<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ छत्तीसगढ़]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/chttiisgddh</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/chttiisgddh" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 20 Mar 2026 16:36:08 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[प्रोजेक्ट अजा: क्या बकरी पालन से बदल रही है ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की तस्वीर? ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/women-news-india/project-aja-raipur-goat-farming-rural-women-empowerment-ias-gaurav-singh-govtech-awards-2026-11247972</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/03/20/gaurav-singh-ias-raipur-collector-govtech-awards-2026-project-aja-2026-03-20-16-28-15.png"><p style="text-align: justify;">छत्तीसगढ़ के रायपुर में शुरू हुआ &ldquo;प्रोजेक्ट अजा&rdquo; आज <a href="https://ravivarvichar.in/women-news-india/yogi-adityanath-pink-rozgar-mahakumbh-2026-up-women-empowerment-11188443">महिला सशक्तिकरण</a> की एक नई और ठोस कहानी बनकर सामने आ रहा है. हाल ही में इस पहल को <a href="https://ravivarvichar.in/tags/economic-times">Economic Times</a> <a href="https://ravivarvichar.in/tags/govtech-awards-2026">GovTech Awards 2026</a> में सम्मान मिला, जो यह दर्शाता है कि जब योजनाएँ ज़मीन पर सही तरीके से लागू होती हैं, तो उनका असर केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज की संरचना तक को बदल सकता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">प्रोजेक्ट अजा क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?</h2>
<p style="text-align: justify;">इस पहल की शुरुआत <a href="https://ravivarvichar.in/tags/drgaurav-singh">Dr.Gaurav Singh</a> ने की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य <a href="https://ravivarvichar.in/women-news-india/vedanta-aluminiums-project-sakhi-a-concrete-step-towards-economic-empowerment-of-rural-women-10544768">ग्रामीण महिलाओं</a> को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है. इसके तहत महिलाओं को बकरियाँ और बकरे उपलब्ध कराए जाते हैं, साथ ही उन्हें पशुपालन से जुड़ा प्रशिक्षण और आवश्यक सहायता भी दी जाती है. यह केवल एक सहायता योजना नहीं है, बल्कि ऐसा साधन है जो महिलाओं को स्थायी आय का रास्ता देता है.</p>
<p style="text-align: justify;">जब कोई महिला अपनी मेहनत से कमाने लगती है, तो उसका प्रभाव केवल उसकी आय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके आत्मविश्वास, उसकी पहचान और उसके सामाजिक स्थान पर भी पड़ता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">महिला सशक्तिकरण का असली अर्थ क्या है?</h2>
<p style="text-align: justify;">भारत में महिला सशक्तिकरण की चर्चा अक्सर बड़े अभियानों और नारों के माध्यम से होती है, लेकिन प्रोजेक्ट अजा एक अलग ही दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है. यहाँ सशक्तिकरण का अर्थ केवल जागरूकता नहीं, बल्कि आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय लेने की क्षमता से है.</p>
<p style="text-align: justify;">जब महिला खुद कमाती है, तो वह घर के भीतर केवल जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि फैसलों में उसकी भागीदारी भी बढ़ती है. यही बदलाव असल सशक्तिकरण की नींव बनता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">ज़मीन पर क्या बदलाव दिखाई दे रहा है?</h2>
<p style="text-align: justify;">इस योजना का प्रभाव धीरे-धीरे ग्रामीण जीवन में दिखाई देने लगा है. महिलाएँ अब परिवार की कमाने वाली सदस्य बन रही हैं, जिससे घर में उनकी बात को अधिक महत्व दिया जा रहा है. इसके साथ ही, स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के बीच सहयोग और जुड़ाव भी मजबूत हुआ है.</p>
