<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ दिल्ली]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/dillii</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/dillii" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Wed, 26 Jul 2023 11:20:21 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[पिकल्ड विद लव ....नानी के हाथ का ज़ायकेदार खाना ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/usha-gupta-defying-age-and-redefining-purpose</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ch5mHEZOzeVxI1bV3xGl.jpg"><h2><span>मिलिए उषा गुप्ता जो है पिकल्ड विथ लव की ओनर</span></h2>
<p dir="ltr"><span>आज 88 वर्षीय<strong> <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/ias-durga-shakti-nagpal-who-worked-for-the-society">दिल्ली</a></strong> <strong>(Delhi)</strong> की रहने वाली&nbsp;<strong>उषा गुप्ता (Usha Gupta) </strong>ने समाज को एक बार फिर से दिखा दिया है कि काम करने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती, बस जरुरत है तो काम को शुरू करने की. उषा गुप्ता को&nbsp; लोग<strong> 'नानी जी'</strong> के नाम से भी जानते हैं. उन्होंने अपने व्यवसाय&nbsp;<strong>'पिकल्ड विद लव' (Pickled With Love)&nbsp;</strong>के जरिये से अचार और चटनी बेचकर गरीबों के लिए धन जुटाती है. उन्होंने अब तक चार शहरों में 65000 से ज्यादा&nbsp; बेघर लोगों को भोजन कराया है. यह काम उषा का मकसद बन गया और इसे वह पूरी ईमानदारी से निभा रही हैं.&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>उषा और उनके पति को<strong>&nbsp;</strong><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/smc-plans-to-provide-paramedical-training-to-women-of-shgs"> COVID-19</a><strong><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/smc-plans-to-provide-paramedical-training-to-women-of-shgs"> </a></strong>की दूसरी लहर के दौरान, पॉजिटिव पाए गए और उन्हें साथ में ही हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. एक महीने के लम्बे संघर्ष के बाद उनके पति गुजर गए. उषा अपने 63 वर्ष से रहे साथी की मौत के बाद टूट गई थी. अस्पताल में भर्ती के दौरान उन्होंने बहुत से लोगों को संसाधनों की कमी की वजह से कष्टों से गुजरते देखा. उनके पति को भी दो बार ऑक्सीजन की कमी हो गई थी और दुर्भाग्य से वह बच नहीं सके. उषा बताती हैं कि ऑक्सीजन की कमी एक बात थी, उस समय ऐसा लग रहा था की, मानों वह किसी युद्ध के बीच खड़ी हो. अस्पताल में हर कोई घबराया हुआ था. तभी से वह COVID राहत के लिए दान करना चाहती थी.</span></p>
<h3 dir="ltr"><span>उषा का महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास&nbsp;</span></h3>
<p dir="ltr"><span>उषा बताती है कि उनके पति हमेशा कहते थे कि तुम जो भी करो मन लगाकर करो, मैं बस उसी का पालन कर रही हूँ. उषा ने खाने से जुड़ी<strong> 'भारतीय शाकाहारी व्यंजन ' (Indian Vegetarian Recipes) </strong>नाम की किताब भी लिखी हैं. उषा अब उन &nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/vandana-patidar-changing-lives-of-women-with-the-help-of-shgs">महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास</a><strong>&nbsp;</strong> कर रही हैं, जो खुद के व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं. उषा उन्हें उनकी <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/one-district-one-product-strategy-boosts-keralas-microenterprise-in-food-sector">आजीविका</a>&nbsp;कमाने के लिए खाना पकाने की कला को सिखाने की इच्छा रखती हैं और साथ ही उनके व्यवसाय शुरू करने के लिए उन्हें प्रशिक्षण देना चाहती हैं. उषा ने मुश्किल समय में टूट जाने की जगह हिम्मत रखी और आज वह दूसरी महिलाओं को भी हिम्मत दे रही है.