<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ हाईवे]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/haaiive</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/haaiive" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 11 Jul 2023 17:26:34 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[जेंडर नही टैलेंट से तय होनी चाहिए पे स्केल ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/gender-should-not-be-the-deciding-factor-of-the-pay-scales-in-bollywood-industry</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/67LpHligpYcKyHSvdTKP.jpg"><h1>पे पैरिटी इन बॉलीवुड</h1>
<p>फिल्मी जगत, एक सपना जहां <strong>लाइट्स, कैमरा, एक्शन</strong>, पर हर इंसान की ज़िंदगी चलने और रुकने लगती है इस दुनिया में. बड़े परदे के वो एक्टर्स जिनकी पूरी दुनिया दीवानी है, वो जब सामने आए तो सपना पूरा होने जैसा लगता है. एक कलाकार को जब हम उस बड़ी सी स्क्रीन पर देखते है, तो लगता है इनकी ज़िंदगी कितनी अलग होगी. लेकिन अलसियत में ऐसा कुछ नहीं है. आम लोगों जैसी लाइफ स्टाइलहै इनकी. हां थोड़े प्रिविलाजेस तो होते है, लेकिन इसके अलावा ऐसा कुछ नहीं है जो हमसे अलग हो.</p>
<p>अगर देखा जाए तो सेलेब्रिटीज़ की लाइफ में भी आम लोगों जैसी इशूज़ और कंसर्नस है. सबसे बड़ा कंसर्न जो रिसेंटली और भी ज़्यादा डिस्कशन में आया है वो है <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/tata-technologies-limited-going-to-start-rainbow-program-for-women-workforce-to-enhance-gender-diversity" rel="dofollow"><strong>जेंडर पे गैप</strong></a>. सोच के लगता ही नहीं कि ये कॉर्पोरेट वाला टर्म बॉलीवुड में भी फैला हुआ है. लेकिन सच ये है कि एक एक्ट्रेस को आज भी मूवीज़ करने के लिए एक एक्टर से कम पे किया जाता है.</p>
<h2>जेंडर पे गैप फेस करती बॉलीवुड एक्ट्रेसेस</h2>
<p>महिलाओं को हर जगह ही कम समझना और उनको पुरुषों से कम ऐडवानटेजेस देना, ये एक ट्रेंड सा बन गया है दुनिया में. बॉलीवुड में आज जो एक्ट्रेस आ चुकी है वो इतनी बेहतरीन कलाकार है कि फिल्मों को उनके होते हुए किसी हीरो की ज़रूरत ही नहीं होती. लेकिन आज भी <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/gender-pay-gap-in-india">पे पैरिटी</a> जैसे इशूज़ इंडस्ट्री में आए दिन की बात हो गयी है.</p>
<p><strong>अमीषा पटेल</strong> ने हाल ही में अपनी नयी फिल्म 'ग़दर 2' की रिलीज़ के बाद इंटरव्यू में कहा कि- "<em>मेल एक्टर्स हायर पे डिसर्व करते है, क्यूंकि एक फिल्म उन्ही के कारण चलती है, पे पैरिटी जैसा कुछ नहीं होता.</em>" सवाल ये है ही नहीं कि फिल्म किसके कारण चल रही है, सवाल ये है कि किसी भी कलाकार को उसकी स्क्रीन टाइम और टैलेंट के बेसिस पर क्यों नहीं जज किया जाता?</p>
<h3> बॉलीवुड की फीमेल सेंट्रिक फिल्म्स </h3>
<p><em>राज़ी में आलिया भट्ट, नाम शबाना में तापसी पन्नू, <a href="https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/indian-female-ips-officers">मर्दानी </a>में रानी मुखर्जी, हाईवे और परी में अनुष्का शर्मा, कहानी में विद्या बालन, बाजीराव मस्तानी और पीकू में दीपिका पादुकोण, द स्काए इज़ पिंक और सात खून माफ़ में प्रियंका चोपड़ा, क्वीन में कंगना रनौत</em>... इन सबने साबित कर दिया है कि फिल्म सिर्फ एक फीमेल एक्ट्रेस चला भी सकती है और उससे करोड़ों की दिलों पर राज भी कर सकती है.</p>