<p style="text-align: justify;">यह जुड़ाव उन्हें केवल आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से भी सशक्त बनाता है. छोटे-छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह प्रयास अब स्वरोज़गार और सम्मान की दिशा में एक बड़े परिवर्तन का संकेत दे रहा है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">&lsquo;पशु सखी&rsquo; पहल: महिलाएँ बन रही हैं मार्गदर्शक</h2>
<p style="text-align: justify;"><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/nanhi-kali-project-of-mahindra-is-an-initiative-towards-girl-education-and-women-empowerment-4536431">प्रोजेक्ट</a>&nbsp;अजा की एक विशेष पहल &ldquo;पशु सखी&rdquo; है, जो इस पूरी व्यवस्था को और मजबूत बनाती है. इसके अंतर्गत महिलाएँ ही अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देती हैं और पशुओं की देखभाल में मार्गदर्शन करती हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भूमिका उन्हें केवल लाभार्थी नहीं रहने देती, बल्कि उन्हें एक मार्गदर्शक और नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करती है. जब महिलाएँ एक-दूसरे को सिखाती हैं और आगे बढ़ाती हैं, तो सशक्तिकरण का यह दायरा और व्यापक हो जाता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोज़गार पर इसका प्रभाव</h2>
<p style="text-align: justify;">इस योजना का असर केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे ग्रामीण समाज पर पड़ रहा है. गाँव में ही रोज़गार के अवसर मिलने से शहरों की ओर पलायन कम हो सकता है.</p>
<p style="text-align: justify;">साथ ही, पशुपालन से मिलने वाली आय और उससे जुड़ी अन्य गतिविधियाँ, जैसे खाद का उपयोग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाती हैं. यह एक ऐसा संतुलन बनाता है, जिसमें व्यक्ति, समाज और अर्थव्यवस्था तीनों को लाभ मिलता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">यह योजना सफल क्यों हो रही है?</h2>
<p style="text-align: justify;">प्रोजेक्ट अजा यह भी दिखाता है कि किसी भी योजना की सफलता केवल उसकी घोषणा में नहीं, बल्कि उसके क्रियान्वयन में छिपी होती है. जब योजना स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार बनाई जाती है, महिलाओं को केंद्र में रखकर लागू की जाती है और उन्हें लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है, तब उसके परिणाम भी स्थायी होते हैं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">निष्कर्ष: क्या यही है सशक्तिकरण का सही रास्ता?</h2>
<p style="text-align: justify;">अंत में, यह पहल एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा करती है कि क्या महिला सशक्तिकरण केवल बड़े स्तर के अभियानों से संभव है, या फिर ऐसे छोटे लेकिन प्रभावी प्रयासों से, जो सीधे महिलाओं के जीवन को बदलते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">शायद इसका उत्तर प्रोजेक्ट अजा जैसे उदाहरणों में ही छिपा है, जहाँ सशक्तिकरण कोई विचार नहीं, बल्कि एक जीवित अनुभव बन जाता है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Fri, 20 Mar 2026 16:36:08 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/women-news-india/project-aja-raipur-goat-farming-rural-women-empowerment-ias-gaurav-singh-govtech-awards-2026-11247972]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/03/20/gaurav-singh-ias-raipur-collector-govtech-awards-2026-project-aja-2026-03-20-16-28-15.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/03/20/gaurav-singh-ias-raipur-collector-govtech-awards-2026-project-aja-2026-03-20-16-28-15.png"/></item><item><title><![CDATA[छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला: पेनिट्रेशन के बिना यौन कृत्य बलात्कार नहीं ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/women-news-india/ejaculating-without-penetration-isnt-rape-chhattisgarh-high-court-11133548</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/02/19/high-court-2026-02-19-16-35-06.png"><h2 data-start="297" data-end="359"><strong data-start="297" data-end="357">हाईकोर्ट की नजर में गवाही: पेनिट्रेशन और बलात्कार प्रयास</strong></h2>
