<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ महिला एवं बाल विकास विभाग]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/mhilaa-evn-baal-vikaas-vibhaag</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/mhilaa-evn-baal-vikaas-vibhaag" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 30 Nov 2023 15:28:23 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[लाड़ली बहना: महिलाएं रुपये-पैसे की बेहतर प्रबंधक क्यों होती हैं? ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/p-nariharan-shares-why-women-are-better-managers-of-money</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/jkxsGMT2zT1gGqyluAkZ.jpg"><p>मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना (MMLBY) मध्य प्रदेश में 23 से 60 वर्ष की आयु की महिलाओं के लिए विशेष योजना है. जून 2023 से चयनित लाभार्थी महिलाओं के खाते में 1000/- रुपये का वास्तविक प्रत्यक्ष लाभार्थी हस्तांतरण (डायरेक्ट बेनेफिशरी ट्रांसफर) किया जाएगा.</p>
<p>मध्य प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग की वेबसाइट के अनुसार सांख्यिकीय साक्ष्य (स्टैटिस्टिकल एविडेंस) बताते हैं कि शहरी क्षेत्रों में महिला से पुरुष श्रम बल भागीदारी अनुपात 23.3: 57 है, जो क्रमशः .7% और 13.6:59.6% है.</p>
<p>इसका तात्पर्य यह है कि ऐसी महिलाएं, जिनके पास व्यय योग्य आय (एक्सपेंडेबल इनकम) का अपना स्रोत है, वे पुरुषों की तुलना में बहुत कम है. इससे न सिर्फ उनकी आर्थिक स्वतंत्रता प्रभावित होती है बल्कि इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य और पोषण के साथ-साथ उनके बच्चों पर भी पड़ता है. गरीब और निम्न आय वर्ग परिवारों के लिए MMLBY के तहत दिया जा रहा पैसा आवश्यक घरेलू सामान, सब्ज़ियों, फल, दूध और किराने का सामान खरीदने को आसान बना रहा है.</p>
<p>5 मार्च, 2023 को लॉन्च के बाद, एक बहस शुरू हुई कि राजकीय खजाने से महिलाओं को प्रति वर्ष 12,000 रुपये दिए जाएं या नहीं ? इस व्यय का मतलब यहां आवश्यक वस्तुओं के भुगतान से है. यह पहले से निर्धारित योजना का हिस्सा होता है, जिसके लिए बजट भी पहले से तय किया जाता है. महिलाएं घर का बजट संभालती है और ऐसा देखा गया है कि खर्च करने के मामले में महिलाएं स्वभाव से सतर्क होती हैं. दिन-प्रतिदिन के खर्चों का प्रबंधन करना और यह सुनिश्चित करना कि परिवार के वित्तीय लक्ष्य पूरे हों, उनकी प्राथमिकता होती है.</p>
<p>व्यवहार संबंधी अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाएं पैसे बचाने और बुद्धिमानी से निवेश करने की अधिक संभावना रखती हैं. साथ ही परिवार-उन्मुख होने की वजह से प्राथमिकताओं को बेहतर ढंग से संतुलित कर पाती हैं. खरीदारी करने से पहले डील, छूट और स्कीम को देखती हैं.&nbsp;</p>
<p>महिलाओं में उद्यमिता होती है. छोटे उद्यमों को शुरू कर, सफलता पाना आज कई घरों की कहानी है. उद्यम का स्केल और आकर उनके लिए ज़्यादा मायने नहीं रखता . उनके लिए मार्जिन मायने रखती है. महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) ने भारत में बड़ी सफलता पाई है. रोज़मर्रा के वित्तीय निर्णय लेने की क्षमता उन्हें अपने खर्चे बेहतर तरीके से करना सिखाती है. इस तरह समझकर खर्च करना, एक कौशल के रूप में देखा जा सकता है. &nbsp;</p>