<p><strong>अमीषा पटेल</strong> ने उसी इंटरव्यू में यह भी कहा था कि एक <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/remembering-smita-patil-known-for-her-female-centric-characters-feminism-and-perfection-in-the-bollywood-industry">लीड फीमेल एक्टर </a>की मूवी परफॉरमेंस देखे तो हमेशा एक मेल एक्टर से कम ही मिलेगी. इस तरह के थॉट प्रोसेस सोचने पर मजबूर कर देती है कि एक फीमेल एक्टर इस तरह की बात कैसे बोल रही है? यह सोच इतनी रिग्रेसिव है कि आज महिलाओं की प्रोग्रेस के साथ मैच ही नहीं कर सकती.</p>
<p>और बात आज की नहीं है, 80s और 90s के टाइम पर भी कुछ फिल्में जैसे <strong>मदर इंडिया, चालबाज़, बेटा, कहानी, दामिनी, अर्थ, पिंजर</strong>, कुछ ऐसी मूवीज़ जो अपने वक़्त में चली ही फीमेल लीडस् के कारण थी.</p>
<p><img alt="Equal pay scale for all genders" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/507x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/hyapeT7ZHKeZxCfOpxh7.jpg" class="center" style="width: 507px;"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Parity Consulting</em></span></p>
<h3>जेंडर बेस्ड पे पर सोच बदलना ज़रूरी</h3>
<p>सोच ये है की स्क्रीन टाइम के हिसाब से एक्टर्स को पे किया जाना चाहिए, लेकिन सच तो ये है की किसी के स्क्रीन टाइम का उनके टैलेंट से कोई रिलेशन नहीं है. पीकू मूवी में दीपिका को अमिताभ बच्चन और इरफ़ान खान से ज़्यादा पे किया गया था. और वह एक सुपरहिट फिल्म रही है. अमिताभ बच्चन को तो शायद ही कोई नहीं जनता होगा. इरफ़ान खान भी उस मूवी के लीड और भारत में बहुत फेमस एक्टर थे. लेकिन बैरियर तोड़ा गया और दीपिका को ज़्यादा पे किया गया.</p>
<p>तो यह कहना कि कोई भी फिल्म एक फीमेल के कारण कभी नहीं चलती, यह कितना सही है? इंडस्ट्री में इतने साल से काम करने वाले लोग ही अगर इस तरह की सोच रखेंगे तो बाहर वालो से क्या ही उम्मीद कर सकते है? यह बात किसी से नहीं छुपी है की महिलाएं और लड़कियां कितनी तेजी से आगे बढ़ रही है. कुछ फ़ील्ड्स में तो हाल ये है कि लड़कियों की रफ़्तार को मैच ही नहीं कर पा रहे लड़के. चाहे बॉलीवुड की चमक हो या ऑफिस की भागदौड़, सोच बदलनी ज़रूरी है. महिलाओं को अगर <strong>इक्वल राइट्स</strong> देने की बात की जाती है तो, शुरुआत <strong>पे पैरिटी और जेंडर पे गैप को खत्म करने से होनी चाहिए</strong>.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 11 Jul 2023 17:26:34 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/gender-should-not-be-the-deciding-factor-of-the-pay-scales-in-bollywood-industry]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/67LpHligpYcKyHSvdTKP.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/67LpHligpYcKyHSvdTKP.jpg"/></item><item><title><![CDATA[सुरों के सुकून का 'हीलिंग ख़याल' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/zebunnisa-bangash-has-started-a-project-named-healing-khayal</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8vJiDoTReskmYSod72eq.jpg"><p dir="ltr"><span>संगीत सुनने वाले को मोह लेता है और गाने वाला मन से ख़ुशी महसूस करता है. कुछ ऐसी ताकत है उन सात सुरों में, जो बिना किसी दवा के दिलों का इलाज करने के काबिल है. वैसे तो हर संगीत कि अपनी कुछ ना कुछ खासियत होती ही है, लेकिन <strong>भारतीय क्लासिकल म्यूज़िक</strong> की पूरी दुनिया कायल है. भले ही क्या गाया जा रहा है वो समझ ना आये लोगों को, लेकिन सुर और संगीत इतना मधुर होता है कि दीवाना बनाए बिना नहीं छोड़ता.</span></p>
