्होंने हार नहीं मानी और खेल का साथ नहीं छोड़ा. अनीता ने अपनी मेहनत और प्रतिबद्धता से महत्वपूर्ण पहचान बनाई है ओर अन्य लड़कियों के लिए भी प्रेरणा बनी है.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Thu, 03 Aug 2023 17:46:49 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/anita-pauldurai-touching-the-skies-of-basketball]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/RFPmE6CGdk3WNTDQ5uuU.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/RFPmE6CGdk3WNTDQ5uuU.jpg"/></item><item><title><![CDATA[भारत जर्मनी मिलकर करेंगे पर्यावरण संरक्षण ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/germany-environmental-minister-came-to-india-for-g20-meet-in-chennai-with-delegates</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/IkrHrAhRuNYeRuoIpifY.jpg"><h2>भारत और जर्मनी में इन हुआ पर्यावरण संरक्षण का समझौता</h2>
<p><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/bengaluru-startup-gives-eco-friendly-solution-for-plastic-straws-include-shg-women" rel="dofollow">पर्यावरण संरक्षण</a> का मुद्दा पूरी दुनिया बहुत तेजी पकड़ चूका है. हर देश की सरकार के लिए अब यहाँ प्रार्थमिकता बन चूका है क्योंकि जिस तरह से प्रदुषण और जनसंख्या में इज़ाफ़ा आया है, नुक्सान की गति बढ़ गयी है. हर देश की सरकार मिलकर इस समस्या का हल निकालने के पीछे काम कर रही है. इसी में एक और कड़ी बना है भारत में हाल ही में हुआ<strong> जर्मनी की पर्यावरण, प्रकृति संरक्षण, परमाणु सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री स्टेफी लेम्के का दौरा</strong>.</p>
<h2>स्टेफी लेमके ने कहा भारत को एक महत्वपूर्ण कड़ी</h2>
<p><strong>स्टेफ़ी लेम्के</strong> और <strong>संघीय आर्थिक मामलों के संसदीय राज्य सचिव, स्टीफन वेन्ज़ेल,</strong> <strong>चेन्नई में <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/19-female-swat-commandoes-from-delhi-are-trained-under-indo-tibetan-border-police-force-to-guard-g20-meet-in-september" rel="dofollow">G20</a> पर्यावरण</strong> और जलवायु मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे. जर्मन मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज़ में बैठक के दौरान स्टेफी लेम्के ने भारत को ग्लोबल पर्यावरण गोल्स को अचीव करने में एक बहुत ज़रूरी हिस्सा कहा. जनसंख्या और बढ़ती इकोनॉमी के कारण भारत ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट के लिए एक बहुत बड़ा ज़ोन साबित होता है.</p>
<p>G20 की मीटिंग में <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-bartan-bank-in-chattisgarh-earth-day-22-april-bhilai" rel="dofollow">प्लास्टिक प्रदूषण</a> पर वैश्विक समझौते के लिए बातचीत का सक्रिय समर्थन किया जाएगा. अपनी भारत यात्रा के दौरान,&nbsp;<strong>स्टेफी लेमके</strong> जर्मन पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल से 17.5 मिलियन यूरो के साथ एक वन संरक्षण परियोजना शुरू की. उन्होने कोयम्बेडु बस स्टेशन और संबंधित परियोजना का दौरा किया.</p>
<h2>महिला SHGs के साथ मिलकर करेंगे बदलाव</h2>
<p>उन्होंने कहा, "<em>हमें तीन वैश्विक संकटों- जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता हानि और <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/women-integral-to-protecting-gulf-of-mannar-says-awardwinning-officer-jagadish" rel="dofollow">प्रदूषण </a>के लिए एक ही दृष्टिकोण अपनाना चाहिए.</em>" उन्होंने <strong>चेन्नई के पट्टिनमपक्कम </strong>में एक मछली पकड़ने वाले समुदाय का दौरा किया. मछुआरे और <strong>महिला स्वयं सहायता समूह</strong> (Self Help Group) पुराने मछली पकड़ने के जाल इकट्ठा करते हैं और उन्हें चयनित रीसाइक्लिंग कंपनियों को बेचते हैं. इससे स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक अवसर पैदा होते हैं और प्लास्टिक प्रदूषण रुकता है। <strong>भारत की G20 अध्यक्षता</strong> का विषय "<em>एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य</em>" है. प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वैश्विक पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण में जी20 देशों की विशेष जिम्मेदारी है.&nbsp;</p>
