<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ कौन बनेगा करोड़पति]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/kaun-bnegaa-krodddhpti</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/kaun-bnegaa-krodddhpti" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 06 Apr 2023 17:02:00 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[घूँघट की आड़ से... रैंप तक का सफर... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/a-small-town-girl-became-world-fame-for-her-fashion-designing</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/KcHDhVe94ZvDJVB7sCvV.jpg"><p dir="ltr">"बड़े बुजुर्गों के सामने घूँघट लो", ये बात भारत के में ज़्यादातर घरों में आने वाली महिलाओं को सबसे पहले बता दी जाती है. कहते है घूँघट लेना महिला के लिए बड़ो को इज़्ज़त दिखाने का तरीका है. लेकिन वो क्या करे अगर ये घूँघट ही उसकी सबसे बड़ी बेड़ी बन जाए. घर में पैसा नहीं होने के कारण अपनी 2 दिन की नन्ही सी जान को खो देने वाली माँ से पूछो, की सिर्फ घूँघट की आड़ में रह के उसे क्या मिला. ये कोई फिल्म की कहानी नहीं बल्कि रुमा देवी की आपबीती है.</p>
<p><strong> </strong></p>
<p dir="ltr">रुमा देवी राजस्थान में बाड़मेर के छोटे-से गाँव रावतसर की रहनेवाली 30 साल की फैशन डिज़ाइनर , जिनकी कहानी सुनकर हर इन्सान दंग रह जाता है. 5 साल की छोटी-सी उम्र में ही उन्होंने अपनी माँ को खो दिया. पिता ने दूसरी शादी कर ली तो वे अपनी दादी के साथ रहने लगी. अपनी दादी के साथ ही उन्होंने सबसे पहले सिलाई-कढ़ाई का काम सीखा. उनके घर के आर्थिक हालात बिलकुल ठीक नहीं थी, जिसके कारण उन्हें 8वी क्लास के बाद पढ़ाई नहीं करने दी. गांव के रिवाज के हिसाब से लड़कियों की शादी जल्दी कर दी जाती थी और इसी कारण रुमा देवी को भी 17 साल की उम्र में शादी करनी पड़ी. </p>
<p><strong><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/SuN5VypGsMpRfbzJ7SZv.jpg" alt="ruma devi "></strong></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: the morung express</em></span></p>
<p dir="ltr">साल 2008 में रुमा देवी की पहली संतान का जन्म तो हुआ लेकिन उनकी नन्ही सी जान भूख और गरीबी के कारण 2 दिन में ही अपनी जान गवां बैठी. अपनी हर परेशानी को ख़त्म करने के लिए रुमा देवी ने ठान लिया की वो अब घर में हाथ पे हाथ रख कर बिलकुल भी नहीं बैठेंगी. रूमा ने आस-पड़ोस की 10 महिलाओं को इकट्ठा करके उनके साथ एक स्वयं-सहायता समूह बनाया, जिसका नाम उन्होंने 'दीप देओल' रखा. उन सारी महिलाओं ने 100-100 रुपए इकट्ठा किए और एक सेकंड हैंड सिलाई मशीन खरीदी और उस दिन के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. </p>
<p><strong> </strong></p>
<p dir="ltr">इस सिलाई मशीन पर रुमा देवी और उनकी साथी महिलाओं ने अपने प्रोडक्ट्स बनाना शुरू कर दिए. रूमा देवी ने दुकानदारों से बात की कि वे सीधा उनसे ही प्रोडक्ट्स लेकर बेचें. किसी काम के लिए साल 2009 में रूमा देवी ग्रामीण विकास व चेतना संस्थान पहुंची जहाँ उनकी मुलाक़ात संगठन के सचिव विक्रम सिंह से हुई. इसके बाद रूमा और उनकी साथी महिलाएँ इस संगठन का हिस्सा बन गईं. रुमा देवी ने अपनी इन उपलब्धियों को देखा तो उन्होंने और भी महिलाओं को इस स्वयं सहायता समूह से जोड़ना चाहा. धीरे-धीरे उनके साथ और भी महिलाएं जुड़ती गयी .</p>