<p data-start="547" data-end="735">क्रॉस-एक्ज़ामिनेशन में पीड़िता ने कहा कि आरोपी ने अपने अंग को उसके योनि के ऊपर रखा, लेकिन प्रवेश नहीं किया. दूसरी बार उसने कहा कि प्रवेश हुआ. हाईकोर्ट ने इस विरोधाभास को महत्वपूर्ण माना.</p>
<p data-start="737" data-end="918">कोर्ट ने कहा, &ldquo;जब अभियोजन पक्ष की गवाही को सही दृष्टिकोण से देखा जाए, तो यह स्पष्ट है कि वास्तविक बलात्कार साबित नहीं हुआ है, क्योंकि पीड़िता के अपने बयान में संदेह पैदा होता है.&rdquo;</p>
<p data-start="920" data-end="1059">पीड़िता ने कहा कि एक बार प्रवेश हुआ, लेकिन बाद में स्पष्ट किया कि आरोपी ने लगभग 10 मिनट तक अपना अंग उसके ऊपर रखा, लेकिन प्रवेश नहीं किया.</p>
<h2 data-start="1066" data-end="1101">चिकित्सकीय निष्कर्षों की जांच</h2>
<p data-start="1102" data-end="1266">कोर्ट ने मेडिकल साक्ष्य की भी समीक्षा की. चिकित्सक ने कहा कि हाइमेन फटा नहीं था, हालांकि &ldquo;एक उंगली का सिर अंदर डाला जा सकता था, इसलिए आंशिक प्रवेश की संभावना है.&rdquo;</p>
<p data-start="1268" data-end="1467">चिकित्सक ने योनि में लालिमा और सफेद द्रव की उपस्थिति दर्ज की, लेकिन बलात्कार के commission के बारे में कोई निश्चित राय नहीं दी. उन्होंने क्रॉस-एक्ज़ामिनेशन में दोहराया कि केवल आंशिक प्रवेश संभव था.</p>
<p data-start="1469" data-end="1593">कोर्ट ने कहा, &ldquo;यह साक्ष्य यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि बलात्कार का प्रयास किया गया, लेकिन पूर्ण बलात्कार नहीं हुआ.&rdquo; कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि थोड़ी भी प्रवेश Section 376 IPC के तहत दंडनीय है, लेकिन इसके लिए स्पष्ट साक्ष्य होना जरूरी है कि आरोपी का कोई अंग महिला के योनि में था.</p>
<h2 data-start="1763" data-end="1788">तैयारी से प्रयास तक</h2>
<p data-start="1789" data-end="1925">कोर्ट ने पाया कि आरोपी ने पीड़िता को जबरन कमरे में ले जाकर दरवाजा बंद किया, दोनों को निर्वस्त्र किया और अपने जननांग को उसके साथ रगड़ा.</p>
<p data-start="1927" data-end="2146">कोर्ट ने कहा, &ldquo;पीड़िता को कमरे में जबरन ले जाना और दरवाजा बंद करना केवल <a href="https://ravivarvichar.in/sharminda/recently-two-brutal-crimes-against-minor-girls-came-in-media-how-bizarre-the-mentality-of-people-is-getting-6130098">अपराध</a>&nbsp;की &lsquo;तैयारी&rsquo; थी. इसके बाद के कार्य &ndash; दोनों को निर्वस्त्र करना, जननांग को रगड़ना और आंशिक प्रवेश &ndash; स्पष्ट रूप से बलात्कार करने का प्रयास था.&rdquo;</p>
<p data-start="2148" data-end="2241">हालांकि, चूंकि प्रवेश पूरी तरह से साबित नहीं हुआ, इसलिए कार्य पूर्ण बलात्कार नहीं माना गया. <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-from-sagar-mp-won-the-case-against-state-government-in-high-court-1695779">कोर्ट</a>&nbsp;ने कहा कि आरोपी का कार्य तैयारी से आगे बढ़कर बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में आता है और Section 511 पढ़ित Section 375 IPC के तहत दंडनीय है.</p>
<p data-start="2392" data-end="2621">साथ ही, कोर्ट ने चेतावनी दी कि कभी-कभी अभद्र आचरण को बलात्कार के प्रयास के रूप में बढ़ा-चढ़ा कर देखा जाता है. पीड़िता के बयान में विरोधाभासों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि वास्तविक बलात्कार स्थापित नहीं हुआ.</p>
<h2 data-start="2628" data-end="2645">सजा घटाई गई</h2>
<p data-start="2646" data-end="2813"><a href="https://ravivarvichar.in/tags/chttiisgddh">छत्तीसगढ़</a>&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/tags/highcourt">हाईकोर्ट</a>&nbsp;ने सजा को&nbsp;<strong data-start="2675" data-end="2695">तीन साल छह महीने</strong> कर दिया. आरोपी को निर्देश दिया गया कि वह <strong data-start="2737" data-end="2811">दो महीने के भीतर शेष अवधि की सजा भुगतने के लिए जेल में आत्मसमर्पण करे</strong>.&nbsp;</p>
