<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/" xmlns:geo="http://www.w3.org/2003/01/geo/wgs84_pos#" xmlns:georss="http://www.georss.org/georss" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" version="2.0"><channel xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><title><![CDATA[ महिला स्वसहायता समूह]]></title><link>https://ravivarvichar.in/tags/mhilaa-svshaaytaa-smuuh</link><description/><atom:link href="https://ravivarvichar.in/rss/tags/mhilaa-svshaaytaa-smuuh" rel="self"/><language>en-us</language><lastBuildDate>Thu, 23 Mar 2023 14:42:46 +0530</lastBuildDate><item><title><![CDATA[ससुराल ने ठुकराया, आज 'बैंक सखी' बन संवार रही है ठीकरी को ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/bank-sakhi-helps-95-shgs-get-bank-loans</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/5n15ODzGWtWWGYCfRvpS.jpeg"><p>फर्श पर कई महिलाओं के बीच घिरी हुई, पूजा यादव. महिलाओं की ऐसी भीड़ रोज लग जाती है. पूजा इन महिलाओं के कहते खोल रही, तो किसी के आधारकार्ड बना रही. बड़वानी जिले के ठीकरी ब्लॉक में आजीविका मिशन सेंटर पर रोज़ ये नज़ारा दिखता है. जिले में पूजा सफलता के ऐसे रिकॉर्ड बना दिए कि खुद दूसरों के लिए आदर्श बन गई. जिले में अपने काम के बलबूते पर नंबर वन पायदान पर है. आज केवल बारहवीं पास पूजा आज करोड़ों रुपए का हिसाब चुटकियों में कर देती है. लेकिन पूजा को सफलता का ये मुकाम यूहीं नहीं मिला.इस सफर की शुरुआत बहुत कड़वी है.&nbsp;</p><p>अपने लेपटॉप पर काम में व्यस्त पूजा कहती है -"आज मैं आठ घंटे से ज्यादा समय ग्रामीण महिलाओं से घिरी रहती हूं. कभी-कभी खुद पर विश्वास नहीं होता. हर लड़की की तरह मेरे भी सपने थे. शादी अच्छे घर हो. मेरा भी अच्छा परिवार हो. ससुराल वाले मुझे प्यार करे. मेरी शादी भी हुई ,लेकिन मेरे सपने चकनाचूर हो गए. मुझे ससुराल वालों ने नकार दिया. मुझे भगा दिया. ज़िंदगी में अलग-थलग पड़ गई.जीवन में उदासी के अलावा कुछ नहीं बचा</p><blockquote><p>ठीकरी तहसील के ही छोटे से गांव सेगवाल की रहने वाली पूजा अपनी पढ़ाई बारहवीं तक कर पाई. परिवार के लोग भी बहुत परेशान थे.पूजा ने कुछ दिन बाद चुप्पी तोड़ी. पूजा आगे बताती &nbsp;है - <em>"मैंने खुद को साबित</em></p><p><em>&nbsp;करने की ठान ली.तीन साल पहले गणगौर महिला स्वसहायता समूह बनाया. ग्राम संगठन से जुड़ी. सबसे बड़ी दिक्क्त थी नई टेक्नोलॉजी नहीं आती थी. लेपटॉप ऑपरेट करना सीखा. देखते ही देखते सब आसान लगने लगा.अब तक मैं 95 समूहों कि सैकड़ों दीदियों को दो करोड़ अस्सी लाख रुपए के लोन दिलवा चुकी हूं. ये जरूरतमंद महिलाएं अपने रोजगार से जुड़ गई.आजीविका मिशन से &nbsp;मेरी ज़िंदगी पूरी तरह बदल गई."&nbsp;</em></p><p>पूजा ने जिन महिलाओं को लोन दिलवाए वे महिलाएं किराना,जनरल स्टोर, आटा चक्की, सिलाई मशीने और मवेशी पालन का कारोबार कर रहीं हैं. सेगवाल की लक्ष्मी बाई कहती हैं -<em>" लोन मिल गया तो दूध डेयरी खोल ली. मजदूरी और दूसरे काम में भी घर नहीं चल पाता था." एक दूसरी दीदी सुनीता धनगढ़ बताती हैं -" गांव मदरानिया में ही लोन से छह भैसें खरीदी. दूध बेच कर कमाई शुरू कर दी. अब मैं &nbsp;मजदूरी पर नहीं जाती.ये लोन हमें पूजा दीदी ने दिलवाए. हम लोग कभी बैंक गए ही नहीं."</em></p></blockquote><p>ब्लॉक प्रबंधक श्रद्धा शर्मा कहती हैं - "<em>यहां दीदियां बहुत मेहनती हैं. सभी क्षेत्र में ये दीदियां काम कर रहीं हैं. इन सभी को लगातार प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाती है. सहायक ब्लॉक प्रबंधक सूरज जमरे हर सेंटर का नियमित दौरा करती है."&nbsp;</em>जिले में चर्चित हुए यहां के ग्राम संगठन को लेकर जिला पंचायत के परियोजना प्रबंधक योगेश तिवारी ने बताया- "ठीकरी ब्लॉक में सभी सहायता समूह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. मजदूरी &nbsp;से अब ये दीदियां खुद के पैरों पर खड़ी हो रही हैं.पूजा सबसे सफल बैंक सखी कि पहचान बना चुकी है।"&nbsp;</p><p>आदिवासी जिले में मजदूरी को अपनी किस्मत मान लेने वाली ये दीदियां खुद अब अपनी किस्मत बदलने को बेताब हैं. पूजा और परिवार को ख़ुशी है कि तलाक जैसी घटना को भूल कर वह अब ग्रेजुएशन कर रही है.