<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ गुजरात]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/gujraat</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/gujraat" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Mon, 15 Apr 2024 13:03:25 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[घर में बेटी का स्वागत...कार को गुलाबी रंग का किया ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/atram-shatram/a-man-in-gujarat-painted-his-rang-rover-to-pink-colour-and-drove-it-on-streets-to-celebrate-her-daughters-birth-4482615</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/50q9jks2Fo354Bl6X8Hv.png"><p style="text-align: justify;">"<em>मुबारक हो आपके घर लक्ष्मी आई है</em>", ये सुनने का दिल करने लगा है अब हर कपल का जो एक्सपेक्ट कर रहे है. पहले का समय कुछ और था जब देश में एक लड़की के जन्म को बोझ समझा जाता था...अब तो उसका आना त्यौहार की तरह मनाया &nbsp;जाता है. मां बाप चाहते है कि उनकी पहली संतान लड़की हो...</p>
<h2 style="text-align: justify;">बेटियों को आगे बढ़ा रही हमारी सरकार</h2>
<p style="text-align: justify;">आज देश की सरकार बेटियों और महिलाओं को जिस तरह से आगे बढ़ाने के लिए हर समय कदम उठा रही है.. और ये &nbsp;कदम बन रहे है लोगों की सोच को बदलने का तरीका. पहले एक बेटी को घर में पराया धन मना जाता था... ये तो एक दिन चली ही जाएगी...इस पर इतना खर्च क्यों करें...एक बेटी को पढ़ा कर क्या फायदा... और ना जाने क्या क्या. लेकिन आज हर व्यक्ति को समझ आता जा रहा है कि देश का और उनके भविष्य का विकास तभी संभव है जब हर घर की बेटी आगे बढ़ रही हो और पढ़ रही हो.</p>
<p style="text-align: justify;"><span>यह भी पढ़े- <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-woman-using-attractive-ways-to-bring-change-and-motivate-other-people-for-voting-and-selecting-the-government-4477996">दूल्हा बन घोड़े पर बैठी और बारात के साथ वोट अपील</a></span></p>
<h2 style="text-align: justify;">गुजरात में पिता ने लड़की के जन्म को इस तरह मनाया</h2>
<p style="text-align: justify;">तो बस फिर... अब क्या है... हर घर में जहां आएगी माता पिता की ख़ुशी ही अलग होगी. ऐसे ही एक पिता की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था जब उस पता चला कि उसके घर बेटी आई है... उसने अपनी रेंज रोवर कार को पिंक पेंट करवा कर सड़क पर चलाया... उसपर प्यारे से फूल, एक छोटी सी बच्ची की तस्वीर, और कुछ डूडल्स भी थे. यह कार सड़कों पर देखने को मिली गुजरात में...</p>
<p style="text-align: justify;">हमारे प्रधानमंत्री का राज्य है गुजरात (gujarat news in hindi). देश में बदलाव की पहली लहर वही लाए थे मोदी जी. वह राज्य भी भारत के सबसे सुन्दर और समृद्ध राज्यों में से एक है. गुजरात में इस तरह का अनोखा सेलिब्रेशन देखकर लोगों के और हमारे ख़ुशी के ठिकाने नहीं है.</p>
<p style="text-align: justify;">है ना बेहद अनोखा तरीका अपनी बेटी को दुनिया में लाने के ख़ुशी जताने का. अब बस देखते जाइए, ये तो शुरुआत है, देश में आने वाली हर बेटी का इसी तरह के अनोखे तरीकों से स्वागत किया जाएगा. बस एक बात याद रखने जैसी है, कि देश का विकास तभी संभव है जब देश की हर बेटी आगे बढे और पढ़े...एक महिला एक परिवार को आगे बढ़ाती है...तो ज़रा सोचिए एक सुखी और समृद्ध परिवार होने के लिए उसका पढ़ना लिखना और खुश रहना कितना ज़रूरी है!</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़े- <a href="https://ravivarvichar.in/atram-shatram/nikita-a-girl-from-uttar-pradesh-drove-away-the-monkeys-from-the-house-with-the-help-of-alexa-4476304">Alexa की मदद से निकिता ने भगाया घर में घुसे बंदरों को!</a></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Mon, 15 Apr 2024 13:03:25 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/atram-shatram/a-man-in-gujarat-painted-his-rang-rover-to-pink-colour-and-drove-it-on-streets-to-celebrate-her-daughters-birth-4482615]]></guid><category><![CDATA[अटरम शटरम]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/50q9jks2Fo354Bl6X8Hv.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/50q9jks2Fo354Bl6X8Hv.png"/></item><item><title><![CDATA[सूरत में आस्था की दिखेगी एक और नई सूरत ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/surat-shgs-to-recycle-ganesh-clothes-and-items-1423325</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/05BLO8qgIyMcWoKBUdWV.jpg"><p><strong><a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/the-inspiring-journey-of-ips-ilma-afroz-from-a-small-village-in-uttar-pradesh-to-civil-services-success">गुजरात</a> (Gujarat)</strong> के&nbsp;<strong>सूरत (Surat)</strong> में इस बड़ा नवाचार होगा. <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/rural-development-minister-giriraj-singh-to-chair-conclave-on-lakhpati-didi-scheme">दीन दयाल अंत्योदय</a>&nbsp;<strong>शहरी आजीविका मिशन (Ajeevika Mission)</strong>&nbsp;के <strong>SHG</strong> की महिलाएं विसर्जन के पहले निकाले सामान से नया क्रिएशन कर वापस मार्केट में ले आएगीं. यह महिलाओं के रोजगार का बड़ा जरिया बन रहा.</p>
<h2><strong>वेस्ट से बेस्ट का करेंगे अनूठा काम &nbsp;</strong></h2>
<p><strong><a href="edit">सूरत</a> (Surat) </strong>शहर के<strong> <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/one-district-one-product-strategy-boosts-keralas-microenterprise-in-food-sector">शहरी आजीविका मिशन</a> (Ajeevika Mission) </strong>की महिलाओं को यह मौका दिया गया.<strong> श्रीजी</strong> <strong>सखी मंडल</strong> की <strong>सरोज बेन राजेश भाई कर्मा ने</strong> बताया- <em>"नगर निगम द्वारा तैयार झील में गणेश भगवान विसर्जन के पहले हमें भगवन की मूर्ति को पहनाए गए बाघा &nbsp;(कपड़े), मुकुट, माला और सजावट के दूसरे सामान हमें दिए गए. हम इस सामान से नवरात्र के लिए समान, सजावटी सामान, श्रीकृष्ण भगवान के लिए भी बाघा नए सिरे से तैयार करेंगे. इसे मार्केट में बेचेंगे."</em></p>
<p>इस व्यवस्था से&nbsp;<strong>सूरत (Surat)</strong> एक बार फिर चर्चा में है. समूह की कई महिलाओं को रोजगार के लिए नया काम मिल गया. इस समूह में हंसिया बेन कंसारिया, नेहा बेन सावन, दमयंती बेन, बीना बेन और आशा बेन भी बहुत खुश हैं कि कमाई बढ़ेगी.</p>
<p><img alt="SURAT NEWS SIZE WEST 01" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/522x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/0IgP6Pt9fS4brsbQZPTK.jpg" style="width: 522px;" class="center"></p>
<p class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>सूरत में सखी मंडल के आइटम्स (Image: Ravivar Vichar)&nbsp;&nbsp;</em></span></p>
<p><strong>सूरत (Surat)</strong> के ही दूसरे समूह <strong>नीलकंठ सखी मंडल </strong>की <strong>मनीषा बेन राकेश भाई</strong> बताती है-<em> "शहर के सखी मंडल भगवान विसर्जन के पहले निकाले सामान के साथ हमारा भी सहयोग लेते हैं. हमसे भी सामान खरीद लेते जिससे नया आइटम्स और सुंदर बने."&nbsp;</em></p>
<h3><strong>पर्यावरण में सहयोगी बन रहीं समूह की महिलाएं &nbsp;</strong></h3>
<p><strong>सूरत (Surat) नगर पालिका निगम (Nagar Palik Nigam)</strong> की इस &nbsp;पहल से<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/assam-is-preparing-to-make-guinness-world-record-1343743"> पर्यावरण </a><strong>संरक्षण (Enviornment) </strong>के साथ <strong>Self Help Group</strong> की महिलाओं को नया काम मिला. ये महिलाएं भी <strong>पर्यावरण सुरक्षा</strong> में साथ दे रहीं.</p>
<p><strong>सूरत (Surat) नगर पालिका निगम (Nagar Palik Nigam) </strong><strong>कम्युनिटी ऑर्गनाइज़र जयश्री बेन </strong>ने बताया- <em>"गणेशजी विसर्जन के पहले मुंसिपल कॉर्पोरेशन मूर्ति को पहनाए वस्त्र और दूसरे सामान निकल लेता है. इस काम में शहरी आजीविका मिशन की सदस्य महिलाएं सहयोग करती हैं. इन सामान से फिर नया सामान बनाकर नवरात्र और प्रदर्शनी में रखती हैं. इससे समूह की महिलाओं की अतिरिक्त कमाई होती है." &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</em></p>
