<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ दुर्गा स्वयं सहायता समूह]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/durgaa-svyn-shaaytaa-smuuh</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/durgaa-svyn-shaaytaa-smuuh" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 06 May 2023 17:26:00 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[रीवा SHG करेंगे गेहूं खरीदी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-in-rewa-will-buy-wheat-from-earning-centers</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ZtAk3vjYx72DqmJMaiUe.jpg"><p dir="ltr">रीवा कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने बताया- "रीवा जिले को 24 उपार्जन केन्द्रों में स्वयं सहायता समूह समर्थन मूल्य पर गेंहू की खरीदी करेंगे. गुढ़ तहसील के पाती में 'जय माँ शारदा स्वयं सहायता समूह' और 'बंजारी में हनुमान स्वयं सहायता समूह' जवा तहसील के भुनगांव और दादर में सेवा सहकारी समिति डभौरा क्रं. 2 गेंहू की खरीदी करेंगे." उन्होंने बताया- "त्योंथर तहसील के सेवा सहकारी समिति मनिका, कटरा में सेवा सहकारी समिति परासी क्रं.1 गेंहू की खरीदी करेंगे. नईगढ़ी तहसील के बहुती में सेवा सहकारी समिति पहाड़ी क्रं.2, जोधपुर में, सेवा सहकारी समिति परासी क्रं. 2, मनगवां तहसील के नवागांव में दुर्गा स्वयं सहायता समूह सेमरीकला तथा उमरी में सेवा सहकारी समिति बेलवा बड़गैयान गेंहू की खरीदी करेंगी." </p>
<p dir="ltr">उन्होंने अपनी बात पूरी करते हुए कहा- "सिरमौर तहसील के मझियार में आदर्श स्वयं सहायता समूह उमरी, सिरमौर में काजल स्वयं सहायता समूह उमरी, बदराव में सेवा सहकारी समिति खैरहन क्रं.2, डेल्ही में प्रतिमा स्वयं सहायता समूह मझिगवां, तिलखन में सेवा सहकारी समिति कदैला क्रं.2 गेंहू की खरीदी करेगा. सेमरिया तहसील के कंजी में विन्ध्यांचल क्राप प्रोडयूसर कंपनी सेमरिया, खारा में चेतना स्वयं सहायता  समूह, बीडा में अंकुर स्वयं सहायता समूह झलवार, बरौ में सेवा सहकारी समिति चचाई क्रं.1, बीरखाम में सेवा सहकारी समिति चचाई क्रं.2, बड़ा गांव में सेवा सहकारी समिति बम्हनी क्रं.2 तथा सगरा में विन्ध्यांचल क्राप प्रोडयूसर कंपनी नेहरू नगर गेंहू की खरीदी करेंगी."</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sat, 06 May 2023 17:26:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-in-rewa-will-buy-wheat-from-earning-centers]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ZtAk3vjYx72DqmJMaiUe.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ZtAk3vjYx72DqmJMaiUe.jpg"/></item><item><title><![CDATA[फटे कपड़ों से भी कमाई ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-reusing-waste-cloth-to-generate-income</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1aenIQtda5tJPSLHVr90.jpg"><p>हमारा भैसान गांव इतना छोटा था कि क्या अलग ऐसा क्या काम करें कि मजदूरी छूट जाए और कमाई भी बनी रहे,यही सोचते रहते. हमारे पास कोई पूंजी भी नहीं थी, जिससे कोई नया काम शुरू कर सकें. फिर हम दुर्गा स्वयं सहायता समूह से जुड़े.रास्ते मिले. लोन मिला और ज़िंदगी बदल गई. अब मुर्गी पालन केंद्र की मालकिन हूं. इतने अंडे तैयार हो रहे कि रखने की जगह नहीं बची. गांव की सुशीला बाई उइके ने ये बातें बताते-बताते भावुक हो गई.</p>
<p>सीहोर जिले के आदिवासी ब्लॉक बुधनी और नसरुल्लागंज के चालीस गांव की मजदूर या घरेलु महिलाएं इन दिनों एसएचजी से जुड़ कर आत्मनिर्भर होने की दिशा में आगे बढ़ रहीं हैं. साढ़े तीन हजार महिलाओं कि तक़दीर अब बदल गई.यहां तक कि फटे कपड़ों से भी कमाई कर रहीं हैं.    </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/vmsPf6xLiGWmzzTgN5sZ.jpg" alt="SHG women reusing  waste cloth"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>फोटो क्रेडिट: जुगल किशोर पटेल</em></span><br>  <br>सुशीला बाई आगे बताती हैं-" अब हम आठ से दस हजार रुपए महीने कमा लेती हूं. " इसी गांव में दो समूह की बीस महिला सदस्य रोजगार से जुड़ गईं. इसी ब्लॉक के मरदानपुर गांव की कविता बताती है -" पहले कोई काम नहीं था. दुर्गा समूह से जुड़ी. दोना-पत्तल की मशीन डाल कर कारोबार शुरू किया.धीरे-धीरे काम बढ़ गया. </p>
