<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ कर्नाटक सरकार]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/krnaattk-srkaar</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/krnaattk-srkaar" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 15 Aug 2023 23:00:38 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[बंधुआ मज़दूरी से आज़ादी का सफ़र तय करती महिलाएं ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/previous-women-bonded-labourers-saving-lives-of-other-labourers</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/V2pIMYM2Omw57dC1J9SO.jpg"><p dir="ltr"><span>एक मज़दूर देखने को हमें हर जगह मिल जाते है, कोई बिल्डिंग बनने का काम हो रहा हो या कोई फैक्टरी चल रहीं हो. इन मजदूरों को देखकर हमारे दिमाग में ये ख्याल भी नहीं आता कि इन लोगों की ज़िंदगियों में क्या परेशानियां चल रहीं है. हर माथे की लक़ीर कोई अलग कहानी कह रही होती है. पसीने की हर बूँद एक नयी दास्तान बयां करती है. इन <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/ajeevika-mission-and-pradan-helping-singroli-farmers-reap-benefits">मजदूरों की ज़िंदगी</a> कब क्या मोड़ ले इन्हें भी नहीं पता होता. ऐसी ही कुछ कहानियां है इस आर्टिकल में, जो हर व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर देतीं है.</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span><strong>बोंडेड लेबर की कहानियां</strong> आए दिन हमारी सामने आ जाती है. इनके लिए कोई कुछ सोचता नहीं है. लेकिन कहते है न एक महिला है दिल सबसे कोमल होता है. इसीलिए वे ना ही अपने परिवार को और ना ही अपने साथियों को परेशानी में देख सकती है. ऐसी ही 5 महिलाओं की कहानियां है यहां पर जिन्हें पढ़कर आज़ादी का सच्चा मतलब समझ आता है.</span><b></b><span></span><span></span></p>
<h2 dir="ltr"><span>बंधुआ मज़दूरी से आज़ादी का सफ़र तय किया इन महिलाओं ने</span></h2>
<p dir="ltr"><span><strong>वसंथा, </strong>एक बोंडेड लेबर, जो अपने पति और 1 साल के बच्चे के साथ <strong>ईंठ की भट्टी</strong> पर काम करने को मजबूर थी. सरकार की तय मिनिमम वेज से कई गुना काम मिलने के बावजूद वह कुछ बोल नहीं सकती थी, क्योंकि सवाल अपने बच्चे और परिवार के पेट पलने का था. अगर किसी दिन भूखा भी सोना पड़े तो हैरानी की कोई बात नहीं थी उसके लिए. मालिक की गालियां और दिन रात सिर्फ दर्द, यही ज़िंदगी बनकर रह गयी थी, वसंथा की.&nbsp;</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span>एक उम्मीद की किरण के रूप में डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन सामने आया. उन्हें अपने घर&nbsp; जाने का मौका मिल गया. वह नसीब वाली थी इसीलिए इस दलदल से बच पाई. यह बात वसंथा भी जानती थी. वह तिरुवन्नामलाई में Released Bonded Labour Association (RBLA) की स्पोक्सपर्सन के रूप में एक मज़बूत एडवोकेट के रूप में सामने आई. एक स्वयं सहायता समूह (SHG) का नेतृत्व कर रहीं है, जो छोटी आजीविका पहलों के माध्यम से सदस्यों की सहायता करता है.&nbsp;</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span><strong>सिल्क बनाने के फैक्टरी</strong> में काम तो करती थी, <strong>चंद्रम्मा</strong>, लेकिन यह कभी सोचती भी नहीं थी कि उसी सिल्क से बनी साड़ी कभी पहनने को मिलेगी उसे. सिल्क वर्म्स के साथ काम करते करते उसके हाथ सूख गए थे. 2 बच्चों की मां थी चंद्रम्मा. लगा की एक नयी नौकरी करेगी तो सब ठीक हो जाएगा. लेकिन बैंगलोर की उस फैक्टरी में जाकर उसकी जिन्दगी बद से बत्तर हो गयी. मालिक पीटता था, बिना वज़ह सज़ा देता था. उसे और उसके बेटे को मालिक ने एक छोटे से कमरे में 4 महीने के लिए बंद कर दिया. वह बस मर ही नहीं रही थी, बाकी उसके साथ सब कुछ हो गया था.