<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ Gender Empowerment]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/gender-empowerment</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/gender-empowerment" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 07 Jul 2023 11:36:34 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[जनता की शक्ति का दुर्गा शक्ति को नमन ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/ias-durga-shakti-nagpal-who-worked-for-the-society</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/YZq8VHMmIusfNLvLsvzm.png"><p><span>महिला एक ऐसा स्तम्भ, जो घर के साथ साथ समाज को संभालती है. इस तरह समाज की प्रगति में महिलाओं का बहुत अधिक योगदान है. जब महिला समाज के लिए काम करती है तो उनकी भागीदारी सबसे ज़्यादा होती है. ऐसे ही नारी शक्ति का एक उदाहरण है <strong>दुर्गा शक्ति नागपाल</strong> <strong>(Durga Shakti Nagpal)</strong> जिन्होंने समाज के हित में बिना किसी लालच के काम किया, पर कुछ लोगो को ये बात रास नहीं आयी. इस तरह दुर्गा शक्ति राजनीती का भी शिकार हुई, उन्हें निलंबित भी किया गया पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने समाज के लिए सच्चाई, ईमानदारी और नेकदिली से काम किया. जब उन पर मुश्किलों का तूफान उमड़ा, तब उन्हें जनता का साथ मिला, जिसके आगे पूरा सिस्टम ही हिल गया और उन्हें बहाल करना पड़ा.</span><br><br><span>दुर्गा शक्ति का जन्म छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के रायपुर (Raipur) जिले में 25 जून 1985 को हुआ. उनके पिता <strong>इंडियन स्टैटिस्टिकल सर्विस (Indian Statistical Service) </strong>में अधिकारी थे जहा उन्हें देश सेवा, ईमानदारी और पूरी निष्ठा से कार्य करने के लिए <strong>राष्ट्रपति द्वारा पदक से सम्म्मानित </strong>भी किया गया और उनके दादाजी पुलिस अधिकारी थे, जिनकी <strong>दिल्ली के सदर बाजार में 1954 में सेवा के दौरान हत्या कर दी गयी </strong>थी. दुर्गा शक्ति का जन्म एक ऐसे घर में हुआ जहाँ उन्हें देश सेवा, समाज के लिए ईमानदारी से काम करना और सच्चाई के पथ पर चलना सिखाया गया.</span><br><span class="im"><br><strong>UPSC (Union Public Service Commission)</strong> की परीक्षा पास करने के बाद उन्हें <strong>पंजाब कैडर (Punjab Cadre)</strong> मिला और<strong> मोहाली (Mohali) </strong>में उनकी पोस्टिंग हुई, वहाँ उन्होंने <strong>भूमि घोटाले (Land Scam) </strong>को उजागर किया. <strong>ग्रेटर नॉएडा (Greater Noida)</strong> में पोस्टिंग के समय उन्होंने <strong>रेत माफिया</strong> के खिलाफ कार्यवाई की जहां उन्होंने अवैध खनन के खिलाफ ऑपरेशन चला कर 15 लोगो को गिरफ्तार किया और साथ ही 24 डम्पर ट्रक और 300 ट्रॉलियां जब्त की.<br><br>वर्ष 2012  में दुर्गा शक्ति नागपाल की पोस्टिंग गौतम बुद्ध नगर में SDM के पद पर की गयी, वहां <strong>यमुना नदी से ग्रेवल माफिया (Gravel Mafia) द्वारा अवैध खनन</strong> किया जा रहा था और इसकी भनक दुर्गा शक्ति (Durga Shakti) को लगी, जहा उन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए खुद की मौजूदगी में अचानक निरीक्षण किया और 30 ट्रको को जब्त कर लिया और अवैध खनन को जड़ से ही खत्म कर दिया.