&nbsp;</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 23 Mar 2023 14:42:46 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/bank-sakhi-helps-95-shgs-get-bank-loans]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/5n15ODzGWtWWGYCfRvpS.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/5n15ODzGWtWWGYCfRvpS.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[नदी संरक्षण कर रहीं SHG महिलाएं ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/photovideo/river-conservation-by-shg-women-in-mp</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/08fdsTieCU0hNQw5JgmV.jpeg"><p dir="ltr"><iframe style="width: 1192px; height: 668px;" src="https://www.youtube.com/embed/oDJPd8AmFmQ" width="1192" height="668" allowfullscreen="allowfullscreen"></iframe></p>
<p dir="ltr">आज भारत में 70% नदियां प्रदूषित हैं और इनका पानी इस्तेमाल के लिए अनुचित. नदियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई 1997 से हर साल 14 मार्च को मनाया जाता है. भारत में 400 से ज़्यादा नदियां हैंऔर इस साल 'नदियों का अधिकार' थीम हैं.  देश में रोज़ 4 करोड़ लीटर गन्दा पानी नदियों में बहा दिया जाता है जिससे हो रहे नुक्सान आज इंसान हो या जानवर सब भुगत रहें हैं. लेकिन, प्रदुषण के काले बादलों के बीच से SHG की पहल बेहतर कल की उम्मीद जगा रही है. भारत में महिला स्वसहायता समूहों ने अपने जल संरक्षण प्रयासों से नदियों और झीलों को बचाने में अहम भूमिका निभाई. राजस्थान में जल सहेलियों ने जल संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाई और पानी को बचाने वाले तालाब, बंधान जैसी संरचनाओं के निर्माण और रखरखाव में मदद करती है. समूह ने राजस्थान में कई सूखे जल निकायों को बचाने और वापिस चालू करने में मदद की.</p>
<p dir="ltr">महाराष्ट्र में पानी फाउंडेशन महिलाओं को उनके गांवों में जल योद्धा बनने के लिए ट्रेनिंग देता है. ये महिलाएं जल संरक्षण के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए काम करती हैं और वाटरशेड संरचनाओं जैसे मिट्टी के बांधों, खाइयों और रिसाव टैंकों के निर्माण में मदद करती हैं.असम में नारी शक्ति पुरस्कार जो कि भारत सरकार विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली महिलाओं को देती है. यह पुरस्कार असम की महिलाओं के एक समूह को दिया गया था जिन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी की सफाई के लिए एक स्वसहायता समूह बनाया. उन्होंने प्लास्टिक कचरे के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा की और नदी और उसके किनारों को साफ करने का अभियान शुरू किया.</p>
<p dir="ltr">उत्तराखंड में महिलाओं ने राज्य के जल संसाधनों की रक्षा के लिए समूहों का गठन किया. उन्होंने वर्षा जल संचयन प्रणाली (रेन वॉटर हार्वेस्टिंग ) और पारंपरिक जल प्रबंधन प्रथाओं को दोबारा शुरू करने के लिए  जागरूकता फैलाई. गुजरात का उजेली गांव जल संरक्षण का एक मॉडल है. गांव की महिलाओं ने बारिश के पानी को इकट्ठा करने और इसे ज़मीन के अंदर टैंकों में जमा करने के लिए एक प्रणाली बनाई. गांव ने पानी को रिसाइकिल करने के लिए वेस्टवाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया.</p>
<p dir="ltr">ये तो बस कुछ ही कहानियां हैं, देशभर में कई महिला स्वसहायता समूह हैं जो जल संरक्षण और नदियों और झीलों को बचाने की दिशा में काम कर रहे हैं ताकि सूखती नदियों को बचाया जा सके और इनके साफ़ पानी में घुलते केमिकल और प्लास्टिक को रोका जा सके. इन समूहों को सरकार द्वारा ट्रेनिंग और तकनीक मुहैय्या करवाई जानी चाहिए ताकि योजनाबद्ध तरीके से ये समूह नदियों को बचाने का काम कर सके. साथ ही इन महिलाओं का साथ देने के लिए इस दिशा में काम कर रही संथाओं और आम लोगों को भी आगे आना होगा, तभी इस मुहीम को और बढ़ाते हुए 311 प्रदूषित नदियों को बचाया जा सकता है.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Wed, 22 Mar 2023 11:16:34 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/photovideo/river-conservation-by-shg-women-in-mp]]></guid><category><![CDATA[वीडियो]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/08fdsTieCU0hNQw5JgmV.