<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ G 20]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/g-20</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/g-20" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Mon, 23 Oct 2023 12:00:38 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[पंचायत में हर महिला के हाथों में होगा काम ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shgs-getting-support-to-become-lakhpati-didi-1557200</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/BYmStct4HouviGRm8Rxw.jpg"><p style="text-align: justify;"><strong>केंद्र सरकार (Central Goverment)&nbsp;</strong> के <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/fourth-gender-samvaad-jointly-organized-by-day-nrlm-and-iwwage-1386588">ग्रामीण विकास मंत्रालय</a>&nbsp;<strong>(Rural Devlopment Ministry) </strong>ने देशभर की ऐसी महिलाओं को टारगेट में लिया जो बेरोजगार हैं. <strong>SHG</strong> से जोड़कर कर इन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा.<strong> प्रधानमंत्री (Prime Minister) नरेंद्र मोदी&nbsp; (Narendra Modi)&nbsp;</strong> खुद इस प्रोजेक्ट पर अपनी निगाह रखे हुए हैं.&nbsp;</p>
<h2 style="text-align: justify;"><strong>दो करोड़ दीदियां शुरू में होंगी लखपति&nbsp;</strong></h2>
<blockquote>
<p><strong><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/women-self-help-group-will-get-new-opportunities-with-this-drone-training-in-gwalior-mp-1520462">स्वयं सहायता समूह</a> (Self Help Group)</strong> से जुडी महिलाओं की आमदनी कम से कम दस हजार रुपए महीना हो. यह फोकस किया जा रहा है. <strong>पीएम (PM) <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/farmers-in-alwar-to-use-drones-for-fertilizer-sprinkling-1423491">नरेंद्र मोदी</a> (Narendra Modi)</strong>&nbsp;ने कहा-<em> "महिलाओं की कमाई लगातार बढ़ रही. स्वयं सहायता समूह की मदद से कृषि और गैर कृषि क्षेत्र के कारोबार कर अपनी कमाई कर रही. इसे और आगे बढ़ाना है.मैं चाहता हूं कि देशभर में दो करोड़ लखपति दीदी यानि इन सदस्यों की महीने की कमाई कम से कम दस हजार रुपए तक पहुंचाना है."&nbsp;</em></p>
</blockquote>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em><img alt="shg chhatarpur new" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/500x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/vSBYy7KEQEabAerjGMfZ.jpg" style="width: 500px;" class="center"></em></span></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>गैर कृषि काम में अगरबत्ती बना रहीं SHG महिलाएं&nbsp; (Images: Ravivar )</em></span></p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>मार्केटिंग चेन से जुड़ेंगे SHG&nbsp;</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">किसी <strong>Self Help Group </strong>को मजबूत करने के लिए उसके बनाए प्रोडक्ट्स को सही दाम मिलाना चाहिए<strong>. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री (Central Rural Devlopment Minister)</strong> <strong>गिरिराज सिंह (Giriraj Singh)</strong> ने बताया- <em>"गांवों में जिन परिवारों के पास रोजगार नहीं है, उन परिवार की कम से कम एक महिला सदस्य को समूह से जोड़कर कृषि या गैर कृषि कारोबार से जोड़ा जाए. उनके उत्पादों को मार्केट चेन से जोड़ने के लिए सरकार काम कर रही है. इस प्रक्रिया से प्रोडक्ट्स बिकेंगे और महिला सदस्य को अर्थक मजबूती मिलेगी."</em></p>
