<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ feminist]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/feminist</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/feminist" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 13 Apr 2024 16:15:19 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[भारत के पहले नारीवादी विचारधारा वाले पुरुष-Dr. B.R. Ambedkar ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/bhimrao-ambedkar-was-the-first-true-male-feminist-of-india-and-was-also-the-father-of-indian-constitution-4480656</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ctIPPUTT9bKGyjeWTs23.png"><p style="text-align: justify;">एक बार ज़रा अपना सोशल मीडिया खोल कर देखिएगा. कोई ना कोई आपको feminism का मतलब समझाते हुए, या इसके बारे में बात करते हुए मिल जाएगा. हां ये बात सच है कि देश में इस वक़्त जिस तेज़ी से women empowerment और women inclusion को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाया जा रहा है. लेकिन कहते है ना किसी अच्छे &nbsp;काम के साथ थोड़ी बहुत नकारात्मकता भी सामने आ ही जाती है.</p>
<p style="text-align: justify;">तो बस नारीवाद को लेकर भी कुछ ऐसे लोग सामने आ चुके है जिन्हे अगर feminism का मतलब भी पुचक जाए तो बता नहीं पाएंगे. देश में नारीवादी विचार धारा होना ज़रुरी है, लेकिन आज जो हो रहा है वो अर्थ का अनर्थ हो चूका है. एक बेहद अच्छे विचार को आज के so called feminists ने बिगड़ कर रख दिया है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">बहरहाल, आज हम बात करने जा रहे है एक ऐसे व्यक्ति की जिन्होंने अपनी ज़िन्दगी में महिलाओं को यह समझा फिया था कि वे दुनिया के हर हक़ की उतनी ही हक़दार है जितना एक पुरुष. वे हर महिला के अधिकारों के लिए हर समय लड़ते दिखे. उन्होंने सिर्फ बातें नहीं की बल्कि अपने हर फैसले से यह साबित किया कि काम करना और खासकर महिला सशक्तिकरण के लिए काम करने किसे कहते है.</p>
<h2>Bhimrao Ambedkar थे सच्चे feminist</h2>
<p style="text-align: justify;">हम बात कर रहे है डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की , जिन्हें आमतौर पर बाबासाहेब अंबेडकर के नाम से जाना जाता है. वे न केवल भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार के रूप में प्रसिद्ध हैं बल्कि वे भारत में women rights के एक सशक्त समर्थक भी थे. उनकी लैंगिक समानता के प्रति प्रतिबद्धता गहरी थी और यह उनके सामाजिक न्याय के समग्र दृष्टिकोण में निहित थी, जिसने उन्हें भारतीय इतिहास में एक केंद्रीय नारीवादी आकृति बना दिया.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़े- <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/national-fire-service-day-women-firefighters-fighting-the-fire-of-stereotypes-4480305"><span>National Fire Service Day: रूढ़िवाद की आग से लड़ती महिला अग्निशामक! </span></a></p>
<h2 style="text-align: justify;">भारत में women rights को सबसे आगे रखने वाले नेता B.R. Ambedkar</h2>
<p style="text-align: justify;">20वीं शताब्दी के प्रारंभ में भारत की कल्पना कीजिए, जब सामाजिक ढांचा पितृसत्तात्मक मान्यताओं और रीति-रिवाजों से मजबूती से बंधा हुआ था. ऐसे माहौल में, B.R. Ambedkar महिलाओं के लिए, विशेषकर हाशिए के समुदायों की महिलाओं के लिए, आशा की किरण के रूप में उभरे. उनकी कानूनी योग्यता और सहानुभूतिपूर्ण नेतृत्व ने कई कानूनों की शुरुआत की, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना था.</p>
<p><img alt="who is the father of the constitution" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/600x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Z5q5GZiK5bqzTlNL4lXK.webp" style="width: 600px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image credits: Times Now</em></span></p>