<p><strong><a href="https://ravivarvichar.in/search?title=%E0%A4%A8%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0">नवरात्र</a> </strong>में स्टॉल्स लगाए जाएंगे जिससे ये सामान नए रूप में वापस रखे जा सकें. &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Fri, 29 Sep 2023 16:11:08 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/surat-shgs-to-recycle-ganesh-clothes-and-items-1423325]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/05BLO8qgIyMcWoKBUdWV.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/05BLO8qgIyMcWoKBUdWV.jpg"/></item><item><title><![CDATA[सरस मेला से SHG महिलाएं हो रहीं सशक्त ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/regional-saras-mela-2023-gujrat-helping-shg-women-to-showcase-their-handmade-products</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6iiVIzafJ3EkKaXOvwqB.jpg"><p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span><strong>रीजनल सरस मेला</strong> (Regional Saras Mela 2023) <strong>महिला सशक्तिकरण</strong> (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/government-initiatives-boost-women-empowerment-through-plantation-campaigns">Women Empowerment</a>) के लिए&nbsp;<strong>मिनिस्ट्री ऑफ़ रूरल डेवलपमेंट </strong>(MoRD) के तहत <strong>दीनदयाल अंत्योदय योजना नेशनल रूरल लाइवलीहुड मिशन</strong> द्वारा शुरू की गई पहल है. जहां <strong>ग्रामीण महिला स्वयं सहायता समूहों </strong>(<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/jslps-launches-ranchi-honey-project-to-provide-livelihood-for-shgs">Rural Women SHGs</a>) को अपना हुनर दिखाने, बनाये हुए&nbsp;<strong>प्रोडक्ट्स को बेचने </strong>और <strong>पोटेंशियल मार्केट प्लेयर्स </strong>के साथ <strong>जुड़ने का मंच</strong> मिल रहा है.</span></p>
<h2 dir="ltr" style="text-align: justify;"><span>संगठन दे रहा महिलाओं को कौशल विकास की ट्रेनिंग&nbsp;</span></h2>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span><strong>संगठन महिला एसएचजी</strong> (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/janmashtami-a-catalyst-for-womens-self-employment-in-uttar-pradesh">Women SHG</a>) को अलग-अलग&nbsp;<strong>आजीविका शिल्प कौशल </strong>की<strong>&nbsp;ट्रेनिंग</strong> देने के साथ उनके <strong>उत्पादों को बेचने </strong>के लिए <strong>मंच प्रदान</strong> करता है. स्टाल्स लगाने से लेकर उनके रहने का खर्च <strong>मेला आयोजन समिति</strong> द्वारा उठाया जाता है. <strong>सरस मेला, अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज संस्थान </strong>(NIRDPR) द्वारा आयोजित कराया जाता है.</span></p>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span><img alt="saras mela" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/504x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/H0Ae1EJ76ykqRvRznqRI.jpg" style="width: 504px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr" class="center"><em><span style="font-size: 8pt;">Image Credits : Treebo</span></em></p>
<h2 dir="ltr" style="text-align: justify;"><span>आजीविका मिशन की शुरुआत&nbsp;</span></h2>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span><strong>ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने</strong> के लिए, <strong>सरस मेला</strong> (Saras Mela), <strong>आजीविका एनआरएलएम</strong> के तहत <strong>ग्रामीण विकास मंत्रालय</strong> द्वारा शुरू की गई पहल है. इसकी <strong>शुरुआत जून 2011 </strong>में हुई.<strong> नवंबर 2015</strong> में इसका <strong>नाम बदलकर</strong> <strong>दीनदयाल अंत्योदय योजना </strong>(<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/nrlm-provides-training-to-shgs-for-making-fabric-from-bicchu-buti">DAY-NRLM</a>) रखा गया.&nbsp;<strong>आजीविका मिशन</strong> (Ajeevika Mission) से दस साल के अंदर सेल्फ हेल्प ग्रुप के ज़रिये<strong> छह लाख गावों </strong>के <strong>सात करोड़ ग्रामीण परिवारों</strong> के<strong> जीवन को बेहतर बनाने का लक्ष्य</strong> निर्धारित किया है.</span></p>
<h2 dir="ltr" style="text-align: justify;"><span>गुजरात सरस मेला</span></h2>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span><strong>गुजरात</strong> (Gujrat) में भी <strong>सरस मेला 2023</strong> (Saras Mela 2023) का आयोजन, <strong>सर्किट हाउस के पीछे का मैदान, चौपाटी रोड, देवभूमि द्वारका</strong> में किया जा रहा है. आयोजन में रूरल वीमेन सेल्फ हेल्प ग्रुप्स अपने बनाये हुए<strong> हैंडमेड प्रोडक्ट्स</strong> को प्रदर्शित कर रही हैं. यह आयोजन <strong>गुजरात सरकार</strong> (Gujrat Government) द्वारा कराया जा रहा हैं. <strong>1 से 7 सितंबर 2023</strong>, तक चल रहे इस आयोजन का समय <strong>सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक</strong> है.</span></p>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span><img alt="mela in gujrat" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/509x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/rGN1UaUN9wD5IjdwXK2G.jpg" style="width: 509px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr" class="center"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits : Holidify</em></span></p>
<p dir="ltr" style="text-align: justify;"><span><strong>सरस मेला SHG महिलाओं</strong> को <strong>आजीविका दिलाने</strong> में सरकार द्वारा शुरू किया गया महत्वपूर्ण कदम है. महिलाएं <strong>आत्मनिर्भर</strong> होकर अपने अलग-अलग <strong>व्यवसायों की शुरुआत </strong>कर रहीं है. साथ ही अपने साथ-साथ अन्य SHG महिलाओं को आमदनी दिलाने के लिए उन्हें भी <strong>उत्पाद बनाना</strong> और <strong>व्यवसाय शुरू </strong>करना सिखा रही हैं.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Wed, 06 Sep 2023 18:06:04 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/regional-saras-mela-2023-gujrat-helping-shg-women-to-showcase-their-handmade-products]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6iiVIzafJ3EkKaXOvwqB.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6iiVIzafJ3EkKaXOvwqB.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SHG महिलाओं की मेहनत को मिला सीताफल ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/rajasthan-shg-women-earning-their-livelihood-through-sitafal</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8UfZmReY0JeQLCzNpigO.png"><p style="text-align: justify;"><strong>SHG महिलाएं स्वरोजगार</strong> के साथ <strong>आर्थिक स्वतंत्रता और महिला सशक्तिकरण</strong> की राह पर आगे बढ़ रही हैं<strong>.</strong> राजस्थान के पाली जिले में 27 गावों में पांच हज़ार महिलाएं, जिसमें गरासिया जनजाति की महिलाएं सबसे ज्यादा हैं<strong>.</strong> घर के पास काम की उपलब्धता न होने के कारण महिलाओं को काम की तलाश में घर से दूर जाना पड़ता था.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">कई बार कुछ साहूकार छोटी राशि में भी महिलाओं से ज्यादा ब्याज वसूलते थे. <strong>आदिवासी महिलाओं की आजीविका</strong> पूरी तरह से जंगल से <strong>सीताफल </strong>(Custard Apple) की <strong>कटाई करने</strong> और उन्हें <strong>एक रुपए प्रति किलोग्राम</strong> बेचने पर ही निर्भर थी.</p>
<p style="text-align: justify;"><img alt="shg women" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/620x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/J33yKUGFivlTfF9doi27.jpg" style="width: 620px;" class="center"></p>
<p class="center"><em><span style="font-size: 8pt;">Image Credits : NDTV Food</span></em></p>
<h2 style="text-align: justify;">GMPCL से जुड़ी महिलाओं ने जमा किए तीन करोड़ रुपए&nbsp;</h2>
<p style="text-align: justify;">एसएचजी महिलाओं की मदद करने के लिए <strong>घुम्मर महिला प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड</strong> (GMPCL) की शुरुआत 2013 में की गई और पंजीकरण 2015 में हुआ. कंपनी के हर काम का संचालन सेल्फ हेल्प ग्रुप्स की महिलाएं करती हैं<strong>.</strong> आज जीएमपीसीएल से जुड़े 400 Self Help Groups की पांच हज़ार महिलाओं ने तीन करोड़ रुपए की बचत राशि जमा की.</p>
