<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ लोकसभा चुनाव]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/loksbhaa-cunaav</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/loksbhaa-cunaav" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 16 May 2024 16:31:11 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[चुनावों की मारा मारी, महिलाओं पे भारी… ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/experts-thoughts-editorial/women-pay-the-price-of-any-riot-or-issue-created-during-elections-4580203</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8cKHOLf7eXmehgWcUaaN.png"><p style="text-align: justify;">चुनावी बिगुल कब का बज चुका है. माहौल पूरी तरह से चुनावी रंग में रंग चुका है. लोकसभा चुनाव (LokSabha Elections 2024) हैं फ़िर भी भारत जैसे विनिन्नताओं से परिपूर्ण देश में हर राज्य, हर शहर और हर गांव-कस्बे का माहौल एक दूसरे से अलग होता है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">महिलाएं चुकाते है कीमत</h2>
<p style="text-align: justify;">लेकिन आज हम चुनावों के रोमांचक पहलुओं के बारे में बात नहीं करेंगे. आज हम बात करेंगे चुनावों के वीभत्सपने की. और कैसे निर्दोष लोगों को इस महायुद्ध की कीमत चुकानी पड़ती है. सत्ता की इस लड़ाई में सबसे ज़्यादा नुकसान होता है देश की महिलाओं का.</p>
<p style="text-align: justify;">कहीं पर कम, कहीं पर ज़्यादा, पर होता ज़रूर है. 2021 के बंगाल के विधानसभा चुनाव के बाद हिंसा, यौन शौषण और हत्या के जो मामले सामने आए थे वो अब तक सबके जहन में होंगे. बात वैसे सिर्फ़ बंगाल की नहीं हैं. लेकिन क्योंकि बंगाल की घटनाएं हाल ही की हैं और वहां पर चुनावी हिंसा जिस तरह से आम बात सी है, इसलिए चुनावी हिंसा की बात करते वक्त सबसे पहले बंगाल का नाम सामने आता है.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/women-voters-are-so-important-in-the-2024-lok-sabha-elections-that-ignoring-them-can-cause-huge-loss-to-any-political-party-despite-all-this-like-in-past-years-women-politicians-are-still-facing-derogatory-comments-and-gender-discrimination-4485943">ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोय, औरन को शीतल करे आपहुं शीतल होए</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">बंगाल हिंसा में सबसे आगे</h2>
<p style="text-align: justify;">विधानसभा चुनावों के नतीजे के बाद जो बंगाल में हुआ, उसी के वापस होने की आशंका जताई जा रही है. लेकिन अगर बंगाल के वोटरों की माने तो सिर्फ़ आशंका नहीं, उन्हे पूरा भरोसा है कि जिस भी इलाके में वो रहते हैं, वहां जिस पार्टी का दबदबा है, अगर उसे वोट नही दिया तो उन्हे इसका अंजाम भुगतना होगा. क्या भाजपा, क्या तृणमूल और क्या वामपंथी. बंगाल के लोगों का कहना है कि पार्टियों के सिर्फ़ नाम अलग हैं, तरीका नहीं.&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">बंगाल के लोगों को पहले वामपंथ के चुनावी बाहुबल का सामना करना पड़ता था. अब क्योंकि पूरी लड़ाई तृणमूल और भाजपा के बीच की है और लोगों को इन दोनो पार्टियों के बाहुबल का सामना करना पड़ता है. चुनावी हिंसा का डर सिर्फ़ वोटरों को ही नहीं होता. ये डर राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भी होता है.</p>
<p style="text-align: justify;">एक बार जब चुनाव के नतीजे आ जाए तब उन लोगों के खिलाफ़ दमन की प्रक्रिया शुरू होती है जिन्हे कोई भी पार्टी उनके राजनीतिक नुकसान के लिए ज़िम्मेदार मानती है. और इन सबमें सबसे बड़ी भुगतभोगी होती हैं महिलाएं.</p>
<p style="text-align: justify;">चाहे महिला कार्यकर्ता (Female Karyakarta) हों या महिला वोटर (Female Voters), उन्हे राजनीतिक दलों की हिंसा को झेलना पड़ता है. पिछले विधानसभा चुनाव में जो हुआ वो हम सबके सामने है ही. आपको शायद लगे कि ये चुनावी हिंसा बंगाल के दूर दराज के इलाकों में होती होगी. पर ऐसा नहीं है.</p>