<h2 style="text-align: justify;">शिक्षा और रोजगार</h2>
<blockquote>
<p style="text-align: justify;">B.R. Ambedkar का मानना था कि शिक्षा समाज को आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण साधन है. उन्होंने कहा, &ldquo;मैं एक समुदाय की प्रगति को महिलाओं की प्रगति से मापता हूं."</p>
</blockquote>
<p style="text-align: justify;">वे &nbsp;यह जानते थे कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण है, उन्होंने लड़कियों की शिक्षा की वकालत की और ऐसे संस्थान स्थापित किए जिन्होंने शिक्षा को उन तक पहुँचाया, विशेषकर निम्न जातियों की महिलाओं तक. उन्होंने शिक्षा को एक हथियार माना जिसका इस्तेमाल महिलाएं दमन के खिलाफ कर सकती हैं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">Hindu Code Bill: Women rights के लिए एक क्रांतिकारी कदम</h2>
<p style="text-align: justify;">B.R. Ambedkar की महिला अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता का सबसे नाटकीय और मार्मिक उदाहरण उनकी Hindu Code Bill को ड्राफ्ट करने में भूमिका है. यह प्रस्तावित कानून क्रांतिकारी था&mdash;इसने हिंदू व्यक्तिगत कानून में महिलाओं के अधिकारों को बढ़ाने के पक्ष में मौलिक परिवर्तन करने का प्रयास किया. इसने महिलाओं के खिलाफ मौजूदा कानूनों की भेदभावपूर्ण प्रथाओं को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा. इसकी कई प्रगतिशील विशेषताओं में, बिल ने बहुविवाह को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा, जिससे एकविवाह प्रणाली को कानूनी रूप दिया. महिलाओं के लिए तलाक के अधिकार को अधिक समान शर्तों पर सुनिश्चित किया.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़े- <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/schemes-for-women-empowerment-in-india-4476547">भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए योजनाएं</a></p>
<p style="text-align: justify;">संपत्ति और विरासत में अधिकार प्रदान किए, सीधे तौर पर पारंपरिक ढांचों को चुनौती दी जो महिलाओं को पुरुषों पर आर्थिक रूप से निर्भर बनाए रखते थे. प्रतिकूल प्रतिक्रिया और गंभीर विरोध का सामना करते हुए भी, जिसमें उन पर हिंदू परंपराओं को कमजोर करने का आरोप लगाया गया, B.R. Ambedkar अडिग रहे. हालांकि उन्हें अंततः अपने मूल रूप में बिल के विरोध और न पास होने के कारण कानून मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा, उनकी वकालत ने भविष्य के सुधारों के लिए आधार तैयार किया. Hindu Code Bill, इसके संशोधित रूप में बाद में पारित हुआ, और यह उनकी दूरदृष्टि और लैंगिक समानता के प्रति समर्पण का प्रमाण है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">राजनीतिक भागीदारी में women rights</h2>
<p style="text-align: justify;">B.R. Ambedkar ने महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों के लिए भी लड़ाई लड़ी. उन्होंने सुनिश्चित किया कि भारतीय संविधान ने महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकारों के साथ मतदान करने और सार्वजनिक जीवन में भाग लेने का अधिकार दिया. यह उस समय के कई पश्चिमी लोकतंत्रों में भी एक प्रगतिशील कदम था.</p>
<p><img alt="who is br ambedekar" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/600x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/vwoICJgYpIDG1JmC7yhv.webp" style="width: 600px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image credits: Hindustan times</em></span></p>
<h2 style="text-align: justify;">B.R. Ambedkar को क्यों कहा जाता है feminist?</h2>
