<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ Mangrove Conservation]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/mangrove-conservation</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/mangrove-conservation" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Sat, 29 Jul 2023 13:06:18 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[JSW फाउंडेशन के साथ मैन्ग्रोव संरक्षण बना आर्थिक आज़ादी का ज़रिया ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/jsw-foundation-conserving-mangrove-giving-livelihood-to-shg-women</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9xJUFjAeWjVxwUFXxon7.jpg"><p>मैंग्रोव कटाव रोकते हैं, चक्रवातों को धीमा करते हैं, &nbsp;इकोसिस्टम की रक्षा करते हैं, कार्बन को सोखते हैं, और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए पोषण का इंतज़ाम करते हैं. इसके अलावा, तटीय समुदायों को कई ज़रूरी संसाधन और रोज़गार का ज़रिया भी देते हैं. क्लाइमेट चेंज, पेड़ों की कटाई, और शहरीकरण की वजह से मैन्ग्रोव ख़त्म हो रहे हैं. मैंग्रोव संरक्षण (mangrove conservation) के लिए कई संथाएं, स्थानीय समुदाय, और स्वयं सहायता समूह (self help group) आगे आ रहे हैं. महाराष्ट्र (Maharashtra) के रायगढ़ (Raigad) में <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/mangrove-girls-from-maharashtra-saving-mangroves">मैंग्रोव</a> को बचाने के लिए &nbsp;JSW फाउंडेशन (JSW Foundation) ने अहम पहल की.</p>
<h2>JSW फाउंडेशन ने लगाए 20 लाख पौधे, बचा रहे मैन्ग्रोव कवर&nbsp;</h2>
<p>JSW फाउंडेशन, 23 अरब डॉलर के JSW समूह की CSR शाखा है. 380 हेक्टेयर ज़मीन को कवर करते हुए, करीब 20 लाख पौधे लगाए जिसका सर्वाइवल रेट 70% से ज़्यादा है. 2016 से, JSW<a href="https://thecsrjournal.in/corporate-social-responsibility-csr-news-jsw-mangrove-restoration-raigad/"> फाउंडेशन </a>&nbsp;जल निकाय और आसपास की भूमि के बीच इस <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/adani-foundation-and-save-helping-gujarat-save-mangrove">बायो-शील्ड</a> (bio shield) को विकसित करने के लिए काम कर रहा है.</p>
<h3>मैंग्रोव संरक्षण को बनाया आजीविका बढ़ाने का ज़रिया&nbsp;</h3>
<p>इस कार्यक्रम की ख़ास बात यह है कि मैंग्रोव संरक्षण के काम को&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/duniyadari/self-help-group-becomes-financially-independent-from-sale-of-mangrove-seedlings"> आजीविका </a>बढ़ाने के नज़रिये से देखा जा रहा है (mangrove conservation giving livelihood). इस परियोजना ने तरह-तरह से स्थानीय लोगों को रोज़गार दिया है. खेती, मछली पालन, घर-आधारित मुर्गीपालन, मैंग्रोव पौधों का रोपण और नर्सरी, जूट बैग जैसे&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/khabar/plantation-drive-underway-to-stop-mangrove-forest-depletion-in-ramanathapuram-tamilnadu">पर्यावरण</a> के अनुकूल उत्पाद (eco friendly products) बनाकर तटीय समुदाय आत्मनिर्भर बन पा रहे हैं.&nbsp;</p>
<h3>200 स्वयं सहायता समूहों की 2000 महिलाएं बनी प्रोजेक्ट का हिस्सा&nbsp;</h3>
<p>बीज संग्रहण करने, जूट बैग बनाने, नर्सरी प्रबंधन और खेत में वृक्षारोपण करने के लिए 200 से ज़्यादा स्वयं सहायता समूहों (SHG conserving mangroves) की 2000 से ज़्यादा महिलाओं ने न केवल परियोजना गतिविधियों के ज़रिये आय अर्जित की है, बल्कि मैंग्रोव के महत्व की गहरी समझ भी विकसित की है. इस प्रोजेक्ट के ज़रिये साथ काम कर महिलाओं ने लगभग 5 करोड़ रु. कमाए. महिलाओं को अपनी आजीविका बढ़ाने के लिए सिलाई का प्रशिक्षण भी दिया गया.</p>