&nbsp;</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Wed, 26 Jul 2023 11:20:21 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/usha-gupta-defying-age-and-redefining-purpose]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ch5mHEZOzeVxI1bV3xGl.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ch5mHEZOzeVxI1bV3xGl.jpg"/></item><item><title><![CDATA[ऐतिहासिक स्मारक जिन्हें बनवाया महिलाओं ने ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/indian-monuments-made-by-female-rulers</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TYUcHKma1vYMRC81F6i1.jpg"><p><em>इतिहास को संजो कर रखने के लिए कई स्मारक और संरचनाएं बनाई गई जो हमारी समृद्ध सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत की गवाही देते हैं. भारत का गौरवशाली अतीत इसके प्राचीन मंदिरों, किलों, महलों और स्मारकों में छुपा है. जब हम देश भर में फैली इन संरचनाओं की ख़ूबसूरती की प्रशंसा करते हैं, तो हम अक्सर इनसे जुड़े लोगों की कहानियां भूल जाते हैं. इन स्मारकों के ज़रिये अपने प्रियजनों को श्रद्धांजलि देने वाले शक्तिशाली पुरुष शासकों के सैकड़ों उदाहरणों से इतिहास भरा पड़ा है. लेकिन, महिलाओं ने भी कई प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारकों और संरचनाओं को बनवाया था जिसकी जानकारी काफ़ी कम है. इतिहास गवाह है, महिला शासकों ने अपने और अपने से जुड़े लोगों की कहानियों को इन स्मारकों के ज़रिये अमर कर दिया. ऐसे कुछ, महिलाओं द्वारा बनवाये गए स्मारकों की कहानी जानते हैं. </em></p>
<p><strong>हुमायुं का मकबरा, दिल्ली</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/86YFHV1ZYFUndSQUbgP5.jpg" alt="humanyu"><br>यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज,मशहूर हुमायूं का मक़बरा मुगल साम्राज्ञी हमीदा बानू बेगम ने उनके पति हुमायूं के निधन के बाद बनाया था. यह मुगलों के प्रसिद्ध उद्यान मकबरों में पहला है. एक प्रभावशाली उच्च मंच पर स्थित, मकबरे में एक क्लासिक प्याज़ के आकार का गुंबद है. मकबरे के परिसर में अरब की सराय, ईसा खान का मकबरा, नई का गुंबद और नीली गुंबद जैसी अन्य इमारतें भी हैं.</p>
<p><strong>माहिम कॉज़वे, मुंबई</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/tK8lFWxLdpoExk5wGa5V.jpg" alt="mahim causeway"><br>मुंबई में माहिम कॉज़वे 1841-1846 के बीच साल्सेट द्वीप को माहिम से जोड़ने के लिए बनाया गया था. दो द्वीपों के बीच का इलाका दलदली और खतरनाक था जिसे पार करते समय कई लोगों की जान चली गई. इन हादसों ने सेतु की ज़रुरत बढ़ादी. लेकिन जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने सेतु बनवाने के लिए धन देने से इनकार कर दिया, तो अवाबाई जमशेदजी जीजीभॉय आगे आई. उन्होंने सेतु बनाने के लिए कुल 1,57,000 रुपये की लागत दान की थी. माहिम कॉज़वे मुंबई शहर की लाइफलाइन बानी हुई है. </p>