<p data-start="2815" data-end="3028">कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि आरोपी ने 3 जून 2004 से 6 अप्रैल 2005 तक जेल में समय बिताया और बाद में 6 जुलाई 2005 को जमानत मिलने के बाद तीन महीने और जेल में रहा. उसे कानून के अनुसार समायोजन (set-off) का लाभ मिलेगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Thu, 19 Feb 2026 16:36:16 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/women-news-india/ejaculating-without-penetration-isnt-rape-chhattisgarh-high-court-11133548]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/02/19/high-court-2026-02-19-16-35-06.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/02/19/high-court-2026-02-19-16-35-06.png"/></item><item><title><![CDATA[कचरे को रिसाइकल कर बना रहीं बेस्ट आउट ऑफ़ वेस्ट ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/chhattisgarh-shgs-making-decorative-items-through-door-to-door-garbage-collection</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/kpA9BiHnoLg8B8pHouJp.jpg"><p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span><strong>छत्तीसगढ़ (<span style="font-size: 8pt;"><span style="font-size: 12pt;">Chhattisgarh)</span></span></strong>&nbsp;बेमेतरा ज़िले के बेरला ब्लॉक में <strong>स्वयं सहायता समूह</strong> से जुड़ी महिलाएं<strong> डोर टू डोर कचरा कलेक्शन </strong>कर रहीं हैं. इस कलेक्ट किए हुए कचरे से<strong> सजावट के सामान बना रहीं</strong> है. जिस कचरे को लोग ख़राब समझ कर फेंक देते है, आज उसी कचरे को <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/uttarkhand-shgs-making-rakhis-with-bhojpatra">SHG महिलाएं</a> अपनी आमदनी का जरिया बना रहीं हैं.&nbsp;</span></p>
<h2 dir="ltr" style="text-align: justify;"><span>SHG महिलाएं घर के कचरे से बना रहीं सजावट के सामान&nbsp;</span></h2>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span><strong>स्वच्छता दीदियां (Swacchta Didi)</strong> हर दिन <strong>डोर टू डोर कचरा कलेक्ट</strong> कर, प्राप्त <strong>कपड़ों से वेस्ट टू वंडर</strong> (Waste To Wonder) के तहत <strong>घर के सजावट के सामान</strong> और रोजमर्रा के उपयोग होने वाले सामान जैसे <strong>सोफ़ा कवर, पैरदान, परदा </strong>आदि बना कर <strong>अपनी आजीविका चला र</strong>हीं है. सामानों की बिक्री के लिए समय-समय पर स्टॉल लगातीं हैं. <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shgs-products-will-be-available-at-sakhi-one-stop-center-in-haryana">Self Help Groups</a> की महिलाओं के हुनर और उनके द्वारा बनाए हुए प्रोडक्ट्स की प्रसंशा हो रही है.</span></p>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span><img alt="women making plastic products" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/453x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/vmNYBiupzlAkbRuHUszi.jpg" style="width: 453px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr" class="center"><em>I<span style="font-size: 8pt;">mage Credits : The Times Of India</span></em></p>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;">बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट का मतलब (Best Out Of Waste Products) किसी ख़राब वस्तु से नया आकर्षक सामान &nbsp;बनाना जिसका घर में इस्तेमाल हो सके. घर में इस्तेमाल न होने वाले जैसे फटे पुराने कपड़े, अखबार, प्लास्टिक बॉटल्स से सजावट के समान तैयार किए जा सकते हैं.</p>
