<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ एसएचजी]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/esecjii</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/esecjii" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Mon, 17 Jul 2023 15:56:56 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[70 की उम्र में जोश 16 का, एक महीने में बनाये 40 SHG ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/arsrlm-providing-loans-to-shg-women-for-their-business</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/go2YOYVO2ejyoNnLrso6.jpg"><h2><span><strong>70 की उम्र में जोश 16 का</strong></span></h2><p dir="ltr"><span><strong>अरुणाचल स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन (<a href="http://www.arsrlm.in/" data-mce-href="http://www.arsrlm.in/">Arunachal State Rural Livelihood Mission</a>)</strong> प्रोग्राम के अंतर्गत बहुत से काम हो रहा है जो की वेल्यू एडिशन के साथ <strong>माइक्रो फाइनेंस (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/nabfins-changing-lives-of-shg-through-micro-finance" data-mce-href="https://ravivarvichar.in/khabar/nabfins-changing-lives-of-shg-through-micro-finance">Micro Finance</a>)</strong> में भी तेज़ी ला रहे हैं.&nbsp; यहीं से एक अलग कहानी है तवांग की रहने वाली 70 साल की महिला जिनके ज़ज़्बे और मेहनत की कहानी आज अरुणाचल की आम जनता से लेकर मुख्यमंत्री तक सब कह रहे है. 70 साल की उम्र में जोश 16 साल का है, कितने ही <strong>स्वयं सहायता समूह (SHG)</strong> को गाइड और एडवाइस करने का काम वो आज सफलतापूर्वक कर रही है. ऐसा लग सकता है की उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें फिजिकल और मेन्टल सपोर्ट की जरुरत होगी, लेकिन उन्होंने इसके उलट यह सब दिया सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (self help groups ) को. यह सब देखते हुए उन्हें <strong>ग्रामीण कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/women-in-begusarai-earning-livelihood-by-making-agarbattis-in-bihar-with-the-help-of-shg" data-mce-href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/women-in-begusarai-earning-livelihood-by-making-agarbattis-in-bihar-with-the-help-of-shg">CRP</a>)</strong> बनाया गया, जिसमें वह गांव - गांव जाकर समूह से जुड़ने और समूह बनाने के लिए महिलाओं को प्रेरित करती है. उन्होंने अकेले ही एक महीने में 40 समूह बनाये. समूह को उनकी सलाह और अनुभव से बहुत से फायदे हुए. <strong>SRLM</strong> <strong>(<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/roing-mart-launched-to-boost-livelihood-activities-in-dibang-valley-of-arunachal-pradesh" data-mce-href="https://ravivarvichar.in/khabar/roing-mart-launched-to-boost-livelihood-activities-in-dibang-valley-of-arunachal-pradesh">State Rural Livelihood Mission</a>)&nbsp;</strong>की मदद से वो समूह की महिलाओं को फार्मिंग ट्रिप पर लेकर गई और ऐसे ही न जाने कितने नए तरीके, समूह की महिलाओं को, उनके द्वारा मिले.&nbsp;&nbsp;&nbsp;</span></p><p dir="ltr"><img alt="SHG women nrlm Arsrlm" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/494x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Z7YkWtXXD1iWkMu8ozOt.jpg" data-mce-src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/494x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Z7YkWtXXD1iWkMu8ozOt.jpg" data-mce-style="width: 494px;" style="width: 494px;"></p><p dir="ltr"><span>कहानी का सबसे बड़ा माइलस्टोन रहा <strong>अरुणाचल प्रदेश</strong> के <strong>मुख्यमंत्री पेमा खांडू (CM Pema Khandu) </strong>ने उनका वीडियो ट्वीट किया और साथ ही लिखा की कैसे एसएचजी (self help group) जमीनी स्तर पर महिलाओं को सशक्त बनाने, सामाजिक और भावनात्मक सरलता फ़ैला रहे हैं. राज्य में एसएचजी महिलाएं जबरदस्त वृद्धि कर रही हैं. ग्रामीण और मार्जिनल समूहों में बने सेल्फ हेल्प ग्रुप्स सामूहिक प्रयासों के माध्यम से अशिक्षा और गरीबी जैसे मुद्दों पर काम कर, उसमे सफल भी हो रहे हैं.