<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ जातिविहीन समाज]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/jaativihiin-smaaj</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/jaativihiin-smaaj" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 14 Apr 2023 17:59:55 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[जातिवाद के ज़हर पर SHG का अमृत ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/shgs-fulfilling-ambedkars-vision-of-caste-less-india-where-women-are-free</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/jxNoIqtJQQRIkniLNPSj.jpg"><p>20&nbsp;<span lang="HI">मार्च</span><span lang="HI">&nbsp;</span>1927&nbsp;<span lang="HI">की सुबह डॉ.</span> <span lang="HI">भीमराव अंबेडकर  और उनके अनुयायियों के लिए ख़ास थी.</span>&nbsp;&nbsp;<span lang="HI">सदियों से चली आ रही जाति प्रथा की बदरंग निशानी पर चोट करने की तैयारी थी. सामाजिक सशक्तिकरण के प्रणेता बाबासाहेब अंबेडकर  अपने पहले सत्याग्रह की राह पर चलने वाले थे.</span>&nbsp;&nbsp;<span lang="HI">आज के रायगढ़ जिले के महाड गाँव में चवदार नाम का सार्वजनिक तालाब था.</span>&nbsp;&nbsp;<span lang="HI">इस तालाब के पानी को सारा गाँव इस्तेमाल करता था अपने सभी कामों के लिए</span>&nbsp;&nbsp;&nbsp;<span lang="HI">यहां तक की गाँव के पशु पक्षी भी. लेकिन भारत की सबसे बड़ी कुरीतियों में से एक जाति प्रथा ने दलितों को यहां का पानी छूने से भी रोक रखा था.</span>&nbsp;&nbsp;<span lang="HI">इसी को तोड़ने के लिए बाबासाहेब यहां पहुंचे और उनके साथ</span>&nbsp;&nbsp;<span lang="HI">हज़ारों की संख्या में अछूत कहे जाने वाले लोगों ने चावदार तालाब से पानी पिया. उस समय अंबेडकर  ने वहाँ मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा था -</span>&nbsp;&nbsp;"<span lang="HI">क्या हम इसलिए यहाँ आए हैं कि हमें पीने के लिए पानी नहीं मिलता है</span>?&nbsp;<span lang="HI">क्या हम यहाँ इसलिए आए हैं कि यहाँ के ज़ायक़ेदार कहलाने वाले पानी के हम प्यासे हैं</span>?&nbsp;<span lang="HI">बिल्कुल नहीं....... हम यहाँ इसलिए आए हैं कि हम इंसान होने का अपना हक़ जता सकें." ये एक प्रतीकात्मक विरोध था जिसके ज़रिए हज़ारों साल पुरानी सवर्ण और सामंती सत्ता को चुनौती दी गई थी जो सामाजिक पायदान के सबसे निचले स्तर के लोगों को वो हक़ भी देने के लिए तैयार नहीं थे जो जानवरों तक को हासिल था. इसकी दूसरी जातियों पर व्यापक प्रतिक्रिया हुई</span>, &nbsp;<span lang="HI">लोगों ने इसका बदला लिया और दलितों की बस्ती में जाकर ज़बर्दस्त तांडव मचाया. बच्चों</span>,&nbsp;<span lang="HI">बूढ़ों और महिलाओं को बुरी तरह से पीटा. अंबेडकर  के इस विरोध के एक दिन बाद&nbsp;</span>21&nbsp;<span lang="HI">मार्च</span>, 1927&nbsp;<span lang="HI">को चावदार तालाब के पानी का&nbsp;</span>'<span lang="HI">शुद्धिकरण</span>'&nbsp;<span lang="HI">किया गया.</span>&nbsp;&nbsp;<br><br><span lang="HI">भारत इस तरह के सामाजिक भेदभाव की पृष्टभूमि से निकला है और आज बदलाव भले ही है लेकिन सुधार की गुंजाइश लगातार बनी हुई है. वैसे भी ऐतिहासिक रूप से</span>,&nbsp;<span lang="HI">समुदाय-आधारित विकास कार्यक्रम कहीं न कहीं प्रभावशाली और ताकतवर लोगों के हाथ ही रही. जहां कार्यक्रम से लाभ या तो नेताओं या शक्तिशाली परिवारों को मिलता है. स्वयं सहायता समूह वो आर्थिक क्रांति रही है जिसने इस सामाजिक भेदभाव को कुछ हद तक काम किया है.</span>&nbsp;&nbsp;SHG&nbsp;<span lang="HI">के आजीविका कार्यक्रमों में कोशिश की जाती है की इस पर कब्जा</span>,&nbsp;<span lang="HI">किसी एक व्यक्ति विशेष का ना हो जाए. वैसे भी लोन या ऋण संबंधी मुद्दों पर राधाकृष्ण समिति ने अधिकांश राज्यों (विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश) के गांवों में प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा समूहों के कब्जे को गरीबी-उन्मूलन कार्यक्रम की कमियों में से एक के रूप में उजागर किया है.