<p style="text-align: justify;">B.R. Ambedkar को feminist कहना उनकी समानता और न्याय के प्रति अडिग विश्वास में निहित है, जो लिंग की परवाह किए बिना सभी के लिए है. उनका नारीवादी दृष्टिकोण समावेशी था, जो केवल सामाजिक और कानूनी परिवर्तनों पर ही नहीं बल्कि उन सांस्कृतिक और व्यवहारिक बदलावों पर भी जोर देता है, जो समाज में महिलाओं की स्थिति को मजबूत कर सकते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">उनके द्वारा किए गए सुधार और उनकी विचारधाराएँ आज भी महत्वपूर्ण हैं, और उनकी सोच और कार्य समानता और न्याय के लिए सतत संघर्ष के प्रेरणा के स्रोत हैं. उनके जन्मदिन, जो Ambedkar jayanti के रूप में मनाया जाता है, को हर वर्ष 14 अप्रैल को एक राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाया जाता है, और यह उनकी विरासत और उनके द्वारा स्थापित मूल्यों की स्मृति को ताजा करता है.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़े- <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/the-share-of-women-voters-in-the-2024-elections-is-the-highest-in-the-last-two-decades-4468751"><span>2024 चुनाव - पिछले दो दशकों में women voters की हिस्सेदारी सबसे अधिक! </span></a></p>
<p style="text-align: justify;">Dr B.R. Ambedkar, जिन्हें भीमराव अंबेडकर, डॉक्टर अंबेडकर, और बाबा भीमराव के नाम से भी जाना जाता है, ने न केवल भारत के संविधान को आकार दिया बल्कि उन्होंने समाज के हर वर्ग के लिए न्याय और समानता के प्रयासों में अपना जीवन समर्पित किया. उनकी feminism और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी निष्ठा ने उन्हें भारत के सबसे प्रमुख समाज सुधारकों में से एक बना दिया. उनका जीवन और कार्य हमें यह सिखाता है कि सामाजिक परिवर्तन संभव है और यह कि समर्थन और समर्पण के साथ, हम सभी के लिए एक अधिक समान और न्यायपूर्ण समाज बना सकते हैं.</p>
<h2 style="text-align: justify;">क्यों मानते है Ambedkar Jayanti ?</h2>
<p style="text-align: justify;">इसलिए, जब हम Ambedkar Jayanti मनाते हैं, तो हम न केवल उनके जन्म को याद करते हैं बल्कि उनके द्वारा दिए गए संदेशों और उनकी विरासत को भी सम्मानित करते हैं. B.R. Ambedkar के जीवन और उनके मिशन को याद करते हुए, हमें उनके विचारों को अपने जीवन में लागू करने और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;">उनके जीवन और कार्यों के माध्यम से, B.R. Ambedkar ने यह दिखाया कि कैसे एक व्यक्ति समाज के बड़े पैमाने पर परिवर्तन का कारण बन सकता है. उन्हें याद करते हुए, हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और समानता और न्याय के लिए उनके संघर्ष को आगे बढ़ाने का प्रण लेना चाहिए.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़े- <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/necessary-to-change-status-of-women-for-the-status-of-the-family-4473303">परिवार के स्टेटस के लिए महिलाओं का स्टेटस बदलना जरूरी</a></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sat, 13 Apr 2024 16:15:19 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/bhimrao-ambedkar-was-the-first-true-male-feminist-of-india-and-was-also-the-father-of-indian-constitution-4480656]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ctIPPUTT9bKGyjeWTs23.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ctIPPUTT9bKGyjeWTs23.png"/></item><item><title><![CDATA[महिलाओं की आवाज़ को बुलंद करते Indian feminist theatres... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/indian-feminist-theatres-raising-the-voice-of-women-through-acts-and-plays-4447624</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/kIcs4e01jZICXGdwXsB2.png"><p style="text-align: justify;">भारत में फेमिनिज्म (Feminism in India) का बढ़ना कई दशकों की यात्रा का परिणाम है, जिसमें समाज के हर कोने से उठने वाली आवाजें शामिल हैं. यह पहल नारी शक्ति की अनेक विचारधाराओं के साथ आगे बढ़ी है, जिसमें शिक्षा, राजनीति, आर्थिक स्वतंत्रता (financial independence) और न्याय के लिए संघर्ष शामिल है.</p>