<h2 dir="ltr" style="text-align: justify;"><span>डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रहें SHGs&nbsp;</span></h2>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span><strong>स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण</strong> (Swachh Bharat Mission - Gramin) के तहत&nbsp;<strong>डोर टू डोर कचरा कलेक्शन</strong> (Door-To- Door Garbage Collection) की जिम्मेदारी <strong>सेल्फ हेल्प ग्रुप्स की महिलाओं </strong>को दी जा रही है. लोगों में जागरूकता बढ़ाने के साथ <strong>SHG महिलाओं को रोजगार </strong>भी मिलेगा.&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span><img alt="women collecting plastic" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/377x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/SR4FKjcBydrt13eEDgvp.jpg" style="width: 377px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr" class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits : Thela</em></span></p>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;">SHGs सूखे और गीले कचरे को अलग कर <strong>वर्मी कंपोस्ट</strong> (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/chhattisgarh-godhan-nyay-yojana-generating-income-for-shg-women">Vermi Compost</a>) के जरिए खाद बना रहीं हैं.&nbsp;<strong>प्लास्टिक वेस्ट</strong> (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/haryana-shg-women-saving-environment-by-planting-saplings">Plastic Waste</a>) को अलग कर विभिन्न सेंटर में भेजा जाएगा, जहां इसे गलाकर, अन्य कार्य जैसे प्लास्टिक की ईट बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वेस्ट टू वंडर के तहत स्वतंत्र भारत के मानचित्र बनाकर सेल्फी प्वाइंट बनाया गया था.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Mon, 28 Aug 2023 16:34:46 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/chhattisgarh-shgs-making-decorative-items-through-door-to-door-garbage-collection]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/kpA9BiHnoLg8B8pHouJp.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/kpA9BiHnoLg8B8pHouJp.jpg"/></item><item><title><![CDATA[दीदियां अब करेंगी 'मटेरियल रिकवरी फैसलिटी' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-called-as-didiyan-will-be-a-part-of-material-recovery-facility</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Ei1hiZ9Lf9eeqbfuYlys.jpg"><p dir="ltr">देश में सफाई अभियान जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, सभी लोग इसमें अभियान में अपना योगदान देने से बिल्कुल पीछे नहीं हटते. सफाई अभियान का ही एकदूसरा पहलु है, 'वेस्ट मेनेजमेंट'. हालांकि देश के ज़्यादातार शहरों में वेस्ट मेनेजमेंट ही सबसे बड़ी चुनौती के रूप में सामने आता है. इसी चुनौती के सामने डटकर खड़ा हों गया छत्तीसगढ़ का अंबिकापुर शहर, जिसने वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ‘दीदियों’ का दर्जा देकर 'मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी' (MRF) सेंटर्स पर सैकड़ों नए रोज़गार के अवसर प्रदान किए हैं. इस तरह शहर से लेकर राज्य स्तर तक यहां ‘आत्मनिर्भर भारत’ का एक जीवंत उदाहरण है. यहां कचरे को 37 श्रेणियों में अलग करने का काम किया जाता है. मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर्स से रोज़ाना कई टन कूड़े की प्रोसेसिंग की जाती है. यहां शहरों के विभिन्न इलाकों से डोर-टू-डोर कलेक्शन के बाद हर तरह का कूड़ा पहुंचाया जाता है. गीले कचरे को सुखाकर खाद में बदल दिया जाता है और सूखे कूड़े को कई श्रेणियों में सेग्रीगेट कर उसका निस्तारण किया जाता है.</p>
<p dir="ltr">स्वच्छता के काम में बेहतर प्रदर्शन के लिए 41 महिला स्वयं सहायता समूहों को जोड़ा गया. वर्तमान में इस समिति से 470 महिला सदस्य जुड़ चुकी हैं. अंबिकापुर मिशन सहकारी समिति की महिलाओं की टीम सुबह सात से ग्यारह और शाम तीन से पांच बजे तक घरों से कचरा जमा करती हैं. स्वच्छ सर्वेक्षण में अंबिकापुर शहर को साल 2017 से 2020 तक लगातार चार बार 1 से 3 लाख आबादी वाली श्रेणी में पहला स्थान मिल चुका है. 2021 में 'बेस्ट प्रैक्टिस एंड इनोवेशन श्रेणी' में राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया और 2022 में 'बेस्ट सेल्फ सस्टेनेबल सिटी' का अवॉर्ड मिल चुका है. गोवा नगर निगम ने साल 2020 में मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर में सूखे कचरे के ‘16-वे वेस्ट स्रेगीगेशन’ की अनोखी पहल शुरू की. यह विशेष व्यवस्था 35 रेजीडेंशियल कॉलोनियों में शुरू की गई है.</p>
