<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ माइक्रोफाइनेंस]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/maaikrophaainens</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/maaikrophaainens" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Fri, 14 Apr 2023 16:00:45 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[माइक्रोफाइनेंस से इकॉनमी को मिला बूस्ट ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-based-microfinance-project-the-biggest-boost-for-indian-economy-said-pm-modi</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/iIgFX199A5XpMx317JEl.jpg"><p><iframe style="width: 918px; height: 514px;" src="https://www.youtube.com/embed/uMXwiXBpo0k" width="918" height="514" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोजगार मेला का उद्घाटन किया जिसमे 71 हजार से ज्यादा युवाओं को नौकरी का नियुक्ति पत्र बांटा. उन्होंने बताया कि बिना बैंक गारंटी के 23 लाख करोड़ रुपयों का लोन दिया गया जिसमे 70 % से अधिक लोन महिलाओं को मिला. आज सभी को माइक्रोफाइनेंस की ताकत को समझने की ज़रुरत हैं जिसे अर्थशास्त्र के एक्सपर्ट्स ने इकॉनमी को बढ़ाने का ज़रिया माना. माइक्रोफाइनेंस से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिली है और अपने गांव में ही रोज़गार के अवसर बढ़े हैं.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 14 Apr 2023 16:00:45 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/shg-based-microfinance-project-the-biggest-boost-for-indian-economy-said-pm-modi]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/iIgFX199A5XpMx317JEl.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/iIgFX199A5XpMx317JEl.jpg"/></item><item><title><![CDATA[माइक्रोलोन्स को आगे बढ़ाना होगा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/microloans-need-to-be-expanded</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aRui04Fax2RtfJWJQTSb.jpg"><p>माइक्रोफाइनेंस में ग्रामीण महिलाओं के जीवन को बदलने की अपार क्षमता है. ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आज़ादी का सपना जुड़ा हुआ है SHG से. आज देशभर में जो विकास की बात चल रही है वह तभी सबके लिए और सबके साथ होगा जब फिनेंशिअल इन्क्लुशन यानि आर्थिक रूप से सबको साथ में आगे बढ़ाया जाए.  इसके लिए ज़रूरी है  'वित्तीय समावेशन' गवर्मेंट पॉलिसी का हिस्सा बने. सरकार भी अब आजीविका मिशन के साथ जन-धन योजना, सामाजिक पेंशन, बीमा, डीबीटी और माइक्रोफाइनेंस जैसे कार्यक्रमों के साथ यह करने की कोशिश में है.<br><br>माइक्रोफाइनेंस की बड़ी कोशिश स्वयं सहायता समूह बैंक लिंकेज प्रोग्राम (SHG-BLP) के साथ शुरू हुई, जो 1989 में नाबार्ड द्वारा शुरू किए गए MYRADA के एक्शन रिसर्च प्रोजेक्ट से निकला था. SHG क्रांति में मुख्य रूप से  महिलाएं क़रीब 90% शामिल हैं. छोटे जमा खाते  और छोटे ऋण के लिए बैंकों के साथ समूहों को जोड़ने की आरबीआई की इस पहल ने एसएचजी-बीएलपी को एक वास्तविकता बना दिया.<br><br>500 SHG को बैंकों से जोड़ने के एक मामूली लक्ष्य के साथ शुरू किया गया यह कार्यक्रम आज दुनिया का सबसे बड़ा माइक्रोफाइनेंस प्रोग्राम है जिसमें 129 लाख SHG बैंक से जुड़े हुए है और लगभग 1,81,500 करोड़ रुपये के ऋण के साथ काम कर रहे है . एसएचजी-बीएलपी कार्यक्रम ;  गैर सरकारी संगठनों, सरकार और बैंकों की ताकत को महिलाओं को सशक्त बनाने में लगता है.