<p dir="ltr"><span><strong>ख़्याल गायकी</strong>, भारत से दुनिया को दी हुई एक ऐसी विरासत, जो गायकी की स्टाइल के रूप में किसी चमत्कार से काम नहीं. ख्याल गायकी की शुरुआत 13वी शताब्दी में <strong>आमिर खुसरो</strong> ने की. उन्होंने <strong>दिल्ली घराना या कव्वाल बच्चन का घराना</strong> भी स्थापित किया. देश में भले ही आज लोग ख्याल गायकी को मनोरंजन का ज़रिया मान लिया हो, लेकिन यह इससे कई ज़्यादा है.</span></p>
<p dir="ltr"><img alt="Zebunnisa Bangash" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/327x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/932gXDUmJFm5WZ3hjLoK.png" style="width: 327px;" class="center"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Coke Studio</em></span></p>
<p dir="ltr"><span>पूरी दुनिया में <strong>फेमस पाकिस्तानी गायिका-गीतकार, ज़ेबुन्निसा बंगश, </strong>ने इस बात को समझ लिया है और '<strong>हीलिंग ख़्याल</strong>' नाम का प्रोजेक्ट लांच किया. ज़ेब ने <strong>उस्ताद नसीरुद्दीन सामी</strong> से दीक्षा प्राप्त की, जो दिल्ली घराने के आखरी बचें दिज्जगों में से एक है. हाईवे (2014), फितूर (2016) और मद्रास कैफे (2013) जैसी फिल्मों में हिट गानों में अपनी आवाज देने वाली बंगश 10 साल से <strong>लाहौर में गुरु उस्ताद नसीरुद्दीन सामी</strong> से ख्याल की ट्रेनिंग ले रही हैं.</span></p>
<p dir="ltr"><span> <img alt="Ustad Sami" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/374x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/iLkb4Ji5WhHygUF6TknW.jpg" style="width: 374px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr"><em><span style="font-size: 8pt;">Image Credits: India Today</span></em></p>
<p dir="ltr"><span>ज़ेब ने जब उनसे सीखना शुरू किया तब से ही वे समझ गयी थी, की ख्याल गायकी सिर्फ संगीत नहीं, एक हीलिंग प्रोसेस है. अपनी इस एक डेकेड लम्बी जर्नी में उन्होंने सेल्फ डिस्कवरी और हीलिंग का जो बेजोड़ ज्ञान लिया, वो उसे दुनिया के साथ शेयर करना चाहती थी.</span></p>
<p dir="ltr"><span>ज़ेब कहती है- "<em>उस्ताद सामी ने मुझे जो सिखाया वह सिर्फ संगीत नहीं, ख्याल के माध्यम से हीलिंग की एक बड़ी प्रक्रिया थी. मुझे एहसास हुआ कि मुझे जो सिखाया जा रहा था वह सैकड़ों वर्षों की वंशावली थी, और इस संगीत में आध्यात्मिक स्वर थे.</em>"</span></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="Healing Khayal" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/335x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/ZL8Qjx8w7OcqllSbCMet.webp" style="width: 335px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Last FM</em></span></p>
