<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[  कोलकाता]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/kolkaataa</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/kolkaataa" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 12 Aug 2023 15:10:52 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[AVSAR स्कीम से मिल रही SHG महिलाओं को आर्थिक उड़ान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/avsar-scheme-providing-platforms-in-airports-to-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8qAg4r94TMe787ITeOvd.jpg"><p>स्वयं सहायता समूह भारत के सबसे शक्तिशाली चैनल है, जो ग्रामीण और शहरी महिलाओं को आजीविका देने के लिए बनाये गए है. <strong>Self Help Groups महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ स्वावलंबी बनाने </strong>का महत्वपूर्ण जरिया हैं. सरकार भी सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को बढ़ावा देने के लिए नई-नई योजनाएं और प्रयास कर रही है. समूह के तहत उत्कृष्ट उत्पादन, स्थानीय कला और शिल्प को बढ़ावा दिया जा रहा, जिनकी आज काफी डिमांड है. SHGs को अगर जरुरत हैं, तो बस अपने उत्पादन को प्रदर्शित करने और बेचने के लिए स्थान की.&nbsp;</p>
<h2>SHGs के प्रोडक्ट्स को मिलेगी ग्लोबल पहचान&nbsp;</h2>
<p>महिला SHGs की इन्हीं जरूरतों को पूरा करने के लिए <strong>प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी (<a href="https://ravivarvichar.in/photovideo/an-empowered-woman-can-empower-the-country-pm-narendra-modi">PM Narendra Modi</a>)</strong> के दृष्टिकोण के अनुरूप <strong>" <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/connecting-homes-to-gangas-blessing">एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया</a> " (AAI)</strong> ने हवाई अड्डों पर self help groups के लिए स्थान अलॉट किया गया है. जहां <strong>SHG महिलाओं, कारीगरों और शिल्पकारों के प्रोडक्ट्स को विकसित</strong> करने और उसकी &nbsp; मार्केटिंग के लिए, एयरपोर्ट पर ही जगह अलॉट की गई है. जिससे स्थानीय कला को ग्लोबल पहचान बनाने में मदद मिलेगी.&nbsp;</p>
<h3>SHGs को पंद्रह दिनों के लिए मिलेगी जगह&nbsp;</h3>
<p><strong>"<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/connecting-homes-to-gangas-blessing">अवसर</a> " (Airports As Venue For Skilled Artists Of The Region, AVSAR)</strong> योजना के अंतर्गत, हर AAI ऑपरेटेड एयरपोर्ट पर 100-200 वर्ग फीट का क्षेत्र निर्धारित किया गया है. यह जगह SHGs को 15 दिन के लिए दी जाएगी. जहां वह अपने प्रोडक्ट्स को <strong>राष्ट्रीय और अंतर-राष्ट्रीय यात्रियों</strong> के सामने प्रदर्शित करेंगी. Self help group को नए बाजार और ग्राहकों के साथ मिलने का मौका मिलेगा, इससे उनके प्रोडक्ट्स की डिमांड भी बढ़ेगी.&nbsp;</p>
<p><img alt="avsar pib" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/409x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/lJ6Y9xLgIzLzCwnz6BaK.jpeg" style="width: 409px;"></p>
<p><em>Image Credits : Rising Kashmir</em></p>