<br><br>दक्षिण और पूर्व भारत के राज्य एसएचजी-बीएलपी में सबसे आगे है.  SHG-BLP के तहत, 8.4 करोड़ महिलाओं ने औसतन प्रति सदस्य लगभग ₹21,600 का ऋण लिया है. यदि हम पांच दक्षिणी राज्यों को छोड़ दें, तो प्रति सदस्य ऋण बकाया घटकर ₹12,300 रह जाता है, जो इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय असमानताओं को उजागर करता है. माइक्रोफाइनेंस ने 2000 के दशक की शुरुआत में अपना रंग बदल दिया, जिसकी शुरुआत दक्षिण भारत से हुई, जहां एसएचजी-बीएलपी शुरू हुआ और अभी भी जीवंत है, मुख्य रूप से माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (एनबीएफसी-एमएफआई) के आगमन के साथ. सभी माइक्रोफाइनेंस का सकल ऋण पोर्टफोलियो 6.4 करोड़ के साथ लगभग ₹3.2 लाख करोड़ है.  एसएचजी-बीएलपी के तहत सदस्य व्यक्तिगत बचत, नियमित समूह बैठक और सदस्यों के बीच इंटर-लेंडिंग के बाद ही बैंकों से ऋण प्राप्त कर सकते हैं.<br><br>कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि एसएचजी-बीएलपी भारत के लिए उपयुक्त मॉडल है, क्योंकि सरकार द्वारा दी जाने वाली ब्याज सहायता और कम ब्याज दर वसूली जाती है. लेकिन एसएचजी-बीएलपी के तहत दिए ऋण की राशि छोटी होती है और एमएफआई से जल्दी और बड़े ऋण की तुलना में ऋण प्रक्रिया थोड़ी लंबी है. इसलिए धीरे-धीरे एमएफआई ज़्यादा प्रचलित हो रहे हैं. SHG-BLP सही तरीके से रुपये तक पहुँचने के लिए सामाजिक उद्देश्यों के साथ शुरू हुआ, MFI ने धीरे-धीरे इस आंदोलन को एक कमर्शियल मैनेजमेंट में बदल दिया.<br><br>भारत जैसे विशाल देश में कई माइक्रोफाइनेंस मॉडल की ज़रुरत है. ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान रखते हुए ज़रूरी बदलाव करने होंगे. एसएचजी-बीएलपी पर निगरानी, फेडरेशन बनाना , ब्याज की धीरे वापसी एसएचजी-बीएलपी को लचीला बना सकती है. जब एमएफआई ग्राहक पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो क्षमता निर्माण, सलाह, प्रौद्योगिकी के उपयोग, अधिक उत्पादक ऋण जारी करने, नियामक मानदंडों के अनुपालन के साथ, मुनाफे को बढ़ाएगा.<br><br>एनसीएईआर के अनुसार, माइक्रोफाइनेंस लगभग 130 लाख नौकरियों और हमारे जीवीए का 2 प्रतिशत योगदान देता है. इसमें सभी 6.3 करोड़ गैर-कृषि उद्यमों तक पहुंचने की क्षमता है. माइक्रोफाइनेंस का भविष्य सभी माइक्रोलोन्स को औपचारिक क्षेत्र में ले जाना बैंकों (एमएफआई) के माध्यम से संभव है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रोहन शर्मा</dc:creator><pubDate>Mon, 10 Apr 2023 10:55:35 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/microloans-need-to-be-expanded]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aRui04Fax2RtfJWJQTSb.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/aRui04Fax2RtfJWJQTSb.jpg"/></item><item><title><![CDATA[माइक्रोफाइनेंस: आर्थिक आज़ादी की चाबी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/microfinance-is-the-key-to-womens-financial-freedom</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xnN3FmJq6snQfAsCzoXG.jpg"><p dir="ltr">आर्थिक आज़ादी, महिलाओं के मिलने वाले अवसरों के दरवाज़े खोलती हैं. ख़ुद के फैसले लेना, परिवार को बेहतर भविष्य दे पाना, अपनी ज़रूरतों को पूरा करना, पारिवारिक और सामाजिक फैसले ले पाना.  ये सब तभी मुमकिन है जब आर्थिक आज़ादी मिले. इस आज़ादी को पाने का एक ज़रिया हैं रोज़गार. महिलाओं की आर्थिक आज़ादी से केवल इनके घर को ही नहीं बल्कि पूरे देश की इकॉनमी को फायदा मिलता है. ज़रा सोचिये, ये आधी आबादी अगर पैसे कमाना शुरू करदे तो सकल घरेलु उत्पाद (GDP) में कितना योगदान मिलेगा. माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशन महिलाओं को अपना रोज़गार शुरू करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं . इनसे छोटा उधार लेकर महिलाएं अपना बिज़नेस शुरू करती हैं. काम बढ़ने पर और भी महिलाएं इस से जुड़ती हैं. </p>