<p style="text-align: justify;"><a href="https://ravivarvichar.in/experts-thoughts-editorial/self-help-groups-promoting-women-empowerment-and-feminism-in-rural-india-2036313">भारत में फेमिनिज्म</a> की शुरुआत colonial period के दौरान हुई, जब महिलाएं शिक्षा, स्वास्थ्य और वोटिंग अधिकारों के लिए आगे बढ़ीं. 19वीं और 20वीं सदी में, महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए काम किया गया, जिसमें independence के दौरान, महिलाओं ने ना सिर्फ देश की आज़ादी के लिए लड़ाई लड़ी, बल्कि gender equality के लिए भी आवाज उठाई.</p>
<p style="text-align: justify;">Feminism को बढ़ावा देने में भारतीय थिएटर की भी अहम भूमिका रही है. थिएटर समाज का एक दर्पण है जो हमें हमारे इतिहास, संस्कृति, रीति-रिवाजों और मूल्यों के बारे में बताता है. भारतीय संस्कृति में थिएटर सदियों से लोगों को एक साथ लाता है. फिर चाहे वो गांव की चौपाल हो या शहर का आधुनिक थिएटर. 1970s में इसी के चलते शुरू हुए कई Indian feminist theatres जिनकी मदद से महिलाओं ने समाज में अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाई.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/ramabai-ranade-was-the-first-woman-in-india-to-fight-for-women-rights-and-gender-equality-2400377">भारत में Women rights की pioneer- Ramabai Ranade</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">Stereotypes को चुनौती देने के लिए शुरू किए Indian feminist theatres</h2>
<p style="text-align: justify;">समय के साथ, फेमिनिस्ट आंदोलनों ने अधिक विविधता और गहराई हासिल की, जिसमें कानूनी सुधार, लैंगिक हिंसा, कामकाजी महिलाओं के अधिकार, और लिंग समानता पर ध्यान केंद्रित किया गया. इसी आंदोलन को मज़बूती देने और लोगों तक पहुंचाने के लिए शुरू हुआ सिलसिला feminist theatres का.</p>
<p style="text-align: justify;">Feminist theatres वह platform है जो महिलाओं के अधिकारों, समानता और सशक्तिकरण पर केंद्रित है. महिलाओं पर केंद्रित इन प्रकार के मुद्दों से जुड़े नाटकों में, महिलाओं के जीवन, उनकी चुनौतियों, सपनों और संघर्षों को मुख्य विषय बनाया जाता है. इन theatres का मकसद समाज में महिलाओं की स्थिति को उजागर करना और gender differences और stereotypes को चुनौती देना है.</p>
<p><img alt="Indian feminist theatres2" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/600x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/ksJ3FubYCyme2GkWLeyd.jpg" style="width: 600px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits - Feminism in India</em></span></p>
<h2 style="text-align: justify;">मनोरंजन के साथ देते feminism को नया चेहरा</h2>
<p style="text-align: justify;">Feminist theatres की शुरुआत भारत में 1970 और 1980 के दशक में हुई थी, जब <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/indian-culture-has-deep-roots-related-to-feminism-and-can-be-said-that-india-has-feminism-in-its-roots-4234819">feminism ने भारत</a>&nbsp;में जोर पकड़ा था. इस दौरान, कई नाटककारों और theatre groups ने महिलाओं के अनुभवों और कहानियों को मंच पर लाने की पहल की. उस दौरान शुरू हुई यह पहल आज भी theatre artists द्वारा जारी रखी जा रही है.</p>