</span></p><p dir="ltr"><span>ऐसा ही उदाहरण है अरुणाचल प्रदेश (Arunanchal Pradesh) की&nbsp;<strong>जैस्मीन एसएचजी फेडरेशन</strong> का है, जिसमें 16 स्वयं सहायता समूह शामिल है, जो फूलों की खेती, सुपारी नर्सरी जैसी अनेक गतिविधियों (<strong>जीआईए</strong> ) में लगे हुए है. इसके अलावा ट्रेडिशनल स्किल्स जैसे मछली पकड़ना, बांस बनाना और हथकरघा उत्पाद जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है. इससे समूह की महिलाओं को छोटे निवेश से लाभ कमाने में मदद मिल रहीं है, उन्हें देखकर ही और भी महिलाएं समूह के साथ जुड़ रहीं है.&nbsp;&nbsp;</span></p><p dir="ltr"><span>जुलाई 2021 में,<strong> पेमा खांडू</strong> ने <strong>दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्टीय ग्रामीण मिशन (Deendayal Antyodaya Yojana National Rural Mission, <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/mothers-kitchen-in-arunachal-pradesh-to-push-for-women-empowerment" data-mce-href="https://ravivarvichar.in/khabar/mothers-kitchen-in-arunachal-pradesh-to-push-for-women-empowerment">DAY NRLM</a>)</strong> के तहत <strong>अरुणाचल&nbsp; प्रदेश</strong> में <strong>789 स्वयं सहायता समूहों (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/nabfins-changing-lives-of-shg-through-micro-finance" data-mce-href="https://ravivarvichar.in/khabar/nabfins-changing-lives-of-shg-through-micro-finance">Self Help Groups</a>) को लोन</strong> के रूप में <strong>8,27,47,000 रूपए की राशि का वितरण</strong> किया था.यह योजना <strong>राज्य ग्रामीण विकास विभाग के अरुणाचल राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (ArSRLM )&nbsp;</strong>द्वारा इम्प्लीमेंट की जा रही हैं.</span></p><p dir="ltr"><span>एसएचजी उन महिलाओं को लोन दे रहे है जो अपने व्यवसाय शुरू करना चाहती है. लेकिन उनके पास व्यवसाय शुरू करने के लिए कोई संसाधन नहीं हैं. एसएचजी, महिलाओं को लोन देकर उनके&nbsp; उद्यमों को आगे बढ़ा रहा है.&nbsp; जिससे आज हर वर्ग की महिलाएं चाहे वो शहर से हो या गांव से, व्यक्तिगत या ग्रुप में, काम कर आगे बढ़ रही है. अपने बच्चों के साथ - साथ अपनी शिक्षा पर भी ध्यान दे रहीं. पहले जो महिलाएं पढ़ी लिखी नहीं थी, आज वही महिलाएं 12वीं की पढ़ाई के साथ,&nbsp; ग्रेजुएशन (Graduation) और पोस्टग्रैजुएशन (Post Graduation) भी कर रही है. घर के साथ बाहर के काम जैसे&nbsp; बाजार से सामान लाना, बैंक के काम, समूह के काम के लिए अलग - अलग संकुल से बात करना, सामान की डिलीवरी भी खुद संभाल रही है. आज स्वयं सहायता समूह (self help group) एक अवसर के साथ वरदान के रूप में आए है जिससे देश की महिलाएं, अपनी आर्थिक स्थिति के साथ, अपने जीवन में भी बदलाव ला रहीं है.&nbsp;&nbsp;</span></p><p><b id="docs-internal-guid-e0b77680-7fff-a285-3682-4f6ba3bca9be"><br><br></b></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Mon, 17 Jul 2023 15:56:56 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/arsrlm-providing-loans-to-shg-women-for-their-business]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/go2YOYVO2ejyoNnLrso6.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/go2YOYVO2ejyoNnLrso6.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SHG की संख्या में बंगाल बना नंबर वन ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/bengal-tops-in-the-number-of-shgs-in-india</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2PZocP0Ef5ATPq3OBuFd.jpg"><p dir="ltr">दुर्गाष्टमी के लिए मशहूर कोलकाता राज्य में देवियों को बहुत मानते है। अपने राज्य की मान्यताओं को नए मक़ाम तक पहुंचाने के लिए राज्य पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने हाल ही में 1.3 लाख महिला स्वयं सहायता समूह का गठन किया और वर्त्तमान में यह राज्य देश के सबसे ज़्यादा SHGs वाले राज्य में सबसे पहले नंबर पर है। आज कोलकाता में SHGs की कुल संख्या 10.79 लाख पहुंच चुकी है। विभाग ने 2022-23 वित्तीय वर्ष में सहायता के रूप में राज्य में एसएचजी को 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता की और क्रेडिट लिंकेज की भी बात की और एक नया रिकॉर्ड बनाया।