<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ महालक्ष्मी समूह]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/mhaalkssmii-smuuh</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/mhaalkssmii-smuuh" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Tue, 30 Jan 2024 00:00:40 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[वेस्ट से बेस्ट पेपर बेग ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-making-bags-from-newspaper</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/oVgbFe0n71aLYpRJDKLu.jpeg"><p>मनीषा पाटीदार और अलका  तिवारी के हाथों में अखबार का पेपर है. वही पेपर जो रद्दी हो गया.जिसे हम रद्दी वाले को बेचने के सिवाय कुछ उपयोग में नहीं लाते. उसी अख़बार को बड़े खूबसूरत अंदाज़ में मनीषा ने नया शेप दे दिया. देखते ही देखते पेपर बेग तैयार हो गया. मनीषा ,अनिता के चेहरे पर मुस्कान आ गई. वह पिछले छह दिन से ऐसे  ही बेग बनाने की प्रेक्टिस कर रही थी. आज वह बहुत ही सुंदर बेग बनाना सीख गई. ये स्वसहायता समूह से जुड़ी महिलाएं खरगोन जिले की हैं. आजीविका मिशन ने ऐसी 15 महिलाओं को पहली बार पेपर बेग बनाने की ट्रेनिंग दी.  बिना किसी लागत के इस कारोबार को लेकर महिलाओं ने नए सपने संजोये और भरोसा हो गया कि वह अब अपने पैरों पर खड़ी हो जाएंगी.</p>
<p>दरअसल पॉलीथिन के उपयोग और बढ़ते खतरे से निपटने के लिए कुछ महिलाओं ने आगे कदम बढ़ाए. गांव में फेंकी गई पॉलीथिन की थैलियां, पन्नियां को  मवेशियों द्वारा खा लेने के बाद तड़प -तड़प कर मरते देख महिलाओं का दिल पसीज गया. यह घटनाएं गांव में सामान्य है. मवेशियों की मौत और पशु पालकों के लाखों के नुकसान का असर ये हुआ कि महिलाओं ने विकल्प तलाशना शुरू किए. हर हाल में पॉलीथिन का बढ़ता उपयोग और उसके नुकसान से बचने के लिए महिलाओं ने ठान ली.कपड़े की थैलियों के घटते प्रचलन से गांव की महिलाओं सहित दूसरे लोग भी परेशान थे. जहां चाह,वहां राह की सोच रखने वाली इन महिलाओं के लिए आजीविका मिशन प्रोजेक्ट राह बन कर आ गई. महिलाओं ने अलग-अलग गांव में स्वसहायता समूह बनाए. रास्ता भी मिला और विकल्प भी. </p>
<p>रानी लक्ष्मी स्वसहायता समूह की मनीषा पाटीदार  कहती हैं -" मैं कई दिनों से परेशान थी. रामपुरा गांव में समूह बनाया पर कोई खास काम नहीं हो पा रहा था. बेग बनाने में कोई अलग खर्ज या बजट कि जरूरत नहीं होगी. इसी समूह कि पारू पाटीदार और वंदना भी खुश हैं. गांव की ही महालक्ष्मी समूह की आशा यादव कहती हैं -" मेरे पास केवल दो एकड़ जमीन है. इतना खर्च नहीं निकल पाता. मुझे पाता चला कि बेग बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है. मैंने मन लगा कर सीखा. "रामपुरा की ही महिला शक्ति समूह की अलका यादव  ने भी ट्रेनिंग ली. वे  कहती हैं -" हमारे समूह में कई गरीब महिलाएं भी हैं. उनको इस धंधे से लाभ मिलेगा. गोपालपुरा की अनिता तिवारी कहती हैं -इस ट्रेनिंग में बेग बनाने में कोई लागत नहीं आती. हमारे पास कोई बजट नहीं था. अब बेग बनाकर कारोबार करेंगे इस ट्रेनिंग में ज्योति ,किरण आदि भी शामिल हुई.  </p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/mwElpOnIZmj6491BqGEp.jpeg" alt="paper bags"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>(समूह द्वारा बनाये पेपर बैग Image Credits: Ravivar vichar)</em></span></p>
<p>आजीविका मिशन ने इस प्रोजेक्ट पर खास फोकस किया. मिशन की परियोजना प्रबंधक सीमा निगवाल ने बताया कि आरसेटी द्वारा यह ट्रेनिंग दिलवाई गई.यह ट्रेनिंग लगातार जारी रहेगी.महिलाओं को लगातार प्रोत्साहन दिया जा रहा है.  नरेश  शेंद्रे का कहना है - यह ट्रेनिंग खास विशेषज्ञों ने महिलाओं को दी. महिलाएं केवल पांच सौ रुपए में अपना कामकाज शुरू कर सकती है. ट्रेनर हितेश पंवार ने बताया कि रद्दी पेपर से किराना सामान में उपयोग कर सकते हैं. आजकल शॉपिंग मॉल में जी पेपर बेग का उपयोग करते हैं, उनको बनाने कि भी ट्रेनिंग दी गई. ये पेपर थोक में सस्ते मिल जाता है. अब तक वे खरगोन के अलावा धार ,हरदा ,बैतूल ,छिंदवाड़ा शहरों में भी महिलाएं ट्रेनिंग ले कर काम शुरू कर चुकी हैं. </p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/YAFSkAysm2GMula7bJye.jpeg" alt="paper bags"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>(समूह द्वारा बनाये पेपर बैग Image Credits: Ravivar vichar)</em></span></p>