<h3 style="text-align: justify;">GMPCL ने NGO Srijan के साथ महिलाओं को दी ट्रेनिंग</h3>
<p style="text-align: justify;">एसएचजी महिलाएं जागरूक न होने के कारण वह सीताफल खेती के फायदों से अनजान थी. एजेंट्स कम कीमत में फल खरीदकर कीमत बढ़ाकर बेचते,&nbsp;<strong>उनका जहां फायदा हो रहा था, पर वहीं आदिवासी महिलाओं का शोषण</strong>. सिर्फ एजेंट्स ही नहीं बल्कि मानसून, बाजार से संपर्क न होना, योजनाओं की जानकारी न होना, फलों को ख़राब होने से बचाने के लिए पर्याप्त प्रौद्योगिकी की कमी होना भी आगे बढ़ने में अड़चने पैदा कर रही थी.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>आत्मनिर्भर भारत </strong>(Aatmanirbhar Bharat) के तहत <strong>GMPCL ने NGO Srijan</strong> के साथ <strong>मिलकर</strong> महिलाओं को कस्टर्ड एप्पल के पल्प को <strong>एक्सट्रैक्ट</strong> और <strong>प्रीसर्व</strong> करने की<strong> ट्रेनिंग देना</strong> शुरू किया.</p>
<p style="text-align: justify;"><img alt="shg rajasthan madhya pradesh" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/600x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/UCDhZZmtXth1SyK5ReZ9.jpg" style="width: 600px;" class="center"></p>
<p class="center"><em><span style="font-size: 8pt;">Image Credits : CSRBox</span></em></p>
<h3 style="text-align: justify;">महिलाओं को सिखाई ग्रेडिंग और प्लकिंग&nbsp;</h3>
<p style="text-align: justify;">साल 2017 में, पूरे <strong>वैल्यू चेन को डीसेंट्रलाइजेड </strong>किया गया और शुरू में आठ <strong>विलेज कलेक्शन सेंटर्स</strong> (VCCs) में&nbsp; महिलाओं को <strong>ग्रेडिंग, प्लकिंग और वजन करने की ट्रेनिंग</strong> दी गई. महिलाएं <strong>प्लकर, सॉर्टर , ग्रेडर और पैकर</strong> का काम संभाल रही है. लगभग हज़ार महिलाएं एप्पल तोड़कर वीसीसीएस को बेचकर हर महीने 2,500 से 3,000 रुपए कमातीं है. महिलाएं सेबों को बनावट के आधार पर छांटकर गुदा निकालकर छिलके को अलग करती है.&nbsp;</p>
<h3 style="text-align: justify;">महिलाओं को मिला लीडरशिप का मौका</h3>
<p style="text-align: justify;"><strong>पल्प की शुद्धता </strong>बनाए रखने के लिए<strong> हैंड ग्लव्स, सिर पर टोपी, एप्रन और मास्क</strong> का इस्तेमाल किया जाता है. इस पल्प को पैक कर <strong>उदयपुर </strong>(Udaipur) <strong>मे स्टोर</strong> किया जाता है. जीएमपीसीएल के अंडर पांच हज़ार औरतें काम कर रही हैं, जिसमें तेरह महिलाएं एग्जीक्यूटिव बोर्ड मेंबर्स हैं. कंपनी बोर्ड की नौ मेंबर्स साथ मिलकर पूरे ऑपरेशन की देखभाल और पल्प की क्वालिटी चेक करती हैं. इससे महिलाओं को लीडरशिप का मौका मिल रहा है.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;"><img alt="rajasthan yojana" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/594x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/HkBoDO3Ak7QRopbu0Hnu.jpg" style="width: 594px;" class="center"></p>
<p class="center"><em><span style="font-size: 8pt;">Image Credits : The Better India - Hindi</span></em></p>
<h2 style="text-align: justify;">सीताफल से बन रहे आइसक्रीम और शेक्स</h2>
<p style="text-align: justify;">साल 2015 में कंपनी का <strong>टर्नओवर </strong>सिर्फ<strong> पांच लाख रुपए</strong> था. 2022 में यह बढ़कर <strong>सत्तर लाख</strong> हो गया. <strong>राजस्थान</strong> (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/rajeevika-bringing-economic-empowerment-to-shg-women">Rajasthan</a>), <strong>मध्य प्रदेश</strong> (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/food-basket-of-india-madhya-pradesh-gaining-growth-in-food-processing-sectors">Madhya Pradesh</a>) और&nbsp;<strong>गुजरात</strong> (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/empowering-women-for-a-prosperous-and-equal-society">Gujrat</a>) में पल्प का इस्तेमाल आइसक्रीम बनाने में &nbsp;होता है. <strong>टॉप एन टाउन</strong> (Top N Town) जैसे ब्रांड्स कस्टर्ड एप्पल <strong>आइसक्रीम</strong> और <strong>शेक्स</strong> बनाते हैं. साथ ही सीताफल के अलग-अलग व्यंजन जैसे <strong>रबड़ी, बासुंदी</strong> बनाने के लिए 70% गूदे का इस्तेमाल होता है.</p>
<p style="text-align: justify;">महिलाओं के पास रोजगार होने से वह <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-ready-to-become-micro-agripreneurs-with-upsrlm">आर्थिक सशक्तिकरण</a><strong>&nbsp;</strong>की तरफ बढ़ने के साथ, अन्य व्यवसाय और सामाजिक मुद्दों पर भी काम करने में सक्ष्म हो रही हैं. इससे जुड़ महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने &nbsp;<strong>गुलाबी गैंग</strong> (Gulabi Gang) बनाया, जिसका उद्देश्य शराबखोरी को खत्म करना था. महिलाओं ने अपने बच्चों के साथ खुद को भी शिक्षित करना शुरू कर दिया है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Sat, 26 Aug 2023 10:33:23 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/rajasthan-shg-women-earning-their-livelihood-through-sitafal]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8UfZmReY0JeQLCzNpigO.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8UfZmReY0JeQLCzNpigO.png"/></item><item><title><![CDATA[समृद्ध, सशक्त और समान समाज के लिए महिलाओं को आगे लाना होगा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/empowering-women-for-a-prosperous-and-equal-society</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/b4U43vSwUXacx41FTdWu.webp"><p><span>G20 की प्रेसिडेंसी मिलने के साथ ही भारत कई विषयों और विज़न के साथ अपने आप को विश्वपटल पर लाया है.<strong> महिला सशक्तिकरण (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/manju-shah-paving-a-new-path-from-pine-forests-to-empowerment">Women Empowerment</a>)</strong> उनमें प्रमुख मुद्दा रहा है. इसी को लेकर <strong>गुजरात (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/bareilly-women-shg-empowering-themselves-through-poultry-farming">Gujrat</a>)</strong> में हुई<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/pm-modi-g20-ministerial-conference-on-women-empowerment"> G20 Empower </a><strong>&nbsp;समिट</strong> में <strong>केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (Union Minister Smriti Irani)</strong> शामिल हुई और वहां भारत और विश्व की महिलाओं के लिए <strong>गाइडिंग लाइट</strong> की तरह सामने आयी. वहां उन्होंने कहा - " भारत की <strong>G20 प्रेसिडेंसी (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/pm-modi-g20-ministerial-conference-on-women-empowerment">G20 Presidency</a>)</strong> में महिलाओं के बढ़ते योगदान से नई उम्मीद जगी है. आज महिलाएं राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और समाजिक संरचना में पुरुषों के बराबर योगदान देने में सक्षम हो रही है."</span></p>
<h2>महिलाओं में आ रहा टेकटोनिक शिफ्ट</h2>
<p>साल 2023 में G20 EMPOWER की थीम रही &nbsp;<strong>' <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/manju-shah-paving-a-new-path-from-pine-forests-to-empowerment">महिला सशक्तिकरण : समानता और अर्थव्यवस्था के लिए एक जीत</a>.'</strong> स्मृति ईरानी ने यहां पर आगे कहा - " महिलाओं में <strong>टेकटोनिक शिफ्ट </strong>आया है. जहां पहले वह दया के सहारे रहती थीं, आज वही पुरुषों के साथ मिलकर देश और समाज के लिए बढ़ चढ़कर योगदान दे रहीं है. " महिला बाल विकास और माइनॉरिटी अफेयर्स मंत्री <strong>(Minister Of Women And Child Development And Minority Affairs) स्मृति ईरानी</strong> ने बताया कि कैसे <strong>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi)</strong> ने भारत में G20 प्रेसिडेंसी के साथ महिलाओं के नेतृत्व एजेंडा को प्रमुख मंच पर लाये है.</p>