<h3 style="text-align: justify;"><strong>G 20 में भी महिला सशक्तिकरण पर फोकस</strong></h3>
<p style="text-align: justify;">हाल ही में हुए<strong> G 20 </strong>सम्मलेन में भी सभी देशों का फोकस<strong> <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/president-murmu-met-tribal-shg-women-in-srinagar-1520301">महिला सशक्तिकरण</a> (Women Empowerment)</strong> रहा. <strong>भारत (Bharat)</strong> और <strong>पीएम (PM) मोदी (Modi)</strong> ने इसे लीड किया. केंद्र &nbsp;और राज्य सरकारें प्रयास कर रहीं कि पात्रता के आधार पर किसी न किसी बीमा योजना का लाभ समूह की महिलाओं को जरूर मिले. साथ ही उनके आवास, शौचालय और दूसरी योजनाओं का लाभ भी मिले.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Mon, 23 Oct 2023 12:00:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shgs-getting-support-to-become-lakhpati-didi-1557200]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/BYmStct4HouviGRm8Rxw.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/BYmStct4HouviGRm8Rxw.jpg"/></item><item><title><![CDATA['जनजाति भाषा और परंपरा को संजोना लेखकों का कर्तव्य': मुर्मू ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/at-unmesh-utkarsh-president-murmu-said-writers-need-to-preserve-tribal-tradition</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8XTXEdQSJi6oYi0clG4p.jpg"><h1><strong>जनजाति भाषा और परंपरा को संजोना लेखकों का कर्तव्य : मुर्मू</strong>&nbsp;</h1>
<p>"<strong>जनजाति भाषा (Tribe Language) </strong>और <strong>परंपरा </strong>(Tradition) को संजोना लेखकों का कर्तव्य है. इसे संरक्षित करना चाहिए.&nbsp;<strong>साहित्य (Literature)</strong> जुड़ता और जोड़ता है. <strong>सांस्कृतिक</strong> <strong>(Culture)</strong> धरोहर की तरफ अभी <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/role-of-women-in-water-sanitation-and-hygiene">देश</a> में बहुत ध्यान दिया जा रहा है. भारत को इस साल <strong>जी-20 (G 20) </strong>के आयोजन का मौका दिया गया.<strong>रवींद्र नाथ टैगोर</strong> <strong>(Rabindranath Tagore)&nbsp;</strong>की एक कविता में ज़िक्र है- जिसमें साहित्य ही सत्य का संभाव है." यह बात <strong>राष्ट्रपति (President)</strong> <strong>द्रोपदी<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/being-a-woman-or-a-tribal-not-a-disadvantage-says-president-murmu-while-adressing-shg-conference"> मुर्मू </a>(Dropadi Murmu) </strong>ने<strong> भोपाल</strong> <strong>(Bhopal)</strong> में आयोजित<strong> उन्मेष-उत्कर्ष</strong> आयोजन में बतौर मुख्य अतिथि कही.उन्होंने कहा-<em> "साहित्य आईना दिखाता है. साहित्य ने मानवता को बचा रखा है. साहित्य वह माध्यम से जिससे अपनी भावनाओं को व्यक्त किया जा सकता है."</em><br><strong>साहित्य अकादमी </strong>और<strong> संगीत-नाटक अकादमी</strong> का यह आयोजन 6 अगस्त तक आयोजित होगा. &nbsp;</p>
<h2><strong>जनजाति समुदाय की धरती मध्यप्रदेश</strong>&nbsp;</h2>
