<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ इंदौर]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/indaur</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/indaur" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 18 Apr 2026 16:57:50 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[पराली जलाने के विरुद्ध जला रही जागरूकता का अलख ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/stories-of-women/awareness-is-being-raised-against-stubble-burning-an-innovation-by-farmer-friends-in-indore-district-of-madhya-pradesh-which-has-become-an-example-11740465</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/04/18/red-bold-finance-youtube-thumbnail-11-2026-04-18-16-40-46.jpg"><p>मप्र के इंदौर जिला अंतर्गत धुलेट गांव पिछले कुछ समय से चर्चा में है. चर्चा का कारण यहां की रहने वाली पपीता रावत है. पपीता, स्वयं सहायता समूह में सक्रिय अध्यक्ष होने के साथ देखते ही देखते नवाचार करने के लिए पहचान बन गई. इस पूरे इलाके में किसान परिवारों में काउंसलिंग करने पपीता रावत पहुंच रही.</p>
<h2>600 बीघा खेत में पराली जलाने से बचाया !</h2>
<p>जिले के <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/dhulet-indore-shg-women">धुलेट</a> गांव के आसपास दूर-दूर तक कोई भी किसान अब अपने खेत में पराली (गेहूं कटाई के बाद बचे हुए ठूंठ,अवशेष) नहीं जलाता. इसका कारण पपीता रावत है. पपीता रावत बताती है -"शुरुआती दिनों में मैं घर ही रहती और मेरे पति महेश मजदूरी करने जाते थे. घर में तंगी बनी रहती. एक दिन गांव में आजीविका मिशन के अधिकारी आए. द्वारकाधीश सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाया.सिलाई मशीन ली और काम शुरू किया. इसके बाद मैंने लोन लेकर 'स्ट्रा रीपर मशीन' खरीद ली. गांव सहित आसपास के किसान परिवारों को पराली जलाने नुकसान और भूसा तैयार करने के फायदे बताए. देखते ही देखते इस साल हमने 600 बीघा से ज्यादा खेत में फसल कटने के बाद पराली जलने से बचा लिया. इस बार पराली से भूसा तैयार कर किसानों को लाभ पहुंचाया. वे इसका उपयोग मवेशियों के 'केटल फीड' के रूप में कर रहे. इस साल हमने लगभग साढ़े तीन लाख रुपए का लिए."<br>डे आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक गायत्री राठौड़ बताती है-"इस समूह को विलेज ऑर्गेनाइज़ेशन के साथ आस्था संकुल संगठन खुड़ैल से जोड़ा गया.<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/by-becoming-krishi-sakhi-hundreds-of-shg-women-became-kisan-didis-in-sehore-mp-4605900">किसान दीदी</a> के रूप में पपीता रावत बेहतर काम कर रही. पशु पालन से जुड़कर भी चार मवेशियों के माध्यम से दूध उत्पादन का व्यवसाय कर रही है."</p>
<h2>सखियां ला रहीं किसान और कृषि पद्धति में बदलाव&nbsp;</h2>
<p>समाज और कृषि पद्धति में बदलाव नज़र आने लगा है. किसान दीदियां <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/self-help-groups-getting-support-from-government-officials-at-every-level-1680547">स्वयं सहायता समूह</a> के माध्यम से किसानों की सोच के साथ पराली को जलाने से हो रहे नुकसान को समझा रहीं. इंदौर के जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) हिमांशु शुक्ला बताते हैं-"धुलेट की पपीता रावत रीपर मशीन खरीद कर केटल फीड तैयार कर रही है. इससे स्वयं की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ साथ ही अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रही है. अन्य समूह की सदस्यों को भी मिशन काउंसलिंग कर रहा है."</p>
<figure class="image"><img alt="IMG-20260418-WA0008" src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/580x348/filters:format(webp)/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/2026/04/18/img-20260418-wa0008-2026-04-18-16-44-14.jpg" style="width: 502px;" height="688">
<figcaption>भूसा एकत्रित करते हुए पपीता रावत-Image:Ravivar</figcaption>
</figure>
<p>इंदौर क्षेत्र के आसपास स्ट्रा रीपर मशीन खरीदने या किराए से लेकर भूसा तैयार करने के लिए किसान परिवारों की रूचि दिखाई देने लगी है.&nbsp;</p>
<h2>सैकड़ों एकड़ खेत की उपजाऊ क्षमता दांव पर&nbsp;</h2>
<p>कृषि वैज्ञानिकों का कहना है किसानों द्वारा पराली जलाने की मानसिकता बनी हुई है. प्रदेश में ही सैकड़ों एकड़ खेत में पराली जलाने से उनकी उपजाऊ क्षमता दांव पर लगी हुई है.&nbsp;</p>
<figure class="image"><img alt="IMG_20260410_124344" src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/580x348/filters:format(webp)/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/2026/04/18/img_20260410_124344-2026-04-18-16-45-44.jpg" style="width: 500px;" height="223">
<figcaption>खेतों में इस तरह जला देतें हैं पराली Image :Ravivar</figcaption>
</figure>
<p>वैज्ञानिकों के अनुसार "पराली जलाने से जहां अगले सीज़न में फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है वहीं पराली (सूखी फसल अवशेष या &nbsp;STUBBLE) जलाने से CO2 (कॉर्बन डाय ऑक्साइड), नाइट्रोजन ऑक्साइड सहित हानिकारक गैस बनती है जिससे ग्लोबल वॉर्मिंग प्रभावित होती है. मिट्टी उर्वरता (सॉइल फर्टिलिटी) के साथ सूक्ष्मजीव और बैक्टीरिया नष्ट हो जाते है."<br>हालांकि जिला प्रशासन और कृषि विभाग पराली न जलाने के लिए किसानों को जागरूक कर रहा है. यहां तक कि पराली जलाने पर जुर्माने का भी प्रावधान है.</p>
<figure class="image"><img alt="IMG_20260416_142122" src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/580x348/filters:format(webp)/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/2026/04/18/img_20260416_142122-2026-04-18-16-49-16.jpg" style="width: 500px;" height="526">
<figcaption>Siddharth Jain</figcaption>
</figure>
<p>" यह प्रसन्नता की बात है की ज़िले में किसान सखी ने न केवल स्वयं को आर्थिक समृद्ध बनाया, बल्कि कृषि के क्षेत्र में सबसे गंभीर समस्या पराली जलाने का विकल्प किसानों तक पहुंचाने अपनी भूमिका निभा रही हैं. ऐसी किसान दीदियों को समूह के बीच और प्रोत्साहित करने के लिए कहा गया है. आने वाले दिनों में और सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे, जिससे कृषि क्षेत्र में सुधार के साथ पर्यावरण में सहभागिता होगी."</p>
<p><strong>सिद्धार्थ जैन, आयएएस</strong><br><strong>सीईओ, जिला पंचायत, इंदौर &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;&nbsp;</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Sat, 18 Apr 2026 16:57:50 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/stories-of-women/awareness-is-being-raised-against-stubble-burning-an-innovation-by-farmer-friends-in-indore-district-of-madhya-pradesh-which-has-become-an-example-11740465]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/04/18/red-bold-finance-youtube-thumbnail-11-2026-04-18-16-40-46.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/04/18/red-bold-finance-youtube-thumbnail-11-2026-04-18-16-40-46.jpg"/></item><item><title><![CDATA[अंतर्राष्ट्रीय नृत्य महोत्सव में रिद्धि का रिदम ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/women-news-india/%E0%A4%85%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%B0%E0%A4%B7%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A4%AF-%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%AF-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A4%B8%E0%A4%B5-%E0%A4%AE-%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%A7-%E0%A4%95-%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A4%AE-%E0%A4%AE%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%95-%E0%A4%96%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A4%B9-%E0%A4%AE-%E0%A4%85%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%B0%E0%A4%B7%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A4%AF-%E0%A4%AC%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A4%B8%E0%A4%B5-%E0%A4%AE-%E0%A4%A6-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A4%A4-11157581</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/02/26/red-bold-finance-youtube-thumbnail-8-2026-02-26-14-13-48.jpg"><p>मध्य प्रदेश के खजुराहो (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/india-sets-guinness-world-record-in-kathak-dance-at-khajuraho-with-1484-performers-4025103">Khajuraho</a>) में होने आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बाल महोत्सव में 11 साल की रिद्धि सेन ने कत्थक नृत्य से समां बांध दिया.अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली रिद्धि को ख़ास सम्मान दिया गया.<br>प्रदेश के साथ इंदौर में विशेष रूप से रिद्धि के नृत्य की चर्चा है.</p>
<h2>दाधीच शैली में रिद्धि ने दी कत्थक प्रस्तुति&nbsp;</h2>
<p>इंदौर निवासी रिद्धि सेन ने खजुराहो में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बाल महोत्सव में खास तरह की &nbsp;दाधीच शैली में कथक नृत्य की प्रस्तुति दी.<br>मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग का यह प्रतिष्ठित आयोजन माना जाता है.&nbsp;</p>
<figure class="image"><img alt="IMG-20260226-WA0001" src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/580x348/filters:format(webp)/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/2026/02/26/img-20260226-wa0001-2026-02-26-14-14-33.jpg" style="width: 450px;" height="675">
<figcaption>अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति देती रिद्धि सेन-Image:PRO</figcaption>
</figure>
<p>11 वर्षीय ऋद्धि सेन को अपनी कथक नृत्य प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया गया था.<br>बता दें ऋद्धि <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/padma-shri-awardee-chami-murmu-is-the-lady-tarzan-of-jharkhand-she-has-planted-more-than-28-lakh-trees-in-500-villages-in-the-span-of-36-years-she-has-been-honored-with-the-prestigious-padma-shri-award-in-2024">पद्मश्री</a> डॉ पुरु दाधीच एवं केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता डॉ विभा दाधीच द्वारा स्थापित नटवरी कथक नृत्य अकादमी में नृत्यांगना हर्षिता दाधीच द्वारा दाधीच शैली में कथक नृत्य प्रशिक्षण ले रही है.<br>रिद्धि का कहना है वह पढ़ाई के साथ नियमित अभ्यास करती है. &nbsp;<br>भारतीय नृत्य विधा की यह शैली ख़ास मानी गई है. इस कार्यक्रम में तीन बाल कलाकारों को आमंत्रित किया गया था.</p>
<h2>संस्थाएं दे रही ट्रेनिंग&nbsp;</h2>