<p><strong><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/us2lV2mfPbyHWFMEWtqS.jpg" alt="ruma devi "></strong></p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">Image credits: linkedIn</span></em></p>
<p dir="ltr">उन्होंने ट्रेडिशनल सिलाई-कढ़ाई को आधुनिक फैशन से जोड़ा. राजस्थान में जब जब क्राफ्ट प्रदर्शनी या मेले लगते तो रुमा अपनी कला को लोगों के सामने रखने क लिए इनमे स्टॉल्स लगाया करतीं. साल 2015 में उन्हें ‘राजस्थान हेरिटेज वीक’ में जाने का मौका मिला. अंतरराष्ट्रीय फैशन डिज़ाइनर 'अब्राहम एंड ठाकुर' और भारत के प्रसिद्ध डिज़ाइनर 'हेमंत त्रिवेदी' के मॉडल्स ने उनके डिज़ाइन किए हुए कपड़े पहने. सिर्फ इतना ही नहीं रुमा देवी के साथ साथ उनकी साथी महिलाओं ने भी रैंप पर आकर सबको धन्यवाद किया. साल 2016 में हुए फैशन वीक के लिए 5 बड़े डिज़ाइनर्स ने उनसे कॉन्टैक्ट किया.</p>
<p><strong><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/UWb1jVuPcAkUQ4jYgtKE.webp" alt="ruma devi "></strong></p>
<p dir="ltr">फैशन डिज़ाइनर रूमा के लीडरशिप में ये राजस्थानी महिलाएँ दुनिया की फैशन सिटीज जैसे जर्मनी, कोलम्बो, लंदन, सिंगापोर, थाईलैंड के फैशन शो में भी भाग ले चुकी हैं. आज रूमा देवी का वो छोटा सा स्वयं सहायता समूह 22,000 से भी ज़्यादा महिलाओं का रोजगार बन चूका है. साल 2018 में रूमा को नारी शक्ति पुरस्कार से नवाजा गया. 2019 में टेलीविज़न के एक प्रसिद्ध शो 'कौन बनेगा करोड़पति' में भी रुमा देवी नज़र आईं. उनका कहना है कि मुश्किलें तो सबके जीवन में आती हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा ज़रूरी है हौसला रखना और अपने हुनर को अपनी पहचान बनाकर आत्म-निर्भर बनना. </p>
<p><strong> </strong></p>
<p dir="ltr">रुमा देवी की कहानी ना जाने कितनी महिलाओं को प्रेरित कर चुकी होगी. इस छोटे से गांव की लड़की जिसने अपना बचपन गरीबी, और भूक के पीछे खर्च कर दिया, आज ना जाने कितनी महिलाओं का घर चला रही है. रुमा देवी ने सोच लिया था और इसीलिए अपने हालातों के आगे हारी नहीं. अगर देश की हर महिला ऐसा कुछ करने का ठान ले तो उसे इस दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती.</p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Thu, 06 Apr 2023 17:02:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/a-small-town-girl-became-world-fame-for-her-fashion-designing]]></guid><category><![CDATA[हम में है हीरो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/KcHDhVe94ZvDJVB7sCvV.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/KcHDhVe94ZvDJVB7sCvV.jpg"/></item><item><title><![CDATA[अपनी नई ज़िंदगी मैं खुद लिखूंगी... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/padmashree-phoolbasan-devi-yadav</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aU9wwvAAuXASg1DFCBht.jpg"><p dir="ltr">सिर्फ़ दो रुपये और दो मुट्ठी चावल से अपना बिज़नेस शुरू करना.... उसी बिज़नेस से पद्मश्री तक का सफर ..... बिजनेस शुरू किया स्वयं सहायता समूह के दायरों में रहकर और उसी SHG ने पहुंचाया KBC की हॉट सीट तक.  