<p>जिले में रेहटी तहसील की दो ही आदिवासी ब्लॉक में 35 हजार से ज्यादा महिलाएं 263 अलग-अलग समूह से जुड़ी हुईं हैं. इन समूहों को सरकारी योजनाओं को समझाने लाभ दिलाने के साथ प्रेरित करने वाली जागृति महिला संस्थान की अध्यक्ष सरोज भल्लावी कहती हैं-" आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमारी संस्था जागरूक करने का काम करती है. उन्हें आजीविका मिशन से लोन दिलाने  के साथ कारोबार में सजग रहने की तकनीक समझाते हैं.</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/uEtwQj0tyIw69rIcYLz6.jpg" alt="SHG women reusing  waste cloth"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>फोटो क्रेडिट: जुगल किशोर पटेल</em></span></p>
<blockquote>
<p><em>ढाबा गांव की बबिता और उसके पति भी मजदूरी से जैसे-तैसे गुजर बसर करते थे. बबिता कहती है -"श्री कृष्णा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी और पांच हजार का लोन ले कर किराने की दुकान शुरू की. शुरू में गांव में दूसरी  दुकानें होने से ज्यादा नहीं चल पा रही थी. हमने  महिलाओं से जुड़े आइटम रखे और हाट बाजारों में जाना शुरू किया. हमारी कमाई बढ़ गई. हमने एक पुरानी वेन खरीद ली. अब उससे  ही हाट बाजार जाते हैं."  गांव धनकोट की सीमा ने महाकाल समूह से जुड़ कर बड़ी -पापड़ सहित कई खाने के सामान बनाने शुरू किए. नरेला गांव की एकता समूह से जुड़ने वाली पूजा और श्री कृष्णा समूह की शांति मसकोले बताती है -" हमने फाटे हुए कपड़ों का उपयोग किया. इन कपड़ों को सिल कर थाल पोश, पैर पोश सहित कई आकर्षक सामान बनाए. इससे कमाई शुरू हो गई. </em></p>
</blockquote>
<p>जनजागृति समूह की सचिव संतोषी तिवारी बताती हैं -" ये पूरे आदिवासी समूह हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि समूह ने भी आपस में व्हाट्सएप ग्रुप बना लिया. जिससे जरूरत का सामान समूह के सदस्य आपस में ही खरीद कर एक दूसरे को बढ़ावा देते हैं. हमारा मकसद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर उनका आत्मविश्वास बढ़ाना है." </p>
<h3><strong>रिपोर्टर : जुगल किशोर पटेल</strong></h3>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Wed, 12 Apr 2023 11:53:02 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-reusing-waste-cloth-to-generate-income]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1aenIQtda5tJPSLHVr90.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1aenIQtda5tJPSLHVr90.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मोरिंगा ने किया मालामाल ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/moringa-is-the-superfood-of-the-world</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0pDdaJwltIsvjjBFyvwk.jpeg"><p>कभी वीरान और बंजर पड़ी रहने वाली ज़मीन पर हरियाली छाई हुई है. कभी खेतों की मेढ़ तो कभी कूड़े के ढेर में जिन्हें हम हमेशा नज़र अंदाज़ करते आए,वही मुनगा के पौधे यहां लहलहा रहे हैं. यह नज़ारा देख सकते हैं उमरिया जिले के कई गांव में. यही पौधे कई महिलाओं की तक़दीर बन गए. मजदूरी को किस्मत मान बैठी इन महिलाओं के लिए मुनगा के पौधे वरदान साबित हुए.&nbsp;</p><p>महिलाओं की मेहनत ने ही उमरिया को मुनगा के सहारे नई पहचान दी. कूड़े-कचरे के ढेर में उगने वाला &nbsp;सामान्य यह पौधा और इसकी फलियां सिर्फ सब्जी नहीं बल्कि दुनिया का सुपर फ़ूड बन गया.अलग-अलग क्षेत्रों में इसे मुनगा,मोरिंगा,ड्रमस्टिक,सुरजना,सेंजन भी कहते हैं.</p><blockquote><p>उमरिया जिले के गांव करौंदी टोला के दुर्गा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष रैमुन कुशवाह कहती हैं- "घर की ज़मीन इतनी कम है कि सालभर मेहनत के बाद भी कोई कमाई नहीं होती थी. सुरजना &nbsp;के पौधे लाए. खेत के पास फालतू पड़ी ज़मीन पर लगाए.देशी गोबर खाद डाला. सालभर में तो इन पौधों में फलियां लगी और इनकम शुरू हो गई."