<p>कई एयरपोर्ट्स पर पहले से ही, ऐसे आउटलेट्स बने हुए है, जैसे <strong>चेन्नई (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/sushila-viswanathan-the-hidden-support-behind-anand-viswanathan">Chennai</a>), अगरतला (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/sushila-viswanathan-the-hidden-support-behind-anand-viswanathan">Agartala</a>), देहरादून (Dehradun), कुशीनगर (Kushinagar), और अमृतसर (Amritsar)</strong>, जहां स्थानीय SHG महिलाएं देशी प्रोडक्ट्स जैसे पैकेज्ड पापड़, अचार, बांस के बने बैग/बॉटल/लैंप सेट आदि हवाई यात्रियों को प्रदर्शित कर बेच रहीं है.&nbsp;</p>
<p>राज्य सरकार की मदद से, अब और भी एयरपोर्ट्स, <strong>रांची (Ranchi), कोलकाता (Kolkata), इंदौर (<a href="https://ravivarvichar.in/photovideo/indores-ladli-behna-sena-is-fighting-crimes-against-women">Indore</a>), भोपाल (Bhopal), मदुरई (Madurai), सूरत (Surat), भुवनेश्वर (Bhubaneswar), रायपुर (Raipur)</strong> के SHGs को जगह अलॉट करने का काम शुरू किया जायेगा.</p>
<p><img alt="shg" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/394x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/yutzrc4a4wwjqIwfq1ax.png" style="width: 394px;"></p>
<p><em>Image Credits : IAS Gyan</em></p>
<h3>महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर&nbsp;</h3>
<p>एएआई की यह पहल SHGs के लिए सकारात्मक कदम है, जो समूह की महिलाओं को आर्थिक वृद्धि देने के साथ सशक्त बनाएगा और उनके उत्पादों को ग्लोबल पहचान दिलाने में मदद करेगा. जिससे महिलाओं को नई पहचान के साथ उन्हें और विकसित होने का मौका मिलेगा. इससे <strong>SHG women</strong> के जीवन में सुधार होगा और उन्हें व्यापारिक और सांस्कृतिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा.&nbsp;</p>
<p>SHGs, देश के ऑर्गेनाइज़्ड सेक्टर के विकास में अहम् भूमिका निभा रहे है. सरकार भी इन समूहों को आत्मनिर्भर &nbsp;बनाने में निरंतर समर्थन कर, उनके नये उद्योगों और व्यापारिक अवसरों को पहचान दिलाने में सहायता देने &nbsp;के लिए नई-नई योजनएं बना रहीं है.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Sat, 12 Aug 2023 15:10:52 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/avsar-scheme-providing-platforms-in-airports-to-shg-women]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8qAg4r94TMe787ITeOvd.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8qAg4r94TMe787ITeOvd.jpg"/></item><item><title><![CDATA[पाइन हैंडीक्राफ्ट्स से महिलाएं बढ़ रहीं सशक्तिकरण की राह पर ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/manju-shah-paving-a-new-path-from-pine-forests-to-empowerment</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/RylPbMjHJuZqJsCJKvQw.jpg"><p dir="ltr"><span>आजकल महिलाएं सिर्फ घर के कामों तक ही सिमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहीं है. अपने साथ-साथ अन्य महिलाओं को मार्गदर्शित कर उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. ऐसी ही कहानी है, <strong>उत्तराखंड (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/women-education-a-path-for-development">Uttarakhand</a>)&nbsp;</strong>के <strong>अल्मोड़ा (Almora)</strong> जिले के द्वाराहाट गांव में रहने वाली <strong>मंजू शाह (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/women-education-a-path-for-development">Manju Shah</a>)&nbsp;</strong>कि, जिन्होंने जंगल में उगने वाले <strong>चीड़ (Pine)</strong> के पत्तों से नई दिशा की ओर कदम बढ़ाया और अपने साथ गांव की अन्य महिलाओं को&nbsp; पिरूल से सामान बनाना सिखा रहीं, जिससे वह भी मंजू के मार्गदर्शन में अपनी आर्ट स्किल में सुधार ला रहीं है.</span></p>
