<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ एमएफआई]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/emephaaii</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/emephaaii" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 29 Apr 2023 13:37:17 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[स्वतंत्र माइक्रोफिन से मिली फाइनेंशियल स्वतंत्रता ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/mumbai-based-swantantra-microfin-lends-at-the-lowest-rate</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Ktf2aiPhY3kYy3srhV8Q.jpg"><p>माइक्रो फाइनेंस मॉडल के ज़रिये समाज के सबसे निचले तबके तक आसान लोन पहुंच पा रहा है. माइक्रोफाइनेंस उन छोटी फर्मों और उद्यमियों के लिए वित्तीय सेवाओं की नींव बन रहा है, जिनकी बैंकिंग और संबंधित सेवाओं तक पहुंच नहीं है. भारत में 268 एमएफआई (माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस) रजिस्टर हैं. ऐसी ही एक माइक्रोफाइनेंस संस्था मुंबई में है जिसका नाम स्वतंत्र माइक्रोफिन है. ये भारतीय रिजर्व बैंक से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी - माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशन (NBFC-MFI) लाइसेंस प्राप्त करने वाली पहली माइक्रोफाइनेंस संस्था है. </p>
<p>स्वतंत्र माइक्रोफिन की स्थापना 2012 में अनन्या बिड़ला ने की थी. वे एसोचैम माइक्रोफाइनेंस काउंसिल ऑफ इंडिया की सह-अध्यक्ष और भारतीय उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला की बेटी है. भारत में आय के अंतर को दूर करने और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आज़ादी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्वतंत्र माइक्रोफिन की शुरुआत की. 2014 में,इस संस्था ने स्टार्ट-अप केटेगरी में स्कोच फाइनेंशियल इनक्लूजन एंड डीपनिंग अवॉर्ड जीता. 2017 में, स्वतंत्र ने 'साथी' नाम से एक एंड-टू-एंड कैशलेस सोल्यूशन लॉन्च किया. स्वतंत्र बायोमेट्रिक पहचान का उपयोग कर क्रेडिट स्कोर जानता है. कंपनी ने एक मेडिक्लेम उत्पाद भी बनाया.</p>
<p>स्वतंत्र के पास 100% कैशलेस संवितरण है और इसका लेंडिंग रेट भारत में सभी एमएफआई में सबसे कम है. स्वतंत्र माइक्रोफिन के पास  570 करोड़ रुपये की संपत्ति है. स्वतंत्र की माइक्रोक्रेडिट पॉलिसी समूह उधार मॉडल पर आधारित है. स्वतंत्र माइक्रोफिन 19.25-20.00% ब्याज दर पर आजीविका से संबंधित लोन देता है, जो भारत में सबसे कम ब्याज दर है. यह नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) के माध्यम से धन का वितरण करता है और फाइनेंशियल इन्क्लूशन के अपने मुख्य मिशनों में से एक को पूरा करने के लिए अपने ग्राहकों को बैंक खाते खोलने में भी मदद करता है. </p>
<p>एक दशक पूरा कर चुके स्वतंत्र माइक्रोफिन ने अभी तक 1 करोड़ से ज़्यादा लोगों की मदद की है. यह वर्तमान में अपनी 720+ शाखाओं के ज़रिये देश के 19 राज्यों में फैले 229 से अधिक जिलों में काम कर रहा है और 6000 से अधिक ग्रामीण युवाओं को रोजगार दिया है. सरकार के साथ-साथ ऐसी संस्थाएं भी अगर फाइनेंशियल इन्क्लूशन के लिए काम करेंगी तो महिलाओं, विक्रेताओं और छोटे उद्यमियों की आर्थिक आज़ादी का सपना पूरा हो सकेगा. कम दर पर, आसानी से मिलने वाला लोन अपने पैरों पर खड़ा होने और गरीबी के चंगुल से उभरने में मदद करता है. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sat, 29 Apr 2023 13:37:17 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/mumbai-based-swantantra-microfin-lends-at-the-lowest-rate]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Ktf2aiPhY3kYy3srhV8Q.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Ktf2aiPhY3kYy3srhV8Q.jpg"/></item><item><title><![CDATA[यूगांडा में SHG गरीबी के खिलाफ लड़ाई में आगे ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/duniyadari/shgs-in-uganda-fighting-against-poverty</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/cjVb0jcrNUUFO92u6r41.jpg"><p>अफ्रीका महाद्वीप का देश युगांडा, विश्व में अपनी भाषा, रहन सहन, वेश-भूषा, संस्कृति, धर्म, व्यवसाय से अलग पहचान बनता है लेकिन लम्बे गृहयुद्ध के कारण यहां की अर्थव्यवस्था डगमगाती रहती है.  