<p style="text-align: justify;">इस बात का एक प्रमुख उदाहरण है, मुंबई के '<strong>अव्हान नाट्य मंच</strong>' जैसे समूह, जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर नाटक प्रस्तुत करते हैं. इसी तरह, दिल्ली में '<strong>सहेली</strong>' जैसे संगठन ने भी महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित नाटकों का मंचन किया है.</p>
<p><img alt="Indian feminist theatres1" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/600x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Qsg5V5dSTHCgbPSSro8u.png" style="width: 600px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits - Mint Lounge</em></span></p>
<p style="text-align: justify;">Feminist theatres ने ना सिर्फ महिलाओं की समस्याओं को उजागर किया है, बल्कि ये समाज में परिवर्तन लाने के लिए एक मजबूत आवाज भी बन गए है. यहां प्रस्तुत होने वाले नाटकों में, अक्सर महिलाओं को शक्तिशाली और सकारात्मक भूमिकाओं में प्रस्तुत किया जाता है, जो दर्शकों को प्रेरित करता है और समाज में लैंगिक समानता (gender equality) के प्रति जागरूकता बढ़ाता है.</p>
<p style="text-align: justify;">आज भी, भारतीय फेमिनिज्म की यात्रा जारी है, नई पीढ़ियों को प्रेरित करते हुए और एक ऐसे समाज की दिशा में कदम बढ़ाते हुए जहां सभी को समान अवसर और सम्मान मिले. यह यात्रा सिर्फ महिलाओं की नहीं बल्कि हम सभी की है.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/gangubai-hangal-was-an-indian-classical-singer-and-had-the-boldest-and-feisty-voice-she-was-the-queen-of-kirana-gharana-4239043">भारतीय शास्त्रीय संगीत की पहली जोशीली आवाज़ थी Gangubai Hangal</a></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विधि जैन</dc:creator><pubDate>Thu, 04 Apr 2024 13:30:39 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/indian-feminist-theatres-raising-the-voice-of-women-through-acts-and-plays-4447624]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/kIcs4e01jZICXGdwXsB2.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/kIcs4e01jZICXGdwXsB2.png"/></item><item><title><![CDATA[भारतीय शास्त्रीय संगीत की पहली जोशीली आवाज़ थी Gangubai Hangal ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/gangubai-hangal-was-an-indian-classical-singer-and-had-the-boldest-and-feisty-voice-she-was-the-queen-of-kirana-gharana-4239043</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/s4wga8PqVLFpofJfBZgl.PNG"><p style="text-align: justify;">"आज सुबह जब मैं अपने काम पर आने के लिए तैयार हो रही थी तो मैंने देखा कि मेरे नानाजी टीवी पर कुछ शास्त्रीय संगीत सुन रहे है. हालांकि, हमारे घर में अक्सर शास्त्रीय संगीत सुनते है वो, लेकिन आज लकुच अलग था. जो आवाज़ मेरे कानों पर पड़ी तो मुझे कुछ अलग सा लगा. क्योंकि आवाज़ में जो भारीपन, भाव और जोश था वो मैंने पहले कभी नहीं सुना था."</p>
<p style="text-align: justify;">आवाज़ थी Gangubai Hangal की. आज से पहले तक मई उनका नाम भी नहीं जानती थी, लेकिन उनकी आवाज़ ने मनो मुझे मजबूर कर दिया है उनके बारे में जानने के लिए. आज उनका जन्मदिन है. यानि ये सितारा जिसनें भारतीय शास्त्रीय संगीत का विचारलोगों के मन में बदल दिया था."</p>
<p style="text-align: justify;">"जब मैंने इनके बारे में पढ़ा तो मुझे कुछ ऐसी बातें पता चलीं गंगूबाई के बारे में जिन्होंने मेरे मन में इनके लिए अलग आदर उत्पन्न कर दिया है."</p>
<h2 style="text-align: justify;">Gangubai Hangal का जन्म</h2>
<p><img alt="who is gangubai hangal ?" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/600x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/YoIa354hTAWMDddKYxNp.jpg" style="width: 600px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image credits: The Print</em></span></p>
