<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ माइक्रोलेंडिंग]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/maaikrolendding</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/maaikrolendding" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 13 Apr 2023 13:24:45 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[रुपये पैसे संभालने में महिलाएं खराब नहीं होती ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/women-are-good-at-managing-financial-matters</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/D3VtcypJY1Aq1nMRq2hS.jpg"><p>कुछ लोग गणित में अच्छे होते है कुछ लोग इंग्लिश में, ऐसे ही कुछ लोग वित्तीय मामलों से निपटने में अच्छे या बुरे हो सकते हैं. इसमें जेंडर का कोई रोल नहीं है. लेकिन दुनियाभर की सामाजिक व्यवस्था में ऐसा माना गया है कि महिलाएं आर्थिक विषयों को समझने में कमज़ोर होती हैं. पितृसत्तात्मकता को मज़बूत करने के लिए ही यह धारणा बना दी गई कि पैसे संभालने में महिलाएं खराब होती हैं. यह मिथक इसलिए भी मौजूद है क्योंकि महिलाओं को गणित में कमज़ोर माना जाता है और संख्याओं से निपटने के लिए उन्हें पैसे के मामलों को संभालना मुश्किल लगता है. वैसे भी वित्तीय और आर्थिक मामले ; फैक्ट और फिगर से संबंधित हैं जबकि ऐसा माना गया है कि महिलाएं इमोशन से ज़्यादा काम लेती हैं. </p>
<p>लोग अक्सर इस तथ्य की ओर इशारा करते हैं कि कम महिलाएं वित्त सेक्टर में काम कर रही हैं. यह भी एक तथ्य है कि कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने वाली कई महिलाएं भी स्वीकार करती हैं कि उनके व्यक्तिगत आर्थिक मसलों और मामलों को उनके जीवन में पुरुषों द्वारा नियंत्रित किया जाता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि महिलाएं पैसों के मामलों को हैंडल नहीं कर सकतीं. कई मामलों में, महिलाएं अपने पति के लिए वित्तीय मुद्दों को सिर्फ इसलिए छोड़ देती हैं क्योंकि उनकी ज़िन्दगी में वैसे ही इतने काम होते हैं, जैसे घर, बच्चों, और पारिवारिक ज़िम्मेदारियां. कई मामलों में, महिलाएं अपने परिवार में केवल पुरुषों को ही वित्त संभालते हुए देखकर बड़ी हुई हैं और इसलिए इसमें शामिल न होना उन्हें कुछ अजीब नहीं लगता. </p>
<p>सच तो यह है कि महिलाएं पैसे को बहुत अच्छे से हैंडल कर सकती हैं. एक अच्छा उदाहरण जिसे कई लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं, वह यह कि आम तौर पर महिलाएं ही परिवार का मासिक बजट संभालती हैं. इसका अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि पूरे दिन के खर्चों को संभालने के लिए पर्याप्त रुपये पैसे हैं, आपात स्थिति के लिए रुपये अलग रखना, और यहां तक कि बच्चे की शिक्षा या विवाह जैसे भविष्य के खर्चों के लिए बचत करना. अगर महिलाएं पैसे के मामलों में इतनी ख़राब होतीं तो क्या वे यह सब कर पातीं? सच्चाई यह है कि परिवार के बजट को मैनेज करना इसलिए महत्वपूर्ण नहीं माना जाता है क्योंकि यह घर के काम में शामिल होता है जिसे कभी कोई महत्व नहीं मिला क्योंकि इसे एक महिला विषय माना जाता है.</p>
<p>एक अन्य उदाहरण माइक्रोलेंडिंग में शामिल महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों का है. SHG भारतीय आर्थिक क्रांति और आत्मनिर्भरता का बड़ा कारगर अस्त्र है जिसे पूरी तरह महिलाएं और वह भी ग्रामीण महिलाएं संभाल रही हैं.  बुक कीपिंग, अकाउंट मैनेजमेंट, ब्याज, सब कुछ समूह में महिलाएं बखूबी संभालती हैं. इन महिलाओं की आर्थिक समझ का प्रमाण है 14 लाख करोड़ का वित्तीय फ्लो जो भारत में इन महिलाओं ने किया. साथ ही SHG महिलाएं अपना ऋण समय पर चुकाती हैं. स्वयं सहायता समूह का कुल एन पी ए लगभग 1.9 % है.  यह भी देखा गया है कि महिलाएं लाभ कमाने के अवसरों की पहचान करने में बहुत अच्छी होती हैं जिसके लिए उन्हें इन सूक्ष्म ऋणों की आवश्यकता होती है.</p>
