<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ जेंडर पेरिटी]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/jenddr-perittii</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/jenddr-perittii" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 04 Jul 2023 17:42:27 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[फाइनेंसियल लिट्रेसी से महिलाओं को अवसर की शुरुआत ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-bringing-new-opportunities-to-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1rozRTs7i52UYk7fXs4G.jpg"><p><strong>जेंडर इक्वालिटी (Gender Equality), जेंडर पेरिटी (Gender Parity), जेंडर एम्पावरमेंट (Gender Empowerment) </strong>कि बातें तो सभी करते है पर इनके इम्प्लीमेंटेशन में कहीं ना कहीं कमी रह ही जाती हैं. इस तरह<strong> जेंडर फाइनेंस गैप (Gender Finance Gap) </strong>भी विश्व स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन उस पर काम कितना हो रहा है, यह सोचने का विषय है.<strong> महिलाएं जहां साइंस एंड टेक्नोलॉजी (Science and Technology), मेडिसिन (Medicine) </strong>जैसे क्षेत्रों में आगे तो बढ़ रही, लेकिन कामयाबी के यह रास्ते आज भी उनके लिए आसान नहीं है, जहां कई सेक्टर्स में समान अवसर नहीं मिलते तो अधिकतर क्षेत्रों में समान वेतन भी उन्हें नहीं मिल रहे.</p>
<p>जेंडर डायनामिक्स जहां समय के साथ थोड़े बहुत बदलते रहते हैं वही फाइनेंशियल संस्थानों (Financial Institutions) में जेंडर इक्वालिटी कैटेलिस्ट (Catalyst) या बैरोमीटर (Barometer) अभी भी निचले स्तर पर है. <strong>यह जेंडर बेस्ड फाइनेंस गैप तभी खत्म हो सकता हैं जब महिलाओं को वित्तीय सेवाएं (Financial Services) जैसे बचत, लोन (Loan), बिमा (Insurance),और वित्तीय संस्थानों के बारे में पूरा ज्ञान हो और उनकी भागीदारी इनमें बढ़ाई जाए .  </strong><br><br>फाइनेंशियल संस्थानों में महिलाओं के बिज़नेस जो की मुख्यतः SME (स्मॉल मीडियम इंटरप्राइजेज) होते है उन्हें बिज़नेस की कम समझ और स्मॉल बिज़नेस नेटवर्क होने के कारण, वह फाइनेंशियल सेवाओं का  पूरा फायदा नहीं उठा पाती.  इसी वजह से वह अपने बिज़नेस को आगे नहीं ले जा पा रही है. महिला उघमों को पुरुषों के मुकाबले बैंक खाते (Bank Account) रखने और फाइनेंशियल इंस्टीटूशन्स से लोन लेने में कम दरों में ब्याज की सुविधा प्रदान की जाती है लेकिन महिलाओं के पास पर्याप्त फाइनेंशियल ज्ञान ना होने के कारण वह इस सुविधा का लाभ नहीं उठा पाती. यही वजह है कि महिला उद्यमियों को आज भी वर्किंग कैपिटल (Working Capital) का पूरा उपयोग और बिज़नेस लोन (Business Loan) लेने जैसे कामों में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. फाइनेंस के मसलों से दूरी धीरे धीरे डर और हिचक के रूप में सामने आती है, जिस वजह से फॉर्मल फैनेसियल इंस्टीटूशन्स (Formal Financial Institutions)तक उनकी पहुँच कम होती है.<br><br>महिलाओं के बिज़नेस में निवेश करने के पॉजिटिव प्रभाव हो सकते हैं, जैसे महिलाओं के लिए नई नौकरियों के रास्ते खुलेंगे, जेंडर इनक्वॉलिटी कम होगी और महिलाओं का ओवरऑल डेवलॅपमेंट होगा.<strong> भारत में सरकार ने  महिला उघमों को बढ़ावा देने के लिए स्वयं सहायता समूहों को CLF लोन लेने की सुविधा  प्रदान करती है, जिससे आज भारत दुनिया में सबसे बड़ा SHG बैंक लिंकेज मॉडल बन गया है, जिसमें 11  मिलियन से अधिक SHG बैंकिंग सेवाओं से जुड़े है. लोन की सुविधा मिलने से स्वयं सहायता समूहो में अलग अलग कार्य हो रहे हैं जैसे सिलाई, मशरुम कि खेती, अगरत्ती बनाना आदि. </strong>समूह की महिलाएं जो घर से बाहर भी नहीं निकलती थी आज वही महिलाएं बैंक सखी (Bank Sakhi), ऊर्जा देवी (Urja Devi) जैसे कार्य संभाल रही हैं. लोन की मदद से आज समूह की महिलाओं  ने अपने ही घर में सिलाई सेंटर शुरू कर लिया हैं. जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में भी बदलाव आ रहा हैं.    <span class="im"><br><br>जेंडर फाइनेंस गैप के खत्म करने के लिए कई  उपाय किये जा सकते है जैसे महिला स्वामित्य वाले SME (Small Medium Enterprises) की जरूरतों को पूरा करने वाले<strong> इनोवेटिव सेवाओं और उत्पादों को ला कर, सही प्रशिक्षण देकर, वरिष्ठ बैंकिंग भूमिकाओं और बोर्ड में महिलाओं को शामिल कर , व्यवसाय में महिलाओं के लिए एक सहायक नेटवर्क बनाने के लिए फाइनेंसियल तथा नॉन फाइनेंसियल संस्थानों के साथ सहयोग कर. </strong>इन उपायों  को लागु करके हम G20 और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्था महिलाओं के जेंडर एम्पावरमेंट को आगे बढ़ाकर और अधिक इंक्लूसिव इकोनॉमिक विकास प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है.</span></p>
<div class="yj6qo ajU"></div>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Tue, 04 Jul 2023 17:42:27 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-bringing-new-opportunities-to-shg-women]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1rozRTs7i52UYk7fXs4G.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/1rozRTs7i52UYk7fXs4G.jpg"/></item><item><title><![CDATA[खाद्य सुरक्षा के लिए महिला किसान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/female-farmers-for-food-security-in-india</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/atwyEiOh9m78bzBiZggd.jpg"><p class="MsoNormal"><span lang="HI">मां </span>, <span lang="HI">यह शब्द सुनते ही प्रेम</span>, <span lang="HI">ममता</span>, <span lang="HI">करुणा के साथ पालन</span>, <span lang="HI">पोषण और देखभाल की एक मूर्ति सामने खड़ी हो जाती है. महिलाएं अगर बच्चों की देखभाल इतनी अच्छी तरह कर सकती है तो सोचिये वो अपने खेत खलिहान को कैसा संभालेंगी. ग्रामीण महिलाएं बुवाई से लेकर कटाई और कटाई के बाद भी फसल के रख रखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. महिला किसान कृषि उत्पादन</span>, <span lang="HI">खाद्य सुरक्षा </span>, <span lang="HI">फसल पोषण</span>, <span lang="HI">भूमि और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में खासतौर पर योगदान देती हैं. इस तरह वे कृषि में बहुआयामी होती है और भारत की दूसरी हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे जैविक खेती</span>, <span lang="HI">स्वरोजगार योजना</span>, <span lang="HI">प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना आदि के तहत ग्रामीण महिलाओं को वरीयता मिलती है. हालांकि भारत में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है लेकिन फिर भी लिंग असमानता (जेंडर पेरिटी) हर जगह मौजूद है. विश्व के कृषि क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी 43 % है जो भारत में 70-80 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. भारत में ग्रामीण महिलाएं कृषि उत्पादन बढ़ा रही हैं</span>, <span lang="HI">खाद्य सुरक्षा में सुधार कर रही है.  इस तरह गरीबी उन्मूलन की तरफ भारत के हाथ मजबूत कर रही हैं.