<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ doctor]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/doctor</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/doctor" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 30 Jun 2023 11:59:41 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[एबॉर्शन राइट्स: स्वास्थ्य आज़ादी की लड़ाई बाकी है ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/duniyadari/death-of-dorota-evokes-massive-abortion-rights-protest</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/P2DrrFJAOQFmg9tXm0Bn.jpg"><p>एबॉर्शन (abortion) एक बेसिक हेल्थ केयर अधिकार (health care right) है, इसके बावजूद आज 20 देशों में एबॉर्शन गैर कानूनी (illegal) है. सामाजिक, धार्मिक,पारंपरिक और राजनीतिक वजहों से गर्भपात पर रोक लगाई जाती है. दुनियाभर में ऐसी कई खबरें मिल जब एक महिला की मौत सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि उसके पास गर्भपात का अधिकार नहीं था. पोलैंड (Poland) में भी एक ऐसी ही घटना सामने आई. 33 वर्षीय फार्मासिस्ट डोरोटा लालिक (<span>Dorota Lalik</span>) दक्षिणी पोलिश शहर नोवी टार्ग में पोप जॉन पॉल अस्पताल (Pope John Paul) में जांच के लिए गई. वह उस वक़्त पांच महीने की गर्भवती (pregnant) थी. इस घटना के बाद पोलैंड में एबॉर्शन राइट्स प्रोटेस्ट का सैलाब आ गया. लोग पोलिश सरकार से गर्भपात नियमों में बदलाव की मांग करने लगे. </p>
<p>समय रहते गर्भपात कर डोरोटा लालिक की जान बचाई जा सकती थी, लेकिन वहां के नियमों की वजह से डॉक्टरों ने ऐसा नहीं किया. 3 दिन के बाद जब एबॉर्शन किया गया, तो सेप्टिक शॉक (septic shock) और कई ऑर्गन फेलियर (multiple organ failure) की वजह से डोरोटा की मौत हो गई. उनके परिवार ने डॉक्टरों (doctor) पर इल्ज़ाम लगाया कि उन्हें सही जानकारी नहीं दी गई. </p>
<p>यूरोपीय संघ (European Union) के सबसे सख्त गर्भपात कानून पोलैंड में हैं, जहां केवल बलात्कार (rape) या इन्सेस्ट (incest) के मामलों में, या महिला का जीवन खतरे में है, तभी गर्भपात की अनुमति है. ऐसे में, एबॉर्शन लीगल (legal) है या नहीं, डॉक्टर द्वारा तय किया जाता है. डॉक्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों का कहना है कि उन्हें अनुचित "मीडिया लिंच" का शिकार होना पड़ रहा है, जिससे मरीजों के साथ उनके रिश्ते को नुकसान ही होगा.</p>
<p>बढ़ते विरोध के चलते, पोलिश स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की कि सरकार ने  <em>"एक टीम का गठन किया गया है जो गर्भपात की ज़रुरत पड़ने वाली स्थितियों के लिए दिशानिर्देश तैयार करेंगे."</em></p>
<p>गर्भपात के अधिकार का महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों पर गहरा असर पड़ता है. महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि महिलाओं के लिए अपने शरीर पर कंट्रोल रखने, अपने प्रजनन स्वास्थ्य (reproductive health) को लेकर सही विकल्प चुनने और अपने शैक्षिक और करियर लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए सुरक्षित गर्भपात (safe termination of pregnancy) तक पहुंच ज़रूरी है. गर्भपात के अधिकारों के लिए चल रहा संघर्ष महिला के खुद से जुड़े फैसले लेने की आज़ादी में सामाजिक मूल्यों और कानूनी ढांचों की भूमिका को उजागर करता है. तकनीक की बदौलत आज स्वास्थ सेवाओं ने तरक्की की है. पर, महिलाओं के स्वास्थ्य (women's health) और अपने शरीर से जुड़े फैसले लेने के अधिकार की लड़ाई अभी जारी है. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Fri, 30 Jun 2023 11:59:41 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/duniyadari/death-of-dorota-evokes-massive-abortion-rights-protest]]></guid><category><![CDATA[दुनियादारी]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/P2DrrFJAOQFmg9tXm0Bn.