<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ Driving License]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/driving-license</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/driving-license" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 18 Aug 2023 11:28:12 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[संजीविनी सुपरमार्केट से SHG महिलाओं को मिली जीवनी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-handling-the-work-of-sanjeevini-supermarket</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/EtzKIYnm9efoNFvHzUyR.jpg"><h2 dir="ltr"><span>SHG महिलाएं संभाल रहीं सुपरमार्केट</span></h2>
<p dir="ltr"><span>स्वयं सहयता समूह की महिलाएं घर के काम के साथ-साथ बाहर के काम भी बखूबी निभालती है. समूह से जुड़कर उनके लिए सफलता के रास्ते और भी खुल जाते है. ऐसा ही<strong> समृद्धि <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/fatima-from-kargil-started-her-business-with-the-help-of-shgs">Self Help Groups की महिलाएं</a> कर्नाटक (<a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/chonira-belliappa-muthamma-indias-first-women-ifs-officer">Karnataka</a>) के उड्डपी (Udupi) शहर में संजीविनी सुपरमार्केट (Sanjeevini Supermarket) का काम </strong>संभाल रहीं है. सुपरमार्केट में ऑफलाइन के साथ-साथ ऑनलाइन सुविधा भी दी जा रही, जिससे लोग घर बैठे सामान मंगवा सकेंगे. महिला एवं बाल कल्याण मंत्री (Women And Child Development) और उडुपी जिले की इन-चार्ज लक्ष्मी हेब्बलकर ने उडुपी तलूक पंचायत कार्यालय भवन में सुपरमार्केट का उट्घाटन किया.</span></p>
<h3 dir="ltr"><span> जीआई टैग प्रोडक्ट्स</span></h3>
<p dir="ltr"><span>समूह को <strong>राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक ( नाबार्ड, <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/nabfins-changing-lives-of-shg-through-micro-finance">NABARD</a>)</strong> से आर्थिक सहायता मिल रही है. सुपरमार्केट में अलग-अलग संजीविनी,&nbsp;<strong>कर्नाटक ग्रामीण आजीविका मिशन (<a href="https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/jyoti-yaraji-indias-fastest-women-hurdler">Karnataka Rural Livelihood Mission</a>)&nbsp;</strong>के तहत महिला SHGs द्वारा बनाये हुए प्रोडक्ट्स को बेचा जायेगा. साथ ही Consumer Products और फ़ूड आइटम्स को भी बेचा जायेगा. मार्केट में&nbsp; बैग, पेंटिंग, मोमबत्तियां जैसे प्रोडक्ट्स और जीआई टैग प्रोडक्ट्स ग्रो बैग और उडुपी साड़ी साथ ही अन्य उत्पाद केक, साबुन, चॉकलेट आदि भी शामिल किया गया है.</span></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="shg karnataka" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/513x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/MygPO887c1GJJ8mdm72N.jpg" style="width: 513px;"></span></p>
<p dir="ltr"><em>Image Credits : The Hindu</em></p>
<h3 dir="ltr">कानूनी और परामर्श सेवाएं भी उपलब्ध</h3>
<p dir="ltr"><span>सेवा सिंधु <strong>ऑनलाइन आवेदन सेवाएं </strong>जैसे <strong>पासपोर्ट (Passport), पेन कार्ड (Pen Cards), ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License)</strong> जैसी&nbsp; सुविधाओं के साथ <strong>कानूनी और परामर्श सेवाएं (Legal And Consultancy Services) </strong>भी उपलब्ध है.</span></p>