<p dir="ltr">स्वयं सहायता समूह इस माइक्रो क्रेडिट के सबसे बड़े ग्राहक हैं. माइक्रोफाइनेंस से अनगिनत महलाओं और समुदायों को आर्थिक स्थिरता, पूंजी तक पहुंच और आर्थिक आज़ादी हासिल करने में मदद मिली. पूरी दुनिया की सफलता संयुक्त राष्ट्र (UN) के 17 सतत विकास लक्ष्य (SDGs) पर टिकी है. हालांकि, जब तक महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होंगी, तब तक इन SDGs को हासिल करना  मुश्किल है. SDG के लक्ष्य 5 का गोल ऐसे समाज बनाना है जहां सभी को अपने सपनों और आर्थिक आज़ादी हासिल करने के समान अवसर हों. महिलाओं को इसे हासिल करने में मदद करने का एक तरीका उन्हें फाइनेंशियल रिसोर्सेस तक पहुंच देना है, जो पहले के समय में भेदभाव की वजह से हासिल करना मुश्किल था.</p>
<p dir="ltr">इन फाइनेंशियल रिसोर्सेस तक पहुंच होने पर महिलाओं की सामाजिक-राजनैतिक स्थिति में सुधार आता है. वे स्वास्थ्य, पोषण और साक्षरता पर खर्च कर अपने लिविंग स्टैंडर्ड को सुधारती हैं. स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाओं ने ख़ासकर ग्रामीण महिलाओं ने मइक्रोक्रेडिट की मदद से रोज़गार शुरू किया. इससे उनकी सामाजिक और राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ उनके आर्थिक अवसरों में सुधार आया. इसके अलावा, वित्तीय समावेशन (फाइनेंशियल इन्क्लूजन) ने कई महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं, सरकारी योजनाओ, और बीमा स्कीमों से जोड़ा. </p>
<p dir="ltr">सरकार, नाबार्ड, जीविका मिशन, बैंकों और माइक्रोफाइनेंस संस्थानों ने कई महिलाओं को वित्तीय शिक्षा (फाइनेंशियल लिट्रेसी), आसान लोन और पूंजी तक आसान पहुंच दिलाई. माइक्रोफाइनेंस संस्थान (एमएफआई) आमतौर पर महिलाओं को उधार देने की अधिक संभावना रखते हैं क्योंकि उनके पास पुरुषों की तुलना में बेहतर पुनर्भुगतान (रीपेमेंट) इतिहास होता है, जो इन कंपनियों के लिए क्रेडिट जोखिम को कम करने में मदद करता है. माइक्रोफाइनेंस आर्थिक प्रणाली का एक अहम हिस्सा है, जो कम आमदनी वाले परिवारों को लोन, बीमा और फाइनेंशियल लिट्रेसी जैसी सेवाएं देते हैं. इन संस्थानों के साथ से स्वयं सहायता समूह आज देश भर में आर्थिक क्रांति ला रहे हैं. <strong id="docs-internal-guid-04690da9-7fff-1dcf-7dfc-b589f67c4809"></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sat, 01 Apr 2023 16:41:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/microfinance-is-the-key-to-womens-financial-freedom]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xnN3FmJq6snQfAsCzoXG.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xnN3FmJq6snQfAsCzoXG.jpg"/></item><item><title><![CDATA[आरंभ से आज... SHG के साथ NABARD ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/nabard-supporting-shg</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6uwPWfDEe6waipgrx61j.jpg"><p>2023 SHGs के लिए सबसे महत्वपूर्ण साल है. जहां 2023 के बजट में और G 20 के कोर एजेंडा में सरकार SHG के सशक्तिकरण पर ज़ोर दे रही है वही इस महिला आर्थिक आज़ादी की क्रांति को शुरू हुए 30 साल हो गए हैं. किसी भी सामाजिक और आर्थिक क्रांति के लिए 30 साल का वक़्त भले ही छोटा है लेकिन इन 30 सालों में 81 लाख SHGs देशभर में बनाए गए हैं जिनमें से 84% महिला सदस्य हैं. ग्रामीण विकास के उद्देश्य से शुरू हुआ ये सफर आज ग्रामीण अंचल की महिलाओं के सशक्तिकरण का सबसे कारगर माध्यम बन चूका है.</p>