<p dir="ltr"><span>मंजू को लोग&nbsp; <strong>'पिरूल वूमेन' (Pirul Women)</strong> के नाम से जानते है. उन्होंने पिरूल के प्रोडक्ट्स बनाने की ट्रेनिंग जापानी इंस्ट्रक्टर से ली. वह पिरूल के पत्तों का उपयोग कर बहुत ही यूनिक और अट्रैक्टिव प्रोडक्ट्स जैसे <strong>टोकरी, फूलदान, आसन, पेन स्टैंड, पर्स, अगूंठी</strong> सहित हर तरह के सजावट के सामान, जो लोगों को काफी पसंद आ रहें, इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ समाज में सम्मान भी मिला.</span></p>
<h2 dir="ltr"><span>मंजू दे रहीं&nbsp;पिरूल के प्रोडक्ट्स बनाने की ट्रेनिंग</span></h2>
<p dir="ltr"><span>साल 2019 में, मंजू को <strong>कोलकाता (<a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/women-empowering-themselves-through-running">Kolkata</a>)</strong> में, <strong>इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (India International Science Festival) </strong>की तरफ से, <strong>बेस्ट अपकमिंग आर्टिस्ट का अवार्ड</strong> दिया गया. कुछ समय बाद उन्हें <strong>ताड़ीखेत में गवर्नमेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज (Government Girls Inter College) में प्रयोगशाला सहायक (Laboratory Assistant)</strong> बनाया गया, जहां वह स्कूल के शिक्षकों और लड़कियों को पिरूल के सामान बनाने की ट्रेनिंग देने लगीं. मंजू के इस <strong>जीरो इन्वेस्टमेंट इनोवेशन इन एजुकेशन प्रोग्राम (Zero Investment Innovation In Education Program)</strong> के लिए उन्हें प्रशस्ति पत्र से नवाजा गया. मंजू की वजह से आज गांव में महिलाओं के पास रोजगार का नया जरिया हैं.&nbsp;</span></p>
<p dir="ltr"><span>आज मंजू <strong>पैंतालिश self help groups (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/amrit-sarovar-a-new-hope-for-shg-women-in-uttar-pradesh">SHGs</a>) और 2000 से ज्यादा बेरोजगार महिलाओं को स्वरोजगार</strong> की दिशा में ट्रेनिंग दे रहीं हैं. मंजू की यह सफलता की यात्रा आसान नहीं थी, उनकी ज़िन्दगी में कई परेशानियां आई पर उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और ज़िन्दगी में आगे बढ़ने के लिए निरंतर प्रयास में लगीं रही. आज इन्हीं प्रयासों का नतीजा हैं कि, मंजू ने अपने साथ दूसरी महिलाओं को भी सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया हैं.</span></p>
<p dir="ltr"><span>Pine के प्रोडक्ट्स को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान के साथ सराहना भी मिली. इन उत्पादों के इस्तेमाल से प्लास्टिक और पर्यावरण प्रदुषण से भी छुटकारा मिल सकता हैं. अब मंजू इस काम को और आगे बढ़ाकर महिलाओं की आर्थिक स्थिति में बदलाव लाना चाहती है. मंजू की इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि, किसी भी सामाजिक परिस्थिति में हम अपने कौशल और परिश्रम से न केवल अपनी ज़िन्दगी में बदलाव ला सकते है, बल्कि दूसरों को भी आत्मनिर्भर बना सकते हैं.