<p style="text-align: justify;">कोलकाता से महज तीस किलोमीटर दूर के गांवों में अगर आप जाकर देखेंगे तो यही हालात हैं. वहां की महिलाएं आपको बताएंगी कि किस तरह से चुनावी दमन का सबसे ज़्यादा शिकार वो होती हैं. जिस तरह से वो इन सबके बारे में बताती हैं, ये देख कर सबसे ज़्यादा दुख होता है कि किस तरह से इसे उन्होंने अपनी नियति मान लिया है.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/experts-thoughts-editorial/kangana-ranaut-recently-got-ticket-from-mandi-himachal-pradesh-from-bjp-it-will-be-interesting-to-see-her-reign-in-politics-4418090">लाइट्स, कैमरा और इलेक्शन !</a></p>
<h2>और भी जगह हाल सामान</h2>
<p style="text-align: justify;">बंगाल अकेली ऐसी जगह नही है. 1970-90 के दशक में भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों में चुनावी हिंसा की घटनाएं आम बात हो गई थीं. 1990 से 2004 के बीच में बिहार में चुनावी हिंसा अपने चरम पर थी. उत्तर प्रदेश में भी स्थिति कुछ अलग नहीं थी. लोकसभा (Lok Sabha), विधानसभा (Vidhan Sabha) की तो बात ही क्या, ग्राम पंचायत के चुनाव भी हिंसक घटनाओं से पटे होते थे. और बंगाल की ही तरह बाकी सभी राज्यों में भी सबसे ज्यादा अत्याचार महिलाओं पर ही हुआ है. वर्तमान में स्थिति में काफ़ी बदलाव आया है ये सच है, लेकिन अब भी ऐसे राज्य हैं जहां पर चुनाव अपने साथ राजनीतिक दमन लेकर आते हैं और आधी आबादी को अपने ज़ुल्म के का शिकार बनाते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/accepting-the-challenge-by-shg-women-and-join-the-filed-of-voting-awareness-in-indore-4553098">Challenge मान कर महिलाएं मतदान जागरूकता के मैदान में</a></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मैत्री </dc:creator><pubDate>Thu, 16 May 2024 16:31:11 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/experts-thoughts-editorial/women-pay-the-price-of-any-riot-or-issue-created-during-elections-4580203]]></guid><category><![CDATA[एक्सपर्ट विचार]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8cKHOLf7eXmehgWcUaaN.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/8cKHOLf7eXmehgWcUaaN.png"/></item><item><title><![CDATA[1951 से 2019 तक के लोकसभा चुनावों में महिला मतदाता ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/female-voters-in-lok-sabha-elections-from-1951-to-2019-4550289</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0eM79hoioUdLuVOVgk2A.png"><p style="text-align: justify;">लोकतंत्र में नंबर एक शक्तिशाली भूमिका निभाते है. भारत 18वीं लोकसभा चुनाव के लिए मतदान कर रहा है, आज़ादी के बाद 1951 के पहले लोकसभा चुनाव (LokSabha Elections) से लेकर 2024 तक कई ऐसे नंबर और डेटा सामने मौजूद है जो लोकतंत्र की कहानी सुनाते है.</p>
<p style="text-align: justify;">स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक 1951-52 में अपने पहले आम चुनाव से सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (universal adult franchise) का उपयोग रही है. यह वास्तव में ऐतिहासिक है कि भारत में सभी वयस्क महिला राष्ट्र के जन्म के बाद से ही वोट देने के लिए पात्र बनी. ब्रिटेन और अमेरिका जैसे दुनिया के अधिकांश विकसित और शक्तिशाली देशों में, महिलाओं के लिए मताधिकार एक लंबी, थकाऊ और संघर्षशील प्रक्रिया के बाद हासिल किया गया.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/experts-thoughts-editorial/women-got-their-voting-rights-after-lots-of-struggle-and-movements-they-must-use-it-with-full-responsibility-4003682">वोट का अधिकार सबसे ज़रूरी अधिकार !</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">1990 के दशक तक महिलाओं का मतदान पुरुषों से काफी कम</h2>