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/08fdsTieCU0hNQw5JgmV.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[जंगल जंगल बात चली है, पता चला है... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-contributes-in-nature-conservation</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/otoimf3sstUJy34ai3tG.jpg"><p>बंजर इलाका और गर्म हवाएं, बस ऐसा ही कुछ हाल था पुंजापुरा पहाड़ी का. देवास जिले के गांव पानकुआं के लोग बस अपनी पहाड़ी और इलाके का हाल देख खून के आंसू बहाते थे. फिर पिछले 3 साल में बदलाव की हवाएं चली और  नज़ारा कुछ ऐसा बदला कि बंजर पहाड़ी पर अब घने जंगल है और ठंडी हवाएं गांव वालों को राहत दे रही है . बड़ी बात यह की पुंजापुरा पहाड़ी अब "जंगल बैंक" साबित हो रही है. यह कमाल कर दिखाया SHG महिलाओं ने. अब यहां के ग्रामवासी विशेषकर SHG महिलाएं इस "जंगल बैंक " को संवारने और बढ़ाने में दिन-रात एक कर रहीं हैं.    </p>
<p>सिर्फ जंगल ही नहीं यहां पनपी घास भी दोहरा फायदा करा रही है. इस घास से SHG महिलाओं के पशुधन की दूध मात्रा बढ़ गई है. और चारे के लिए भी अब उन्हें दूर नही जाना पड़ता. </p>
<p>SHG महिलाओं ने अपने प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए बांस के पेड़ लगाना शुरू किए .अब जहां तक नज़र जाती है वहां तक बांस ही बांस के घने पेड़ वाला जंगल नज़र आता है. प्राकृतिक खूबसूरती से इस इलाके को नई पहचान मिल रही है.  बांस के इस जंगल ने स्वसहायता समूह SHG की उम्मीदें भी बढ़ गई.  विकास महिला स्वसहायता समूह की अध्यक्ष किरण सौलंकी बताती हैं -" हमारे इंतज़ार के दिन ख़त्म हुए. तीन साल की कड़ी मेहनत से बांस के ये पौधे अब बड़े होंगे है . यह हमारे समूह के लिए कमाई का जरिया बन जायेंगे. समूह की महिलाओं को अभी आठ हजार रुपए महीने मिलता है.कुछ ही दिनों में बांस की कटाई शुरू हो जाएगी. हमें इसका सीधा फायदा मिलेगा."</p>
<p>वन विभाग की कोशिशों और सहयोग से ही पुंजापुरा तालाब के किनारे बांस के पौधे रोपे गए . डिप्टी रेंजर मूलचंद भार्गव कहते हैं- "यह खास तरह के बांस वैसे नार्थ-ईस्ट इलाके में पाए जाते हैं. यह नमी और ठंडे प्रदेशों में पनपते हैं. यह मालवा इलाके में नया प्रयोग है. वन समिति और स्वसहायता समूह की महिलाओं ने ताकत झोंकी और तीन साल में जंगल खड़ा कर दिया."</p>
<p>विकास समूह की सदस्य रेखा तंवर कहती हैं -" मेरी जिंदगी तो मजदूरी और गरीबी में निकल रही थी. बंजर पहाड़ी पर जब पौधे लगाए ,तो सोचा नहीं था कि ये जंगल जिंदगी को पटरी पर ला देंगे. मेरे मवेशी एक या डेढ़ लीटर से ज्यादा दूध नहीं देते थे. जंगल से घास मिलने लगा. अब मवेशी चार लीटर से ज्यादा दूध देने लगे. धंधे में फायदा हुआ तो गाय ,भैंस और खरीद ली. बच्चे स्कूल जाने लगे."</p>
<p>इस जंगल की देख-रख करने वाले  जय लक्ष्मी समूह की सचिव कहती हैं -"हमारे पास काम नहीं था. यह बंजर पहाड़ी पर जब बांस लगाए  तब भी भरोसा नहीं था कि यह हमारे सपनों को हकीकत में बदल देगा. हमको अभी मुफ्त में घास मिल रही. मवेशी तंदरुस्त हो गए."    </p>
<p>अध्यक्ष सपना निगम भी बहुत खुश है. वह बताती है -" मेरे मवेशी ही नहीं बल्कि समूह के सभी सदस्यों को ये फायदा हुआ. जब बांस काट के बिकेंगे तब हमारी कमाई और बढ़ जाएगी." इस इलाके में साढ़े बारह हजार से ज्यादा बांस के पेड़ लहलहा रहें हैं. रेंजर नाहर सिंह भूरिया कहते हैं -" ये जंगल खड़ा करना हमारे लिए बड़ी चुनौती था. गांव की वन समिति के अलावा दो स्वसहायता समूह की दीदियों से यह अनुबंध किया. अभी आठ हजार रुपए महीने दे रहे है." </p>
<p>जिला पंचायत की परियोजना प्रबंधक शीला शुक्ला कहती हैं -"जिले के दो स्वसहायता समूह की बाइस महिलाओं को सीधा लाभ मिला. ये बांस  कटाई और बेचने से बड़ी कमाई कर सकेंगी. अभी घास मुफ्त में मिल रही है. गरीबी झेल रही महिलाओं और ग्रामीणों के जीवन स्तर सुधारने के लिए ये जंगल वरदान साबित हुआ." जिले के सहायक परियोजना प्रबंधक रामसिंह ने बताया -"तीन साल पहले 2022 में 25 हजार घास  के पुले महिलाओं को मिले, जबकि 2022 तक बत्तीस हजार पुलों को काटा. लगभग बीस हजार पुले विभाग के पास स्टॉक में हैं. ये बीस हैक्टेयर जमीन पर जबरदस्त ग्रोथ ले रहें हैं.</p>