इसके बावजूद युगांडा ने गरीबी कम करने में प्रभावशाली काम किया है. इसमें यहां के सेल्फ हेल्प ग्रुप एप्रोच युगांडा ऑर्गेनाइज़ेशन (SHGAU) का ख़ास योगदान है. यूगांडा कभी गरीबी इंडेक्स में 184 देशों में से 20 स्थान पर आता था. ग्रामीण गरीबी तो और भी बदतर हालत में है.  <br><br>ग्रामीण यूगांडा वासियों के पास अक्सर पर्याप्त बचत नहीं होती है, इससे निपटने के लिए ऋण की आवश्यकता होती है. हालांकि, ग्रामीण गरीबों की बैंकिंग लोन तक पहुंच कम है. अगर गरीबों की वित्तीय संस्थानों तक पहुंच है, तो भी उनके पास कोलेट्रल नहीं होता.  कुछ ग्रामीण खांडकर (यूगांडा में ब्याज पर लोन देने वाले) से लोन ले लेते है . लेकिन युगांडा में औपचारिक और अनौपचारिक उधारदाताओं दोनों बड़ा ब्याज लेते है. यहां तक कि माइक्रोफाइनेंस संस्थान (एमएफआई) और बचत और ऋण सहकारी संगठन (SACCOs) भी इन तक नहीं पहुंच पाते.  </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/BdYOhPurOZdoedsC1Ze7.jpg" alt="Uganda SHG "></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Purple Shoot</em></span><br>इस सबका हल निकला स्वयं सहायता बचत और ऋण समूह के तौर पर. स्वयं सहायता समूह छोटे समूह होते हैं, जिनमें अधिकतर या केवल महिलाएं होती है. यह हर हफ्ते या हर महीने एक निश्चित राशि बचाते हैं और साप्ताहिक रूप से समूह बैठकें करते है. इन सामूहिक बचतों में से वे एक दूसरे को ऋण देते है. समूह तय करते है वे कितना ब्याज लेंगे.  कुछ समूह एक "सोशल फंड" भी विकसित करते हैं जिसमें से सदस्य आपात स्थिति या आवश्यकताओं के लिए बिना ब्याज के ऋण ले सकते है.  <br><br>इस मॉडल का उपयोग कई विकासशील देशों में किया जाता है. यूगांडा में SHG स्थापित करने के लिए  Self Help Group Approach, Plan Uganda, CARE International, International Organization for Migration, Uganda वीमेन Concern Ministry, Self Help Africa और Global Giving जैसी संस्थाएं लगातार काम कर रही है.<br><br>स्वयं सहायता समूह विकासशील देशों में गरीबी हटाने का एक आदर्श विकल्प है. विशेष रूप से ग्रामीण गरीबी और महिलाओं की गरीबी, क्योंकि इसमें बचत और ऋण से योगदान करने की क्षमता है. यूगांडा में SHG के सामने सबसे बड़ी समस्या महिलाओं के प्रति सामाजिक, सांस्कृतिक दृष्टिकोण की है. महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, संसाधनों पर उनका नियंत्रण न होना आमतौर पर महिलाओं को इन समूहों में भागीदारी से रोकती है या बाधा उत्पन्न कर सकती है. स्वयं सहायता समूह युगांडा की खराब अर्थव्यवस्था के कारण भी बढ़ नहीं पाते. बाज़ारों की कमी से समूह के सदस्य अपने व्यवसायों को अधिक लाभदायक नहीं बना सकते. समूहों में पूंजी की छोटी और ब्याज दरें ज़्यादा है.  <br><br>युगांडा सरकार को अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए काम करना चाहिए. SHG, CLA, फेडरेशन और यूगांडा सरकार को मिलकर काम जारी रखना चाहिए, जिससे सामुदायिक स्तर पर बदलाव आ सके और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके. समुदाय आधारित समूह और सरकार के साथ मिलकर काम करने से सभी को फायदा होगा. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रोहन शर्मा</dc:creator><pubDate>Mon, 17 Apr 2023 15:38:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/duniyadari/shgs-in-uganda-fighting-against-poverty]]></guid><category><![CDATA[दुनियादारी]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/cjVb0jcrNUUFO92u6r41.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/cjVb0jcrNUUFO92u6r41.jpg"/></item><item><title><![CDATA[माइक्रोलोन्स को आगे बढ़ाना होगा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/microloans-need-to-be-expanded</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aRui04Fax2RtfJWJQTSb.jpg"><p>माइक्रोफाइनेंस में ग्रामीण महिलाओं के जीवन को बदलने की अपार क्षमता है. ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आज़ादी का सपना जुड़ा हुआ है SHG से. आज देशभर में जो विकास की बात चल रही है वह तभी सबके लिए और सबके साथ होगा जब फिनेंशिअल इन्क्लुशन यानि आर्थिक रूप से सबको साथ में आगे बढ़ाया जाए.  इसके लिए ज़रूरी है  'वित्तीय समावेशन' गवर्मेंट पॉलिसी का हिस्सा बने. सरकार भी अब आजीविका मिशन के साथ जन-धन योजना, सामाजिक पेंशन, बीमा, डीबीटी और माइक्रोफाइनेंस जैसे कार्यक्रमों के साथ यह करने की कोशिश में है.<br><br>माइक्रोफाइनेंस की बड़ी कोशिश स्वयं सहायता समूह बैंक लिंकेज प्रोग्राम (SHG-BLP) के साथ शुरू हुई, जो 1989 में नाबार्ड द्वारा शुरू किए गए MYRADA के एक्शन रिसर्च प्रोजेक्ट से निकला था. SHG क्रांति में मुख्य रूप से  महिलाएं क़रीब 90% शामिल हैं. छोटे जमा खाते  और छोटे ऋण के लिए बैंकों के साथ समूहों को जोड़ने की आरबीआई की इस पहल ने एसएचजी-बीएलपी को एक वास्तविकता बना दिया.<br><br>500 SHG को बैंकों से जोड़ने के एक मामूली लक्ष्य के साथ शुरू किया गया यह कार्यक्रम आज दुनिया का सबसे बड़ा माइक्रोफाइनेंस प्रोग्राम है जिसमें 129 लाख SHG बैंक से जुड़े हुए है और लगभग 1,81,500 करोड़ रुपये के ऋण के साथ काम कर रहे है . एसएचजी-बीएलपी कार्यक्रम ;  गैर सरकारी संगठनों, सरकार और बैंकों की ताकत को महिलाओं को सशक्त बनाने में लगता है.<br><br>दक्षिण और पूर्व भारत के राज्य एसएचजी-बीएलपी में सबसे आगे है.  SHG-BLP के तहत, 8.4 करोड़ महिलाओं ने औसतन प्रति सदस्य लगभग ₹21,600 का ऋण लिया है. यदि हम पांच दक्षिणी राज्यों को छोड़ दें, तो प्रति सदस्य ऋण बकाया घटकर ₹12,300 रह जाता है, जो इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय असमानताओं को उजागर करता है. माइक्रोफाइनेंस ने 2000 के दशक की शुरुआत में अपना रंग बदल दिया, जिसकी शुरुआत दक्षिण भारत से हुई, जहां एसएचजी-बीएलपी शुरू हुआ और अभी भी जीवंत है, मुख्य रूप से माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (एनबीएफसी-एमएफआई) के आगमन के साथ. सभी माइक्रोफाइनेंस का सकल ऋण पोर्टफोलियो 6.4 करोड़ के साथ लगभग ₹3.2 लाख करोड़ है.  एसएचजी-बीएलपी के तहत सदस्य व्यक्तिगत बचत, नियमित समूह बैठक और सदस्यों के बीच इंटर-लेंडिंग के बाद ही बैंकों से ऋण प्राप्त कर सकते हैं.<br><br>कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि एसएचजी-बीएलपी भारत के लिए उपयुक्त मॉडल है, क्योंकि सरकार द्वारा दी जाने वाली ब्याज सहायता और कम ब्याज दर वसूली जाती है. लेकिन एसएचजी-बीएलपी के तहत दिए ऋण की राशि छोटी होती है और एमएफआई से जल्दी और बड़े ऋण की तुलना में ऋण प्रक्रिया थोड़ी लंबी है. इसलिए धीरे-धीरे एमएफआई ज़्यादा प्रचलित हो रहे हैं. SHG-BLP सही तरीके से रुपये तक पहुँचने के लिए सामाजिक उद्देश्यों के साथ शुरू हुआ, MFI ने धीरे-धीरे इस आंदोलन को एक कमर्शियल मैनेजमेंट में बदल दिया.<br><br>भारत जैसे विशाल देश में कई माइक्रोफाइनेंस मॉडल की ज़रुरत है. ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान रखते हुए ज़रूरी बदलाव करने होंगे. एसएचजी-बीएलपी पर निगरानी, फेडरेशन बनाना , ब्याज की धीरे वापसी एसएचजी-बीएलपी को लचीला बना सकती है. जब एमएफआई ग्राहक पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो क्षमता निर्माण, सलाह, प्रौद्योगिकी के उपयोग, अधिक उत्पादक ऋण जारी करने, नियामक मानदंडों के अनुपालन के साथ, मुनाफे को बढ़ाएगा.<br><br>एनसीएईआर के अनुसार, माइक्रोफाइनेंस लगभग 130 लाख नौकरियों और हमारे जीवीए का 2 प्रतिशत योगदान देता है. इसमें सभी 6.3 करोड़ गैर-कृषि उद्यमों तक पहुंचने की क्षमता है. माइक्रोफाइनेंस का भविष्य सभी माइक्रोलोन्स को औपचारिक क्षेत्र में ले जाना बैंकों (एमएफआई) के माध्यम से संभव है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रोहन शर्मा</dc:creator><pubDate>Mon, 10 Apr 2023 10:55:35 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/microloans-need-to-be-expanded]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aRui04Fax2RtfJWJQTSb.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aRui04Fax2RtfJWJQTSb.jpg"/></item></channel></rss>