<p>इंदौर में कई संस्थाएं विभिन्न भारतीय पारंपरिक शैली के नृत्य विधा में प्रशिक्षण दे रही.यही वजह काम उम्र मेभी शहर की प्रतिभाएं अलग -अलग मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं.<br>&nbsp;&nbsp;<br>&nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 26 Feb 2026 14:26:31 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/women-news-india/अतररषटरय-नतय-महतसव-म-रदध-क-रदम-मपर-क-खजरह-म-अतररषटरय-बल-महतसव-म-द-परसतत-11157581]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/02/26/red-bold-finance-youtube-thumbnail-8-2026-02-26-14-13-48.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/2026/02/26/red-bold-finance-youtube-thumbnail-8-2026-02-26-14-13-48.jpg"/></item><item><title><![CDATA[SHG महिलाओं ने लहराया घर-घर तिरंगा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/har-ghar-tiranga-campaign-in-madhya-pradesh</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ph6fHXAH7eKachAzBClR.jpg"><p><strong>"हर घर तिरंगा अभियान" (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shikha-became-self-reliant-by-joining-shgs">Har Ghar Tiranga Campaign</a>)&nbsp;</strong>की तैयारी <strong>मध्य प्रदेश (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shikha-became-self-reliant-by-joining-shgs">Madhya Pradesh</a>)</strong> में भी जोरो शोरों से चल रही है. राज्य में हर घर, ऑफिस, सरकारी दफ्तरों, सड़कों में तिरंगे लगाए जा रहे है. स्वतंत्रता दिवस का लोगों के बीच उत्साह है. <strong>15 अगस्त (<a href="https://ravivarvichar.in/photovideo/madhya-pradesh-sanwer-lok-adhikar-kendra-empowering-women-shgs">15 August 2023</a>) "आज़ादी का अमृत महोत्सव " (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/women-education-a-path-for-development">Amrit Mahotsav Of Independence</a>)</strong> महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है. इस अभियान के जरिए SHG महिलाएं आत्मनिर्भर होने के साथ आर्थिक स्वतंत्रता की ओर बढ़कर, आत्मविश्वास के साथ समाज में अपनी पहचान बना रहीं है. यह अभियान हमें स्वतंत्रता संग्राम के वीरों के प्रति आभार और समर्पण की भावना को बढ़ावा देने का काम कर रहा है.</p>
<p><img alt="HAR GHAR TIRANGA" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/389x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/3fYjyXSAJhMfoGvC6wZj.jpg" style="width: 389px;"></p>
<p><em>Image Credits : Ravivar Vichar</em></p>
<h2><strong>हर घर तिरंगा पंहुचा रहीं SHG महिलाएं&nbsp;</strong></h2>
<p>सरकार द्वारा शुरू इस अभियान में<strong> Self Help Group</strong> की महिलाएं बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहीं है. <strong>इंदौर (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/encouraging-digital-transactions-in-rural-communities">Indore</a>)&nbsp;</strong>जिले के <strong>सांवेर (<a href="https://ravivarvichar.in/photovideo/madhya-pradesh-sanwer-lok-adhikar-kendra-empowering-women-shgs">Sanwer</a>)</strong> में इस आज़ादी के अमृत महोत्सव में लोगों को जागरूक करने और हर घर में तिरंगा लगाने के लिए SHG महिलाओं ने रैली निकाली.</p>
<p>इस रैली में अनुविभागीय अधिकारी गोपाल सिटे वर्मा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत कुसुम भण्डलोई और &nbsp;विकास खण्ड प्रबंधक विजय पांचाल, सहायक विकास खण्ड प्रबंधक निशु गुप्ता, एकता टटवाल, ममता राय और वि.ख. नोडल रेणुका भार्गव उपस्थित रहे.&nbsp;</p>
<p><img alt="shg " src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/353x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/xsQZSpXX1JIziSjV3Dpg.jpg" style="width: 353px;"></p>
<p><em>Image Credits : Ravivar Vichar</em></p>
<p>हर घर तिरंगा अभियान के तहत देशवासी एकजुट होकर समाज को बदलने की दिशा की और अग्रसर हो रहे है, जो एकता, मेल और समानता के सिद्धांतों पर आधारित है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Mon, 14 Aug 2023 15:53:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/har-ghar-tiranga-campaign-in-madhya-pradesh]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ph6fHXAH7eKachAzBClR.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ph6fHXAH7eKachAzBClR.jpg"/></item><item><title><![CDATA[AVSAR स्कीम से मिल रही SHG महिलाओं को आर्थिक उड़ान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/avsar-scheme-providing-platforms-in-airports-to-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8qAg4r94TMe787ITeOvd.jpg"><p>स्वयं सहायता समूह भारत के सबसे शक्तिशाली चैनल है, जो ग्रामीण और शहरी महिलाओं को आजीविका देने के लिए बनाये गए है. <strong>Self Help Groups महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ स्वावलंबी बनाने </strong>का महत्वपूर्ण जरिया हैं. सरकार भी सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को बढ़ावा देने के लिए नई-नई योजनाएं और प्रयास कर रही है. समूह के तहत उत्कृष्ट उत्पादन, स्थानीय कला और शिल्प को बढ़ावा दिया जा रहा, जिनकी आज काफी डिमांड है. SHGs को अगर जरुरत हैं, तो बस अपने उत्पादन को प्रदर्शित करने और बेचने के लिए स्थान की.&nbsp;</p>
<h2>SHGs के प्रोडक्ट्स को मिलेगी ग्लोबल पहचान&nbsp;</h2>
<p>महिला SHGs की इन्हीं जरूरतों को पूरा करने के लिए <strong>प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (<a href="https://ravivarvichar.in/photovideo/an-empowered-woman-can-empower-the-country-pm-narendra-modi">PM Narendra Modi</a>)</strong> के दृष्टिकोण के अनुरूप <strong>" <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/connecting-homes-to-gangas-blessing">एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया</a> " (AAI)</strong> ने हवाई अड्डों पर self help groups के लिए स्थान अलॉट किया गया है. जहां <strong>SHG महिलाओं, कारीगरों और शिल्पकारों के प्रोडक्ट्स को विकसित</strong> करने और उसकी &nbsp; मार्केटिंग के लिए, एयरपोर्ट पर ही जगह अलॉट की गई है. जिससे स्थानीय कला को ग्लोबल पहचान बनाने में मदद मिलेगी.&nbsp;</p>
<h3>SHGs को पंद्रह दिनों के लिए मिलेगी जगह&nbsp;</h3>
<p><strong>"<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/connecting-homes-to-gangas-blessing">अवसर</a> " (Airports As Venue For Skilled Artists Of The Region, AVSAR)</strong> योजना के अंतर्गत, हर AAI ऑपरेटेड एयरपोर्ट पर 100-200 वर्ग फीट का क्षेत्र निर्धारित किया गया है. यह जगह SHGs को 15 दिन के लिए दी जाएगी. जहां वह अपने प्रोडक्ट्स को <strong>राष्ट्रीय और अंतर-राष्ट्रीय यात्रियों</strong> के सामने प्रदर्शित करेंगी. Self help group को नए बाजार और ग्राहकों के साथ मिलने का मौका मिलेगा, इससे उनके प्रोडक्ट्स की डिमांड भी बढ़ेगी.&nbsp;</p>
<p><img alt="avsar pib" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/409x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/lJ6Y9xLgIzLzCwnz6BaK.jpeg" style="width: 409px;"></p>
<p><em>Image Credits : Rising Kashmir</em></p>
<p>कई एयरपोर्ट्स पर पहले से ही, ऐसे आउटलेट्स बने हुए है, जैसे <strong>चेन्नई (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/sushila-viswanathan-the-hidden-support-behind-anand-viswanathan">Chennai</a>), अगरतला (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/sushila-viswanathan-the-hidden-support-behind-anand-viswanathan">Agartala</a>), देहरादून (Dehradun), कुशीनगर (Kushinagar), और अमृतसर (Amritsar)</strong>, जहां स्थानीय SHG महिलाएं देशी प्रोडक्ट्स जैसे पैकेज्ड पापड़, अचार, बांस के बने बैग/बॉटल/लैंप सेट आदि हवाई यात्रियों को प्रदर्शित कर बेच रहीं है.&nbsp;</p>
<p>राज्य सरकार की मदद से, अब और भी एयरपोर्ट्स, <strong>रांची (Ranchi), कोलकाता (Kolkata), इंदौर (<a href="https://ravivarvichar.in/photovideo/indores-ladli-behna-sena-is-fighting-crimes-against-women">Indore</a>), भोपाल (Bhopal), मदुरई (Madurai), सूरत (Surat), भुवनेश्वर (Bhubaneswar), रायपुर (Raipur)</strong> के SHGs को जगह अलॉट करने का काम शुरू किया जायेगा.</p>
<p><img alt="shg" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/394x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/yutzrc4a4wwjqIwfq1ax.png" style="width: 394px;"></p>
<p><em>Image Credits : IAS Gyan</em></p>
<h3>महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर&nbsp;</h3>
<p>एएआई की यह पहल SHGs के लिए सकारात्मक कदम है, जो समूह की महिलाओं को आर्थिक वृद्धि देने के साथ सशक्त बनाएगा और उनके उत्पादों को ग्लोबल पहचान दिलाने में मदद करेगा. जिससे महिलाओं को नई पहचान के साथ उन्हें और विकसित होने का मौका मिलेगा. इससे <strong>SHG women</strong> के जीवन में सुधार होगा और उन्हें व्यापारिक और सांस्कृतिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा.&nbsp;</p>
<p>SHGs, देश के ऑर्गेनाइज़्ड सेक्टर के विकास में अहम् भूमिका निभा रहे है. सरकार भी इन समूहों को आत्मनिर्भर &nbsp;बनाने में निरंतर समर्थन कर, उनके नये उद्योगों और व्यापारिक अवसरों को पहचान दिलाने में सहायता देने &nbsp;के लिए नई-नई योजनएं बना रहीं है.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Sat, 12 Aug 2023 15:10:52 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/avsar-scheme-providing-platforms-in-airports-to-shg-women]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8qAg4r94TMe787ITeOvd.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8qAg4r94TMe787ITeOvd.jpg"/></item><item><title><![CDATA[हाथ में लट्ठ के साथ लाड़ली बहना सेना का बना खौफ ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/ladali-bahna-sena-comes-out-with-latth-in-hand-to-fight-against-crime</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/PNjEGzj8CakjcIN2p55w.jpg"><h1><strong>हाथ में लट्ठ के साथ लाड़ली बहना सेना का बना खौफ &nbsp;</strong></h1>
<p><strong>इंदौर (Indore)</strong> महानगर के गली-मोहल्लों और वार्डों में असामाजिक &nbsp;लोगों की खैर नहीं. कोई भी अपराध करने वाले को छोड़ा नहीं छोड़ा नहीं जाएगा. इंदौर पुलिस ने महिलाओं के आत्मविश्वास को देखते हुए नई पहल की. इन दिनों पूरे शहर के इलाकों में सिर पर साफा और और हाथ में लट्ठ के साथ <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/cm-shivraj-met-shg-women-urged-them-to-join-ajeevika-mission">लाड़ली बहना</a><strong>&nbsp;सेना (ladli Bahana Sena)</strong> नज़र आने लगी. बाकायदा इनका गठन किया जा रहा है.मनचलों और नशाखोरों में खौफ है.&nbsp;<br>&nbsp;<br>थानों में काम कर रही<strong> 'ऊर्जा डेस्क' (Urja Dask)</strong>अब पूरे फॉर्म में है. <strong>इंदौर</strong> <strong>पुलिस कमिश्नर (Police Commissioner)</strong> <strong>मकरंद देउस्कर (Makrand Deuskar) </strong>की यह पहल रंग ले आई.हर थाने में इन बहनों को ट्रेनिंग दी जा रही. इस पूरे<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-helping-others-to-get-benefit-of-ladli-behna-yojana"> मिशन </a>&nbsp;के लिए <strong>एडिशनल</strong> <strong>डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (ADCP)</strong> <strong>प्रियंका डुडवे (Priyanka Dudve)</strong>&nbsp;को <strong>नोडल ऑफिसर </strong>बनाया गया. &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;&nbsp;</p>
