<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ कृषि विज्ञान केन्द्र]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/krssi-vijnyaan-kendr</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/krssi-vijnyaan-kendr" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 13 Apr 2024 10:30:38 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[नमो ड्रोन दीदी योजना के बारें में सबकुछ जाने... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/know-everything-about-the-namo-drone-didi-scheme-4478870</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Tfntx2Q7CQSef9mzwBUb.png"><p>सरकार ने <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/schemes-for-women-empowerment-in-india-4476547">महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने एवं उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए कई तरह की योजनाएं</a> चला रखी है. ऐसी एक महत्वकांक्षी और उन्नत योजना नमो ड्रोन दीदी योजना है. क्या आप जानते है इस योजना के बारें में? इस योजना के क्या उद्देश्य हैं? नमो ड्रोन दीदी (Namo Drone Didi) योजना का लाभार्थी कौन होगा? और कैसे आप इसका लाभ उठा सकते है?</p>
<h2>नमो ड्रोन दीदी योजना क्या है? (What is Namo Drone Didi Yojana?)</h2>
<p>नमो ड्रोन दीदी योजना की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) द्वारा नवंबर, 2023 में की गई थी. इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा एसएचजी यानी स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups SHGs) से जुड़ी 15 हजार महिलाओं को ड्रोन उपलब्ध कराया जाएगा. प्रत्येक सहायता समूह से एक ड्रोन दीदी चुनी जाएगी.</p>
<p>चुनी गई महिलाओं को 15 दिनों की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे इसके जरिए आत्मनिर्भर यानी स्वावलंबी बन सकें. ड्रोन (Drone) चलाने का प्रशिक्षण देने के लिए 10 से 15 गांवों का एक कलस्टर बनाया जाएगा. ट्रेनिंग में पांच दिवसीय अनिवार्य ड्रोन पायलट ट्रेनिंग दी जाएगी, जबकि बाकी 10 दिनों में उन्हें कृषि उद्देश्यों के लिए पोषक तत्व और कीटनाशक छिड़काव संबंधी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा. ड्रोन के माध्यम से किसानों को कृषि कार्य में आसानी होगी. उनका फसलों पर उर्वरक (Fertilizer) और कीटनाशकों (Insecticides)का छिड़काव का कार्य आसान हो जाएगा. वे किराए पर ड्रोन लें सकेंगे.</p>
<h2>ड्रोन दीदी के लिए कितना वेतन निर्धारण किया गया है? (How much salary will be given to Drone Didi under this scheme?)</h2>
<p>ड्रोन दीदी यानी ड्रोन पायलट (drone pilot) के रूप में चुनी गई महिला को बतौर वेतन 15 हजार रुपए दिए जाएंगे. वेतन की यह राशि उनके खाते में डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (Direct Benefit Transfer DBT) के माध्यम से हस्तांतरित की जाएगी.</p>
<h2>नमो ड्रोन दीदी योजना को कैसे लागू किया जाएगा? (How Namo Drone Didi Yojana will be implemented?)</h2>
<p>इस योजना को देशभर के कृषि विज्ञान केंद्र (Krishi Vigyan Kendra KVK) के जरिये लागू किया जाएगा. नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिलाओं को ड्रोन उड़ाने, डाटा विश्लेषण (data analysis) करने, ड्रोन का रख-रखाव यानी मेंटिनेंस (maintenance) के बारे में ट्रेनिंग (training) दी जाएगी.</p>