<p>प्रकृति को सहेजना संभालने के साथ संसाधनों से कमाई करने की यह अनूठी कहानी है. आर्थिक आज़ादी की तरफ बढ़ते कदमों के साथ SHG महिलाएं जीवन के अलग अलग क्षेत्रों में अपने निशान छोड़ रही हैं और देश समाज के लिए कितना कुछ कर रही है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Tue, 21 Mar 2023 14:04:23 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-contributes-in-nature-conservation]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/otoimf3sstUJy34ai3tG.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/otoimf3sstUJy34ai3tG.jpg"/></item><item><title><![CDATA[गोबर पेंट से रंगीन होगी प्राकृति ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-make-natural-paint-from-cow-dung</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/DfmDcxDSsyLJ0fVuhSGk.PNG"><p dir="ltr">आज चारों तरफ़ नेचर को बचाने की चर्चा है. हर वो चीज़ जो हमारे पर्यावरण को नुक्सान पहुंचाए, उसके विकल्प ढूंढे जा रहे हैं. प्लास्टिक, फैक्ट्री, वाहन सब पर्यावरण को नुक्सान पहुंचा रहे हैं. इस लिस्ट में वॉल पेंट भी शामिल है. पेंट हमारे घर, फर्नीचर, और सामान को रंग देकर उनकी खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं. लेकिन ये रंगबिरंगे पेंट जिन केमिकल से बनाये जाते हैं वह ओज़ोन को नुक्सान पहुंचाकर ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ाते हैं. इस पेंट का नेचुरल विकल्प निकाला है स्वसहायता समूहों ने. इन महिलाओं ने गोबर से जैविक पेंट बनाकर तैयार किया. ये गोबर पेंट पानी और प्राकृतिक रंग जैसे हल्दी, इंडिगो और मेंहदी को मिलाकर बनाये जाते हैं. मिश्रण को फिर दीवारों, फर्श और अन्य सतहों पर लगाते हैं. गाय के गोबर में प्राकृतिक एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, और इस पेंट का इस्तेमाल कीड़ों, बैक्टीरिया और फंगस को हटाने में भी मदद करता है.</p>
<p dir="ltr">छत्तीसगढ़ में गाय के गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने के लिए 19 इकाइयां स्थापित की गई. 13,063 SHG की 150,036 महिलाएं गोबर पेंट बना रही हैं. छत्तीसगढ़ में गाय के गोबर से बने लगभग 60 प्रतिशत प्राकृतिक पेंट महिला स्वसहायता समूहों (SHG) के ज़रिये बाज़ार में बेचे जा रहे हैं. भूपेश बघेल सरकार गौठान (पशुधन शेड) योजना के तहत पशुपालकों से 2 रुपये किलो के हिसाब से गाय का गोबर खरीदती है और इसे स्वसहायता समूहों को देती है ताकि वे इसे प्राकृतिक पेंट और वर्मीकम्पोस्ट में बदल सकें.अब तक, इन इकाइयों ने 44,160 लीटर प्राकृतिक पेंट बनाया. उन्होंने 26,292 लीटर की बिक्री से 47.71 लाख रुपये का मुनाफा कमाया है. रायपुर जिले ने सबसे अधिक पेंट (20,841 लीटर) का उत्पादन किया, इसके बाद कांकेर (7,878 लीटर) का स्थान रहा. महिला SHG ने 200 करोड़ रुपये से अधिक की कम्पोस्ट खाद बेची. गांवों में स्वसहायता समूह जैविक खाद और गाय के गोबर से बने कीटनाशकों के उत्पादन और बिक्री के साथ-साथ गो-कश्त, मिट्टी के दीये, अगरबत्ती, मूर्ति और अन्य सामग्री जैसी वस्तुओं का उत्पादन और बिक्री कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं.</p>
<p dir="ltr">छत्तीसगढ़ के अलावा और भी राज्यों में गोबर पेंट बनाने का काम SHG महिलाएं ज़ोरो-शोर से कर रही हैं. राजस्थान का कुम्भा महिला स्वसहायता समूह एक दशक से ज़्यादा समय से गाय के गोबर का पेंट बना रहा है. उन्होंने अपने पर्यावरण के अनुकूल पेंट के लिए पहचान हासिल की है और अपने काम के लिए कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं.तमिलनाडु की महिला विकास स्वसहायता समूह ने गाय के गोबर का पेंट बनाना शुरू किया, ताकि उनके मवेशियों के कचरे का उपयोग किया जा सके और आय उत्पन्न की जा सके. बिहार के सनिता देवी महिला स्वसहायता समूह ने 2018 में गाय के गोबर का पेंट बनाना शुरू किया. </p>