&nbsp;&nbsp;</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Tue, 08 Aug 2023 15:23:45 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/manju-shah-paving-a-new-path-from-pine-forests-to-empowerment]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/RylPbMjHJuZqJsCJKvQw.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/RylPbMjHJuZqJsCJKvQw.jpg"/></item><item><title><![CDATA[ऐतिहासिक स्मारक जिन्हें बनवाया महिलाओं ने ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/indian-monuments-made-by-female-rulers</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TYUcHKma1vYMRC81F6i1.jpg"><p><em>इतिहास को संजो कर रखने के लिए कई स्मारक और संरचनाएं बनाई गई जो हमारी समृद्ध सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत की गवाही देते हैं. भारत का गौरवशाली अतीत इसके प्राचीन मंदिरों, किलों, महलों और स्मारकों में छुपा है. जब हम देश भर में फैली इन संरचनाओं की ख़ूबसूरती की प्रशंसा करते हैं, तो हम अक्सर इनसे जुड़े लोगों की कहानियां भूल जाते हैं. इन स्मारकों के ज़रिये अपने प्रियजनों को श्रद्धांजलि देने वाले शक्तिशाली पुरुष शासकों के सैकड़ों उदाहरणों से इतिहास भरा पड़ा है. लेकिन, महिलाओं ने भी कई प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारकों और संरचनाओं को बनवाया था जिसकी जानकारी काफ़ी कम है. इतिहास गवाह है, महिला शासकों ने अपने और अपने से जुड़े लोगों की कहानियों को इन स्मारकों के ज़रिये अमर कर दिया. ऐसे कुछ, महिलाओं द्वारा बनवाये गए स्मारकों की कहानी जानते हैं. </em></p>
<p><strong>हुमायुं का मकबरा, दिल्ली</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/86YFHV1ZYFUndSQUbgP5.jpg" alt="humanyu"><br>यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज,मशहूर हुमायूं का मक़बरा मुगल साम्राज्ञी हमीदा बानू बेगम ने उनके पति हुमायूं के निधन के बाद बनाया था. यह मुगलों के प्रसिद्ध उद्यान मकबरों में पहला है. एक प्रभावशाली उच्च मंच पर स्थित, मकबरे में एक क्लासिक प्याज़ के आकार का गुंबद है. मकबरे के परिसर में अरब की सराय, ईसा खान का मकबरा, नई का गुंबद और नीली गुंबद जैसी अन्य इमारतें भी हैं.</p>
<p><strong>माहिम कॉज़वे, मुंबई</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/tK8lFWxLdpoExk5wGa5V.jpg" alt="mahim causeway"><br>मुंबई में माहिम कॉज़वे 1841-1846 के बीच साल्सेट द्वीप को माहिम से जोड़ने के लिए बनाया गया था. दो द्वीपों के बीच का इलाका दलदली और खतरनाक था जिसे पार करते समय कई लोगों की जान चली गई. इन हादसों ने सेतु की ज़रुरत बढ़ादी. लेकिन जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने सेतु बनवाने के लिए धन देने से इनकार कर दिया, तो अवाबाई जमशेदजी जीजीभॉय आगे आई. उन्होंने सेतु बनाने के लिए कुल 1,57,000 रुपये की लागत दान की थी. माहिम कॉज़वे मुंबई शहर की लाइफलाइन बानी हुई है. </p>
<p><strong>मोहिनीश्वर शिवालय मंदिर, गुलमर्ग</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/df4TZD1I60BKPWWGr1La.jpg" alt="Gulmarg"><br>मोहिनीश्वर शिवालय मंदिर जिसे महारानी शंकर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, कश्मीर घाटी में गुलमर्ग शहर के बीच-ओ-बीच है. सुंदर बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच एक छोटी पहाड़ी पर स्थित, यह मंदिर 1915 में महारानी मोहिनी बाई सिसोदिया ने बनवाया था, जो कश्मीर के तत्कालीन राजा हरि सिंह की पत्नी थीं. मंदिर इस तरह से बनाया गया है कि यह गुलमर्ग के सभी कोनों से दिखाई देता है. इसे कई हिंदी फिल्मों में दिखाया गया है, जिसमें फिल्म 'आपकी कसम' का प्रसिद्द गीत 'जय जय शिव शंकर' शामिल है, जिसमें सुपरस्टार राजेश खन्ना और मुमताज ने अभिनय किया था.</p>