<p>इसके अतिरिक्त उन्हें <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/punjab-chandigarh-women-set-to-revolutionize-farming-with-kisan-drone-yojana-2032277">ड्रोन का इस्&zwj;तेमाल करके अलग-अलग कृषि कार्यों के लिए भी तैयार किया जाएगा</a>. जैसे कि फसलों की निगरानी यानी मॉनिटरिंग (crop monitoring), उर्वरकों एवं कीटनाशकों का छिड़काव कैसे और कितना किया जाए, बीजों (seeds) की बुआई आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी.</p>
<p>महिला ड्रोन पायलट को 10 से 15 गांव का एक क्लस्टर बनाकर ड्रोन दिया जाएगा. इस योजना से न केवल महिला स्वयं सहायता समूह को लाभ मिलेगा, बल्कि कृषि कार्य उर्वरकों के छिड़काव में भी किसानों को सहायता मिलेगी. बता दें कि उनके द्वारा कृषि कार्यों के लिए किसानों को किराए पर भी ड्रोन उपलब्ध कराया जा सकेगा.</p>
<h2>नमो ड्रोन दीदी योजना के क्या उद्देश्य हैं? (What are the objectives of Namo Drone Didi Yojana?)</h2>
<p>इस योजना के शुभारंभ के पीछे सरकार के उद्देश्य इस प्रकार है -</p>
<ul>
<li>महिलाओं को आत्मनिर्भर/स्वावलंबी (self dependent) बनाना.</li>
<li>कृषि क्षेत्र (agriculture field) की उत्पादकता (productivity) में वृद्धि करना.</li>
<li>कृषि की लागत (agriculture cost) में कमी लाना.</li>
<li>रोजगार के अवसरों (employment opportunities) में वृद्धि करना.</li>
<li>ड्रोन टेक्&zwj;नोलॉजी (drone technology) का विकास करना.</li>
<li>ड्रोन अनुसंधान एवं विकास (research and development) को बढ़ावा देना.</li>
<li>ड्रोन स्टार्टअप (drone start-up) को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता (financial and technical help) मुहैया कराकर इन्हें प्रोत्साहित करना.</li>
</ul>
<h2>ड्रोन दीदी के रूप में चुनी गई महिलाओं को ड्रोन किसके द्वारा मुहैया कराया जाएगा? (Who will provide drone to women selected as Drone Didi?)</h2>
<p>ड्रोन की खरीद के लिए महिला स्वयं सहायता समूह को केंद्र सरकार द्वारा ड्रोन की लागत (cost) का 80 फीसदी अथवा अधिकतम 8 लाख रुपए तक की राशि मुहैया कराई जाएगी. बाकी राशि को 3 प्रतिशत की ब्याज दर (interest rate) पर दिया जाएगा.</p>
<h2>नमो ड्रोन दीदी योजना के लिए आवेदन करने की पात्रता क्या है?/ इस योजना का लाभार्थी कौन होगा? (What is the eligibility to apply for Namo Drone Didi Yojana?/who will be the beneficiary of this scheme?)</h2>
<p>यदि कोई महिला नमो ड्रोन दीदी योजना के लिए आवेदन करना चाहती है, तो इसके लिए पात्रता (eligibility) है-</p>
<ul>
<li>आवेदक महिला की आयु 18 वर्ष से अधिक हो.</li>
<li>आवेदन करने वाली महिला निम्न आय वर्ग (lower economic category) से हो.</li>
<li>वह भारत की नागरिक (citizen of India) हो.</li>
<li>आवेदन करने वाली महिला कृषि कार्य से जुड़ी हो.</li>
<li>आवेदक महिला किसी स्वयं सहायता समूह (self help group) से संबंधित हो.</li>
</ul>
<h2>नमो ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत आवेदन करने के लिए महिला को किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी? (What documents will be required to women for applying under Namo Drone Didi Yojana?)</h2>
<p><a href="https://ravivarvichar.in/khabar/droneacharya-aerial-innovations-droneacharya-and-itc-together-taught-the-first-batch-of-women-namo-drone-didi-all-women-namo-drone-didi-to-fly-drones-and-also-got-them-legal-license-4357248">नमो ड्रोन दीदी योजना</a> के अंतर्गत आवेदन करने की इच्छुक महिला को इन दस्तावेजों (documents) की आवश्यकता होगी -</p>
<ul>
<li>आवेदक महिला का आधार कार्ड (aadhar card)</li>
<li>आवेदक का स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र (residence proof)</li>