</p></blockquote><p>इसी समूह की सचिव पुष्पा कहती हैं -" इस सुरजना &nbsp;ने हमारी ज़िंदगी बदल दी. मजदूरी की बजाए हमने इन पौधों को बच्चों की तरह पाला. और अब ये बिना काम की जमीन सोना बन गई. हम पत्तियां तक 70 रुपए किलो तक बेच रहे हैं."इस समूह में पंद्रह दीदियां सदस्य हैं जिनमें पांच दीदी सुरजना की खेती कर कमाई कर रहीं हैं. इनमें सुमित्रा ,मीरा ,निशा कुशवाह भी हैं जो मुनगा की खेती कर रहीं हैं.&nbsp;</p><p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/W3qvsihCQ7L2Q2WwHdJX.jpg" alt="moringa" data-mce-src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/W3qvsihCQ7L2Q2WwHdJX.jpg"></p><p><span style="font-size: 8pt;" data-mce-style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar vichar</em></span></p><p>जिले में इस समय 80 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं.देश-दुनिया में उमरिया का मुनगा धूम मचा रहा है.आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक प्रमोद शुक्ला कहते हैं -" जिले में मुनगा की खेती का नवाचार सफल रहा. अलग-अलग स्वयं सहायता समूह की 30 &nbsp;दीदियों ने तीन साल की मेहनत कर हॉर्टिकल्चर विभाग द्वारा अस्सी हजार पौधे तैयार किए. इन्हें जिले के मानपुर ,करकैली और पाली ब्लॉक के अलग-अलग समूह के सदस्यों को दिए.40 गांव पंचायतों में लगभग तीन सौ महिलाओं को आर्थिक लाभ मिल रहा है."</p><p>लगभग तीन साल पहले शुरू हुए मुनगा खेती के प्रयोग और उत्पादन को देख शहडोल जिले की "माइकल फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनी" ने जिले से अनुबंध कर लिया. कंपनी मुनगा पेड़ की सूखी पत्तियां तक सत्तर रुपए किलो में खरीद रही है. असर यह हुआ कि आदिवासी गांव के हाट बाज़ारों में ये सूखी पत्तियां अस्सी रुपए किलो तक बिकने लगीं.</p><p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/jbWXKOTr2ZxSCOwXJPe4.jpg" alt="Moringa" data-mce-src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/jbWXKOTr2ZxSCOwXJPe4.jpg"></p><p><span style="font-size: 8pt;" data-mce-style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar vichar</em></span></p><blockquote><p>&nbsp;डीपीएम प्रमोद आगे बताते हैं - इस मुनगा मॉडल को देखने डिंडौरी,कटनी शहडोल आदि जिलों से भी देखने आ रहें हैं. प्रोड्यूसर कंपनी को ही सदस्यों ने अब तक 34 लाख रुपए की मुनगा सूखी पत्तियां बेच चुकीं हैं. खास बात यह है कि नर्सरी में लगाए गए पौधों को किस्म की इंडो -जर्मन बेस है,जिसकी खासियत एक साल में ही पौधों में फली आने लगती हैं."</p></blockquote><p>मुनगा के फल और पेड़ की पत्तियों के साथ छाल तक बहुत उपयोगी है. न्यूटीशिनिस्ट मेघा शर्मा ने बताया -"मोरिंगा या ड्रमस्टिक प्रोटीन,आयरन और मैग्नीशियम के साथ ही विटामिन बी,सी और ए से भरपूर है.वहीं इसकी पत्तियों का पाउडर मल्टीविटामिन सप्लीमेंट तो होता ही है साथ ही ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और बीपी को कंट्रोल करने में मदद करता है." उन्होंने आगे बताया - "इसके पेड़ का हर हिस्सा खाने लायक और फायदेमंद है. सदियों से भारत में खाया जाने वाला मोरिंग को आज पूरी दुनिया सुपरफूड मानती है, यहां तक कि अविकसित देशों में भी यह प्रोटीन के साथ ज़रूरी विटामिन्स और मिनरल्स की कमी दूर करने वाला एक अच्छा विकल्प है." &nbsp;</p><blockquote><p>जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी ईला तिवारी कहती हैं -"आदिवासी की मेहनत को सही रास्ता मिल गया. हमें ख़ुशी है कि मुनगा जैसे पौष्टिक पौधे की खेती का दोहरा फल मिल रहा है. यहां की समूह सदस्य महिलाएं अब आत्मनिर्भर हो रहीं हैं. मुनगा प्लांटेशन अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा."&nbsp;</p></blockquote>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">उमा</dc:creator><pubDate>Thu, 06 Apr 2023 13:05:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/moringa-is-the-superfood-of-the-world]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0pDdaJwltIsvjjBFyvwk.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0pDdaJwltIsvjjBFyvwk.jpeg"/></item></channel></rss>