<p>महिलाएं किराए, उपयोगिताओं, आवश्यक वस्तुओं और रेस्तरां में बाहर खाने के बीच किस पर पहले खर्च करना है इसको बखूबी प्राथमिकता देती है. अपनी नेगोशियेशन क्षमता की वजह से वह बेहतर निर्णय लेती हैं. खरीदारी के दौरान पूछना परखना और फिर कोई निर्णय लेना, छोटी खरीददारी से लेकर हवाई जहाज खरीदने में ज़रूरी होता है. &nbsp;</p>
<p>भारत में महिलाओं के खर्च और बचत की आदतों में संस्कृति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. इसीलिए उनसे अक्सर रुपये-पैसे के साथ मितव्ययी और जिम्मेदार होने की उम्मीद भी की जाती है. जैसे अपनी सीमित आय और अप्रत्याशित खर्चों को पूरा करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में बचत करने की अधिक संभावना देखी जाती है. सांस्कृतिक और सामाजिक मानदंडों के आधार पर भारतीय महिलाओं की वित्तीय संसाधनों तक पहुंच में अंतर है.</p>
<p>समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से, MMLBY के तहत दी जाने वाली राशि महिलाओं के वित्तीय सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करेगी. ऐसी नीतियां महिलाओं को अपने परिवार का बजट तय करने के अवसर देती हैं. इस तरह से निम्न आय वर्ग महिलाओं में आत्मसम्मान की बढ़ोतरी होगी और वह अपनी बात रखने में सक्षम बनेगी. &nbsp;<br>&nbsp;</p>
<p><em>(लेखक पी. नरहरि, आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में सचिव, एमएसएमई उद्योग विभाग, मध्य प्रदेश सरकार के पद पर कार्यरत है)</em><br><em>(साभार - द टाइम्स ग्रुप)</em><br><em>(अनुवाद - रविवार ब्यूरो)</em></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"> पी. नरहरि</dc:creator><pubDate>Thu, 30 Nov 2023 15:28:23 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/p-nariharan-shares-why-women-are-better-managers-of-money]]></guid><category><![CDATA[एक्सपर्ट विचार]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/jkxsGMT2zT1gGqyluAkZ.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/jkxsGMT2zT1gGqyluAkZ.jpg"/></item><item><title><![CDATA[सांझा चूल्हा बुझे तो बच्चे होंगे कुपोषित ! ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/sanjha-choolha-suffers-due-to-shg-strike-in-neemuch</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vXV6E9PlfT2wDdm6enrD.jpg"><h1 dir="ltr"><strong>सांझा चूल्हा बुझे तो बच्चे होंगे कुपोषित !</strong></h1>
<p dir="ltr"><span><strong>स्वयं सहायता समूह </strong>(Self Help Group) की <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-women-become-cowherd-and-earning-livelihood">महिलाओं</a> को<strong> सांझा चूल्हा</strong> (Sanjha Choolha) स्कीम और मध्याह्न भोजन (MDM) योजना से हटा दिया जाए. इस स्कीम से जुड़े समूह और महिलाओं को मिलने वाला मानदेय भी पर्याप्त नहीं है. यहां तक कि भोजन बनाने वाला रसोइया खुद अपना पेट नहीं भर पा रहा. उसका मानदेय इतनी महंगाई के बावजूद केवल 500 रुपए महीना है. सभी का मानदेय बढ़ाया जाए. यदि मांगे नहीं मानी तो आगामी एक अगस्त से पूरे प्रदेश में स्वयं सहायता समूह इस योजना से दूर हो जाएंगे. सांझा चूल्हा बंद होने पर आंगनबाड़ी (Anganbadi) के बच्चों के<strong> कुपोषण</strong> (Anemic) की समस्या बढ़ेगी. इसकी जवाबदारी सरकार और शासन की होगी. </span><span>प्रांतीय <a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/daera-women-entrepreneurs-turning-pharmaceutical-waste-into-furniture-fabrics">महिला</a> स्वयं सहायता समूह (<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/ripa-namkeen-made-by-shg-women-reaching-villages">SHG</a>) महासंघ की&nbsp;<strong>नीमच </strong>(Neemuch)<strong>&nbsp;</strong>जिला इकाई ने <strong>महिला एवं बाल विकास विभाग </strong>(Women and child welfare) के <strong>आयुक्त</strong> (Commissioner) के नाम <strong>कलेक्टर ऑफिस</strong> (DM Office) में नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा.</span></p>
