<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ इंटरनेशनल ईयर ऑफ़ मिलेट]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/inttrneshnl-iiyr-onf-milett</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/inttrneshnl-iiyr-onf-milett" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 04 May 2023 11:42:59 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[मिलेट यूज़ में तेलंगाना सबसे आगे ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/telangana-ahead-in-millet-use</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/nezyL6tXs1mtBmFOmXaR.jpg"><p>देशभर में 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ़ मिलेट' (International Year of Millet) के तहत मिलेट से बने पकवानों को बढ़ावा दिया जा रहा है. बाजरा को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहलों की वजह से बाजरा थाली में वापिस लौट रहा है. तेलंगाना ने बाजरा की खपत में उल्लेखनीय वृद्धि की है. पूरक पोषण के अलावा लक्षित आबादी समूहों के दैनिक आहार में बाजरा की खपत बढ़ी है. </p>
<p>नीति आयोग की रिपोर्ट ने बताय कि तेलंगाना में बाजरा के उत्पादन, प्रसंस्करण और खपत को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार और संगठनों ने कई पहलों की शुरुआत की, जिसकी वजह से बाजरा की खपत बड़ी और आईसीडीएस के तहत बच्चों को परोसे जाने वाले पौष्टिक भोजन  में बाजरा की मात्रा बढ़ी है. इससे लक्ष्य समूह में स्टंटिंग, वेस्टिंग, और एनीमिया को कम करने में योगदान मिला है. यह पहल 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों, उनकी माताओं और समुदाय के सदस्यों को कवर करती है. इसमें जिला प्रशासन, विकाराबाद (2017-19), आदिलाबाद (2019-20) और तकनीकी भागीदार WASSAN (वाटरशेड सपोर्ट सर्विसेज एंड एक्टिविटीज नेटवर्क) शामिल है. </p>
<p>आईसीडीएस (ICDS) में बाजरा की शुरुआत ने बड़े पैमाने पर खरीद को बढ़ाया है और इस तरह बाजरा के लिए बाजार में भारी मांग पैदा की है. उत्पादन, व्यापार, प्रसंस्करण आदि पर व्यापक रूप से असर पढ़ा और रोज़गार के अवसर बढ़ने लगे. इसने महिला एसएचजी,छोटे उद्यमियों, किसानों और ग्रामीण लघु उद्योगों की संख्या में वृद्धि हुई. कोमाराम भीम जिले के SHG समूह ने अपने ब्रांड के तहत बाजरा का प्रसंस्करण और पैकेजिंग का काम शुरू किया. आदिवासी महिलाओं के नेतृत्व वाले संयुक्त देयता समूहों (Joint Liability Groups) द्वारा मैनेज ITDA (एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना) क्षेत्रों में आठ खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की गई, जिसके ज़रिये करीब 80 आदिवासी महिलाएं पोषण उद्यमी बन गई. </p>
<p>सरकार की मिलेट को बढ़ावा देने वाली पहल ने देशभर में ऐसी कई स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को अपना रोज़गार शुरू करने में मदद की है. इन महिलाओं ने अपने रोज़गार के ज़रिये सरकार की मिलेट को बढ़ावा देने वाली योजनाओं को ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. राज्य सरकारों को इन महिलाओं को अपनी पहल में ज़्यादा से ज़्यादा शामिल करना चाहिए, ताकि SHG दीदियों को रोज़गार मिले और इन महिलाओं के ज़रिये इस पहल का फायदा हर तबके तक पहुंच सके.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Thu, 04 May 2023 11:42:59 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/telangana-ahead-in-millet-use]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/nezyL6tXs1mtBmFOmXaR.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/nezyL6tXs1mtBmFOmXaR.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मिलेट बना इंडियन आर्मी के राशन का हिस्सा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/indian-army-includes-millets-in-their-ration</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ZN4ZcI78gE8iCn9ki2HV.JPG"><p><iframe style="width: 924px; height: 518px;" src="https://www.youtube.com/embed/yI10-TxaGgw" width="924" height="518" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>G20 प्रेसीडेंसी मिलने के बाद जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के साथ '2023' को 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ़ मिलेट' घोषित किया.