<p>भारत के <strong>महिला SHGs </strong>बहुत समय से अपने स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए बहुत काम कर रहे है. ये महिलाएं ऐसे उत्पाद तैयार करती है, जो नेचर को बिलकुल नुक्सान नहीं पहुंचाते, और प्रदुषण होने से भी रोकते है. <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-called-as-didiyan-will-be-a-part-of-material-recovery-facility" rel="dofollow">वेस्ट से बेस्ट</a>, रिसाइकिल्ड उत्पाद और रिन्यूएबल एनर्जी से प्रोडक्शन SHGs ने हमेशा से किया है. अब इस पहल से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण, दोनों हासिल किया जाएगा.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sat, 29 Jul 2023 15:51:56 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/germany-environmental-minister-came-to-india-for-g20-meet-in-chennai-with-delegates]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/IkrHrAhRuNYeRuoIpifY.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/IkrHrAhRuNYeRuoIpifY.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मैराथन हो या जिंदगी की दौड़ .... महिलाएं हमेशा आगे ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/women-empowering-themselves-through-running</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Tt5pAJjzbKY1adq2igE6.jpg"><p><span>महिलाएं अपने बलबूते पर लड़कर, जीवन में बदलाव लाने के लिए लगातार कोशिशें कर रहीं है, फिर चाहे बदलाव शारीरिक और या मानसिक. महिलाएं आज अपनी ज़िन्दगी अपनी शर्तों पर जीने के लिए दौड़ रहीं है. हर महिला अलग है और उनके जीवन की अलग परेशानियां. कुछ या तो अपनी ज़िन्दगी से हताश है या कुछ ख़्वाहिशें दबाकर बैठी है. कुछ को फैसले लेने नहीं दिए जाते है और कुछ ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबी है. इन्हीं सब उलझनों से बाहर निकलने के लिए महिलाएं दौड़ का सहारा ले रहीं है. खुली हवा में दौड़ना, उनके लिए आज़ादी की वह सांस है, जिसके लिए वो बेक़रार है .</span></p>
<h2>ये तीन महिलाएं है मैराथन रनर्स&nbsp;</h2>
<p><span><strong>चेन्नई (<a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/chonira-belliappa-muthamma-indias-first-women-ifs-officer">Chennai</a>)</strong> को अगर <strong>सेकंड आईटी हब (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/pm-modi-to-launch-various-campaigns-on-panchayti-raj-diwas">IT Hub</a>)</strong> कहें तो गलत नहीं होगा. आज चेन्नई की महिलाएं कामकाज, घरबार, दुनियादारी की व्यस्ताओं के साथ दौड़ने के लिए वक़्त निकाल रहीं है. खुद के लिए खुद को समय देना शायद इसी को कहते है. 43 वर्षीय <strong>आईटी कंसल्टेंट (IT Consultant) ईश्वरी अंदियप्पन (Eswari Andiappan)</strong>, एक तरह के वर्क होम पैटर्न में चल रहीं ज़िन्दगी के कारण, शरीर को कब मोटापे ने घेर लिया, पता ही नहीं चला. अपने मोटापे के कारण हो रहे कॉप्लेक्स को छुपाने के लिए, वह ऑब्सेसिव शॉपर बन गयी. अंडिपनन की बेटी का जन्म, उनकी लाइफ का टर्निंग पॉइंट बना. उन्हें यह अहसास हुआ की शॉपिंग उन्हें ख़ुश नहीं रख सकती, जब तक वो अंदर से ख़ुश नहीं रहेगी. ऐसे में ऑफिस से घर जाते वक़्त, उन्होंने <strong>विप्रो चेन्नई मैराथन (Wipro Chennai Marathon)</strong> के बारे में रेडियो विज्ञापन सुना. बस वहीं से दौड़ने की शुरुआत हुई. खुले आसमान के नीचे खुली सड़क पर दौड़ना, वह अहसास था, जिसने &nbsp;एसवरी को नई आज़ादी दी. मोटापे की वजह से खुद से घृणा और आत्मविश्वास की कमी से जूझ रही एसवरी को मैराथन दौड़कर, ज़िन्दगी की नई राहों का पता चला. एसवरी यहीं नहीं रुकी, 2016 में <strong>आयरनमैन ट्रायथलॉन (Ironman Trialthon)</strong> पूरा करने वाली <strong>तमिलनाडु (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/start-up-joins-hands-with-shgs-to-market-vegetables-at-manachanallur-uzhavar-sandhai">Tamilnadu</a>)</strong> की पहली महिला बनी.