<p><strong>मोहिनीश्वर शिवालय मंदिर, गुलमर्ग</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/df4TZD1I60BKPWWGr1La.jpg" alt="Gulmarg"><br>मोहिनीश्वर शिवालय मंदिर जिसे महारानी शंकर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, कश्मीर घाटी में गुलमर्ग शहर के बीच-ओ-बीच है. सुंदर बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच एक छोटी पहाड़ी पर स्थित, यह मंदिर 1915 में महारानी मोहिनी बाई सिसोदिया ने बनवाया था, जो कश्मीर के तत्कालीन राजा हरि सिंह की पत्नी थीं. मंदिर इस तरह से बनाया गया है कि यह गुलमर्ग के सभी कोनों से दिखाई देता है. इसे कई हिंदी फिल्मों में दिखाया गया है, जिसमें फिल्म 'आपकी कसम' का प्रसिद्द गीत 'जय जय शिव शंकर' शामिल है, जिसमें सुपरस्टार राजेश खन्ना और मुमताज ने अभिनय किया था.</p>
<p><strong>ताज-उल-मस्जिद, भोपाल, मध्य प्रदेश</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/8HvLE66V0cV74XlvoOBX.jpg" alt="Taj ul masjid"><br>भारत की सबसे बड़ी मस्जिद, ताज-उल-मस्जिद या 'मस्जिदों के बीच का ताज', भोपाल की बेगमों द्वारा बनवाया गए भव्य स्मारकों में से एक है. जिन्होंने 1819 से 1926 तक शासन किया था और वे भारत में राजनीतिक और सामाजिक बदलाव लाने के लिए जानी जाती हैं. बेगम शाहजहां ने अपने शासनकाल के दौरान कई महलों, मंदिरों और मस्जिदों का निर्माण करवाया था. उहोंने मस्जिद के लिए वास्तुकार अल्लाह रक्खा खान को नियुक्त किया. लेकिन 1901 में बेगम शाहजहां के निधन के बाद निर्माण रुक गया. उनकी बेटी सुल्तान जहां बेगम ने काम वापिस शुरू करवाया और, आखिरकार 1985 में मस्जिद बनकर तैयार हुई. मस्जिद के नौ गुंबदों, आंगन के तालाब में बनता प्रतिबिंब, और  महिलाओं के लिए नमाज़ अदा करने की अलग जगह ताज-उल-मस्जिद की कुछ विशेषताएं है.  </p>
<p><strong>विरुपाक्ष मंदिर, पट्टदकल, कर्नाटक</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/MhuXVkokIDI5M3y7f3bw.jpg" alt="Virupaksh karnatak"><br>उत्तरी कर्नाटक में मालाप्रभा नदी के किनारे मंदिरों का एक समूह है, जिसे कई लोग चालुक्य मंदिर वास्तुकला का प्रतीक मानते हैं. लेकिन इन यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज रॉक-कट संरचनाओं में, सबसे उत्कृष्ट विरुपाक्ष मंदिर है. विरुपाक्ष मंदिर रानी लोकमहादेवी ने बनवाया था. 740 ईस्वी के आसपास पूरा हुआ. पल्लवों के खिलाफ अपने पति विक्रमादित्य द्वितीय की जीत का जश्न मानाने के लिए उन्होंने मंदिर का निर्माण करवाया. मंदिर का निर्माण कांची के मूर्तिकारों ने किया. प्रवेश द्वार पर नंदी की विशाल आकृति, नटराज और रावणानुग्रह जैसे देवताओं की उत्कृष्ट मूर्तियां, और महाभारत और रामायण की कथाओं की नक्काशी मंदिर की कुछ विशेष्ताएं हैं.</p>
<p><strong>इत्तिमाद-उद-दौला, आगरा, उत्तर प्रदेश</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/uFQI9NaqOVdfoA798daU.jpg" alt="ittimad"><br>इत्तिमाद-उद-दौला एक बेटी की अपने पिता के प्रति समर्पण की गवाही थी. मक़बरे को सम्राट जहांगीर की पत्नी मुगल साम्राज्ञी नूरजहां ने अपने पिता मिर्जा गियास बेग की याद में बनवाया था. मिर्ज़ा को अकबर द्वारा इत्तिमाद-उद-दौला की उपाधि दी गई थी, और वे जहांगीर के शासनकाल में वज़ीर के पद तक पहुंचे थे. उनकी मृत्यु के बाद, नूरजहाँ को 1622 से 1628 ईस्वी तक आगरा में इस स्मृति में बनवाने में सात साल लग गए. यह पूरी तरह से संगमरमर में बना भारत का पहला स्मारक बना, जिसके बारे में कहा जाता है कि अपने सौतेले बेटे सम्राट शाहजहाँ द्वारा बनवाये ताजमहल को भी प्रेरित किया था.</p>