उससे भारत का प्राचीन अनाज 'मिलेट्स' या 'मोटे आनाज', दोबारा दुनिया के सामने हाईलाइट हुआ और खान पान का हिस्सा बनाने का मौका मिला.भारतीय सेना अब अपने जवानो को दिए जाने वाले राशन में मिलेट्स को शामिल करने वाली है.गेहूं को बढ़ावा देते हुए कुछ 50 साल पहले मिलेट्स को सेना के राशन से हटा से दिया गया था, लेकिन अब दोबारा हमारी सेना मिलेट्स को अपनी थाली में लाएगी.इसी के साथ मिलेट्स के महत्त्व को समझाने के लिए सेना शैक्षिक संस्थानों में भी 'नो योर मिलेट' नाम का जागरूकता कैंपेन चलाया जायेगा.मिलेट वैसे भी बहुत ही पोषक आनाज है जो कि हर जवान के लिए फायदेमंद साबित होगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Sat, 25 Mar 2023 15:10:20 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/indian-army-includes-millets-in-their-ration]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ZN4ZcI78gE8iCn9ki2HV.JPG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/ZN4ZcI78gE8iCn9ki2HV.JPG"/></item><item><title><![CDATA[अब भारतीय सेना बनेगी 'MILLET'RY ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/millets-reintroduced-in-ration-of-indian-army-after-50-years</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vnfkDkAenauqOcLeHrFM.jpeg"><p>हमारी सेना दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं में से एक है. इस ताक़त को बनाये रखने के लिए हौसला, ज़ज़्बा, देशभक्ति के साथ सही डाइट भी ज़रूरी है.देश की रक्षा के लिए जवान सरहदों से लेकर देश के इंटीरियर इलाकों तक मुस्तैदी से खड़े रहते है.क्युकि सैनिक एक ही जगह और इलाके में कई दिनों के लिए रहते है, उनके खाने-पीने का इंतज़ाम भी उचित होना चाहिए.</p>
<p>इसी की पहल भारतीय सेना ने मिलेटस के साथ करी.वैसे भी G20 प्रेसीडेंसी मिलने के बाद जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के साथ  '2023' को  'इंटरनेशनल ईयर ऑफ़ मिलेट' घोषित किया.उससे भारत का प्राचीन अनाज 'मिलेट्स' या 'मोटे आनाज', दोबारा दुनिया के सामने हाईलाइट हुआ और खान पान का हिस्सा बनाने का मौका मिला.भारतीय सेना अब अपने जवानो को दिए जाने वाले राशन में मिलेट्स को शामिल करने वाली है.गेहूं को बढ़ावा देते हुए कुछ 50 साल पहले मिलेट्स को सेना के राशन से हटा से दिया गया था, लेकिन अब दोबारा हमारी सेना मिलेट्स को अपनी थाली में लाएगी.इसी के साथ मिलेट्स के महत्त्व को समझाने के लिए सेना शैक्षिक संस्थानों में भी 'नो योर मिलेट' नाम का जागरूकता कैंपेन चलाया जायेगा. </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/ZN4ZcI78gE8iCn9ki2HV.JPG" alt="millet reintroduced in indian army"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Daily Hunt</em></span></p>
<p>सैनिकों को दिया जाने वाला भोजन ऊर्जा से भरपूर और प्रोटीन से युक्त होना चाहिए.यहां मिलेट्स बखूबी फिट बैठता है.मिलेट वैसे भी बहुत ही पोषक आनाज है जो कि हर जवान के लिए फायदेमंद साबित होगा.सेना ने जानकारी दी की उत्तरी सीमाओं पर तैनात सैनिकों के लिए गरम बाजरा आइटम और स्नैक्स पर विशेष जोर दिया जायेगा.बाजरा वैसे भी उच्च पोषण के साथ भारत की सबसे पुरानी फसलों में से एक है.बाजरा इसीलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इस से छोटे किसानों को सशक्त बनने में मदद मिलेगी.</p>
<p>सेना द्वारा मिलेट को बढ़ावा देने से इसकी नयी प्रजातियां सामने आ सकती है और फसल की गुणवत्ता भी बढ़ेगी.मिलेटस वैसे भी जलवायु परिवर्तन के अनुकूल होने के साथ ज्यादातर लोकल मौसम के अनुरूप बढ़ जाते है.जैव विविधता (बायो डिवर्सिटी) को बढ़ावा देने में भी मिलेट्स बड़ी भूमिका निभा सकते है.मिलेटस कृषि खाद्य प्रणालियों को बदलने के SHG महिलाओं के सामूहिक प्रयासों में योगदान कर सकते हैं.</p>