</span><br><img alt="marathon news" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/236x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/u9GR306LyOPbEpEJn2NE.jpg" style="width: 236px;"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Your Story</em></span></p>
<p><span>ऐसी ही मैराथन रनर है <strong>सीता विश्वनाथन (Sita Vishwanathan)</strong>, कैंसर रोगीयों के लिए दौड़ के बारे में जो मिथ को तोड़ रही है. सीता को पहले दौड़ना कुछ ख़ास पसंद नहीं था, यहां तक की दौड़ने वाले कपड़े पहन कर बहार निकलना मुश्किल था. लेकिन 2012 में दोस्तों के साथ <strong>आई.आई.टी. मद्रास (IIT Madras) </strong>की <strong>हाफ मैराथन (Half Marathon)</strong> में पार्टिसिपेट किया. इसके बाद धीरे-धीरे वीकेंड्स में दौड़ने लगी. 2017 में उन्हें स्टेज थ्री कैंसर (Cancer) का पता चलने से पहले उन्होंने <strong>शिकागो (Chicago) </strong>में हाफ मैराथन और फुल मैराथन पूरी की थी. जब कैंसर का इलाज शुरू हुआ तब उनका 50 किलो वजन कम हो गया. उनके शरीर में बेहद दर्द रहने लगा और हार्मोन थेरेपी के कारण मूड स्विंग्स होने लगे. उन्हें लगा की वो अब कभी दौड़ नहीं पाएंगी पर अपनी रनिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनर दिव्या की सलाह मानते हुए, उन्होंने फिर दौड़ना शुरू किया. इस साल जनवरी में, उन्होंने हाफ मैराथन, साढ़े तीन घंटे में पूरा किया. सीता बताती है कि वह इसलिए दौड़ रही थी ताकि, कैंसर पीड़ित औरतों को अच्छी जीवनशैली चुनने और निडर होकर जीने के लिए प्रोत्साहित कर सके.</span><br><img alt="marathon runners" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/232x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/u3tkiu3UUWBGHtgyH1ab.jpg" style="width: 232px;"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Your Story</em></span></p>
<p><span>अब बात करें <strong>शालू बजाज (Shalu Bajaj)</strong> की, बचपन से ही स्क्वैश खिलाड़ी रही शालू, 2018 से मेन्टल हेल्थ ट्रॉमा से गुजर रहीं थी. तभी उन्हें साथ मिला कम्युनिटी रनर्स का, जिनके साथ उन्होंने दौड़ना शुरू किया. शालू बताती है कि वह 16 साल से लगातार सिगरेट शराब पी रहीं थी, जिस वजह से उनके स्वस्थ्य के साथ परिवार और बच्चों तक पर काफी असर पड़ रहा था. थैरेपी दवाइयां सब कर के देखा पर इन सबका कोई असर नहीं हो रहा था. शालू के लिए दौड़ना शुरू करना भी आसान नहीं था. एक बार शुरू करने के बाद दौड़ना जारी रखा और धीरे-धीरे ध्रूम्रपान की लत भी कम होती गई. उन्होंने वर्ष 2019 में <strong>कोलकाता (Kolkata)</strong> में बिना प्रशिक्षण के अपना पहला<strong> अल्ट्रा-मैराथन (Ultra-Marathon)</strong> दौड़ा और विजेता रही. Covid लॉकडाउन के दौरान दौड़ने के साइंस को पढ़ना शुरू किया और आज <strong>अल्ट्रा-मैराथन कोच (Ultra-Marathon Coach)</strong>, <strong>मोबिलिटी स्पेशलिस्ट (Mobility Specialist) और स्पोर्ट्स नूट्रिशनिस्ट (Sports Nutritionist)</strong> बन चुकी है. शालू ने ध्रूम्रपान छोड़ा और ये सिर्फ दौड़ने की वजह से ही मुमकिन हो पाया. अप्रैल में<strong> लंदन (London)</strong> में हुए <strong>एबॉट वर्ल्ड मैराथन मेजर्स (Abbott World Marathon Majors, Berlin)</strong> में भी हिस्सा लिया. शालू बताती है कि जब तक