<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ Financial Management]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/financial-management</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/financial-management" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 20 May 2023 15:43:58 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[गांव में CSC से बैंकिंग हुई आसान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/couple-brings-banking-in-sukhpuri-village-through-csc</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/dKcO0HxM0lua5yKsyCK0.jpg"><p>भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. देशभर में, स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups-SHG) से जुड़कर महिलाएं आर्थिक क्रांति (financial revolution) ला रही हैं. पर, आज भी कई गांवों में बैंक तक पहुंच नहीं है. आंकड़ों के हिसाब से करीब  5.96 लाख गांव बैंक (bank) जैसी ज़रूरी सुविधा से वंचित हैं. कई ग्रामीण जागरूक बन फाइनेंशियल मैनेजमेंट (financial management) में बैंक की अहमियत को समझ रहे हैं. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खरगोन (Khargone) के सुखपुरी गांव के एक दंपति ने इस ज़रुरत को ग्रामीणों तक पहुंचाने की ठानी. </p>
<p>रीना ब्रम्हाणे और उनके पति मुकेश ब्रम्हाणे गांव में एक कॉमन सर्विस सेंटर (Common Service Center-CSC) चला रहे हैं जो न केवल ग्रामीणों की मदद करता है बल्कि उनकी बैंकिंग जरूरतों को भी पूरा कर रहा है. सुखपुरी खरगोन के भगवानपुरा प्रखंड का एक छोटा सा गांव है. ज्यादातर ग्रामीण किसान या मजदूर हैं. बैंकिंग या किसी दूसरे वित्तीय लेनदेन से जुड़ी परेशानी को हल करने के लिए ग्रामीणों को अपने गांव से लगभग 10 किलोमीटर दूर धुलकोट जाना पड़ता था. बैंकों में ग्रामीणों को अपनी मजदूरी निकालने या अपना आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए घंटों कतार में खड़ा होना पड़ता है. </p>
<p>रीना और उनके पति की वजह से चीजें बदल गई हैं. ये लगभग 300 परिवारों के गांव में पिछले एक साल से सीएससी चला रहे हैं. किसीका भी  बैंक से जुड़ा कोई काम या कोई वित्तीय लेन-देन होता है तो वह सीएससी के ज़रिये तुरंत हो जाता है. साथ ही गांवों में सरकारी योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन करने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं. मुकेश और रीना दोनों ने करीब एक साल पहले सीएससी सेंटर शुरू किया था और अब यह मिनी बैंक की तरह काम कर रहा है.</p>
<p>मुकेश बारहवीं कक्षा पास है और आजीविका कमाने के लिए खेती और मजदूरी का काम करते थे. शादी के बाद, उनकी ग्रेजुएट पत्नी रीना ब्रम्हाणे ने मुकेश की मदद करने का फैसला किया. उसने गांव के दुर्गा स्वयं सहायता समूह से एक लाख रुपये का कर्ज लिया. वह कंप्यूटर के काम के बारे में थोड़ा बहुत जानती थी. मुकेश ने उसे आगे की पढ़ाई के लिए MSW कोर्स में दाखिला दिलाने के लिए प्रोत्साहित किया.</p>
<p>2020-21 में, ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI), बैंक ऑफ इंडिया के प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण के बाद, दंपति ने ऋण लिया और एक लैपटॉप, एक स्मार्ट मोबाइल, दो प्रिंटर-फोटोकॉपी मशीन और एक लेमिनेशन मशीन खरीदी. इस राशि से गांव में काम शुरू किया. शुरुआत में, उन्हें ज़्यादा अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला क्योंकि ग्रामीणों को पैसे खोने का डर था. हालांकि, अब स्थिति बदल गई है. अब सीएससी के ज़रिये वृद्धावस्था पेंशन के अलावा मजदूरी, पेंशन, पीएम आवास योजना, पीएम किसान और बैंक खाते खुलवाने का काम किया जा रहा है.</p>
<p>रीना अभी एमएसडब्ल्यू के अंतिम वर्ष में है. मुकेश ने भी काम में उसकी मदद करनी शुरू कर दी है. रीना हर महीने 200 से 250 ट्रांसैक्शंस कर लेती है. फिलहाल कमाई कम है, पर दंपत्ति संतुष्ट और खुश हैं. दोनों पति-पत्नी मिलकर हर महीने लगभग 8,000 से 10,000 रुपये कमा रहे हैं. </p>
<p>इस काम की बदौलत ग्रामीणों को अब डिजिटल लेनदेन के लिए कहीं दूर नहीं जाना पड़ता. इस दंपति ने खुद जिस तरह से पूरे गांव की इतनी बाई समस्या का हल निकाला, दूसरों के लिए उदाहरण बन गये. आज देशभर में कई महिलाएं स्वयं सहायता से लोन लेकर अपने रोज़गार शुरू कर रही हैं. शिक्षा और समूह की मदद ने रीना को अपने गांव सुखपुरी में बैंक की सुविधा पहुंचाने में मदद की. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sat, 20 May 2023 15:43:58 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/couple-brings-banking-in-sukhpuri-village-through-csc]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/dKcO0HxM0lua5yKsyCK0.