<p>महिलाओं को ग्रासरुट लेवल पर मैन्युफैक्चरिंग पार्ट के अर्थव्यवस्था में शामिल करने के लिए इंडस्ट्री और स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups, SHGs) साथ मिलकर काम करेंगे. इससे महिलाओं को <strong>मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री (Manufacturing Industry)</strong> में रोजगार मिलेगा. इस तरह की पहल को मौका मिला गुजरात में हो रही G20 EMPOWER समिट में . इन प्रयासों से महिला उद्यमियों में<strong> फाइनेंसियल रेवोल्यूशन (Financial Revolution) </strong>भी देखने को मिल रहा है, अगर हम लोन की बात करें तो 320 मिलियन <strong>लोन (Loan) </strong>के लाभार्थियों में से 70% महिलाएं है. <strong>केंद्र सरकार (Central Government)</strong> द्वारा शुरू की गई योजना <strong>' स्टैंड अप इंडिया ' (Stand Up India)</strong> में <strong>मीडियम SME (Medium SME)</strong> में 80% लाभार्थी महिलाएं है.</p>
<p>EMPOWER टीम के जरिए अनजानी महिलाओं की अनकहीं कहानियां आज भारत सरकार के नेतृत्व में एक नई दिशा और दशा की और बढ़ रही है. यह इस बात से साबित होता है की यदि श्रम सेक्टर में महिलाओं को पुरुषों के सामान जगह मिलती है, तो उनका GDP में योगदान का आंकड़ा लगभग 20 ट्रिलियन डॉलर के आस पास होगा. एक रिपोर्ट के अनुसार अधिकतम आय के साथ वृद्धि करने वाली महिलाएं, परिवार और स्थानीय समुदाय में पुरुषों की मुकाबले दोगुना ख़र्च करतीं है. इस तरह इकोनॉमिक रोटेशन के लिए महिलाओं की आवश्यकता को दरकिनार नहीं किया जा सकता.</p>
<p>महिला एम्पॉवरमेंट एजेंडा सिर्फ महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज को भी सशक्तिकरण देता है. इसलिए समता, समानता और सशक्त भविष्य की ओर बढ़ने के लिए महिलाओं को प्राथमिकता देनी होगी.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Wed, 16 Aug 2023 17:37:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/empowering-women-for-a-prosperous-and-equal-society]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/b4U43vSwUXacx41FTdWu.webp" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/b4U43vSwUXacx41FTdWu.webp"/></item><item><title><![CDATA[गुजराती दादी की बार्बी डॉल्स ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/ranjan-ben-bhatt-from-gujrat-is-making-indian-style-barbies-and-selling-them-in-18-countries</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/94memk9KXzIIqJBtrwOJ.jpg"><p dir="ltr"><span>"<em>बचपन में जब अपने कैबिनेट में मुझे मेरी गुड़िया दिखती थी, तो अलग ही खुशी होती थी, ऐसा लगता था कि बस इन्हीं के साथ खेलती रहूं, इन जैसी सुंदर और प्यारी बन जाऊ.</em>" कुछ अलग सा महसूस होता था, उन बार्बीज़ को देखकर, उनके साथ खेलकर. ऐसी ही कुछ प्यारी सी बार्बीज़ बना रही है <strong><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/gujarat-shg-women-making-cocopeat-from-coconut-waste-with-the-help-of-forest-department-and-mahakali-temple-trust" rel="dofollow">गुजरात </a>की रंजनबेन भट्ट</strong>. लेकिन ये नॉर्मल बार्बीज़ नही है. तो ऐसा क्या अलग है इनमें?</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="kalashree Foundation" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/516x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/6hbCfUvXN3UqTutMsIGs.jpeg" style="width: 516px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Mericity</em></span></p>
<h2 dir="ltr"><span>भारतीय स्टाइल की डॉल्स बनाती रंजन बेन भट्ट</span></h2>
<p dir="ltr"><span><strong>ये <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/mettal-company-of-barbie-doll-launches-down-syndrome-barbies" rel="dofollow">बार्बीज़</a> है, भारतीय स्टाइल की!</strong> हर राज्य और कल्चर के हिसाब से अलग बार्बी बना रही है रंजन बेन भट्ट और उनकी ट्रेन की हुई महिलाएं. नॉर्मल बार्बीज़ से तो हर कोई खेलता है, लेकिन इन भारतीय बार्बीज़ को देखकर अपने कल्चर और देश से और प्यार हो जाएगा आपको! रंजनबेन बेटे अपने हरिनभाई के साथ अपनी <strong>पहल कलाश्री फाउंडेशन</strong>, के तहत हर महीने 500 से अधिक <strong>ईको-फ्रेंडली गुड़ियां </strong>बनाकर बेच रहीं हैं. सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि 18 देशों में इनकी डॉल्स बिक रही है.</span><b></b><span></span></p>
<p dir="ltr"><span>रंजन बेन बहुत सी महिलाओं तक अपनी इस कला को पहुंचा रही है. वह <strong>डॉल बनाने, <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/lambani-women-made-a-world-record-in-lambani-art-of-karnataka-by-displaying-1755-items-together" rel="dofollow">सिलाई</a> और एम्ब्रोइडरी की ट्रेंनिग</strong> के साथ इन महिलाओं को रोजगार भी दे रही है. अपने बेटे के साथ मिलकर वह इस काम को आज दुनिया तक पहुंचा रहीं है.</span></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="Kalashree foundation Gujrat" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/502x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/yPAMOnktKkpM88Zp6T48.jpeg" style="width: 502px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Mericity</em></span></p>
<h2 dir="ltr"><span>गुजरात के सुरेंद्र नगर से की बिज़नेस की शुरुआत&nbsp;</span><b></b></h2>
<p dir="ltr"><span><strong>रंजन बेन ने 1960 में सुरेंद्र नगर के वसधावन</strong> में रहता था. वहां <strong>गुजरात की जानी-मानी समाज सेविका अरुणाबेन देसाई</strong> ने विकास विद्यालय नाम से एक संस्था शुरू की, ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें. इसी संस्था में रंजन बेन ने एक के बाद एक तीन कोर्स करे और आज वह इन कोर्स की बदौलत अपना बिज़नेस खड़ा कर चुकी है. उनकी वर्कशॉप 2000 वर्ग फुट में फैली हुई है, जिसमें वह <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/bareilly-women-shg-empowering-themselves-through-poultry-farming" rel="dofollow">महिलाओं को ट्रेनिंग</a> देती है.</span></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="Kalashree foundation gujrat ranjan ben" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/500x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/mzPWFKNGTcE7WbcWzJ4M.jpg" style="width: 500px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: The Better India</em></span></p>
<h2 dir="ltr"><span>महिलाओं का जीवन सुधार रही है रंजन बेन भट्ट&nbsp;</span><b></b></h2>
<p dir="ltr"><span>ये गुड़ियां पूरी तरह से हैंडमेड होती हैं, जिसमें अलग-अलग डिज़ाइन तैयार किए जाते हैं. <strong>18 से अधिक डॉल्स के पैटर्न्स हैं रंजन बेन के कलेक्शन</strong> में जिसमें <strong>राधा-कृष्ण, भारतीय पारंपरिक वस्त्र, राज्यों के किसान और भारतीय नृत्य</strong> से जुड़ी 300 से ज़्यादा मॉडल हैं. रंजन बेन आज बहुत सी महिलाओं की ज़िन्दगी सवार रही है. वह इन उम्र में भी पुरे जोश और जूनून के साथ काम कर रही है. देश के लिए एक गर्व है, रंजन बेन. वह साबित कर रहीं है कि अगर एक महिला चाहे तो कुछ भी कर सकती है. उम्र और हालात किसी के आगे बढ़ने बे बीच कभी भी बढ़ा नहीं बन सकते.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Wed, 09 Aug 2023 12:20:50 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/ranjan-ben-bhatt-from-gujrat-is-making-indian-style-barbies-and-selling-them-in-18-countries]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/94memk9KXzIIqJBtrwOJ.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/94memk9KXzIIqJBtrwOJ.jpg"/></item><item><title><![CDATA[कोकोपिट से बचा पावागढ़ का जंगल ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/gujarat-shg-women-making-cocopeat-from-coconut-waste-with-the-help-of-forest-department-and-mahakali-temple-trust</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WSKRl61gKazmlazgARzX.jpg"><p dir="ltr"><span>भारत का कल्चर और धर्म पूरी दुनिया के सबसे लोकप्रिय धर्मों में से के होने के साथ सबसे ज़्यादा कलरफुल भी माना जाता है क्यूंकि यहां ना जाने कितने धर्मों के लोग बसते है. अगर देखा जाए तो पूरे भारत के हर मंदिर से निकलने वाला फूलों का प्रसाद और नारियल का सूखा कचरा इतना होता है कि इसकी बर्बादी पर्यावरण को नुक्सान पहुंचाने लगे. इसी नुक्सान को नियंत्रण में लाने के लिए <strong>गुजरात के वड़ोदरा में हाल ही में पावागढ़ में महाकाली मंदिर ट्रस्ट, और वन विभाग, जिला प्रशासन ने मिलकर नारियल के रेशे से कोकोपीट बनाना</strong> शुरू कर दिया है. </span></p>