<p dir="ltr"><span><strong>National Rural Livelihood Mission (NRLM)</strong> के तहत 155 ग्राम पंचायतों में 7,623 SHGs बनाए गए है. जिसमे 85,000 से ज्यादा सदस्य है. SHG Womens को स्वरोजगार के लिए ट्रेनिंग के साथ आर्थिक सहायता भी दी जाती है. कुछ महिला self help groups अपने व्यवसाय शुरू कर चुके है और उन्हीं के प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग और ब्रांडिंग के लिए सुपरमार्केट बनाया गया है, ताकि उनके प्रोडक्ट्स ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके. इससे वह आर्थिक रूप से सशक्त होंगी साथ ही समाज में उन्हें नई पहचान मिलेगी.&nbsp;</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Fri, 18 Aug 2023 11:28:12 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-handling-the-work-of-sanjeevini-supermarket]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/EtzKIYnm9efoNFvHzUyR.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/EtzKIYnm9efoNFvHzUyR.jpg"/></item><item><title><![CDATA[आज की अहिल्या: व्हील चेयर नहीं " व्हील ऑफ़ फॉर्चून " ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/assistant-regional-transport-officer-archana-mishra-inspires-many-with-her-courage</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/d9JsJKSyIOf8lquv0ySC.jpg"><p><em>होल्कर स्टेट (Holkar state) की रानी अहिल्या बाई होल्कर (Ahilya Bai Holkar) के कई किस्से इतिहास में दर्ज हैं. उनके जीने का अंदाज़ और धैर्यता हम सब को जीना सिखाता है. उनकी जयंती पर जगह-जगह आयोजन हो रहे है. अहिल्या बाई के कार्यकाल को ढाई सौ साल बीत गए ,लेकिन आज भी उनके आदर्शों पर महिलाएं चल रहीं है . ये महिलाएं संवेदनशील है और समाज के लिए बहुत कुछ कर गुज़र रहीं है. यही 'आज की अहिल्या' हैं. रविवार विचार की इस सीरीज़ में मिलवा रहे ऐसी महिला अफसर से , जिसने कर्मों से दूसरों की ज़िंदगी को संवार दिया.  </em></p>
<p>ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) की भी एक यूज़ लिमिट होती है. लिमिट ख़त्म होते ही उसे रिन्यू कराना होता है,वर्ना कोई काम का नहीं. यहां तक कि परमिट भी ख़त्म हो जाते हैं. और जब बात ज़िंदगी की लिमिट ख़त्म होने की हो तो आप सोच सकते हैं क्या बीतेगी ! ठीक ऐसा लगा कि ज़िंदगी की लिमिट ख़त्म हो रही और सांसों के रिन्यूअल के चांस ख़त्म हो रहे हैं. हंसती-खेलती ज़िंदगी में ऐसा हादसा हुआ कि पलभर में शरीर को स्थाई तौर पर ठहरा दिया. ऐसे हालातों में अच्छे अच्छों का ईश्वर से भरोसा उठने लगता है ऐसे में एक महिला ने ज़िंदगी की किस्मत के पन्ने खोले और खुद ने आत्मविश्वास की स्याही से दस्तख़त कर दिए. ये हैं आत्मविश्वास का दूसरा नाम है अर्चना मिश्रा (Archana Mishra). इंदौर की असिटेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (Assistant Regional Transport Officer).इनकी कहानी कोई फ़िल्मी कहानी से कम नहीं. पर न ये कहानी है न फ़िल्म की काल्पनिक स्क्रिप्ट. ये ज़िंदगी कि हकीकत बताती वह कहानी है जो हजारों लोगों के लिए प्रेरणा है. ये हैं 'आज की अहिल्या' अर्चना मिश्रा. कई युवाओं और निराश लोगों की आइडल हैं, जो जरा सी मोच में बिस्तर पकड़ लेते हैं या लाइफ से हार मान जाते हैं.</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/cKKq90C5MrHarby9PbxM.jpg" alt="Archana Mishra"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar vichar</em></span></p>
