<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ इंटरनेशनल ईयर ऑफ़ मिलेट्स]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/inttrneshnl-iiyr-onf-miletts</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/inttrneshnl-iiyr-onf-miletts" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 23 May 2024 10:28:47 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[Bommi Dhaniyam के Millets उत्पादन से महिलाओं को मिल रहा रोज़गार ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/bommi-dhaniyam-providing-employment-to-women-from-millets-production-4595847</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/bk3fARcFUmpqMOGOXkAr.png"><p>हाल के समय में मिलेट्स ने हमारे भोजन में खास जगह बनाई है. मिलेट्स, जो कभी ग्रामीण इलाकों में आम थे, अब मॉडर्न लाइफस्टाइल में भी लोकप्रिय हो रहे हैं. इनके पोषक तत्वों से भरपूर गुण और स्वास्थ्य लाभों ने लोगों का ध्यान खींचा है. शहरी परिवार अब healthy meals के लिए मिलेट्स को अपने दैनिक आहार में शामिल कर रहे हैं.</p>
<p>भारत सरकार ने भी मिलेट्स और उनकी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 को "इंटरनेशनल ईयर ऑफ़ मिलेट्स" (International Year of Millets) घोषित किया, जिससे मिलेट्स की महत्वता को विश्व स्तर पर पहचाना गया. सरकारी योजनाओं और अनुदानों के माध्यम से किसानों को मिलेट की खेती के लिए प्रोत्साहन मिला.</p>
<h2>Millets की बढ़ती मांग से शुरू हुआ Bommi Dhaniyam</h2>
<p>कृषि विज्ञान केंद्र और अनुसंधान संस्थान मिलेट्स की उन्नत किस्में विकसित कर रहे हैं. ये प्रयास ना केवल किसानों की आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि देश के लोगों को स्वस्थ और पोषक आहार भी प्रदान कर रहे हैं. इसी मौके को अवसर में बदल कर शुभद्रा ने शुरुआत की Bommi Dhaniyam की. 2017 में शुरू हुआ यह व्यवसाय सेहतमंद और रेडी-टू-कुक (Ready to Cook) मिलेट उत्पादों की वैरायटी लोगों तक पहुंचता है.</p>
<p>शुभद्रा ने अन्ना यूनिवर्सिटी (Anna University) से कंप्यूटर साइंस में M.Tech. की डिग्री प्राप्त की है. उन्होनें 15 वर्षों तक आईटी विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया. इसके बाद उन्होंने अपने जुनून और समाज सेवा की भावना के तहत यह <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/these-are-the-top-women-entrepreneurs-of-india-and-their-businesses-2387812">उद्यम</a> (Women Led Startups) शुरू किया.</p>
<h2>Bommi Dhaniyam दे रहा स्वाद के साथ पोषण भी</h2>
<p>Bommi Dhaniyam कुल 83 प्रकार के रेडी-टू-कुक (Ready to Cook) मिलेट उत्पाद प्रदान करता है. इनमें मिलेट के आटे से लेकर इडली डोसा बैटर और बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य मिश्रण शामिल हैं. ये उत्पाद बाज़ार में मात्र ₹45 से ₹80 के बीच की कीमत पर उपलब्ध हैं और अपने गुणवत्ता और स्वास्थ्य लाभों के लिए व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त कर चुके हैं.</p>
<p>शुभद्रा का यह उद्यम सेहतमंद खानपान को बढ़ावा देने और विशेष रूप से महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू हुआ. अपनी लगन और कड़ी मेहनत से उन्होंने <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/theni-tamil-nadu-women-sowing-seeds-of-innovation-and-earning-livelihood">तमिल नाडु</a> के कोयंबटूर (Coimbatore) में अत्याधुनिक यूनिट स्थापित की, जो स्वदेशी मशीनरी से लैस है. इन मशीनों का उपयोग मिलेट्स के छंटाई, ग्रेडिंग, भिगोने, पीसने और पैकेजिंग के लिए किया जाता है.</p>
<h2>महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर</h2>
<p>Bommi Dhaniyam में हाल में 30 कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें से 23 महिलाएं और चार विकलांग कर्मचारी हैं. शुभद्रा महिलाओं को रोजगार प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.</p>
<p>उन्होंने बताया कि,</p>
<blockquote>
