<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ मेंस्ट्रुअल अवेयरनेस]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/mensttrual-aveyrnes</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/mensttrual-aveyrnes" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Mon, 10 Jul 2023 13:59:26 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[पीरियड्स से जुड़े अंधविश्वास को तोड़ना जरूरी ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/breaking-stereotypes-and-myths-related-to-periods</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/fPMhOMsqbdfA0BARvRPu.png"><p dir="ltr"><span><em>'तुम्हारे वो दिन चल रहे है', 'धीरे बोलो इन बातों के बारे में आसपास लोग है', ''अब 7 दिन किचन में मत जाना', 'बिना बाल धोए मंदिर मत जाना',</em> और ऐसी कितनी बातें जो हर महीने में एक बार लड़कियों और महिलाओं को सुननी पड़ती है. जाने ऐसा कितना बड़ा राज़ है पीरियड्स, जो इसके बारें में<em> </em>बात भी कर लो, तो सारी नज़रें आपको देखने लगती है. पूरी दुनिया की <a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/period-leave-relevant-or-not" data-mce-href="https://ravivarvichar.in/nazariya/period-leave-relevant-or-not">आधी आबादी</a> को होते है पीरियड्स वो भी हर महीने, हर व्यक्ति जनता है इस बारे में, लेकिन फिर भी बात करने के लिए ऐसी रोकते हो जैसे कोई गलत बात हो.</span><span></span></p><h1 dir="ltr"><span>कुछ पीरियड्स मिथ्स</span></h1><p dir="ltr"><span>क्यूंकि इस बारें में कोई बात ही नहीं करना चाहता, पीरियड्स को लेकर ज़्यादातर लड़कियों के दिमाग में इतनी गलतफैमियाँ और मिथ्याएँ बैठी है, जिनकी कोई हद नहीं! शहरों में तो फिर भी हालात ठीक है, गांव के लोग तो आज भी इसे किसी बीमारी से कम नहीं समझते. हाल इतनी बुरे है, की अगर पता चल जाए की किसी महिला के पीरियड्स चल रहे, तो उससे अछूतों जैसा व्यव्हार करने लगते है. लोग कुछ ऐसी बातों को मान बैठे है, जो हद से ज़्यादा बेतुकी है. कुछ लड़कियां जो इन बातों पर सवाल उठाती है, उन्हें भी डाटकर चुप करा दिया जाता है.</span></p><p dir="ltr"><span><img alt="Menstrual health" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/rDFtpaNlEAYHD1onOOBG.jpg" style="width: 580px;" class="center" data-mce-src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/rDFtpaNlEAYHD1onOOBG.jpg" data-mce-style="width: 580px;"></span></p><p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;" data-mce-style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Your Story</em></span></p><h2><strong>कहते है इन दिनों में बाल नहीं धोने चाहिए. </strong></h2><p dir="ltr"><span>अगर पूछे क्यों तो कोई जवाब नहीं होगा. और अगर फिर भी पूछा तो बोल देंगे, '<em>हमने भी यही फॉलो किया, तुम्हे क्या दिक्कत है?</em>' या बोलेंगे '<em>पीरियड्स के ब्लड फ्लो में दिक्कत आ जाती है</em>'. भले ही इस बात का कोई भी साइंटिफिक प्रमाण नहीं है इन लोगों के पास.</span><span></span></p><h2 dir="ltr"><span>आचार छूने और खाने को मना करते है.</span></h2><p dir="ltr"><span>इस बात का कोई तुक नहीं बनता, क्यूंकि कोई लड़की अगर पीरियड्स में है तो उसके अचार खा लेने से या छू लेने से क्या फर्क पड़ेगा? बोलते है अचार ख़राब हो जाता है. सच में हसी आती है इन बातों पर. और जहा तक रही अचार खाने के बात, तो खट्टी चीज़ों में '<a href="https://www.hsph.harvard.edu/nutritionsource/vitamin-c/" data-mce-href="https://www.hsph.harvard.edu/nutritionsource/vitamin-c/">विटामिन सी</a>' भरपूर होता है, और ऐसे समय में जहा एक लड़की इतनी दर्द में हो, उसे इम्युनिटी बूस्ट करने की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, तो अचार और कोई भी खट्टी चीज़ खाना बेहद फाएदेमंद हुआ.