इस प्रश्न का सही जवाब है फूलबासन बाई यादव. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के सुकुलदैहान गांव में जन्मी और गरीबी के दलदल में आधा जीवन गुजारा. 10 साल की नाज़ुक सी उम्र में शादी कर ज़िम्मेदारियों का बोझ और जल्द ही चार बच्चों की ज़िम्मेदारी उन पर आ गई. अपने बच्चों को भूख से तड़पता देख फूलबासन अपने चारों बच्चों के साथ ट्रेन कि पटरी पर अपनी ज़िंदगी ख़त्म करने चली गई. उनके बच्चे रोते हुए कहने लगे, "माँ, हमें नहीं मरना, हम आज के बाद आपसे कभी खाना नहीं मांगेंगे" इन मासूम शब्दों और सिसकियों ने उन्हें दोबारा जीने पर मजबूर कर दिया. </p>
<p dir="ltr">इस नई मिली ज़िंदगी की कहानी उन्होंने खुद लिखने की ठानी और इस बार अपने बच्चों और गरीबों के लिए जीने का सोचा. 11 महिलाओं के साथ मिलकर 2 मुट्ठी चावल और 2 रूपए इकट्ठा हुए और अपना समूह बना लिया. समाज के उठते सवालों को चुकपचाप सुना और नए मिले लक्ष्य पर ध्यान दिया.  अपने समूह का नाम रखा बम्लेश्वरी जनहितकारी स्वसहायता समूह. फूलबासन बाई मां बम्लेश्वरी स्वसहायता समूह की अध्यक्ष हैं और 100 से ज़्यादा समूहों में करीब दो लाख महिलाएं काम कर रही हैं. </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/7ysDKu29D90KbNMYtb9o.jpg" alt="Phoolbasan Bai yadav"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Google Images</em></span></p>
<p dir="ltr">समूह की महिलाएं अचार बनाना बखूबी जानती थीं. बम्लेश्वरी ब्रांड के नाम से आम और नींबू के अचार तैयार किया जो छत्तीसगढ़ के तीन सौ  स्कूलों में बिका. अचार बनाने तक सीमित न रहकर समाज में बदलाव लाने के लिए भी समूह की महिलाओं के साथ मिलकर पहल की. छत्तीसगढ़ राज्य के अगल-अलग जिलों में करीब 3 हजार लड़कियों और महिलाओं को कराटे की ट्रेनिंग देकर उन्हें हर मुश्किल से निपटना सिखाया. नशे और जुए के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए महिला फौज तैयार की जो रात में सीटी बजाती हुई अपने गांवों में निकलती हैं और किसी भी घर में हो रही मारपीट को रोक देती हैं. शराब और जुआ खेलते पुरुषों को सामने बुलाकर पूरे गाँव के सामने समझाइश देतीं हैं.  इस महिला फ़ौज ने घरेलु हिंसा पर रोक लगाई. कोरोना महामारी के दौरान मां बम्लेश्वरी स्वसहायता समूह की महिलाओं ने 15 लाख मास्क तैयार किये. इनके समूह की महिलाएं बकरी पालन,मच्छली पालन, डेयरी, खाद कम्पनी चला रही हैं और अपने हालात खुद बदल रही हैं. </p>
<p dir="ltr">भारत सरकार ने फूलबासन बाई को पद्मश्री से सम्मानित किया और छत्तीसगढ़ सरकार ने जनाना सुरक्षा योजना का ब्रांड एंबेसडर बनाया. कौन बनेगा करोड़पति, दूरदर्शन, चैनल 360 इंडिया, जोश टॉक जैसे बड़े स्टेज पर उन्होंने हर महिला को हार न मानने और गरीबी को अपनी मेहनत से मुंह तोड़ जवाब देने की सीख दी. फूलबासन ने जोश टॉक में कहां, "डर को जब आप हतियार बना लेते हो तो सारे रास्ते आसान हो जाते हैं." </p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Tue, 14 Mar 2023 18:01:43 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/padmashree-phoolbasan-devi-yadav]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aU9wwvAAuXASg1DFCBht.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aU9wwvAAuXASg1DFCBht.jpg"/></item></channel></rss>