<p style="text-align: justify;">महिलाओं के मतदान अधिकार (Women Voting Rights) की उल्लेखनीय उपलब्धि के बावजूद, 1990 के दशक तक महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों की तुलना में काफी कम रहा.&nbsp;हालांकि यह प्रवृत्ति हाल के वर्षों में एक बड़े बदलाव के दौर से गुजरी है. पहले और दूसरे आम चुनाव में महिला मतदाता (Female Voters) का डेटा मौजूद नहीं है क्योंकि लिंग आधारित मतदान डेटा चुनाव आयोग ने 1962 के बाद से ही रखना शुरू किया.</p>
<p style="text-align: justify;">पहले आम चुनाव की रिपोर्ट्स बताती है की कैसे करीब 40 लाख महिलाओं ने वोटर लिस्ट में अपने नाम फलाना ' की पत्नी ' या फलाना ' की बेटी ' से दर्ज़ कराये, ना की खुद के नाम से. भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) सुकुमार सेन (Sukumar Sen)इस से खुश नहीं थे. चुनाव आयोग (Election Commission) ने जागरूकता कार्यक्रम चला कर महिलाओं को अपने नाम मतदाता सूची में लिखवाने को प्रेरित किया.</p>
<p style="text-align: justify;">इन सबके बावजूद पहले आम चुनाव के लिए भारत में लगभग 80 मिलियन महिला मतदाताओं में से, लगभग 2.8 मिलियन अंततः अपने उचित नाम का खुलासा करने में विफल रहीं, और उन्हें मतदाता सूची से बाहर करना पड़ा.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/women-participated-in-voting-more-than-men-in-karnataka-4547783">कर्नाटक में पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने किया अधिक मतदान</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">2019 में महिलाओं ने पुरुषों के मुक़ाबले 1.7% ज़्यादा किया वोट</h2>
<p style="text-align: justify;">1962 और 1967 के चुनावों में महिला मतदान कम रहा. 1962 में 46.6% महिला मतदान हुआ जो की 1967 में बढ़कर 55.5% तक पहुंचा. लेकिन 1971 के चुनाव में यह गिरकर 49.1% पर रहा. इन सालों में पुरुष और महिला मतदान में 11 से 17% का अंतर रहा. 1991 के चुनाव से यह अंतर लगातार कम हुआ, 2014 के 16वें आम चुनाव में यह अंतर घटकर 1.4% पर आया जबकि 2019 के आम चुनाव में महिलाओं ने 1.7% से पुरुषों के मुक़ाबले ज़्यादा वोट किया. जहां 2009 में 64 लोकसभा सीटों पर <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/women-voters-account-for-over-50-percent-in-2023-vidhansabha-elections-1518057">महिलाओं ने पुरुषों से ज़्यादा वोटिंग की</a>&nbsp;वही 2019 में बढ़कर 143 हो गयी.</p>
<p style="text-align: justify;"><a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/the-share-of-women-voters-in-the-2024-elections-is-the-highest-in-the-last-two-decades-4468751">महिला वोटर की संख्या बढ़ने के प्रमुख कारण</a> शिक्षा, सोशल मीडिया, कम्युनिकेशन है. इन सब कारणों से महिलाओं की राजनीतिक चेतना बढ़ी है. महिला वोटर टर्नआउट तो बढ़ा है लेकिन राजनैतिक नीति निर्धारण, प्रचार और सभाओं में उनकी संख्या अभी भी कम है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">श्रेया वशिष्ठ</dc:creator><pubDate>Fri, 10 May 2024 15:55:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/female-voters-in-lok-sabha-elections-from-1951-to-2019-4550289]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0eM79hoioUdLuVOVgk2A.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/0eM79hoioUdLuVOVgk2A.png"/></item><item><title><![CDATA[कर्नाटक में पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने किया अधिक मतदान ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/women-participated-in-voting-more-than-men-in-karnataka-4547783</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/BHQzfnk6ooRxFHCK4GJg.png"><p style="text-align: justify;">कर्नाटक (Karnataka) में 26 अप्रैल को 14 सीटों के लिए हुए लोकसभा चुनाव (LokSabha Elections 2024) के दूसरे चरण में पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने अधिक संख्या में मतदान (vote) किया. हालांकि यह मामूली उछाल है लेकिन महत्वपूर्ण संकेत है. चुनाव विशेषज्ञों और चुनाव अधिकारियों का कहना है कि <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/the-share-of-women-voters-in-the-2024-elections-is-the-highest-in-the-last-two-decades-4468751">महिला मतदाताओं</a> (Female Voters) में वृद्धि का रुझान जारी है, जिससे पता चलता है कि वे अपने और अपने परिवार के लिए निर्णय ले रही है.</p>