</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span>कुछ समय बाद लोकल अथॉरिटीज़ ने उन्हें बचा लिया. वह खुद को लकी मानती है और&nbsp; आज ऐसे लोगों की मदद करने में अपना ज़्यादातर समय देती है चंद्रम्मा. अपने स्थानीय Released Bonded Labour Association (RBLA) के सदस्य के रूप में, वह दूसरों को अपनी स्वतंत्रता पुनः प्राप्त करने के लिए सशक्त बनाने के लिए समर्पित है.</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span>12 साल की<strong> रंजीता,</strong> अपने परिवार के साथ <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/strong-intentions-seen-like-bricks-in-shg-women-in-mahasamund">ईंठ की भट्टी</a> पर काम करती थी. अपनी पढ़ाई को नज़रअंदाज कर इस बच्ची ने अपने परिवार को आर्थिक रूप से मदद करने के लिए अपना जीवन सौंप दिया. लेकिन जिस जगह वह काम कर वहां उसके परिवार की हालत और बुरी हो गयी. सुबह से लेकर शाम तक इतना काम दिया जाता था. बच्चों को बांध कर काम करवाते और हर वह धमकियों के डर में सब को काम करना पड़ता था. लेकिन इतना होने के बावजूद भी रंजीता ने हार नहीं मानी.</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span>कुछ समय बाद <strong>कर्नाटक सरकार</strong> ने उस भट्टी के लोगों को रेस्क्यू कर उन्हें अपने गांव में वापस भेज दिया. रंजीता के परिवार की ख़ुशी हद से ज़्यादा थी, लेकिन रंजीता जानती थी, की अभी उसने सिर्फ आधी जंग ही जीती है. उसने पढ़ना शुरू कर दिया, और परिवार की मदद करने के लिए छोटे मोटे काम भी करना. आज वह समुदाय के कमजोर सदस्यों का <strong>आवास और श्रम कार्ड </strong>बनवाने में मदद करती है. वह उन्हें पंजीकरण के महत्व और बिना लाइसेंस वाले श्रम ठेकेदारों पर भरोसा करने के जोखिमों के बारे में शिक्षित करती है.</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span>अपनी छोटी सी बच्ची को आखों के सामने मरता देखा हो जिस माँ ने, उसकी क्या हालत हुई होगी यह कोई सोच भी नहीं सकता. मालिक को सिर्फ अपनी फसल ख़राब होने की चिंता थी. उसने बच्ची को वैसे ही मरने के लिए छोड़ दिया. कांपते हुए हाथों के साथ <strong>कुप्पामम्ल</strong> को काम करना पड़ रहा था. दूसरी बच्ची की भी जान जाते जाते बची थी, और तीसरे बच्चे के पैरों में भी चले पड़े गए थे. इतना होने के बाद भी काम करना मजबूरी थी, कुप्पामम्ल की.</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span>एक बदलाव की किरण लेकर आया 2006. Revenue divisional officer ने उन्हें कर्ज़े से मुक्त करवाया ताकि वह घर जा पाए. जैसे ही उन्हें आज़ादी मिली, उसने ठान लिया कि वह हर महिला, जो इस तकलीफ से गुज़र रही है, उसे कभी वह परेशानी नहीं सहने देगी. कुप्पाम्मल अब आठ&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-to-make-rakhi-from-cow-dung-this-rakshabandhan"> Self Help Group </a>की देखरेख करती हैं. ये समूह महिलाओं को अपने जीवन का पुनर्निर्माण करने, करियर बनाने और उद्यमी बनने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं. उन्होंने अपने जीवन को न केवल अपने परिवार के लिए, बल्कि पूरे समुदाय के लिए आशा की किरण में बदल दिया.</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span>जब उसका पति बीमार हुआ, तो उसने सोचा की अपने परिवार को अच्छे से&nbsp; पालने के लिए मुझे आगे आना होगा. <strong>मध्यप्रदेश की परोबाई</strong>, ने फैसला किया कि वह दूसरे शहर जाकर अपना काम करेगी और पैसे कमाकर अपने परिवार को संभालेगी. लेकिन जिस व्यक्ति पर भरोसा कर वो गयी थी, उसने उसके साथ की हर महिला को और उसे महाराष्ट्र में बेच दिया. एक नेता के खेत पर इन सब को काम के लिए मजबूर किया गया. महाराष्ट्र में उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, ना भाषा और ना ही मदद पाने का तरीका. 1 साल तक इस परेशानी से गुज़री परोबाई.</span><b></b></p>