<p><em>"हमारी प्राथमिकता है कि हम अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार दें. हमारा उद्देश्य महिलाओं को उनके पैरों पर खड़ा करना और उन्हें अपने जीवन में आत्मनिर्भर बनाना है."</em></p>
</blockquote>
<p>पीवीआर फूड्स (PVR Foods), जिसके अंतर्गत Bommi Dhaniyam उत्पादन और बिक्री करता है, को तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय (Tamil Nadu Agricultural University TNAU) द्वारा इनक्यूबेट किया गया और स्टार्टअप टीएन (Startup TN) का समर्थन प्राप्त है. इसे सरकारी योजनाओं के तहत <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/pm-modi-distributed-seed-funding-to-shgs-during-world-food-india-festival-1683036" rel="dofollow">Seed Capital Funding</a> भी मिली हैं, जिससे इसके विकास को और बल मिला. आज, Bommi Dhaiyam की वार्षिक आय लगभग 3 करोड़ रुपये है.</p>
<p>Bommi Dhaniyam अपने उत्पादों को प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों जैसे कि अमेज़न और फ्लिपकार्ट के माध्यम से बेचता है. इसके अलावा, यह अस्पतालों, उद्योगों, कैंटीनों और जिम जैसी जगहों को भी प्रोडक्ट्स सप्लाई करता है. साथ ही, ये उत्पाद दुकानों में भी उपलब्ध हैं.</p>
<p>शुभद्रा के नेतृत्व में Bommi Dhaniyam ने <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-selling-millet-based-ready-to-eat-products-with-support-of-reliance-foundation-2034998">मिलेट उत्पादों</a> (Millet Products) को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. यह ब्रांड न केवल सेहतमंद भोजन को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि महिलाओं को रोजगार के अवसर देकर समाज में एक महत्वपूर्ण बदलाव भी ला रहा है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विधि जैन</dc:creator><pubDate>Thu, 23 May 2024 10:28:47 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/bommi-dhaniyam-providing-employment-to-women-from-millets-production-4595847]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/bk3fARcFUmpqMOGOXkAr.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/bk3fARcFUmpqMOGOXkAr.png"/></item><item><title><![CDATA[मिलेट : फ्यूचर सुपरफूड का भविष्य क्या ? ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/future-of-millets-in-india-as-superfood</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tuUIKfkZqw7xp7NAslXD.PNG"><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, लोकसभा में विपक्ष ने नेता मल्लिकार्जुन खड़गे सब साथ एक टेबल पर बैठे है. सामने प्लेट्स में परोसा गया है मिलेट से बना स्वादिष्ट खाना. हंसी मजाक के माहौल में सभी खाने का आनंद ले रहे है. इस स्तर पर सरकार आज मिलेट का प्रोमोशन कर रही है. भारत के प्रोपोज़ल के बाद संयुक्त राष्ट्र (UN) ने साल 2023 को 'इंटरनेशनल ईयर ऑफ़ मिलेट्स' घोषित किया, जिससे मिलेट्स को खूब बढ़ावा मिला. साथ ही आम जनता में भी मिलेट से बने खाने की जागरूकता बढ़ी है. रागी की खीर, कोदो का मंचूरियन, कुटकी का चीला जैसी कई चीज़ें भी अब बाज़ार में दिखने लगी हैं. मिलेट को फ्यूचर सुपर फ़ूड का नाम दिया गया है.</p>
<p>आज राष्ट्रीय और राज्यों की पहल की वजह से मिलेट्स खेतों में लौट रहा है. पोषक-अनाज कहे जाने वाले बाजरा को किसानों ने स्मार्ट क्रॉप का नाम दिया क्योंकि ये कम वर्षा और अनुपजाऊ मिट्टी में भी आसानी से उग जाता है. मिलेट्स की बढ़ती डिमांड के बाद अब सवाल उठता है, क्या हम मिलेट की डिमांड पूरी कर पाएंगे?</p>
<p>मिलेट्स को 'पोषण का पावरहाउस' माना गया. 10 अप्रैल, 2018 को कृषि मंत्रालय ने बाजरा को 'पोषक अनाज' घोषित किया. ज्वार, बाजरा, रागी/मंडुआ, मामूली बाजरा - कंगनी/काकुन, चीना, कोदो, सावा/सांवा/झंगोरा, और कुटकी, एक प्रकार का अनाज (कुट्टू) और अमरनाथ (चौलाई), जिनमें 'उच्च पोषक तत्व' होते हैं. मिलेट्स को 'न्यूट्री सीरिअल्स' कहा गया और इसको उत्पादन, खपत और व्यापार के  लिए 'पोषक अनाज' के रूप में सरकार इसे ग्लोबल स्तर पर प्रमोट कर रही है. आईसीएआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट्स रिसर्च, हैदराबाद का कहना है, "बाजरा में 7-12% प्रोटीन, 2-5% वसा, 65-75% कार्बोहाइड्रेट और 15-20% आहार फाइबर होता है. </p>