<p>भारत में SHG को अनूठा स्वरूप मिला और यह मुहीम विश्व की सबसे बड़ी माइक्रोफाइनेंस प्रोग्राम के तौर पर पूरी दुनिया में छा गई. कैसे हुई इस सफर की शुरुआत ?  कैसे हासिल किया भारत ने यह मुकाम ? यह तो बहुत लंबी दास्तान हो जाएगी लेकिन SHG क्रांति को भारत में खड़ा करने में NABARD ne महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.  </p>
<p>1982 का वो साल जब 'नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चरल एंड रूरल डेवलपमेंट' उर्फ़ NABARD को स्थापित किया गया. NABARD  का उद्देश्य था ग्रामीण इलाकों की आर्थिक स्थिति में बदलाव लाना. इस मिशन को मद्देनज़र रखते हुए वर्ष 1992 में NABARD ने 'सेल्फ हेल्प ग्रुप-बैंक लिंकेज प्रोग्राम' की शुरआत की. इस 'SHG - BPL' मॉडल का मुख्य लक्ष्य गांवों और कस्बों को आर्थिक रूप से मज़बूत करने के लिए SHGs को बैंको से जोड़ना है. </p>
<p>500 SHGs से शुरू हुआ यह सफ़र देखते ही देखते 81 लाख SHGs में तब्दील हो गया. जिसने देश के 10 लाख घरों को समर्थ और सक्षम बनाया. इस माइक्रोफाइनेंस प्रोजेक्ट की सफलता के पीछे का राज़ जानने के लिए कई सारे रिसर्च पेपर्स और थीसिस लिखे गए.  रिसर्च से पता चला की  'SHG - BPL' प्रोग्राम अपने 'कॉस्ट-इफेक्टिव मैकेनिज्म' के कारण आसानी से गरीब से गरीब तबके के लोगों तक आर्थिक सेवाएं उपलब्ध करवा पाता है. इतना ही नहीं माइक्रोफाइनेंस की दुनिया में आया यह बदलाव NABARD और अनेक संघठनो के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है.</p>
<p>कई NGOs ने 'सेल्फ हेल्प ग्रुप प्रमोटिंग इंस्टीटूशन' (SHPI) की भूमिका निभाते हुए SHGs को बैंको से जोड़ने में मदद की. NGOs की इस पहल से प्रेरित होकर NABARD ने भी 'सेल्फ हेल्प ग्रुप प्रमोटिंग इंस्टीटूशनस ' (SHPI) बनाना शुरू कर दिये.  SHPI से जुड़ने  के लिए  NABARD ने  ग्रामीण वित्तीय संस्थानों, फार्मर क्लब , इंडिविजुअल रूरल वालंटियर्स को 'प्रोत्साहन अनुदान सहायता' देना शुरू किया. SHGs के साथ मिलकर काम कर रहे बैंको को  100% पुनर्वृत्ति भी दी गयी. </p>
<p>स्वसहायता समूह बनाने के बाद SHG सदस्यों के लिए ट्रेनिंग वर्कशॉप्स, सेमिनार्स आयोजित किये गए. समूह की महिला सदस्यों को रोज़गार दिलवाने के लिए उन्हें नाबार्ड माइक्रो एंटरप्राइज डेवलपमेंट प्रोग्राम और लाइवलीहुड - एंटरप्राइज डेवलपमेंट प्रोग्राम्स से जोड़ा गया. SHGs में समय - समय पर  उभरने वाली मुश्किलों को सुलझाने के लिए नाबार्ड ने  ग्रुप सेविंग्स , जॉइंट लायबिलिटी ग्रुप्स का गठन , केश क्रेडिट का सैंक्शन जैसे बदलाव जारी किये. </p>
<p>कोरोना काल में SHGs का काम रुके नहीं इसलिए 'इ-शक्ति ' प्लेटफार्म का भी गठन किया गया. वही SHGs ने भी मास्क्स और सांइटिज़ेर्स बनाकर NABARD के पिछले ३० सालों की मेहनत को सरकार और समाज के सामने प्रस्तुत किया. उस विषम काल में SHG और NABARD की महत्ता को देश दुनिया ने न केवल समझा बल्कि कोरोना काल के बाद SHG को प्रोत्साहित भी किया.</p>
