<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ दीपिका पादुकोण]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/diipikaa-paadukonn</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/diipikaa-paadukonn" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 16 May 2023 15:55:47 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[बात मेंटल हेल्थ की... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/indian-female-celebrities-open-up-about-depression-anxiety-and-mental-wellbeing</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/BoAsms4fQwLf5TJPey4r.jpg"><p>पैसा, रूतबा, रोज़गार... डिप्रेशन (depression) एंग्जायटी (anxiety) से नहीं बचा सकते. कई बार हमे ऐसा लगता है कि संपन्न और प्रसिद्ध लोगों को मानसिक स्वास्थ्य परेशानियां (mental health issues) नहीं होती, लेकिन ये धारणा बिलकुल गलत है. मानसिक स्वास्थ्य परेशानी भेदभाव नहीं करती. जीवन में होने वाले उतार चढ़ाव किसी भी इंसान को डिप्रेशन के चंगुल में जकड़ सकते हैं. हमारे समाज में मेन्टल हेल्थ के विषय पर बात करना आसान नहीं है. पर, बात करने से ही तो बात बनती है. हमारे कुछ फेवरेट सेलेब्रिटीज़ (celebrities) ने भी मेंटल हेल्थ समस्याओं का अनुभव किया, और इस विषय पर खुलकर बात की. </p>
<h2>दीपिका पादुकोण</h2>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/UlcSohVkbT2U94KhJT51.jpg" alt="celebrities talking mental health"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: News18</em></span></p>
<p>मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता पर खुलकर बात करने वाली भारतीय हस्तियों की लिस्ट में बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण शायद सबसे महत्वपूर्ण नाम है. दीपिका ने न केवल 2015 में डिप्रेशन के साथ अपने संघर्षों पर खुलकर बात की बल्कि 'द लिव लव लाफ' फाउंडेशन भी शुरू किया. मेघन मार्कल के पॉडकास्ट में, दीपिका ने ​​​​कहा कि लोगों को विश्वास नहीं हुआ कि डिप्रेशन होने के बारे में वे ईमानदार है. कुछ लोगों को लगा कि ये सब किसी फिल्म के प्रोमोशन के लिए है ,और कुछ ने कहा कि दीपिका शायद किसी प्रकार की दवाई के लिए विज्ञापन कर रही है.</p>
<h2>इलियाना डिक्रूज </h2>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/YWvYP7UcTFuOvB8L6kQB.jpg" alt="celebrities talking mental health"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Guilty Bytes</em></span></p>
<p>बॉलीवुड और टॉलीवुड अभिनेत्री ने बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर और डिप्रेशन के साथ अपने लगातार संघर्ष के बारे में हमेशा खुलकर बात की है. उन्होंने बताया कि वह कोने में बैठकर घंटों रोती रहती थी और एक समय आया जब वे सुसाइडल महसूस करने लगी थी. परिवार और दोस्तों के निरंतर देखभाल और प्यार ने कठिन समय से निकलने में उनकी मदद की. वे कहती है कि दूसरी शारिक बीमारियों की तरह मानसिक समस्याओं पर भी खुलकर बात की जानी चाहिए. उपचार तक पहुंचने से ज़्यादा मदद मांगना और अपनी परेशानी को समझा पाना मुश्किल होता है.    </p>
<h2>श्रद्धा कपूर </h2>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/0DiJ7QsVnFY7oXgCYomz.jpg" alt="celebrities talking mental health"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: SpotBoyt</em></span></p>
<p>श्रद्धा कपूर ने 2018 में अपनी फिल्म स्त्री की सफलता का जश्न मनाते हुए एंग्जायटी से जूझने की बात स्वीकार की थी. मीडिया से बात करते हुए, उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार सालों से एंग्जायटी की समस्या का सकारात्मक रूप से सामना कर रही थी. उन्होंने जो महसूस किया वे शब्दों में नहीं समझाया जा सकता. वह साझा करती है कि एंग्जायटी कोई लड़ाई नहीं है. इससे जूझने के बजाय, इसे गले लगाना होगा और इसे अपने हिस्से के रूप में स्वीकार करना होगा, और इसे प्यार से देखना होगा. तभी हम इसको समझ पाएंगे, और बाहर आ सकेंगे. </p>