<p>बाजरा की खेती पहले 35 मिलियन हेक्टेयर ज़मीन के क्षेत्र में की जाती थी. लेकिन अब इसे केवल 15 लाख हेक्टेयर में ही उगाया जा रहा है. जबकि, तमाम सरकारी कोशिशें इसे बढ़ावा देने की बात कर रही है. बाजरा की ज़्यादा मेहनत में कम पैदावार, खेती में समय लगना और मुश्किल प्रोसेसिंग होने के कारण किसानों ने अपने खेतों में बाजरा के बदले गेहूं और धान को जगह दी. भारत में बाजरा मुख्य रूप से खरीफ की फसल है. 2018-19 के दौरान, तीन मिलेट्स फसलें - बाजरा (3.67%), ज्वार (2.13%), और रागी (0.48%) - देश में सकल फसली क्षेत्र का लगभग 7 प्रतिशत है.</p>
<p>राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए), 2013 के तहत, पात्र परिवार चावल 3 रुपये, गेहूं 2 रुपये और मोटा अनाज 1 रुपये प्रति किलो लेने के हकदार हैं. वैसे तो अधिनियम में मिलेट्स का नाम नहीं है, पर मोटे अनाज को NFSA की धारा 2(5) के तहत 'फ़ूड ग्रेन' की परिभाषा में शामिल किया गया. हालांकि, केंद्रीय पूल के लिए खरीदे गए और NFSA के तहत बांटे मोटे अनाज की मात्रा ज़ीरो है. भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास स्टॉक के डेटा से पता चलता है कि 1 नवंबर, 2022 को केंद्रीय पूल में मोटे अनाज का केवल 2.64 लाख मीट्रिक टन (LMT) स्टॉक उपलब्ध था. इसकी तुलना में, चावल 265.97 LMT, गेहूं 210.46 LMT और धान का स्टॉक 263.70 LMT था.    </p>
<p>केंद्र ने अपने द्वारा गठित एक समिति की सिफारिश को माना कि मिलेट्स को पीडीएस में शामिल किया जाए. सरकार ने केवल ज्वार, बाजरा और रागी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किया. ज्वार हाइब्रिड के लिए एमएसपी 2,970 रुपये प्रति क्विंटल और ज्वार मालदंडी के लिए 2,990 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया. बाजरा की MSP 2,350 रुपये प्रति क्विंटल और रागी की MSP 3,578 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई. </p>
<p>बाजरा मुख्य रूप से एशिया और अफ्रीका में कम आय वाले और विकासशील देशों में उगाया जाता है, और दुनिया भर में लगभग 60 करोड़ लोगों की थाली का हिस्सा है. 2023 को मोटा अनाज के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के रूप में मनाने के संकल्प का प्रस्ताव देकर, भारत ने खुद को मिलेट्स के  लीडर के रूप में पेश किया.</p>
<p>आर्थिक सर्वेक्षण 2023 के अनुसार, भारत में बाजरा की औसत उपज 1,239 किलोग्राम/हेक्टेयर है, जो किसानों को आमतौर पर धान या गेहूं से मिलने वाली उपज का सिर्फ एक चौथाई है. एशिया में, भारत बाजरा उत्पादन में 80% योगदान देता है, और विश्व स्तर पर, भारत की हिस्सेदारी 20% है. लेकिन, यह भारत में मिलेट्स उगा रहे किसानों के लिए मुनाफे का सौदा नहीं रहा है. मिलेट की फसल को सिर्फ स्मार्ट क्रॉप नहीं पर किसानों के लिए इसे स्मार्ट इनकम का सोर्स भी बनाना ज़रूरी है. </p>
<p>साथ ही मिलेट्स के उत्पाद को बढ़ाने के लिए मोटा अनाज की सभी किस्मों के MSP तय करना होगा, PDS में प्रचार के साथ मोटे अनाज को जगह देनी होगी. सरकार को सिर्फ ईयर ऑफ़ मिलेट घोषित करवाने की पहल पर संतोष करने की बजाय किसानों को लाभ और मिलेट के उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्लान बड़े स्तर पर तैयार करना होगा. यदि किसानों को मिलेट्स की खेती से आर्थिक मज़बूती नहीं मिली तो तमाम प्रयास खोखले साबित होंगे. रविवार विचार का मानना है कि 'ईयर ऑफ़ मिलेट्स' की सफलता सटीक कार्यप्रणाली पर निर्भर करती  है.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Thu, 09 Mar 2023 12:25:53 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/future-of-millets-in-india-as-superfood]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tuUIKfkZqw7xp7NAslXD.PNG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/tuUIKfkZqw7xp7NAslXD.PNG"/></item></channel></rss>