<br><br></span><span>ग्रेटर नॉएडा के ही एक गांव में  काम चल रहे मस्जिद निर्माण की दिवार गिराने के आरोप में राजनीतिक कारणों से दुर्गा शक्ति को निलंबित कर दिया गया. उनके खिलाफ चार्जशीट दायर की गयी जिसमे कहा गया की उन्हें दिवार गिराने का कोई हक़ नहीं था. उनके निलंबन का लोगो ने बड़े पैमाने में विरोध किया जिसमे <strong>किरण बेदी </strong>जैसे कई जानी मानी हस्तिया और नेता शामिल थे. लोगो का साथ और जनता के समर्थन की वजह से उनका निलंबन 22 सितंबर 2013 को रद्द कर दिया गया और अक्टूबर में कानपुर देहात में जॉइंट मजिस्ट्रेट (Joint Magistrate) के तौर पर नियुक्ति मिली.</span><br><span class="im"><br><strong>आईएएस (Indian Administrative Service) अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल (IAS Durga Shakti Nagpal)</strong> <strong>जेंडर एम्पॉवरमेंट (Gender Empowerment) </strong> का जीता जगता उदाहरण है. अपने नाम के अनुरूप ही इन्होंने समाज में में फैली बुराइयों जैसे ग्रेवल माफियों के गैरकानूनी कब्ज़े को खत्म किया, राजनीती का भी शिकार हुई, उन्हें निलंबित भी कर दिया गया पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. दुर्गा शक्ति ने समाज के लिए सच्चाई, ईमानदारी और नेकदिली से काम किया, जब उनपर मुश्किलों का तूफान उमड़ा तब उन्हें जनता का साथ मिला जिसके आगे पूरा सिस्टम ही हिल गया और उन्हें बहाल करना पड़ा. </span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Fri, 07 Jul 2023 11:36:34 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/ias-durga-shakti-nagpal-who-worked-for-the-society]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/YZq8VHMmIusfNLvLsvzm.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/YZq8VHMmIusfNLvLsvzm.png"/></item><item><title><![CDATA[जनता की शक्ति का दुर्गा शक्ति को नमन ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/ias-durga-shakti-nagpal-who-worked-for-the-society</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/YZq8VHMmIusfNLvLsvzm.png"><p><span>महिला एक ऐसा स्तम्भ, जो घर के साथ साथ समाज को संभालती है. इस तरह समाज की प्रगति में महिलाओं का बहुत अधिक योगदान है. जब महिला समाज के लिए काम करती है तो उनकी भागीदारी सबसे ज़्यादा होती है. ऐसे ही नारी शक्ति का एक उदाहरण है <strong>दुर्गा शक्ति नागपाल</strong> <strong>(Durga Shakti Nagpal)</strong> जिन्होंने समाज के हित में बिना किसी लालच के काम किया, पर कुछ लोगो को ये बात रास नहीं आयी. इस तरह दुर्गा शक्ति राजनीती का भी शिकार हुई, उन्हें निलंबित भी किया गया पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने समाज के लिए सच्चाई, ईमानदारी और नेकदिली से काम किया. जब उन पर मुश्किलों का तूफान उमड़ा, तब उन्हें जनता का साथ मिला, जिसके आगे पूरा सिस्टम ही हिल गया और उन्हें बहाल करना पड़ा.</span><br><br><span>दुर्गा शक्ति का जन्म छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के रायपुर (Raipur) जिले में 25 जून 1985 को हुआ. उनके पिता <strong>इंडियन स्टैटिस्टिकल सर्विस (Indian Statistical Service) </strong>में अधिकारी थे जहा उन्हें देश सेवा, ईमानदारी और पूरी निष्ठा से कार्य करने के लिए <strong>राष्ट्रपति द्वारा पदक से सम्म्मानित </strong>भी किया गया और उनके दादाजी पुलिस अधिकारी थे, जिनकी <strong>दिल्ली के सदर बाजार में 1954 में सेवा के दौरान हत्या कर दी गयी </strong>थी. दुर्गा शक्ति का जन्म एक ऐसे घर में हुआ जहाँ उन्हें देश सेवा, समाज के लिए ईमानदारी से काम करना और सच्चाई के पथ पर चलना सिखाया गया.