<p dir="ltr"><span>2018 में <strong>मध्य प्रदेश और<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/from-a-reluctant-farmer-to-a-self-dependent-entrepreneur-savita-dakle-has-come-too-long"> महाराष्ट्र सरकार </a></strong>&nbsp;ने लोगों को इस चंगुल से छुड़वाया. अपनी आज़ादी देखकर परोबाई की आखों से आसूं ही नहीं रुक रहे थे. आज, <strong>पारोबाई</strong> अतिरिक्त आय के लिए अपने खेत का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित करती है. वे दैनिक जरूरतों को पूरा करने और अतिरिक्त उपज बेचने के लिए गेहूं और सब्जियों की खेती भी करती हैं. एक नेता के रूप में उभरते हुए, पारोबाई यह सुनिश्चित कर रही है कि किसी और को उस दर्द से ना गुज़ारना पड़े, जो उसने सहा है.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 15 Aug 2023 23:00:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/previous-women-bonded-labourers-saving-lives-of-other-labourers]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/V2pIMYM2Omw57dC1J9SO.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/V2pIMYM2Omw57dC1J9SO.jpg"/></item><item><title><![CDATA[महिलाओं की एंटरप्रेन्योर्स बनाने का जरिया- NABFINS और NABARD का गठन ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/nabfins-changing-lives-of-shg-through-micro-finance</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/J2oRFGRnTbNOMT6tV1Eb.png"><h2><span>NABFINS और NABARD का गठन</span></h2>
<p dir="ltr"><span>भारतीय संसद ने एक अधिनियम के तहत </span><strong>राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड</strong><span><strong>) </strong>की स्थापना 12 जुलाई 1982 को की. एक विकास बैंक के रूप में नाबार्ड,&nbsp; ग्रामीण विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि हासिल करने के लिए </span><span>कृषि</span><span>, </span><span>लघु उद्योगों</span><span>, </span><span>कुटीर एवं ग्रामोद्योगों</span><span>, </span><span>हस्तशिल्प </span><span>और </span><span>शिल्प</span><span> की आर्थिक गतिविधियों के लिए लोन अन्य सुविधाएं उपलब्ध करता है. NABARD ने स्वयं सहायता समूह (</span><span>SHG</span><span>) को बढ़ावा देने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई . नाबार्ड हमारे देश का प्रमुख फाइनेंसियल इंस्टीटूशन है, जिसने सेल्फ हेल्प ग्रुप्स बैंक लिंकेज प्रोग्राम के अंतर्गत </span><span>माइक्रो फाइनेंस (Micro Finance)</span><span> की सुविधा देता है।</span><span><br></span><span></span></p>
<p dir="ltr"><span>माइक्रोफाइनेंस के लिए</span><strong> National Bank For Agriculture And Rural Development (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/amit-shah-distributed-micro-credit-card-and-kisan-credit-card-on-42nd-foundation-day-at-nabard">NABARD</a>)</strong><span> ने </span><span><strong>नाबार्ड</strong> <strong>फाइनेंसियल सर्विसेस लिमिटेड (<a href="https://nabfins.org/">NABFINS</a>)</strong></span><span><strong> </strong>नाम की एक इंकॉर्पोरेटेड कंपनी बनाई जिसका मुख्यालय </span><strong>बेंगलुरु</strong><span> में है। यह </span><span><strong>भारतीय रिज़र्व बैंक (Indian Reserve Bank</strong>)</span><span> द्वारा पंजीकृत </span><strong>नॉन - बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनी (Non- Banking Financial Company)</strong><span> है। NABFINS में </span><span>नाबार्ड</span><span>, </span><strong>कर्नाटक सरकार (Karantaka Government)</strong><span>, </span><strong>केनरा बैंक (<a href="https://canarabank.com/">Canara