<li>आवेदक का पैन कार्ड (Pan card)</li>
<li>आवेदक का पारिवारिक आय प्रमाण-पत्र (family income certificate)</li>
<li>आवेदक का मोबाइल फोन नंबर (mobile phone number)</li>
<li>आवेदक की ईमेल आईडी (email id)</li>
<li>आवेदक की पासपोर्ट साइज फोटो (passport size photo)</li>
<li>आवेदक का स्वयं सहायता समूह का पहचान-पत्र (SHG id)</li>
</ul>
<h2>नमो ड्रोन दीदी योजना पर कुल कितना खर्च आएगा? (How much cost Namo Drone Didi Yojana will bear?)</h2>
<p>इस योजना पर कुल <a href="https://ravivarvichar.in/government-under-kisan-drone-yojana-will-provide-with-an-outlay-of-1261-crores-to-women-self-help-groups">1261 करोड़ रुपए का खर्च आने की संभावना</a> है. सरकार द्वारा ड्रोन के लिए न केवल प्रशिक्षण केंद्रों (training center) का निर्माण किया जाएगा, बल्कि उसके द्वारा, मरम्मत केंद्र (maintenance centre) एवं चार्जिंग स्टेशनों (charging stations) भी खोले जाएंगे.</p>
<h2>नमो ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? (How to apply online under Namo Drone Didi Yojana?)</h2>
<p>नमो ड्रोन दीदी योजना की आवेदन प्रक्रिया अभी शुरू नही हुई है. आपको बता दें कि स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) से जुड़ी जो महिलाएं इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन करना चाहती हैं, उनको थोड़ा इंतजार करना होगा. अभी ऑनलाइन आवेदन के लिए सरकार द्वारा कोई आधिकारिक वेबसाइट/पोर्टल (Namo Drone Didi official website/portal) की शुरुआत नहीं की गई है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">श्रेया वशिष्ठ</dc:creator><pubDate>Sat, 13 Apr 2024 10:30:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/know-everything-about-the-namo-drone-didi-scheme-4478870]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Tfntx2Q7CQSef9mzwBUb.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Tfntx2Q7CQSef9mzwBUb.png"/></item><item><title><![CDATA[मुरैना में शहद की मिठास ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/morena-shgs-gaining-financial-freedom-through-honey-production</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FXWAyEGSeMQQLqY83VAY.jpg"><p><iframe style="width: 828px; height: 464px;" src="https://www.youtube.com/embed/baVsY0atlp8" width="828" height="464" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>मुरैना में आजीविका मिशन (Ajeevika Mission), जिला प्रशासन और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक इसमें खास रूचि ले रहे. इस जिले में लगभग 6 हजार लोग शहद उत्पादन(Honey Production) से जुड़े हुए हैं. स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) से जुड़ी सैकड़ों महिलाएं भी अब इस कारोबार से जुड़ कर अलग-अलग राज्यों में शहद बेच रहीं है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Tue, 30 May 2023 17:08:56 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/morena-shgs-gaining-financial-freedom-through-honey-production]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FXWAyEGSeMQQLqY83VAY.