<h2><strong>जागरूक और चेतावनी का फार्मूला&nbsp;</strong></h2>
<p>शासन ने<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/ladli-behna-maha-sammelan-organised-in-khandwa"> जागरूक </a>&nbsp;और चेतावनी के फार्मूले पर यह सेटअप बनाया. नोडल ऑफिसर <strong>एडिशनल डिप्टी कमिशनर ऑफ़ पुलिस&nbsp; (ADCP)</strong> <strong>प्रियंका डुडवे</strong>&nbsp;<strong> (Priyanka Dudve) </strong>बताती है-<em> "शहर के 32 थाने के <strong>ऊर्जा डेस्क</strong> ने अपने <strong>आगनबाड़ी </strong>कार्यकर्त्ता बहनों के साथ क्षेत्र की कम से कम सक्रिय 21 महिलाओं को जोड़ा. साथ ही जनप्रतिनिधि महिलाओं और यंग जनरेशन गर्ल्स को भी शामिल किया. ये अपने इलाके की गली, मोहल्ले और वार्ड में आपराधिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को टोकेंगीं. नशाखोरी और&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-in-burhanpur-spreading-awareness-on-ladli-behna-yojna"> महिलाओं </a>के साथ छेड़छाड़ और बुराइयों के लिए नज़र रखेंगीं. जरूरत पड़ेगी तो पुलिस का सहयोग लेंगीं."</em></p>
<p><img alt="ladli sena" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/381x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/K8uOd3iqUxeM5lUV5Znp.jpg" style="width: 381px;"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>इंदौर के मुख्य मार्ग पर फ्लैग मार्च करती लाड़ली बहना सेना (Image Credit: Ravivar Vichar)&nbsp;</em></span></p>
<h3><strong>सेना में बना उत्साह का माहौल</strong>&nbsp;</h3>
<p><strong>रावजी बाज़ार </strong>इलाके की सेना सदस्य <strong>संतोष चौधरी लल्ली दीदी</strong> कहती है- <em>"हमें बहुत अच्छा लग रहा. ख़ुशी है कि महिलाएं एकजुट हो कर गलियों में नशा और दूसरी गलत गतिविधियों को रोकेगी."</em> इस इलाके में 50 से ज्यादा महिलाओं ने सेना में शामिल होकर उत्साह से कम करने को कहा. इस इलाके की पार्षद भावना सुंदरलाल चौधरी बताती हैं -<em>"रावजी बाज़ार थाने में बहुत अच्छे तरीके से बैठक हुई. इलाके का माहौल और अधिक सुधरेगा."</em> रावजी बाज़ार थाने के <strong>टीआई</strong> <strong>(TI)</strong> <strong>अमोद सिंह राठौर (Amod Singh Rathore)</strong> ने बताया-<em> "ऊर्जा डेस्क ने अच्छा समन्वय बना कर महिलाओं को ट्रेन किया."</em></p>
<p><img alt="ladli sena" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/392x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/ZC4igNCaUSH1hiEvraqy.jpg" style="width: 392px;"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>एडिशनल डिप्टी कमिश्नर प्रियंका डुडवे का सम्मान करतीं सेना सदस्य &nbsp;&nbsp;(Image Credit: Ravivar Vichar)</em></span></p>
<h3><strong>नशे की सजा महिला को क्यों !</strong></h3>
<p>समाज में बढ़ती नशे की प्रवृति और छेड़छाड़ की घटना की अंतिम पीड़िता युवती या महिला ही होती है. नशाखोरी से महिला ही सजा क्यों भोगे ! इस <strong>प्रोजेक्ट (Project)</strong>को लीड कर रहे<strong> इंदौर कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (CP)</strong> <strong>मकरंद देउस्कर (Makrand Deuskar) </strong> ने यह कहते हुए 'रविवार विचार' से&nbsp; खास बात की.<strong> सीपी इंदौर देउस्कर </strong>कहते है-<em> "शासन का यह बड़ा विज़न है. इसमें थाने की ऊर्जा डेस्क, महिला बाल विकास विभाग से एसोसिएट आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की भूमिका अहम है. अपने-अपने इलाके में जब महिलाएं जुड़ कर समूह में निकलेंगी तो असामाजिक गतिविधि से जुड़े लोगों में भय बनेगा.शुरू में ऊर्जा डेस्क की साथी भी इस समूह में शामिल होगी.इससे नशामुक्ति और समाज की दूसरी बुराइयों में शामिल लोग गलियों में बेवजह घूमना बंद करेंगे."&nbsp;</em></p>
<p><img alt="CP INDORE " src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/214x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/ZRHD9UqcvN5Rig1pXD6q.jpg" style="width: 214px;"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>पुलिस कमिश्नर, इंदौर, मकरंद देउस्कर </em>&nbsp;</span> &nbsp; &nbsp;</p>
<h3><strong>कम उम्र की बेटियां होगीं सेफ</strong></h3>
<p>इस प्रोजेक्ट में <strong>कमिश्नर </strong>ने ख़ास गाइड किया. <strong>देउस्कर</strong> ने बताया-<em> "इसमें एक खास बात का ध्यान रखा गया. कम उम्र की बच्चियों के मिसिंग के कई प्रकरण आते है. कई बार सेक्सुअल हरस्मेंट की घटनाओं में नज़दीक के ही लोग आरोपी के रूप में सामने आते हैं. इस सेना में 12 से 18 साल की बच्चियों को भी जोड़ने के लिए कहा गया. इससे उनमें भी डर हटेगा. वे खुल कर जी सकेंगी. बहकावे न आकर एंटी सोशल बिहेवियर का भी विरोध करना सीख जाएंगी. कम उम्र की बेटियां ज्यादा सेफ हो जाएंगी."</em> लाड़ली सेना को शाम को समूह में निकल कर माहौल खड़ा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा.&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 10 Aug 2023 18:36:42 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/ladali-bahna-sena-comes-out-with-latth-in-hand-to-fight-against-crime]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/PNjEGzj8CakjcIN2p55w.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/PNjEGzj8CakjcIN2p55w.jpg"/></item><item><title><![CDATA[लेडी 'वोकल फॉर लोकल' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-women-are-becoming-atmanirbhar-by-selling-handmade-handicrafts</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/3JGzaqoKTvyKPyXXCjn4.jpg"><p><iframe width="753" height="422" src="https://www.youtube.com/embed/XbHif-nBbRk" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p><span>आजीविका मिशन के समूह की महिलाओं द्वारा तैयार अलग-अलग प्रोडक्ट्स ने इंदौर जिले में धूम मचा दी. गांव में बने इन प्रोडक्ट अब गली या मोहल्लों तक सिमित नहीं रह गए बल्कि सबसे एडवांस मार्केटिंग फील्ड में उतारा, जिसे ग्राहकों ने हाथों हाथ लिया.'वोकल फॉर लोकल' की यह ऐसी पहली शॉप है जहां हेंड मेड प्रोडक्ट्स महिलाओं के समूह ही बना रहे. मॉल में SHG की सदस्य दीदी ही शॉप को चला रही. </span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Sun, 25 Jun 2023 12:30:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-women-are-becoming-atmanirbhar-by-selling-handmade-handicrafts]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/3JGzaqoKTvyKPyXXCjn4.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/3JGzaqoKTvyKPyXXCjn4.jpg"/></item><item><title><![CDATA[गर्भ संस्कार का आधार अभिमन्यू ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/abhimanyu-garbh-sanskar-is-revolutionising-maternal-health</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/XIT1g3G1nyULwuchp6qY.png"><p><iframe style="width: 824px; height: 462px;" src="https://www.youtube.com/embed/hAn9PQDpTGU?t=1s" width="824" height="462" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>इंदौर की सोशल एक्टिविस्ट और शिक्षाविद गरिमा दाहिमा ने गर्व से यह बात कही. अर्घ्य संस्थान की फाउंडर गरिमा जरूरतमंद महिलाओं को पूरे आठ महीने ख़ास तरह से ट्रेनिंग दे रहीं हैं.उनके इस प्रयोग से न केवल देश में बल्कि विदेशों से भी प्रिग्नेंट महिलाएं संपर्क कर संस्कार प्रक्रिया में हिस्सा लेती हैं.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Mon, 12 Jun 2023 17:58:10 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/abhimanyu-garbh-sanskar-is-revolutionising-maternal-health]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/XIT1g3G1nyULwuchp6qY.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/XIT1g3G1nyULwuchp6qY.png"/></item><item><title><![CDATA[गौरव दिवस: आज की अहिल्या बाई होल्कर ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/harshika-singh-works-for-elderly-literacy-and-plastic-ban</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/hDqMGDtRTjmzhpho8w4N.jpg"><p>होल्कर (Holkar) रियासत की शासक देवी अहिल्या बाई होलकर के सामने बड़ी चुनौतियां थीं. कम उम्र में विधवा हो जाना और फिर पहले बेटे मालेराव के निधन ने उन्हें तोड़ दिया. इस दुख से उबर पाती इससे पहले ही दामाद यशवंत राव  की मौत और फिर साथ में बेटी मुक्ता बाई के सती होने की घटना ने अहिल्या बाई (Ahilya Bai) को बिल्कुल अंदर से अकेला कर दिया. दुःख के पहाड़ टूटे पर उन्होंने धैर्यता नहीं खोई. नर्मदा किनारे बसे महेश्वर नगर को राजधानी बनाया. पूरा जीवन शिव उपासना और प्रजा के हित में काम करने में बिताया. प्रजा के लिए उनके निर्णय और धार्मिक कामकाजों ने ही उन्हें अमर बना दिया. </p>
<p>दौर बदल गया. रियासतें जुड़ कर स्वतंत्र देश बन गया. लेकिन महिलाओं की भूमिका और बढ़ी. समय के साथ महिलाओं ने वो काम किए जो मिसाल बन रहे. प्रशासनिक क्षेत्र में भी महिलाओं अफसरों ने कई ऐसे काम किए जो उदाहरण बन गए. रविवार विचार ऐसी ही कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाजों को समाज में पहुंचाने के प्रयास कर रहा.अपनी-अपनी चुनौतियों के सामना करते हुए ये अधिकारी जनहित के लिए समर्पित हैं.</p>
<p>रविवार विचार के इस मिशन में हम मिलवा रहे, वर्तमान में जो आज की अहिल्या के रूप हैं. कई जिलों में  कलेक्टर रही और फ़िलहाल देश के सबसे स्वच्छ महानगर इंदौर की कमिश्नर आईएएस हर्षिका सिंह से....</p>
<p>  <img style="width: 328px; height: 348px;" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Dt5oDgQLeqpRejF1dgOp.jpg" alt="Harshika Singh"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>हर्षिका सिंह (फोटो क्रेडिट : जन संपर्क, नगर निगम इंदौर)</em></span></p>
<p>हर्षिका सिंह (Harshika singh) का व्यक्तित्व बाहर जितना सख्त है,जरूरतमंदों के लिए उतनी भावुक. इंदौर में जहां क्लीन सिटी को और अधिक पहचान देने के लिए जुटी हैं वहीं पर्यावरण संतुलन और सुगम यातायात के मिशन में व्यस्त हैं. "आज की अहिल्या " हर्षिका सिंह उस वक़्त देश में चर्चा में आईं जब वे मंडला कलेक्टर थीं.जूनून ऐसा कि नक्सल और बीहड़ इलाकों में खुद हर्षिका ने गांव गोद लिए और जिले की तस्वीर बदल दी.</p>
<h3>जूनून और ज़िद से स्लेट पर बने अक्षर   </h3>
<p>" मु....न्नी बाई " ये ढाई शब्द लिखने में शायद उस महिला को पांच मिनिट तो लगे होंगें. उस महिला की उम्र लगभग 82 साल थी. उंगलियां कांप रही थी. पर जैसे ही मुझसे नज़र मिली उसके झुर्रीदार चहरे पर मुस्कुराहट बिखर गई. उसने मुझे गले लगा लिया.बस इतना बोली - 'मैं पास हो गई.अब अंगूठा नहीं लगाउंगी.' उस बुज़ुर्ग महिला के चेहरा मेरे मन में बस गया. मंडला में साक्षरता दर और संवाद में कमी ने मुझे अंदर तक सोचने पर मजबूर कर दिया. बस यही मेरा मिशन बना. तय किया कोई निरक्षर नहीं रहेगा. कोई योजनाओं से वंचित नहीं रहेगा. यही नहीं आदिवासी अंचल में प्रिग्नेंट महिलाओं की घर पर ही डिलीवरी प्रथा,स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति बेखबर जैसे मुद्दों ने मुझे अंदर तक हिला कर रख दिया. " इंदौर नगर निगम कमिश्नर हर्षिका सिंह ये बात बताते हुए भावुक हो गईं.</p>