<p dir="ltr">देशभर में और भी जगहों की SHG महिलाएं गोबर से पेंट बना कर पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं को भी बढ़ावा दे रही हैं. इन महिलाओं को सही ट्रेनिंग और तकनीक तक पहुंचाकर देकर पर्यावरण संरक्षण के और भी मुद्दों पर काम किया जा सकता है. इन महिलाओं के सहयोग और उनके इनोवेशन का सहयोग लेकर ज़मीने स्तर पर नेचर फ्रेंडली प्रेक्टिसेस को लागू करवाया जा सकता है.  <strong id="docs-internal-guid-39213382-7fff-fb17-b427-c03cbbb6c76c"><br><br><br><br><br></strong></p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Sat, 18 Mar 2023 18:34:31 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-make-natural-paint-from-cow-dung]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/DfmDcxDSsyLJ0fVuhSGk.PNG" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/DfmDcxDSsyLJ0fVuhSGk.PNG"/></item><item><title><![CDATA[राष्ट्रपति मुर्मू ने केरल में कुदुंबश्री SHG की सफलता को सराहा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/president-draupadi-murmu-applauds-the-success-of-kudumbshree-shg-in-kerala</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/qgMgIpNAZGWyT1JiX6l4.jpg"><p dir="ltr">कुदुंबश्री मतलब "परिवार की समृद्धि". इस नाम में केरल की महिलाओं और उनके परिवारों की उम्मीद बसती है. कुदुंबश्री एक महिला स्वसहायता समूह (SHG) आंदोलन है जिसकी शुरुआत 1997 में केरल से हुई थी. महिला सशक्तिकरण तक पहुंचने के लिए गरीबी ख़त्म करने के उद्देश्य से केरल सरकार ने ये आंदोलन शुरू किया. कम आय वाले परिवारों की महिलाओं को SHG से जोड़ने के लक्ष्य के साथ, केरल राज्य में गरीबी उन्मूलन परियोजना के रूप में कार्यक्रम शुरू हुआ. बाद में SHG को समुदाय-आधारित संगठन (CBO) में संगठित किया गया, जिन्हें 'कुदुम्बश्री इकाइयों' के रूप में जाना जाता है.</p>
<p dir="ltr">25 साल के इस सफर में कुदुंबश्री ने महिला सशक्तिकरण के सिद्धांतों को लागू करवाया और उन्हें आर्थिक आज़ादी तक पहुंचने के लिए मंच दिया. कुदुम्बश्री इकाइयों ने महिलाओं को अपना रोज़गार शुरू करने के लिए लोन, ट्रेनिंग और सहायता तक पहुंच प्रदान की. उन्होंने स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सामुदायिक विकास पहलों पर भी काम किया.</p>
<p dir="ltr">कुदुंबश्री SHG की सिल्वर जुबली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहां, "मेरा मानना ​​है कि जब महिलाओं को किसी भी समाज में अहम भूमिका दी जाती है, तो इसका परिणाम उस समाज की बेहतरी होता है. केरल में, महिलाएं अधिक शिक्षित और सशक्त हुई हैं, जो कई मानव विकास सूचकांकों पर केरल के बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है. "राष्ट्रपति ने केरेला के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को सराहा और 'कुदुंबश्री @ 25' और अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए 'उन्नति' बुकलेट का उद्घाटन किया. </p>
<p dir="ltr">राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने केरल के विकास में महिलाओं के योगदान को सराहा और कहा कि "नारी शक्ति के लिए आकाश ही सीमा है. " उन्होंने महिलाओं कि क्षमताओं पर धयान देते हुए उन्हें उद्यमकर्त्ता बनने में मदद करने के लिए कहा. </p>
<p dir="ltr">कुदुंबश्री SHG भारत में महिला सशक्तिकरण और गरीबी में कमी के लिए एक मॉडल बन गई है. आज, यह पूरे केरल में 44 लाख से ज़्यादा सदस्यों के साथ देश में सबसे बड़ा महिला स्वसहायता समूह आंदोलन है. कुदुंबश्री देशभर के SHG के लिए मिसाल है.</p>
<p> </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">रविवार ब्यूरो </dc:creator><pubDate>Fri, 17 Mar 2023 15:56:07 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/president-draupadi-murmu-applauds-the-success-of-kudumbshree-shg-in-kerala]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/qgMgIpNAZGWyT1JiX6l4.