उन्होंने दौड़ना शुरू नहीं किया था, न ही उन्होंने कभी अकेले यात्रा की और आज वह जो कुछ भी है, वह दौड़ने की वजह से है. शालू अपनी आखिरी सांस तक दौड़ना चाहती है, इसीलिए वह अपने शरीर और स्वास्थ्य का निरंतर ख्याल रखती है. &nbsp; &nbsp;</span><br><img alt="marathon coach shalu" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/426x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/2tYrbenPYGIdFbuy8wum.jpg" style="width: 426px;"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Your Story</em></span></p>
<p><span>दौड़ना एक ऐसी आदत है, जो शारीरिक और मानसिक तौर पर न केवल मजबूत करती है, बल्क़ि खुद के होने का अहसास भी कराती है. खासकर महिलाओं के लिए दौड़ना ज़रूरी है, क्योंकि वो एक अलग आज़ादी और<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/msme-idea-hackathon-3-organized-for-women-entrepreneurs"> सशक्तिकरण </a>की तरफ ले जाती है. जैसा फिल्म डायलॉग भी है मैं उड़ना चाहता हूँ, दौड़ना चाहता हूँ, गिरना भी चाहता हूँ, बस रुकना नहीं चाहता. दौड़ते रहना ही ज़िन्दगी है, रुक गए तो मौत है .</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Fri, 28 Jul 2023 12:58:25 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/women-empowering-themselves-through-running]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Tt5pAJjzbKY1adq2igE6.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Tt5pAJjzbKY1adq2igE6.jpg"/></item><item><title><![CDATA[भारतीय महिलाओं को आईएफएस का रास्ता दिखाने वाली मुथम्मा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/chonira-belliappa-muthamma-indias-first-women-ifs-officer</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/hMNNbd4ug1UemND4Qgq2.jpg"><p dir="ltr"><span>आज़ादी मिले अभी एक साल ही हुआ था. नया भारत, नए सपने, नयी उम्मीदें, हर जगह देखी जा सकती थी. इन्ही सपनों की उड़ान चाह रही थी, </span><strong>कर्नाटक (Karnataka)</strong><span> के </span><span><strong>कोडागु (Kodagu)</strong> </span><span>जिले के एक छोटे से कस्बे </span><span><strong>विराजपेट (Virajpet)</strong> </span><span>में पैदा हुई </span><strong>सी.बी.मुथम्मा (C B Muthamma)</strong><span>.<strong> </strong></span><span><strong>कूर्ग (Kurg)</strong> </span><span>की वादियों में </span><span><strong>कोडव (Kodav)</strong> </span><span>शैली के खाने पीने के साथ एक ऐसे परिवार में जन्मी, जहां संस्कृति और पढ़ाई लिखाई का माहौल था. परिवार ने पढ़ाई से कभी रोका नहीं और मुथम्मा</span><span> </span><span>ने अपनी <strong>स्कूलिंग </strong></span><strong>सेंट जोसेफ गर्ल्स स्कूल, मदिकेरी (Saint Joseph Girls School, Madikeri)</strong><span> से की, आगे की पढ़ाई के लिए </span><span><strong>चेन्नई</strong> <strong>(Chennai)</strong></span><span> गईं और वहां के </span><span><strong>वुमन क्रिश्चिएन कॉलेज (Women Christian College)</strong> </span><span>से</span><span> <strong>ट्रिपल गोल्ड मेडल (Triple Gold Medal)</strong></span><span><strong> </strong>लेकर अपनी क़ाबलियत को साबित किया. यहीं से उनकी सोच का दायरा बड़ा हुआ. खूब मेहनत की और </span><span><strong>1948</strong> </span><span>में </span><span><strong>यूपीएससी (UPSC)</strong> </span><span>परीक्षा पहले अटेम्प्ट में पास करने वाली </span><strong>पहली भारतीय महिला (First Indian Women)</strong><span> बनी.  </span></p>