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/dKcO0HxM0lua5yKsyCK0.jpg"/></item><item><title><![CDATA[खर्च से पहले फाइनेंशियल लिट्रेसी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/bhavishya-kharch-yojna-imparted-lessons-on-financial-literacy-to-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/YgEBrH7L8boncMJwm249.jpg"><p>लाड़ली बहना योजना (Ladali Behna Yojana) में पात्र महिलाओं को हर महीने मिलने वाले एक हजार रुपए के लिए मप्र के देवास जिला प्रशासन की "भविष्य खर्च योजना" और प्रोजेक्ट सुखियों में है. गांव से जुड़ी इन महिलाओं को रुपयों का सही उपयोग करना सीखने के लिए खास तरह की ट्रेनिंग दी गई. इस पहल के बाद प्रशासन और जिला पंचायत के प्रयास को सराहा जा रहा है. आखिर कोई भी महिला हर महीने पैसों का सही उपयोग कैसे करे, इस मकसद से फाइनेंशियल मैनेजमेंट (Financial Management) गुरू सहित लगभग 200 महिलाओं ने हिस्सा लिया. इसमें आजीविका मिशन से जुड़े स्वयं सहायता समूह (Self Help Group-SHG), आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता और वित्तीय सहायता अभियान से जुड़े पदाधिकारी शामिल हुए. यदि यह प्रयोग सफल रहा तो गांव की महिलाओं को जहां आर्थिक मजबूती मिलेगी वहीं यह प्रयोग पूरे प्रदेश में लागू किया जा सकता है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी इस जिले के लिए खास रूचि दिखाई है. सोनकच्छ में महिलाओं से जुड़े आयोजन में वे ख़ासतौर हिस्सा ले रहे हैं.   </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/exS2x3903M7rRyfdr3C4.jpg" alt="financial literacy "></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>मास्टर ट्रेनर्स महिलाओं ने फैशियल ट्रेनिंग ली (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार)</em></span></p>
<p>पात्र महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए उनके खाते में जमा होंगे. महिलाओं को इन रुपयों का सही उपयोग करते आए यह प्रयास किए जा रहे हैं. गांव-गांव पात्र महिलाओं को ढूंढ कर फॉर्म भरवाने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ,आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह से जुड़े पदाधिकारियों को ट्रेनिंग (training) देकर यही समझाया गया. फाइनेंशियल लिट्रेसी (Financial Literacy) की मास्टर ट्रेनर और कनाड़िया परी गांव की गंगा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सुनीता मालवीय कहती हैं- "<em>गांव की महिलाएं अपने पास के पैसे भी पति के मांगने पर दे देतीं हैं. कई बार पति यदि नशे के आदी हुए तो पैसा ही नहीं बचेगा.मैंने सभी मौजूद मास्टर ट्रेनर्स और दूसरों को  बताया कि पात्र महिलाओं को बताना है कि हर महीने मिलने वाले रुपए का वे खुद का हेल्थ बीमा,पति-परिवार का बीमा,फसल बीमा,मवेशियों का उपचार,अटल पेंशन योजना,बच्चों के स्कूल की फ़ीस, किताबें-कॉपियों की खरीदी में खर्च कर सकती है. यह भी बताया कि महिलाएं खुद पर कभी ध्यान नहीं देती. अच्छी हरी सब्जियां, पौष्टिक खाने पर खर्च करे जिससे वे खुद भी स्वस्थ रहे."</em></p>
<p>जिले के गांव-गांव महिलाओं को इस तरह की काउंसलिंग दी जा रही है. सोनकच्छ आजीविका मिशन ब्लॉक प्रबंधक वीरेंद्र ने बताया - " इस परिकलपना को जनपद सीईओ आईएएस टी प्रतीक राव ने तैयार किया. इसमें मास्टर ट्रेनर्स के अलावा खासतौर पर बैंक ऑफ़ इंडिया के आरसीटी डायरेक्टर आर.सेठी भी मौजूद थे." ट्रेनिंग के बाद सभी गांव में महिलाओं से संपर्क शुरू कर दिया है. इस प्रोजेक्ट को लेकर आजीविका मिशन की जिला परियोजना प्रबंधक शीला शुक्ला कहती हैं -" <em>हमने अपने समूहों की मदद और दूसरे विभागों की मदद से पात्र महिलाओं की सूची बना ली. उनको लाभ मिलने वाला है. गांव में महिलाओं को वित्तीय प्रबंधन सिखाना चुनौतीपूर्ण था,जिसे हमने स्वीकार किया. हम इसमें सफल होंगे.</em>"</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/fGvyx1RlRYM0rTAMEzdS.jpg" alt="financial literacy "></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>देवास के सोनकच्छ में मास्टर ट्रेनर्स महिलाओं ने फैशियल ट्रेनिंग ली (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार)</em></span></p>
<p>ऐसा माना जा रहा है कि प्रदेश के सभी 52 जिले में देवास ऐसा पहला जिला है जहां लाड़ली बहना योजना की स्वीकृत हुई एक हजार राशि के उपयोग के गुर भी सिखाए जा रहे हैं. इस पूरे अभियान पर कलेक्टर ऋषव गुप्ता कहते हैं - " <em>यह पूरी योजना बहुत जरूरतमंद महिलाओं के लिए है. यही वजह प्रयास हैं कि महिलाएं इस राशि का सही उपयोग कर सके. खुद की हेल्थ के साथ बच्चे और परिवार पहली प्राथमिकता हो. मुझे ख़ुशी है कि पात्र महिलाएं इस योजना के फाइनेंशियल मैनेजमेंट को समझने लगी है.  इस परिकल्पना को पूरे जिले की पात्र महिलाओं तक पहुंचाया जाएगा.</em>"</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Tue, 16 May 2023 18:06:57 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/bhavishya-kharch-yojna-imparted-lessons-on-financial-literacy-to-women]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/YgEBrH7L8boncMJwm249.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/YgEBrH7L8boncMJwm249.jpg"/></item></channel></rss>