<p>नक्सल प्रभावित यह मंडला जिला आदिवासी (Adivasi) बहुल तो है,लेकिन घने जंगलों के बीच बसे छोटे-छोटे गांव में ग्रामीण लोग मजदूरी कर अपना जीवन चला रहे. बीहड़ इलाकों में तेज़ी से सुविधाएं पहुंचाना प्रशासन के लिए  बहुत बड़ी चुनौती थी. दूसरी दिक्क्त गांव के लोगों का जिले मुख्यालय पर अधिकारियों से मिलने आना. हर्षिका सिंह आगे बताती हैं - " जिले में लिट्रेसी प्रॉब्लम सबसे बड़ी थी. ट्राइबल फंड का फ्लो था,लेकिन भोले-भाले लोगों की अज्ञानता से वो इस योजना और राशि का उपयोग तक नहीं समझ पाता. मैंने ठान लिया और बीहड़ इलाकों में निकल पड़ी. धीरे-धीरे टीम बनाई. 'ज्ञान दान' मुहिम चलाई. स्लेट और चॉक की व्यवस्था हो गई. ज्ञानोलय में किताबें इकट्ठी हुईं. गांव-गांव आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता,पड़ी लिखी लड़कियां इस मिशन में जुड़ गई. 30 हजार लोग वालेंटियर जुड़ गए. देखते ही देखते हर घर नया उजाला उम्मीदों का नज़र आने लगा. पांच सौ से ज्यादा महिलाएं और युवा इस काम में जुटे रहे. नतीजा हमारे सर्वे में साक्षरता दर 56 % से 95 % हो गया. अब किसी भी घर में निरक्षर मुन्नी बाई न रही. सच लगा कि अक्षर सिर्फ लिखावट नहीं. उन निरक्षरों के लिए अहसास थे, जिन्होंने कभी जिया ही नहीं. अब वे सब समझने लगे हैं. यह मेरे जीवन की उपलब्धि है. " </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/zX3Woyn1GsAiLS5mX4fF.jpg" alt="Harshika Singh"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>मंडला में साक्षरता मिशन के दौरान पूर्व डीएम हर्षिका सिंह (फोटो क्रेडिट : जन संपर्क, नगर निगम इंदौर)</em></span></p>
<p>हर्षिका सिंह मंडला के अलावा बालाघाट, जबलपुर, भोपाल, टीकमगढ़ जैसे जिलों में भी अपनी सेवाएं दे चुकीं हैं.इंदौर में क्लीन सिटी की प्रतिष्ठा और पहचान बनाए रखने के लिए वे सिंगल यूज़ प्लास्टिक प्रोजेक्ट में जुटी हुईं हैं. साथ ही कचरा निष्पादन के साथ व्यवसायिक जगह पर कचरा पड़े रहने पर सख्त एक्शन लिए. स्पॉट फाइन पर कोई समझौता नहीं करने के निर्देश दिए. शहर के मुख्य इलाकों के अलावा वे खुद रेंडमली किसी भी वार्ड और कॉलोनी में पहुंच कर सफाई व्यवस्था को ग्राउंड कि रियलिटी चेक कर रहीं हैं. उनको दुःख है कि सामान्य व्यक्ति सिंगल यूज़ प्लास्टिक (single use plastic) को लेकर ज्यादा साथ दे देता है. अधिक गैरजवाबदार लोग समझाने के बाद भी इसके उपयोग करने से बाज नहीं आते. कमिश्नर इनके खिलाफ और सख्त कदम उठाने की बात कर रहीं हैं. हर्षिका सिंह के मानना है -" इंदौर के लोग जुनूनी हैं. यहां किसी भी प्रोजेक्ट में लोगों की जनभागीदारी देखी जा सकती है. यह जनभागीदारी ही प्रशासन की सबसे बड़ी ताकत है. लोग जब तक सहयोग नहीं करेंगे ,कोई भी प्रोजेक्ट सफल नहीं हो सकता.आज भी यहां अहिल्या बाई होल्कर के संस्कार लोगों में दिखाई देते हैं।उनका सेवा-समर्पण का फार्मूला ही है "  </p>
<h3> ऊर्जा से भरा इंदौर    </h3>
<p>केवल डेढ़ महीने पहले इंदौर नगर निगम में कमिश्नर पद पर ज्वाइन करने वाली हर्षिका सिंह स्वच्छता मिशन को और बढ़ाने के लिए खुद ने साइकल चला कर संदेश दिया. उनके पति आईएएस रोहित सिंह भी फ़िलहाल एमएसएमई विभाग में एमडी हैं. जरूरतमंदों की मदद कर रहीं हर्षिका सिंह को उनका प्रोत्साहन लगातार मिलता है. हर्षिका सिंह कहती हैं - " चुनौती हर काम में होगी. निजी परेशानियां जीवन का हिस्सा है,लेकिन सामजिक जीवन और मानवीयता ही सर्वोपरि होना चाहिए.परिवार को समय देना और तालमेल बैठाना ही खुशहाल जीवन का रहस्य  है. हर व्यक्ति को सामाज और देश के लिए सार्थक भूमिका निभाना चाहिए. "</p>
<p><img style="width: 526px; height: 348px;" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/905TdK9qUf9FA0ZIHiQR.jpg" alt="Harshika Singh"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em> स्वछता मिशन जागरूकता रैली में साइकल चलाती हर्षिका सिंह (फोटो क्रेडिट : जन संपर्क, नगर निगम इंदौर)</em></span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Tue, 30 May 2023 17:26:18 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/harshika-singh-works-for-elderly-literacy-and-plastic-ban]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/hDqMGDtRTjmzhpho8w4N.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/hDqMGDtRTjmzhpho8w4N.jpg"/></item><item><title><![CDATA[हुनर के दम बोल रहे मूक-बधिर ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/deaf-and-dumb-people-at-malwa-utsav-indore-sell-handicraft-items</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/LasECIIiGkrspgeWv1ze.jpg"><p>इंदौर के लालबाग पैलेस में आयोजित मालवा उत्सव के एक स्टॉल में भीका भाई के पास कुछ लोग आ कर हाथों से बनी सुंदर-सुंदर बांस की टोकनियों का भाव पूछ रहे. कुछ महिलाएं वंदनवार  के भाव पूछ रहीं थी. भीका भाई ने किसी को इशारे में तो किसी को आइटम पर लिखे भाव बताए. भीका भाई मुस्कुराते हुए इशारा करते हैं - मैं बोल और सुन नहीं सकता. आप चीज़ पसंद कीजिए और भाव लिखे हुए हैं. " लोगों ने पैसे दिए और चीज़ खरीद कर चले गए. कुछ सालों से भीका भाई ऐसे ही हस्तशिल्प मेले में स्टॉल संभालते हैं. गुजरात के भीका भाई जैसे कई डेफ एंड डम (मूक-बधिर) लोगों के जीवन में एक ऐसी महिला आई जिसने जरुरतमंदों को आत्मनिर्भर बना और गुजरात में मिसाल कायम कर दी. जाग्रति बेन मेहता पूरा जीवन जरूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में लगा रही. भारत के ट्रेडिशनल कल्चर को फोकस कर हस्तशिल्प मेले में शामिल होने वाली जाग्रति के साथ दिव्यांग, तलाकशुदा महिलाओं की टीम है जो आत्मनिर्भर भारत का चेहरा बन गए. ये चाहे लोग चाहे बोल-सुन नहीं सकते लेकिन आज मूक-बधिर कलाकारों का हूनर देशभर में बोल रहा है.  </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/lqYX2yBgqW0R7ET9zBB7.jpg" alt="malwa utsav deaf and dumb people"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>संस्था लीडर जाग्रति बेन ने भी अपने स्टॉल को संभाला और लोगों के बीच जगह बनाई (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार)</em></span></p>
<p>भारत के ट्रेडिशनल कल्चर को बढ़ावा देने वाली जाग्रति बेन गुजरात के पालनपुर से यहां हस्तशिल्प मेले में आईं. जाग्रति कहती हैं -" मैं सिर्फ 12 वीं पास हुई. मेरी शादी कर दी गई. घर की आर्थिक हालत  इतनी अच्छी नहीं थी कि माता-पिता मुझे आगे पढ़ा पाते. पिता महेश भाई ड्राइवर और मां दक्षा बेन छोटा-मोटा काम करती थी. ससुराल में मुझे पति पति विजय भाई मेहता ने हौसला दिया. मैंने ग्रेजुएशन की. मैं एक स्कूल में टीचर बन गई. फिर भी घर की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी. मुझे लगा कि मुझ जैसे जाने कितने लोग होंगें जो ऐसे हालातों से जूझ रहे होंगें. मैंने ज़िंदगी में कुछ अलग करने कि ठानी. वक़्त बदला और आज न केवल मैं आर्थिक रूप से निर्भर बनी बल्कि कई लोगों को रोजगार दे सकी.साथ ही मैं विलुप्त होती हमारे भारतीय कलाओं को बचाने की कोशिश कर रहीं हूं। " </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/kYnYKftIg7akRMvh3sLs.jpg" alt="malwa utsav deaf and dumb people"></p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">गुजरात के पालनपुर से आए मूक-बधिर भीका भाई ने अपना स्टॉल संभाला (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार)</span></em></p>
<p>देश में बढ़ते स्टार्टअप का बढ़िया उदाहरण वात्सल्य चैरिटेबल संस्था है. रोजगार के लिए यहां हमेशा अवसर तैयार रहते हैं. गुजरात के पालनपुर की जाग्रति आगे बताती है -" निजी स्कूल में जॉब करते हुए मैनें पोस्ट ग्रेजुएट किया. कम्प्यूटर में आगे पढाई की. लगा कि संस्था के बिना मैं लोगों की मदद नहीं कर पाउंगी. वात्सल्य संस्था बनाई. इस समय 20 लोग सक्रिय रूप से जुड़े हैं  हैं. इसमें महिलाएं भी हैं. संस्था में छह से ज्यादा दिव्यांग साथी और डेफ एंड डम लोगों को जोड़ा. और वे स्वाभिमान से जिंदगी जी रहे हैं.'</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/fCExuDsibwwixRlGCkpP.jpg" alt="malwa utsav deaf and dumb people"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>इंदौर के लालबाग पैलेस में आयोजित मालवा उत्सव (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार)</em></span></p>
<p>देश के बड़े-बड़े शहरों में आयोजित हस्तशिल्प मेले में जाग्रति टीम के साथ शामिल होती है. अब तक उनको कई पुरस्कार मिल चुके हैं. जाग्रति के साथ आए भीका भाई अपनी लीडर जाग्रति की ओर इशारा कर बताते हैं -" जाग्रति ने कई लोगों को की जिंदगी में खुशियां दी. उनको सम्मान से जीना सिखाया. शॉप पर रखा सामान बेचना सिखाया. " पालनपुर में ही संस्था ने अपनी यूनिट डाली. इस यूनिट की कमान भी एक महिला को दी.संस्था मैनेजर अर्चना बेन कहती है-" इस संस्था में महिलाएं और दिव्यांगों को खास जगह दी जाती है. यहां तक कि जाग्रति बेन सभी को पार्टनर की तरह रखती है.कोई भी व्यक्ति कर्मचारी की तरह संस्था में नहीं रहता. संस्था का मकसद जो काम में समर्थ नहीं है,उनको पहले रोजगार का मौका देना है. इस संस्था में कोकोनट फाइबर्स से कई आइटम तैयार किए जाते हैं. घर कि सजावट के परंपरागत आइटम तैयार किए जाते हैं." अभी तक 60 लोग लगातार इससे जुड़े हैं और कई लोगों को ट्रेनिंग दे चुकीं हैं. गुजरात सरकार और कई संगठन इस संस्था को सम्मानित कर चुकी है. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Wed, 17 May 2023 14:42:02 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/deaf-and-dumb-people-at-malwa-utsav-indore-sell-handicraft-items]]></guid><category><![CDATA[हम में है हीरो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/LasECIIiGkrspgeWv1ze.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/LasECIIiGkrspgeWv1ze.jpg"/></item><item><title><![CDATA[विश्व थैलेसीमिया डे: 'थैलेसीमिया मुक्त भारत 25' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/mission-to-make-india-thalassemia-free-by-2025</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/qV9XJUgTSvrqR3jAP1Sy.jpg"><p><em>"लगभग 28 साल पहले एक रद्दी वाले ने मेरी ज़िंदगी की सोच और जीवनशैली बदल कर रख दी. उसने मुझसे अपने बेटे के दिल में छेद होने और ऑपरेशन के लिए मदद मांगी. राशि इतनी बड़ी थी कि मुझ अकेली के लिए के लिए संभव नहीं था. मेरी एक मित्र के साथ मिलकर उनका सहयोग किया. ऑपरेशन सफल हो गया. लेकिन मुझे उस रात नींद नहीं आई. सोचती रही हमारे शहर में और देश में ही कितने लोग होंगे जो ऐसी बिमारियों से परेशान होंगे. उनके पास इलाज का पैसा तक नहीं होगा.यह मेरी ज़िंदगी और सोच का टर्निंग पॉइंट था. इसके बाद मैंने इन 28 सालों में सैकड़ों लोगों ख़ासकर बच्चों का इलाज करवा अपना जीवन समर्पित कर दिया."</em> पिछले लगभग तीन दशक से थैलेसीमिया जैसी घातक बीमारी के खिलाफ अलख जगाने वाली इंदौर शहर की डॉ. रजनी भंडारी ने कहते हुए भावुक हो गईं. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/13d77Z5uInL2XXcLK2cX.jpg" alt="make India thalassemia free by 2025"></p>
<p>डॉ. रजनी भंडारी</p>