<p>बचपन से होनाहर अर्चना ने एमएससी केमिस्ट्री में टॉप किया. एक मित्र के सुझाव पर कॉम्पिटेटिव एग्जाम की तैयारी शुरू की. उनका चयन एक बार नहीं बल्कि दो बार पीएससी में हुआ. आरटीओ विभाग में बड़े पद पर पहुंचीं. एक बार और पीएससी के लिए धुन सवार थी. डिप्टी कलेक्टर बनने की तैयारी के बीच एक रोड एक्सीडेंट में अर्चना हमेशा के लिए व्हील चेयर पर आ गई. लगा जैसे ज़िंदगी थम गई. दो साल यूहीं गुजरे और फिर हिम्मत, ज़ज़्बे के साथ आत्मविश्वास से ज़िंदगी की गाड़ी को नई रफ़्तार दी.अर्चना मिश्रा कहती हैं - "साल 2012 में एक रोड एक्सीडेंट में मेरी स्पाइन डैमेज हो गई. काफी इलाज कराया. पर यह कड़वा सच समझ आ गया कि मेरी आगे की ज़िंदगी व्हील चेयर पर ही होगी. मैं चल नहीं पाऊंगी. मेरे परिजनों का उदास होना सहज था. मेरे पिता हों या कोई और सदस्य, मुझे इस हालत में देख भावुक हो जाते.खूबसूरत ज़िंदगी के पर कट गए. मेरा ईश्वर से भरोसा उठ गया. प्रतिष्ठित जॉब, पति, सुंदर बेटी और परिवार के बावजूद खुद को असहाय महसूस करती रही. फिर एक दिन लगा यह सब नहीं चलेगा. मैंने आंसुओं को समेटा. 'कर्म के सिद्धांत' जैसी कई किताबें पढ़ी.मेरी सोच और जीने का अंदाज़ बदल गया.</p>
<blockquote>
<p>ज़िंदगी की नई शुरुआत का मकसद तय कर लिया. समाज और खासकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की ठान ली.अर्चना आगे बताती हैं - " <em>मुझे लगा कि लोक परिवहन में महिलाओं की भागीदारी कम है. मैंने अभी तक 300 महिलाओं को ड्राइविंग सिखवाई. 30 से 35 साल के बीच की इन महिलाओं से मिली. इन महिलाओं की अपनी परेशानी थी. किसी के पति ने तलाक दे दिया तो कोई मायके में आश्रित है. ऐसी कुछ महिलाओं को मैंने ई-रिक्शा दिलवाए. आज वे आत्मनिर्भर हैं. मुझे बहुत ख़ुशी है कि इन में से ही एक युवती ड्राइविंग स्कूल खोलने जा रही है. "</em></p>
</blockquote>
<p>अपनी दिव्यांगता को भुला कर अर्चना मिश्रा का पूरा समय दूसरों की मदद में बीत रहा है. ई-रिक्शा संचालक युवती बताती है कि रिक्शे कीमत एक लाख अस्सी हजार थी. मेरी आर्थिक हालत इतनी कमजोर थी कि मार्जिन मनी भी नहीं भर सकती थी. अर्चना मिश्रा ने जनसहयोग से हर महिला के 25-25 हजार रुपए मार्जिन मनी जमा करवाई.ऐसी निर्धन महिलाओं को सिर्फ दस हजार रुपए ही देना पड़े. लगभग 20 महिलाएं इंदौर की सड़कों पर रिक्शा चला कर अपना घर चला रहीं हैं.</p>
<p>ज़िंदगी में हर जरूरतमंद व्यक्ति कि मदद के लिए तैयार अर्चना आगे बताती है - " <em>कर्म के सिद्धांत किताब के बाद लगने लगा कि सृष्टि बहुत सुंदर है. आत्मनिर्भर बन चुकी महिलाओं के चेहरे की ख़ुशी देख ईशवर पर भरोसा और बढ़ गया. परिवार में पति विवेक मिश्रा और दूसरे परिजनों के सपोर्ट ने मुझे नई ज़िंदगी दी. मेरी व्हील चेयर मेरी मज़बूरी नहीं लगती बल्कि ये "व्हील ऑफ़ फॉर्च्यून " है ,जिसके बल पर मैं लोगों के लिए जीना सीख गई. कोई भी दुःख ज़िंदगी की खूबसूरती को कम नहीं कर सकता. और देवी अहिल्या बाई होल्कर का जीवन भी यही सिखाता है."</em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 01 Jun 2023 17:46:25 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/assistant-regional-transport-officer-archana-mishra-inspires-many-with-her-courage]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/d9JsJKSyIOf8lquv0ySC.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/d9JsJKSyIOf8lquv0ySC.jpg"/></item></channel></rss>