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FXWAyEGSeMQQLqY83VAY.jpg"/></item><item><title><![CDATA[मुरैना में घुल रही शहद की मिठास ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/world-bee-day-shg-women-become-self-dependent-through-honey-production</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FXWAyEGSeMQQLqY83VAY.jpg"><p>मुरैना जिला यानि ख़ास स्वाद वाली गजक की पहचान. लेकिन समय के साथ मुरैना में शहद की मिठास भी घुल रही है. शहद उत्पादन को लेकर मुरैना एक नई पहचान बना रहा है. जिले आजीविका मिशन से जुड़े कई स्वयं सहायता समूह (Self Help Group- SHG) की महिलाएं भी शहद उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गईं. इसके अलावा शहद उत्पादन से कई किसान और शहद उत्पादक जुड़े, जिसमें उनके परिवार की महिलाएं प्रमुख रूप से भूमिका निभा रही. </p>
<p>मुरैना में आजीविका मिशन, जिला प्रशासन और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक इसमें खास रूचि ले रहे. इस जिले में लगभग 6 हजार लोग शहद उत्पादन (Honey Production) से जुड़े हुए हैं. स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सैकड़ों महिलाएं भी अब इस कारोबार से जुड़ कर अलग-अलग राज्यों में शहद बेच रहीं है. </p>
<p>धूरकुडा गांव में मां संतोषी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष रेखा धाकड़ कहती है - "मैंने 2018 में समूह का गठन किया. मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग ली. अभी मेरे पास 300 बॉक्स की कॉलोनी है.पिछले साल हमने 7 लाख रुपए का कारोबार किया था. पहाड़गढ़ में प्रोसेसिंग यूनिट जल्दी शुरू होना चहिए, जिससे ज्यादा आदिवासी महिलाओं को काम मिल सके." गांव मिरघान के बजरंग स्वयं सहायता समूह की सदस्य माया देवी कुशवाह कहती है -" पिछले साल मेरे पास 700 बॉक्स थे. इस बार 550 बॉक्स हैं. अच्छे उत्पादन के लिए आगरा जिले के जंगल में कॉलोनी लगाई है. मैं चाहती हूं कि शहद के भाव अच्छे मिले. पिछली बार 150 रुपए किलो तक शहद के भाव थे,जबकि इस बार घट कर 70 रुपए किलो के आसपास आ गए."       <img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/7D09G2yscxqoaFRnWWRY.jpeg" alt="bee day ">  </p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएं (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार)</span></em></p>
<p>जिले में SHG की महिलाओं ने इसे खास कारोबार बना लिया.अभी यहां रिकॉर्ड 35 हजार क्विंटल शहद का उत्पादन मधुमक्खी पालकों ने कर लिया.एक लाख कॉलोनी (बॉक्स का समूह जिसमें मधु मक्खी रहती हैं ) में यह उत्पादन लिया जा रहा है. आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक दिनेश तोमर कहते हैं -" महिलाओं ने शहद उत्पादन में खास रूचि दिखाई. लगभग 500 महिलाएं सीधे तौर पर जुड़ीं हैं,जबकि सैकड़ों महिलाएं परिवार के साथ भी इस व्यवसाय से जुड़ गईं. महिलाओं ने कई टन शहद का उत्पादन कर रिकॉर्ड बनाया.जिले में पहाड़गढ़ में प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाई है. "        </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/3YcEv7BV3K2CFap5eZSO.jpeg" alt="bee day "></p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">मुरैना जिले मधुमक्खी पालन से जुड़ी महिलाओं से चर्चारत अधिकारी और वैज्ञानिक (फोटो क्रेडिट : रविवार विचार)</span></em></p>
<p>जिले सरसों, बरशिन (मवेशियों का चारा), धनिया, अजवाइन आदि का उत्पादन अधिक होने से फ्लॉवरिंग वातावरण मिल जाता है. कृषि विज्ञान केंद्र के सीनियर कीट वैज्ञानिक और हनी बी विशेषज्ञ डॉ. योगेश यादव कहते हैं - " मुरैना में शहद उत्पादन को लेकर मधु मक्खियों को अनुकूल माहौल मिलता है. मुझे ख़ुशी है कि छह हजार से ज्यादा लोग खास कर महिलाएं भी शहद उत्पादन से जुड़ी हुईं है. यहां लगातार उत्पादन बढ़ रहा है. इसकी शुद्धता बढ़ाने के लिए जिले में तीन प्रोसेसिंग यूनिट लगाई है. यह प्लांट जौरा में दो और पहाड़गढ़ में एक हैं. सरसों फ्लॉवरिंग अधिक होने से यह ख़ास पसंद बनी हुई है. मुरैना में ही एक लाख 70 हजार हैक्टेयर में सरसों की फसल लगाई जाती है.एक बॉक्स में रानी और 300 नर  मधु मक्खी केअलावा लगभग 60 हजार श्रमिक मधु मक्खियां रहती हैं जो फूलों का रस इकठ्ठा करती हैं. "</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/UqKXBFFXbZTW9iqndw6Z.jpeg" alt="bee day "></p>