<p>2023-24 के वित्तीय वर्ष से ही मिलेट्स भारतीय सेना की थाली में सजा हुआ मिलेगा.सेना के इस पहल के साथ है रविवार विचार. यह एक शुरुआत है मिलेट को देश दुनिया तक पहुंचने की और साथ ही इस मोठे अनाज के साथ काम कर रही SHG महिलाओं के विकास की.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 24 Mar 2023 17:27:20 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/millets-reintroduced-in-ration-of-indian-army-after-50-years]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vnfkDkAenauqOcLeHrFM.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vnfkDkAenauqOcLeHrFM.jpeg"/></item><item><title><![CDATA['बीज अम्मा' ला रहीं जैविक मिलेट क्रांति ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/beej-amma-leading-organic-millets-revolution</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/orsyq6tWudxa9IGLS2vy.jpeg"><p dir="ltr">लाल, पथरीली, सूखी, ज़मीन में आज एक क्रांति की कोपल पनप रही है. तेलंगाना के ज़हीराबाद शहर के लगभग 70 गांवों में, महिलाएं अब बाजरा, दालें और तिलहन की कई किस्में उगा रही हैं. दुनिया भर में मिलेट्स की जागरूकता पैदा करने और उसकी खपत बढ़ाने के लिए, संयुक्त राष्ट्र (UN) ने वर्ष 2023 को 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ़ मिलेट' घोषित किया. मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए देशभर में स्वसहायता समूह की महिलाएं नए-नए तरीके खोज रहीं है, कभी मिलेट्स का चीला बनाकर, तो कही कुकीज़ बनाकर. मिलेट्स के सफ़र की ये कहानियां रविवार विचार ने आपसे साझा की हैं. ऐसी ही एक कहानी हैं ज़हीराबाद की बीज अम्माओं की. वे एक कृषि-आधारित स्थानीय गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) डेक्कन डेवलपमेंट सोसाइटी (डीडीएस) में काम करती है. 60 साल की अम्मा मिट्टी से प्लास्टर किए हुए प्यालों में 75 किस्मों के बीजों को सावधानी से रखती है और कहती है, "वे भी हमारे बच्चे हैं, और हम उनका ध्यान रखते हैं क्योंकि ये बीज हमारे लिए बहुत ज़रूरी है," </p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/2DWJPVDzgwvwVxEZoelQ.png" alt="beej amma telangana"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Google Images</em></span></p>
<p dir="ltr">ये सभी महिलाएं अपने आप को 'बीज रक्षक' मानते हुए हर मौसम में मिलेट की 25 किस्में उगाती हैं और अभी तक कई महिलाओं को ट्रेनिंग भी दे चुकी हैं. लक्ष्मी अम्मा कनाडा, लंदन, जर्मनी, सिंगापुर, सेनेगल, सिंगापुर, माली समेत 20 देशों का दौरा कर मिलेट्स के बारे में जागरूकता फैला चुकी है. उन्हें महिला सशक्तिकरण के तहत राज्यपाल से पुरस्कार भी मिला. वे मिट्टी की पलस्तर वाली टोकरियों का इस्तेमाल अपने ज्वार के बीजों को बचाने के लिए करते हैं. बीज डालकर गोबर से टोकरियों को ऊपर से बंद कर देते हैं. यह बीजों को बचाने का पारंपरिक तरीका है जिसे ये बीज बैंक कहते हैं. बाजरा अनाज के साथ-साथ चारे के रूप में भी बिकते हैं. </p>
<p dir="ltr">मोगुलम्मा भी समूह के बीच एक मिनी-सेलिब्रिटी हैं, क्योंकि उन्हें भारत के राष्ट्रपति ने सम्मानित किया. मोगुलम्मा जानती है कि नई मां को कौनसा बीज देना है और बीमार होने पर कोनसा बीज खाया जाता है, अलग-अलग बीमारियों के लिए भी अलग-अलग वैरायटी के आटे का इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने अपने बाजरे को खाने से पहले अंकुरित करना भी शुरू कर दिया है जिससे बाजरे के आटे में ताकत बढ़ जाती है. वह हर साल रबी सीजन में 28 और खरीफ सीजन में 30 किस्में उगाती हैं.</p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/0ueqQZzcr3dVsAfKhfNW.jpeg" alt="beej amma telangana"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Google Images</em></span></p>
<p dir="ltr">उनकी एक और साथी चंद्रम्मा छोटी-छोटी कृषि तरकीबों को अच्छे से जानती है और उन्होंने अपना पूरा जीवन खेती में लगा दिया. उन्होंने  मिलेट्स और अन्य फसलों की सैकड़ों किस्मों को बचाया और पीढ़ियों के लिए उदाहरण बन गई. वे शादी के बाद महिलाओं के समूह में शामिल हो गईऔर बाजरा के बीज बचाने के नए-नए तरीके खोजने लगी. वे केवल जैविक और प्राकृतिक खेती में विश्वास रखती है. हर दोपहर फसल काटते समय वो धुन गुनगुनाती है और बाजरे की इस क्रांति को और आगे लेजाने के बारे में सोचती है. ये सभी महिलाएं 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ़ मिलेट' को नई ऊचाई दे रही हैं. <strong id="docs-internal-guid-a19f49f9-7fff-8f8e-4543-9e1c59b8ff11"></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Thu, 16 Mar 2023 14:03:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/beej-amma-leading-organic-millets-revolution]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/orsyq6tWudxa9IGLS2vy.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/orsyq6tWudxa9IGLS2vy.jpeg"/></item></channel></rss>