<p>देश के साथ विश्व में थैलेसीमिया जैसी बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है. इस अनुवांशिक बीमारी के लिए भारत में भी 4 प्रतिशत लोग अभी भी केरियर बने हुए हैं. केवल भारत में ही एक लाख लोग इस थैलेसीमिया बीमारी से रोज जूझ रहें हैं. लोग दम तोड़ रहे हैं.लगभग दस हजार नए बच्चे इस बीमारी के साथ रोज जन्म भी ले रहें हैं.ऐसे हालातों में समाजसेवियों का थैलेसीमिया बीमारी के खिलाफ मिशन नई उम्मीद जगा रहा. </p>
<p>केवल बीमार के शरीर में खून चढ़ाना और रोज मेडिसिन खाना ही विकल्प है.डॉ रजनी आगे बताती हैं -"<em> शुरुआत में थैलेसीमिया को लेकर कोई खास योजनाएं न सरकार के पास थी और न इलाज के लिए कोई सुविधा. उस समय छह बच्चों को एजेरिक्स बी के इंजेक्शन लगवाना भी कठिन था. संस्था ने मदद की. इसके बाद इस मिशन को सफल बनाने के लिए थैलेसीमिया एंड चाइल्ड वेलफेयर ग्रुप बनाया.इसके साथ पहले मूवमेंट अगेंस्ट थैलेसीमिया भी चलाया. इस ग्रुप द्वारा अब कई सुविधा और सेवाएं जरूरतमंदों तक पहुंचाने में जुटे हैं. "</em></p>
<p><em><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/leryeDc7YMw8WE157P8n.jpg" alt="make India thalassemia free by 2025"></em></p>
<p><em>सरकारी अस्पताल में बीमार बच्चे को गिफ्ट बांटती समाजसेवी डॉ रजनी व साथी </em></p>
<p>इंदौर के सरकारी चाचा नेहरू अस्पताल में 2002 में एक स्पेशल वार्ड शुरू किया. लेकिन सरकारी उलझनों की वजह से दस साल ये फिर बंद पड़ा रहा. ग्रुप ने फिर प्रयास किया और इसे शुरू करवाया. इस स्पेशल वार्ड में थैलेसीमिया के बच्चों का इलाज सरकारी स्तर किया जा रहा है. यहां फ़िलहाल 250 बच्चे रजिस्टर्ड हैं.इनका मुफ्त इलाज होता है. ग्रुप की संस्थापक डॉ.रजनी बताती हैं -" <em>यहां कई बार बच्चों को एक महीने से ज्यादा टाइम तक एडमिट रहना पड़ता है. बच्चे अपना टाइम मोबाइल देखने में लगाते हैं. यह बीमार बच्चे की आंखों के लिए खतरा है. मैंने यहां एक लाइब्रेरी खुलवाई. बच्चों के स्तर की पुस्तकें रखवाईं. इसके बाद सुपर स्पेशलिटी वार्ड में भी एक लाइब्रेरी खोली. 500 किताबों की यह लाइब्रेरी को नर्स स्टाफ दिलीप,अरविन्द और कल्पना संभाल रहें हैं.इससे बच्चों का मन लगने लगा."</em></p>
<h2>पीएम और सीएम को भेजे सुझाव</h2>
<p>अनुवांशिक बीमारी होने के कारण इसकी रोकथाम और थैलेसीमिया मुक्त भारत बनाने के लिए ग्रुप ने खास सुझाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे हैं. डॉ. रजनी कहती हैं -" <em>जिस बीमारी का नतीजा मौत हो उसके लिए कदम उठाना जरुरी है. मैंने पीएम मोदी को विवाह पंजीयन के साथ थैलेसीमिया स्टेटस रिपोर्ट को अनिवार्य करने के लिए सुझाव दिया. यदि कपल में एक की बॉडी में जींस केरियर मिले तो प्रिग्नेंसी में भी लेडी का टेस्ट करवाना चाहिए. यदि गर्भ में जींस मिले तो सुरक्षित अबॉर्शन करवाना चाहिए. इस बीमारी का कोई स्थाई इलाज नहीं है. मैंने सीएम शिवराज सिंह चौहान को भी सुझाव भेजा जिसमें प्रिग्नेंट महिला की दूसरी जांचों के साथ थैलेसीमिया की जांच को भी अनिवार्य करने को कहा है. इसमें भी वही प्रक्रिया अपनाने की बात कही." </em></p>
<p>इन दिनों डॉ. रजनी 55 कॉलेज और दूसरी शैक्षणिक संस्थाओं में युवाओं को  थैलेसीमिया की जांच करवा कर ही शादी करने की शपथ दिलवा रहीं हैं.इसका असर भी दिखने लगा है. चालीस से ज्यादा प्रतिष्ठित अवार्ड्स प्राप्त वे जागरूकता के लिए मैगज़ीन भी प्रकाशित करती हैं. साल में 8 मई और 14 नवंबर को मुफ्त में कैंप भी लगवाती हैं. जिला प्रशासन की ओर से इंदौर शहर में रणजीत हनुमान मंदिर और खजराना गणेश मंदिर परिसर में भी सेंटर बनाए गए. यहां रेड क्रॉस की सहायता से जरूरतमंदों को मुफ्त दवाइयां दी जा रही.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Sat, 06 May 2023 17:35:25 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/mission-to-make-india-thalassemia-free-by-2025]]></guid><category><![CDATA[हम में है हीरो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/qV9XJUgTSvrqR3jAP1Sy.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/qV9XJUgTSvrqR3jAP1Sy.jpg"/></item><item><title><![CDATA[गीता प्रेस के 100 साल: कोविड के बाद रिकॉर्ड बिक्री ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/100-years-of-geeta-press-who-sell-religious-books</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vrnIxX1Vln00lqNuGH0z.jpg"><p>लगातार हर क्षेत्र में बढ़ती महंगाई और चीज़ों के बढ़ते दाम के बाद भी आपको अभी भी केवल 2 रुपए में सबसे चर्चित हनुमान चालीसा और केवल एक रुपए में गीता का सार पढ़ने के लिए साहित्य उपलब्ध हो जाएगा. यह आज नहीं बल्कि पिछले सौ सालों से चली आ रही एक धार्मिक सेवा है ,जिसका सदुपयोग धार्मिक आस्थाओं में रखने और पुस्तकें पढ़ने वाले कर रहे हैं. यह साहित्य इतना सस्ता उपलब्ध करवा पाना बड़ी चुनौती है.लेकिन पूरे देश में केवल यह काम गीता प्रेस,गोरखपुर कर रही जो जिसका नाम सबकी ज़ुबान पर है. सौ साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर प्रेस को बधाई दी.इस समय पूरे देश में 21 अधिकृत प्रतिष्ठान और 50 रेलवे स्टॉल लगे हुए हैं.यहां तक कि नेपाल में भी गीता प्रेस की शॉप उपलब्ध है.      </p>
<p><img style="width: 580px; height: 259px;" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/76Jz5apfchL6ncx47hDa.jpg" alt="sales of religious books increased after covid19"> </p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>गीता प्रेस गोरखपुर की इंदौर की शॉप पर रखीं धार्मिक पुस्तकें (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार) </em></span></p>
<p>समय के साथ इस काम का जिम्मा ट्रस्ट ने संभाला. लगभग आठ साल पहले कुछ षड्यंत्र के तहत इस प्रेस और कर्मचारियों के मेहनताना विवाद को बढ़ा-चढ़ा कर मिडिया में लाया गया. इस प्रेस के बंद होने की आशंका जताई गई.जो गलत साबित हुई. कई लोगों ने इस प्रेस को बचाने के लिए करोड़ों रुपए की सहायता की पहल की, लेकिन ट्रस्ट ने अभी तक एक रुपए का चंदा या सहयोग राशि नहीं ली. वर्तमान में आकंड़ों के अनुसार कोरोना काल के बाद धार्मिक पुस्तकें ख़ास कर गीता, रामचरित मानस, शिव पुराण और भागवत जैसी पुस्तकों की बिक्री में दोगुना इजाफा हुआ. कोरोना में लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी अपने प्रियजनों को खोने के दुःख ने लोगों को अध्यात्म की ओर सोचने पर विवश कर दिया. उस दौरान चर्चित रामायण सीरियल का प्रसारण और हाल ही कुछ सालों में धार्मिक कथाओं के आयोजनों, धर्म के प्रचार का भी असर यह हुआ कि धार्मिक पुस्तकों की रिकॉर्ड बिक्री हुई. </p>
<p>गीता प्रेस गोरखपुर की स्थापना और प्रकाशन का इतिहास भी उतना ही दिलचस्प है. साल 1923 में जयदयाल  गोयन्दका और हनुमान प्रसाद ने एक प्रकाशक से गीता को छपवाया. उन्होंने देखा कि प्रकाशन के बाद कई जगह वर्तिनी और दूसरी गलतियां थी. जयदयाल और हनुमान प्रसाद पोद्दार ने तय किया कि इसे खुद अच्छे से प्रकाशित करनी होगी. और इसी सोच के साथ गोरखपुर में दस रुपए महीने के एक कमरे को किराए पर लेकर गीता को प्रकाशित की. और इस तरह गीता प्रेस की नींव रख दी गई. धीरे-धीरे धार्मिक सेवा की सोच लेकर लागत मूल्य से भी काम दाम पर पाठकों और श्रद्धालुओं को पुस्तकें उपलब्ध करवाना शुरू कर दी. इस टीम में साथी रामसुख दास महाराज भी जुड़े. इन विद्वानों की टिका को लोग बड़े रोचक ढंग से पढ़ते हैं. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/fWOxAKpD9cEnztWntFQx.jpg" alt="sales of religious books increased after covid19"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>शॉप पर खरीदारी करती भाविका पारखे (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार) </em></span></p>
<p>इंदौर के गीता प्रेस प्रतिष्ठान के प्रबंधक गुलशन शर्मा कहते हैं - " इस समय साढ़े 23 सौ से ज्यादा अलग-अलग भाषाओं में धार्मिक पुस्तकें प्रकाशित की जा रहीं हैं. इनमें रामचरित मानस,गीता, शिव पुराण जैसी पुस्तकें छाप रहीं हैं. कल्याण पत्रिका भी इसी प्रेस की देन है. प्रदेश में ही सालाना कारोबार साढ़े तीन करोड़ से बढ़ कर लगभग 7 करोड़ तक पहुंच गया.साथ ही पूरे देश में यह कारोबार लगभग 110 करोड़ रुपए तक हुआ. मैं खुद इस प्रतिष्ठान पर 22 सालों से सेवाएं दे रहा हूं. मेरे साथ महेश लोधी और संतोष पाटिल सहयोगी भी हैं. " </p>
<p>इस अध्यात्म की बढ़ती प्रवृति का असर सबसे ज्यादा युवाओं पर भी पड़ा. प्रबंधक गुलशन शर्मा आगे बताते हैं -" आजकल युवा पीढ़ी भी पुस्तकों को बड़ी रूचि से खरीद कर पढ़ रहीं हैं." इंदौर की भाविका पारखे आधुनिक विचारों की समर्थक है. वे एक निजी कंपनी में जॉब करतीं हैं. बावजूद भाविका कहती हैं -" मैं आधुनिक विचारों के साथ अध्यात्म में रुझान रखती हूं. भारतीय सभ्यता और संस्कृति बेहद खूबसूरत है.हमारे पौराणिक इतिहास में श्रीराम हों या श्रीकृष्ण, चरित्र हमें जीने की राह दिखाते हैं. "</p>
<p>लगातार पेपर के दाम बढ़ने के बाद भी इस प्रेस से प्रकाशित पुस्तकें जैसे रामायण आज भी केवल साढ़े आठ सौ रुपए में उपलब्ध हो जाती है. जिसकी बाहर कीमत अनुमानित ढाई हजार होगी. प्रतिष्ठान पर पहुंचे युवा रेनु रेगी कहते हैं - "व्यक्ति कितना भी आधुनिक हो जाए, लेकिन हम अपनी संस्कृति से अलग नहीं हो सकते. मेरे परिवार में सभी लोग भी धार्मिक पुस्तकों को पढ़ना पसंद करते हैं. गीता प्रेस कारोबार नहीं बल्कि धार्मिक संस्कृति को बचाने में लगी है."</p>
<p>साल 1923 यानि हिन्दू कैलेण्डर अनुसार वैशाख शुक्ल त्रियोदशी संवत 1980 में इसकी शुरुआत हुई. पिछले साल पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां आयोजन में शामिल हुए और सचित्र रामचरित  मानस के नए संस्करण का विमोचन किया था. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 04 May 2023 17:19:06 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/100-years-of-geeta-press-who-sell-religious-books]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vrnIxX1Vln00lqNuGH0z.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vrnIxX1Vln00lqNuGH0z.jpg"/></item><item><title><![CDATA["ग्रीन ग्वालियर, क्लीन ग्वालियर" ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/green-gwalior-clean-gwalior-planning-by-gwalior-officials</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/c0eg2GuvJHsdnaHeMLnI.png"><p dir="ltr">2014 में जब से प्रधानमंत्री ने 'स्वच्छ भारत अभियान' की शुरुआत की, तब से देश की जनता में सफाई की प्रति एक नए जोश देखने को मिला. इंदौर इस दौड़ में 6 साल से सबसे आगे है. 'ग्रीन ग्वालियर क्लीन ग्वालियर' के नारे के साथ ग्वालियर भी इस मुहीम में आगे आने के प्रयास में लगा हुआ है.</p><p dir="ltr">ग्वालियर संभागीय आयुक्त दीपक सिंह ने बुधवार को बाल भवन में आयोजित पौधा रोपण प्लानिंग की बैठक में कहा- "शहर व उसके आस-पास वृक्षारोपण करने व सभी पौधों का संरक्षण करने के लिए सभी को मिलकर साथ आना होगा. सभी विभाग, संस्थायें एवं सामाजिक कार्यकर्ता पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें और इस अभियान को घर-घर पहुँचाएं, जिससे जिले का प्रत्येक घर पौधा रोपण अभियान में जुड़ सके. जिसके यहां जगह है वह अपने आंगन अथवा भवन परिसर में और जिसके यहां जगह नहीं है वह गमलों में पौधा रोपण कर इस अभियान में सहभागी बनें." बैठक में कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह ने कहा- "यदि हमारा ग्वालियर हरा भरा होगा तो स्वच्छ भी होगा और शहरवासी स्वस्थ रहेंगे. इसलिए सभी लोग मिलकर जिम्मेदारी के साथ अधिक से अधिक पौधा रोपण करें और पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी लें."