<p dir="ltr"><span>मुथम्मा</span><span> </span><span>चाहती तो वह </span><span><strong>आईएएस (IAS)</strong> </span><span>या </span><strong>आईआरएस (IRS)</strong><span><strong> </strong>को भी चुन सकती थी, जैसा उस दौर में महिलाओं के लिए सोचा जाता था, पर धारा के साथ बहना तो उन्होंने सीखा ही नहीं था, इसीलिए चुना </span><span><strong>इंडियन फॉरेन सर्विस (Indian Foreign Service)</strong> </span><span>जो कि उस समय पुरुष प्रधान पद था. समाज की सोच भी ऐसी ही थी की कोई </span><strong>महिला डिप्लोमेट (Female Diplomat)</strong><span><strong> </strong>कैसे हो सकती है? विदेशों में कैसे रहेगी? पुरुष प्रधान क्षेत्र में कैसे खुद को संभालेगी? इन सब सवालों से अलग, वो पितृसत्तात्मक सोच जिसमें पुरुष सोचते है की कोई भी महिला उनके बराबर नहीं है. इन्ही कारणों से उन्हें </span><strong>UPSC इंटरव्यू (UPSC Interview)</strong><span><strong> </strong>के दौरान खुद यूपीएससी के चेयरमैन </span><strong>(UPSC Chairman) </strong><span>ने उन पर<strong> </strong></span><strong>आईएफएस केटेगरी (IFS Category)</strong><span> को चेंज करने का  दबाव बनाया. लेकिन वो अपनी चॉइस पर डटी रहीं. </span></p>
<p dir="ltr"><span>इन सबके अलावा शादी का भी दबाव बनाया गया पर उन्होंने अपने करियर को सबसे ज़यादा महत्व दिया और दुनिया समाज के प्रेशर को झेला. जब उन्हें IFS से अलग करने की सारी कोशिशें नाकाम हो गयी तो उनसे एक शपथ पत्र पर भी साइन करवाया गया कि अगर </span><strong>उन्होंने शादी की तो उन्हें इस्तीफा देना होगा</strong><span>. शादी के लिए उन्हें समाज और परिवार वालो के ताने भी सुनने पड़े. मुथम्मा उस दौर में विदेश में काम करना चाहती थी जब अधिकतर महिलाएं विदेश जाने के बारे में सोचती भी नहीं थी. मुथम्मा ने </span><strong>हंगरी (Hungary) </strong><span>और </span><strong>घाना (Ghana)</strong><span> में काम किया और अपनी आखिरी पोस्टिंग </span><strong>नेदरलैंड (Netherland)</strong><span> में </span><span><strong>भारतीय</strong> <strong>राजदूत (Indian Ambassador) </strong></span><span>के रूप में की. अपनी 32 साल की जॉब  के बाद 1982 में रिटायर हुई.</span><span> <strong>Chonira Belliappa Muthamma</strong></span><span>, एक ऐसा नाम है जिसने हर बाधा को तोड़ कर महिलाओं के लिए आने वाले वर्षों में </span><strong>सिविल सेवा (Civil Services)</strong><span><strong> </strong>में चुनौतियों  का सामना करने के लिए प्रेरित किया. वो एक ऐसी </span><span><strong>डिल्पोमेट (Diplomat)</strong> </span><span>रहीं जिन्होंने विदेशों में अपने कामों के साथ देश में<strong> </strong></span><strong>जेंडर इक्वालिटी (Gender Equality) </strong><span>के लिए लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ी और जीती भी. </span><span>सी.बी.मुथम्मा <strong>वुमेन एम्पॉवरमेंट</strong></span><strong> </strong><span><strong>(Women Empowerment)</strong> </span><span>की ऐसी मिसाल है जिन्होंने अपनी हिम्मत, व्यक्तित्व और निश्चय से दुनिया में महिलाओं के लिए मिसाल कायम की.  </span></p>
<p></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Wed, 28 Jun 2023 18:50:49 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/chonira-belliappa-muthamma-indias-first-women-ifs-officer]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/hMNNbd4ug1UemND4Qgq2.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/hMNNbd4ug1UemND4Qgq2.jpg"/></item><item><title><![CDATA[टीटीडी के साथ मिलकर SHG महिलाएं कर रही फ्लावर आर्ट ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/tirumala-tirupati-devasthanam-ttd-doing-flower-art-with-shg-women-in-andhra-pradesh</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/GrnSMWPg6HRnLKdANq3r.jpg"><p dir="ltr">'तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम' (TTD) एक स्वतंत्र ट्रस्ट है जो तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर सहित आंध्र प्रदेश के मंदिरों कि देख रेख करता है. हर दिन