Bank</a>)</strong><span>,</span><span> <strong>यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया (</strong></span><strong><a href="https://www.unionbankofindia.co.in/english/home.aspx">Union Bank Of India</a>, UBI)</strong><span>, </span><strong>बैंक ऑफ़ बड़ौदा (<a href="https://www.bankofbaroda.in/">Bank Of Baroda</a>)</strong><span>, </span><strong>धनलक्मी बैंक (<a href="https://www.dhanbank.com/">Dhanlaxmi Bank</a>)</strong><span> और </span><strong>फेडरल बैंक (<a href="https://www.federalbank.co.in/">Federal Bank</a>)</strong><span> पार्टनर्स है। यह कंपनी ग्रामीण और शहरी जरूरतमंद परिवारों और अनऑर्गेनाइज़्ड सेक्टर्स को फाइनेंसियल सेवाएं (Financial Services) देता है। यह लोगों को लोन की सुविधा देकर उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद करता है। </span><strong>तमिलनाडु</strong><span> में </span><strong>आईएफ़डी (Integrated Finance Division)</strong><span> से सहायता लेकर </span><span><strong>संगठनीय आजीविका कार्यक्रम (Organizational Livelihood Program)</strong> </span><span>के माध्यम से अलग - अलग सामाजिक गतिविधियों को प्रभावी ढंग से लागू किया।</span><span><br></span><span></span></p>
<p dir="ltr"><strong>NABFINS (एनएबीएफआईएनएस)</strong><span> में एसएचजी (Self Help Groups) और </span><strong>जेएलजी (JLG)</strong><span> के सहयोग से फाइनेंस होता है। </span><strong>एमएफआई (Micro Finance Institutions, MFI) </strong><span>के साथ ऑफिसियल स्टैंडर्स, ट्रांसपेरेंसी और निर्धारित लक्ष्य को पाने के लिए मॉडल माइक्रोफाइनेंस संस्थान विकसित है। इसका उद्देश्य जरुरतमंदों को सुविधा पहुंचना और सामाजिक बदलाव लाना है।&nbsp; </span><span><br></span><a href="https://nabfins.org/nabfins-limited-14th-foundation-day/"><span><strong>नैबफिन्स लिमिटेड</strong></span></a><strong> (NABFINS) उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh)</strong><span> की पहली ब्रांच,<strong> </strong></span><strong>वाराणसी (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/indias-g20-presidency-boost-nutrition-sensitive-policies-in-agriculture-nutritional-security-for-the-poor">Varanasi</a>)</strong><span> के </span><strong>शिवपुर (Shivpur</strong><span><strong>)</strong> में खुल रही है, जो की देश की 18वीं शाखा होगी। यह शाखा वाराणसी के स्वयं सहायता समूहों (self help groups) और 10,000 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम बनेगी। इसके लिए प्रत्येक महिला को 40 हजार रूपए तक का माइक्रो फाइनेंस दिया जायेगा। केंद्र सरकार की योजनाओं के इम्प्लीमेंटेशन के तहत 196 जनपदों में 328 शाखाएं है।&nbsp; </span><span><br></span><span></span></p>
<p dir="ltr"><strong>राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/amit-shah-distributed-micro-credit-card-and-kisan-credit-card-on-42nd-foundation-day-at-nabard">NABARD</a>)</strong><span> के निरीक्षण में, स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups, SHGs) को सशक्त बनाया जायेगा। महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदलने के लिए डायरेक्ट लैंडिंग वर्टीकल के माध्यम से व्यवसाय संचालन की सुविधा दी जाएगी। उद्घाटन समारोह के दौरान महिला समूहों को </span><strong>डिबेंचर (Debenture)</strong><span> दिए गए। नैबफीन लिमिटेड वाराणसी में </span><strong>महिला सशक्तिकरण (<a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/financial-literacy-bringing-new-opportunities-to-shg-women">Women Empowerment</a>)</strong><span> को बढ़ाने में मददगार साबित होगा। इससे महिलाओं को अपने व्यवसाय&nbsp; शुरू करने में आसानी होगी साथ ही महिलाएं आत्मनिर्भर और सशक्त होंगी।