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/qgMgIpNAZGWyT1JiX6l4.jpg"/></item><item><title><![CDATA[नदी के जल अमृत को पावन कर रहे है अमृत सरोवर ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/river-conservation-by-shg-women-in-mp</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/08fdsTieCU0hNQw5JgmV.jpeg"><p>सिकुड़ती नदियों और गिरते जल स्तर को बचने के लिए सरकारें अपना जतन कर ही रही, इसके अलावा समाज सेवी ,पर्यावरण प्रेमी समूह के लोग भी अपने-अपने स्तर पर जुटे हुए हैं. मप्र में ही पूरी तरह सूख चुकी नदियों को वापस जिंदा करने के लिए भी ग्रामीणों और विशेषकर महिलाओं को समूहों के जरिए जोड़ा जा रहा है. मालवा -निमाड़ की कई नदियों पर यह काम चल रहा है. छोटी-छोटी नदियां जैसे दम तोड़ रही है ,वहीं जीवनदायनी नर्मदा नदी के सरंक्षण को लेकर भी पूरी ताकत झोंकी जा रही है. नर्मदा नदी के  लगातार किनारे कटने से बहाव में कमी देखी जा रही है. हालात और न बिगड़ें इसके लिए सरकार और नर्मदा प्रेमी लोग सतर्क और सजग हो गए.पूरे प्रदेश में नदियों के साथ भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए अमृत जल  सरोवर योजना लागू कर दी गई है. इंटरनेशनल डे ऑफ़ रिवर्स एक्शन जैसे ख़ास दिन को ये प्रयास सार्थक कर सकते हैं.</p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/7ZyfiEunYZnh9JxTA5XQ.jpeg" alt="Amrit Sarovar SHG"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar Vichar</em></span></p>
<p>इंदौर जिले को भी "पानीदार" बनाने के लिए सौ से अधिक अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं. इसमें जिले के ही 38 महिला स्वसहायता समूह की चार सौ से ज्यादा महिलाएं जुड़ गईं.ये जहां नदियों के आसपास संरक्षण का काम कर रही वहीं जल स्तर बढ़ाने के लिए सरोवर बन रहे हैं. इंदौर  जिले के ही महू क्षेत्र में भगवान परशुनाथ की जन्म स्थली जानापावा इलाके में ये महिलाएं नदियों की देखभाल ,तालाब में मछली पालन से कमाई भी कर रहीं हैं. नदियों को बचाने के लिए इन्हीं महिलाओं ने फलदार पौधा रोपण कर कमाई का दूसरा सोर्स भी तैयार कर लिया है.इस क्षेत्र की सात नदियों चोरल, मोरल ,अजनार, चंबल, नखेरी, गंभीर और कारम को बचाने के लिए भरोसा बन गया कि सरोवर और दूसरे काम से नदियों का जल स्तर बढ़ जाएगा. इंदौर जिले  के स्वसहायता  समूह की हेमलता कहती है-" नदियों को बचाने के लिए सरोवर और आसपास फलदार पौधे रोपे जिससे कमाई भी होगी. " इसी इलाके में स्वसहायता समूह चला रही लक्ष्मी स्वसहायता समूह की  रचना खुश हो कर कहती है - "नदियां हमारी पहचान है. इसे हम हर हाल में बचाएंगे और इससे कमाई भी होगी.खरगोन जिले की हथनी और पहाड़ी बरसाती नदी को भी इसी तरह पुनर्जीवित किया जा रहा है.</p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/U9nM6gtIfxTpCxRhAop1.jpeg" alt="Amrit Sarovar SHG"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar Vichar</em></span></p>
<p>जनपद पंचायत की असिस्टेंट ब्लॉक मैनेजर आरती सिंह कहती हैं -"महू इलाके गांव कुमठ ,बेका और पंचायत राजपुरा में समूह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. पानी के स्तर को बढ़ने के लिए कुमठ में तालाब भी बनाया जाएगा. बेगा के सात ,कुमठ के तीन और राजपुरा के चार महिलाओं के स्वसहायता समूह काम में जुटे हैं. </p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/8OXUapx6rPrNwMFeNPQM.jpeg" alt="AMRIT SAROVAR SHG"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>Image Credits: Ravivar Vichar</em></span></p>
<p>पूरे जिले में लगभग 11 लाख घनमीटर पानी को इकठ्ठा हो सकेगा, जिसमें साढ़े आठ सौ हेक्टेयर जमीन की सिंचाई के साथ जल स्तर बढ़ेगा.आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को नया रोजगार भी साथ -साथ मिलेगा. नदियों को बचाने के लिए जागरूकता बधाई जा रही है.</p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Thu, 16 Mar 2023 17:48:06 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/river-conservation-by-shg-women-in-mp]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/08fdsTieCU0hNQw5JgmV.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/08fdsTieCU0hNQw5JgmV.jpeg"/></item><item><title><![CDATA[नदी का घर बनेगा निर्मल... ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-conserving-rivers</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/wGYXuFg8FlXd4okwsm5A.jpg"><p dir="ltr">'इंडिया' नाम ही नदी के नाम से पड़ा. इंडस या सिंधु नदी ने हमें नाम दिया इंडिया. नदी को प्रकृति का उपहार, ईश्वर का आशीर्वाद ,जीवन का आधार माना गया. नदियों और झीलों के तट पर बसी गृहस्तियां और नदी के पानी से सींचते खेतों ने भारत को खेती में अव्वल पहचान दिलाई. लेकिन, आज भारत में 70% नदियां प्रदूषित हैं और इनका पानी इस्तेमाल के लिए अनुचित. नदियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई 1997 से हर साल 14 मार्च को मनाया जाता है. भारत में 400 से ज़्यादा नदियां हैंऔर इस साल 'नदियों का अधिकार' थीम हैं.  </p>