<h2>रुबीना दिलाइक</h2>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/7YLnjnQWELQ8X0ltGmtx.jpg" alt="celebrities talking mental health"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: One India</em></span></p>
<p>बिग बॉस 14 की विजेता ने शो के एक सेगमेंट में एंग्जायटी, तनाव, आत्महत्या के विचार और क्रोध की कठिनाइयों से निपटने पर चर्चा की थी.अभिनेत्री ने अपने असफल रिश्ते को इसका जिम्मेदार ठहराते हुए नेशनल टेलीविजन पर इसके बारे में बात की. उन्होंने अपने माता-पिता के साथ खराब संबंधों पर चर्चा की. वे बताती है कि उदासी ने उन्हें न केवल अकेला और चिड़चिड़ा महसूस कराया, बल्कि अपने अस्तित्व पर सवाल करने पर मजबूर किया. वे समझ नहीं पा रही थी कि उनके साथ क्या और क्यों हो रहा है. ऑनलाइन सर्च करने पर कुछ सवालों के जवाब मिले और चीज़ें बेहतर होनी शुरू हुई. </p>
<h2>अनुष्का शर्मा </h2>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Gcw69e1ReBjaSmFGm2rP.jpg" alt="celebrities talking mental health"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Tribune</em></span></p>
<p>अभिनेत्री ने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए एंग्जायटी और अन्य मानसिक स्वास्थ्य परेशानियां को एक्सेप्ट करने की ज़रुरत के बारे में बात की. डिप्रेशन पर अनुष्का ने एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें कहा गया था, "अवसाद एक जेल है जहां आप पीड़ित कैदी और क्रूर जेलर दोनों होते हैं." उन्होंने इस बारे में भी विस्तार से बात की कि कैसे वे एंग्जायटी और डिप्रेशन से संबंधित शर्म को पूरी तरह से मिटाना चाहती हैं.</p>
<h2>इरा खान </h2>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/c4u7x1VBVxRfgoDGL6Re.jpg" alt="celebrities talking mental health"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: LastestLY</em></span></p>
<p>आमिर खान की बेटी इरा ने हाल ही में अगात्सु फाउंडेशन की शुरुआत करते हुए कहा, “अगत्सु मेरा प्रयास है, यह संतुलन खोजने की कोशिश करने का मेरा तरीका है. आपको अपने जीवन को बेहतर बनाने में मदद करने का प्रयास है. मानसिक स्वास्थ्य संबंधित संसाधन उपलब्ध कराने के लक्ष्य से, फाउंडेशन सामुदायिक कार्यशालाएं भी आयोजित करवाती है. जिसके ज़रिये लोग आपस में मिलते हैं, बात करते हैं और व्यायाम कर सकते हैं. वे मेंटल हेल्थ पर जागरूकता फैलाने के लिए मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न विषयों पर मनोवैज्ञानिकों के साथ वेबिनार भी करती है.</p>
<h2>शाहीन भट्ट </h2>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/wFEx41ssiXdCo2qJ4KtO.jpg" alt="celebrities talking mental health"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: HerZindagi</em></span></p>
<p>आलिया भट्ट की बड़ी बहन, शाहीन भट्ट क्लिनिकल डिप्रेशन और एंग्ज़ाइटी के साथ अपने संघर्ष के बारे में खुलकर बात करती रही हैं. शाहीन ने मानसिक बीमारी के साथ अपने अनुभव के बारे में एक किताब, 'आई हैव नेवर बीन (अन) हैपियर' लिखी है. बहन आलिया के साथ किताब लॉन्च करते समय, शाहीन ने कहा, "इस किताब के ज़रिये मैं खुद को दुनिया के सामने रखती हूं, अपनी सारी परेशनियों को टेबल पर रखती हूं. "हम एक ऐसे समाज में रहते हैं जहां हर कोई हर समय ठीक होने का नाटक कर रहा है. जब आप अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर बात करते हैं तो सुनने वाले को लगता है, 'अरे मैं दुनिया में अकेली नहीं हूं " </p>