<p><em><span style="font-size: 8pt;">मुरैना जिले में लगी मधुमक्खी की कॉलोनी, पास में लगे सरसों के खेत (फोटो क्रेडिट: रविवार विचार)</span></em></p>
<p>मधुमक्खी पालन को लेकर कई सावधानी रखना होती है. इसकी खास ट्रेनिंग के बाद ही बॉक्स दिए जाते हैं. वैज्ञानिक अशोक यादव आगे बताते हैं- "हमें भ्रम होता है कि शहद जम जाने का मतलब अशुद्ध है. शहद का प्रकृतिक नेचर है जमना. इसमें नेचुरल ग्लूकोज़ की मात्रा ज्यादा होती है. प्रोसेसिंग यूनिट से शहद का मॉइश्चर और अशुद्धि भी हट जाती है. "</p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/lzSR46tt4ZN5nGSl7xDl.jpeg" alt="bee day "></p>
<p> <em><span style="font-size: 8pt;">मुरैना जिले में लगी प्रोसेसिंग यूनिट को समझाते हुए अधिकारी और वैज्ञानिक (फोटो क्रेडिट: रविवार विचार)</span></em></p>
<p>जिले में जिला प्रशासन भी महिलाओं को इस कारोबार से जोड़ने का प्रयास कर रहा है. जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी इच्छित गढ़पाले कहते हैं - " जिले में मधु मक्खी पालन और कारोबार में महिलाओं को अधिक से अधिक जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. मुरैना जिला शहद उत्पादन को लेकर नई पहचान बना चुका है. अच्छे भाव मिले यह भी कोशिश की जा रही है. "  </p>
<p><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/7txQigbcbnGKrRSyvPkP.jpeg" alt="bee day "></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>मुरैना जिले मधुमक्खी पालन से जुड़ी महिलाओं से चर्चारत अधिकारी और वैज्ञानिक (फोटो क्रेडिट: रविवार विचार)</em></span></p>
<p>इस बार शहद उत्पादन अधिक होने और भाव काम मिलने की वजह से उत्पादकों ने स्टॉक अपने पास ही रख लिया है.समूह की महिलाओं के अलावा किसानों की मांग है कि शहद के अच्छे भाव दिलवाने के लिए सरकार प्रयास करे. ग्वालियर -चंबल संभाग के कमिश्नर दीपक सिंह कहते हैं -" मुरैना के किसानों खास कर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने शहद उत्पादन में नया मुकाम  हासिल किया है. विशेषज्ञों से और ट्रेनिंग दिलवाई जाएगी. आने वाल दिनों कई देशों में एक्सपोर्ट देखने को मिलेगा." </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Tue, 23 May 2023 11:17:32 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/world-bee-day-shg-women-become-self-dependent-through-honey-production]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FXWAyEGSeMQQLqY83VAY.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/FXWAyEGSeMQQLqY83VAY.jpg"/></item><item><title><![CDATA[किसानों के लिए वरदान बनेगा 'वाडी प्रोजेक्ट' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/nabard-pairs-up-dalmia-bharat-limited-to-start-wadi-project</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/PYiv7pUMe7FGhyf7lMSB.jpeg"><p dir="ltr">भारत की आधी से ज़्यादा जनसँख्या खेती-बाड़ी से किसी ना किसी रूप में जुड़ी हुई है. ऐसे देश में जहां इतनी बड़ी संख्या में लोग खेती करते हों, वहां सरकार को आए दिन ऐसे परियोजनाएं लानी पड़ती है, जो किसान, महिलाएं, और इनके परिवारों को सशक्त और सक्षम बनाकर आगे बढ़ने में मदद करे. इन्हीं परियोजनाओं में एक और नाम जोड़ने के लिए ‘नाबार्ड’ (नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट) के साथ ‘डालमिया भारत लिमिटेड’ (डीबीएल) की ‘कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी शाखा’ (सीएसआर), ‘डालमिया भारत फाउंडेशन’ (डीबीएफ), द्वारा शुरू की गई 'वाडी परियोजना' से ओडिशा में राजगंगपुर और कुटरा ब्लॉक की 9 ग्राम पंचायतों के 400 से ज़्यादा किसानो को मदद मिलेगी. </p>