मंदिरो से ना जाने कितना सूखे फूलों का प्रसाद निकलता है, जिसे 'स्वामी पुष्प प्रसादम' कहते है. इन्ही इस्तेमाल किये गए फूलों से अगरबत्तियां, 'तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम' (टीटीडी) ने स्मृति चिन्ह, दिव्य चित्र, पेपरवेट, कि चेन, टेबल कैलेंडर, पेंडेंट, और अन्य कलाकृतियां बनाना भी शुरू कर दिया है. उपयोग किए गए फूल भक्तों को प्रदान करने के लिए 'टीटीडी' का यही नेक कदम है. मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी और राज्य के अन्य मंत्रियों ने इन उत्पादों कि बहुत सराहना की है. टीटीडी और 'डॉ. वाईएसआर हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटी' ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत हिंदू देवी-देवताओं के चित्र बनाने सहित लोकप्रिय उत्पाद बनाने के लिए सूखे फूलों से उत्पाद बनाने की तकनीक प्रदान कि जाएगी जो भक्तों को बहुत आकर्षित करेगा.</p>
<p dir="ltr">इस मुहीम में जुड़ने स्वयं सहायता समूहों की 340 महिला कर्मचारियों के पहले बैच को 'सिट्रस रिसर्च स्टेशन' में उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया. अब तक, इन प्रशिक्षित महिलाओं ने A4 आकार के हजारों चित्र और अन्य कलाकृतियां बनाई हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये है. 'टीटीडी' ने एसएचजी महिलाओं को प्रशिक्षण देने के अलावा उपकरणों पर 88 लाख रुपये खर्च किए हैं. भक्तों को इन चित्रों और कलाकृतियों की बिक्री शुरू कर दी गयी है. तिरुमाला, तिरुपति स्थानीय मंदिरों, बैंगलोर, हैदराबाद, विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा और चेन्नई में टीटीडी सूचना केंद्रों पर कलाकृतियाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं. </p>
<p dir="ltr">उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए 'टीटीडी' ने कलाकृतियों के निर्माण के लिए  'सिट्रस रिसर्च स्टेशन' में एक स्थाई शेड बनाने का फैसला किया है. आंध्र परदेश की सरकार और 'टीटीडी' की तरफ से उठाया गया यह कदम SHG महिलाओं की ज़िन्दगियों को बदल देगा. हर राज्य सरकार को आंध्र प्रदेश से यह समझना चाहिए. मंदिरो से निकलने वाले फूलों का प्रसाद भारी मात्रा में आता है. इस कदम से उनका बेकार जाना भी बच जाएगा और भक्तों के लिए यह एक बहुत नेक तौफा भी साबित होगा.  महिलाएं भी इस मुहीम से जुड़कर अपने परिवार को सशक्त बना पाएंगी.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Wed, 26 Apr 2023 18:25:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/tirumala-tirupati-devasthanam-ttd-doing-flower-art-with-shg-women-in-andhra-pradesh]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/GrnSMWPg6HRnLKdANq3r.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/GrnSMWPg6HRnLKdANq3r.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मर्दानियों के आगे झुका अपराध ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/indian-female-ips-officers</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yfgq847WprPcmHHsgcQe.jpg"><p dir="ltr">ताकत, हिम्मत, और, दृढ निश्चय, अगर साथ हो तो किसी भी काम को करने में कोई भी परेशानी नहीं आती. हां, यह बात सच है कि जीवन जीने के लिए हर मोड़ पर कोई न कोई बाधा खड़ी हो ही जाती है, लेकिन उनसे ऊपर बढ़ कर अपनी जीत का परचम लहराने का नाम ही ज़िन्दगी है. कहा जाता है कि भारत पितृसत्तात्मक विचारधारा का देश है. लेकिन इस तरह कि बातों को गलत साबित कर देती है वो महिलाएं जो आए दिन पुरुषों को पीछे छोड़कर नए मुकाम हासिल कर रही है. </p>