</p><p dir="ltr">नगर निगम आयुक्त हर्ष सिंह ने कहा- "नगर निगम ग्वालियर द्वारा आगामी पौधा रोपण को लेकर योजना तैयार की है जिसमें हम शहर के लगभग 110 अर्धविकशित पार्कों में प्लांटेशन करेगें तथा नये रोड पर डिवाइडर व अन्य स्थानों पर जगह चिन्हित कर पौधा रोपण की योजना तैयार कर ली है." सीईओ जिला पंचायत विवेक कुमार ने कहा- "जिला पंचायत द्वारा मनरेगा के प्रोजेक्ट में तथा अन्य नई लोकेशन चिन्हित करने के साथ ही घाटीगांव के आस-पास पौधा रोपण किया जाएगा. इसके साथ ही अमृत सरोवर योजना तथा ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल व आंगनवाडी क्षेत्रों को भी चिन्हित किया जाएगा."</p><p dir="ltr">पूर्व संभागीय आयुक्त बीएम शर्मा ने कहा- "इस बार मौसम विभाग द्वारा इस क्षेत्र में कम बारिश की संभावना व्यक्त की है इसलिए हमें कम पानी वाले पौधों का चयन करें. इसके साथ ही डिवाइडर इत्यादि पर पौधे लगाते समय उसकी जिम्मेदारी समिति को दें तथा समिति को प्रशिक्षित भी करें. शहरवासियों में पर्यावरण के लिए निजी प्रयासों के आधार पर सबसे अच्छे गार्डन, टैरिफ गार्डन के बारे में सबको बताएं और उन्हें पुरुस्कार भी दें." ग्वालियर शहर की तरफ से लिया गया यह कदम एक बहुत बड़ी पहल है. देश के हर जिले में इस सोच की बहुत ज़रूरत है. जिस तरह गर्मी का स्तर बढ़ रहा है, देश में ऐसी पहल की बहुत ज़रूरत है. स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को भी इस योजना को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए. भविष्य की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाना सिर्फ सरकार के लिए ही नहीं बल्कि हर व्यक्ति के लिए ज़रूरी है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sat, 29 Apr 2023 14:08:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/green-gwalior-clean-gwalior-planning-by-gwalior-officials]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/c0eg2GuvJHsdnaHeMLnI.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/c0eg2GuvJHsdnaHeMLnI.png"/></item><item><title><![CDATA[रतलाम कर रहा स्वच्छता में NO.1 बनने की तैयारी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shgs-to-look-after-swachchta-parisar-in-ratlam-mp</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/VlbdXvUNAEfH940wNmIW.JPG"><p>इंदौर ने तो स्वच्छता में बाज़ी मारली है, और अब इंदौर से 140 किलोमीटर दूर रतलाम जिला भी स्वच्छता परिसरों का निर्माण कर स्वच्छता की इस रेस में आगे निकलने की तैयारी  कर रहा है. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत रतलाम जिले मेें लगभग 6000 स्वयं सहायता समूहों के ज़रिये करीब 66800 परिवारों को लाभ मिल रहा है. महिलाओं के ये समूह कई तरह की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का समाधान कर रहे हैं. इस बार इन समूहों ने स्वच्छता की कमी को दूर करने की ठानी. ये समूह जिले में सार्वजनिक स्थानों पर 79 स्वच्छता परिसरों का संचालन और देखभाल कर रहे हैं. जिले में कुल 145 स्वच्छता परिसर बनाने की योजना है. </p>
<p>परिसर बस स्टैंड, हाट बाजारों इत्यादि सार्वजनिक जगहों पर बनाए जा रहे हैं. अगले महीने 66 और परिसर भी बनकर तैयार हो जाएंगे. निर्माण के साथ-साथ खुले में शौच न करने का संदेश भी दिया जा रहा है. परिसर के बाहर दो दुकानें भी बनाई जा रही हैं जिसका संचालन स्थानीय समूह कर रहे हैं. परिसरों की सफाई की ज़िम्मेदारी स्वसहायता समूहों ने उठाई. इसके बदले समूह को दुकानों का किराया नहीं देना होगा. जिले की कई पंचायतों में 465 स्क्वेयर फीट में स्वच्छता परिसरों का निर्माण 45 लाख रुपयों की लागत से किया जा रहा है. परिसर के बाहर बनी दुकानें 36-38 स्क्वेयर फीट की हैं. </p>
<p>समूह की महिलाओं ने यहां किराना, सलून, होटल,और टेलरिंग की दुकानें शुरू की हैं. कुछ परिसर फोरलेन सड़क पर बने हैं जिसकी वजह से समूहों को फायदा मिलेगा. रूपनगर फंटा, बड़ोदिया, कराडिया, करिया,बडावदी,आक्याकला, रुपडी सहित 79 गांवों के स्वच्छता परिसरों में दुकानें शुरू हो चुकी हैं. योजना के अनुसार आलोट में 33, बाजना में 25, जावरा में 20, पिपलोदा में 20, रतलाम 31, सैलाना में 16<br>स्वच्छता परिसर होंगे. साथ ही जिले में  ई-रिक्शा से कचरा संग्रहित कर गांव की स्वच्छता को बढ़ाने का काम भी चल रहा है. 84 गांवों में ही बने सेग्रीगेशन शेड में भी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं काम कर रही हैं. </p>
<p>न केवल रतलाम में स्वछता बढ़ेगी, पर महिलाओं और उनके परिवारों को इस रोज़गार से मदद भी मिल सकेगी. समय-समय पर समूहों ने सरकार की योजना को ज़मीन पर लागू करवाने में मदद की है. इस बार भी इस फैसले से स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण योजना को नई ऊंचाई मिल सकेगी.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Tue, 25 Apr 2023 15:59:15 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shgs-to-look-after-swachchta-parisar-in-ratlam-mp]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/VlbdXvUNAEfH940wNmIW.JPG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/VlbdXvUNAEfH940wNmIW.JPG"/></item><item><title><![CDATA[बाग प्रिंट साड़ियां बन रही हैं महिलाओं की पहली पसंद ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-of-madhya-pradesh-manufacture-bagh-print-saris</link><description><![CDATA[<img src=""><p><iframe style="width: 712px; height: 399px;" src="https://www.youtube.com/embed/HzAV511Anv0" width="712" height="399" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>धार जिले के बाग़ प्रिंट के नाम से प्रसिद्ध कपड़े को देश -विदेश में पहचान दिलाने वाली महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की नई सोच बना ली. बाग़ नगर में प्रिंट होने वाली प्रिंट बाग़ प्रिंट के नाम से पहचान बना चुकी है.विदेशों तक अपनी पहुंच और पसंद बन जाने वाली बाग प्रिंट का शुरुआती इतिहास के कोई ठोस प्रमाण तो नहीं हैं,लेकिन यहां के क्षेत्र की गुफाओं पर अंकित शैल चित्र लगभग एक हजार साल पुराने हैं जिससे इतिहासकार अनुमान लगाते हैं कि यह हस्तशिल्प कला बहुत पुरानी और  कला संस्कृति का हिस्सा रहा होगा. सरमी बाई ,अनीता सोलंकी ,मुस्कान बाई बड़े गर्व से बताती हैं की अब उनके पति भी मजदूरी पर जाने का काम छोड़ कर पत्नियों और परिवार का साथ दे रहें हैं. सरकार हस्तशिल्प निगम द्वारा क्वालिटी मैंटेन भी करवा रही है. मप्र हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम लिमिटेड, इंदौर के प्रबंधक डीकेशर्मा और मृगनयनी प्रभारी सहायक प्रबंधक दिलीप सोनी कहते हैं-" ग्रामीण क्षेत्रों में से एक बाग़ प्रिंट बहुत प्राचीन कला का नमूना है. उनकी कला को लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है. बड़े शहरों के साथ विदेशों में भी यह कला पसंद बना चुकी है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">Rohan</dc:creator><pubDate>Mon, 17 Apr 2023 18:58:23 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-of-madhya-pradesh-manufacture-bagh-print-saris]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category></item><item><title><![CDATA[सेवा भारती संगम: आखरी दिन ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/sewa-bharti-last-day</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/lmJL4yZGZFkCNJr9qCe8.jpg"><p dir="ltr">आत्मनिर्भर भारत और चेतन समाज के संकल्प के साथ जयपुर के केशव विद्यापीठ में सेवा भर्ती का तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेवा संगम सम्पन्न हुआ. यहां महिलाओं ने समूह के साथ सशक्तिकरण और स्वावलंबी बनने पर विचार किया. इन्हीं में से एक था इंदौर से आया स्वयं सहायता समूह वैभवश्री. सेवा संगम में आयोजित प्रदर्शनी में अपने समूह के उत्पाद लेकर आईं वैभवश्री समूह की प्रतिनिधि कविता वाघमरे गर्व से बताती हैं - "कभी तीन हजार रुपये की सामूहिक बचत से शुरू हुई यात्रा आज कम से कम 30 हजार प्रति माह के मुनाफे पर पहुंच चुकी है."  </p>
<p dir="ltr">सेवा भारती, इंदौर नगर प्रमुख कविता ने बताया-  "सेवा भारती के सहयोग से स्थानीय बहनों को सिलाई प्रशिक्षण के साथ अचार, पापड़, बड़ी, मुरब्बा, गुलदस्ते बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है. कुछ बहनें घर पर ही उत्पाद बनाकर वैभवश्री तक भेजती हैं. वैभवश्री ने दिपावली पर लगाई जाने वाली लाइट की लड़ियां भी बनाई है. आज समूह घरों में बैठी महिलाओं से 50 हजार से अधिक दीपावली की लाइटिंग वाली लड़ियां बनवा रहा है. कविता की आंखों में चमक आ जाती है, जब वे बताती हैं कि इंदौर में चीनी लाइट लड़ियां लगाना बंद ही हो गया है.</p>
<p dir="ltr">वैभवश्री में कुर्ता पायजामा, कपड़ों के थैले, लंगोट, झंडे सब सामान सालभर बिकता है. इसके अलावा राखियां, दीपावली की लड़ियों की भी सालभर बिक्री होती है. समूह की महिलाएं न केवल खुद के लिए बल्कि अपने से कमज़ोर का भी साथ दे रहीं है. कविता का कहना हैं- "हमें चाहे प्रशिक्षण हो या कच्चा माल सेवा भारती से हर समस्या का हल तुरंत मिलता है. यह सब लाकर बहने घर पर ही झंडे, बैग, कुर्ते, पायजामा आदि सिल कर तैयार करती हैं. कोरोना काल मे बहनों ने मास्क बनाकर भेजे." यह समूह तीन साल से चल रहा है, जिसमे 10 महिलाएं हैं. तीन साल पहले ये 10 महिलाएं 100 रुपये की सामूहिक बचत के साथ जुटी थीं. अब इनकी यह बचत 5000 रुपये महीना पहुंच गई है. आज ये इतनी आत्मनिर्भर हैं कि आपस में लोन भी दे देती हैं और बड़े बैंकों के मोटे ब्याज चुकाने से भी बच जाती हैं. आपसी सहयोग और कर्मठता की मिसाल देख कर क्षेत्र की और भी बहनें प्रेरित हुई है. </p>
<p dir="ltr">यह कहानी सिर्फ वैभव श्री समूह की ही नहीं बल्कि देश के ज़्यादातर SHGs की है, जिन्होंने बहुत कम पैसे जोड़कर आज बहुत बड़ा व्यवसाय खड़ा कर लिया है. वैभव श्री की कहानी सेऔर भी स्वयं सहायता समूहों को प्रेरणा लेनी चाहिए, क्यूंकि अगर यह महिलाएं बिना डरे अपनी ज़िंदगियाँ सवार सकतीं है तो, दूसरी महिलाएं क्यों नहीं.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 11 Apr 2023 16:52:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/sewa-bharti-last-day]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/lmJL4yZGZFkCNJr9qCe8.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/lmJL4yZGZFkCNJr9qCe8.jpg"/></item><item><title><![CDATA[ठाना और बन गई  इंजीनियर गौ पालक ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/mp-woman-owns-50-cows-and-helps-other-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FPCFgdCDcMqClEs7vdz9.jpeg"><p dir="ltr">इंजीनियरिंग की. एमबीए किया. इंदौर शहर की एक कंपनी में जॉब कर रही थी.फिर गारमेंट्स का बिज़नेस भी किया. सब कुछ ठीक चल रहा था. अचानक लॉक डाउन के बाद नौकरी छूटी. बिज़नेस पर असर पड़ा. रास्ते सारे बंद. ससुराल लौट आने के बाद सोचा,अब जो करेंगे खुद का करेंगे. गौ पालन का मन बनाया. छोटे गांव में रह कर चुनौती थी. पति के साथ दस गायों से शुरुआत की. गांव वालों ने हंसी उड़ाई पर इसे ताकत मान कर कारोबार बढ़ा लिया. केवल दो सालों में अपनी पहचान बना ली. यह कहानी है शाजापुर जिले की किलोदा गांव की बहू पायल पाटीदार की. पायल ने साबित कर दिया कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता. </p>