<p style="text-align: justify;">धारवाड़, Karnataka में इस छोटी सी बच्ची का जन्म 5 march 1913 में हुआ था. एक छोटे से परिवार में जन्मी इस बच्ची में बचपन से ही &nbsp;संगीत सीखने की इच्छा थी क्योंकि इनका परिवार संगीत से जुड़ा हुआ था. गंगूबाई की सबसे पहली प्रशिक्षक उनकी मां थी. गंगूबाई की संगीत यात्रा छोटी उम्र में ही शुरू हो गई जब उन्होंने अपनी मां अंबाबाई से संगीत सीखना शुरू किया, जो खुद एक शास्त्रीय गायिका थीं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">मां से सीखने के बाद उन्हें उस वक़्त के सबसे बेहतरीन प्रशिक्षक से सीखने को मिला. बाद में, उन्होंने प्रसिद्ध संगीतकार (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/mallika-e-ghazal-begum-akhtar-was-one-the-most-iconic-indian-singer-and-actress-1512806">women in history</a>) और शिक्षक सवाई गंधर्व से जयपुर-अतरौली घराने में औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया.</p>
<h2 style="text-align: justify;">Gangubai Hangal को सवाई गन्धर्व ने दिया था प्रशिक्षण</h2>
<p style="text-align: justify;">Gangubai Hangal के जीवन में दो महत्वपूर्ण शिक्षक थे. उनकी पहली शिक्षिका उनकी मां अंबाबाई थीं, जो एक गायिका थीं. बाद में उन्होंने सवाई गंधर्व गुरु के रूप में प्राप्त हुए. वह भारत के सबसे बेहतरीन शिक्षकों में से एक थे. उन्होंने पंडित भीमसेन जोशी जैसे महान कालका &nbsp;को भी सिखाया था और अब एक और महान गायिका गंगूबाई को सिखाने वाले थे. भले ही उनके गुरु 30 किलोमीटर दूर रहते थे लेकिन फिर भी गंगूबाई उनसे सीखने के लिए हर दिन ट्रेन से यात्रा करती थीं.</p>
<p><img alt="gangubai hangal photos" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/600x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/ylZC1dVnZtMpCUKnNTnx.jpg" style="width: 600px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image credits: Google Images</em></span></p>
<h2 style="text-align: justify;">शूद्र परिवार में जन्मी थी Gangubai Hangal&nbsp;</h2>
<p style="text-align: justify;">गंगूबाई का जन्म एक छोटे से परिवार में हुआ था. उनका जन्म धारवाड़ में एक कृषक चिक्कुराओ नादिगर और कर्नाटक संगीत की गायिका अंबाबाई के घर हुआ था. हंगल ने केवल प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और उनका परिवार 1928 में हुबली में चला गया ताकि गंगूबाई हिंदुस्तानी संगीत सीख सकें.</p>
<p style="text-align: justify;">एक संगीतकार और एक महिला के रूप में, Gangubai Hangal को बहुत अपमान का सामना करना पड़ा क्योंकि लोग उन्हें 'low social status' वाली मानते थे. अपने हर संगीत प्रदर्शन के बाद, वे उसके साथ खाना खाने से भी मना कर देते थे जिसके कारण उन्हें बाहर खाना खाना पड़ता था. इन कठिन अनुभवों के बावजूद, गंगूबाई अपने अपमान से परेशान नहीं हुई. लेकिन ये कहा जा सकता है कि उनके संगीत में उदासी इन्ही सारे अनुभवों का जोड़ हो.</p>
<h2 style="text-align: justify;">Gangubai Hangal थी उस वक़्त की feminist&nbsp;</h2>
<p style="text-align: justify;">जब देश में <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/rekha-bhardwaj-is-one-of-the-best-singers-of-indian-cinema-2399092">feminism</a>&nbsp;का चलन भी शुरू नहीं हुआ था तब कुछ महिलाएं थी जो असल में इस विचार की प्रतीक थी. Hangal ने जिस वक़्त संगीत की दुइनया में इतना बड़ा नाम बनाया था तब देश में भारतीय शास्त्रीय संगीत को पुरुष प्रधान मना जाता था.</p>
<p style="text-align: justify;">ऐसे युग में जब महिला शास्त्रीय संगीतकार बहुत काम थी तब गंगूबाई ने लैंगिक रूढ़िवादिता को तोड़ा और भारतीय शास्त्रीय संगीत के पुरुष-प्रधान क्षेत्र में अग्रणी बन गईं. उन्होंने महिला संगीतकारों की भावी पीढ़ियों के लिए मार्ग भी&nbsp;<br>प्रशस्त किया है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">Gangubai Hangal के गले की सर्जरी के बाद हुई भरी आवाज़</h2>