<p><strong><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/president-draupadi-murmu-applauds-the-success-of-kudumbshree-shg-in-kerala">राष्ट्रपति</a> मुर्मू</strong> <strong>(Murmu)</strong> ने आगे कहा- "साहित्य ने मानवता को बचा रखा है. साहित्य वह माध्यम से जिससे अपनी भावनाओं को व्यक्त किया जा सकता है. हमारे यहां 700 से ज्यादा जनजाति&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/pm-modi-g20-ministerial-conference-on-women-empowerment">समुदाय</a> और उससे अधिक भाषाएं हैं. मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा जनजाति समुदाय के लोग रहते. साहित्य-कला-संस्कृति के ऐसे आयोजन यहां होना होना चाहिए. संथाली और उड़िया मेरी भाषा रही. अब देश की हर भाषा मेरी है. संथाली में प्रभुनाथ और रामदास जैसे साहित्यकारों ने अच्छा लिखा. अच्छे साहित्य का अनुवाद दूसरी भाषाओं में भी होना चाहिए." उन्होंने <strong>जयशंकर प्रसाद</strong>,<strong> बंकिमचंद्र </strong>जैसे रचनाकारों का भी ज़िक्र किया.</p>
<p><img alt="President Murmu sahitya" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/542x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Lf6JSZ2n2s3Po44qCOyT.JPG" style="width: 542px;"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>&nbsp;भोपाल में उन्मेष-उत्कर्ष आयोजन के एक दिन पहले मुख्य मार्गों से कलाकारों ने कला यात्रा निकाली (Image Credit :Mujeeb Faruqui)&nbsp; &nbsp;</em></span></p>
<h3>भारत का एक-एक पत्थर शालिग्राम</h3>
<p><strong>राष्ट्रपति मुर्मू</strong> ने कहा - <em>"उन्मेष का अर्थ आंखों का खुलना और जागरण भी होता है. स्वतंत्रता संग्राम में साहित्यकारों ने अपनी भूमिका निभाई. भारत का एक एक पत्थर भगवान शालिग्राम है और एक एक स्थान जगन्नाथपुरी है."</em><br>इस मौके पर <strong>मुख्यमंत्री (CM)</strong> <strong>शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan)&nbsp; </strong>ने कहा -"हमारे यहां जब वेद और रिचाएं रच दी गई थीं, तब दुनिया में कोई सोच नहीं सकता था.उन्मेष और उत्कर्ष जैसे आयोजन सारी दुनिया को एक करने में सक्षम होते हैं. <strong>राज्यपाल (Governor)</strong> <strong>मंगूभाई</strong> <strong>पटेल</strong> <strong>(Mangubhai Patel)</strong> ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया.</p>
<h3>भोपाल में जुटे 103 भाषाओं के 575 लेखक शामिल&nbsp;</h3>
<p><strong>भोपाल</strong> में आयोजित इस <strong>साहित्य-कला </strong>उत्सव में 103 भाषाओं के 575 <strong>लेखक (Writer)</strong> शामिल हुए. <strong>भोपाल </strong>में देशभर के 36 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के जनजाति व लोक कलाकार ने भाग लिया. इस अवसर पर <strong>साहित्य</strong> और <strong>संस्कृति एकेडमी </strong>के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय संयुक्त सचिव और <strong>संस्कृति मंत्री (Culture Minister)</strong> <strong>उषा ठाकुर</strong> <strong>(Usha Thakur)</strong> भी मौजूद थीं. <strong>मध्यप्रदेश साहित्य एकेडमी</strong> के <strong>अध्यक्ष विकास दवे (Vikas Dave) </strong>ने कहा- <em>"यह हमारे प्रदेश के लिए गर्व की बात है, जहां वैश्विक स्तरीय आयोजन हो रहा.यहां देशभर के साहित्य और संस्कृति से जुड़े लोगों की प्रस्तुति को देखने का अवसर मिलेगा."</em> राष्ट्रपति के सामने लोक संस्कृति प्रस्तुति भी दी गई. &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 03 Aug 2023 17:04:44 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/at-unmesh-utkarsh-president-murmu-said-writers-need-to-preserve-tribal-tradition]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8XTXEdQSJi6oYi0clG4p.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8XTXEdQSJi6oYi0clG4p.jpg"/></item><item><title><![CDATA[G-20 देशों में महिला लीडर्स की चुनौतियां ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/idssues-faced-by-working-women-in-g20-nations</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xNwV8Ukj0akwTIeRHLx2.jpg"><p>ग्रुप ऑफ ट्वेंटी या G-20 ने महिलाओं की आर्थिक आज़ादी के मुद्दे को ग्लोबल प्लेटफॉर्म दिया है. सदस्य देश साथ मिलकर इस विषय पर प्लानिंग और ज़मीनी स्तर पर बदलाव लाने का काम कर रहे है. महिलाओं के रोज़गार, श्रम बल भागीदारी, वर्कप्लेस सेफ्टी,और रिटायरमेंट जैसे मुद्दों पर चर्चा कर नीतियां बनाई जा रही है. सभी G-20 देशों की सामाजिक-राजनीतिक स्थिति अलग है, जिसकी वजह से हर देश की अपनी चुनौती है.</p>