</span></p><h2><span>लोग तो ये भी कहते है की पीरियड्स के टाइम पर निकलने वाला खून गन्दा होता है. </span></h2><p><span>बिना जाने, बिना समझे, जब लोग इस तरह की बात करें तो तरस आता है उनपर. <strong>पीरियड्स के टाइम पर यूटरस (बच्चादानी) की वॉल्स फट जाती है और इसीलिए ब्लड फ्लो होता है.</strong> यह एक बहुत नॉर्मल और <a href="https://ravivarvichar.in/khabar/menstrual-hygiene-awareness-programme-under-udita-yojna-on-may-28" data-mce-href="https://ravivarvichar.in/khabar/menstrual-hygiene-awareness-programme-under-udita-yojna-on-may-28">नैचरल प्रोसेस</a> है. इसे गंदा समझना बिलकुल ही बेतुकी बात है.</span></p><h2 dir="ltr"><span>लोगों का मानना तो ये भी है कि पीरियड्स के टाइम पर किचन, और मंदिरों में नहीं जाना चाहिए. </span></h2><p dir="ltr"><span>क्यूंकि उन्हें भी यह बात बताई गयी और उन्होंने मान ली, बिना कोई सवाल किए, या ये पूछे कि ऐसा क्यों? किसी और बात को इतनी जल्दी माना हो या नहीं, लेकिन यह इतनी जल्दी मान लिया. आजतक ज़्यादातर परिवारों में लड़कियां किचन और मंदिरों में नहीं जाती क्यूंकि उनके घर में मना किया गया है. </span></p><p dir="ltr"><span>कुछ विश्वासों और मिथकों को अपनी बात का ज़रिया बनाकर लोग लड़कियों और महिलाओं को पीरियड्स के वक़्त ना जाने कितनी बातें बोल देते है. ना किसी <a href="https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4408698/" data-mce-href="https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4408698/">वैज्ञानिक तथ्य</a> को जानते है और ना ही अपना नज़रिया बदलने तैयार है ये लोग. </span></p><h3><span>इन सब का कारण है, मेंस्ट्रुअल अवेयरनेस और नॉलेज की कमी. </span></h3><p><span>स्कूल में भी जब इन सब चीज़ों के बारे में बताया जाता है, तो लड़कियों को अलग से बुलाकर वही समझते है जितना वे किताबों में पढ़ लेती है. कायदा तो यह कहता है की लड़कों को भी हर वो चीज़ बताई जाए, जो उनसे छुपाई जा रही है. यह कोई पाप नहीं है, जो जितने कम लोगों को पता हो उतना अच्छा. सोच में बदलाव तब आएगा जब लड़कियां सवाल करना शुरू करेंगी, और तबतक नहीं मानेंगी जब तक उन्हें सही जवाब और उनका हर हक़ नहीं मिल जाता.</span></p><p><span><img alt="Women Sanitary pad news" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/i1tzmltvTEMAPBTT7fP4.jpeg" style="width: 580px;" class="center" data-mce-src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/580x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/i1tzmltvTEMAPBTT7fP4.jpeg" data-mce-style="width: 580px;"></span></p><p><span style="font-size: 8pt;" data-mce-style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Give India</em></span></p><p dir="ltr"><span>भारत में ऐसे बहुत से <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/al-qaria-spreading-awareness-towards-menstrual-hygiene-and-products-in-uttar-pradesh" data-mce-href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/al-qaria-spreading-awareness-towards-menstrual-hygiene-and-products-in-uttar-pradesh">स्वयं सहायता समूह</a> (SHG) भी काम कर रहे है जो गांव में माहवारी (<a href="https://ravivarvichar.in/nazariya/sachhi-saheli-organisation-period-awareness-mission" data-mce-href="https://ravivarvichar.in/nazariya/sachhi-saheli-organisation-period-awareness-mission">Menstruation</a>) के समय पर होने वाली मिथ्यों को ख़त्म करने के लिए काम कर रही है. Self Help Group से जुड़कर इन महिलाओं ने भी बहुत कुछ सीखा, जो अब ये दूसरों को भी सिखा रही है. इसीलिए हर ग्रामीण महिला को जुड़ना चाहिए इन समूहों से ताकि सबकी सोच में बदलाव आए.</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Mon, 10 Jul 2023 13:59:26 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/breaking-stereotypes-and-myths-related-to-periods]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/fPMhOMsqbdfA0BARvRPu.png" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/fPMhOMsqbdfA0BARvRPu.png"/></item><item><title><![CDATA[मेंस्ट्रुअल अवेयरनेस की कमी : भाई ने मार डाला बहन को ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/sharminda/man-mistakes-menstrual-blood-to-be-result-of-sex-tortures-12-yr-old-sister-to-death</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/LDahGNT9hXyUNKqNI1mN.jpg"><p>लड़कियों को यदि पीरियड्स के बारे में सही जानकारी न हो तो वो मानसिक तनाव से गुज़रती हैं और कई तरह के अंधविश्वासों का शिकार हो जाती हैं. पीरियड्स के बारे में पुरुषों को जानकारी न होने की वजह से पीरियड्स कंट्रोल करने का एक और ज़रिया बन जाता है. आज के आधुनिक युग में भी लोग कितने अनजान है और जानकारी की कमी से किस हद का नुक्सान हो सकता है, ये महाराष्ट्र के शांतिनगर इलाके में हुई दर्दनाक घटना से समझा जा सकता है. </p>
<p>यहां एक 30 साल के भाई ने अपनी 12 साल की बहन की हत्या कर दी. वजह थी उसके पीरियड्स का शुरू होना और भाई को इस नेचुरल प्रोसेस की कोई जानकारी न होना. पीरियड्स शुरू होने से लड़की के कपड़े खून से लथपथ हो गए. भाई ने देखा तो बहन के चरित्र पर शक किया. कई दिनों तक बहन को खूब मारा-पीटा, जिसके बाद उसने दम तोड़ दिया. हिंसा की खबर मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. लड़की के शव को हिरासत में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. मामले की जांच शुरू हुई और भाई को हिरासत में लिया गया. </p>
<p>पता चला कि लड़की के माता पिता गांव में रहते हैं और वे अपने भाई-भाभी के साथ रहती थी. भाई गार्ड की नौकरी करता है. बहन के कपड़ों पर खून देख, भाई ने लड़की से साई तरह के सवाल किये. सही जानकारी न होने की वजह से लड़की संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई. जिसकी वजह से भाई को गुस्सा आ गया. लड़की की भाभी ने अपने पति को बताया कि उसकी बहन का कहीं अफेयर है और उसे ब्लीडिंग संबंध बनाने की वजह से हुई है. यह बात सुन कर भाई का गुस्सा भड़क गया, जिसके बाद कई दिनों तक लड़की को प्रताड़िया किया. हालत ज़्यादा खराब हो जाने की वजह से उसे अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने बताया कि वह मर चुकी है. </p>
<p>लड़की की मौत के बाद उसका पोस्टमार्टम हुआ. जिसमें उसके चेहरे, गर्दन, और पीठ पर चोट के निशान पाए गए. पुलिस ने भाई से पूछताछ की, और उसने अपना गुनाह कबूला. पुलिस ने आरोपी के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार  कर लिया है.</p>
<p>पीरियड्स की सही जानकारी न होने की वजह से ये पहली मौत नहीं है. नेपाल में 5 में से 1 महिला पीरियड्स के समय घर से अलग एक झोपड़ी में रहती है. कभी बाढ़ का पानी तो कभी झौपड़ी में धुआं घुस जाने से 4 लड़कियों की मौत हुई थी. आज भी भारत में 2 करोड़ 30 लाख लड़कियां पीरियड शुरू होते ही पढ़ाई छोड़ देती हैं. 70 % भारतीय लड़कियां पीरियड्स शुरू होने से पहले अनजान होती हैं. भारत में सिर्फ 36% महिलाएं और लड़ियां सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करती हैं. मेंस्ट्रुअल अवेयरनेस न होने से कई तरह की बीमारियां होती हैं. इस मुद्दे पर खुलकर बात न कर पाने की वजह से सही समय पर इलाज नहीं मिल पाता. आज अर्बन इंडिया पीरियड लीव पर बहस कर रहा है, पर कस्बों और गांवों में पीरियड का नाम आते ही चुप्पी साध ली जाती है. मानव शरीर के इस नेचुरल प्रोसेस पर जागरूकता फैलाना, खुलकर बात करना, लड़कियों की परेशानियों और चुनौतियां का समाधान ढूंढ़ना कितना ज़रूरी हो गया है आप समझ ही गए होंगे.   </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Thu, 11 May 2023 15:32:14 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/sharminda/man-mistakes-menstrual-blood-to-be-result-of-sex-tortures-12-yr-old-sister-to-death]]></guid><category><![CDATA[शर्मिन्दा]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/LDahGNT9hXyUNKqNI1mN.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/LDahGNT9hXyUNKqNI1mN.jpg"/></item></channel></rss>