<p>आज SHG को आगे बढ़ाने का श्रेय सरकार के साथ NABARD जैसे संस्थानों को जाता है. SHG क्रांति की रीड की हड्डी बैंक लिंकेज प्रोग्रम की शुरुआत जहां NABARD ने करी वहीं कैटालिटिक केपिटल फंड भी मुहैया कराएं. इस तरह महिला को देश , समाज  और घर पर भी स्थान दिलाने वाले SHG आंदोलन के प्रारंभ से लेकर आज प्रणेता के रूप में NABARD मौजूद है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 17 Feb 2023 16:38:22 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/nabard-supporting-shg]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6uwPWfDEe6waipgrx61j.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/6uwPWfDEe6waipgrx61j.jpg"/></item><item><title><![CDATA[G20 के W20 फोरम पर SHG फोकस मे ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/g20-focuses-on-shg</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/liCFNUDT27gplNPtXtGc.jpg"><p dir="ltr">भारत को G20 की प्रेसिडेंसी मिलना वैसे ही गर्व और सामरिक महत्व का मसला है . उसके साथ भारत ने G20 का एजेंडा महिला सशक्तिकरण सेट किया. इसी के तहत W20 की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाती है. W20 महिला नेताओं का वो समूह है जो G20 देशों में लैंगिक समानता और महिलाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है. वैसे तो W20,G20 का ही आधिकारिक हिस्सा है लेकिन इसकी अपनी अलग महत्ता भी है.  इसको G20 के साथ जुड़ने के लिए एक मंच के रूप में स्थापित किया गया है. W20 नागरिक समाज संगठनों, शिक्षाविदों, निजी क्षेत्र और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों से बना है. यह G20 के साथ मिलकर काम करता है जो दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों के जीवन को सुधारता है.  </p>
<p dir="ltr">W20 के तहत  ही 11 -12 फरवरी 2023 को आगरा में G20 EMPOWER मीट हुई.  इस के एजेंडे का केंद्र रहा भारतीय महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण.13 सदस्य देशों और 7 अतिथि देशों के करीब 150 प्रतिनिधियों ने भागीदारी दर्ज की. G20 ने एक ऐसा मंच दिया जहां लैंगिक समानता पर काम कर रहे देशों को एक जगह लाकर, उनके विचारों और रणनीतियों को ठोस परिणामों में बदला जा सके. इस मीट का फोकस वूमेन लीडरशिप, जेंडर डिजिटल डिवाइड, एजुकेशन एंड स्किल डेवलपमेंट रहा. </p>
<p dir="ltr">भारत में करीब 140 लाख एमएसएमई और कृषि व्यवसाय को महिलाएं चला रही हैं. मैकिन्से की एक रिपोर्ट का कहना हैं कि भारत अपने GDP में 18% तक की बढ़त कर सकता है यदि देश में महिला कार्यबल की भागीदारी भी शामिल हो सके. महिलाओं की फाइनेंशियल लिटरेसी पर फोकस कर उन्हें कार्यबल में शामिल करने की पहल भारत सरकार ने की. भारत के लिए SDG 5: लैंगिक समानता हासिल करने के लिए, भारत सरकार ने स्टैंड-अप इंडिया, पीएम मुद्रा योजना, बेटी बचाओ बेटी पढाओ,पोषण अभियान आदि शुरू किये. इन सभी योजनाओं को जो मज़बूत कड़ी जोड़ती हैं वो हैं SHG जिसने महिलाओं के अपना रोज़गार शुरू करने के अवसर बढ़ाये.  </p>
<p dir="ltr">जिन मध्यमवर्गीय परिवारों में महिलाओं से बैंक और पैसों के मसलों में राय तक नहीं ली जाती, वहीं SHG से बचत सीख कर और कम ब्याज दरों पर लोन लेकर, महिलाओं ने अपना रोज़गार शुरू किया. आपको बतादें कि भारत में 81 लाख स्वसहायता समूहों में 84% महिला सदस्य हैं, इनमे लगभग 90 % SC/ST महिलाएं हैं.  भारत में इन समूहों ने महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को सुधारा. लैंगिक समानता का लक्ष्य लेकर सरकार के द्वारा बनाई गई योजनाओं को SHG ने सहारा दिया है.  </p>
<p dir="ltr"><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/eA8HfnthkJLvTt0KDYIH.jpeg" alt="W20"></p>