<h2>नव्या नंदा</h2>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/P2QLyUuv0TZ3df9bhV0h.jpg" alt="navya nanda"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Telly chakkar</em></span></p>
<p>श्वेता बच्चन नंदा की बेटी नव्या दो संस्थाएं चलाती है, आरा हेल्थ और प्रोजेक्ट नवेली. आरा हेल्थ मुख्य रूप से महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी प्रोडक्ट देता है. यह एक ऐसा मंच भी है जो मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित विषयों पर जागरूकता और शिक्षा फैलाता है. प्रोजेक्ट नवेली, जो लैंगिक समानता पर केंद्रित है, मानसिक स्वास्थ्य के विषयों पर भी बात करता है.</p>
<h2>अमाला पॉल</h2>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/LGt9G0YS4Y9yaESTRqYE.jpeg" alt="celebrities talking mental health"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: India Today</em></span></p>
<p>अमाला पॉल ने अपने पिता पॉल वर्गीज को कैंसर की वजह से खो दिया. उन्होंने अपनी मां एनिस पॉल के साथ इंस्टाग्राम पर तस्वीरें शेयर कर इमोशनल नोट लिखा. उन्होंने बताया कि इस मुश्किल घड़ी में उन्होंने अपने आप को और मां को डिप्रेशन से जूझते देखा. वे "प्यार और उपचार के ज़रिये आये बदलाव से फीनिक्स की तरह उड़ने के लिए तैयार हैं." उन्होंने लिखा, "माता-पिता को खोना एक ऐसा एहसास है जिसे बयां नहीं किया जा सकता, आप अज्ञात अंधेरे में आगे बढ़ना शुरू करते हैं और कई तरह की भावनाओं का अनुभव करते हैं." इस अनुभव ने उन्हें काफी कुछ सिखाया और महसूस करवाया. </p>
<p><em>अभिनेत्रियां, अक्सर जो भी करती है ट्रेंड बन जाता है. कई सुपरस्टार्स ने अपने इन्फ्लुएंस करने के पॉवर को इस्तेमाल करते हुए मानसिक स्वास्थ्य पर चुप्पी तोड़ी और मेंटल हेल्थ परेशानियों से जूझ रहे लोगों को मदद मांगने और खुल कर बात करने के लिए प्रेरित किया.</em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Tue, 16 May 2023 15:55:47 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/indian-female-celebrities-open-up-about-depression-anxiety-and-mental-wellbeing]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/BoAsms4fQwLf5TJPey4r.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/BoAsms4fQwLf5TJPey4r.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मै चाहे ये पहनू , मै चाहे वो पहनू , मेरी मर्ज़ी… ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/history-of-bikini</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WHykIQCbOFxuFDvlepbm.jpg"><p>लड़कियों को पढ़ाओ उनको बढ़ाओ, उनकी इज़्ज़त करो, वो किसी से कम नहीं है, लड़कियां जो चाहे वो कर सकती हैं, उन्हें हर तरह की आज़ादी है, .ऐसी कितनी बातें हम सब हर दिन सुनते होंगे. कितने ही लोग अपने आप को सबसे बड़ा 'फेमिनिस्ट' बताते हैं. लेकिन आज भी जब एक लड़की स्कर्ट या शॉर्ट्स पहन कर बाहर निकलती है, तो ज़्यादातर निगाहें उसका पीछा करने लगती हैं, मन ही मन सवाल उठाये जाते हैं और कहीं न कहीं चरित्र परिभाषित कर दिया जाता है. यह तो तथाकथित शहरी हालात है गावों की बात तो छोड़ ही दें.  </p>
<p>किसी भी लोकतांत्रिक आज़ाद देश में सोचने, बोलने, खाने पीने, पहनावे की आज़ादी होनी चाहिए. जब आज़ादी हमारे देश के हर इंसान को बराबर मिली है तो लड़कियों को अपने पसंद के कपड़े पहनने से पहले क्यों सोचना पड़ता है ? घर से शॉर्ट ड्रेसेस पहन के निकलने से पहले ही घर वाले बोल देते हैं, 'ये पहन कर मत जाओ '. बंदिश घर से ही शुरू होती है और बाहर उस बंदिश पर मुहर लग जाती है.  </p>