<p><strong>ताज-उल-मस्जिद, भोपाल, मध्य प्रदेश</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/8HvLE66V0cV74XlvoOBX.jpg" alt="Taj ul masjid"><br>भारत की सबसे बड़ी मस्जिद, ताज-उल-मस्जिद या 'मस्जिदों के बीच का ताज', भोपाल की बेगमों द्वारा बनवाया गए भव्य स्मारकों में से एक है. जिन्होंने 1819 से 1926 तक शासन किया था और वे भारत में राजनीतिक और सामाजिक बदलाव लाने के लिए जानी जाती हैं. बेगम शाहजहां ने अपने शासनकाल के दौरान कई महलों, मंदिरों और मस्जिदों का निर्माण करवाया था. उहोंने मस्जिद के लिए वास्तुकार अल्लाह रक्खा खान को नियुक्त किया. लेकिन 1901 में बेगम शाहजहां के निधन के बाद निर्माण रुक गया. उनकी बेटी सुल्तान जहां बेगम ने काम वापिस शुरू करवाया और, आखिरकार 1985 में मस्जिद बनकर तैयार हुई. मस्जिद के नौ गुंबदों, आंगन के तालाब में बनता प्रतिबिंब, और  महिलाओं के लिए नमाज़ अदा करने की अलग जगह ताज-उल-मस्जिद की कुछ विशेषताएं है.  </p>
<p><strong>विरुपाक्ष मंदिर, पट्टदकल, कर्नाटक</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/MhuXVkokIDI5M3y7f3bw.jpg" alt="Virupaksh karnatak"><br>उत्तरी कर्नाटक में मालाप्रभा नदी के किनारे मंदिरों का एक समूह है, जिसे कई लोग चालुक्य मंदिर वास्तुकला का प्रतीक मानते हैं. लेकिन इन यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज रॉक-कट संरचनाओं में, सबसे उत्कृष्ट विरुपाक्ष मंदिर है. विरुपाक्ष मंदिर रानी लोकमहादेवी ने बनवाया था. 740 ईस्वी के आसपास पूरा हुआ. पल्लवों के खिलाफ अपने पति विक्रमादित्य द्वितीय की जीत का जश्न मानाने के लिए उन्होंने मंदिर का निर्माण करवाया. मंदिर का निर्माण कांची के मूर्तिकारों ने किया. प्रवेश द्वार पर नंदी की विशाल आकृति, नटराज और रावणानुग्रह जैसे देवताओं की उत्कृष्ट मूर्तियां, और महाभारत और रामायण की कथाओं की नक्काशी मंदिर की कुछ विशेष्ताएं हैं.</p>
<p><strong>इत्तिमाद-उद-दौला, आगरा, उत्तर प्रदेश</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/uFQI9NaqOVdfoA798daU.jpg" alt="ittimad"><br>इत्तिमाद-उद-दौला एक बेटी की अपने पिता के प्रति समर्पण की गवाही थी. मक़बरे को सम्राट जहांगीर की पत्नी मुगल साम्राज्ञी नूरजहां ने अपने पिता मिर्जा गियास बेग की याद में बनवाया था. मिर्ज़ा को अकबर द्वारा इत्तिमाद-उद-दौला की उपाधि दी गई थी, और वे जहांगीर के शासनकाल में वज़ीर के पद तक पहुंचे थे. उनकी मृत्यु के बाद, नूरजहाँ को 1622 से 1628 ईस्वी तक आगरा में इस स्मृति में बनवाने में सात साल लग गए. यह पूरी तरह से संगमरमर में बना भारत का पहला स्मारक बना, जिसके बारे में कहा जाता है कि अपने सौतेले बेटे सम्राट शाहजहाँ द्वारा बनवाये ताजमहल को भी प्रेरित किया था.</p>