&nbsp;&nbsp;<strong></strong></p><p dir="ltr">विभाग ने गुरुवार को SHG सदस्यों के प्रदर्शन को पहचानने के लिए पश्चिम बंगाल राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (WBSRLM) के तहत एक सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभाग के प्रभारी मंत्री प्रदीप मजूमदार ने 5 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद में एसएचजी महिलाओं की उपलब्धि पर प्रकाश डाला, जो कुल धान खरीद का 10 प्रतिशत है। उन्होंने WBSRLM के सीईओ विभु गोयल से धान की खरीद में शामिल एसएचजी के अधिक विशेष प्रशिक्षण के लिए कहा ताकि आने वाले दिनों में इसे और बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा- "समूहों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में उनके काम करने के तरीके के बारे में जागरूकता पर विशेष जोर दिया जाना चाहिए।" राज्य मंत्री सेउली साहा ने एसएचजी के कामकाज में और अधिक पारदर्शिता लाने के लिए सहकारी समितियों के चुनाव और ऑडिट का आह्वान किया। कोलकाता की यह उपलब्धि से महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ा कदम साबित हुई है। बंगाल की हर महिला अब सशक्तिकरण की ओर एक नयी राह पर चलकर अपनी और अपने परिवार की खुशहाली को बढ़ा पाएंगी।</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Tue, 02 May 2023 15:22:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/bengal-tops-in-the-number-of-shgs-in-india]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2PZocP0Ef5ATPq3OBuFd.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2PZocP0Ef5ATPq3OBuFd.jpg"/></item><item><title><![CDATA[टीटीडी के साथ मिलकर SHG महिलाएं कर रही फ्लावर आर्ट ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/tirumala-tirupati-devasthanam-ttd-doing-flower-art-with-shg-women-in-andhra-pradesh</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/GrnSMWPg6HRnLKdANq3r.jpg"><p dir="ltr">'तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम' (TTD) एक स्वतंत्र ट्रस्ट है जो तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर सहित आंध्र प्रदेश के मंदिरों कि देख रेख करता है. हर दिन मंदिरो से ना जाने कितना सूखे फूलों का प्रसाद निकलता है, जिसे 'स्वामी पुष्प प्रसादम' कहते है. इन्ही इस्तेमाल किये गए फूलों से अगरबत्तियां, 'तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम' (टीटीडी) ने स्मृति चिन्ह, दिव्य चित्र, पेपरवेट, कि चेन, टेबल कैलेंडर, पेंडेंट, और अन्य कलाकृतियां बनाना भी शुरू कर दिया है. उपयोग किए गए फूल भक्तों को प्रदान करने के लिए 'टीटीडी' का यही नेक कदम है. मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी और राज्य के अन्य मंत्रियों ने इन उत्पादों कि बहुत सराहना की है. टीटीडी और 'डॉ. वाईएसआर हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटी' ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत हिंदू देवी-देवताओं के चित्र बनाने सहित लोकप्रिय उत्पाद बनाने के लिए सूखे फूलों से उत्पाद बनाने की तकनीक प्रदान कि जाएगी जो भक्तों को बहुत आकर्षित करेगा.</p>
<p dir="ltr">इस मुहीम में जुड़ने स्वयं सहायता समूहों की 340 महिला कर्मचारियों के पहले बैच को 'सिट्रस रिसर्च स्टेशन' में उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया. अब तक, इन प्रशिक्षित महिलाओं ने A4 आकार के हजारों चित्र और अन्य कलाकृतियां बनाई हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये है. 'टीटीडी' ने एसएचजी महिलाओं को प्रशिक्षण देने के अलावा उपकरणों पर 88 लाख रुपये खर्च किए हैं. भक्तों को इन चित्रों और कलाकृतियों की बिक्री शुरू कर दी गयी है. तिरुमाला, तिरुपति स्थानीय मंदिरों, बैंगलोर, हैदराबाद, विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा और चेन्नई में टीटीडी सूचना केंद्रों पर कलाकृतियाँ उपलब्ध कराई जा रही हैं. </p>