</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">इस सबके बावजूद महिलाओं को खेतों में भी शोषण का सामना करना पड़ता है. पुरुषों की तुलना में अधिक कृषि काम करने के बाद भी अधिकार और आय दोनों नहीं मिलते. यूएन की फ़ूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइज़ेशन (</span>FAO) <span lang="HI">की रिपोर्ट के अनुसार</span>, <span lang="HI">यदि महिलाओं को पुरुषों के समान संसाधनों तक समान पहुंच दी जाए तो विकसित देशों में कृषि उपज में 2.5 से 4 प्रतिशत की वृद्धि की जा सकती है</span>, <span lang="HI">जो कम से कम 100 मिलियन अधिक कुपोषित लोगों को अच्छा खाना खिलाने के लिए पर्याप्त है. इसी तरह यदि ग्रामीण महिलाओं को अवसर और सुविधाएं मिले तो वे देश को दूसरी हरित क्रांति की ओर ले जा सकती हैं और तस्वीर बदल सकती हैं. आज ग्रामीण महिलाएं मजदूरी और कटाई के बाद के कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. महिला किसान अपने पुरुष समकक्षों की तरह उत्पादक और उद्यमी दोनों हो सकती हैं</span>, <span lang="HI">लेकिन जमीन जायदाद में हिस्सा </span>, <span lang="HI">लोन सुविधा </span>, <span lang="HI">कृषि खरीदी </span>, <span lang="HI">मंडी पहुंच की काम जानकारी से पीछे रह जाती है. यह देखा गया है कि ग्रामीण महिलाओं को ग्रामीण पुरुषों और शहरी महिलाओं की तुलना में अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.</span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">महिलाओं को भारतीय अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है. भारतीय कृषि में महिला किसानों का बहुत बड़ा योगदान है. महिलाएं कृषि क्षेत्र में कार्यबल का सबसे बड़ा प्रतिशत हैं</span>, <span lang="HI">लेकिन उनका ज़मीन और उत्पादक संसाधनों पर नियंत्रण नहीं है. महिला कृषकों के ज्ञान</span>, <span lang="HI">दृष्टिकोण और कौशल में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सलाह प्रदान करने की ज़रुरत है. साथ ही नए शोध और अनुसंधानों के बारे में भी उन्हें जानकारी देने की ज़रुरत है. आम तौर पर कृषि में महिलाओं की भूमिका को हाशिए पर रखा जाता है और उनके योगदान को कम करके आंका जाता है. </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="HI">सरकार हो या </span>NGO <span lang="HI">दोनों ने ही कृषि में महिलाओं की भूमिका पर कम ध्यान दिया है. इसका परिणाम यह हुआ की जिस प्रकार और जिस स्तर पर कृषि क्षेत्र में महिलाओं का काम होना चाहिए था वह नहीं हो पाया. कृषि से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की वास्तविकताओं से शासन</span>, <span lang="HI">प्रशासन</span>, <span lang="HI">समाज और हम सब को संवेदनशील होने की आवश्यकता है. इस से उन्हें पुरुषों के समान कृषि और ग्रामीण विकास के अवसर मिलेंगे. महिला किसानों को ऋण</span>, <span lang="HI">मार्केट और नई कृषि तकनीक प्रदान की जा सकती हैं. यह सुविधाएं उन्हें एकमुश्त </span>SHG <span lang="HI">के तौर पर मिल सकती है. इसलिए महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) पर जोर दिया जाना चाहिए ताकि उन्हें माइक्रो-क्रेडिट से जोड़ा जा सके. महिला किसानों को सशक्त बनाने</span>, <span lang="HI">उनकी क्षमताओं को बढ़ाने और नई कृषि प्रौद्योगिकियों तक उनकी पहुंच बढ़ाने के लिए </span>SHG <span lang="HI">बहुत मददगार साबित होंगे.  </span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रोहन शर्मा</dc:creator><pubDate>Thu, 27 Apr 2023 18:11:27 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/female-farmers-for-food-security-in-india]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/atwyEiOh9m78bzBiZggd.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/atwyEiOh9m78bzBiZggd.jpg"/></item></channel></rss>