<p>G-20 सदस्य देशों में शामिल भारत, जर्मनी, मैक्सिको, रूस और सऊदी अरब के इंडस्ट्रियल स्थिति को समझते है और इन देशों में महिलाओं के लीडर बनने के सफर में आने वाली चुनौतियों को समझते हैं -</p>
<p>इंडिया <br>मास्टरकार्ड इंडेक्स ऑफ वीमेन एन्त्रेप्रेंयूर्स 2021 ने भारत को 65 देशों में 57वें स्थान पर रखा. रिपोर्ट के अनुसार, जब देश में महिला उद्यमी होने की बात आती है, तो भारत अपने साथियों से काफी पीछे है. लैंगिक भेद-भाव और सांस्कृतिक बंदिशें महिलाओं को उद्यमी बनने से रोकती  हैं. फंड की कमी, कॉम्पिटिशन का डर, या बराबरी के अवसर न मिलने पर वे अपने छोटे बिज़नेस का विस्तार नहीं कर पाती. इस दिशा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भारत को उच्च शिक्षा के अवसर और महिला उद्यमियों की वित्तीय संसाधनों तक पहुंच को बढ़ाना होगा, सिंगल विंडो क्लीयरेंस, टैक्स ब्रेक जैसे उपाय भी लागू करने होंगे. कम आय वाले वर्ग की महिलाएं SHG के ज़रिये न केवल आर्थिक आज़ादी, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के लक्ष्य को भी पूरा कर रही हैं. दूसरे विकासशील देश भी SHG के ज़रिये महिलाओं की आर्थिक क्रांति को बढ़ावा दे सकते हैं. </p>
<p>सऊदी अरब<br>कई सालों तक, दुनियाभर में महिला कार्यबल भागीदारी की सबसे कम दर सऊदी अरब में थी. 2018 में, केवल 19.7% सऊदी महिलाएं वर्कफोर्स का हिस्सा थीं. 2011 से पहले, महिलाओं को कई व्यवसायों में काम करने की अनुमति नहीं थी और उन्हें यात्रा करने, काम करने या शादी करने के लिए पुरुष अभिभावक से अनुमति लेनी पड़ती थी. पिछले कुछ सालों में, सऊदी सरकार ने कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई नई पहलों की शुरुआत की. सऊदी अरब सरकार के अनुसार, 2022 में काम करने वाली महिलाओं की संख्या "राज्य के इतिहास में सबसे ज़्यादा" हो गई. 2016 में लॉन्च हुई विजन 2030 योजना का लक्ष्य सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था की तेल निर्यात पर निर्भरता कम करना और सामाजिक और सांस्कृतिक सुधारों को बढ़ावा देना है. जिसके लिए ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को वर्क फाॅर्स में शामिल करना है. एमएचआरडी ने प्रेस रिलीस में बताया कि मार्च 2022 में 27.7% सऊदी महिलाएं शिक्षा क्षेत्र में और 17.7% खुदरा और थोक क्षेत्रों में काम कर रही थीं. ये दो ऐसे क्षेत्र हैं जहां महिलाओं की भागीदारी को आसानी से बढ़ाया जा सकता है. </p>
<p>रूस <br>फेडरल स्टेट स्टैटिस्टिकल एजेंसी के अनुसार,2020 में 47.5% रूसी महिलाएं कार्यबल का हिस्सा थीं. पुरुषों की तुलना में शिक्षा का स्तर ज़्यादा होने के बावजूद, रूसी महिलाओं के निम्न-स्तर और कम-वेतन वाली नौकरियों में काम करने की संभावना ज़्यादा है. वे पुरुषों की तुलना में औसतन लगभग 30% कम पैसा कमाती हैं. इसकी वजह लैंगिक भेदभाव है. जुलाई 2019 में, रूसी सरकार ने नीतियों में बदलाव किये, जिसने महिलाओं के लिए 350 से ज़्यादा नौकरियों के रास्ते खोले. 2021 से, महिलाओं को ट्रक और ट्रेन ड्राइवर के रूप में काम करने के साथ-साथ नौसेना में सेवा करने की अनुमति दी गई. पहले 456 काम महिलाओं के लिए वर्जित थे, उनमें से अब केवल 100 ही पुरुषों के लिए सीमित किये गए हैं. </p>