<p dir="ltr"> निगम ने शहर में विभिन्न स्थानों पर 16-वे सेग्रीगेशन सेंटर शुरू किए हैं, जिससे 50-60 महिलाओं को रोज़गार भी मिला है. कर्नाकट राज्य के बेंगलुरु में रिड्यूस, रियूज, और रीसाइकल यानी 3R’s का कर्तव्य याद दिलाते हुए एक अनोखा प्रयास किया गया. इसके तहत यहां मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) सेंटर्स के छोटे रूप में बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) ने लगभग 185 अलग ड्राई वेस्ट कलेक्शन सेंटर (DWCC) स्थापित किए गए. यह तीन शहर 'मटेरियल फैसलिटी रिकवरी' के तहत महिलाओं को रोजगार अवसर प्रदान करने में बहुत मदद कर रहा है. अगर यह पहल पुरे देश के शहर प्रार्थमिकता से लेने लगे तो 2 मुख्य बदलाव देखने को मिलेंगे, पहला- महिलाएं सशक्त बनकर अपने परिवार की मदद कर पाएंगी, और दूसरा- शहरों में साफ़ सफाई और कचरे का मैनेजमेंट भी अच्छे से हों पाएगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 02 May 2023 18:46:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-called-as-didiyan-will-be-a-part-of-material-recovery-facility]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Ei1hiZ9Lf9eeqbfuYlys.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Ei1hiZ9Lf9eeqbfuYlys.jpg"/></item><item><title><![CDATA[प्रियंका गांधी को भाया मिलेट चिकि का स्वाद ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/priyanka-gandhi-met-shg-women-and-enjoyed-millet-chikki</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Dhx5Fh3xt2b2Qwkja9u7.jpg"><p>दिन-ब-दिन बढ़ती स्वयं सहायता समूहों की गिनती नेताओं का ध्यान आकर्षित किये हुए है. समूह में बड़ी संख्या में जुड़ी महिलाएं राजनीति को प्रभावित करने का दम रखती हैं.  कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी जगदलपुर में आयोजित ‘भरोसे का सम्मेलन’ में शामिल हुई. इस सम्मलेन के ज़रिये कांग्रेस ने बस्तर में अपने चुनावी मुहिम की शुरुआत की. इस सम्मेलन में बस्तर संभाग की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताएं और स्वयं  सहायता समूह की महिलाएं शामिल हुई. </p>
<p>मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मिड डे मील में दिए जा रहे मिलेट्स के बारे में बताया. प्रियंका गांधी ने यहां स्वयं सहायता समूह द्वारा बनाई जा रही मिलेट चिकी को चखा. छत्तीसगढ़ मिलेट्स उत्पादन में नए रिकॉर्ड कायम कर रहा है. छत्तीसगढ़ में 69 हज़ार हेक्टेयर के खेतों में मिल्लेट्स के अलग अलग किस्मे उगाई जा रही हैं. प्रियंका गांधी ने आयोजन स्थल पर सजी विभिन्न स्टालों का भी आनंद लिया. उन्होंने बस्तर के पारंपरिक शिल्प उद्योग की बारीकियों को जाना. बस्तर के प्रसिद्द काजू का भी स्वाद लिया. अबूझमाड़ की महिलाओं के बांस से बने हैंडीक्राफ्ट की तारीफ की. </p>
<p>सात जिलों में फैले बस्तर संभाग के सभी 12 विधानसभा क्षेत्रों और बस्तर लोकसभा सीट पर कांग्रेस का राज है. इस क्षेत्र के सामाजिक-राजनीतिक और चुनावी महत्व को देखते हुए, कांग्रेस पार्टी 2023 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनावों में इन सभी सीटों को बरकरार रखने की कोशिश कर रही है. नेहरू-गांधी परिवार की सदस्य प्रियंका गांधी की यात्रा को इस दिशा में अहम माना जा रहा है. सम्मलेन में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राष्ट्रीय महासचिव एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी कुमारी सैलजा, और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम शामिल हुए. विशिष्ट अतिथि प्रियंका गाँधी को गौर मुकुट पहनाकर स्वागत किया गया. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Sat, 15 Apr 2023 14:49:12 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/priyanka-gandhi-met-shg-women-and-enjoyed-millet-chikki]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Dhx5Fh3xt2b2Qwkja9u7.