<p dir="ltr">मुख्य रूप से, भारत में आदिवासी समुदाय अपनी आजीविका के लिए कृषि, वनों और पशुओं पर निर्भर हैं और विकास के लिए संसाधनों तक उनकी पहुंचना के बराबर  है. जनजातीय विकास कोष (टीडीएफ) के तहत ‘वाडी परियोजना’ का उद्देश्य स्थायी कृषि प्रथाओं और स्थायी आजीविका के बेहतर अवसरों पर ध्यान देने के साथ आदिवासी किसानों का विकास करना है. ‘डीबीएफ’ ने वित्त वर्ष 23-24 में इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की योजना बनाई है, जनजातीय विकास में मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना और इन गांवों में किसानों की गरीबी को कम करना है.</p>
<p dir="ltr">डीबीएफ और नाबार्ड इस परियोजना नें किसानों को शामिल करने के लिए ग्राम पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराएं है. डीबीएफ उच्च उपज वाले बीज, ग्राफ्टेड प्लांट, सिंचाई, GI मेस वायर फेंसिंग के साथ-साथ वाडी विकास और सब्जी की खेती के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान करता है. यह प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), सुंदरगढ़ और अन्य सलाहकार प्रशिक्षकों के वैज्ञानिकों द्वारा आयोजित किया जाता है. किसानों को विभिन्न गांवों में किसान उत्पादक संगठन की सामूहिक मार्केटिंग के माध्यम से अपनी उपज बेचने में भी सहायता प्राप्त की जा रही है. इससे उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने और अपने परिवारों के कल्याण में सुधार करने में सहायता मिलेगी. </p>
<p dir="ltr">इनमें स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए सशक्तिकरण कार्यक्रम, जैसे प्रशिक्षण, कौशल विकास, आय-सृजन कार्यक्रम जैसे बकरी पालन, सुअर पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, केंचुआ पालन, सामुदायिक नर्सरी आदि शामिल हैं. यह पहल स्वयं सहायता समूहों और किसान परिवारों को आगे बढ़ाने में एक बहुत बड़ी भूमिका निभा रही है. ओडिशा सरकार की यह पहल स्वावलम्बी भारत की तरफ एक और कदम है. सरकारों को किसानो और स्वयं सहायता समुह को आगे बढ़ाने के लिए इस प्रकार की परियोजनाएं लाते रहना चाहिए. किसान और महिलाओं का विकास इसी प्रकार मुमकिन होगा.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Sun, 30 Apr 2023 12:00:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/nabard-pairs-up-dalmia-bharat-limited-to-start-wadi-project]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/PYiv7pUMe7FGhyf7lMSB.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/PYiv7pUMe7FGhyf7lMSB.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[ज़ीरो से लखपति स्वयं सिद्धा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/gwalior-women-group-give-livelihood-to-needy-females</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/84n9lcjDOqZtAN0RLDQu.jpg"><p dir="ltr">कई घरेलु महिलाएं सिर्फ घर में ही झाड़ू-पौंछा या चार दीवारी में ज़िंदगी मान कर बैठ जाती हैं.