<h2 style="text-align: justify;">बेंगलुरु में किया अधिक महिलाओं ने vote</h2>
<p style="text-align: justify;">भारत निर्वाचन आयोग द्वारा साझा किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पुरुषों का मतदान प्रतिशत 69.48 था, जबकि महिलाओं का मतदान प्रतिशत 69.65 था. कुल 1,00,16,921 पुरुषों ने मतदान किया, जबकि 1,00,20,796 महिलाओं ने मतदान किया, यानी 3,875 मतदाताओं का अंतर. इसके अलावा, बेंगलुरु (Bengaluru) के सभी चार निर्वाचन क्षेत्रों - उत्तर, मध्य, दक्षिण और ग्रामीण में अधिक महिलाओं ने मतदान किया.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/women-dominance-increased-in-cg-impact-will-be-reflecte-in-elections-4440817">छत्तीसगढ़ में बढ़ा महिलाओं का दबदबा, दिखेगा चुनाव में असर</a></p>
<p style="text-align: justify;">2019 के चुनावों के दौरान, पुरुषों का प्रतिशत महिलाओं की तुलना में थोड़ा अधिक था. यह पुरुषों के लिए 69.55% और महिलाओं के लिए 67.65% था. महिला मतदाताओं की बढ़ती वोटिंग उनके सशक्तिकरण का विस्तार है. वैसे भी महिलाएं पुरुषों की तुलना में अलग तरीके से वोट करती है. अध्ययनों से पता चला है कि वे अब पुरुषों से प्रभावित नहीं है, उनमें अधिक जागरूकता है और वे अपने और अपने परिवार के कल्याण के लिए निर्णय ले रही है. <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/more-than-40-lakh-shg-women-took-oath-to-participate-in-2024-lok-sabha-elections-4492983">महिला सशक्तिकरण</a>, बेहतर शिक्षा और बढ़ती जागरूकता के कारण महिला मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है.</p>
<p style="text-align: justify;">चुनाव आयोग (Election Commission of India ECI) के आंकड़ों के अनुसार, <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/only-8-percent-women-candidates-contested-in-the-first-two-phases-of-the-loksabha-elections-2024-4544430">लोकसभा चुनाव के चरण-1 और चरण-2</a> में असम, जम्मू और कश्मीर, लक्षद्वीप, मणिपुर, मेघालय, पुडुचेरी, नागालैंड, तमिलनाडु, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, केरल और कर्नाटक में बड़ी संख्या में महिलाएं मतदान करने पहुंचीं है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">शिवरंजिनी देवांगन</dc:creator><pubDate>Wed, 08 May 2024 12:05:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/women-participated-in-voting-more-than-men-in-karnataka-4547783]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/BHQzfnk6ooRxFHCK4GJg.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/BHQzfnk6ooRxFHCK4GJg.png"/></item><item><title><![CDATA[ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोय, औरन को शीतल करे आपहुं शीतल होए ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/women-voters-are-so-important-in-the-2024-lok-sabha-elections-that-ignoring-them-can-cause-huge-loss-to-any-political-party-despite-all-this-like-in-past-years-women-politicians-are-still-facing-derogatory-comments-and-gender-discrimination-4485943</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/hINWkHeGEwYb1HgBjZCS.png"><p style="text-align: justify;">भारत में चुनाव (Elections 2024) सिर्फ चुनावी प्रक्रिया ना होकर लोकतंत्र का उत्सव है. लोकसभा चुनाव 2024 में राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय पार्टियों तक, हर कोई जीत हासिल करने के लिए कमर कस रहा है. 