</span><br><span class="im"><br><strong>UPSC (Union Public Service Commission)</strong> की परीक्षा पास करने के बाद उन्हें <strong>पंजाब कैडर (Punjab Cadre)</strong> मिला और<strong> मोहाली (Mohali) </strong>में उनकी पोस्टिंग हुई, वहाँ उन्होंने <strong>भूमि घोटाले (Land Scam) </strong>को उजागर किया. <strong>ग्रेटर नॉएडा (Greater Noida)</strong> में पोस्टिंग के समय उन्होंने <strong>रेत माफिया</strong> के खिलाफ कार्यवाई की जहां उन्होंने अवैध खनन के खिलाफ ऑपरेशन चला कर 15 लोगो को गिरफ्तार किया और साथ ही 24 डम्पर ट्रक और 300 ट्रॉलियां जब्त की.<br><br>वर्ष 2012  में दुर्गा शक्ति नागपाल की पोस्टिंग गौतम बुद्ध नगर में SDM के पद पर की गयी, वहां <strong>यमुना नदी से ग्रेवल माफिया (Gravel Mafia) द्वारा अवैध खनन</strong> किया जा रहा था और इसकी भनक दुर्गा शक्ति (Durga Shakti) को लगी, जहा उन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए खुद की मौजूदगी में अचानक निरीक्षण किया और 30 ट्रको को जब्त कर लिया और अवैध खनन को जड़ से ही खत्म कर दिया.<br><br></span><span>ग्रेटर नॉएडा के ही एक गांव में  काम चल रहे मस्जिद निर्माण की दिवार गिराने के आरोप में राजनीतिक कारणों से दुर्गा शक्ति को निलंबित कर दिया गया. उनके खिलाफ चार्जशीट दायर की गयी जिसमे कहा गया की उन्हें दिवार गिराने का कोई हक़ नहीं था. उनके निलंबन का लोगो ने बड़े पैमाने में विरोध किया जिसमे <strong>किरण बेदी </strong>जैसे कई जानी मानी हस्तिया और नेता शामिल थे. लोगो का साथ और जनता के समर्थन की वजह से उनका निलंबन 22 सितंबर 2013 को रद्द कर दिया गया और अक्टूबर में कानपुर देहात में जॉइंट मजिस्ट्रेट (Joint Magistrate) के तौर पर नियुक्ति मिली.</span><br><span class="im"><br><strong>आईएएस (Indian Administrative Service) अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल (IAS Durga Shakti Nagpal)</strong> <strong>जेंडर एम्पॉवरमेंट (Gender Empowerment) </strong> का जीता जगता उदाहरण है. अपने नाम के अनुरूप ही इन्होंने समाज में में फैली बुराइयों जैसे ग्रेवल माफियों के गैरकानूनी कब्ज़े को खत्म किया, राजनीती का भी शिकार हुई, उन्हें निलंबित भी कर दिया गया पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. दुर्गा शक्ति ने समाज के लिए सच्चाई, ईमानदारी और नेकदिली से काम किया, जब उनपर मुश्किलों का तूफान उमड़ा तब उन्हें जनता का साथ मिला जिसके आगे पूरा सिस्टम ही हिल गया और उन्हें बहाल करना पड़ा. </span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Fri, 07 Jul 2023 11:36:34 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/ias-durga-shakti-nagpal-who-worked-for-the-society]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/YZq8VHMmIusfNLvLsvzm.