<p dir="ltr">एक फील्ड ऑफ़ वर्क है 'भारतीय सिविल सेवा' जिसमे हर साल ना जाने कितने परीक्षार्थी इस परीक्षा को देने के लिए बैठते है, और टॉप करने वाली ज़्यादातर महिलाएं ही होती है. 'किरण बेदी' वो नाम है जिन्होंने सब लोगों के मुँह पर ताले लगा दिए और भारत कि सबसे पहली महिला IPS बनी. वे हर उस लड़की के लिए इंस्पिरेशन है जो आज उस वर्दी कि शोभा बढ़ा रही है. ऐसे ही कुछ नामों का ज़िक्र यहाँ किया गया है, जिन्होंने कानून को मेंटेंन करना ही अपनी ज़िन्दगी का एक मात्र उद्देश्य बना लिया, और आज यह साबित कर रही है कि यह दुनिया सिर्फ पुरुषों कि नहीं है.</p>
<p dir="ltr">पहला नाम है, संजुक्ता पराशर. इन्होनें सिविल सेवा परीक्षा में 85वीं रैंक प्राप्त की. वे चाहती तो प्रशासनिक सेवाओं में आसानी से काम कर सकती थी, लेकिन उनका सपना था की वे आईपीएस बने और देश की सेवा कर सकें. इसीलिए उन्होंने बिना सोचे आईपीएस की सेवा को चुन लिया. असम में सोनितपुर जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने सीआरपीएफ़ जवानों की एक टीम का नेतृत्व किया, प्रभावी रूप से बोडो उग्रवादियों को मार गिराया, 64 गिरफ्तारियां कीं और केवल 15 महीनों में कई टन हथियार और गोला-बारूद बरामद किया. उन्होंने भोपाल-उज्जैन ट्रेन विस्फ़ोट की भी जांच की. उन्हें नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ बोडोलैंड (NDFB) से कई मौत की धमकियाँ मिली हैं. लेकिन वो फिर भी इन सब को इग्नोर करते हुए अपना काम कर रही हैं. </p>
<p dir="ltr">अपराजिता राय, जो की सिक्किम की पहली फीमेल IPS अफसर है, ने अपने पिता को 8 वर्ष की छोटी सी उम्र में ही खो दिया था. उनके पिता एक प्रभागीय वन अधिकारी थे. उस दौरान जब उन्होंने आम लोगों के लिए सरकारी अधिकारियों का बुरा रवैया देखा तभी उन्होंने ठान लिया की वे बड़ी होकर इस सिस्टम को बदलेंगी. उन्होंने सिक्किम की पहली गोरखा महिला आईपीएस अधिकारी बनकर अपने परिवार और महिलाओं का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया. वे गर्व से बताती हैं, “मेरे पास आने वाले किसी भी व्यक्ति को उस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता, जो आम तौर पर लोगों को सरकारी कार्यालयों में करना पड़ता है.”</p>
<p dir="ltr">मेरिन जोसेफ़ 25 साल की उम्र में यूपीएससी परीक्षा पास करके केरल कैडर की सबसे कम उम्र की आईपीएस अधिकारी बनीं. 2012 में अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद मेरिन आईपीएस में शामिल हुईं. मेरिन ने G20 देशों के लिए Y20 समिट में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी किया. मेरिन चर्चा में तब आई जब उन्होंने एक मीडिया प्रकाशन को उन्हें खूबसूरत महिलाओं की लिस्ट में शामिल किया. मेरिन में अपने फेसबुक पोस्ट में ऐसे लगूँ की सोच पर सवाल उठाए और इन लोगों को सबके सामने लाकर खड़ा कर दिया जो महिलाओं को इस तरह ओब्जेक्टिफाई करतें है. उन्होंने अपने इस पोस्ट में ऐसे सोच रखने वाले लोगो के ऊपर बहुत से सवाल उठाए और उन्हें बदलने की भी सलाह दी. </p>
<p dir="ltr">शिमला की देखरेख करने वाली पहली महिला आईपीएस अधिकारी, सौम्या सांबशिवन अपने काम के लिए पूरी तरह समर्पित है और इसी समर्पण के लिए सब लोगों की पसंदीदा भी. 2010 के आईपीएस बैच से पास आउट, उन्होंने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में अपने कार्यकाल के दौरान हत्या के मामलों को सुलझाया और कुछ ड्रग माफ़ियाओं को सलाखों के पीछे पहुंचाया, जो राज्य में सरे नागरिकों पर अपना रुतबा जमा रहे थे.</p>
<p dir="ltr">सोनिया नारंग अपने पिता ए.एन. नारंग से इंस्पायर थीं, जो पुलिस उपाधीक्षक के रूप में रिटायर हुए. सोनिया ने बचपन से सिर्फ एक ही सपना देखा वो था, उस खाकी वर्दी को पहनना. साल 2013 में सोनिआ नारंग पर ये आरोप लगाया गया कि उन्होंने माइनिंग घोटाले में 16,000 करोड़ का घोटाला किया है. इतना बड़ा आरोप लगा लेकिन फिर भी वे डरी नहीं क्यूंकि वे सच्ची थीं. उन्होंने मीडिया में बयान दिया और कहा- "मैं ऐसी जगह कभी असाइन ही नहीं हुई जहां अवैध माइनिंग हो रही हो. इसी कारण मेरा नाम इस घोटाले में आना संभव ही नहीं है." नारंग ने जबरन वसूली रैकेट का भी पर्दाफ़ाश किया, जो लोकायुक्त कार्यालय के भीतर काम करता था. उन्हें वर्तमान में चार साल की अवधि के लिए पुलिस अधीक्षक, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के रूप में नियुक्त किया गया था.</p>