2024 लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) में महिला वोटर (Female Voters) इतने महत्वपूर्ण है की उनकी अनदेखी किसी भी राजनीतिक दल को भारी नुकसान पहुंचा सकती है. इस सबके बावजूद महिला राजनेताओं (Indian Female Politicians) को बीते सालों की तरह, आज भी अपमानजनक टिप्पणियों और लैंगिक भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है. चूंकि राजनीति (Politics) अब भी पुरुष-प्रधान है, इसलिए महिला नेताओं को अक्सर उनके पुरुष सहयोगियों से ऐसे हमलों का सामना करना पड़ता है.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-woman-using-attractive-ways-to-bring-change-and-motivate-other-people-for-voting-and-selecting-the-government-4477996">दूल्हा बन घोड़े पर बैठी और बारात के साथ वोट अपील</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">चुनावों से पहले तेज़ होते हमले</h2>
<p style="text-align: justify;">एक पुरुष नेता द्वारा महिला नेता के खिलाफ अभद्र टिप्पणी का सबसे ताजा मामला कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला का है जिन्होंने भाजपा सांसद और उम्मीदवार हेमा मालिनी के बारे में कहा - '' लोग अपने विधायकों/सांसदों को क्यों चुनते है? ताकि वे (विधायक/सांसद) जनता की आवाज उठा सकें. यह हेमा मालिनी की तरह नहीं है, जिन्हें चाटने के लिए चुना गया था ''. उन्होंने यह भी कहा था कि - ' हेमा मालिनी का सम्मान इसलिए किया जाता है क्योंकि उन्होंने धर्मेंद्र जी से शादी की है और वह हमारी बहू है. इस तरह की टिप्पणी और भाषा के लिए चुनाव आयोग ने भी रणदीप सुरजेवाला को शोकॉज नोटिस जारी किया है.</p>
<p style="text-align: justify;">2022 में, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर कांग्रेस नेता अजय राय ने यह कहकर हमला किया था कि - "वह (ईरानी) केवल लटके-झटके दिखाने के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्र अमेठी में आती है." पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी कई बार लैंगिक भेदभाव वाली टिप्पणियों का सामना करना पड़ा है. हाल ही में भाजपा के दिलीप घोष ने उनके माता-पिता के बारे में सवाल उठाए थे. बिहार में, लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी को तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने "घूंघट के पीछे रहने" के लिए कहा था.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/the-share-of-women-voters-in-the-2024-elections-is-the-highest-in-the-last-two-decades-4468751">2024 चुनाव - पिछले दो दशकों में women voters की हिस्सेदारी सबसे अधिक!</a></p>
<p style="text-align: justify;">भाजपा नेता विनय कटियार ने कथित तौर पर पूछा था कि क्या कांग्रेस नेता सोनिया गांधी राहुल गांधी को सबूत दे पाएंगी कि उनके पिता राजीव गांधी थे. कटियार ने प्रियंका गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा था कि "राजनीति में पहले से ही कई खूबसूरत स्टार प्रचारक मौजूद है."</p>
<p style="text-align: justify;">यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी 2016 में भाजपा के दयाशंकर सिंह द्वारा वेश्या से भी बदतर कहे जाने जैसी घिनौनी टिप्पणी का निशाना बनीं, जिन्होंने आरोप लगाया कि दलित नेता ने पैसे के बदले टिकट बेचे. ऐसे ही कांग्रेस के कर्नाटक विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा ने भाजपा की गायत्री सिद्धेश्वरा के बारे में कहा था कि - "वह केवल खाना बनाने के लायक है." अभिनेता से नेता बनीं उर्मिला मातोंडकर लैंगिक टिप्पणी का निशाना बन गईं जब भाजपा के गोपाल शेट्टी ने कहा कि "उन्हें उनके लुक के कारण टिकट दिया गया है".</p>