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/YZq8VHMmIusfNLvLsvzm.png"/></item><item><title><![CDATA[फाइनेंसियल लिट्रेसी से महिलाओं को अवसर की शुरुआत ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-bringing-new-opportunities-to-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1rozRTs7i52UYk7fXs4G.jpg"><p><strong>जेंडर इक्वालिटी (Gender Equality), जेंडर पेरिटी (Gender Parity), जेंडर एम्पावरमेंट (Gender Empowerment) </strong>कि बातें तो सभी करते है पर इनके इम्प्लीमेंटेशन में कहीं ना कहीं कमी रह ही जाती हैं. इस तरह<strong> जेंडर फाइनेंस गैप (Gender Finance Gap) </strong>भी विश्व स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन उस पर काम कितना हो रहा है, यह सोचने का विषय है.<strong> महिलाएं जहां साइंस एंड टेक्नोलॉजी (Science and Technology), मेडिसिन (Medicine) </strong>जैसे क्षेत्रों में आगे तो बढ़ रही, लेकिन कामयाबी के यह रास्ते आज भी उनके लिए आसान नहीं है, जहां कई सेक्टर्स में समान अवसर नहीं मिलते तो अधिकतर क्षेत्रों में समान वेतन भी उन्हें नहीं मिल रहे.</p>
<p>जेंडर डायनामिक्स जहां समय के साथ थोड़े बहुत बदलते रहते हैं वही फाइनेंशियल संस्थानों (Financial Institutions) में जेंडर इक्वालिटी कैटेलिस्ट (Catalyst) या बैरोमीटर (Barometer) अभी भी निचले स्तर पर है. <strong>यह जेंडर बेस्ड फाइनेंस गैप तभी खत्म हो सकता हैं जब महिलाओं को वित्तीय सेवाएं (Financial Services) जैसे बचत, लोन (Loan), बिमा (Insurance),और वित्तीय संस्थानों के बारे में पूरा ज्ञान हो और उनकी भागीदारी इनमें बढ़ाई जाए .  </strong><br><br>फाइनेंशियल संस्थानों में महिलाओं के बिज़नेस जो की मुख्यतः SME (स्मॉल मीडियम इंटरप्राइजेज) होते है उन्हें बिज़नेस की कम समझ और स्मॉल बिज़नेस नेटवर्क होने के कारण, वह फाइनेंशियल सेवाओं का  पूरा फायदा नहीं उठा पाती.  इसी वजह से वह अपने बिज़नेस को आगे नहीं ले जा पा रही है. महिला उघमों को पुरुषों के मुकाबले बैंक खाते (Bank Account) रखने और फाइनेंशियल इंस्टीटूशन्स से लोन लेने में कम दरों में ब्याज की सुविधा प्रदान की जाती है लेकिन महिलाओं के पास पर्याप्त फाइनेंशियल ज्ञान ना होने के कारण वह इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पाती. यही वजह है कि महिला उद्यमियों को आज भी वर्किंग कैपिटल (Working Capital) का पूरा उपयोग और बिज़नेस लोन (Business Loan) लेने जैसे कामों में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. फाइनेंस के मसलों से दूरी धीरे धीरे डर और हिचक के रूप में सामने आती है, जिस वजह से फॉर्मल फैनेसियल इंस्टीटूशन्स (Formal Financial Institutions)तक उनकी पहुँच कम होती है.<br><br>महिलाओं के बिज़नेस में निवेश करने के पॉजिटिव प्रभाव हो सकते हैं, जैसे महिलाओं के लिए नई नौकरियों के रास्ते खुलेंगे, जेंडर इनक्वॉलिटी कम होगी और महिलाओं का ओवरऑल डेवलॅपमेंट होगा.<strong> भारत में सरकार ने  महिला उघमों को बढ़ावा देने के लिए स्वयं सहायता समूहों को CLF लोन लेने की सुविधा  प्रदान करती है, जिससे आज भारत दुनिया में सबसे बड़ा SHG बैंक लिंकेज मॉडल बन गया है, जिसमें 11  मिलियन से अधिक SHG बैंकिंग सेवाओं से जुड़े है. लोन की सुविधा मिलने से स्वयं सहायता समूहो में अलग अलग कार्य हो रहे हैं जैसे सिलाई, मशरुम कि खेती, अगरत्ती बनाना आदि. </strong>समूह की महिलाएं जो घर से बाहर भी नहीं निकलती थी आज वही महिलाएं बैंक सखी (Bank Sakhi), ऊर्जा देवी (Urja Devi) जैसे कार्य संभाल रही हैं. लोन की मदद से आज समूह की महिलाओं  ने अपने ही घर में सिलाई सेंटर शुरू कर लिया हैं. जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में भी बदलाव आ रहा हैं.    <span class="im"><br><br>जेंडर फाइनेंस गैप के खत्म करने के लिए कई  उपाय किये जा सकते है जैसे महिला स्वामित्य वाले SME (Small Medium Enterprises) की जरूरतों को पूरा करने वाले<strong> इनोवेटिव सेवाओं और उत्पादों को ला कर, सही प्रशिक्षण देकर, वरिष्ठ बैंकिंग भूमिकाओं और बोर्ड में महिलाओं को शामिल कर , व्यवसाय में महिलाओं के लिए एक सहायक नेटवर्क बनाने के लिए फाइनेंसियल तथा नॉन फाइनेंसियल संस्थानों के साथ सहयोग कर. </strong>इन उपायों  को लागु करके हम G20 और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्था महिलाओं के जेंडर एम्पावरमेंट को आगे बढ़ाकर और अधिक इंक्लूसिव इकोनॉमिक विकास प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है.</span></p>
<div class="yj6qo ajU"></div>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Tue, 04 Jul 2023 17:42:27 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-bringing-new-opportunities-to-shg-women]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1rozRTs7i52UYk7fXs4G.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1rozRTs7i52UYk7fXs4G.jpg"/></item><item><title><![CDATA[अगरबत्तियों के सुगंध से महकी SHG महिलाओं की ज़िन्दगी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/ujjain-shg-making-incense-sticks</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/mQI1H9Q0Sj7kIjN2XsMi.jpeg"><p><span><strong>भारत की सामाजिक और धार्मिक रीतियों में सुगंध का अपना अलग महत्व है. किसी भी पूजा,अनुष्ठान, समारोह या आयोजन में इस सुगंध को लेकर आती है अगरबत्ती (Incense Sticks)</strong>. हमारी भौतिकता (Materialism) और आध्यात्मिकता (Spirituality) के बीच में ब्रिज का काम करती है अगरबत्ती, जिनकी महक से पवित्र वातावरण बनता हैं. अगरबत्तियाँ आध्यात्मिक उपयोग  के साथ योग, ध्यान या सिर्फ अच्छे माहौल में भी काम ली जाती है .</span><br><span></span></p>
<p><span>अब ऐसी सात्विक महकदार और खुशनुमा चीज़ से देश की महिलाओं को कैसे अलग रखा जा सकता था. इसलिए महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (Swayam Sahayata Samuh) की मदद से ऐसी ही एक पहल उज्जैन (Ujjain) जिले में स्थित कुंगारा (Kungara) में की गयी. <strong>यहां के धनलक्ष्मी स्वयं सहायता समूह (Dhanlaxmi Swayam Sahayata Samuh) में, सहायक मार्गदर्शक संतोष अलावा और अध्यक्ष उषा दीदी के नेतृत्व में अगरबत्तियाँ बनाने का काम शुरू हुआ. इस समूह में अगरबत्तियाँ विभिन्न सुगंधों वाले पदार्थ  जैसे चंदन, गुलाब , मोगरा, पाइनएप्पल आदि से बनाई जाती हैं. इस समूह की शुरआत 2021 में हुई. समूह में १२ महिलाएं हैं जो अलग अलग कार्यभार संभाल रही है. कुछ महिलाएं अगरबत्ती प्रोडक्शन (Production) में, कुछ मार्केटिंग (Marketing), पैकेजिंग (Packaging) तथा कुछ डिस्ट्रीब्यूशन (Distribution) में अपनी पूरी लगन से काम कर रही है और महिला सशक्तिकरण (Gender Empowerment) का उदाहरण पेश कर रही है.