<p><strong>रानी की वाव, पाटन, गुजरात</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/REqAjJMw7Tailbeuyshr.jpg" alt="Rani ki vav "><br>पाटन, गुजरात में सरस्वती नदी के तट पर बनी, रानी की वाव 11 वीं शताब्दी में रानी उदयमती ने अपने पति राजा भीमदेव प्रथम के स्मारक के रूप में बनवाया था. आश्चर्यजनक बावड़ी मारू-गुर्जर स्थापत्य शैली में बनी है. यह उच्च कलात्मक गुणवत्ता के मूर्तिकला पैनलों के साथ सीढ़ियों के सात स्तरों में बंटा है; 500 से अधिक सिद्धांत मूर्तियां और 1,000 से अधिक छोटी मूर्तियां धार्मिक, पौराणिक और धर्मनिरपेक्ष इमेजरी को जोड़ती हैं. 100 रूपए के भारतीय नोट पर बानी तस्वीर रानी की वाव की ही है.   </p>
<p><strong>दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/kCHqWZUXrsdAU1XgMdR1.jpg" alt="Dakshineswar Kolkata"><br>रानी रश्मोनी सिर्फ रानी नहीं, बल्कि एक समाजसेवी थीं. एक मछुआरे के परिवार में जन्मी, रानी रश्मोनी ने ईस्ट इंडिया कंपनी के मछली पकड़ने के कर के विरोध के अलावा सती, बहुविवाह और बाल विवाह के खिलाफ आवाज़ उठाई, और बंगाल की जनता के बीच लोकप्रिय हो गई. उन्होंने 1857 में 20 एकड़ जमीन खरीदी और बंगाल स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर की शैली में नौ मीनारों के साथ दो मंजिला संरचना का निर्माण किया. एक शूद्र महिला के मंदिर के निर्माण के खिलाफ ब्राह्मण पुजारियों के प्रतिरोध के बावजूद उन्होंने निर्माण कार्य जारी रखा. देवी काली के रूप, भवतारिणी की मूर्ति को मंदिर में रखा गया, जहां रामकृष्ण परमहंस ने मंदिर के मुख्य पुजारी के रूप में सेवा की.</p>
<p><strong>मिर्जन किला, कुम्ता</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/rCDXQIdj58wVfM1YKU9U.jpg" alt="mirjan fort"><br>अघनाशिनी नदी के तट पर स्थित, कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित यह स्मारक अपनी उल्लेखनीय आर्किटेक्चर कला के लिए जाना जाता है. इसे 16वीं शताब्दी में भारत की 'काली मिर्च' की रानी के रूप में भी प्रसिद्द गरसोप्पा की रानी चेन्नाभैरदेवी ने बनवाया था. मिर्जन किले में रहने वाली रानी ने इसे काली मिर्च शिपिंग कर अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया. तुलुवा-सलुवा कबीले से आने वाली इस रानी ने 54 वर्षों तक गरसोप्पा की रानी के रूप में शासन किया. यह किला कई युद्धों का गवाह रहा है. </p>
<p><strong>खैर-उल-मंज़िल, दिल्ली </strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/3Wv8Bu3p28GStMREemNo.jpg" alt="Khairul manzil."><br>नई दिल्ली में स्थित, इस ऐतिहासिक मस्जिद का निर्माण 1561 में सम्राट अकबर की नर्सों में से एक, और उनके दरबार की एक प्रभावशाली महिला महम अंगा ने करवाया था. मस्जिद मथुरा रोड पर पुराना किला के सामने शेरशाह गेट के दक्षिण पूर्व में स्थित है. यह मुगल वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना. मस्जिद दो मंजिला संरचना है जहां पश्चिम की ओर प्रार्थना कक्ष हैं और बीच में बड़ा प्रांगण है. इस मस्जिद का मुख्य आकर्षण लाल बलुआ पत्थर से बना विशाल प्रवेश द्वार है. </p>
<p><em>अगर आप इन जगहों पर अब तक नहीं गए हैं, तो एक बार ज़रूर जाएं. स्मारक की डिटेलिंग, बनावट और वास्तुकला के साथ-साथ उसके पीछे छुपी कहानी को जानने की कोशिश ज़रूर करें. </em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Tue, 02 May 2023 15:38:34 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/indian-monuments-made-by-female-rulers]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TYUcHKma1vYMRC81F6i1.