<p dir="ltr"><span><img alt="NEEMUCH GYAPAN" src="https://img-cdn.thepublive.com/fit-in/447x0/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/xvlfECEg3azVhIPFQshs.jpg" style="width: 447px;"></span></p>
<p dir="ltr"><span style="font-size: 8pt;"><em><strong>ज्ञापन पत्र को पढ़ते हुए पदाधिकारी माया बैरागी (Image Credit: Ravivar Vichar)</strong></em></span></p>
<h2>रसोइए को सिर्फ 500 रुपए&nbsp;</h2>
<p dir="ltr"><span>जिला<a href="https://ravivarvichar.in/kahaniyan/vandana-patidar-changing-lives-of-women-with-the-help-of-shgs"> इकाई </a>&nbsp;की अध्यक्ष माया बैरागी और सचिव पिंकी शर्मा ने शिकायत की, कि उनकी मांगों को लंबे समय से अनदेखा किया जा रहा. <strong>सांझा</strong> <strong>चूल्हा</strong> में नाश्ता-भोजन बनाने वाले रसोइए को केवल 500 रुपए और मध्याह्न भोजन बनाने वाले को दो हजार रुपए महीना दिए जाते हैं. यह मानदेय दो हजार और छह हजार किया जाना चाहिए. विधार्थियों की उपस्थिति के अनुसार ही राशन खरीदी का भुगतान भी अभी नहीं किया जाता.</span><span>बैरागी और शर्मा ने मांगपत्र&nbsp; में कहा कि समूह का स्थाई अनुबंध हो, जब तक समूह नया नहीं रखा जाए. साथ ही बीमा योजनाओं सहित गैस सिलेंडर खर्च और अन्य मांगे रखी.&nbsp; इस मौके पर कई समूह कि महिला सदस्य मौजूद थीं.</span></p>
<p dir="ltr"><span>जिले में दो हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र हैं.जहां सांझा चूल्हा योजना और पूरक शक्ति पोषण योजना लागू है.&nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp;</span></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Sat, 22 Jul 2023 12:16:14 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/sanjha-choolha-suffers-due-to-shg-strike-in-neemuch]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vXV6E9PlfT2wDdm6enrD.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/vXV6E9PlfT2wDdm6enrD.jpg"/></item><item><title><![CDATA[बाल विवाह बनाम अक्षय तृतीया ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/nazariya/cases-of-chilc-marriage-rise-on-akshay-tritiya</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xB8tUDN0fKqRtEcFMJGE.jpg"><p>अक्षय तृतीया यानि क्षेत्रीय बोली में आखातीज. बिना मुहूर्त का अबूझ मुहूर्त. विवाह के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त इसे ही मानते हैं. जब विवाह के लिए कोई मुहूर्त न निकले तो आखातीज का मुहूर्त सबसे बढ़िया. और यही कारण हमारे देश में इस दिन विवाह के आयोजन लाखों की संख्या में होते हैं. यहां तक कि सरकार की कन्यादान योजनाओं को भी इस तारीख में कर दिया जाता है. मान्यता है कि इस दिन किये गए विवाह सफल होते हैं. मान्यता यह भी है कि श्रीकृष्ण का वरदान है कि इस दिन पूजा पाठ करने से सभी पापों से मुक्ति हो जाती है. इसी दिन सामूहिक आयोजन की आड़ में बाल विवाह भी हो जाते हैं. अधिकांश शिकायतें इसी दिन सामने आती हैं.लगातार बदलते माहौल और नाबालिगों के साथ बेटियों की शिक्षा और उनको आत्मनिर्भ बनाने पर जोर दिया जा रहा है,ऐसी स्थिति में सरकारें भी काफी हद चेत गईं. साल 2006 में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनयम बना. निगरानी होने लगी. बावजूद बाल विवाह के आंकड़े चिंताजनक है. इससे यह साबित होता है कि कानून ही नहीं समाज में काउंसलिंग की ज्यादा जरूरत है. </p>