<p dir="ltr"><span>महाकाली मंदिर में प्रतिदिन हजारों सूखे नारियल चढ़ाये जाते हैं. इससे निकलने वाला भूसा कचरे का कारण बनता था, इसीलिए लोग उसमें आग लगा दिया करते थे. इस कारण जंगलों में भी आग लग जाया करती थी, और बहुत नुक्सान होता था. लेकिन आज वन विभाग की इस पहल से कूड़ा ख़त्म हो चूका है, जंगलों में आग  नहीं लग रही और हरियाली भी बढ़ चुकी है. आग लगने के कारण जो जंगल पूरी तरह से बंजर हो गया था वो आज फिर से हराभरा हो चूका है. </span></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="Women making Cocopeat" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/hZUUT1l9dsGQBn5gpWcz.jpg" style="width: 523px; height: 348px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ideas 2 make money</em></span></p>
<p dir="ltr"><span><strong>वन विभाग ने मंदिर ट्रस्ट के साथ मिलकर नारियल के छिलकों को कोकोपीट में बदलने के लिए मशीनें लगाई हैं.</strong> कोकोपीट नमी जमा कर सकता है और वजन में हल्का होता है. यह पौधे उगाने के लिए बेस्ट ऑप्शन बनता जा रहा है. कोकोपीट बनाने के लिए विभाग ने <strong>छोटार्दिवव वन विकास सहभागी मंडली</strong> के स्वयं सहायता समूह (SHG) महिलाओं को शामिल किया गया है. वन विभाग ने नवलखी कोठार के आसपास 10 हेक्टेयर भूमि में 42,000, पावागढ़ की तलहटी में 20 हेक्टेयर भूमि में 32,000 और माची की सड़क पर कोकोपीट का उपयोग कर 2,500 पौधे लगाए. आने वाले दिनों में महिलाएं महाकाली मंदिर के आसपास 11,111 पौधे और मंदिर ट्रस्ट द्वारा विकसित किए जा रहे डाइनिंग हॉल के आसपास 4,444 पौधे लगाएंगी. </span></p>
<p dir="ltr"><span>Self Help Group की यह महिलाओं के लिए यह पहल बहुत फायदेमंद साबित होगी. SHG महिलाएं हर समय  पर्यावरण को बचाने के लिए प्रयास करती रहती है. पर्यावरण सुरक्षा के साथ इन्हे अपनी आजीविका तैयार करने का मौका भी मिल रहा है. सरकार और वन विभाग का ये कदम सराहनीय है. सिर्फ गुजरात ही नहीं बल्कि हर राज्य को महिलाओं और पर्यावरण के लिए यह कदम उठाना चाहिए.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Wed, 28 Jun 2023 17:38:09 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/gujarat-shg-women-making-cocopeat-from-coconut-waste-with-the-help-of-forest-department-and-mahakali-temple-trust]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WSKRl61gKazmlazgARzX.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/WSKRl61gKazmlazgARzX.jpg"/></item><item><title><![CDATA[गुजरात की फेब्रिक आर्ट बनी पहली पसंद ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/dharmishta-training-women-to-become-independent</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/mKUyyeM9zyFjduX1QjY2.jpg"><p>गुजरात में एक घरेलु महिला ने न केवल मेहनत कर आत्मनिर्भर बनी बल्कि अलग-अलग समूह की जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें भी आत्मनिर्भर बना दिया. इस महिला धर्मिष्ठा ने अलग-अलग जगह जाकर चार हजार से ज्यादा महिलाओं को ट्रेनिंग भी दी. ऐसी ट्रेंड महिलाएं अब अपना रोजगार चला रहीं हैं. ऐसी महिलाएं भी जुड़ीं जो बेसहारा,अकेली या तलाकशुदा हैं. अहमदाबाद की धर्मिष्ठा अशोक भाई चुड़ासमा गुजरात सरकार के कहने पर कई संस्थाओं में ट्रेनिंग देने जाती हैं.</p>
<p>इंदौर में आयोजित मालवा उत्सव में शामिल हुई धर्मिष्ठा कहती हैं -“ मैं ट्रेडिशनल आर्ट और हैंडीक्रॉफ्ट को बचाने में लगी हूं. इस काम से जहां संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचा रहे वहीं जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत भी कर पा रहे. मैंने महिलाओं को मदद करने के लिए सिद्धि विनायक संस्था बनाई. 11 सदस्य बने. मैं फैब्रिक जूलरी, मिरर फेब्रिक वर्क, एम्ब्रॉयडरी सहित कई प्रोजेक्ट से जुड़ गए. मुझे ख़ुशी है की इंदौर मालवा उत्सव में हमें लगभग 50 हजार रुपए का वर्क ऑर्डर मिला."</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/GxNfaxq7UQDWYlWmTSwm.jpg" alt="Gujarat Malwa Utsav"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>फेब्रिक को जमाते हुई धर्मिष्ठा (फोटो क्रेडिट :रविवार विचार) </em></span></p>
<p>अहमदाबाद सेंटर से धर्मिष्ठा अभी 300 महिलाओं के साथ काम करती है. कोरोना काल से  पति अशोक भाई अब मार्केटिंग संभालते हैं. महिलाओं को दिक्क्त न हो इसलिए उनको घर जा कर कच्चा माल दे दिया जाता है. वे घर से ही सामान तैयार कर सेंटर पर भेज देती है. इस संस्था से जुड़ी पायल परमार कहती है -" हैंडीक्रॉफ्ट आइटम और फेब्रिक हैंडवर्क से मैं आत्मनिर्भर हो गई. मेरे आर्थिक हालात सुधर गए. मैं 12 से 15 हजार रुपए महीने कमा लेती हूं." इस संस्था से 60 अधिक महिलाएं सखी मंडल ( SELF HELP GROUP -SHG )  की सदस्य हैं जिन्हें रोज काम मिल जाता है. इस संस्था की एक और महिला धर्मिष्ठा भी जुड़ गई. धर्मिष्ठा कहती है -" मेरी आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी. जब से इस काम में जुटी हर महीने दस हजार रुपए महीने से ज्यादा कमा लेती हूं."</p>
<p>इस संस्था के सदस्यों के साथ संस्था अध्यक्ष धर्मिष्ठा अब तक अहमदाबाद के अलावा सूरत ,बड़ौदा ,गांधीनगर ,इंदौर ,सौराष्ट्र और दिल्ली के मेले में अपनी प्रदर्शनी लगा चुकीं  हैं. धर्मिष्ठा आगे बताती है -" सबस ज्यादा फायदा हमें कच्चा माल लेने में होता है. हम कॉटन और दूसरा फेब्रिक अहमदाबाद से ही ले लेते हैं. इस पर डिमांड के अनुसार तैयार करते हैं. मिरर वर्क ब्लाउस की कीमत 2 हजार रुपए तक होती है और महिलाएं मेले में बड़े शौक से खरीदती हैं. हम इस आर्ट को और राज्यों तक ले जाएंगें. "</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Sun, 21 May 2023 13:20:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/dharmishta-training-women-to-become-independent]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/mKUyyeM9zyFjduX1QjY2.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/mKUyyeM9zyFjduX1QjY2.jpg"/></item><item><title><![CDATA[महिलाओं के सपनों की बन रही जूलरी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/neelkanth-woman-shg-making-handmade-jewellery-to-become-financially-independent</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9vcYgvUNanmfUyEUBCzT.jpeg"><p>" मैं पहले से ही सिलाई का काम कर रही थी. पर मुझे लगा कि कुछ ऐसा काम करूं कि दूसरी जरूरतमंद महिलाओं को भी काम दे सकूं. मैंने नीलकंठ सखी मंडल बनाया. इसमें दस महिलाओं का समूह (self help group-SHG) बना कर हैंडीक्रॉफ्ट आइटम (handicraft) बनाना शुरू किया. कुछ सीखा और कुछ मन से तैयार किया. मुझे ख़ुशी है कि मैं 15 दूसरी जरूरतमंद महिलाओं को भी रोजगार दे सकी.अब हम देशभर के हस्तशिल्प मेले में जाकर हिस्सा लेते हैं. हमारे प्रोडक्ट को बहुत पसंद किया जा रहा है." नीलकंठ सखी मंडल की अध्यक्ष मनीषा ने यह बात बहुत गर्व से कही. हाल ही में इंदौर में आयोजित मालवा उत्सव (Malwa Utsav) में शामिल होने आए सूरत गुजरात के नीलकंठ सखी मंडल के स्टॉल पर ग्राहकों की बहुत भीड़ रही. </p>
<p>हस्तशिल्प मेले में शामिल हुए इस समूह की अध्यक्ष मनीषा बेन डोबरिया आगे कहती हैं -" हमारे समूह द्वारा तैयार प्रोडक्ट की मार्केटिंग के लिए मेरे पति राकेश डोबरिया पूरा साथ देते हैं.हम कच्छ से ब्लॉक प्रिंट का बचा वेस्ट कपड़ा खरीद कर लाते हैं.इससे फेब्रिक जूलरी तैयार की जाती है. इसके दूसरे आइटम भी तैयार किए जाते हैं." इस समूह से जुडी हुईं कीर्ति बेन कहती हैं - "हम इस से समूह  से जुड़े तभी से हमारी आर्थिक स्थिति में बहुत सुधार हुआ. हम कच्चा माल ले जाकर अपने घर से आइटम सप्लाई कर देते हैं." इसमें सभी महिलाएं अलग -अलग तरह की चीज़ें बनती हैं. इस समूह के काम से जुड़ीं मित्तल कथिरिया भी बहुत खुश है. मित्तल कहती हैं - " मैंने कभी सोचा नहीं था कि घर बैठ कर भी इतना अच्छा काम मिल जाएगा. कच्चे माल से मैं वूडन जूलरी सहित कई तरह के सामान बना लेती हूं. मुझे कहीं जाना भी नहीं पड़ता और कमाई नहीं अच्छी हो जाती है."  </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Ur1lsYbgdOusl6V6qNpE.jpeg" alt="gujarat handicraft"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>समूह के सदस्यों को कई जगह अवार्ड मिल चुके हैं (फोटो क्रेडिट: रविवार विचार)</em></span></p>