&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</span><b id="docs-internal-guid-a99b8d4f-7fff-7345-427e-6efd1fcda0bc"></b></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">हेमा वाजपेयी</dc:creator><pubDate>Tue, 18 Jul 2023 10:57:26 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/nabfins-changing-lives-of-shg-through-micro-finance]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/J2oRFGRnTbNOMT6tV1Eb.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/J2oRFGRnTbNOMT6tV1Eb.png"/></item><item><title><![CDATA[चाँद तारे तोड़ लाऊँ, सारी दुनिया पर मैं छाऊँ... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/first-indian-female-president-of-astronomical-society-of-india</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/LuHIHBfffn96DLhq5mr9.jpg"><p dir="ltr">आसमान को ताकती हुई वो नज़रे जिनमें कुछ कर दिखाने की चमक साफ़ दिखाई दे रही थी, एक दिन इन तारों को छूना है और आसमान में उड़ना है. यह सोच थी उस छोटी सी लड़की की जिसने टूटते तारे को देख कर सिर्फ इच्छा नहीं मांगी, बल्कि सोचा होगा कि तारे टूटते है तो गिरते कहा है? ऐसे अनगिनत सवाल होंगे जी.सी.अनुपमा के मन में जिससे वे एस्ट्रोनॉमी की ओर खींची चली गयी. भारत की सबसे पहली महिला जिन्हें 'एस्टॉनोमिकल सोसाइटी ऑफ़ इंडिया' (एएसआई) की अध्यक्ष के तौर पर चुना गया, वो है जी.सी.अनुपमा. इन्होने आईआईए बैंगलोर से पीएचडी की और डॉक्टरेट के बाद पुणे में इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आईयूसीएए) में काम किया. </p>
<p dir="ltr">एएसआई में उनकी एंट्री के बाद उन्होंने बहुत से सराहनीय काम किये. बेंगलुरू स्थित ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स’ (आईआईए) में अनुपमा 'थर्टी मीटर टेलीस्कोप' (टीएमटी) परियोजना की स्थापना में लगी और इनका क्रू अंतरराष्ट्रीय टीम का हिस्सा था. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में एस्ट्रोफिजिक्स (सुपरनोवा) पर कई पेपर प्रस्तुत किए हैं. अनुपमा कुछ साल पहले लेह, लद्दाख, में 'हिमालयन टेलीस्कोप' की डिजाइन और स्थापना के लिए प्रोजेक्ट इंचार्ज भी थीं. यह दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित एकमात्र टेलीस्कोप है जो वैज्ञानिक समुदाय के लिए मूल्यवान डेटा प्रदान करता है. वे 'बुलेटिन एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया' (2004-10) की संपादक भी रह चुकी है. इन्हें वर्ष 2001 में कर्नाटक सरकार के ‘सीवी रमन यंग साइंटिस्ट अवार्ड’ से नवाजा गया. </p>
<p dir="ltr">यह बात सच है कि भारत में खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी में महिला वैज्ञानिकों की संख्या बहुत काम है, लेकिन अनुपमा ने यह साबित कर दिया कि महिलाएं चाहे तो कुछ भी कर सकती है. चाहे फिर वो घर संभालना हो या अंतरीक्ष की उचाइयां तय करना हो. अनुपमा जाने कितनी लड़कियों के लिए एक उम्मीद की किरण बनी है. आज हर लड़की और महिला इन्हीं जैसे नामों से प्रेरित होकर सपने देख रही हैं और उन्हें पूरा करने के लिए ऊंची उड़ान तय करना चाहती है. ‘इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमी दिवस’ के दिन ऐसी कहानियां सबके सामने आनी ही चाहिए ताकि देश का हर व्यक्ति प्रेरित हो सके.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 02 May 2023 13:19:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/hum-bhi-hero/first-indian-female-president-of-astronomical-society-of-india]]></guid><category><![CDATA[हम में है हीरो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/LuHIHBfffn96DLhq5mr9.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/LuHIHBfffn96DLhq5mr9.jpg"/></item></channel></rss>