<p>अभी भी यदि आंकड़ों पर नज़र डालें तो यूपी, बिहार, वेस्ट बंगाल और त्रिपुरा में बाल विवाह सबसे अधिक दर्ज किए गए. मप्र स्टेट में यदि 2021 तक जारी हुए आंकड़ों में बाल विवाह रोकने पर 10 प्रतिशत की कमी आई. लेकिन अभी भी देश में 15 लाख बाल विवाह सालाना होने की शिकायतें मिल रहीं हैं. इसका विषम प्रभाव यह पड़ा कि 1 करोड़ 11 लाख अस्सी हजार नाबालिग बच्चियां 2021 तक प्रेग्नेंट हो गईं. इससे ज्यादा दुखद यह है कि हर साल 22 हजार निर्दोष बेटियां प्रिग्नेंसी में दम तोड़ देती है. इससे साफ है कि सरकार की योजनाओं पर अभी रूढ़ियों में जकड़ी परम्पराएं भारी पड़ रहीं हैं.कुछ परिवार की डाली है कि उनके समाज में लड़की की यदि जल्दी शादी न की गई तो बाद में लड़के नहीं मिलते. दूसरा कारण गांव में गलत अफवाहों और लड़की के बदनाम होने से डरते हैं. यही वजह कानून की जानकारी और कार्रवाई के डर के बावजूद चुपके से शादी कर देते हैं. बैतूल की 17 साल की रजनी (बदला हुआ नाम) कहती है-" मेरी बिल्कुल शादी का मन नहीं था. घर वालों ने ज़िद पकड़ ली. मैंने अपनी सहेली की मदद ली. और 1098 नंबर पर शिकायत करवा दी. मैं अब आगे पढ़ रही हूं."        </p>
<p>ग्रामीण इलाकों में  चोरी-छुपे अभी भी बच्चियों के विवाह हो रहे हैं. ये ही सरकारी अमले के लिए ये केस ही चुनौती बन जाते हैं. खरगोन जिले की महिला एवं बाल विकास विभाग की सहायक संचालक मोनिका बघेल कहती हैं -" पिछले वर्ष 15 साल की लड़की की शादी की सूचना मिली. पास ही के तीर्थ गांव के एक मंदिर में हम पहुंचे. बाराती आधी-अधूरी शादी के बीच दुल्हन के भेष में तैयार की बच्ची को लेकर भाग गए. हमने पुलिस की मदद से विवाह को शून्य घोषित करवाया."<br>एक दूसरे इलाके के प्रकरण में  एक लड़की को हल्दी लगे हाथों से मंडप में से उठाया और और स्कूल लेजाकर किताबें थमाई. प्रिग्नेंट हुई एक बच्ची को देर से पता चला. कोर्ट ने निर्धारित समय निकल जाने और गर्भ में बच्चे की जान को खतरा बता कर अबॉर्शन से मना कर दिया. 16 साल की बच्ची की जान बड़ी मुश्किल से बची.            </p>
<p>इस साल भी राजस्थान,मप्र,छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में शासन ने अलर्ट जारी किया. पुलिस महकमा ,महिला एवं बाल विकास, सामाजिक संघठन सहित कई लोगों को इस बाल विवाह रोको अभियान से जोड़ा गया है. गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. जयश्री श्रीधर का कहना है कि 18 साल से काम उम्र में बाल विवाह करना किसी भी लड़की के जीवन के लिए खतरनाक हो सकता है. उसका शारीरिक विकास पूरी तरह नहीं होता. न ही वह प्रिग्नेंट होने की स्थिति में रहती है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Mon, 24 Apr 2023 10:51:37 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/nazariya/cases-of-chilc-marriage-rise-on-akshay-tritiya]]></guid><category><![CDATA[नज़रिया]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xB8tUDN0fKqRtEcFMJGE.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/xB8tUDN0fKqRtEcFMJGE.jpg"/></item></channel></rss>