<p><img alt="best classical singers in india" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/400x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/M2UXv87UPWcASyOmJguI.jpg" style="width: 400px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image credits: Tribune</em></span></p>
<p style="text-align: justify;">गले की सर्जरी के बाद उनकी आवाज़ में एक भारीपन आ गया था जिसे किराना घराने के दिग्गजों ने वर्षों की कड़ी मेहनत से फायदे में बदल दिया. कलकत्ता में एक संगीत सम्मेलन में, गंगूबाई को उनके संगीत कार्यक्रम के निर्धारित होने से एक रात पहले एक निजी बैठक में गाने के लिए कहा गया.</p>
<p style="text-align: justify;">उन्हें ऐसा करने के लिए कहा गया क्योंकि आयोजक उनके जैसी कमजोर लड़की से इस आवाज़ की कल्पना ही नहीं कर पा रहे थे. लेकिन उस दिन उन्हें त्रिपुरा के महाराजा ने इतनी बेहतरीन प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया.</p>
<h2 style="text-align: justify;">पंडिता और विदुषी की उपाधि लाने वाली प्रेरक थी Gangubai Hangal</h2>
<p style="text-align: justify;">प्रमुख महिला गायिकाओं को 'बाई', 'बेगम' और 'जान' कहकर पुकारना बंद कराकर 'पंडिता' या 'विदुषी' कहकर संबोधित करने का श्रेय गंगूबाई को दिया जाता है. उन्होंने संगीत industry में मौजूद दोहरे मापदंड का खुलकर विरोध किया और इसी के साथ वे महिला अधिकारों केलिए हमेशा खफ्ही रहने वाली महिलाओं में से एक थी. वह बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर सहित कई लोगों के लिए मां समान हैं, जिन्होंने उनके संगीत समारोहों में भाग लेने का कोई मौका नहीं छोड़ा.</p>
<h2 style="text-align: justify;">96 में चल बसी Gangubai Hangal&nbsp;</h2>
<p style="text-align: justify;">94 साल की उम्र में, गंगूबाई ने अपना आखिरी संगीत कार्यक्रम कुंडगोल के नादागीर वाडा में दिया, जहां उन्होंने आधे घंटे से अधिक समय तक दर्शकों को अपनी आवाज़ से दीवाना बना दिया था. कोई यकीन ही नहीं कर पा रहा था कि इस उम्र में ऐसी आवाज़ में गाना मुमकिन है. अपने संगीत करियर के अलावा, गंगूबाई सामाजिक और राजनीतिक कार्यों में भी सक्रिय रूप से शामिल थीं. उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम सहित विभिन्न आंदोलनों को अपना समर्थन दिया.</p>
<p style="text-align: justify;">Gangubai Hangal को भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके असाधारण योगदान के लिए कई पुरस्कार और सम्मान मिले. कुछ उल्लेखनीय पुरस्कारों में पद्म भूषण, पद्म विभूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार शामिल हैं.Gangubai Hangal का 21 जुलाई 2009 को 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया. लेकिन वो आज की पीढ़ी की संगीतकारों के लिए एक रास्ता तैयार कर के गयीं जिसपर चलकर आज ना जाने कितनी बेहतरीन गायिका हमारे सामने आ रही है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 05 Mar 2024 16:40:17 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/gangubai-hangal-was-an-indian-classical-singer-and-had-the-boldest-and-feisty-voice-she-was-the-queen-of-kirana-gharana-4239043]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/s4wga8PqVLFpofJfBZgl.PNG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/s4wga8PqVLFpofJfBZgl.PNG"/></item><item><title><![CDATA[महाश्वेता देवी : समाज का साहित्य लिखती मां ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/remembering-mahasweta-devi-the-feminist-icon-on-her-death-anniversary</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/GDfdy8vkT1mvjAcCgq8e.jpg"><p>कुछ लोगों को आंदोलन करने के लिए मशालों की नहीं, सिर्फ कलम की ज़रुरत होती है. महाश्वेता देवी (<span>Mahasweta Devi</span>) भी भारतीय साहित्य (Indian literature) में ऐसे ही लेखकों की सूची में जगह बनाती हैं. बंगाली फिक्शन राइटर. सामाजिक कार्यकर्ता. आदिवासी समुदाय की आवाज़. फेमिनिस्ट. महाश्वेता देवी ने सभी टाइटल जिये (Fiction writer, voice of the subaltern, feminist Mahaswets Devi). उनके लेख में ज़मीनी हक़ीक़त दिखाई देती. पर्यावरण का शोषण, मेहनतकश गरीबों का संघर्ष, पश्चिम बंगाल और बिहार के भूमिहीन और छोटे किसानों, बंधुआ मज़दूरों की परेशानियां, पितृसत्ता से दबी <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/female-characters-of-guru-dutt">महिलाओं</a> की चुनौतियां उनके लेखों में जगह पाते.&nbsp;</p>
<h2>महाश्वेता देवी को किया गया पद्म विभूषण और बंग विभूषण से सम्मानित&nbsp;</h2>
<p>संहिचारी, मैरी ओरांव, रुदाली, छोटी मुंडा, दोपदी मेजेन जैसे कई ऐतिहासिक किरदारों की रचनाकार देवी ने बंगाली लेखन के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार, पत्रकारिता के लिए रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार, पद्म विभूषण और बंग विभूषण से सम्मानित किया गया. उनके उपन्यास 'हजार चुराशिर मां' में परिवारों पर राजनीतिक हिंसा को दिखाया गया, 'अरण्येर अधिकार' में उन्होंने जमींदारों और राज्य द्वारा शोषण और विस्थापन का सामना करने वाले आदिवासी समुदायों की दुर्दशा पर बात की.</p>
<h3>महिलाओं के सशक्तिकरण की लड़ाई की कहानियां लिखी</h3>
<p><a href="https://feminisminindia.com/2021/01/14/remembering-mahasweta-devi-the-social-activist-on-her-birth-anniversary/">महाश्वेता देवी</a> की लघु कहानी 'द्रौपदी' ने सुरक्षा बलों द्वारा यौन हिंसा और यातना का शिकार आदिवासी <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/leila-seth-the-mother-of-a-suitable-boys-writer-vikram-seth-accepted-his-sons-sexuality-of-being-a-gay-and-supported-him-throughout">महिलाओं</a> के दुखद अनुभवों को दर्शाया. 'चोट्टी मुंडा और उसका तीर' और 'बशाई टुडू' जैसी उनकी कहानियों ने उत्पीड़न और सामाजिक अन्याय के खिलाफ अपने लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले आदिवासी नेताओं की हिम्मत को दिखाया. कलेक्शन 'ब्रेस्ट स्टोरीज़' के ज़रिये, उन्होंने अलग-अलग परिवेश से आने वाली महिलाओं के <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/steven-spielberg-e-t-the-xtra-terrestrial-based-on-satyajit-ray-script-claims-shama-zaidi">सशक्तिकरण</a> की लड़ाई की कहानियां लिखी.</p>
<h3>लेख के ज़रिये महिलाओं और वंचित समुदायों के न्याय और समानता की वकालत की&nbsp;</h3>
<p>महाश्वेता देवी की साहित्यिक कला ने उन्हें <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/we-need-a-feminist-response-to-end-child-labour">फेमिनिस्ट</a> आइकॉन (feminist icon) बना दिया. उन्होंने निडरता से उन लोगों की आवाज़ बुलंद की, जिन्हें अक्सर अनसुना कर दिया जाता है. महिलाओं और वंचित समुदायों के न्याय और समानता की वकालत करने के लिए अपनी कलम का इस्तेमाल किया. उनकी साहित्यिक विरासत समाज को अपने अन्यायों पर विचार करने और इन्क्लूसिव और खुशहाल दुनिया बनाने के लिए प्रेरित करती है.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Fri, 28 Jul 2023 11:15:22 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/remembering-mahasweta-devi-the-feminist-icon-on-her-death-anniversary]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/GDfdy8vkT1mvjAcCgq8e.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/GDfdy8vkT1mvjAcCgq8e.jpg"/></item></channel></rss>