<p dir="ltr">जनजातीय केंद्रीय मंत्री, अर्जुन मुंडा ने दुनिया भर में महिलाओं के आर्थिक विकास पर ज़ोर देते हुए कहा कि फाइनेंशियल इन्क्लुशन को महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण का उपकरण माना जाए. SHG भी फाइनेंशियल इन्क्लुशन की दिशा में काम कर रहें हैं. SHG ने अनुसूचित जाति/जनजाति की महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की है जिसने उनका सामाजिक उत्थान हो पाया.   </p>
<p dir="ltr">स्वसहायता समूहों ने महिलाओं के कौशल और उनके शुरू किये व्यवसायों को बढ़ावा देने में मदद की. प्रधान मंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) जैसी वित्तीय सहायता देने वाली योजनाओं ने महिलाओं के व्यवसायों की चुनौतियों में से एक को संबोधित किया जिससे उन्हें - आसानी से कम ब्याज दर पर आवश्यकता-आधारित उधार मिल सका. तब से, 4600 लाख से अधिक बैंक खाते खोले गए, जिनमें से 56% महिलाओं के हैं. 2015 और 2022 के बीच, पीएमजेडीवाई खातों में औसत जमा राशि 1,279 रुपये से तीन गुना बढ़कर 3,761 रुपये हो गई. ऐसा कहा जा सकता है कि जन धन और स्वसहायता समूहों ने एक दुसरे का फ़ायदा किया . G20 ने इसी बात पर ज़ोर दिया. </p>
<p dir="ltr">इसी तरह, उद्यम सखी पोर्टल ने महिला उद्यमियों को सरकारी योजनाओं, नीतियों और गतिविधियों के बारे में जानकारी देकर, SHG को बढ़ने में मदद की. वहीं, आजीविका मार्ट के नेटवर्क को SHG उत्पादों ने फैलाया. SHG से मिली आर्थिक आज़ादी ने न केवल महिलाओं की ज़रूरतें पूरी की पर समाज ने भी उनकी अहमियत को पहचाना. ग्रामीण परिवेश की करीब 82,31,670 महिलाएं आज स्वसहायता समूहों से जुड़ी. जिस महिला ने कभी घर के पैसों के मसलों में अपनी बात नहीं रखी थी, उन्होंने अपने  समूह शुरू कर अपने पति का बोझ बांटा. SHG ने महिलाओं को एकजुट किया और साथ मिल कर उन्होंने घरेलु हिंसा, जुआ-शराब की लत, औरतों के ख़िलाफ़ होते जुर्म जैसे मुद्दों पर जमकर आवाज़ उठाई. सरकार के आजीविका मिशन से जुड़कर अन्य सरकारी योजनाओं का ज्ञान ओर ट्रेनिंग फ़ायदेमंद साबित हुई.  </p>
<p dir="ltr">समूह से जुड़कर विकसित हुई सोच का इस्तेमाल महिलाओ ने अपने बच्चों और परिवार के लिए सही निर्णय लेने में किया. उन्होंने शिक्षा के महत्त्व को समझा और अपने बेटा-बेटी को सामान शिक्षा देने का संकल्प लिया. बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान को इन्होने ओर ऊंचे मक़ाम पर पहुंचाया. शिक्षा के अभाव से SHG चलाने में परेशानी महसूस करने के बाद उन्होंने अपनी बेटियों को स्कूल पहुंचाया. SHG महिलाओं ने पोषण अभियान को भी नई ऊचाइयों पर पहुंचाया. पोषण अभियान के तहत अपने खेतों में फल ओर सब्ज़ियां लगाकर बच्चों को पोषण से भरपूर भोजन दिया ओर साथ ही उन फलों ओर सब्ज़ियों को बेचकर कमाई का ज़रिया भी बनाया.  </p>
<p dir="ltr">यह गर्व की बात है कि आज भारत को 20 देशों की अगुआई करने का मौका मिला. G20  में भारत ने महिला सशक्तिकरण जैसे ज़रूरी मुद्दे को उठाया जिसका कहीं न कहीं विकासशील देशों पर गहरा असर पड़ेगा. विकासशील देश हो या विकसित देश, महिलाओं की आर्थिक आज़ादी आज भी अधूरी है. G20 वो प्लेटफार्म है जो इस मुद्दे को सरहदों पार पूरे विश्व में ले जा सकेगा. <strong id="docs-internal-guid-d91295e0-7fff-6fad-3d54-6defad387bf1"></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 17 Feb 2023 16:34:57 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/g20-focuses-on-shg]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/liCFNUDT27gplNPtXtGc.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/liCFNUDT27gplNPtXtGc.jpg"/></item></channel></rss>