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TYUcHKma1vYMRC81F6i1.jpg"/></item><item><title><![CDATA[छवि ने बदली गांव की छवि ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/first-mba-sarpanch-of-sodha-village-rajasthan-india-chhavi-rajawat</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/j9STD9QWAhH9SMkIaelU.jpg"><p dir="ltr">अक्सर लोगों को कहते हुए सुना होगा- "पढ़ाई कर लो ताकि एक अच्छी नौकरी मिले और गरीबी से आज़ादी!" बच्चे मानते है और एक अच्छी खासी नौकरी करते हुए आपने परिवार के जीवन को सुधारते भी है. लेकिन कुछ ऐसे भी है जो, सिर्फ अपना और अपने परिवार का ही नहीं बल्कि अपने गांव-कस्बे का भी सोचे. ये उन कुछ लोगों में से है जिन्हे खुद से पहले दूसरों का ख़्याल आता है. ऐसी ही एक महिला जिनका नाम है 'छवि राजावत', इन्होनें भी अपनी अच्छीखासी नौकरी छोड़ दी ताकि वो अपने गांव के हालातों को सुधार पाए. नौकरी भी कोई ऐसी वैसे नहीं, छवि एक MBA ग्रेजुएट है जिन्होंने सिर्फ अपने गांव की भाले के लिए, 1 लाख रूपए महीने की नौकरी को छोड़ते वक़्त एक बार भी नहीं सोचा. </p>
<p dir="ltr">छवि राजावत है हमारे देश की पहली MBA सरपंच है, जिन्होंने राजस्थान के गांव सोढ़ा की चार साल में ही सूरत बदल दी. इनके गांव में पानी की बहुत कमी थी, कच्ची सड़के थी, बिजली की बहुत समस्या रहती थी, और ऐसी ना जाने कितनी परेशानियां जिनको देख कर भी अनदेखा किया जा रहा था. लेकिन छवि से ये सब कुछ देखा नहीं गया और उन्होंने सरपंच बनते ही इन सारे कामो को पूरा करने के लिए काम करना शुरू कर दिया. आज हालत ये है कि सोढा गांव की सूरत ही बदल चुकी है. उन्होंने पानी कि ज़रूरत को पूरा किया, 40 से अधिक सड़के बनवाई, और सौर ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ाते हुए जैविक खेती पर ज़्यादा जोर दिया. उनके इन्हीं प्रयासों से आज गांव ही नहीं दूसरे गांवों के लोगों के लिए भी रोल मॉडल बन गई हैं. </p>
<p dir="ltr"><img style="width: 464px; height: 348px;" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/NIjB7ZFzLUbGy6E0vPq6.jpg" alt="Chhavi Rajawat"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: News 18 Hindi</em></span></p>
<p dir="ltr">2003 में अपना MBA ख़त्म कर छवि दिल्ली और जयपुर कि काफी बड़ी कम्पनीज़ में नौकरी करी. वे बताती है, "नौकरी छोड़ने का वाकया भी एकदम हुआ. गांव में सूखा पड़ा था. 2010 में होने वाले पंचायत चुनाव में सरपंच की सीट महिला के लिए आरक्षित थी. गांव वालों ने मुझे सरपंच का चुनाव लड़ने कहा." जैसे ही छवि इस चुनाव में खड़ी हुई गांव वालो ने उन्हें जीता दिया और वे सरपंच बन गयी. लेकिन अभी भी सबसे बड़ा सवाल उनके आगे खड़ा था, जो था- पानी कि समस्या. उन्होंने कहा, "सरपंच बनने के बाद सबसे बड़ी चुनौती गांव में पानी की समस्या का हल कराना था, लेकिन इसके लिए पैसे चाहिए थे. सरकार ने पैसा देने के लिए मना कर दिया, निजी कंपनियों ने भी मदद नहीं की.अंत में थककर मैंने अपने पिता, दादा और उनके तीन दोस्तों के प्रयास से चार दिन में 20 लाख रुपए इकट्ठे किए." इसके बाद छवि ने गांव के तालाब खुदवाया और जब बारिश हुई तो तालाब में पानी इकट्‌ठा हो गया. आज गांव में यह स्थिति है कि खेती और पशुपालन के लिए पर्याप्त पानी है. छवि का कहना है- "इस काम को मैं तभी कर पाई, जब परिवार वालों ने साथ दिया." उनके सरपंच बनने से पहले कोई काम नहीं हुआ था. उन्होंने यह साबित कर दिया कि काम करने के लिए लगन चाहिए. चाहे रास्ते में कितनी भी कठिनाइयां क्यों ना हो, ठानने से हर काम मुमकिन हो सकता है. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Mon, 24 Apr 2023 15:41:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/first-mba-sarpanch-of-sodha-village-rajasthan-india-chhavi-rajawat]]></guid><category><![CDATA[हम में है हीरो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/j9STD9QWAhH9SMkIaelU.