</span><br><br><span lang="HI">अपनी स्थापना के बाद से</span>,&nbsp;<span lang="HI">एनआरएलएम ने समावेशी और सहभागी सामुदायिक संस्थान बनाने के उद्देश्य को आगे रखा. स्वयं सहायता समूह का मिशन स्टेमेंट ही विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी)</span>,&nbsp;<span lang="HI">अनुसूचित जनजाति (एसटी)</span>,&nbsp;<span lang="HI">और अन्य अल्पसंख्यक समूहों के सदस्यों को शामिल करने का आदेश देता है. इसके अलावा</span>,&nbsp;<span lang="HI">यह भी आवश्यक है कि कमजोर परिवारों के सदस्यों को स्वयं सहायता समूहों के भीतर पदाधिकारियों के पदों पर प्रतिनिधित्व दिया जाए. इन प्रयासों का एनआरएलएम (कोचर और अन्य&nbsp;</span>2020)&nbsp;<span lang="HI">का हालिया मूल्यांकन इस बात का पुख्ता सबूत देता है कि अनुसूचित जाति और जनजाति परिवारों की आय और बचत बढ़ाने के मामले में&nbsp;</span>SHG&nbsp;<span lang="HI">का बड़ा प्रभाव पड़ा है.</span>&nbsp;&nbsp;<br><br><span lang="HI">एसएचजी में उसके पदाधिकारी बनने की संभावना पर सदस्यों की सामाजिक-आर्थिक हालातों का असर&nbsp;</span>,&nbsp;<span lang="HI">विशेष रूप से सदस्यों की जाति का असर बाक़ी सामाजिक संरचनाओं से कुछ कम ही है . अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के पास एक ही&nbsp;</span>SHG&nbsp;<span lang="HI">में अन्य सदस्यों की तुलना में मिश्रित जाति स्वयं सहायता समूह में एक पदाधिकारी की स्थिति रखने की समान संभावना है. हालाँकि</span>,&nbsp;<span lang="HI">अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को स्वयं सहायता समूह का नेता या अध्यक्ष बनने की सम्भावना कुछ काम ही है.</span><br><br><span lang="HI">पदों को लेने की संभावना में अंतर के अलावा</span>,&nbsp;<span lang="HI">विभिन्न जाति समूहों के सदस्यों द्वारा प्राप्त भागीदारी और लाभ में जाति-आधारित अंतरों को अगर देखें तो भी यह&nbsp;</span>SHG&nbsp;<span lang="HI">को मिलने वाली धनराशि और ऋण की राशि के मामले में बहुत कम हैं. साथ ही उत्साहजनक तौर पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्य समूहों में जहां उनकी जाती के सदस्य पदाधिकारी पदों पर हैं</span>,&nbsp;<span lang="HI">वह ज़्यादा बैठकों में भाग लेते हैं</span>,&nbsp;<span lang="HI">एसएचजी के साथ अधिक बचत करते हैं और बड़ी ऋण राशि लेते हैं. एनआरएलएम&nbsp;</span>,&nbsp;<span lang="HI">स्वयं सहायता समूह के प्रमुख पदों पर वंचित जातियों के प्रतिनिधित्व को देने में काफी सफल रहा है.</span>&nbsp;&nbsp;<span lang="HI">और ऐसा होने से&nbsp;</span>SHG&nbsp;<span lang="HI">में अनुसूचित जाति और जनजाति सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण कदम है. सशक्तिकरण के संबंध में</span>,&nbsp;<span lang="HI">ये पदाधिकारी रोल मॉडल के रूप में उभर सकते हैं और समूह में अन्य सदस्यों को सशक्त बना सकते हैं.</span><br><br><span lang="HI">स्वयं सहायता समूह वो कड़ी बन सकते है जो बाबासाहेब अंबेडकर  के सपने को साकार कर सके.</span> <span lang="HI">उन्होंने हमेशा ही नारी की आज़ादी और जातिविहीन समाज की कल्पना की.</span>&nbsp;&nbsp;<span lang="HI">स्वयं सहायता समूह इन दोनों परिकल्पनाओं को पूरा करने में सहायक होगा.</span>&nbsp;&nbsp;<span lang="HI">और हमें भविष्य में यह सुनने को नहीं मिलेगा की जो जाती नहीं है वो ही जाति होती है.</span>&nbsp; &nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रोहन शर्मा</dc:creator><pubDate>Fri, 14 Apr 2023 17:59:55 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/shgs-fulfilling-ambedkars-vision-of-caste-less-india-where-women-are-free]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/jxNoIqtJQQRIkniLNPSj.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/jxNoIqtJQQRIkniLNPSj.jpg"/></item></channel></rss>