<p>अनचाहे ही लड़की खुद से ये सावल पूछने पर मजबूर हो जाती है -  ' कही गलती मेरी ही तो नहीं ? ' लेकिन हर वो नज़र जो उसे मुड़ के देख रही है वो खुद से ये सवाल क्यों नहीं कर रही? समाज के ठेकेदारों ने तय कर लिया कि लड़कियां क्या पहनेंगी. अगर आज एक लड़का शॉर्ट्स पहन कर बाहर निकले तो कहा जाएगा कि, ' यार शॉर्ट्स कम्फर्टेबल होते हैं, और गर्मी भी तो कितनी है. 'और वही शॉर्ट्स अगर एक लड़की पहन के निकले तो ?</p>
<p>लडकियां जब सिर्फ शॉर्ट्स या क्रॉप टॉप पहन रही है तब ये हाल है, बिकिनी पहन ले तो हंगामा ही हो जाए. सी बीच हो या स्विमिंग पूल, फिल्म की शूट हो या कोई ऐड की, लड़की बिकिनी पहन तो ले. उसका कैरक्टर असैसिनेशन करने के लिए देश की आधी जनता तैयार हो जाएगी. लोग लड़कियों के मामले में हमेशा ये भूल जाते हैं कि उन्हें भी उतनी ही आज़ादी और हक़ मिला है जितना एक लड़के को. वो जब चाहे, जहां चाहे, जो चाहे वो पहन सकती है.</p>
<p>सिर्फ आज की पीढ़ी नहीं बल्कि 1966  की फिल्म "एन इवनिंग इन पेरिस" में ऑन-स्क्रीन बिकनी पहनने वाली पहली भारतीय अभिनेत्री शर्मिला टैगोर थीं. उन्होंने भारत में सबसे पहले बिना किसी डर के कैमरा के सामने बिकिनी पहनी जो कि उस वक़्त के हिसाब से एक बहुत ही 'बोल्ड' मूव था. बिकनी में शर्मिला टैगोर जैसी कलाकार को देखकर भारत में उस समय बहुत हलचल मच गयी थी. तब से, भारतीय सिनेमा में कई दूसरी अभिनेत्रियों ने ऑन-स्क्रीन बिकनी पहनी है, जिनमें "कुर्बानी" (1980) में ज़ीनत अमान और "बॉबी" (1973) में डिंपल कपाड़िया  शामिल है. </p>
<p>फैशन डिज़ाइनर लुइस रेकर्ड सबसे पहले बिकनी क्लोथिंग स्टाइल को लाये थे. इन्होंने बिकिनी का नाम 'बिकिनी एटोल' के नाम पर रखा , जहां 4 दिन पहले ही 'नुक्लिअर बम' का परिक्षण किया गया था. भारत में पहनावा पहले से  ही मौसम और हालात पर निर्भर रहा. हमारे जनजातीय और सदियों पहले के समाज में पहनावे की आज़ादी ज़्यादा थी. विदेशों में बिकिनी पहनावा नया है और इसको फेमिनिस्ट मूवमेंट से जुड़ा हुआ माना गया. हॉलीवुड की अभिनेत्रियों को भी बिकिनी पहनने पर कई ताने नहीं मारे गए है. मैरीलीन मोनरो और मेगन फॉक्स जैसे नाम बिकिनी पहन के ही दुनिया पर छाए लेकिन वो भी लोगो कि सोच से बच नहीं पाई. और ये ही हाल है हमारे देश में जहां आए दिन कोई ना कोई अपने पहनावे को लेकर बेशरम रंग से पुता नज़र आता है.  </p>
<p>तापसी पन्नू , दीपिका पादुकोण, अनुष्का शर्मा, आलिया भट्, प्रियंका चोपड़ा जैसे कई नाम है जिन्हें आज पूरा देश जानता है. ये सब अपनी प्रतिभा देश दुनिया को कई बार साबित कर चुकी है लेकिन फिर भी बात उनके कपड़ों की होती है. विवाद सेलिब्रिटी कल्चर का हिस्सा है, लेकिन महिला सेलिब्रिटी ज़्यादातर अपने कपड़ों को लेकर ही विवादों में घिरती है. इन सेलिब्रिटी महिलाओं को आम लड़कियां अपनी प्रेरणा मानती है, और जब उनकी आइडल ऐसे विवादों में फंसती है तब आम लड़कियों की आज़ादी भी विवाद का उदाहरण देकर दबा दी जाती है. </p>
<p>आज के समय में तो भारतीय फिल्मो में ज़्यादातर एक्ट्रेस बिकिनी पहन के शूट करती है और सोशल मीडिया पर पोस्ट्स भी आते रहते है. समय तो बदल गया है और लड़कियों का आत्मविश्वास भी. नहीं बदली है तो सोच, नज़र और मानसिकता जो लड़की के छोटे कपड़ो को देखकर ज़्यादा छोटी हो जाती है. भले ही बदलाव हुए है, आज से 50 साल पहले हम जो सोच भी नहीं सकते थे, वो आज कर रहे है. लेकिन छोटी सोच छोटे कपड़ों पर अभी भी भारी है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Thu, 30 Mar 2023 13:41:05 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/history-of-bikini]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WHykIQCbOFxuFDvlepbm.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WHykIQCbOFxuFDvlepbm.jpg"/></item></channel></rss>