</strong></span><br><br><span>Self Help Group (SHG) में जुड़ने से पहले महिलाएं बेरोजगार थी साथ ही उनकी और परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी. आज वही महिलाएं सिर्फ कमा रही है और अपने परिवार की स्थिति में सुधार भी कर रही है. SHG में जुड़ने के बाद ही यह महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बानी बल्क़ि उनमें आत्मविश्वास भी आया, क्योंकि एक वक़्त वह था जब यह महिलाएं घर से निकलने, बैंक जाने और लोगो से बातें करने की सोच भी नहीं सकती थी. आज वही महिलाएं अपने स्वयं सहायत समूह के सारे काम, हिसाब, खरीदी, बेचने जैसे काम खुद कर रही है. <strong>अगरबत्ती बनाने में लगने वाले हर सामान जैसे फूल, एसेन्स, मटेरियल लाना हो या पैकेजिंग का सामान लाना, सारा काम Self Help Group की महिलाएं अपने बलबूते पर कर रही है. </strong>अलग अलग संकुल में अगरबत्तियों का डिस्ट्रीब्यूशन भी खुद ही संभाल रही है.  आज वो न केवल अपने घर के ख़र्चों को संभाल रहीं है बल्कि परिवार के लिए टेलीविज़न, फ्रिज, बाइक आदि भी खरीद रही हैं.  </span><br><br><strong>यह समूह उदाहरण है की कैसे सफल ,सशक्त और सेल्फ डिपेंडेंट महिला, परिवार समाज और देश की स्थिति को बदलने में बड़ा योगदान कर सकती हैं या यूँ कहें की कैसे धनलक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपने आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और आत्मबल की सुगंध हर जगह फैला रही है . </strong></p>
<div class="yj6qo ajU"></div>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Sun, 02 Jul 2023 14:30:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/ujjain-shg-making-incense-sticks]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/mQI1H9Q0Sj7kIjN2XsMi.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/mQI1H9Q0Sj7kIjN2XsMi.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[जिस्म, दिमाग और रूह की चोट जारी है! ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/domestic-violence-marital-rape-and-male-gaze-is-rising-issue-in-india</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/NiH2gVXvsk5nvRXzlL5T.jpg"><p dir="ltr"><span>किसी भी तरह की हिंसा (violence) व्यक्ति समाज देश के लिए सही नहीं होती. समाज के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर हो रही हिंसा से देश दुनिया की मनोवृति का पता चलता है. महिलाओं के खिलाफ हो रही अलग अलग हिंसा चाहे घर में या बाहर, हर तरह से गलत और निंदनीय है. WHO द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्तर पर लगभग 3 में से 1 (30%) महिला ने अपने जीवनकाल में शारीरिक तथा यौन अंतरंग साथी हिंसा या गैर- साथी यौन हिंसा का शिकार होती है. हिंसा, महिला के शारीरिक, भावनात्मक, यौन और प्रजनन स्वास्थय पर नकारात्मक प्रभाव डालती  है. घरों में जब हिंसा या दुर्व्यवहार की बात आती है तो समाज का ध्यान परिवार के सदस्य पर नहीं आता.  एक महिला को अपने परिवार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए बहुत साहस की ज़रुरत होती है.</span><span>हमारा देश साक्षरता विज्ञान (Science) टेक्नोलॉजी (Technology) में लगातार बढ़ रहा है लेकिन इसके साथ महिलाओं के साथ हो रही हिंसा में भी लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है. यह ऐसा अपराध है जो रुक नहीं रहा. महिलाओं को कुरीतियों में बांधकर उनके साथ कई तरह के अत्याचार किये जाते है जैसे छेड़छाड़, एसिड अटैक (acid attack), घरेलु हिंसा (domestic violence), बलात्कार (rape), दहेज़ प्रथा (dowry system), भ्रूण हत्या (femicide) आदि. महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचारों का कारण यह समाज एवं इसकी कुरीतियाँ भी है. यह समाज लड़की के साथ गलत होने पर भी उस लड़की को ही दोष देता है.</span></p>