<p dir="ltr">उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए 'टीटीडी' ने कलाकृतियों के निर्माण के लिए  'सिट्रस रिसर्च स्टेशन' में एक स्थाई शेड बनाने का फैसला किया है. आंध्र परदेश की सरकार और 'टीटीडी' की तरफ से उठाया गया यह कदम SHG महिलाओं की ज़िन्दगियों को बदल देगा. हर राज्य सरकार को आंध्र प्रदेश से यह समझना चाहिए. मंदिरो से निकलने वाले फूलों का प्रसाद भारी मात्रा में आता है. इस कदम से उनका बेकार जाना भी बच जाएगा और भक्तों के लिए यह एक बहुत नेक तौफा भी साबित होगा.  महिलाएं भी इस मुहीम से जुड़कर अपने परिवार को सशक्त बना पाएंगी.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Wed, 26 Apr 2023 18:25:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/tirumala-tirupati-devasthanam-ttd-doing-flower-art-with-shg-women-in-andhra-pradesh]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/GrnSMWPg6HRnLKdANq3r.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/GrnSMWPg6HRnLKdANq3r.jpg"/></item><item><title><![CDATA[किसानों के लिए वरदान बनेगा 'वाडी प्रोजेक्ट' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/nabard-pairs-up-dalmia-bharat-limited-to-start-wadi-project</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/PYiv7pUMe7FGhyf7lMSB.jpeg"><p dir="ltr">भारत की आधी से ज़्यादा जनसँख्या खेती-बाड़ी से किसी ना किसी रूप में जुड़ी हुई है. ऐसे देश में जहां इतनी बड़ी संख्या में लोग खेती करते हों, वहां सरकार को आए दिन ऐसे परियोजनाएं लानी पड़ती है, जो किसान, महिलाएं, और इनके परिवारों को सशक्त और सक्षम बनाकर आगे बढ़ने में मदद करे. इन्हीं परियोजनाओं में एक और नाम जोड़ने के लिए ‘नाबार्ड’ (नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट) के साथ ‘डालमिया भारत लिमिटेड’ (डीबीएल) की ‘कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी शाखा’ (सीएसआर), ‘डालमिया भारत फाउंडेशन’ (डीबीएफ), द्वारा शुरू की गई 'वाडी परियोजना' से ओडिशा में राजगंगपुर और कुटरा ब्लॉक की 9 ग्राम पंचायतों के 400 से ज़्यादा किसानो को मदद मिलेगी. </p>
<p dir="ltr">मुख्य रूप से, भारत में आदिवासी समुदाय अपनी आजीविका के लिए कृषि, वनों और पशुओं पर निर्भर हैं और विकास के लिए संसाधनों तक उनकी पहुंचना के बराबर  है. जनजातीय विकास कोष (टीडीएफ) के तहत ‘वाडी परियोजना’ का उद्देश्य स्थायी कृषि प्रथाओं और स्थायी आजीविका के बेहतर अवसरों पर ध्यान देने के साथ आदिवासी किसानों का विकास करना है. ‘डीबीएफ’ ने वित्त वर्ष 23-24 में इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की योजना बनाई है, जनजातीय विकास में मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना और इन गांवों में किसानों की गरीबी को कम करना है.</p>
<p dir="ltr">डीबीएफ और नाबार्ड इस परियोजना नें किसानों को शामिल करने के लिए ग्राम पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराएं है. डीबीएफ उच्च उपज वाले बीज, ग्राफ्टेड प्लांट, सिंचाई, GI मेस वायर फेंसिंग के साथ-साथ वाडी विकास और सब्जी की खेती के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करता है. यह प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), सुंदरगढ़ और अन्य सलाहकार प्रशिक्षकों के वैज्ञानिकों द्वारा आयोजित किया जाता है. किसानों को विभिन्न गांवों में किसान उत्पादक संगठन की सामूहिक मार्केटिंग के माध्यम से अपनी उपज बेचने में भी सहायता प्राप्त की जा रही है. इससे उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने और अपने परिवारों के कल्याण में सुधार करने में सहायता मिलेगी. </p>