<blockquote>
<p dir="ltr"><em>राजगढ़ जिले के पाडल्या माताजी की पायल को उनके पिता ने उम्मीदों से इंजिनियर बनाया. फिर एमबीए किया. अच्छी खासी जॉब लग गई. शादी के बाद भी जॉब करती रही. पायल कहती है -"गांव लौटने के बाद कोई काम सूझ नहीं रहा था. आखिर पति पीयूष ने हौसला दिया. दस गिर प्रजाति की देशी गाय खरीदी. गोबर उठाना, दूध निकालना, मवेशियों को चारा खिलाना जैसे काम भी करने में संकोच नहीं किया. लोकल और आसपास के गांव में दूध बेचा."</em></p>
</blockquote>
<p dir="ltr">धीरे-धीरे काम में मन लगने लगा. गोबर से कंडे,धूपबत्ती और खाद सहित दूसरे उपयोगी चीज़ें बनाने लगी. पूरे परिवार ने हौसला बढ़ाया. कारोबार बढ़ाने के लिए अब पचास गिर की गाय खरीद लाए.यह गाय गुजरात और राजस्थान से मंगवाई. दूध के साथ दूसरे प्रोडक्ट भी बनाने लगी. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Q5pttfTPuC1jBCcr6kNh.jpeg" alt="payal"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em> देशी गिर गायों की देखभाल करती पायल </em></span></p>
<p dir="ltr">पायल आगे बताती है -" दूध का प्रोडक्शन बढ़ा. अब आसपास के नगरों में दूध सप्लाई करते हैं. घी की ऑनलाइन बिक्री भी शुरू की और कारोबार लाखों में पहुंच गया. मुझे ख़ुशी है की अब इंजीनियर गौ पालक के रूप में पहचान बनाई."</p>
<p dir="ltr">पालतु पशु विशेषज्ञों का भी मानना है कि पौष्टिकता कि नज़र में भी देशी गाय का दूध सबसे बढ़िया होता है. यही सोच कर पायल ने काम के साथ इसे समाज सेवा मान कर गौ पालन का काम शुरू किया. इन दिनों अपने कारोबार के साथ पायल ग्रामीण महिलाओं को भी अपने बल पर आत्मनिर्भर बनने और खुद के कारोबार करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. </p>
<p dir="ltr"><em><strong>रिपोर्ट :ओम व्यास  </strong></em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Sat, 08 Apr 2023 17:53:12 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/mp-woman-owns-50-cows-and-helps-other-women]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FPCFgdCDcMqClEs7vdz9.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FPCFgdCDcMqClEs7vdz9.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[वो यलो बेल्ट वाली लड़की... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-helped-maaya-stand-on-her-own-feet</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Ltu20FKbxH0OFeqs7VKX.jpg"><p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal','serif'; mso-ascii-font-family: Calibri; mso-ascii-theme-font: minor-latin; mso-hansi-font-family: Calibri; mso-hansi-theme-font: minor-latin; mso-bidi-font-family: Mangal; mso-bidi-theme-font: minor-bidi; mso-bidi-language: HI;">वो अपने इलाके में टॉमबॉय कहलाती थी. बॉयकट बाल, बेलौस अंदाज़, कराटे के स्टंट तो ऐसे कि देखनेवाले दांतों तले उंगलियाँ दबा लेते. आप उसे शादी से पहले देखते तो यकीनन आपको आमिर खान की फिल्म दंगल की लड़कियां याद आ जातीं. उसके इस बेलौस अंदाज़ से सबको यही लगता कि वो भी अपनी टीचर ऊषा ठाकुर </span><span style="mso-bidi-language: HI;">(</span><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal','serif'; mso-ascii-font-family: Calibri; mso-ascii-theme-font: minor-latin; mso-hansi-font-family: Calibri; mso-hansi-theme-font: minor-latin; mso-bidi-font-family: Mangal; mso-bidi-theme-font: minor-bidi; mso-bidi-language: HI;">जो वर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार में पर्यटन मंत्री हैं) से प्रभावित है. परिवार वालों ने बारहवीं के बाद ही उसकी शादी कर दी. <span style="mso-spacerun: yes;"> </span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal','serif'; mso-ascii-font-family: Calibri; mso-ascii-theme-font: minor-latin; mso-hansi-font-family: Calibri; mso-hansi-theme-font: minor-latin; mso-bidi-font-family: Mangal; mso-bidi-theme-font: minor-bidi; mso-bidi-language: HI;">वक़्त ने करवट बदली और वह इंदौर से ब्याह कर खजूरिया गाँव आ गयी. खजूरिया इंदौर से 18-20 किलोमीटर दूर है. यहाँ 12-15 लोगों का भरापूरा संयुक्त परिवार था. कई सालों तक तो वो परिवार की जिम्मेदारियों में ही उलझी रही पर उसका मन हमेशा चाहता कि वह भी कुछ करे, अपने पैरों पर खड़ी हो. इसमें उसका साथ दिया उसकी जेठानी शांति ने जो खुद तो पढ़ी लिखी नहीं थी पर चाहती थी कि माया की पढाई उसके काम आये, वो घर से बाहर निकले और कुछ करे. शान्ति ने घर की सारी जिम्मेदारियां उठा लीं, यहाँ तक की माया के बच्चों की भी. माया आरसेटी यानि रूरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट की तरफ से ग्रामीण महिलाओं को फ्री में सिखाये जाने वाले पार्लर कोर्स को सीखने के लिए रोज़ खजूरिया गाँव से इंदौर के महुनाके 80 किलोमीटर बस से आया जाया करती थी. पार्लर का कोर्स तो उसने 2012 में ही सीख लिया था पर पैसों की तंगी की वजह से अपना पार्लर शुरू नहीं कर पा रही थी. पहले तो उसने घर पर ही एक कुर्सी, शीशे और पटिये से पार्लर की शुरुआत की पर जब वो आजीविका मिशन से जुड़ी और दशामाता स्वसहायता समूह बनाया तो उसके समूह को बैंक से 100000 का लोन मिला. लोन के पैसे से माया ने एक दुकान में पार्लर शुरू किया और कुछ सामान भरा. आज माया का “ख़ुशी पार्लर” उसकी ज़िन्दगी में खुशियाँ बिखेर रहा है. पार्लर के अलावा माया ने एक जनरल स्टोर भी शुरू कर दिया है और इन दोनों जगह से मिला कर उसे महीने में 7 से 8 हज़ार की कमाई हो जाती है.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal','serif'; mso-ascii-font-family: Calibri; mso-ascii-theme-font: minor-latin; mso-hansi-font-family: Calibri; mso-hansi-theme-font: minor-latin; mso-bidi-font-family: Mangal; mso-bidi-theme-font: minor-bidi; mso-bidi-language: HI;">माया बताती है कि घर से बाहर निकलने से बहुत हिम्मत खुली. पहले बैंक के अन्दर घुसने से भी डर लगता था लेकिन आज अपने स्वसहायता समूह के लिए उन्हें अक्सर बैंक जाना पड़ता है. उनके समूह द्वारा समय पर लोन चुकाने के कारण बैंक अधिकारी अब तो फ़ोन करके उन्हें बैंक बुलाते हैं.</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal','serif'; mso-ascii-font-family: Calibri; mso-ascii-theme-font: minor-latin; mso-hansi-font-family: Calibri; mso-hansi-theme-font: minor-latin; mso-bidi-font-family: Mangal; mso-bidi-theme-font: minor-bidi; mso-bidi-language: HI;"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/on8XlANSi08dw567zMfO.jpg" alt="yellow belt"></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span style="font-size: 8pt;"><em><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal','serif'; mso-ascii-font-family: Calibri; mso-ascii-theme-font: minor-latin; mso-hansi-font-family: Calibri; mso-hansi-theme-font: minor-latin; mso-bidi-font-family: Mangal; mso-bidi-theme-font: minor-bidi; mso-bidi-language: HI;">Image Credits: Ravivar Vichar</span></em></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align: justify;"><span lang="HI" style="font-family: 'Mangal','serif'; mso-ascii-font-family: Calibri; mso-ascii-theme-font: minor-latin; mso-hansi-font-family: Calibri; mso-hansi-theme-font: minor-latin; mso-bidi-font-family: Mangal; mso-bidi-theme-font: minor-bidi; mso-bidi-language: HI;">माया की बड़ी बेटी अंजलि भी अपनी मां की ही तरह स्पोर्ट्स की शौक़ीन है, वो स्पोर्ट्स में ही आगे बढ़ना चाहती है और माया भी यही चाहती है कि उसकी तरह अंजलि को अपना पैशन छोड़ना न पड़े. माया अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए कहती है- “स्कूल में मुझे जूडो कराटे में यलो बेल्ट मिला था, अगर मेरी शादी जल्दी ना हुई होती तो क्या पता आज मैं कराटे स्टंट मास्टर होती.” कराटे स्टंट्स की फोटो दिखाते हुए वो यलो बेल्ट वाली लड़की न जाने किन यादों में खो जाती है. <span style="mso-spacerun: yes;"> </span><span style="mso-spacerun: yes;">  </span></span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">भावना पाठक </dc:creator><pubDate>Tue, 21 Mar 2023 18:00:44 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-helped-maaya-stand-on-her-own-feet]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Ltu20FKbxH0OFeqs7VKX.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Ltu20FKbxH0OFeqs7VKX.jpg"/></item><item><title><![CDATA[नदी के जल अमृत को पावन कर रहे है अमृत सरोवर ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/river-conservation-by-shg-women-in-mp</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/08fdsTieCU0hNQw5JgmV.jpeg"><p>सिकुड़ती नदियों और गिरते जल स्तर को बचने के लिए सरकारें अपना जतन कर ही रही, इसके अलावा समाज सेवी ,पर्यावरण प्रेमी समूह के लोग भी अपने-अपने स्तर पर जुटे हुए हैं. मप्र में ही पूरी तरह सूख चुकी नदियों को वापस जिंदा करने के लिए भी ग्रामीणों और विशेषकर महिलाओं को समूहों के जरिए जोड़ा जा रहा है. मालवा -निमाड़ की कई नदियों पर यह काम चल रहा है. छोटी-छोटी नदियां जैसे दम तोड़ रही है ,वहीं जीवनदायनी नर्मदा नदी के सरंक्षण को लेकर भी पूरी ताकत झोंकी जा रही है. नर्मदा नदी के  लगातार किनारे कटने से बहाव में कमी देखी जा रही है. हालात और न बिगड़ें इसके लिए सरकार और नर्मदा प्रेमी लोग सतर्क और सजग हो गए.पूरे प्रदेश में नदियों के साथ भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए अमृत जल  सरोवर योजना लागू कर दी गई है. इंटरनेशनल डे ऑफ़ रिवर्स एक्शन जैसे ख़ास दिन को ये प्रयास सार्थक कर सकते हैं.</p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/7ZyfiEunYZnh9JxTA5XQ.jpeg" alt="Amrit Sarovar SHG"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar Vichar</em></span></p>
<p>इंदौर जिले को भी "पानीदार" बनाने के लिए सौ से अधिक अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं. इसमें जिले के ही 38 महिला स्वसहायता समूह की चार सौ से ज्यादा महिलाएं जुड़ गईं.ये जहां नदियों के आसपास संरक्षण का काम कर रही वहीं जल स्तर बढ़ाने के लिए सरोवर बन रहे हैं. इंदौर  जिले के ही महू क्षेत्र में भगवान परशुनाथ की जन्म स्थली जानापावा इलाके में ये महिलाएं नदियों की देखभाल ,तालाब में मछली पालन से कमाई भी कर रहीं हैं. नदियों को बचाने के लिए इन्हीं महिलाओं ने फलदार पौधा रोपण कर कमाई का दूसरा सोर्स भी तैयार कर लिया है.इस क्षेत्र की सात नदियों चोरल, मोरल ,अजनार, चंबल, नखेरी, गंभीर और कारम को बचाने के लिए भरोसा बन गया कि सरोवर और दूसरे काम से नदियों का जल स्तर बढ़ जाएगा. इंदौर जिले  के स्वसहायता  समूह की हेमलता कहती है-" नदियों को बचाने के लिए सरोवर और आसपास फलदार पौधे रोपे जिससे कमाई भी होगी. " इसी इलाके में स्वसहायता समूह चला रही लक्ष्मी स्वसहायता समूह की  रचना खुश हो कर कहती है - "नदियां हमारी पहचान है. इसे हम हर हाल में बचाएंगे और इससे कमाई भी होगी.खरगोन जिले की हथनी और पहाड़ी बरसाती नदी को भी इसी तरह पुनर्जीवित किया जा रहा है.</p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/U9nM6gtIfxTpCxRhAop1.jpeg" alt="Amrit Sarovar SHG"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar Vichar</em></span></p>