<p style="text-align: justify;">अगस्त 2019 में उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक रैली में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने उनकी पार्टी की पुरानी साथी और बाद में भाजपा में शामिल महिला नेत्री जयाप्रदा के लिए कहा, &ldquo;मैं उन्हें (जया प्रदा) को रामपुर लाया. तुम गवाह हो कि मैंने किसी को उसके शरीर को छूने नहीं दिया. आपको उसका असली चेहरा पहचानने में 17 साल लग गए लेकिन मुझे 17 दिन में पता चल गया कि वह खाकी अंडरवियर पहनती है. "</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/women-from-self-help-group-in-raisen-and-spreading-awareness-towards-voting-and-elections-4477681">मतदान का महत्व बताने घर से निकली महिलाएं</a></p>
<h2 style="text-align: justify;">भाषा से प्रभावित होता देश और समाज</h2>
<p style="text-align: justify;">किसी महिला के शरीर पर टिप्पणी करके उसे नीचा दिखाना एक आम राजनीतिक और सामाजिक मानसिकता है. महिला नेताओं के प्रति का उपयोग की जाने वाली भाषा से केवल उनके व्यक्तित्व को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इससे समाज में महिलाओं के प्रति सामाजिक और सांस्कृतिक सम्मान की कमी भी आती है. भारतीय राजनीतिक दलों में महिला नेताओं के प्रति अपमानजनक भाषा का उपयोग किसी भी विचारशीलता या राजनीतिक प्रतिष्ठा के लिए लाभदायक नहीं है. देश के लोकतंत्र में, राजनीतिक नेताओं को सार्वजनिक दृष्टिकोण से सम्मानित होना चाहिए, चाहे वे पुरुष हों या महिलाएं. लेकिन अपमानजनक टिप्पणियों के माध्यम से महिला नेताओं को निशाना बनाना न केवल उनके व्यक्तित्व की अपमान है, बल्कि यह लोकतंत्र को भी घातक रूप में प्रभावित करता है.</p>
<p style="text-align: justify;">शिक्षा, सामाजिक व्यवस्था और जागरूकता की कमी के कारण पुरुष श्रेष्ठता (male superiority in politcs) की विकृत धारणा पैदा होती है. हमारे पास उदार राजनीतिक संरचना है लेकिन उदार समाज का विकास एक सतत प्रक्रिया है, जिसके पूर्ण होने में समय लगेगा.</p>
<p style="text-align: justify;">यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/women-of-shg-will-challenge-with-ballot-instead-of-bullets-in-naxal-area-in-balaghat-4479361">बुलेट को बैलेट से टक्कर देतीं महिलाएं</a></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">शिवरंजिनी देवांगन</dc:creator><pubDate>Wed, 17 Apr 2024 14:30:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/women-voters-are-so-important-in-the-2024-lok-sabha-elections-that-ignoring-them-can-cause-huge-loss-to-any-political-party-despite-all-this-like-in-past-years-women-politicians-are-still-facing-derogatory-comments-and-gender-discrimination-4485943]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/hINWkHeGEwYb1HgBjZCS.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/hINWkHeGEwYb1HgBjZCS.png"/></item><item><title><![CDATA[2024 चुनाव - पिछले दो दशकों में women voters की हिस्सेदारी सबसे अधिक! ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/the-share-of-women-voters-in-the-2024-elections-is-the-highest-in-the-last-two-decades-4468751</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/DAYncqc2SHF2J1xocnvv.png"><p style="text-align: justify;"><span>2024 के चुनाव (2024 Elections) देश की दिशा और दशा के लिए महत्वपूर्ण है . साथ ही कई मायनों में अद्वितीय भी है, खासकर मतदाता की सोच और संख्या के आधार पर. एक रिपोर्ट के अनुसार आने वाले लोकसभा चुनावों में पिछले दो दशकों में <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/women-dominance-increased-in-cg-impact-will-be-reflecte-in-elections-4440817">महिला मतदाताओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक होगी</a>. साथ ही 2019 के लोकसभा चुनावों (LokSabha Elections) में 11 राज्यों में पुरुषों की तुलना में महिला मतदान दर अधिक देखी गई. 2024 के आगामी आम चुनावों में महिलाओं की भूमिका और भागीदारी को यह बखूबी प्रदर्शित करता है.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-played-cricket-in-saree-and-campaigned-for-election-voting-in-mandla-4451664">साड़ी में महिलाओं ने खेला क्रिकेट, वोटिंग के लिए चलाया अभियान</a></span></p>