<p dir="ltr">इनमें स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए सशक्तिकरण कार्यक्रम, जैसे प्रशिक्षण, कौशल विकास, आय-सृजन कार्यक्रम जैसे बकरी पालन, सुअर पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, केंचुआ पालन, सामुदायिक नर्सरी आदि शामिल हैं. यह पहल स्वयं सहायता समूहों और किसान परिवारों को आगे बढ़ाने में एक बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है. ओडिशा सरकार की यह पहल स्वावलम्बी भारत की तरफ एक और कदम है. सरकारों को किसानो और स्वयं सहायता समुह को आगे बढ़ाने के लिए इस प्रकार की परियोजनाएं लाते रहना चाहिए. किसान और महिलाओं का विकास इसी प्रकार मुमकिन होगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sun, 30 Apr 2023 12:00:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/nabard-pairs-up-dalmia-bharat-limited-to-start-wadi-project]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/PYiv7pUMe7FGhyf7lMSB.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/PYiv7pUMe7FGhyf7lMSB.jpeg"/></item><item><title><![CDATA['पे नियरबाय' जोड़ेगा राजस्थान SHG महिलाओं को ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/paynearby-will-combine-more-than-10000-shg-women-in-rajasthan</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/u00p445bYcJqBIvK6iOP.png"><p>भारत के सबसे बड़े शाखा रहित बैंकिंग और डिजिटल नेटवर्क, 'पेनियरबाय' ने हाल ही में कहा है कि वह 8 जिलों में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से महिला व्यवसाय प्रतिनिधियों (बीसी-सखियों) को जोड़ेगी जिससे ग्राम पंचायतों को आसानी से बैंकिंग सेवाएं प्रदान की जा सकें. </p>
<p>YES बैंक का एक कॉर्पोरेट बीसी (बिज़नेस कोरस्पोंडेंट), SHG महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (RAJEEVIKA) के साथ जुड़ेगा. साथ जुड़ने का एक मात्रा लक्ष्य वित्त वर्ष 2024 के अंत तक राजस्थान में 10,000 महिला बीसी के लिए आजीविका के अवसर पैदा करना है. </p>
<p>कंपनी इस तरह राजस्थान में वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता और पहुंच में सुधार के लिए एक स्टेबल नेटवर्क बनाने का काम करती है. मूल्य के लेन-देन को डिजिटाइज़ करना भी इस कंपनी के बड़े उद्देश्यों में से एक है. यह कदम 2023-24 के अंत तक ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम एक बीसी-सखी को तैनात करने की सोच से उठया गया है. राजस्थान SHG महिलाओं के लिए सरकार के इस कदम से बहुत बड़ा बदलाव आने कि उम्मीद है. इस पहल से महिलाएं खुद को और अपने परिवार को सशक्त बनाने की ओर बढ़ेंगी.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Thu, 20 Apr 2023 16:28:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/paynearby-will-combine-more-than-10000-shg-women-in-rajasthan]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/u00p445bYcJqBIvK6iOP.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/u00p445bYcJqBIvK6iOP.png"/></item><item><title><![CDATA[खाद्य सुरक्षा के लिए महिला किसान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/female-farmers-for-food-security-in-india</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/atwyEiOh9m78bzBiZggd.jpg"><p class="MsoNormal"><span lang="HI">मां </span>, <span lang="HI">यह शब्द सुनते ही प्रेम</span>, <span lang="HI">ममता</span>, <span lang="HI">करुणा के साथ पालन</span>, <span lang="HI">पोषण और देखभाल की एक मूर्ति सामने खड़ी हो जाती है. महिलाएं अगर बच्चों की देखभाल इतनी अच्छी तरह कर सकती है तो सोचिये वो अपने खेत खलिहान को कैसा संभालेंगी. ग्रामीण महिलाएं बुवाई से लेकर कटाई और कटाई के बाद भी फसल के रख रखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. महिला किसान कृषि उत्पादन</span>, <span lang="HI">खाद्य सुरक्षा </span>, <span lang="HI">फसल पोषण</span>, <span lang="HI">भूमि और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में खासतौर पर योगदान देती हैं. इस तरह वे कृषि में बहुआयामी होती है और भारत की दूसरी हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे जैविक खेती</span>, <span lang="HI">स्वरोजगार योजना</span>, <span lang="HI">प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना आदि के तहत ग्रामीण महिलाओं को वरीयता मिलती है. हालांकि भारत में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है लेकिन फिर भी लिंग असमानता (जेंडर पेरिटी) हर जगह मौजूद है. विश्व के कृषि क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी 43 % है जो भारत में 70-80 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. भारत में ग्रामीण महिलाएं कृषि उत्पादन बढ़ा रही हैं</span>, <span lang="HI">खाद्य सुरक्षा में सुधार कर रही है.  