<p dir="ltr"><span>संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा 12 जून को जारी 2023 जेंडर सोशल नॉर्म्स इंडेक्स (GSNI) रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती हैं कि दुनिया भर में दस में से नौ पुरुष और महिलाएं, महिलाओं के बायसनैस रखते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक "<em>दुनियाभर में 69 प्रतिशत लोगो का मानना हैं की पुरुष बेहतर राजनितिक नेता होते हैं, और 40 प्रतिशत से अधिक लोग मानते हैं की पुरुष महिलाओं की तुलना में बेहतर व्यावसायिक अधिकारी बनते है. इसी रिपोर्ट के मुताबिक एक चौकाने वाला सच सामने आया हैं जिसमे  80 देशों के 25 प्रतिशत लोगो का मानना हैं की पतियों द्वारा पत्नियों  को पीटना जायज हैं </em>". लैंगिक सशक्तिकरण (Gender Empowerment) आज दुनियाभर में चर्चा का विषय है. </span><span>राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission For Women) ने 2022 में घरेलु हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा श्रेणी में 6900 से अधिक शिकायते दर्ज की है. महिलाओं के खिलाफ अपराधों की विभिन्न श्रेणियों में NCW द्वारा दर्ज की गयी 30900 से अधिक शिकायतों में से ये मामले लगभग 23 % थे. COVID - 19 महामारी के दौरान विभिन्न श्रेणियों में कुल शिकायतों की संख्या 2020 में लगभग 23700 से 30 % से अधिक बढ़कर 2021 में 30800 से अधिक हो गयी हैं. 2022 में अधिकतम शिकायतें तीन श्रेणियों में दर्ज हुई- दहेज़ सहित विवाहित महिलाओं के उत्पीड़न का मामला (15 %), घरेलु हिंसा (domestic violence) के खिलाफ महिलाओं की सुरक्षा (23 %), और सम्मान के साथ जीने का अधिकार सुरक्षित करने क लिये (31 %).</span></p>
<p dir="ltr"><span>दहेज़ प्रथा एक गंभीर सामाजिक बुराई है जिसके कारण समाज में महिलाओं के प्रति यातनाएँ और अपराध उत्पन्न हुए है और साथ ही में भारतीय वैवाहिक पद्धति प्रदूषित हुई है. हाल ही में इंदौर के देपालपुर जिले में दहेज़ की लालच में शादी के महज 17 दिन बाद ही पति ने पत्नी को मौत के घाट उतार दिया.</span></p>
<p dir="ltr"><span>एक लड़की के बलात्कार होने के बाद लोग बलात्कारों को गलत साबित करने और उनको सजा दिलाने के बजाय लड़की के चरित्र पर उंगली उठाते है. उसके पहनावे को देखते है और बलात्कारों को गलत कहने के बजाए लड़की के पहनावे पर उंगली उठाते है. लोगो द्वारा यह बोलना की लड़की ने छोटे कपड़े पहने थे इसलिए उसका बलात्कार हुआ है यह उन लड़को और पुरुषों को बढ़ावा देने का काम करता है जो गंदी मानसिकता रखते है.</span></p>
<p dir="ltr"><span>मेल गेज़ (male gaze), फिल्मो के साथ-साथ रोजमर्रा के जीवन में यह 15-30 वर्ष की लड़की ज़रूर अनुभव करती है, जिसमे महिलाओं को केवल एक वस्तु के रूप में देखा जाता है. पुरुषों की नज़र महिलाओं के शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थय पर नकारात्मक प्रभाव डालती है जैसे सड़क पर चलती लड़कियों का ध्यान इस बात पर केंद्रित होता है की वह ऐसी तो नहीं दिख रही कि कोई पुरुष आकर उनके स्पेस में दखल दे. </span></p>