<p dir="ltr">रुवेदा सलाम ने इतिहास तब रचा, जब वो कश्मीर की पहली आईपीएस अफ़सर बनीं. रुवेदा के पिता हमेशा से चाहते थे कि उनकी बेटी IPS अफसर बने. पिता की इस इच्छा को पूरा करने के लिए वे जुट गयी और श्रीनगर से एमबीबीएस करने के बाद दो बार सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की. अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने आईपीएस कैडर प्राप्त कर लिया. उन्होंने हैदराबाद में अपना प्रशिक्षण प्राप्त किया और चेन्नई में सहायक पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्त हुईं. इस मुकाम को हासिल करने के बाद रूवेदा ने कई प्रेरक भाषण दिए और लड़कियों को जम्मू-कश्मीर में आईपीएस परीक्षा में बैठने के लिए प्रोत्साहित किया. राजस्व सेवा का विकल्प चुनने के बाद आज वे जम्मू में इनकम टैक्स असिस्टेंट कमिश्नर हैं.</p>
<p dir="ltr"> 2001 में अपने 150 साल के लंबे इतिहास में मुंबई के अपराध शाखा विभाग की प्रमुख बनने वाली पहली महिला, मीरा बोंवान्कर एक ताकतवर व्यक्तिव्य की महिला है. उन्होंने अबू सलेम के प्रत्यर्पण (एक्सट्रडीशन), जलगाँव सेक्स स्कैंडल, इकबाल मिर्ची प्रत्यर्पण मामले सहित कई सीरियस मामलों को सुलझाया है. अपने बेबाक़ रवैये के लिए प्रचलित, वो मर्दानी फ़िल्म के पीछे की प्रेरणा हैं. उन्होंने साल 2015 में याकूब मेमन की फांसी भी देखी, जिसे 1993 के मुंबई सीरियल धमाकों के लिए दोषी ठहराया गया था. मीरा को साल 1997 में पुलिस पदक और महानिदेशक के प्रतीक चिन्ह के साथ राष्ट्रपति पदक मिला. उनका दृढ़ विश्वास है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में बहुत अधिक धैर्यवान, सक्षम और साधन संपन्न हैं. मीरा हमेशा लड़कियों और महिलाओं को यह सन्देश देती रहती है कि वे अपने आत्मसम्मान को कभी न गिरने दे और खुद पर कभी शक न करें. </p>
<p dir="ltr">फतेहाबाद में पुलिस होने के साथ एक पेंटर की बेटी, संगीता कालिया को आईपीएस अधिकारी बनने की प्रेरणा एक्ट्रेस कविता चौधरी से मिली, जिन्होंने 90 के दशक की टीवी सीरीज़ ‘उड़ान’ में एक आईपीएस अधिकारी की भूमिका निभाई थी. अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन डिग्री के बाद, संगीता ने एक सहायक प्रोफ़ेसर के रूप में काम किया. जब वे IPS के रूप में कार्यरत थीं, तब हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज़ के साथ उनकी तीखी नोकझोंक हुई थी. उन्हें मंत्री द्वारा बैठक कक्ष छोड़ने के लिए कहा गया. उन्होंने कुछ ऐसी चीज़ें करने से इनकार कर दिया, जिसके कारण उनका ट्रांसफर कर दिया गया. एक मंत्री के द्वारा दिखाई गयी क्रूरता और शक्ति के दुरुपयोग के खिलाफ़ खड़े होने के लिए उन्हें भारी समर्थन मिला.</p>
<p dir="ltr">साल 2016 की जुलाई में, सुभाषिनी शंकरन भारत की आज़ादी के बाद मुख्यमंत्री की सुरक्षा सँभालने वाली पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनीं. 23 दिसंबर 2014 को नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ बोडोलैंड से अलग हुए समूह के उग्रवादियों ने सोनितपुर जिले में 30 आदिवासियों की हत्या कर दी थी. स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए सुभाषिनी और उनकी टीम 20 मिनट के अंदर मौके पर पहुंच गई. असम में तैनात रहते हुए सुबाशिनी पास के काजीरंगा से संचालित एक अवैध गिरोह का भंडाफोड़ भी कर चुकी है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 25 Apr 2023 13:25:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/indian-female-ips-officers]]></guid><category><![CDATA[हम में है हीरो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yfgq847WprPcmHHsgcQe.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/yfgq847WprPcmHHsgcQe.jpg"/></item></channel></rss>