<p>एविटो जॉब्स के एक शोध ने बताया कि, अधिकांश रूसी पुरुष और महिलाएं अभी भी पारंपरिक रूप से "महिला" या "पुरुष" व्यवसायों को तलाशते हैं और पुरुषों के तुलना में महिलाएं अभी भी कम वेतन की अपेक्षा रखती हैं. अनुमान लगाया जा रहा हैं कि जागरूकता बढ़ने के साथ सामाजिक बदलाव देखा जा सकेगा. </p>
<p>जर्मनी <br>जर्मनी में महिलाओं में उद्यमशीलता हाल के वर्षों में लगातार बढ़ रही है, हालांकि व्यापार जगत में लैंगिक समानता के मामले में अभी भी सुधार की गुंजाइश है. जर्मन स्टार्टअप मॉनिटर के अनुसार, जर्मनी में महिला फाउंडर्स की संख्या 20% तक बढ़ गई है, और 37% संस्थापक टीमों में कम से कम एक महिला ज़रूर शामिल है, लेकिन वे काफी कम प्रतिनिधित्व करती हैं. महिलाओं के व्यवसायों को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे कि फंडिंग तक सीमित पहुंच और लीडरशिप वाले पदों पर प्रतिनिधित्व की कमी. फेडरल मनिस्ट्री ऑफ इकनॉमिक अफेयर्स और फेडरल मनिस्ट्री ऑफ फेमिली अफेयर्स के ज़रिये, जर्मन सरकार महिला उद्यमियों के लिए धन के साथ-साथ बिज़नेस शुरू करने के लिए सहायता करता है. जर्मन एसोसिएशन ऑफ वूमेन एंटरप्रेन्योर्स जैसे कई गैर-लाभकारी संगठन व्यवसाय में महिलाओं के लिए प्रशिक्षण, सलाह और नेटवर्किंग में सहायता देने का काम करते हैं. इन सभी पहलों के ज़रिये बिज़नेस ट्रेंड में बदलाव आ रहा है. </p>
<p>मैक्सिको<br>नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड जियोग्राफी के अनुसार, मेक्सिको में महिलाओं के व्यवसायों की संख्या में 27% की बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, अभी भी 45% पुरुषों की तुलना में, मेक्सिको में सिर्फ 29% महिला उद्यमियों की वित्तीय सेवाओं तक पहुंच है. महिला उद्यमिता का समर्थन करने के लिए, मैक्सिकन सरकार ने दो कार्यक्रम शुरू किए: महिला उद्यमिता के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम और महिला उद्यमियों के लिए सहायता कार्यक्रम. दोनों कार्यक्रमों को मैक्सिको में महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसायों को शुरू करने ,उनके विकास और संसाधनों तक पहुंच को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इनके ज़रिये 65 हज़ार महिला उद्यमियों को मार्केटिंग, फाइनेंस और मैनेजमेंट में ट्रेनिंग दी है. आगे और भी महिलाओं को बिज़नेस की दुनिया में आगे बढ़ने में मदद करने के लिए प्रयास जारी हैं, जिससे इन आंकड़ों में बदलाव आ सकेगा. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Mon, 08 May 2023 17:46:31 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/idssues-faced-by-working-women-in-g20-nations]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xNwV8Ukj0akwTIeRHLx2.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xNwV8Ukj0akwTIeRHLx2.jpg"/></item><item><title><![CDATA[E-शक्ति से SHG बने शक्तिशाली ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/shg-strenghthened-by-shg</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/K5eogJslwxbPHwSZ1tGR.jpg"><p>चाहे यूनियन बजट हो या देश के प्रधानमंत्री, 2023 में महिला सशक्तिकरण का मंत्र SHGs ही हैं. करीब 3 दशक पहले शुरू की गई इस पहल को अब हर तरफ से मिल रही है स्वीकृति, सराहना और समर्थन. देशभर में मौजूद  81 लाख से भी ज़्यादा SHGs महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को आगे बढ़ा रहे हैं . साथ ही दे रहे हैं महिलाओं को अर्थ व्यवस्था में भागीदारी बनने का मौका. हाल ही में मिली G -20 की अध्यक्षता के