<p>जनपद पंचायत की असिस्टेंट ब्लॉक मैनेजर आरती सिंह कहती हैं -"महू इलाके गांव कुमठ ,बेका और पंचायत राजपुरा में समूह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. पानी के स्तर को बढ़ने के लिए कुमठ में तालाब भी बनाया जाएगा. बेगा के सात ,कुमठ के तीन और राजपुरा के चार महिलाओं के स्वसहायता समूह काम में जुटे हैं. </p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/8OXUapx6rPrNwMFeNPQM.jpeg" alt="AMRIT SAROVAR SHG"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar Vichar</em></span></p>
<p>पूरे जिले में लगभग 11 लाख घनमीटर पानी को इकठ्ठा हो सकेगा, जिसमें साढ़े आठ सौ हेक्टेयर जमीन की सिंचाई के साथ जल स्तर बढ़ेगा.आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को नया रोजगार भी साथ -साथ मिलेगा. नदियों को बचाने के लिए जागरूकता बधाई जा रही है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 16 Mar 2023 17:48:06 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/river-conservation-by-shg-women-in-mp]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/08fdsTieCU0hNQw5JgmV.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/08fdsTieCU0hNQw5JgmV.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[अर्थसंगिनी के संग फायनेंशिअल लिट्रेसी के रंग ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/aadhi-aabadi/shanu-mehta-working-towards-financial-literacy-of-rural-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/gqNPdtlAPmtsW41lbr9p.PNG"><p dir="ltr">डावोस की वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दुनिआ के बड़े लीडर्स से मिलना हो या लिटरेचर फेस्ट के मंच पर बोलना, वो हर जगह मौजूद है. महिलाओं की लीडरशिप और आर्थिक आज़ादी पर आर्टिकल लिखना हो या टीवी स्टूडियो में डिबेट करना, वो वहां भी मौजूद है. लेकिन सबसे पहले वो मौजूद है जहां सबसे ज़्यादा ज़रुरत है यानि ज़मीन पर. वो है शानू मेहता, जो बातों से एक कदम आगे बढ़कर ज़मीनी स्तर पर बदलाव लाई. </p>
<p dir="ltr">सोचना और अपनी सोच को अमल में लाना दो अलग अलग बातें है. अर्थसंगिनी के ज़रिये शानू ने  के कौशल विकास ( स्किल डेवेलपमेंट ) और वित्तीय साक्षरता ( फायनेंशिअल लिट्रेसी ) को ग्रामीण महिलाओं तक पहुंचाया. अर्थसंगिनी यानि आर्थिक सहेली , एक ऐसी संस्था जो सालों से गाँव की महिलाओं के लिए उनके बीच रहकर काम कर रही है.  शानू बताती हैं - "जब भी गांवों में महिलाओं से बात होती तो उनकी काबिलियत महसूस होती लेकिन वह छुपी हुई रहती." महिलाओं में पैसे कमाने का और अपने पैरों पर खड़े होने का जज़्बा तो था लेकिन कहीं दबा कुचला था. शानू ने इसको पहचाना और इन महिलाओं का साथ देने का सोचा. उन्होंने महसूस किया कि ये महिलाएं अपने साथ परिवार को भी बेहतर ज़िन्दगी दे सकती हैं. धीरे-धीरे महिलाओं की रूचि समझकर उन्हें अगरबत्ती, कपड़े, सैनेटरी पेड, खिलौने बनाने की ट्रेनिंग दी जो उनका स्किल डेवेलपमेंट प्रोग्राम बना.  इसको एक कदम आगे ले जाते हुए रुपये-पैसों की बचत के बारे में भी बताया जो कि फायनेंशिअल लिट्रेसी केम्प के ज़रिये हुआ. आज, सालों की कोशिशों के बाद पांच हज़ार से ज्यादा महिलाओं को प्रशिक्षण मिल चुका है और वो अपने पैरों पर खड़ी है. कुछ महिलाओं के बनाये हुए उत्पाद विदेश में भी बिक रहे हैं.</p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/IGLzYKum0mQvaxdeApFX.PNG" alt="shanu mehta"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar vichar</em></span></p>
<p dir="ltr">शानू ने ना केवल अर्थसंगिनी के ज़रिये काम किये बल्कि अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में भी अपने जुनून को सम्मिलित किया. आज उनकी खुद की आइटी कंपनी में करीब 200 कर्मचारियों में से 90 % महिलाएं हैं. इसी के साथ शानू ने सांस्कृतिक आयामों में भी दखलंदाज़ी रखी और इंदौर में नाइट कल्चर का आइडिया मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दिया. अर्थसंगिनी ने ग्रामीण क्षेत्र से बाहर भी कई काम किये जैसे महिला कांस्टेबलों को फाइनेंशियल मैनेजमेंट की ट्रेनिंग.  </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/I4Cl5U69MuQTGLWoa83U.jpg" alt="shanu mehta"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar vichar</em></span></p>
<p dir="ltr">शानू, आईआईएम इंदौर के इंस्टीट्यूशनल सोशल रेस्पॉनसिबिलिटी के साथ मिलकर गांवों की महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधित जानकारी दे रही हैं. अर्थसंगिनी की महिलाओं द्वारा तैयार किए जाने वाले सैनेटरी पैड पिछ़डे गांवों और कस्बों की ज़रूरतमंद महिलाओं और छात्राओं को दिए जा रहे हैं. अर्थसंगिनी संस्थान ने कुछ जगहों पर सैनेटरी पैड बनाने की मशीन, सिलाई मशीन, बॉल पैन बनाने का सामान और अन्य मशीनरी उपलब्ध कराई.</p>
<p dir="ltr">शानू मेहता की इस पहल ने साबित किया कि महिलाओं में मेहनत और योग्यता की कमी नहीं, बस थोड़ा सा साथ देकर उनकी आर्थिक आज़ादी की चुनौती को दूर किया जा सकता है. अब हमें बातों से ऊपर उठकर, ज़मीनी स्तर पर काम कर बदलाव लाने की ज़रुरत है ताकि महिलाओं की आर्थिक आज़ादी की क्रांति को बढ़ावा मिल सके.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Mon, 13 Mar 2023 14:04:16 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/aadhi-aabadi/shanu-mehta-working-towards-financial-literacy-of-rural-women]]></guid><category><![CDATA[आधी आबादी]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/gqNPdtlAPmtsW41lbr9p.PNG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/gqNPdtlAPmtsW41lbr9p.PNG"/></item><item><title><![CDATA[अचार वाली दीदी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/pickle-by-shg-tasted-by-cm-shivraj-singh</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Wsxyxe7VDJXNdu0pmB0O.jpeg"><p dir="ltr">रतलाम जिले का गांव धामनोद में लगे डोम में पैर रखने की जगह तक नहीं. मंच पर मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह खड़े हैं. उनके भाषण के पहले संचालक ने नाम पुकारा सविता देवी चौहान को अधिकारी सम्मान से मंच पर लाए. भीड़ में खड़ी सविता अपनी तीन अन्य साथियों के साथ मंच पहुंची. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह कहते हैं - आप ही हो न अचार वाली दीदी. सविता ने कहा - जी सर.  इतना कहते ही उसने अपने हाथों में पकड़ी अचार की पैक बॉटल सीएम को दे दी. आप को और अवसर और मार्केट के तरीके सिखाए जाएंगे. अधिकारियों को कह दिया है. धीरे -धीरे  वह मंच से उतर गयी. वह अभी तक कल्पना नहीं कर पा रही थी ,उसने अपनी साथियों को गले लगा कर वहीं हग कर लिया. तीन साल पहले तक खेतों में दूसरे के यहां मजदूरी करने और अपनी मेहनत के पैसे मांगने के लिए गिड़गिड़ाने वाली सविता मंच पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने खड़ी थी. पूरे स्वाभिमान के साथ. उसकी प्रशंसा के पुल बांधे जा रहे थे. अब वह गांव में अचार वाली दीदी के नाम से पहचानी जाती है. </p>
<p dir="ltr">कलोरी खुर्द गांव की सविता चौहान  की कहानी बड़ी दिलचस्प है. सविता और उसके पति हीरालाल चौहान खेत मजदूरी के लिए जाते. सविता कहती है -"मेरा छोटा बेटा गोदी में था. मजदूरी कर पेट भरना ही किस्मत में था. मैं  चिलचिलाती धूप में बच्चे को पेड़ के नीचे झोली बांध कर सुलाती थी. बड़ा बेटा घर पर छोड़ कर आती. " ये कोई एक दिन की बात नहीं थी. इतनी मेहनत और पसीना हर रोज बहाने के बाद भी घर चलना मुश्किल हो रहा था. पति -पत्नी समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर इस ज़िंदगी कि मुश्किलों से कैसे निजात पाई जाए.</p>
<p dir="ltr">और एक दिन कलोरी खुर्द में जिला पंचायत की टीम पहुंची. ऐसे ही मजदूरों और कुछ वहां मौजूद महिलाओं को पंचायत सदस्य सरकारी स्कीमों को समझा रहे थे. अपने पैरों पर कैसे खड़ा हुआ जाए ,कैसे स्वाभिमान की ज़िंदगी जी सकें,यह सब शामिल था. शाम हो रही थी महिलाएं मजदूरी से लौट रही थी. उनमें सविता भी शामिल थी. पंचायत में चहल-पहल देख वह भी रुकी. खुद का रोजगार और कमाई की बात सुनते ही वहीं बैठ गई. हालांकि सरकारी स्कीम का सुनकर महिलाओं के गले बात पूरी तरह नहीं उतरी. सविता ने वहां बैठे अधिकारियों से कहा -"साब ,परेशान तो बहुत हैं. पर हमारे पास पैसा है न कोई धंधा शुरू करने का आइडिया." अधिकारियों के समझाने पर सविता राजी  हो गई. समूह बनाया. नाम रखा जय माता दी महिला स्वसहायता  समूह. अध्यक्ष बनी पवन कुमारी.</p>
<p dir="ltr">सविता आगे बताती है- "सप्ताह में मिलने वाली मजदूरी के चंद रुपए भी गिनने और हिसाब करना नहीं आता था. समूह में 13 सदस्यों के साथ सब सीखा." अब थी रोजगार शुरू करने की बार. आजीविका मिशन के सुझाव और SHG ने  जीवन बदल दिया. अचार बनाने और पैकिंग के लिए मिशन के अधिकारी चार सदस्यों में शामू बाई ,अनुषा ,धापू बाई सहित सविता को मंदसौर ले गए जहां अचार बनाने के साथ कई सावधानियां सिखाई. जिला परियोजना प्रबंधक हिमांशु शुक्ला ने बताया कि इन महिलाओं को बेहतर प्रशिक्षण के लिए मंदसौर ले गए ,जहां विशेषज्ञों ने इन्हें तैयार किया. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/3ee3TGUXt6D1ppwuuJra.jpeg" alt="Ratlam aachar wali didi ">    </p>
<p dir="ltr">सविता आगे बताती हैं -"वह अपनी साथियों के साथ थोक में केरियां खरीद कर लाईं.अचार का मसाला और  पैकेजिंग के लिए  शीशियां और सिल्वर क्वाईन भी सस्ते दामों पर इंदौर से मंगाए,जिससे मुनाफा ज्यादा मिल सके."आजीविका नाम से ये अचार स्टोर और हाट बाजार में बेच रहें हैं.सविता आगे कहती है -" पहले खेत मालिकों से कर्ज लेना पड़ता था. अब बेहतर जिंदगी जी रही है. समूह का लोन भी वह समय पर उतार चुके हैं.पति भी मजदूरी छोड़ अचार के प्रचार और सप्लाई में सहयोग करने लगे.अब उन्हें दस से 15 हजार रुपए की कमाई हो जाती है.अचार दो सौ किलो रुपए बिक रहा है.सीज़न खत्म होने पर इंदौर कोल्ड स्टोर से केरी मंगा ली. </p>
<p dir="ltr">रतलाम कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने बताया कि  "जिले में आजीविका मिशन कि योजना दूसरों जिले की तुलना में देरी से शुरू हुई. बावजूद महिलाओं की मेहनत ने समूह बना कर देश में अलग पहचान बना ली. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी यहां के समूहों के उत्पादों की सराहना की है."</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 02 Mar 2023 17:20:46 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/pickle-by-shg-tasted-by-cm-shivraj-singh]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Wsxyxe7VDJXNdu0pmB0O.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Wsxyxe7VDJXNdu0pmB0O.jpeg"/></item></channel></rss>