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/P2DrrFJAOQFmg9tXm0Bn.jpg"/></item><item><title><![CDATA[ईंटें बना कर इरादे किए मजबूत, बेटी बनेगी डॉक्टर ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/brick-kiln-worker-yamuna-from-durg-clears-neet-exam</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/pGCN5PAdJJo2usC11TxZ.jpg"><p>"जब स्कूल जाती तो लोग कहते अनपढ़ मां-बाप की बेटियां क्या पढ़ेंगी ! यह बात मन को दुःख पहुंचाती. 90 प्रतिशत रिजल्ट के बावजूद हिंदी मीडियम होने के कारण मेरी हंसी उड़ाई. मैंने ठान लिया कि गांव और परिवार का यह कलंक मिटा कर रहूंगी. पढ़ाई में सात घंटे पूरा समय दिया. बचे समय में परिवार की मदद करने ईंट भट्टे (brick kiln) पर जाकर ईंटें बनवाती. मेरे माता-पिता का सपना पूरा हुआ." मेरी मेहनत सफल हुई. नीट (NEET) की एग्ज़ाम क्लियर करने वाली दुर्ग जिले के डुमरडीह गांव की यमुना चक्रधर अपनी बात कहते-कहते भावुक हो गई.          </p>
<p>  <img alt="yamuna durg NEET" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/WjFPtf4IDXrCouL1Hyoa.jpg"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>ईंट भट्टे पर ईंटें बनाती यमुना और बहन युक्ति (फोटो क्रेडिट :जयश्री शर्मा, दुर्ग)</em></span></p>
<p>ईंट बना कर चाहे लोगों के घर मजबूत बनवा दिए, लेकिन यमुना ने कच्चे मकान में रह कर भी अपने इरादे मजबूत कर लिए. इतनी मेहनत कि, कि रिजल्ट में यमुना (Yamuna) ने नीट जैसी कठिन एग्ज़ाम (exam) को पास कर लिया. आने वाले कुछ सालों में दुर्ग जिले के छोटे से गांव डुमरडीह की यमुना चक्रधर डॉक्टर बनेगी. इस साल की नीट एग्ज़ाम में यमुना का चयन के बाद गांव में जश्न का माहौल है. ईंट भट्टे के छोटे से कारोबार से गुजर-बसर करने वाले चक्रधर परिवार की दोनों बेटियां होनहार हैं. बेटियों ने साबित कर दिया कि इरादे मजबूत हों तो मंज़िल तक पहुंचने से कोई रोक नहीं सकता इन बेटियों ने गांव सहित जिले का नाम रोशन कर दिया. </p>
<p><img alt="yamuna durg NEET" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/SlOQfnzm0FHxhYPTQ8Zd.jpg"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>यमुना चक्रधर अपने परिवार के साथ  (फोटो क्रेडिट :जयश्री शर्मा, दुर्ग)</em></span></p>
<p>जब देखा कि छोटी-छोटी सी तकलीफ के लिए शहर के अस्पताल भागते. गांव में डॉक्टर तक नहीं. उसी दिन से यमुना विचलित रहने लगी. उसने ठान लिया कि वह डॉक्टर बन कर ही रहेगी.यमुना आगे बताती है कि -"मेरा स्कूलिंग इंग्लिश मीडियम न होने से कई बार परेशानी का सामना करना पड़ा. जबकि मेरी इंग्लिश अच्छी थी. इस विषय में भी मेरे हमेशा 90 प्रतिशत से अधिक नंबर आए. आखिर दूसरे प्रयास में मेरा चयन हो गया. भविष्य में मैं पीजी कर के अपनी सेवाएं गांव में दूंगी. खासकर उन महिलाओं के इलाज के लिए जो रात-दिन मेहनत कर खुद के शरीर पर ध्यान नहीं देती."</p>
<p>ईंट भट्टे का छोटा सा कारोबार करने वाले बैजनाथ चक्रधर कहते हैं -"मेरी आर्थिक हालत ठीक नहीं,लेकिन बच्चों की पढ़ाई में कमी नहीं रखी. मुझे ख़ुशी है कि यमुना ने हमारे परिवार के साथ गांव का सपना पूरा किया. मेरी बेटी ने भी यूनिवर्सिटी में अच्छे नंबर ला कर जगह बनाई."बैजनाथ सहित यमुना की मां कुसुम चक्रधर को ख़ुशी है कि बेटी डॉक्टर (doctor) बनेगी. कुसुम कहती है-"गांव में मुझे सभी लोग अनपढ़ कहते. गरीबी की वजह से हम लोग पढ़ नहीं पाए. पर बेटी सहित बेटे दीपक को पढ़ाने में कसर नहीं रखेंगे. मेरी बेटियां पढ़ाई के अलावा मेरी मदद करने भट्टे पर आती थी." बेटी ने अपनी पढ़ाई और खुद के दम पर परिवार के अनपढ़ होने का कलंक मिटा दिया.</p>
<p><strong>रिपोर्टर : जयश्री शर्मा, दुर्ग (छत्तीसगढ़)</strong> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Mon, 19 Jun 2023 18:15:13 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/brick-kiln-worker-yamuna-from-durg-clears-neet-exam]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/pGCN5PAdJJo2usC11TxZ.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/pGCN5PAdJJo2usC11TxZ.jpg"/></item></channel></rss>