लेकिन ऐसी ही कुछ गृहणियों ने साबित कर दिया कि वे घर संभालने के साथ स्वयं सिद्धा भी हैं. कोरोना काल में जहां लोग पलायन और आर्थिक संकट से जूझ रहे थे वहीं ग्वालियर की चंद महिलाओं ने घर से निकल कर ऐसी मिसाल पेश की,कि उनकी संस्था स्वयं सिद्धा ने सौ से ज्यादा  महिलाओं को जॉब दिया. पंद्रह सौ रुपए से शुरू किया यह कारोबार आज पांच लाख रुपए सालाना पहुंच गया. लोकल फॉर वोकल कॉन्सेप्ट को साबित कर दिया. काम की चर्चा इतनी हुई कि सुषमा स्वराज अवार्ड 2023 ,कैट की ओर से महिला उद्यमिता अवार्ड 2023 ,दिव्य ज्योति संस्थान के तू है शक्ति अवार्ड 2023 और नाबार्ड की ओर से बेस्ट वुमन इंटरप्रन्योर अवार्ड मिल चुके हैं.       </p>
<p dir="ltr">कोरोना काल में परेशान महिलाओं को देख मप्र ग्वालियर की महिमा तारे ने अपनी कुछ मित्रों से घरेलु प्रोडक्ट बनाने का प्लान किया. तारे कहती हैं -"मैंने पंद्रह सौ रुपए से अपनी मित्रों के साथ पापड़ बनाना शुरू किया. घर के कमरे को ही ऑफिस और दूसरे मित्र के घर को वर्क शॉप. शुरू में कॉलोनी में कुछ परिवारों ने ख़रीदा, कुछ ने खाली हाथ लौटा दिया. हम निराश न हुए. और संस्था का नाम स्वयं सिद्धा रख लिया."</p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/Un7VTAuNJTt7irZd8B3j.jpg" alt="swayam sidhha"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar vichar</em></span></p>
<p dir="ltr">धीरे-धीरे कोरोना के हालात और सामान्य होने लगे.इस समूह में रंजना कक्कड़, रेखा राव, सारिका सप्रे,आभा घाणेकर शुरुआत में जुड़ीं.सारिका कहती हैं -" हमने तय किया कि घरेलु प्रोडक्ट बना कर शुद्ध पैक लोगों तक पहुंचाना. और धीरे -धीरे हमारे प्रोडक्ट के ऑर्डर बढ़ने लगे. "</p>
<p dir="ltr">ये सभी महिलाएं अपने घर का काम निपटा कर वर्कशॉप आ जाती. महिमा आगे बताती हैं -"हमारी उम्मीद जागी. हमने आंवला मुरब्बा और आंवला कैंडी प्रोसेसिंग कि ट्रेनिंग ली. शुरू में पच्चीस किलो का आंवला प्रोडक्ट बनाया. मांग बढ़ी और फिर पांच क्विंटल तक का प्रोडक्ट बनाया. " समूह कि हेमलता सिंह कहती हैं -"महिलाओं ने कृषि विज्ञान केन्द्र से आवला प्रोसेसिंग की ट्रेनिंग ली.  कृषि वैज्ञानिक सुरुचि सोनी द्वारा दिए गए प्रशिक्षण के बाद आंवला के प्रॉडक्ट बनाए." </p>
<p dir="ltr">समूह के माध्यम से महिलाएं वर्मी कंपोस्ट,रूईबत्ती,आंवला पॉवडर ,मुरब्बा सहित करीब 20 से ज्यादा तरह के प्रोडक्ट और घरेलू जरूरत की सामग्री तैयार कर रही हैं. समूह सदस्य रंजना कक्क्ड़ और रेखा राव कहती हैं -"यदि महिलाएं ठान ले तो कुछ भी कर सकती है. शुरू में प्रॉफिट पूंजी को कारोबार में लगा कर समूह को मजबूत बनाया. बाकि सभी सदस्यों की कमाई भी अब शुरू हो गई. "  </p>
<p dir="ltr"><img src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/QyDlQLm4bLNXTLAPLAOn.jpg" alt="swayam sidhha"></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar vichar</em></span></p>
<p dir="ltr">समूह अध्यक्ष तारे कहती हैं -"हम अन्य महिलाओं को भी खुद अपने पैरों पर खड़े होने और बिज़नेस करने के प्रशिक्षण देते हैं. ख़ुशी है कि आज हमारा समूह ग्वालियर और आसपास के इलाके में पहचान बना चुका है.      <strong id="docs-internal-guid-a5946404-7fff-bd72-f840-82082e5e0556"></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Mon, 03 Apr 2023 17:47:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/gwalior-women-group-give-livelihood-to-needy-females]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/84n9lcjDOqZtAN0RLDQu.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/84n9lcjDOqZtAN0RLDQu.jpg"/></item></channel></rss>