<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ माई पैड माई राइट]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/maaii-paidd-maaii-raaitt</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/maaii-paidd-maaii-raaitt" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 04 Jul 2023 17:41:31 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[पीरियड्स को लेकर जागरूकता बिखेरता 'अल-क़रिया' ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/al-qaria-spreading-awareness-towards-menstrual-hygiene-and-products-in-uttar-pradesh</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6FX0KU24IZ3DPz7Xcflj.jpg"><p dir="ltr"><span>"मैंने कभी भी बचपन में पीरियड के वक़्त पड़ नहीं पहना क्यूंकि मुझे स्टोर से पैड खरीदने में शर्म आती थी," ये शब्द है, एक महिला के जो जुड़ी है, अल-क़रिया स्वयं सहायता समूह (SHG) की एक सदस्या है. <strong>अल-क़रिया नारूपुरा</strong> में शुरू किया गया एक Self Help Group है, जो महिलाओं को मासिक धर्म (पीरियड्स) के मिथ्यों के बारे में जागरूक करता है और महिलाओं को सशक्त बनाने का सराहनीय काम कर रहा है.</span></p>
<p dir="ltr"><span>इस SHG को शुरू किया <strong>रिदवाना अख्तर</strong> ने, जिन्होंने ठान रखा है कि वे नारूपुरा की हर महिला को इतना सशक्त बना देंगी कि फिर आगे से कभी भी उन्हें पीरियड्स के नाम पर शर्माना नहीं पड़ेगा.<strong> रिदवाना ने नारुपुरा में महिलाओं के बीच मासिक धर्म स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता और ज्ञान</strong> की कमी देखने के बाद से अपने समुदाय में एक परिवर्तनकारी आंदोलन शुरू किया. मार्च 2023 में, उनकी कड़ी मेहनत सफल हुई और नारुपुरा में पहली बार सेनेटरी पैड विनिर्माण इकाई खोली गई.</span></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="Menstrual Health Awareness" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/o7v6XA1CmusCsXZoUlqh.png" style="width: 580px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: AMNA</em></span></p>
<p dir="ltr"><span>रीदवाना एक बुटीक के मालिक थी और और उर्दू में दर्शनशास्त्र में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने समुदाय की महिलाओं के लिए सकारात्मक बदलाव लाना चाहती थीं. 2021 में, उन्हें नेनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट के "<strong>माई पैड माई राइट</strong>" कार्यक्रम के बारे में पता चला। बस फिर उन्होंने ठान लिया कि ये ही उंनका लक्ष्य है. </span></p>
<p dir="ltr"><span>इस कार्यक्रम की मदद से उन्हें मुफ्त सैनिटरी पैड बनाने वाली असेंबली मशीनें, कच्चे माल, प्रशिक्षण सामग्री और वित्तीय सहायता मिली. अख़्तर ने एक SHG की शुरुआत की और उसका नाम रखा अल-क़रिया SHG. अख्तर ने गांव में महिलाओं और युवा लड़कियों को मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में शिक्षित करने की जिम्मेदारी ली. उन्होंने मिथकों को दूर करने और व्यक्तिगत स्वच्छता के महत्व, मासिक धर्म उत्पादों का उपयोग करने और मासिक धर्म से जुड़ी गलतफैमियों को दूर करने के लिए कम्पैनस भी आयोजित किए.</span></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="Menstrual Hygiene" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/522x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/H8ra4NzYTSxOXFiYXYYa.jpg" style="width: 522px;" class="center"></span></p>
<p dir="ltr"><em><span style="font-size: 8pt;">Image Credits: iStock</span></em></p>
<p dir="ltr"><span>रीदवाना अख्तर कहती है- "<em>अब समय आ गया है कि हम पीरियड्स से जुड़ी जंजीरों से मुक्त हो जाएं और एक नई सोच को अपनाएं - जो खुली बातचीत, ज्ञान और सशक्तिकरण का समर्थक हो.</em>" अल-क़रिया के मासिक धर्म उत्पाद, जिन्हें 'निस्सा' के नाम से जाना जाता है, आराम और कॉलिटी को बढ़ावा देते हैं. यह सारे प्रोडक्ट्स सिर्फ पीरियड्स में महिलाओं के लिए  सुविधा का ही काम नहीं कर रहे, बल्कि उनकी विचार धरा को भी बदलने में एक बहुत बड़ा योगदान दे रहे है.</span></p>