<h2 style="text-align: justify;"><span>Quantum Hub की रिपोर्ट में महिला मतदाता की हिस्सेदारी</span></h2>
<p style="text-align: justify;"><span>क्वांटम हब (Quantum Hub), नई दिल्ली स्थित नीति अनुसंधान और परामर्श फर्म है, जिसकी रिपोर्ट से पता चला है कि केरल में पुरुष मतदाताओं की तुलना में सबसे अधिक महिलाएं है, इसके बाद गोवा, मिजोरम, मणिपुर और तमिलनाडु है. इसके विपरीत हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार और उत्तराखंड जैसे राज्यों में महिला मतदाताओं&nbsp;(Female Voters) की हिस्सेदारी सबसे कम है.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>2024 के चुनावों में महिला मतदाताओं (Female Voters) की हिस्सेदारी भी पिछले दो दशकों में सबसे अधिक 48.6 % है. 1 जनवरी 2024 तक महिला मतदाताओं की कुल संख्या 47.1 करोड़ है. &nbsp;2019 में, पूर्वोत्तर राज्यों में महिला मतदाताओं के बीच सबसे अधिक मतदान प्रतिशत हुआ, जबकि जम्मू और कश्मीर एकमात्र राज्य था जहां महिलाओं के बीच 50% से कम मतदान हुआ.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>2019 के बाद से उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार में नई महिला मतदाताओं (Female Voters) की संख्या सबसे अधिक बढ़ी है. इस तरह मतदाता के रूप में महिलाएं पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है. यह तथ्य सभी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों के चुनावी वादों में भी दिखती है. &nbsp;यह भी पता चला है कि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार , 2019 के बाद से सबसे बड़ी संख्या में महिला मतदाताओं को जोड़ा है.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/60-percent-female-voters-in-andhra-pradesh-have-joined-shgs-2398653">Andhra Pradesh की 60% female voters जुड़ी SHGs के साथ</a></span><span></span></p>
<h2 style="text-align: justify;"><span>राजनीतिक भागीदारी की और बढ़ते कदम</span></h2>
<p style="text-align: justify;"><span>2024 में ग्यारह राज्यों में पुरुष मतदाताओं की तुलना में अधिक महिलाएं होंगी, जिनमें केरल 51% के साथ अग्रणी है, इसके बाद गोवा, मिजोरम, मणिपुर और तमिलनाडु है. इस रिपोर्ट ने महिला मतदाताओं के बढ़ते महत्व को उजागर किया है. महिला सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर प्रगति के लिए राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व महत्वपूर्ण है. रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों जैसे सेवा और विदेशी क्षेत्रों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व क्रमशः 3.5 % और 11 % पर काफी कम है.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span>यह भी पढ़ें - <a href="https://ravivarvichar.in/experts-thoughts-editorial/mp-election-voting-female-voters-and-shgs-influencing-results-1756828">क्या MP सत्ता का रास्ता महिला वोटरों और SHG के गलियारे से गुज़रेगा?</a></span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">निष्ठा गर्ग</dc:creator><pubDate>Sat, 06 Apr 2024 13:30:38 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/the-share-of-women-voters-in-the-2024-elections-is-the-highest-in-the-last-two-decades-4468751]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/DAYncqc2SHF2J1xocnvv.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/DAYncqc2SHF2J1xocnvv.png"/></item></channel></rss>