<p><strong>रानी की वाव, पाटन, गुजरात</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/REqAjJMw7Tailbeuyshr.jpg" alt="Rani ki vav "><br>पाटन, गुजरात में सरस्वती नदी के तट पर बनी, रानी की वाव 11 वीं शताब्दी में रानी उदयमती ने अपने पति राजा भीमदेव प्रथम के स्मारक के रूप में बनवाया था. आश्चर्यजनक बावड़ी मारू-गुर्जर स्थापत्य शैली में बनी है. यह उच्च कलात्मक गुणवत्ता के मूर्तिकला पैनलों के साथ सीढ़ियों के सात स्तरों में बंटा है; 500 से अधिक सिद्धांत मूर्तियां और 1,000 से अधिक छोटी मूर्तियां धार्मिक, पौराणिक और धर्मनिरपेक्ष इमेजरी को जोड़ती हैं. 100 रूपए के भारतीय नोट पर बानी तस्वीर रानी की वाव की ही है.   </p>
<p><strong>दक्षिणेश्वर काली मंदिर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/kCHqWZUXrsdAU1XgMdR1.jpg" alt="Dakshineswar Kolkata"><br>रानी रश्मोनी सिर्फ रानी नहीं, बल्कि एक समाजसेवी थीं. एक मछुआरे के परिवार में जन्मी, रानी रश्मोनी ने ईस्ट इंडिया कंपनी के मछली पकड़ने के कर के विरोध के अलावा सती, बहुविवाह और बाल विवाह के खिलाफ आवाज़ उठाई, और बंगाल की जनता के बीच लोकप्रिय हो गई. उन्होंने 1857 में 20 एकड़ जमीन खरीदी और बंगाल स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर की शैली में नौ मीनारों के साथ दो मंजिला संरचना का निर्माण किया. एक शूद्र महिला के मंदिर के निर्माण के खिलाफ ब्राह्मण पुजारियों के प्रतिरोध के बावजूद उन्होंने निर्माण कार्य जारी रखा. देवी काली के रूप, भवतारिणी की मूर्ति को मंदिर में रखा गया, जहां रामकृष्ण परमहंस ने मंदिर के मुख्य पुजारी के रूप में सेवा की.</p>
<p><strong>मिर्जन किला, कुम्ता</strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/rCDXQIdj58wVfM1YKU9U.jpg" alt="mirjan fort"><br>अघनाशिनी नदी के तट पर स्थित, कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित यह स्मारक अपनी उल्लेखनीय आर्किटेक्चर कला के लिए जाना जाता है. इसे 16वीं शताब्दी में भारत की 'काली मिर्च' की रानी के रूप में भी प्रसिद्द गरसोप्पा की रानी चेन्नाभैरदेवी ने बनवाया था. मिर्जन किले में रहने वाली रानी ने इसे काली मिर्च शिपिंग कर अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया. तुलुवा-सलुवा कबीले से आने वाली इस रानी ने 54 वर्षों तक गरसोप्पा की रानी के रूप में शासन किया. यह किला कई युद्धों का गवाह रहा है. </p>
<p><strong>खैर-उल-मंज़िल, दिल्ली </strong></p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/3Wv8Bu3p28GStMREemNo.jpg" alt="Khairul manzil."><br>नई दिल्ली में स्थित, इस ऐतिहासिक मस्जिद का निर्माण 1561 में सम्राट अकबर की नर्सों में से एक, और उनके दरबार की एक प्रभावशाली महिला महम अंगा ने करवाया था. मस्जिद मथुरा रोड पर पुराना किला के सामने शेरशाह गेट के दक्षिण पूर्व में स्थित है. यह मुगल वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना. मस्जिद दो मंजिला संरचना है जहां पश्चिम की ओर प्रार्थना कक्ष हैं और बीच में बड़ा प्रांगण है. इस मस्जिद का मुख्य आकर्षण लाल बलुआ पत्थर से बना विशाल प्रवेश द्वार है. </p>
<p><em>अगर आप इन जगहों पर अब तक नहीं गए हैं, तो एक बार ज़रूर जाएं. स्मारक की डिटेलिंग, बनावट और वास्तुकला के साथ-साथ उसके पीछे छुपी कहानी को जानने की कोशिश ज़रूर करें. </em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Tue, 02 May 2023 15:38:34 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/indian-monuments-made-by-female-rulers]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TYUcHKma1vYMRC81F6i1.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/TYUcHKma1vYMRC81F6i1.jpg"/></item></channel></rss>