<p>जिला पंचायत की सीईओ ज्योति शर्मा कहती हैं -" यह प्रोजेक्ट बहुत सफल रहेगा. समूह की महिलाओं ने मन लगा कर ट्रेनिंग ली. ऑफिस फाइल्स बनाना भी सीखी जिसका उपयोग हर ऑफिस में किया जाता है. और भी समूह की महिलाओं को इसकी ट्रेनिंग दिलवाई जाएगी.मुझे ख़ुशी है कि जिले में महिलाएं कई तरह के रोजगार से जुड़ कर परिवार में कंधे से कंधा मिला कर साथ चल रहीं है. "कलेक्टर शिवराज सिंह वर्मा कहते हैं -" जिले की महिलाएं बहुत मेहनती हैं. समूह को अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार के अवसर दिलवाए जाएंगे. जिले में बहुत संभावनाएं हैं.महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्थानीय विकल्पों पर जोर दिया जा रहा है. " </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Tue, 30 Jan 2024 00:00:40 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-making-bags-from-newspaper]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/oVgbFe0n71aLYpRJDKLu.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/oVgbFe0n71aLYpRJDKLu.jpeg"/></item><item><title><![CDATA['बर्तन बैंक' से कम होगा प्लास्टिक यूज़ ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-bartan-bank-in-chattisgarh-earth-day-22-april-bhilai</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/n13SQtMzUpA24PHx5DMZ.jpg"><p dir="ltr">अगर आप से पूछा जाए किसी ऐसी चीज़ के बारे में, जिसका कोई फायदा नहीं है और वह हमारे पर्यावरण और स्वास्थय को सिर्फ नुक्सान पहुंचा रही है, तो आपके दिमाग में सीधे प्लास्टिक का नाम आएगा. प्लास्टिक उन कुछ चीज़ों में से एक है जिसे इस्तेमाल कर के हम अपनी और अपने भविष्य की पीढ़ियों के लिए धरती पर रहना और मुश्किल बना रहे है. प्लास्टिक का इस्तेमाल सबसे ज़्यादा थैलियों और डिस्पोजल के रूप में किया जाता है. इसी इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए और डिस्पोजल से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को ख़त्म करने के लिए छत्तीसगढ़ के भिलाई-3 चरोदा नगर निगम में एक अनोखी पहल की शुरुआत की. यहां आजाद चौक, उमदा, गनियारी, मोरिद, सोमनी, इंदिरा पारा चरोदा, उरला और दादर में 'बर्तन बैंक' खोला गया. इस बैंक के संचालन की ज़िम्मेदारी महिल स्वयं सहयता समूहों को दी गयी. </p>
<p dir="ltr">पहल को और भी ज़्यादा तेजी से आगे बढ़ाने के लिए यह फैसला किया गया कि सामाजिक, धार्मिक और मांगलिक कार्यों के लिए बर्तन बिना पैसे के दिए जाएंगे. मेयर निर्मल कोसरे ने सभी आठों स्थानों के लिए महिला स्व सहायता समूहों को 1 लाख के बर्तन दिए और कहा- "छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए यह कदम उठाया है. इस कदम से महिलाओं को रोजगार भी मिल सकेगा. मिनिस्ट्री ऑफ़ एजुकेशन इनोवेशन सेल (MIC) में लिए गए निर्णय के अनुसार इस कदम का क्रियान्वयन किया जा रहा है.” भारत में आए दिन कोई न कोई कार्यक्रम जैसे भंडारा, छट्ठी, शादी, पार्टियां, होते ही रहते है. उस वार्ड और मोहल्ले के कार्यक्रमों का काम बर्तन बैंक की संचालिका महिला SHGs को मिलता रहेगा और बर्तन बैंक की स्थापना के 2 प्रमुख उद्देश्य भी पुरे हो जाएंगे. इसके लिए गुरु वंदना स्वयं सहायता समूह, आदिवासी महिला समूह, स्वच्छ समूह, भक्ति महिला समूह, महालक्ष्मी समूह, मां दुर्गा महिला समूह, आस्था महिला समूह आदि को बर्तन दिया गया.</p>
<p dir="ltr">छत्तीसगढ़ के भिलाई गांव में उठाया गया यह कदम एक बहुत ही अच्छी पहल साबित होगा. धरती को आए दिन कितनी तकलीफों का सामना करना पड़ता है जिसमें प्लास्टिक प्रदुषण एक बहुत बड़ी समस्या है. ठानना हर व्यक्ति को पड़ेगा, तभी बदलाव लाना संभव है. इस तरह की पहल सिर्फ हमारे देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को शुरू करनी चाहिए. ‘अर्थ डे’ जो कि हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है, उस दिन हमे यह ठान लेना चाहिए कि अपनी धरती को बचाने के लिए हम कोई भी कदम उठाने को तैयार है. हमारी आने वाली पीढ़ी को पूरी तरह सुरक्षित रखने कि ज़िम्मेदारी अब हमारे हाथों में ही है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रिसिका जोशी</dc:creator><pubDate>Thu, 20 Apr 2023 12:19:00 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-bartan-bank-in-chattisgarh-earth-day-22-april-bhilai]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/n13SQtMzUpA24PHx5DMZ.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/n13SQtMzUpA24PHx5DMZ.jpg"/></item></channel></rss>