इस तरह गरीबी उन्मूलन की तरफ भारत के हाथ मजबूत कर रही हैं.</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">इस सबके बावजूद महिलाओं को खेतों में भी शोषण का सामना करना पड़ता है. पुरुषों की तुलना में अधिक कृषि काम करने के बाद भी अधिकार और आय दोनों नहीं मिलते. यूएन की फ़ूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइज़ेशन (</span>FAO) <span lang="HI">की रिपोर्ट के अनुसार</span>, <span lang="HI">यदि महिलाओं को पुरुषों के समान संसाधनों तक समान पहुंच दी जाए तो विकसित देशों में कृषि उपज में 2.5 से 4 प्रतिशत की वृद्धि की जा सकती है</span>, <span lang="HI">जो कम से कम 100 मिलियन अधिक कुपोषित लोगों को अच्छा खाना खिलाने के लिए पर्याप्त है. इसी तरह यदि ग्रामीण महिलाओं को अवसर और सुविधाएं मिले तो वे देश को दूसरी हरित क्रांति की ओर ले जा सकती हैं और तस्वीर बदल सकती हैं. आज ग्रामीण महिलाएं मजदूरी और कटाई के बाद के कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. महिला किसान अपने पुरुष समकक्षों की तरह उत्पादक और उद्यमी दोनों हो सकती हैं</span>, <span lang="HI">लेकिन जमीन जायदाद में हिस्सा </span>, <span lang="HI">लोन सुविधा </span>, <span lang="HI">कृषि खरीदी </span>, <span lang="HI">मंडी पहुंच की काम जानकारी से पीछे रह जाती है. यह देखा गया है कि ग्रामीण महिलाओं को ग्रामीण पुरुषों और शहरी महिलाओं की तुलना में अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">महिलाओं को भारतीय अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है. भारतीय कृषि में महिला किसानों का बहुत बड़ा योगदान है. महिलाएं कृषि क्षेत्र में कार्यबल का सबसे बड़ा प्रतिशत हैं</span>, <span lang="HI">लेकिन उनका ज़मीन और उत्पादक संसाधनों पर नियंत्रण नहीं है. महिला कृषकों के ज्ञान</span>, <span lang="HI">दृष्टिकोण और कौशल में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सलाह प्रदान करने की ज़रुरत है. साथ ही नए शोध और अनुसंधानों के बारे में भी उन्हें जानकारी देने की ज़रुरत है. आम तौर पर कृषि में महिलाओं की भूमिका को हाशिए पर रखा जाता है और उनके योगदान को कम करके आंका जाता है. </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">सरकार हो या </span>NGO <span lang="HI">दोनों ने ही कृषि में महिलाओं की भूमिका पर कम ध्यान दिया है. इसका परिणाम यह हुआ की जिस प्रकार और जिस स्तर पर कृषि क्षेत्र में महिलाओं का काम होना चाहिए था वह नहीं हो पाया. कृषि से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की वास्तविकताओं से शासन</span>, <span lang="HI">प्रशासन</span>, <span lang="HI">समाज और हम सब को संवेदनशील होने की आवश्यकता है. इस से उन्हें पुरुषों के समान कृषि और ग्रामीण विकास के अवसर मिलेंगे. महिला किसानों को ऋण</span>, <span lang="HI">मार्केट और नई कृषि तकनीक प्रदान की जा सकती हैं. यह सुविधाएं उन्हें एकमुश्त </span>SHG <span lang="HI">के तौर पर मिल सकती है. इसलिए महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) पर जोर दिया जाना चाहिए ताकि उन्हें माइक्रो-क्रेडिट से जोड़ा जा सके. महिला किसानों को सशक्त बनाने</span>, <span lang="HI">उनकी क्षमताओं को बढ़ाने और नई कृषि प्रौद्योगिकियों तक उनकी पहुंच बढ़ाने के लिए </span>SHG <span lang="HI">बहुत मददगार साबित होंगे.  </span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रोहन शर्मा</dc:creator><pubDate>Thu, 27 Apr 2023 18:11:27 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/female-farmers-for-food-security-in-india]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/atwyEiOh9m78bzBiZggd.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/atwyEiOh9m78bzBiZggd.jpg"/></item></channel></rss>