<p>समाज को लिंग के लेंस से देखने के बजाय क्षमताओं के लेंस से देखना ज़रूरी है. इस आर्थिक आज़ादी और सशक्तिकरण के चश्में के लेंस को साफ़ किया SHG ने. वित्तीय समझ और आर्थिक क्षमताओं को समाज में आइना भी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने दिखाया है.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रोहन शर्मा</dc:creator><pubDate>Thu, 13 Apr 2023 13:24:45 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/women-are-good-at-managing-financial-matters]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/D3VtcypJY1Aq1nMRq2hS.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/D3VtcypJY1Aq1nMRq2hS.jpg"/></item><item><title><![CDATA[इथियोपिया में माइक्रोक्रेडिट हुआ सफल ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/duniyadari/microcredit-programme-in-ethiopia-helps-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xTRXxVLCqZix465dyWWi.jpg"><p>माइक्रोफाइनेंस गरीबी एलिमिनेशन ही नहीं, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने का बड़ा साधन है. क्रेडिट मिलना, महिलाओं को नए अवसर प्रदान करता है और इसी कारण आय बढ़ाने का भी काम हो जाता है. अधिक कमाई महिलाओं को घर के निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में एक बड़ी भूमिका देकर और उनके जीवन को अधिक महत्व देती है. सामुदायिक स्तर पर माइक्रोक्रेडिट के लिए स्वयं सहायता समूहों सबसे महत्वपूर्ण है. भागीदारी की प्रक्रिया से सामाजिक मुद्दों और अधिकारों के बारे में जागरूकता SHG से बढ़ती है .</p>
<p>ऐसी ही एक पहल यूनाइटेड नेशंस ने अपने यूएनजेपी- आरडब्ल्यूईई खाद्य और कृषि संगठन, कृषि विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय कोष, विश्व खाद्य कार्यक्रम और संयुक्त राष्ट्र महिला के साथ इथियोपिया में की. यह कार्यक्रम वहाँ  "ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में 'प्रगति' नाम से चलाया गया. इसको चार संयुक्त राष्ट्र संगठन तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं और यह कार्यक्रम संघीय, क्षेत्रीय और जिला स्तर के भागीदारों द्वारा कार्यान्वित किया जाता है. </p>
<p>UNJP-RWEE ने कम ब्याज दरों पर नकद ऋण प्रदान करने से शुरू किया. वित्तीय साक्षरता, उद्यमिता कौशल और व्यवसाय विकास में अतिरिक्त प्रशिक्षण प्रदान किया. ऋण की शुरआत लगभग 4,000 से 15,000 इथियोपियन बिर (लगभग 140 से 522 अमरीकी डॉलर) से और इसके ब्याज दरों को 2 से 11 प्रतिशत तक रखा. क्रेडिट के लिए सदस्यों को हर महीने एक निश्चित राशि की बचत करना और आवश्यक समूह गतिविधियों में भाग लेना आवश्यक किया गया.  </p>
<p>सदस्यों को कृषि प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों तक पहुंच दी गयी साथ ही स्थानीय घरेलू खाद्य भंडार के नियंत्रण और प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया. छोटे पैमाने पर बढ़ते चारे, सब्जी और फसल उत्पादन नवाचारों पर ध्यान दिया. सदस्यों को आर्थिक संसाधनों और नेतृत्व के संबंध में निर्णय लेने के साथ सामाजिक मानदंडों के बारे में अधिक जागरूकता को प्रोत्साहित किया.<br> <br>इस तरह की पहल से इथियोपिया में महिलाओं को आर्थिक आज़ादी मिलना शुरू हुई और माइक्रोक्रेडिट, महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सशक्त कदम बना. इथियोपिया में यह साबित हुआ की स्व-सहायता समूहों के माध्यम से माइक्रोलेंडिंग एक शक्तिशाली सामूहिक सशक्तिकरण पहल है और इसे कई देशों में सक्रियता से उपयोग में लाना चाहिए.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Wed, 05 Apr 2023 17:09:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/duniyadari/microcredit-programme-in-ethiopia-helps-women]]></guid><category><![CDATA[दुनियादारी]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xTRXxVLCqZix465dyWWi.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xTRXxVLCqZix465dyWWi.jpg"/></item></channel></rss>