<p>तालाबों को मछली पालन के लिए विकसित किया गया जिससे मछुआरों को आर्थिक फायदा हुआ. सामुदायिक तालाबों की खुदाई से निकाली गई मिट्टी का इस्तेमाल तटबंधों के बनाने और आसपास के खेतों में ऑर्गनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए किया.&nbsp;</p>
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<p>JSW फाउंडेशन के CEO श्री अश्विनी सक्सेना ने कहा, <em>&ldquo;महाराष्ट्र राज्य के रायगढ़ जिले के डोलवी में चल रही मैंग्रोव &nbsp;संरक्षण परियोजना पर्यावरण और लोगों की भलाई के लिए शुरू की गई है. पर्यावरण प्रबंधन को आजीविका का ज़रिया बना गया है, जिससे प्रकृति और समुदायों के बीच तालमेल बना रहे."</em></p>
</blockquote>
<p>JSW फाउंडेशन के इस अनोखे प्रयास से सीखकर देश के 4,975 sq km मैंग्रोव एरिया को ख़त्म होने से बचाते हुए स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है. &nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sat, 29 Jul 2023 13:06:18 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/jsw-foundation-conserving-mangrove-giving-livelihood-to-shg-women]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9xJUFjAeWjVxwUFXxon7.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/9xJUFjAeWjVxwUFXxon7.jpg"/></item><item><title><![CDATA[गुजरात में अडानी समर्थित 'बायोशील्ड' से मैन्ग्रोव संरक्षण मुमकिन ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/adani-foundation-and-save-helping-gujarat-save-mangrove</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/It2NJG7ur6WtuoX8QYj7.JPG"><p>जिस तरह समुद्री किनारा नाविकों को सहारा देता है, उसी तरह मैंग्रोव समुद्री किनारों की रक्षा करते हैं. मैंग्रोव के कई फ़ायदे हैं &ndash; वे कटाव रोकते हैं, चक्रवातों को धीमा करते हैं, &nbsp;इकोसिस्टम की रक्षा करते हैं, कार्बन को सोखते हैं, और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए पोषण का इंतज़ाम करते हैं (importance of mangrove conservation). एक बार मैंग्रोव ख़त्म हो गए, तो उन्हें दोबारा जीवित कर पाना मुश्किल का काम है. पर, कई संथाएं, स्थानीय समुदाय, और स्वयं सहायता समूह इस काम को संभव बना रहे हैं (<a target="_self" href="https://www.google.com/search?q=mangrove+forest+in+india&amp;bih=723&amp;biw=1536&amp;hl=en&amp;sxsrf=AB5stBjs5cQvFrEFyNiaVrZC-LZYbA8EUg%3A1689761609366&amp;ei=Sbe3ZIfhFcHvseMPr7emsAQ&amp;ved=0ahUKEwjHqezDxJqAAxXBd2wGHa-bCUYQ4dUDCA8&amp;uact=5&amp;oq=mangrove&amp;gs_lp=Egxnd3Mtd2l6LXNlcnAiCG1hbmdyb3ZlMgcQIxiKBRgnMg0QABiKBRixAxiDARhDMg4QLhivARjHARiABBiYBTILEAAYgAQYsQMYgwEyBxAuGIoFGEMyChAuGIoFGLEDGEMyCxAAGIAEGLEDGIMBMgUQABiABDILEAAYgAQYsQMYgwEyChAAGIAEGAIYywFI4AlQAFiOCHAAeACQAQCYAcwDoAHbFKoBBzItMS4yLjS4AQPIAQD4AQHCAgQQIxgnwgIIEAAYigUYkQLCAgsQLhiABBixAxiDAcICCxAAGIoFGLEDGIMBwgIREC4YgAQYsQMYgwEYxwEY0QPCAgcQABiKBRhDwgIIEC4YigUYkQLCAggQABiABBixA-IDBBgAIEGIBgE&amp;sclient=gws-wiz-serp" class="Linkstyled__Link-sc-1v2kwdl-0 fIkelf">mangrove forest in india</a>).</p>
<h2>गुजरात में कम हो रहा मैन्ग्रोव कवर</h2>
<p>देश का 23.66% <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/mangrove-girls-from-maharashtra-saving-mangroves">मैन्ग्रोव</a> गुजरात में है (mangrove in Gujarat), लेकिन वहां का&nbsp;<a href="https://ravivarvichar.in/duniyadari/self-help-group-becomes-financially-independent-from-sale-of-mangrove-seedlings"> मैन्ग्रोव </a>कवर कम होता जा रहा है. गुजरात के तटीय इलाकों में बसे गरीब जनजातीय समुदाय आजीविका के लिए प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं. घटते <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/plantation-drive-underway-to-stop-mangrove-forest-depletion-in-ramanathapuram-tamilnadu">मैन्ग्रोव</a> कवर की वजह से यहां के लोगों को तूफ़ान, भूकंप और गरीबी का सामना करना पड़ता है. इन नागरिकों ने, लंबे समय तक इन परिवर्तनों से जूझने के बाद, इसे रोकने के लिए समूह बनाया. गुजरात के भरूच जिले में कई स्थानीय समुदायों के मैंग्रोव को बचाने के लिए अभियान की शुरुआत की. इस पहल के ज़रिये समूह से जुड़े लोगों ने समुद्र तटों के किनारे बायोशील्ड बनाया. वह सब मिलकर मैंग्रोव और गैर-मैंग्रोव पौधे लगा रहे हैं. समुद्र के किनारे मैंग्रोव, बीच में नमक प्रतिरोधी साल्वाडोरा पौधा और गांव में चारा फसल, जड़ी-बूटियां और फलों के पेड़ लगाए.&nbsp;</p>
<h3>बायोशील्ड बनाने में मिला SAVE और अडानी फाउंडेशन का साथ&nbsp;</h3>
<p>अहमदाबाद (Ahmedabad) के गैर सरकारी संगठन विकास सेंटर फॉर डेवलपमेंट (VIKAS Center for Development) ने अपनी तकनीकी ब्रांच, सैलाइन एरिया वाइटलाइज़ेशन एंटरप्राइज लिमिटेड (SAVE) के साथ ये प्रोजेक्ट शुरू किया. इसके लिए आर्थिक सहायता <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/acc-supporting-women-shgs-in-tamilnadu">अडानी</a> फाउंडेशन (Adani Foundation helping conserve mangrove) ने की. सेव के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश शाह बताते हैं, <em>"बायोशील्ड एक ऐसी दीवार है जो कटाव रोकने के अलावा, मछली पकड़ने और चारे की पैदावार बढ़ाने में भी मदद करती है. यहीं नहीं, यह खार को रोक कर उपज भी बढ़ाती है."</em></p>
<p>टांकारी के गणपत मकवाना ने इस साल अपने दो एकड़ खेत से 2,800 किलो गेहूं उगाया. मकवाना को गेहूं और चारे की बिक्री से 40 हज़ार रुपये की आमदनी हुई. वृक्षारोपण के बाद खारी हवाओं और समुद्री पानी के बहाव में कमी आई, जिसकी वजह से ये संभव हो सका. जंबुसर में मैंग्रोव लगाने वाली परियोजनाओं की वजह से 15 तटीय गांवों के राठौड़ समुदाय के 600 लोगों को रोज़गार मिला है, जो 3 हज़ार परिवारों से जुड़े हैं.</p>
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<p>जादवपुर विश्वविद्यालय (Jadavpur University), कोलकाता के स्कूल ऑफ ओशनोग्राफिक स्टडीज (<span class="Y2IQFc" lang="en">School of Oceanographic Studies</span>) के प्रोफेसर सौगत हाजरा कहते हैं, <em>"भारत के दक्षिणी तट पर साल 2004 की सुनामी के बाद से बायोशील्ड का विचार तेजी से बढ़ा है. तरह-तरह की प्रजातियों वाला बायोशील्ड जैव विविधता लाने और तटीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर पैदा करने में मदद करेगा."</em></p>
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<h3>महिला स्वयं सहायता समूह से मिलेगी मैंग्रोव संरक्षण में मदद&nbsp;</h3>
<p><img alt="adani foundatio helping save mangrove gujarat" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/492x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/NKFp6pPvbAYaJhBwDQkc.JPG" style="width: 492px;"></p>
<p>मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट्स एंड टैंगिबल इनकम (MISHTI) कार्यक्रम के ज़रिये भारत के नौ राज्यों में मैंग्रोव वाली 75 जगहों पर पौधे लगाने का अभियान चलाया जा रहा है. हाजरा बताते है कि MISHTI का विचार पश्चिम बंगाल के एक महिला स्वयं सहायता समूह (Self Help groups) से आया था, जिसने मैंग्रोव संरक्षण के लिए नरेगा फंड का इस्तेमाल किया था.&nbsp;</p>