<p>गुजरात में भी रोजगार हासिल करना और आत्मनिर्भर बनने की प्रक्रिया में स्वयं सहायता महिला समूह की भूमिका नज़र आने लगी है. नीलकंठ समूह ऐसी हैंडमेड जूलरी बना रहा जो गरीब महिलाओं के सपने और इच्छा तो पूरी कर ही रहा बल्कि समूह से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत कर रहा.अब तक कई जगह इस समूह को सम्मान मिल चुके हैं. समूह की मनीषा आगे बताती है -" महिलाओं को सबसे ज्यादा जूलरी पसंद है और मंहगी जूलरी पहन नहीं सकती.इसे ध्यान में रख सब आइटम बनाए. इसके अलावा सभी हैंडमेड बेल्ट,मिरर, बटंस और प्रिंट कपड़े जो प्रेस के साथ कपड़ों पर स्थाई डिज़ाइन बन जाता है,बनाए जा रहे. "</p>
<p>मनीषा सभी महिलाओं को साथ लेकर चल रही है. उनके पति राकेश कहते हैं -" मुझे ख़ुशी है  कि महिलाओं को इंदौर,बेंगलुरू, मैसूर, दिल्ली. गुजरात के कई शहर में अहमदाबाद,सूरत,बड़ौदा,पावागढ़ सहित कई शिल्प मेलों में बुलाया. समूह की सभी महिलाओं की आर्थिक हालात सुधर गए. और अब वे सभी स्वाभिमान की जिंदगी जी रहीं हैं."</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Sun, 21 May 2023 12:40:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/neelkanth-woman-shg-making-handmade-jewellery-to-become-financially-independent]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9vcYgvUNanmfUyEUBCzT.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9vcYgvUNanmfUyEUBCzT.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[कशीदाकारी से अपनी कहानियां बुनती गुमनाम महिलाएं ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/women-embroidered-their-sufferings-in-punjab-kashmir-kutch-gujarat-and-other-places</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2yxDP67FeXyAL0A2jQmg.jpg"><p>कला हमेशा से ही अपनी छुपी-दबी भावनाओं को साझा करने का एक ख़ूबसूरत ज़रिया रहा है. कला के कई रंग,रूप, और आकार हैं. इसका एक ख़ूबसूरत रूप कशीदाकारी है. कशीदाकारी से सिर्फ फूलों पत्तियों को ही नहीं, पर अपने अनुभवों, भावों, और विचारों को भी सुंदर आकार और रंग दिये जाते हैं. पूरे भारत में कई महिलाओं ने ऐतिहासिक सुईवर्क के ज़रिये अपनी स्वतंत्रता, पहचान और प्रतिरोध को दर्शाया है. पहले के समय में लैंगिक भूमिकाओं और सामाजिक अपेक्षाओं ने कढ़ाई को सिर्फ स्त्रीत्व के रूप में देखा.</p>
<p>इतिहास बताता है कि महिलाओं ने इस सुई धागे से जुड़ी लैंगिक भूमिकाओं को त्याग, इसे क़लम की तरह इस्तेमाल किया और अपनी कहानी बुनदी. पंजाब की फुलकारी एम्ब्रॉइडरी से बनी लताओं और शानदार रंगों के चमकीले पैटर्न उल्लास की भावना को दर्शाते थे. लेकिन,1947 के विभाजन ने इसके पैटर्न को धुंदला और रंगों के फीका कर दिया. बड़ी सहजता से अशांति, विस्थापन और हिंसा से पनपी व्यथा को कशीदाकारी के ज़रिये कपड़े पर उकेरा गया. फूलों और ज्योमेट्रिकल पैटर्न से ऊपर उठकर, कढ़ाई महिलाओं के लिए चुप रहकर अपनी कहानी सुनाने का एक रंगबिरंगा ज़रिया बन गई. उन्होंने अपने जीवन के क्षणों,अनुभवों, विचारों और विश्वासों को सुई धागे कि ज़रिये एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाया. महिलाओं की इस कला के पीछे एक छिपी हुई अनूठी कहानी थी जो उसकी भावनाओं के साथ-साथ उसकी यादों का भी चित्रण थीं. </p>
<p>पंजाब की महिलाओं ने अपने विभाजन के दर्द को दूर करने के लिए कढ़ाई का सहारा लिया. उनकी टेपेस्ट्री कलाकृतियों ने क्रोध के दृश्यों, शरणार्थियों से भरी ट्रेनों, जबरन पलायन, पीछे छूटे घरों और पुरानी यादों का दस्तावेजीकरण किया. परिवार बिखर गए, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हुआ, उनका अपहरण कर लिया गया, और ग़रीबी ज़िंदगी छीन रही थी- ये कहानियां उन्होंने कपड़े पर बुनी. पितृसत्ता में गड़ी बाल विवाह, पर्दा प्रथा और दहेज़ की पीड़ा भी बांटी. ये वो कहानियां थी जो वे सुना नहीं सकती थी, शायद उनका सुनने वाला भी कोई न था. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/lG4bPG1xppYAnh0TAAFM.jpg" alt="embroidery and politics"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Tribune India</em></span></p>
<p>कश्मीर घाटी लंबे समय से हिंसा और विरोध से जूझ रही है. राजनीतिक संघर्ष, इंटरनेट बैन और कर्फ्यू के दौरान, कशीदा ने महिलाओं को अपनी व्यथा बांटने और मुश्किल समय का मुकाबला करने का होंसला दिया. सदियों से चली आ रही यह पारंपरिक कश्मीरी कशीदाकारी धरती की जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर की ख़ूबसूरती को दर्शाती है. इसे ज़्यादातर पुरुषों द्वारा किया जाता था. लेकिन वहां चल रहे टकराव और रोज़गार की खोज में महिलाओं ने पुरुष-प्रधान नौकरियों में अपनी पकड़ बनाई. कशीदा को कश्मीरी महिलाओं ने अभिव्यक्ति और सशक्तिकरण का साधन बनाया. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/cBOLVlsOJSpukDREAq62.jpg" alt="embroidery and politics"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: <span class="cS4Vcb-pGL6qe-lfQAOe">Daily Sabah</span></em></span></p>
<p>ब्रिटिश राज में, सरकार ने भारतीय टेक्सटाइल पर कई तरह की पाबंदियां लगाईं, और कशीदकारों की वस्तुओं पर टैक्स लगाया, जो टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए ख़ासकर बंगाल के लिए एक कठिन लड़ाई साबित हुई. गरीबी और भुखमरी से बचने के लिए बंगाल के लोगों ने कांथा कढ़ाई का सहारा लिया हुआ था जिसपर लगी बंदिशों ने मुसीबत और बढ़ादी. स्वदेशी आंदोलन के दौरान, कांथा कढ़ाई ब्रिटिश  शासन के ख़िलाफ़ विरोध का प्रतीक बनी.  ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार कर भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने और लोगों को आत्मनिर्भर बनने में कांथा कढ़ाई ने सहायता की. विभाजन ने लोगों को पड़ोसी देशों में पलायन करने पर मजबूर कर दिया, जिसके साथ कांथा की संस्कृति दम तोड़ने लगी. एक प्रमुख बंगाली कशीदाकार प्रतिमा देवी ने ग्रामीण महिलाओं को कांथा की कला सिखाकर उन्हें सशक्त बनाया, और साथ ही, वर्षों पुरानी संस्कृति को फिर से जीवित किया. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/aribsMSX1ct5NZmfP9F8.jpg" alt="kantha and politics"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Pinterest</em></span></p>
<p>गुजरात 2002 के दंगों के दौरान, कच्छ में पीड़ित महिलाओं ने अपने दर्द को कलात्मकता में ढाला. घरों और रोज़गारों का बिखर जाना, अपनों की मृत्यु और विस्थापन के दृश्य, सब कुछ कपड़े, फ्रेम और धागों में सिमट गया. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/PKHtdr7zYdGO4wqBFOFZ.jpg" alt="embroidery and politics"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Your Libaas</em></span></p>
<p>ये कहानी सुनाती महिलाएं तो कहीं खो गई, पर उनकी कला अमर है. इंटरनेट पर इनकी कला की तस्वीरें मिल जाएंगी, पर इनके कलाकारों का कुछ पता नहीं. भारत में ऐसे कई कलाकारों को वो पहचान नहीं मिल पाती जिनकी वो हक़दार हैं, सिर्फ इसीलिए क्योकि ये कलाकार चूड़ियां पहनती हैं. आपके घरों में भी दादी-नानी ने कशीदाकारी कर आपके लिए कुछ ख़ास बनाया होगा, माँ ने कभी तोहफ़े में एम्ब्रॉयडरी कर कुछ दिया होगा. इस तरह वो शायद सिर्फ डिज़ाइन नहीं बनतीं, पर सुई धागे से प्रेम बुनती हैं. अगली बार कशीदाकारी की तारीफ करें, तो भूले न कि ये महज़ धागा, रंग, और डिज़ाइन नहीं, एक कशीदाकार की कहानी है.   </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sun, 14 May 2023 11:20:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/women-embroidered-their-sufferings-in-punjab-kashmir-kutch-gujarat-and-other-places]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2yxDP67FeXyAL0A2jQmg.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2yxDP67FeXyAL0A2jQmg.jpg"/></item><item><title><![CDATA[ऐतिहासिक स्मारक जिन्हें बनवाया महिलाओं ने ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/indian-monuments-made-by-female-rulers</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TYUcHKma1vYMRC81F6i1.jpg"><p><em>इतिहास को संजो कर रखने के लिए कई स्मारक और संरचनाएं बनाई गई जो हमारी समृद्ध सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत की गवाही देते हैं. भारत का गौरवशाली अतीत इसके प्राचीन मंदिरों, किलों, महलों और स्मारकों में छुपा है. जब हम देश भर में फैली इन संरचनाओं की ख़ूबसूरती की प्रशंसा करते हैं, तो हम अक्सर इनसे जुड़े लोगों की कहानियां भूल जाते हैं. इन स्मारकों के ज़रिये अपने प्रियजनों को श्रद्धांजलि देने वाले शक्तिशाली पुरुष शासकों के सैकड़ों उदाहरणों से इतिहास भरा पड़ा है. लेकिन, महिलाओं ने भी कई प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारकों और संरचनाओं को बनवाया था जिसकी जानकारी काफ़ी कम है. इतिहास गवाह है, महिला शासकों ने अपने और अपने से जुड़े लोगों की कहानियों को इन स्मारकों के ज़रिये अमर कर दिया. ऐसे कुछ, महिलाओं द्वारा बनवाये गए स्मारकों की कहानी जानते हैं. </em></p>