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/j9STD9QWAhH9SMkIaelU.jpg"/></item><item><title><![CDATA['अपराजिता' ने जीते स्वर्ण ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/bhagwaani-devi-dagar-world-masters-indoor-athletics-championships-2023-delhi-state-masters-championship</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/AbBOY5e6G9CKsU6jDCAU.jpg"><p dir="ltr">जोआन कोलिन ने कहा है, "ऐज इस जस्ट ए नंबर" यानि "आयु एक संख्या मात्र है" यह बात सच साबित कर दी हरयाणा की 'भगवानी देवी डागर' ने. 95 वर्षीय यह महिला पोलैंड के टोरून में 'वर्ल्ड मास्टर्स इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2023' में तीन स्वर्ण पदक जीतकर एक बार फिर भारत का का गौरव बढ़ा चुकीं है. उन्होंने 60 मीटर दौड़, शॉटपुट और डिस्कस थ्रो में पहला स्थान अपना बनाया.</p>
<p dir="ltr">हालांकि इनका जीवन बचपन से ही इतना आसान नहीं था. झज्जर जिले के छोटे से गांव, खेड़का में  जन्म के बाद इन्हे बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ा. गांव के रीति-रिवाजों के मुताबिक, 12 साल की छोटी सी उम्र में ही इनकी शादी करा दी गयी. कुछ वर्ष के लिए सब कुछ सही चला लेकिन वक़्त ने एक बार फिर खुद को बदला और 30 साल की उम्र में भगवानी देवी विधवा हो गयी. इसी दौरान इन्होंने अपना एक बच्चा भी खो दिया. भगवानी देवी ने फैसला किया की वे दोबारा शादी नहीं करेंगी और अपने बच्चों को अकेले ही पालेंगी. कुछ समय बाद उनकी बेटी की भी मृत्यु हो गयी. वे पूरी तरीके से टूट चुकीं थी, उनकी बड़ी बेहेन ने उनका और उनको और सबसे छोटे बेटे को संभालने की ज़िम्मेदारी ली.भगवानी देवी ने इतना होने के बाद भी हार नेह मानी और ठान लिया की इतनी आसानी से यह ज़िन्दगी मुझे हरा नहीं सकती.</p>
<p dir="ltr">आखिरकार, सब कुछ सही हुआ जब उनके बेटे को दिल्ली में एक क्लर्क के रूप में नौकरी मिल गई. ज़िन्दगी ने उनको थोड़ी राहत दी और फिर सब कुछ धीरे धीरे ठीक होने लगा.भगवानी देवी के पोते विकास डागर का बड़ा हाथ है. विकास ने बताया- "बात ज्यादा पुरानी नहीं है. सिर्फ छह महीने की मेहनत ने उनकी दादी को इस मुकाम तक पहुंचा दिया है."भगवानी देवी ने जब वो शॉट पुट की बॉल अपने हाथ में ली  तो उनके अंदर बचपन वाला लगाव फिर से जाग उठा और उन्होंने अपने पोते के साथ दोबारा मैदान में खेलना शुरू कर दिया. उनका पोता इतना खुश हो गया की उनसे भगवानी देवी का नाम प्रतियोगिताएं में लिखवाना शुरू कर दिया. फिर साल 2022 मई महीने में उन्होंने दिल्ली स्टेट मास्टर्स चैंपियनशिप में अपनी उम्र वाली कैटेगिरी में तीन गोल्ड मेडल हासिल कर लिए. पूरी दुनिया उन्हें 'अपराजिता' के नाम से भी जानती है. उनका जोश आज की जवान महिलाओं और लड़कियों के लिए सहराना का विषय है. इस उम्र में भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने देश का नाम हर पूरी दुनिया में रोशन किया. अगर वो  आज भी उसी जोश के साथ अपना जीवन जी रही है तो हम क्यों नहीं ?</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Wed, 19 Apr 2023 17:44:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/bhagwaani-devi-dagar-world-masters-indoor-athletics-championships-2023-delhi-state-masters-championship]]></guid><category><![CDATA[हम में है हीरो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/AbBOY5e6G9CKsU6jDCAU.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/AbBOY5e6G9CKsU6jDCAU.jpg"/></item></channel></rss>