<p dir="ltr"><span>बस इसीलिए ज़ेब ने ठान ली की वे इस चमत्कार को दुनिया के सामने लाकर ही रहेंगी. ज़ेब की कड़ी मेहनत के बाद आज वे अपने प्रोजेक्ट, 'हीलिंग ख्याल' को लॉन्च करने के लिए बेहद एक्साइटेड हैं- एक चार महीने की रेजीडेंसी जहां छह लोग, जिन्होंने संगीत के इस रूप को कभी नहीं सीखा है, उस्ताद सामी से प्रशिक्षण लेंगे. साथ ही, जॉन्स हॉपकिन्स से होमायरा ज़ियाद समूह के पर्सनल और कल्चरल वेलबींग पर ख्याल सीखने के असर की जांच करेंगी. इसके <strong>रिजल्ट्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी</strong> की एक क्लास (एंशिएंट म्यूज़िक एंड रिलिजन) में बताए जाएंगे.</span></p>
<p dir="ltr"><img alt="Zebunnisa Bangash" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/348x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/xEU313cC9LSea7GHWmHN.jpg" style="width: 348px;" class="center"></p>
<p dir="ltr"><span><em><span style="font-size: 8pt;">Image Credits: Sound Cloud</span></em></span></p>
<p dir="ltr"><span>ज़ियाद और बंगश की मुलाकात 2018 में <strong>न्यूयॉर्क में डोरिस ड्यूक फाउंडेशन </strong>द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में हुई थी. ज़ेब चुनिंदा कलाकारों में से एक थीं, और दोनों महिलाओं के बीच बातचीत लगभग तुरंत ही शुरू हो गयी. ज़ेब ने कहा, "<em>हमने ख्याल और इसकी माइक्रोटोनल कम्प्लेक्सिटीज़ के बारे में विस्तार से बात की.</em>" और तभी इन लोगों ने तय किया की वे इस कला से ज़्यादा उपचार को सबके सामने लाएंगे.</span></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="Zeb Bangash" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/350x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/WWqisOsriU5Esx0gjovZ.jpg" style="width: 350px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr"><em><span style="font-size: 8pt;">Image Credits: Daily Times</span></em></p>
<p dir="ltr"><span>अपने प्रोजेक्ट को विस्तार से समझते हुए ज़ेब बताती है- “<em>ख्याल एक माइक्रोटोनल प्रणाली पर आधारित है जहां वे 12-नोट प्रणाली को लागू नहीं करते हैं बल्कि एक सप्तक के में 49-नोट प्रणाली को एम्प्लॉय करते हैं. ये सभी माइक्रोटोन हीलिंग प्रोसेसेज के लिए अलग अलग राग और टोन में बंधी हुई है.</em>" जब ज़ेब सामी से  सीख रहीं थी, तो हर साल उन्हें यही एक बात समझ आती कि <strong>शास्त्रीय संगीत</strong> मानव जाति की भलाई के लिए बनाया गया था.</span></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="Zeb bangash" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/348x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/acTiNrHK1uRYeaOXGWcM.jpg" style="width: 348px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr"><em><span style="font-size: 8pt;">Image Credits: Sound Cloud</span></em></p>
<p dir="ltr"><span>ज़ेबुन्निसा बंगश का यह प्रोजेक्ट एक अलग प्रकार की पहल है, जो जिसे आज तक कभी भी इतने बड़े स्तर पर नहीं शुरू किया गया. जानते सब थे, की संगीत में कुछ तो ऐसे है जो अलग है, लेकिन इसे पहचाना ज़ेबुन्निसा ने और अब पूरी दुनिया की पता चलेगी संगीत की ताकत.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Thu, 06 Jul 2023 11:11:48 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/zebunnisa-bangash-has-started-a-project-named-healing-khayal]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8vJiDoTReskmYSod72eq.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8vJiDoTReskmYSod72eq.jpg"/></item></channel></rss>