<p><strong>हुमायुं का मकबरा, दिल्ली</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/86YFHV1ZYFUndSQUbgP5.jpg" alt="humanyu"><br>यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज,मशहूर हुमायूं का मक़बरा मुगल साम्राज्ञी हमीदा बानू बेगम ने उनके पति हुमायूं के निधन के बाद बनाया था. यह मुगलों के प्रसिद्ध उद्यान मकबरों में पहला है. एक प्रभावशाली उच्च मंच पर स्थित, मकबरे में एक क्लासिक प्याज़ के आकार का गुंबद है. मकबरे के परिसर में अरब की सराय, ईसा खान का मकबरा, नई का गुंबद और नीली गुंबद जैसी अन्य इमारतें भी हैं.</p>
<p><strong>माहिम कॉज़वे, मुंबई</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/tK8lFWxLdpoExk5wGa5V.jpg" alt="mahim causeway"><br>मुंबई में माहिम कॉज़वे 1841-1846 के बीच साल्सेट द्वीप को माहिम से जोड़ने के लिए बनाया गया था. दो द्वीपों के बीच का इलाका दलदली और खतरनाक था जिसे पार करते समय कई लोगों की जान चली गई. इन हादसों ने सेतु की ज़रुरत बढ़ादी. लेकिन जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने सेतु बनवाने के लिए धन देने से इनकार कर दिया, तो अवाबाई जमशेदजी जीजीभॉय आगे आई. उन्होंने सेतु बनाने के लिए कुल 1,57,000 रुपये की लागत दान की थी. माहिम कॉज़वे मुंबई शहर की लाइफलाइन बानी हुई है. </p>
<p><strong>मोहिनीश्वर शिवालय मंदिर, गुलमर्ग</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/df4TZD1I60BKPWWGr1La.jpg" alt="Gulmarg"><br>मोहिनीश्वर शिवालय मंदिर जिसे महारानी शंकर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, कश्मीर घाटी में गुलमर्ग शहर के बीच-ओ-बीच है. सुंदर बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच एक छोटी पहाड़ी पर स्थित, यह मंदिर 1915 में महारानी मोहिनी बाई सिसोदिया ने बनवाया था, जो कश्मीर के तत्कालीन राजा हरि सिंह की पत्नी थीं. मंदिर इस तरह से बनाया गया है कि यह गुलमर्ग के सभी कोनों से दिखाई देता है. इसे कई हिंदी फिल्मों में दिखाया गया है, जिसमें फिल्म 'आपकी कसम' का प्रसिद्द गीत 'जय जय शिव शंकर' शामिल है, जिसमें सुपरस्टार राजेश खन्ना और मुमताज ने अभिनय किया था.</p>
<p><strong>ताज-उल-मस्जिद, भोपाल, मध्य प्रदेश</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/8HvLE66V0cV74XlvoOBX.jpg" alt="Taj ul masjid"><br>भारत की सबसे बड़ी मस्जिद, ताज-उल-मस्जिद या 'मस्जिदों के बीच का ताज', भोपाल की बेगमों द्वारा बनवाया गए भव्य स्मारकों में से एक है. जिन्होंने 1819 से 1926 तक शासन किया था और वे भारत में राजनीतिक और सामाजिक बदलाव लाने के लिए जानी जाती हैं. बेगम शाहजहां ने अपने शासनकाल के दौरान कई महलों, मंदिरों और मस्जिदों का निर्माण करवाया था. उहोंने मस्जिद के लिए वास्तुकार अल्लाह रक्खा खान को नियुक्त किया. लेकिन 1901 में बेगम शाहजहां के निधन के बाद निर्माण रुक गया. उनकी बेटी सुल्तान जहां बेगम ने काम वापिस शुरू करवाया और, आखिरकार 1985 में मस्जिद बनकर तैयार हुई. मस्जिद के नौ गुंबदों, आंगन के तालाब में बनता प्रतिबिंब, और  महिलाओं के लिए नमाज़ अदा करने की अलग जगह ताज-उल-मस्जिद की कुछ विशेषताएं है.  </p>
<p><strong>विरुपाक्ष मंदिर, पट्टदकल, कर्नाटक</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/MhuXVkokIDI5M3y7f3bw.jpg" alt="Virupaksh karnatak"><br>उत्तरी कर्नाटक में मालाप्रभा नदी के किनारे मंदिरों का एक समूह है, जिसे कई लोग चालुक्य मंदिर वास्तुकला का प्रतीक मानते हैं. लेकिन इन यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज रॉक-कट संरचनाओं में, सबसे उत्कृष्ट विरुपाक्ष मंदिर है. विरुपाक्ष मंदिर रानी लोकमहादेवी ने बनवाया था. 740 ईस्वी के आसपास पूरा हुआ. पल्लवों के खिलाफ अपने पति विक्रमादित्य द्वितीय की जीत का जश्न मानाने के लिए उन्होंने मंदिर का निर्माण करवाया. मंदिर का निर्माण कांची के मूर्तिकारों ने किया. प्रवेश द्वार पर नंदी की विशाल आकृति, नटराज और रावणानुग्रह जैसे देवताओं की उत्कृष्ट मूर्तियां, और महाभारत और रामायण की कथाओं की नक्काशी मंदिर की कुछ विशेष्ताएं हैं.</p>
<p><strong>इत्तिमाद-उद-दौला, आगरा, उत्तर प्रदेश</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/uFQI9NaqOVdfoA798daU.jpg" alt="ittimad"><br>इत्तिमाद-उद-दौला एक बेटी की अपने पिता के प्रति समर्पण की गवाही थी. मक़बरे को सम्राट जहांगीर की पत्नी मुगल साम्राज्ञी नूरजहां ने अपने पिता मिर्जा गियास बेग की याद में बनवाया था. मिर्ज़ा को अकबर द्वारा इत्तिमाद-उद-दौला की उपाधि दी गई थी, और वे जहांगीर के शासनकाल में वज़ीर के पद तक पहुंचे थे. उनकी मृत्यु के बाद, नूरजहाँ को 1622 से 1628 ईस्वी तक आगरा में इस स्मृति में बनवाने में सात साल लग गए. यह पूरी तरह से संगमरमर में बना भारत का पहला स्मारक बना, जिसके बारे में कहा जाता है कि अपने सौतेले बेटे सम्राट शाहजहाँ द्वारा बनवाये ताजमहल को भी प्रेरित किया था.</p>
<p><strong>रानी की वाव, पाटन, गुजरात</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/REqAjJMw7Tailbeuyshr.jpg" alt="Rani ki vav "><br>पाटन, गुजरात में सरस्वती नदी के तट पर बनी, रानी की वाव 11 वीं शताब्दी में रानी उदयमती ने अपने पति राजा भीमदेव प्रथम के स्मारक के रूप में बनवाया था. आश्चर्यजनक बावड़ी मारू-गुर्जर स्थापत्य शैली में बनी है. यह उच्च कलात्मक गुणवत्ता के मूर्तिकला पैनलों के साथ सीढ़ियों के सात स्तरों में बंटा है; 500 से अधिक सिद्धांत मूर्तियां और 1,000 से अधिक छोटी मूर्तियां धार्मिक, पौराणिक और धर्मनिरपेक्ष इमेजरी को जोड़ती हैं. 100 रूपए के भारतीय नोट पर बानी तस्वीर रानी की वाव की ही है.   </p>
<p><strong>दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/kCHqWZUXrsdAU1XgMdR1.jpg" alt="Dakshineswar Kolkata"><br>रानी रश्मोनी सिर्फ रानी नहीं, बल्कि एक समाजसेवी थीं. एक मछुआरे के परिवार में जन्मी, रानी रश्मोनी ने ईस्ट इंडिया कंपनी के मछली पकड़ने के कर के विरोध के अलावा सती, बहुविवाह और बाल विवाह के खिलाफ आवाज़ उठाई, और बंगाल की जनता के बीच लोकप्रिय हो गई. उन्होंने 1857 में 20 एकड़ जमीन खरीदी और बंगाल स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर की शैली में नौ मीनारों के साथ दो मंजिला संरचना का निर्माण किया. एक शूद्र महिला के मंदिर के निर्माण के खिलाफ ब्राह्मण पुजारियों के प्रतिरोध के बावजूद उन्होंने निर्माण कार्य जारी रखा. देवी काली के रूप, भवतारिणी की मूर्ति को मंदिर में रखा गया, जहां रामकृष्ण परमहंस ने मंदिर के मुख्य पुजारी के रूप में सेवा की.</p>
<p><strong>मिर्जन किला, कुम्ता</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/rCDXQIdj58wVfM1YKU9U.jpg" alt="mirjan fort"><br>अघनाशिनी नदी के तट पर स्थित, कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित यह स्मारक अपनी उल्लेखनीय आर्किटेक्चर कला के लिए जाना जाता है. इसे 16वीं शताब्दी में भारत की 'काली मिर्च' की रानी के रूप में भी प्रसिद्द गरसोप्पा की रानी चेन्नाभैरदेवी ने बनवाया था. मिर्जन किले में रहने वाली रानी ने इसे काली मिर्च शिपिंग कर अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया. तुलुवा-सलुवा कबीले से आने वाली इस रानी ने 54 वर्षों तक गरसोप्पा की रानी के रूप में शासन किया. यह किला कई युद्धों का गवाह रहा है. </p>
<p><strong>खैर-उल-मंज़िल, दिल्ली </strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/3Wv8Bu3p28GStMREemNo.jpg" alt="Khairul manzil."><br>नई दिल्ली में स्थित, इस ऐतिहासिक मस्जिद का निर्माण 1561 में सम्राट अकबर की नर्सों में से एक, और उनके दरबार की एक प्रभावशाली महिला महम अंगा ने करवाया था. मस्जिद मथुरा रोड पर पुराना किला के सामने शेरशाह गेट के दक्षिण पूर्व में स्थित है. यह मुगल वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना. मस्जिद दो मंजिला संरचना है जहां पश्चिम की ओर प्रार्थना कक्ष हैं और बीच में बड़ा प्रांगण है. इस मस्जिद का मुख्य आकर्षण लाल बलुआ पत्थर से बना विशाल प्रवेश द्वार है. </p>