<p dir="ltr"><span>विश्व के 185 देशों में से 77 देशों में व्यवाहिक बलात्कार को अपराध माना जाता है, जबकि भारत उन 34 देशो में से एक है जो स्पष्ट रूप से व्यवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी से बाहर करता है. मैरिटल रेप (Marital Rape) या वैवाहिक बलात्कार भारत में अपराध नहीं हैं, अगर कोई पति अपनी पत्नी से उसकी सहमति के बगैर सेक्सुअल रिलेशन (sexual relation) बनाता हैं तो ये मैरिटल रेप कहा जाता है पर इसके लिए कोई सजा का प्रावधान नहीं है. IPC की धारा 375 के, अपवाद 2 में, वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी से बाहर रखा गया हैं और कहा गया है कि किसी व्यक्ति द्वारा अपनी ही पत्नी, जो 18 वर्ष से कम की नहीं है, के साथ उसकी सहमति के बिना यौन सम्बन्ध बनाना बलात्कार नहीं है. इसी मामले के समकक्ष में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि एक आरोपी पर दंड संहिता में छूट की परवाह किये बिना मुकदमा चलाया जाना चाहिए - "<em>एक आदमी एक आदमी है; एक कार्य एक कार्य है; बलात्कार, बलात्कार है, भले ही यह किसी , 'पति' पुरुष द्वारा महिला 'पत्नी' पर किया गया हो.</em>" महिलाओं के खिलाफ अधिकांश अपराधों में न्याय और उसका समाधान मिलने में बहुत समय लगता है जिस वजह से अधिकतर महिलाये शिकायत दर्ज ही नहीं कराती है. ZERO FIR के बारे में लोगो को शिक्षित करने की ज़रुरत है , क्यूंकि ज्यादातर महिलाये और पुरुष कानूनी अधिकारों से अनभिज्ञ हैं .</span></p>
<p dir="ltr"><span>सरकारें महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिए कई प्रयास कर रही है. जैसे हिम्मत app (Delhi Government), वन स्टॉप सेंटर (OCC), महिला हेल्प लाइन (WHAL), उज्ज्वला होम, स्वाधारग्रह, आपातकालीन प्रतिक्रिया सहयता प्रणाली (112), माय सेफ्टी पिन, जैसे आधुनिक संगठन एप्लीकेशन बनाये गए है. आज के दौर में महिलाओं को जागरूक करने की बहुत ज़्यादा आवश्यकता है. महिलाओं को शिक्षित करने का अर्थ है पुरे परिवार को शिक्षित करना. भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की समस्या के समाधान के लिए नई शिक्षा नीति (New Education Policy) में कई प्रमुख बिन्दुओ को शामिल किया जा सकता है, जैसे व्यापक यौन शिक्षा (sex education), लिंग संवेदीकरण कार्यक्रम (Gender sensitization program), सशक्तिकरण और जीवन कौशल शिक्षा (Empowerment and life skills education), सामुदायिक व्यस्तता (community engagement), मीडिया साक्षरता (media literacy), लैंगिक समानता (gender equality) तथा लैंगिक सशक्तिकरण जैसे सब्जेक्ट पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है जिससे महिलाओं के प्रति दृष्टिक्रोण में सकारात्मक बदलाव आ सके. छात्रों को उनके सामने आने वाले खतरों के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूल में आत्मरक्षा कक्षाएं शुरू करनी चाहिए. महिलाओं की रोज़गार क्षमता तथा व्यवसाय स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और परामर्श प्रदान करने की आवश्यकता है.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Mon, 26 Jun 2023 18:42:24 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/domestic-violence-marital-rape-and-male-gaze-is-rising-issue-in-india]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/NiH2gVXvsk5nvRXzlL5T.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/NiH2gVXvsk5nvRXzlL5T.jpg"/></item></channel></rss>