तहत भारत, आर्थिक समावेशिता के मुद्दे को महिलाओं तक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के ज़रिये पहुंचाना चाहता है. आज दुनियाभर में जिस महिला आर्थिक डिजिटलीकरण की चर्चा है, उसकी शूरुआत भारत में साल 2015 में ही हो गई  थी. </p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विज़न को मद्देनज़र रहते हुए साल 2015 में NABARD ने 'इ-शक्ति' प्लेटफॉर्म को लांच किया. इस प्लेटफॉर्म से आज 1.27 करोड़ SHGs जुड़े हुए हैं. NABARD ने देशभर में लाखों SHGs स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. लेकिन इनमें से कई  ऐसे SHGs थे जो बैंक से लिए गए लोन के दस्तावेज़ और बहिखातों का सही मायने से रखरखाव नहीं कर पा रहे थे. SHGs को लोन मिलने में अड़चन का यह मुख्य कारण बन गया था.</p>
<p>इस मुसीबत के समाधान के तौर ऊपर उभरा  'इ-शक्ति प्लेटफार्म' (e-shakti). SHG सदस्यों के आर्थिक डेटा को इकट्ठा कर उसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर स्टोर करके रखना इ-शक्ति पहल का उद्देश्य था. सिर्फ़ 'एक क्लिक' से ऑनलाइन डेटा तक आसानी से पहुंचा जा सकता है जो इस प्लेटफार्म का USP है. महाराष्ट्र के धुले और झारखण्ड के रामगढ जिलों से शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट आज देश के 100  जिलों  और 22  राज्यों तक अपनी पहुंच बना चुका हैं.<br>  <br>'इ -शक्ति' प्लेटफार्म स्वसहायता समूहों और उनके सदस्यों की बचत, उधार,उपस्थिति,  क्रेडिट इतिहास, लाभ- हानि खाता , बैलेंस शीट जैसी आर्थिक रिकार्ड्स को अपने वेबसाइट पर (मैनेजमेंट इनफार्मेशन सिस्टम) MIS रिपोर्ट्स के रूप में प्रकाशित करता है. एक क्लिक में मिल जानी वाली  MIS रिपोर्ट्स और ग्रेडिंग सिस्टम ने बैंकों के लिए लोन संबंधी निर्णय लेना आसान कर दिया है. वही SHG महिलाओं के लिए भी बहीखाते का रखराव करना और बैंको से लोन लेना सरल कर दिया. वेबसाइट से शुरू हुआ यह सफर अब मोबाइल ऍप  के ज़रिये ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं से जुड़ा गया है जो मैसेज के ज़रिये अलर्ट भी भेज देता है.</p>
<p>फेज - 4 के तहत ई -शक्ति योजना जल्द ही 150 जिलों में शुरू होने जा रही है. इ-शक्ति प्लेटफार्म  SHG महिलाओं के लिए आर्थिक आज़ादी को अग्रसर करने में मदद कर सकता है और साथ ही G -20 के महिला सशक्तिकरण और आर्थिक समावेशिता के विज़न को भी सहजता से प्राप्त करने में मूल कारक बन सकता  है. 'SHG-BLP' जिस तरह दुनिया की सबसे बड़े माइक्रोफाइनेंस प्रोजेक्ट के तौर पर उभरा है वैसे ही ई-शक्ति भी दुनिया की सबसे बड़ी फाइनेंशियल इंक्लूसिव प्रोजेक्ट के तौर पर उभरने की क्षमता रखता है लेकिन इसके लिए SHG महिलाओं का समर्थन, उनकी जागरूकता और बैंकों का सहयोग देना ज़रूरी हैं.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Mon, 20 Feb 2023 16:06:05 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/shg-strenghthened-by-shg]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/K5eogJslwxbPHwSZ1tGR.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/K5eogJslwxbPHwSZ1tGR.jpg"/></item><item><title><![CDATA[आरंभ से आज... SHG के साथ NABARD ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/nabard-supporting-shg</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6uwPWfDEe6waipgrx61j.jpg"><p>2023 SHGs के लिए सबसे महत्वपूर्ण साल है. जहां 2023 के बजट में और G 20 के कोर एजेंडा में सरकार SHG के सशक्तिकरण पर ज़ोर दे रही है वही इस महिला आर्थिक आज़ादी की क्रांति को शुरू हुए 30 साल हो गए हैं. किसी भी सामाजिक और आर्थिक क्रांति के लिए 30 साल का वक़्त भले ही छोटा है लेकिन इन 30 सालों में 81 लाख SHGs देशभर में बनाए गए हैं जिनमें से 84% महिला सदस्य हैं. ग्रामीण विकास के उद्देश्य से शुरू हुआ ये सफर आज ग्रामीण अंचल की महिलाओं के सशक्तिकरण का सबसे कारगर माध्यम बन चूका है.</p>