<p><span>समाज में महिलाओं के लिए आज भी मेडिकल स्टोर से जाकर पैड खरीदना एक बहुत बड़ी समस्या है, गांव तो छोड़ ही दो, शहरों में भी लड़कियां आस पास किसी के न होने पर ही पैड खरीदती है. बचपन से ही उनके दिमाग में यह चीज़ बिठा दी गयी है कि पीरियड्स कुछ ऐसा है जिसे हमें सबके सामने नहीं बताना. इन्ही सब बातों के कारण लड़कियां और महिलाएं कभी खुल कर बात नहीं कर पाती और अकेली परेशान हो जाती है. लेकिन रीदवाना की पहल एक कदम है, महिलाओं को सशक्त और पीरियड्स को लेकर बोल्ड बनाने की ओर.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Tue, 04 Jul 2023 17:41:31 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/al-qaria-spreading-awareness-towards-menstrual-hygiene-and-products-in-uttar-pradesh]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6FX0KU24IZ3DPz7Xcflj.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6FX0KU24IZ3DPz7Xcflj.jpg"/></item><item><title><![CDATA[व्हिस्पर नहीं ..... अब ज़ोर से बात होगी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-improving-menstrual-hygiene-conditions-in-rural-inda</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/bX2qEFCHVIzaCfMqA47R.png"><p>शश्श्श्श्श्शश्श्श्श्शश... ज़रा धीरे बोलो, पेड का नाम इतनी ज़ोर से नहीं लेते. जिस देश में सैनिटरी पेड के ब्रांड का नाम ही व्हिस्पर हो वहां  ऐसी ही बातें होंगी. आज जब हम स्वच्छता पर इतना ज़ोर दे रहे हैं वहीं महिलाओं की मासिक धर्म स्वच्छता पर बात कानों में दबी आवाज़ में ही होती है. आज कुछ महिलाएं ये चुप्पी तोड़ रही हैं और पीरियड्स जैसी नेचुरल प्रक्रिया पर खुलकर बात कर बेहतर स्वास्थ्य के लिए क़दम उठा रही हैं. वैसे तो आज पिछले 50 सालों की तुलना में महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति बेहतर है पर हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में आज भी स्त्री रोगों के 70% मामले खराब मासिक धर्म स्वच्छता के कारण होते हैं. भारत में 88% ग्रामीण महिलाएं सैनिटरी पैड की जगह कपड़े, राख, घास या रेत जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करती हैं.</p>
<p dir="ltr">आज स्वसहायता समूह महिलाओं की आर्थिक आज़ादी के लिए तो चर्चित हैं हीं पर साथ ही ये समूह महिलाओं की परेशानियों पर भी ग़ौर कर उनका हल निकालने में सफ़ल है. आज कई स्वसहायता समूह सेनेटरी पैड बना रहे हैं जिससे हर तबके की महिलाओं और लड़कियों तक,  ख़ासकर ग्रामीण इलाकों में, मासिक धर्म उत्पादों तक आसानी से पहुंच हो पाए.</p>
<p dir="ltr">राजस्थान में जननी सेवा संस्थान स्वसहायता समूहों के साथ ग्रामीण इलाकों में कम लागत वाले सैनिटरी पैड का उत्पादन और वितरण कर रहे हैं. मध्य प्रदेश में महिला उमंग प्रोड्यूसर्स कंपनी एक SHG फेडरेशन द्वारा चलाई जाती है और नेचर फ्रेंडली सैनिटरी पैड, मासिक धर्म कप और कपड़े के पैड सहित कई मासिक धर्म स्वच्छता उत्पाद बनाती है. महाराष्ट्र में सखी सोशल एंटरप्राइज नेटवर्क स्वसहायता समूहों के साथ शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी पैड बनाते और बांटते हैं. आस पास के SHG को ये ट्रेनिंग भी दे रहे हैं. उत्तर प्रदेश में किशोरी विकास संगठन किशोरियों और युवतियों के साथ मिलकर ग्रामीण क्षेत्रों में कम कीमत के सैनिटरी पैड बना रहे हैं और  मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन पर प्रशिक्षण भी दे रहे हैं. </p>
<p dir="ltr">महिलाओं की सेहत और मासिक धर्म स्वच्छता को एक क़दम आगे बढ़ाया है नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डिवेलपमेंट (NABARD) के 'माई पैड माई राइट' (MPMR) प्रोजेक्ट ने. दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के कोकेरनाग क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के बीच मासिक धर्म स्वच्छता में सुधार के लिए इस प्रोजेक्ट को शुरू किया गया. यह कश्मीर क्षेत्र में इस तरह की पहली परियोजना है और इसका उद्घाटन NABARD के सीजीएम डॉ ऐ के सूद के साथ अनंतनाग के उपायुक्त (DC) डॉ. बशारत कयूम ने किया. इस प्रोजेक्ट में SHG की महिलाएं काम कर रही हैं जिससे उन्हें रोज़गार मिला और मासिक धर्म स्वच्छता पर समझ बड़ी.</p>
<p dir="ltr">यह पहल उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले के शाहगुंड गांव की स्वसहायता समूह ने भी की. इनका साथ दिया JKRLM UMEED ने. कुछ ही महीनों में महिलाओं ने 'राहत' के ब्रांड नाम के तहत बड़ी संख्या में सैनिटरी नैपकिन बनाने शुरू किये. आज संस्थाएं और सरकार महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने में मदद कर रही हैं. आज हमे ज़रुरत है कि सब साथ मिलकर महिलाओं के स्वास्थ्य के बारे में भी सोचें और मासिक धर्म स्वच्छता की इस पहल को हर कस्बे, हर गांव के कौने तक लेकर जायें. </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Mon, 13 Mar 2023 18:20:39 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-improving-menstrual-hygiene-conditions-in-rural-inda]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/bX2qEFCHVIzaCfMqA47R.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/bX2qEFCHVIzaCfMqA47R.png"/></item></channel></rss>