<p dir="ltr">SHG समाज और जीवन के हर क्षेत्र में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं वहीं जल संरक्षण और जल संवर्धन में भी पीछे नहीं हैं. देश में रोज़ 4 करोड़ लीटर गन्दा पानी नदियों में बहा दिया जाता है जिससे हो रहे नुक्सान आज इंसान हो या जानवर सब भुगत रहें हैं. लेकिन, प्रदुषण के काले बादलों के बीच से SHG की पहल बेहतर कल की उम्मीद जगा रही है. भारत में महिला स्वसहायता समूहों ने अपने जल संरक्षण प्रयासों से नदियों और झीलों को बचाने में अहम भूमिका निभाई. राजस्थान में जल सहेलियों ने जल संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाई और पानी को बचाने वाले तालाब, बंधान जैसी संरचनाओं के निर्माण और रखरखाव में मदद करती है. समूह ने राजस्थान में कई सूखे जल निकायों को बचाने और वापिस चालू करने में मदद की.</p>
<p dir="ltr">महाराष्ट्र में पानी फाउंडेशन महिलाओं को उनके गांवों में जल योद्धा बनने के लिए ट्रेनिंग देता है. ये महिलाएं जल संरक्षण के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए काम करती हैं और वाटरशेड संरचनाओं जैसे मिट्टी के बांधों, खाइयों और रिसाव टैंकों के निर्माण में मदद करती हैं.असम में नारी शक्ति पुरस्कार जो कि भारत सरकार विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली महिलाओं को देती है. यह पुरस्कार असम की महिलाओं के एक समूह को दिया गया था जिन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी की सफाई के लिए एक स्वसहायता समूह बनाया. उन्होंने प्लास्टिक कचरे के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा की और नदी और उसके किनारों को साफ करने का अभियान शुरू किया.</p>
<p dir="ltr">उत्तराखंड में महिलाओं ने राज्य के जल संसाधनों की रक्षा के लिए समूहों का गठन किया. उन्होंने वर्षा जल संचयन प्रणाली (रेन वॉटर हार्वेस्टिंग ) और पारंपरिक जल प्रबंधन प्रथाओं को दोबारा शुरू करने के लिए  जागरूकता फैलाई. गुजरात का उजेली गांव जल संरक्षण का एक मॉडल है. गांव की महिलाओं ने बारिश के पानी को इकट्ठा करने और इसे ज़मीन के अंदर टैंकों में जमा करने के लिए एक प्रणाली बनाई. गांव ने पानी को रिसाइकिल करने के लिए वेस्टवाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया.</p>
<p dir="ltr">ये तो बस कुछ ही कहानियां हैं, देशभर में कई महिला स्वसहायता समूह हैं जो जल संरक्षण और नदियों और झीलों को बचाने की दिशा में काम कर रहे हैं ताकि सूखती नदियों को बचाया जा सके और इनके साफ़ पानी में घुलते केमिकल और प्लास्टिक को रोका जा सके. इन समूहों को सरकार द्वारा ट्रेनिंग और तकनीक मुहैय्या करवाई जानी चाहिए ताकि योजनाबद्ध तरीके से ये समूह नदियों को बचाने का काम कर सके. साथ ही इन महिलाओं का साथ देने के लिए इस दिशा में काम कर रही संथाओं और आम लोगों को भी आगे आना होगा, तभी इस मुहीम को और बढ़ाते हुए 311 प्रदूषित नदियों को बचाया जा सकता है.  </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">मिस्बाह</dc:creator><pubDate>Thu, 16 Mar 2023 16:58:18 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/khabar/shg-women-conserving-rivers]]></guid><category><![CDATA[ख़बर]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/wGYXuFg8FlXd4okwsm5A.jpg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/wGYXuFg8FlXd4okwsm5A.jpg"/></item><item><title><![CDATA[केले के चिप्स बने फायदे का सौदा ]]></title><link>https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-wome-selling-banana-chips</link><description><![CDATA[<img src="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Rx5Q4lX7hmVMvfV3s9Jw.jpeg"><p>जिस महिला को कभी रेलवे स्टेशन जाना नसीब न था न रेल से कोई लंबी यात्रा की. इस महिला के हाथ से बने केले के चिप्स ने ऐसी धूम मचाई कि रेल के मुसाफिर की जुबान पर भी स्वाद चढ़ गया.