<p>भारत में SHG को अनूठा स्वरूप मिला और यह मुहीम विश्व की सबसे बड़ी माइक्रोफाइनेंस प्रोग्राम के तौर पर पूरी दुनिया में छा गई. कैसे हुई इस सफर की शुरुआत ?  कैसे हासिल किया भारत ने यह मुकाम ? यह तो बहुत लंबी दास्तान हो जाएगी लेकिन SHG क्रांति को भारत में खड़ा करने में NABARD ne महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.  </p>
<p>1982 का वो साल जब 'नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चरल एंड रूरल डेवलपमेंट' उर्फ़ NABARD को स्थापित किया गया. NABARD  का उद्देश्य था ग्रामीण इलाकों की आर्थिक स्थिति में बदलाव लाना. इस मिशन को मद्देनज़र रखते हुए वर्ष 1992 में NABARD ने 'सेल्फ हेल्प ग्रुप-बैंक लिंकेज प्रोग्राम' की शुरआत की. इस 'SHG - BPL' मॉडल का मुख्य लक्ष्य गांवों और कस्बों को आर्थिक रूप से मज़बूत करने के लिए SHGs को बैंको से जोड़ना है. </p>
<p>500 SHGs से शुरू हुआ यह सफ़र देखते ही देखते 81 लाख SHGs में तब्दील हो गया. जिसने देश के 10 लाख घरों को समर्थ और सक्षम बनाया. इस माइक्रोफाइनेंस प्रोजेक्ट की सफलता के पीछे का राज़ जानने के लिए कई सारे रिसर्च पेपर्स और थीसिस लिखे गए.  रिसर्च से पता चला की  'SHG - BPL' प्रोग्राम अपने 'कॉस्ट-इफेक्टिव मैकेनिज्म' के कारण आसानी से गरीब से गरीब तबके के लोगों तक आर्थिक सेवाएं उपलब्ध करवा पाता है. इतना ही नहीं माइक्रोफाइनेंस की दुनिया में आया यह बदलाव NABARD और अनेक संघठनो के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है.</p>
<p>कई NGOs ने 'सेल्फ हेल्प ग्रुप प्रमोटिंग इंस्टीटूशन' (SHPI) की भूमिका निभाते हुए SHGs को बैंको से जोड़ने में मदद की. NGOs की इस पहल से प्रेरित होकर NABARD ने भी 'सेल्फ हेल्प ग्रुप प्रमोटिंग इंस्टीटूशनस ' (SHPI) बनाना शुरू कर दिये.  SHPI से जुड़ने  के लिए  NABARD ने  ग्रामीण वित्तीय संस्थानों, फार्मर क्लब , इंडिविजुअल रूरल वालंटियर्स को 'प्रोत्साहन अनुदान सहायता' देना शुरू किया. SHGs के साथ मिलकर काम कर रहे बैंको को  100% पुनर्वृत्ति भी दी गयी. </p>
<p>स्वसहायता समूह बनाने के बाद SHG सदस्यों के लिए ट्रेनिंग वर्कशॉप्स, सेमिनार्स आयोजित किये गए. समूह की महिला सदस्यों को रोज़गार दिलवाने के लिए उन्हें नाबार्ड माइक्रो एंटरप्राइज डेवलपमेंट प्रोग्राम और लाइवलीहुड - एंटरप्राइज डेवलपमेंट प्रोग्राम्स से जोड़ा गया. SHGs में समय - समय पर  उभरने वाली मुश्किलों को सुलझाने के लिए नाबार्ड ने  ग्रुप सेविंग्स , जॉइंट लायबिलिटी ग्रुप्स का गठन , केश क्रेडिट का सैंक्शन जैसे बदलाव जारी किये. </p>
<p>कोरोना काल में SHGs का काम रुके नहीं इसलिए 'इ-शक्ति ' प्लेटफार्म का भी गठन किया गया. वही SHGs ने भी मास्क्स और सांइटिज़ेर्स बनाकर NABARD के पिछले ३० सालों की मेहनत को सरकार और समाज के सामने प्रस्तुत किया. उस विषम काल में SHG और NABARD की महत्ता को देश दुनिया ने न केवल समझा बल्कि कोरोना काल के बाद SHG को प्रोत्साहित भी किया.</p>
<p>आज SHG को आगे बढ़ाने का श्रेय सरकार के साथ NABARD जैसे संस्थानों को जाता है. SHG क्रांति की रीड की हड्डी बैंक लिंकेज प्रोग्रम की शुरुआत जहां NABARD ने करी वहीं कैटालिटिक केपिटल फंड भी मुहैया कराएं. इस तरह महिला को देश , समाज  और घर पर भी स्थान दिलाने वाले SHG आंदोलन के प्रारंभ से लेकर आज प्रणेता के रूप में NABARD मौजूद है.</p>]]>
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