<p><em>अगर आप इन जगहों पर अब तक नहीं गए हैं, तो एक बार ज़रूर जाएं. स्मारक की डिटेलिंग, बनावट और वास्तुकला के साथ-साथ उसके पीछे छुपी कहानी को जानने की कोशिश ज़रूर करें. </em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Tue, 02 May 2023 15:38:34 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/indian-monuments-made-by-female-rulers]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TYUcHKma1vYMRC81F6i1.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TYUcHKma1vYMRC81F6i1.jpg"/></item><item><title><![CDATA[गुजरात की नारी सब पर भारी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/gujarat-woman-starts-her-business-of-bagsara-synthetic-jewelry</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/O3bOuPuEatKGg5dq357m.jpg"><p dir="ltr">गुजरात, एक ऐसा राज्य, जहां हर व्यक्ति के अंदर कुछ करने का जज़्बा, जोश और दृढ संकल्प है. फिर महिलाएं कैसे पीछे रह सकती है? आज की नारी सब पर भारी तो है ही, और वे अगर गुजरात से जुड़ी हो तो बात ही कुछ और है. गुजरात की मिट्टी से पनपी ना जाने कितनी कहानियां है, जिनमें महिलाओं के हौसले को सलाम करने का दिल करता है. गुजरात के अहमदाबाद जिले के चांदखेड़ा की एक महिला रिनू यादव 'बगसरा सिंथेटिक गहनों' का कारोबार करती है. 'मिलाप फॉउंडेशन' से रिनु ने अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए लोन उठाया और आज अपने परिवार का ख़्याल रख रही है. परिवार के साथ वे अपने बिज़नेस को भी दिन दुगनी रात चैगुनी बढ़ा रही है. रिनु का एक ही सपना रहा कि वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पाएं.</p>
<p dir="ltr">रिनु बताती है, "मुझे व्यवसाय से इतना फायदा हो रहा है कि मैं हर महीने 4000 रुपए तक बचा पा रही हूं. रिनु के बूढ़े ससुर बहुत बीमार थे, अपने व्यवसाय से पैसे बचा रिनु ने उनका इलाज भी करवाया.वे अपने साथ परिवार को भी खुशहाली भरा जीवन दें रही है. उनकी इस कहानी ने ना जाने कितनी महिलाओं को प्रेरित भी किया होगा. </p>
<p dir="ltr">रिनू की तरह और भी कई महिलाएं हैं जो बांस से बने उत्पाद, कढ़ाई से कपड़े, प्रोविजनल स्टोर, ब्यूटी पार्लर, डेयरी बिजनेस और टेलरिंग जैसे कई इनोवेटिव बिजनेस चला रही हैं. इन बिज़नेस को चलाने के लिए इन महिलओं को सिर्फ थोड़ी आर्थिक मदद कि ज़रूरत पड़ती है, जो मिलाप जैसे फॉउण्डेशन्स पूरी कर देते है. उनकी क्षमता को उजागर करने में मदद करने से बेरोजगारी के आकड़ों में तेजी से कमी आएगी. देश की हर महिला को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए. गुजरात दिवस के दिन इस कहानी ने उज्ज्वल और सशक्त भारत की सोच में एक और कड़ी जोड़ी है. हर राज्य की सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयास करती है. स्वयं सहायता समूह इस बात का एक बहुत बड़ा उदाहरण है. महिलाएं इन सभी प्रयासों से तेजी से आगे बढ़ेंगी और बहुत जल्द बदलाव आएगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Mon, 01 May 2023 13:36:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/gujarat-woman-starts-her-business-of-bagsara-synthetic-jewelry]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/O3bOuPuEatKGg5dq357m.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/O3bOuPuEatKGg5dq357m.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मीरा बनी मर्दानी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/meera-with-200-shg-women-destroyed-liquor-distillery</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aH1Iohb8fmtoZe599JYn.jpg"><p>अबला समझ कर महिला को आज तक बहुत दबाया गया है. उनके साथ ज़ोर ज़बरदस्ती से ना जाने कितने गलत काम भी किये गए. और इन सब अनहोनियों का सबसे बड़ा कारण कहीं न कहीं शराब बनी हैं. देश दुनिया में महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार और ज़ुल्म में शराब भी एक कारण है. भारत में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहुत से कानून बनते रहे हैं. शराब के मामले में भी सरकार आए दिन कुछ न कुछ नया करती रहती हैं. भारत में गुजरात के बाद बिहार को 'ड्राई स्टेट' बना दिया गया . </p>
<p>भले ही बिहार और गुजरात में शराब खुलेआम नहीं बिक रही हो, लेकिन ये बात किसी से छुपी नहीं हैं की शराब का कला धंधा दोनों ही राज्यों में दिन दुगना रात चौगुना बढ़ रहा हैं. काला बाज़ारी के बढ़ते हुए इस जंजाल में ना जाने कितने मासूम लोग फास जाते हैं. शुरुआत किसी एक से होती हैं, और शिकार उससे जुड़ा हर व्यक्ति हो जाता हैं. जहरीली शराब इस शराबबंदी का खतरनाक पक्ष हैं. इन 'सो कॉल्ड ड्राई स्टेट्स' में जहरीली शराब कई मौतों का कारण बनी हैं.</p>
<p>महिलाओं ने बहुत सहन करा, लेकिन जब बात हद से आगे बढ़ जाए, तो लड़की हो या औरत, तो उसे महिषासुर मर्दिनी का रूप लेना पड़ता है. मीरा ने बिहार में भी यहीं रूप लिया, उसने यह बात साबित कर दी की आज महिलाएं किसी से कम या कमज़ोर नहीं है. ग्रामीण महिलाओं को एकजुट कर जब मीरा सड़क पर उतरी तो देखते ही देखते उन्होनें अवैध शराब की दर्जनों भट्टियां तबाह कर दीं. </p>
<p>अपने इलाके में पूर्ण शराब बंदी लागू होने से पहले ही मीरा ने गांव की महिलाओं को इकठ्ठा करके 200 से ज़्यादा SHG तैयार किये,  जो अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ़ आवाज़ उठा रहे थे. बात सिर्फ़ भट्टियां तबाह करने तक ही सीमित नहीं है. जो लोग इन अवैध भट्टियों को चला रहे थे, उनकी भी अच्छी खासी खबर ली गई. मीरा का डर इस कदर लोगों में मन में बैठ गया की बहुत से लोगो ने तो शराब को हाथ तक लगाना बंद कर दिया. </p>
<p>वर्ष 1996 से वर्ष 2002 तक नेट्रोडेम जमालपुर से फील्ड वर्कर के रूप में जुड़कर मीरा ने अलग-अलग गांव में 200 से अधिक स्वयं सहायता समूहों का गठन किया. अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण समिति के जिला स्तरीय कमेटी के सदस्य के रूप में कार्य कर चुकी मीरा फिलहाल आंगनवाड़ी सेविका हैं. भले ही अब वे सेविका के रूप में दुनिया के सामने हैं , लेकिन उन्होनें आज तक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम बंद नहीं किया. कोसी त्रासदी के दौरान मीरा ने सहरसा जाकर कैंप में रह रही महिलाओं को बांस से बनने वाली चीज़ों के बारे में बताया और स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया. </p>
<p>मीरा के सामाजिक कार्य को देखते हुए बिहार वैलेंट्री एसोसिएशन पटना ने उन्हें वर्ष 2008 में सम्मानित भी किया. वहीं वर्ष 2006 में दिल्ली में आयोजित महिला उनमुखी कार्यशाला में बिहार का एकमात्र महिला प्रतिनिधि प्रतिनिधि के रूप में भाग लेने का अवसर मिला. मीरा ने ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं की समस्या को प्रमुखता से सामने रखा और इसके लिए मीरा ने गांव में महिलाओं के हित के लिए अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ खुलकर आगे आईं. आंगनवाड़ी सेविका के रूप में कार्य कर रही मीरा हमेशा महिलाओं के हित की रक्षा को लेकर आज भी अपनी आवाज को बुलंद कर रही है. </p>
<p>वर्ष 2003 से 2007 तक कैथलिक चर्च बरियारपुर से जुड़कर मीरा ने क्षेत्र में 250 स्वयं सहायता समूह बना कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा. वहीं गंगा दियारा क्षेत्र की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिविर का आयोजन कराया जिसमें महिलाओं को सत्तू, बेसन, मसाला, अगरबत्ती, पापड़ आदि बनाने का प्रशिक्षण दिलाकर काम से जोड़ा.</p>
<p>मीरा देवी ने बिहार में ऐसे कितने ही स्वयं सहायता समूह शुरू करवाए जिनमें आज महिलाएं अपनी रोज़ी रोटी कमा रही है और अपने परिवार को मदद भी कर रही है. मीरा देवी ने जो काम किया उसकी जितनी सरहाना की जाए कम है. सिर्फ़ बिहार में ही क्यों, अगर पुरे देश की महिलाएं अपने स्वयं सहायता समूह तैयार करे और ऐसे गैरकानूनी धंधो को बंद करवा दे, तो देश को सुधरने में ज़्यादा समय नहीं लगेगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 04 Apr 2023 16:29:55 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/meera-with-200-shg-women-destroyed-liquor-distillery]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aH1Iohb8fmtoZe599JYn.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aH1Iohb8fmtoZe599JYn.jpg"/></item></channel></rss>