यही चिप्स अब रेल सफर का साथी बन गया.  वही महिला अब शान से रेलवे प्लेटफॉर्म पर घंटों बिताती है. इस अलग स्वाद का नतीजा था कि रेलवे विभाग ने इस महिला को रेलवे स्टेशन पर दुकान देकर केले के चिप्स बेचने की सुविधा दे दी.यह दिलचस्प कहानी बुरहानपुर की है. हम आपको  शहर के इस किरदार और महिलाओं के समूह से मिलवाते हैं, जिन्होंने आजीविका मिशन के सहयोग से खुद को साबित कर दिया कि यदि मदद और हौसला मिले तो महिलाएं परिवार के लिए कुछ भी कर सकती हैं.</p>
<p>बुरहानपुर के लालबाग चिनचाला की रहने वाली पिंकी सुरकैया कहती है -" कुछ साल पहले तक हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. पति के छोटे मोटे कामकाज में मदद करती थी. साथ में उसके साथ की महिलाएं भी मजदूरी के लिए जाती थीं. अलग काम के लिए कोई पूंजी भी न थी. तीन साल पहले जिला पंचायत की एक बैठक में केले चिप्स बनाने की सलाह मिली. और उस सलाह ने ज़िन्दगी को संवार दिया. "<br>जिला पंचायत बुरहानपुर की आजीविका मिशन की परियोजना प्रबंधक कृष्णा रावत ने बताया कि जिले की जरूरतमंद महिलाओं को समूह बनवाने में मदद कर उन्हें रोजगार से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है. इसी प्रक्रिया में लालबाग क्षेत्र की खेत मजदूर महिलाओं से भी संपर्क किया. तीन साल पहले राधा बाई अध्यक्ष बनी और चाचा नेहरू महिला स्वसहायता समूह बनाया. कोरोना काल के बाद इसी समूह की कुछ महिलाओं ने केले के चिप्स का धंधा शुरू किया. और कुछ ने बकरी पालन ,भैंस पालन सहित केले के खेतों में काम शुरू किया. इस समूह में राधा बाई ,सरस्वती बाई ,रेखा बाई ,ज्योति बाई ,लक्ष्मी बाई ,उजाला बाई,संगीता बाई भी जुड़े हैं.  </p>
<p>समूह कि पिंकी आगे बताती है कि -" लगभग चार माह पहले रेलवे ने कैंप लगवाया. इस कैंप में हमने केले से बने चिप्स भी परोसे . इस केले के चिप्स का अच्छे से प्रदर्शन किया. फिर क्या था ,रेलवे के अधिकारियों ने चिप्स प्रमोशन के लिए प्लेटफॉर्म पर स्टॉल लगाने की विशेष अनुमति दे दी.अब लोकल लोगों के साथ रेल के यात्री भी चिप्स के पैकेट खरीद रहे हैं. देखते ही देखते कमाई बढ़ रही है."</p>
<p><img src="https://d2vbj8g7upsspg.cloudfront.net/fit-in/580x348/filters:format(webp)/ravivar-vichar/media/media_files/xB8xEMavgODQ795ytDLU.jpeg" alt="burhanpur banana chips stall"></p>
<p><span style="font-size: 8pt;"><em>फोटो क्रेडिट : समीर महाजन ,बुरहानपुर</em></span></p>
<p>यही नहीं अब इस मिशन में पिंकी के साथ उनके पति भगवान सुरकैया भी मदद कर रहें हैं. वह सुबह आठ बजे से शाम बजे तक रेलवे स्टेशन पर चिप्स बेचते हैं. पिंकी गर्व से बताती है -" उसके बनाए चिप्स ढाई सौ रुपए किलो बिकते हैं.कच्चे केले वे लोकल मंडी से लाते हैं.वह पांच सौ रुपए लगभग रोज कमा लेती है. शाम को रोज खुद हाथ से चिप्स बनाते हैं."</p>
<p>कलेक्टर भव्या मित्तल कहती हैं -" जिले में केले की भरपूर पैदावार है. यह मुख्य फसलों में है. समूह का लगातार हौसला बढ़ाया गया.  प्रयास सफल हुए,रेलवे स्टेशन पर केले के चिप्स बेचने का अवसर मिसाल बन गया. जिले में दूसरे समूहों को भी रोजगार के लिए जोड़ा जा रहा है." </p>]]>
</description><dc:creator xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/">विवेक वर्द्धन श्रीवास्तव </dc:creator><pubDate>Fri, 10 Mar 2023 17:22:40 +0530</pubDate><guid isPermaLink="true"><![CDATA[ https://ravivarvichar.in/kahaniyan/shg-wome-selling-banana-chips]]></guid><category><![CDATA[कहानियां]]></category><media:content height="960" medium="image" url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Rx5Q4lX7hmVMvfV3s9Jw.jpeg" width="1280"/><media:thumbnail url="https://img-cdn.publive.online/fit-in/1280x960/ravivar-vichar/media/media_files/Rx5Q4lX7hmVMvfV3s9Jw.jpeg"/></item></channel></rss>