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Dhx5Fh3xt2b2Qwkja9u7.jpg"/></item><item><title><![CDATA[गोबर पेंट से रंगीन होगी प्राकृति ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-make-natural-paint-from-cow-dung</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/DfmDcxDSsyLJ0fVuhSGk.PNG"><p dir="ltr">आज चारों तरफ़ नेचर को बचाने की चर्चा है. हर वो चीज़ जो हमारे पर्यावरण को नुक्सान पहुंचाए, उसके विकल्प ढूंढे जा रहे हैं. प्लास्टिक, फैक्ट्री, वाहन सब पर्यावरण को नुक्सान पहुंचा रहे हैं. इस लिस्ट में वॉल पेंट भी शामिल है. पेंट हमारे घर, फर्नीचर, और सामान को रंग देकर उनकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं. लेकिन ये रंगबिरंगे पेंट जिन केमिकल से बनाये जाते हैं वह ओज़ोन को नुक्सान पहुंचाकर ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाते हैं. इस पेंट का नेचुरल विकल्प निकाला है स्वसहायता समूहों ने. इन महिलाओं ने गोबर से जैविक पेंट बनाकर तैयार किया. ये गोबर पेंट पानी और प्राकृतिक रंग जैसे हल्दी, इंडिगो और मेंहदी को मिलाकर बनाये जाते हैं. मिश्रण को फिर दीवारों, फर्श और अन्य सतहों पर लगाते हैं. गाय के गोबर में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, और इस पेंट का इस्तेमाल कीड़ों, बैक्टीरिया और फंगस को हटाने में भी मदद करता है.</p>
<p dir="ltr">छत्तीसगढ़ में गाय के गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने के लिए 19 इकाइयां स्थापित की गई. 13,063 SHG की 150,036 महिलाएं गोबर पेंट बना रही हैं. छत्तीसगढ़ में गाय के गोबर से बने लगभग 60 प्रतिशत प्राकृतिक पेंट महिला स्वसहायता समूहों (SHG) के ज़रिये बाज़ार में बेचे जा रहे हैं. भूपेश बघेल सरकार गौठान (पशुधन शेड) योजना के तहत पशुपालकों से 2 रुपये किलो के हिसाब से गाय का गोबर खरीदती है और इसे स्वसहायता समूहों को देती है ताकि वे इसे प्राकृतिक पेंट और वर्मीकम्पोस्ट में बदल सकें.अब तक, इन इकाइयों ने 44,160 लीटर प्राकृतिक पेंट बनाया. उन्होंने 26,292 लीटर की बिक्री से 47.71 लाख रुपये का मुनाफा कमाया है. रायपुर जिले ने सबसे अधिक पेंट (20,841 लीटर) का उत्पादन किया, इसके बाद कांकेर (7,878 लीटर) का स्थान रहा. महिला SHG ने 200 करोड़ रुपये से अधिक की कम्पोस्ट खाद बेची. गांवों में स्वसहायता समूह जैविक खाद और गाय के गोबर से बने कीटनाशकों के उत्पादन और बिक्री के साथ-साथ गो-कश्त, मिट्टी के दीये, अगरबत्ती, मूर्ति और अन्य सामग्री जैसी वस्तुओं का उत्पादन और बिक्री कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं.</p>
<p dir="ltr">छत्तीसगढ़ के अलावा और भी राज्यों में गोबर पेंट बनाने का काम SHG महिलाएं ज़ोरो-शोर से कर रही हैं. राजस्थान का कुम्भा महिला स्वसहायता समूह एक दशक से ज़्यादा समय से गाय के गोबर का पेंट बना रहा है. उन्होंने अपने पर्यावरण के अनुकूल पेंट के लिए पहचान हासिल की है और अपने काम के लिए कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं.तमिलनाडु की महिला विकास स्वसहायता समूह ने गाय के गोबर का पेंट बनाना शुरू किया, ताकि उनके मवेशियों के कचरे का उपयोग किया जा सके और आय उत्पन्न की जा सके. बिहार के सनिता देवी महिला स्वसहायता समूह ने 2018 में गाय के गोबर का पेंट बनाना शुरू किया. </p>
<p dir="ltr">देशभर में और भी जगहों की SHG महिलाएं गोबर से पेंट बना कर पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं को भी बढ़ावा दे रही हैं. इन महिलाओं को सही ट्रेनिंग और तकनीक तक पहुंचाकर देकर पर्यावरण संरक्षण के और भी मुद्दों पर काम किया जा सकता है. इन महिलाओं के सहयोग और उनके इनोवेशन का सहयोग लेकर ज़मीने स्तर पर नेचर फ्रेंडली प्रेक्टिसेस को लागू करवाया जा सकता है.  <strong id="docs-internal-guid-39213382-7fff-fb17-b427-c03cbbb6c76c"><br><br><br><br><br></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sat, 18 Mar 2023 18:34:31 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-make-natural-paint-from-cow-dung]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/DfmDcxDSsyLJ0fVuhSGk.PNG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/DfmDcxDSsyLJ0fVuhSGk.PNG"/></item><item><title><![CDATA[अपनी नई ज़िंदगी मैं खुद लिखूंगी... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/padmashree-phoolbasan-devi-yadav</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aU9wwvAAuXASg1DFCBht.jpg"><p dir="ltr">सिर्फ़ दो रुपये और दो मुट्ठी चावल से अपना बिज़नेस शुरू करना.... उसी बिज़नेस से पद्मश्री तक का सफर ..... बिजनेस शुरू किया स्वयं सहायता समूह के दायरों में रहकर और उसी SHG ने पहुंचाया KBC की हॉट सीट तक.  इस प्रश्न का सही जवाब है फूलबासन बाई यादव. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के सुकुलदैहान गांव में जन्मी और गरीबी के दलदल में आधा जीवन गुजारा. 10 साल की नाज़ुक सी उम्र में शादी कर ज़िम्मेदारियों का बोझ और जल्द ही चार बच्चों की ज़िम्मेदारी उन पर आ गई. अपने बच्चों को भूख से तड़पता देख फूलबासन अपने चारों बच्चों के साथ ट्रेन कि पटरी पर अपनी ज़िंदगी ख़त्म करने चली गई. उनके बच्चे रोते हुए कहने लगे, "माँ, हमें नहीं मरना, हम आज के बाद आपसे कभी खाना नहीं मांगेंगे" इन मासूम शब्दों और सिसकियों ने उन्हें दोबारा जीने पर मजबूर कर दिया. </p>
<p dir="ltr">इस नई मिली ज़िंदगी की कहानी उन्होंने खुद लिखने की ठानी और इस बार अपने बच्चों और गरीबों के लिए जीने का सोचा. 11 महिलाओं के साथ मिलकर 2 मुट्ठी चावल और 2 रूपए इकट्ठा हुए और अपना समूह बना लिया. समाज के उठते सवालों को चुकपचाप सुना और नए मिले लक्ष्य पर ध्यान दिया.  अपने समूह का नाम रखा बम्लेश्वरी जनहितकारी स्वसहायता समूह. फूलबासन बाई मां बम्लेश्वरी स्वसहायता समूह की अध्यक्ष हैं और 100 से ज़्यादा समूहों में करीब दो लाख महिलाएं काम कर रही हैं. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/7ysDKu29D90KbNMYtb9o.jpg" alt="Phoolbasan Bai yadav"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Google Images</em></span></p>
<p dir="ltr">समूह की महिलाएं अचार बनाना बखूबी जानती थीं. बम्लेश्वरी ब्रांड के नाम से आम और नींबू के अचार तैयार किया जो छत्तीसगढ़ के तीन सौ  स्कूलों में बिका. अचार बनाने तक सीमित न रहकर समाज में बदलाव लाने के लिए भी समूह की महिलाओं के साथ मिलकर पहल की. छत्तीसगढ़ राज्य के अगल-अलग जिलों में करीब 3 हजार लड़कियों और महिलाओं को कराटे की ट्रेनिंग देकर उन्हें हर मुश्किल से निपटना सिखाया. नशे और जुए के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए महिला फौज तैयार की जो रात में सीटी बजाती हुई अपने गांवों में निकलती हैं और किसी भी घर में हो रही मारपीट को रोक देती हैं. शराब और जुआ खेलते पुरुषों को सामने बुलाकर पूरे गाँव के सामने समझाइश देतीं हैं.  इस महिला फ़ौज ने घरेलु हिंसा पर रोक लगाई. कोरोना महामारी के दौरान मां बम्लेश्वरी स्वसहायता समूह की महिलाओं ने 15 लाख मास्क तैयार किये. इनके समूह की महिलाएं बकरी पालन,मच्छली पालन, डेयरी, खाद कम्पनी चला रही हैं और अपने हालात खुद बदल रही हैं. </p>
<p dir="ltr">भारत सरकार ने फूलबासन बाई को पद्मश्री से सम्मानित किया और छत्तीसगढ़ सरकार ने जनाना सुरक्षा योजना का ब्रांड एंबेसडर बनाया. कौन बनेगा करोड़पति, दूरदर्शन, चैनल 360 इंडिया, जोश टॉक जैसे बड़े स्टेज पर उन्होंने हर महिला को हार न मानने और गरीबी को अपनी मेहनत से मुंह तोड़ जवाब देने की सीख दी. फूलबासन ने जोश टॉक में कहां, "डर को जब आप हतियार बना लेते हो तो सारे रास्ते आसान हो जाते हैं." </p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Tue, 14 Mar 2023 18:01:43 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/padmashree-phoolbasan-devi-yadav]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aU9wwvAAuXASg1DFCBht.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aU9wwvAAuXASg1DFCBht.jpg"/></item></channel></rss>