<p>तमिलनाडु और महारष्ट्र में भी महिलाएं मैन्ग्रोव संरक्षण के प्रयासों को गति दे रही हैं. मैन्ग्रोव कवर को बचाने में स्वयं सहायता समूह मदद कर सकते हैं. उनकी एकजुटता, आजीविका बढ़ाने के प्रयास, और सरकार से मिलने वाले समर्थन का फायदा उठा मैंग्रोव संरक्षण तेज़ी से किया जा सकता है (SHG women conserving mangrove). मैंग्रोव को फिर से लगाना वास्तव में कठिन काम है, लेकिन जंबूसर के लोग एक-एक पौधा लगाकर इसे संभव बना रहे हैं, और दूसरे राज्यों के लिए उदाहरण बन रहे हैं.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Thu, 20 Jul 2023 15:47:27 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/adani-foundation-and-save-helping-gujarat-save-mangrove]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/It2NJG7ur6WtuoX8QYj7.JPG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/It2NJG7ur6WtuoX8QYj7.JPG"/></item><item><title><![CDATA['मैंग्रोव गर्ल्स' सफारी गाइड बन कर रही संरक्षण ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/mangrove-girls-from-maharashtra-saving-mangroves</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/U11dt9XCNpRj0nwOSMKG.jpg"><p>आयशा उनकी नाव में बैठे यात्रियों को नीले अरेबियन सागर (Arabian sea) को पार करते हुए, अपने तटीय गांव की और ले जाती है. आयेशा घुले महाराष्ट्र (Maharashtra) में गांव वेंगुर्ला के मछुआरों के कोली समुदाय से है. मछुआरों (fishermen) के समुदाय में माना जाता है कि एक महिला नाव नहीं चला सकती. इस रूढ़िवादी सोच को चुनौती देते हुए वे मैंग्रोव सफारी गाइड (Mangrove Safari Guide) बनी. आयशा सहित नौ कोली महिलाओं ने नाव चलाने को आजीविका कमाने का ज़रिया बनाया.</p>
<p>गांव वालों ने खाड़ी में खड़ी उनकी नावों को कई बार काटा, जिस वजह से नाव समुद्र में बह जाती. जब भी पर्यटक उनका पता पूछते, तो उन्हें कह दिया जाता कि यहां कोई मैंग्रोव पर्यटन नहीं होता है. लेकिन, गांव वालों के विरोध से हार मानने की बजाय वे डटी रहीं. जैसे-जैसे मैंग्रोव संरक्षण (Mangrove Conservation) और पर्यटन के बारे में समुदाय की जागरूकता बढ़ी, उन्हीं लोगों ने साथ देना शुरू कर दिया. </p>
<p>अपने काम को बढ़ने में सरकारी योजना ने उनकी मदद की. महाराष्ट्र सरकार ने 2012 में  संरक्षण और आजीविका कार्यक्रमों के लिए एक विशेष इकाई, मैंग्रोव सेल के तहत इस पर्यटन पहल की शुरुआत की. फिर, 2017 में गणतंत्र दिवस पर, वेंगुर्ला के एक स्वयं सहायता समूह, स्वामिनी महिला बचत गत ने मैंग्रोव सफारी शुरू की. मांडवी खाड़ी में. पिछले कुछ सालो में, राज्य भर में कई महिलाओं को इस सरकारी योजना से लाभ हुआ है.</p>
<p>वेंगुर्ला की राधिका लोन आइसक्रीम की दुकान चलाती है, मछली बेचती है और मैंग्रोव सफारी करवाती है. इन महिलाओं को 'मैंग्रोव गर्ल्स' (Mangrove girls) के नाम से जाना जाता है. इन गाइडों ने मैंग्रोव प्रजातियों के मुश्किल वैज्ञानिक नाम भी सीखे है, जैसे एविसेनिया मरीना, एविसेनिया ऑफिसिनैलिस, ब्रुगुएरा सिलिंड्रिका और सोनेरटिया अल्बा. सरकार की ये पहल आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देता है, जिसमें समूह 90% सब्सिडी का हकदार होता है, जबकि एक व्यक्ति या एक एकड़ से अधिक निजी मैंग्रोव वाला भूमि मालिक 75% सब्सिडी का हकदार है.</p>
<p>कोली समुदाय मैंग्रोव संरक्षण की ज़रुरत को जानते है. लेकिन सरकार, वन विभाग और दूसरे संगठनों को इन्हें बचाने के लिए पर्यटकों और अन्य लोगों को शामिल करना होगा. ज़रुरत से ज़्यादा वृक्षारोपण या मैंग्रोव वनों की अधिक कटाई नुकसानदायक साबित हो सकती है. इस संतुलन को बनाये रखने से मरीन बायोडायवर्सिटी को बचाया जा सकता है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Fri, 07 Jul 2023 11:59:41 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/mangrove-girls-from-maharashtra-saving-mangroves]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/U11dt9XCNpRj0nwOSMKG.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/U11dt9XCNpRj0nwOSMKG.jpg"/></item></channel></rss>